जीवनसाथी- 2/67


जीवनसाथी 2 भाग -67

    स्टेज पर भुवन एक सुप्रसिद्ध गाने को गा रहा था और सामने बैठे राजा और रानी एक दूसरे की बाहों को थामे  उस गीत में पूरी तरह डूबे हुए थे..
  लेकिन उन दोनों के अलावा भी कोई और थी जो उस गीत में डूब कर यह भूल चुकी थी कि उसकी आंखों से आंसू बहते चले जा रहे हैं…
पारुल के ठीक बगल में खड़ी उसकी सहेली काशवी  ने पारुल को झिंझोड़  दिया…

” क्या हुआ तू रोने क्यों लगी..?”

पारुल ने तुरंत अपने आंसू पोंछे और ना में गर्दन हिला दी…

उस गीत के बोल श्रीराम के अभिशप्त जीवन का परिचय दे रहें थे  और वहां बैठे लोगों के दिल और आंखें उसे सुन कर बहते चलें जा रहें थे…
  इस गीत के बाद ही भुवन और पारुल की रामायण पर नाट्य प्रस्तुति थी..!
उस नाटक को प्रस्तुत करने के पहले ही भुवन ने इस गीत को  प्रस्तावना के तौर पर गाया था..!

इस गीत को सुनते हुए मंत्रमुग्ध हो चुकी बांसुरी ने अपने पास बैठे राजा की बाहें और कसकर पकड़ ली थी ! उसने अपनी गर्दन घुमा कर राजा के चेहरे पर टिका दी…

” साहब!”

” बोलो हुकुम !”

“कुछ नहीं !”

“ये तुम्हारा कुछ नहीं बहुत कुछ कह जाता है…
यह जानती हो तुम..?”

राजा की इस बात पर बांसुरी मुस्कुरा उठी…

” मैं ये कहना चाहती थी कि इस गीत को सुनते हुए जाने क्यों दिल में मरोड़ सी उठ रही है,  बस यह नहीं चाहती कि अब हमें कभी भी अलग होना पड़े..
अपने काम, अपने ट्रांसफर के कारण भी मैं अब आपसे अलग नहीं रहना चाहती…
  कोशिश कीजिए ना कि मैं आपके साथ ही जुड़कर काम करने लगूं.. !”

” तो हमारी हुकुम यह चाहते हैं कि वह चीफ मिनिस्टर  की पीए बन जाए..!”

बांसुरी ने हाँ  में गर्दन हिला दी…

” आप अपना पर्सनल असिस्टेंट भले ना बनाएं, लेकिन सचिवालय में किसी पोस्ट को दिलवा दीजिए जिससे  आप हमेशा मेरी आंखो के सामने रहे और मैं हमेशा आपकी आंखों के..!”

” वैसे पति और पत्नी को कभी एक ऑफिस में काम नहीं करना चाहिए..! इससे दिक्कतें आने लगती हैं..!”

” अलग-अलग शहर में रहकर तो और भी काम नहीं करना चाहिए उससे और भी ज्यादा दिक्कतें आती हैं समझे आप..?”

बांसुरी की बात सुनकर राजा को हंसी आ गई उसने अपनी बाहें फैलाकर बांसुरी को अपनी बाहों के घेरे में लेकर खुद से हटा कर बैठा लिया, और अपनी जेब से फोन निकालकर समर को फोन घुमाने लगा…

” समय अब तुम्हारी रानी साहिब दूसरे शहर से वापस यहां ट्रांसफर लेना चाहती है तो हो सके तो उन्हें सचिवालय में ही कहीं फिट करवा दो..!”

” राजा साहब मैं तो शुरु से ही यही कह रहा था लेकिन आप और रानी साहेब नियमों के विरुद्ध जाकर कोई भी काम नहीं करना चाहते थे हालांकि अब रानी साहेब को 1 साल से ज्यादा हो चुका है इसलिए वह वापस ट्रांसफर होकर सचिवालय आ सकती हैं मैं आज ही पेपर्स तैयार करवाता हूँ… !”

राजा ने मुस्कुराकर फोन काट दिया..

” हमने कहा है कोशिश करके देखता हूँ… अब खुश !”

बांसुरी नेहा में गर्दन हिलाई और धीरे से राजा की तरफ सरक गई…

” इतने पास मत आओ हुकुम!”

” क्यों क्या हुआ..?”

” कॉलेज का कार्यक्रम ऐसे बीच में छोड़कर तुम्हें उठाकर यहां से बाहर ले जाऊंगा तो अच्छा नहीं लगेगा ना.. कॉलेज के लड़के लड़कियां भी सोचेंगे कितना ठरकी राजा है,  हर बात अपनी खूबसूरत से बीवी से चिपका रहता है..!”

” सोचने दीजिए, इसमें कुछ गलत है क्या..?”

” गलत तो नहीं है लेकिन…
    चलो,  अगर तुम्हें दिक्कत नहीं है तो वापस महल चलते हैं.. !”

“महल क्यों जायेंगे भला… ?  यहां से निकल कर आप मुझे डिनर नहीं कर पाएंगे बाहर?”

” डिनर करने के लिए यहां से कौन उल्लू बाहर निकल रहा है मेरा तो कुछ और ही मूड हो रहा था..?”

” चुप कीजिए साहब आप आज तक देख तो लीजिए बच्चे बैठे हुए हैं..!”

” कॉलेज के बच्चे हैं.. समझदार हैं सब !”

उन लोगों की बातों के बीच ही विधायक सभरवाल जी उठकर राजा से मिलने चले आए उन्होंने राजा के सामने हाथ जोड़े और उसके बाद बांसुरी के सामने भी हाथ जोड़कर अपना परिचय दे दिया राजा ने भी बड़ी गर्मजोशी से उनसे हाथ मिलाया और उन्हें अपने पास की कुर्सी पर ही बैठा लिया..!

उसी वक्त कॉलेज का अर्दली ट्रे में चाय के कप लिए उन लोगों के सामने चला आया….

” राजा साहब, रानी सा चाय लीजिये…

बांसुरी ने चाय के कप की तरफ देखा और तभी एक बार फिर उसके कानों में वही आवाज गूंज पड़ी…

” हुकुम चाय ले लीजिए ठंडी हो गई है…!”

बांसुरी चौक कर अपने वर्तमान में वापस आ गई वह खिड़की के पास खड़ी ऊंची ऊंची पहाड़ियों को देखते हुए अपने पुराने दिनों में खो गए थे जब वह और राजा मायानगरी के यूथ फेस्ट का हिस्सा बने थे पीछे खड़ी वह लड़की जो काफी दिनों से उसकी सेवा में थी अपनी पूरी विनम्रता के साथ और उसे चाय पीने के लिए कह रही थी…
बांसुरी ने मुड़कर उसके सामने रखी जाएगी कब उठा लीं  और उस लड़की को बाहर जाने का इशारा कर दिया…

माधुरी की आंखों से दो बूंद आंसू टपक पड़े और वह एक बार फिर अपनी और राजा की पुरानी यादों में खोने के लिए तैयार हो गयी…

***-****-***-

      दोपहर ढलने लगी थी, सर्दियों के दिन थे.. हलकी ढलती हुई धुप बहुत लुभावनी लग रही थी…
अपने बगीचे में बैठी निरमा बाजू वाली कुर्सी पर मीठी को साथ लिए उसका होमवर्क करवा रही थी..
लेकिन होमवर्क करवाने के बावजूद उसका दिमाग कहीं और उलझा हुआ था…
रह रह कर वो किसी सोच में गुम सी हो जा रही थी…
प्रेम वैसे तो कभी इस समय पर घर नहीं पहुँचता था, लेकिन आज वो कुछ ज़रूरी कागज़ घर पर भूल गया था वही लेने चला आया था…

  कुछ नए लोगों की भरती थी, उन्ही का आज उसे इंटरव्यू लेना था, जिनके कागज़ वो लेने आया हुआ था.. उसने निरमा को ऐसे परेशान सा देखा तो अपने पेपर्स लिए बगीचे में आकर बैठ गया..

“क्या हुआ  कुछ परेशान से लग रही हो.. ?”

निरमा अपनी सोच में इस कदर गुम थी कि उसे गेट खोल कर अंदर जाता प्रेम दिखाई नहीं दिया था उसने प्रेम को देखकर ना में गर्दन हिला दिया और खुद उसे सवालिया नजरों से देखने लगी..

” आप कब आए और इस वक्त कैसे? कुछ जरूरी काम था?”

” हां सिक्योरिटी वाले लड़कों का इंटरव्यू लेना था,  उनके जरूरी कागजात घर पर भूल गया था मैं सुनने में आया था 1 घंटे बाद बुलाया है इंटरव्यू के लिए.. !”

” इंटरव्यू कहां है?  महल वाले आपके ऑफिस में या यहीं घर पर ?”

” महल वाले ऑफिस में ही  है..  मैं तो निकल रहा था लेकिन तुम्हें  चिंतित देखा तो बैठ गया.. ! सुनो अम्मा को कहकर चाय बनवा दो.. !”

” मैं ही बना देती हूं.. ! कहकर निरमा उठने लगी लेकिन प्रेम ने उसकी बांह पकड़कर उसे वापस बैठा दिया..

” तुम मेरे साथ बैठो कुछ देर,  चाय अम्मा या सुमित्रा को बोल दो.. !”

निरमा ने चाय के लिए आवाज लगा दी….

” अब बताओ कि क्या सोच रही हो..  नहीं अभी से तुम्हें मीठी की शादी की चिंता तो नहीं होने लगे ना.. ?”

प्यार भरे उलाहने वाली नजर से निरमा ने  प्रेम को देखा और ना में गर्दन हिला दी…

“चिंतित नहीं हूँ बस सोच रही हूँ… अभी कुछ दिन पहले ही रतन जी से बात हुई थी… ! अब वो अपने जिले के जिलाधीश के साथ ही स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त प्रभार में भी हैं, उसी सिलसिले में आजकल उनसे कभी कभार बातचीत हो जाती है और पिंकी की खबर भी मिल जाती है… !”

निरमा बाँसुरी और पिंकी  अपनी-अपनी शादियों से पहले मुंबई में ही रहा करते थे | हालाँकि  पिंकी और बांसुरी माला के साथ एक फ्लैट शेयर करती थी, निरमा अपने मामा मामी के घर पर रहती थी बावजूद बांसुरी के कारण ही पिंकी और निरमा की भी दोस्ती थी |और  निरमा अक्सर अपनी छुट्टी वाले दिन बाँसुरी के फ्लैट पर ही इन लोगों के साथ अपना पूरा दिन बिता दिया करती थी..
  इसलिए उसी दोस्ती के कारण आज भी निरमा पिंकी को उसके नाम से ही बुलाया करती थी…

   और प्रेम को निरमा की यह खूबी सबसे ज्यादा लुभाती थी कि वो दिल से अपने से जुड़े हर रिश्ते को निभाती थी..
   भले ही अम्मा और सुमित्रा पर वो ढंग से काम करने के लिए बरसती रहती थी, बावजूद अम्मा की बहु की डिलीवरी हो या सुमित्रा के गाँव के घर की छत गिरने का मसला, हर जगह वो खुद आगे आकर रूपए पैसे और हर तरीके से उनकी मदद कर दिया करती थी, और इसलिए प्रेम के घर के नौकर चाकर मालिक से कहीं ज्यादा अपनी मालकिन से डरते थे, लेकिन वो मालकिन से कितना भी डर ले निरमा का सम्मान भी दिल से करते थे…

अम्मा उन दोनों की बातों के बीच चाय लें आयीं…
प्रेम के हाथ में चाय पकड़ा कर वो खड़ी थी कि मीठी को साथ लेकर उन्हें अंदर जाने का निरमा ने इशारा कर दिया…

अम्मा  निरमा की बात को मानकर मीठी को साथ लेकर अंदर चली गई प्रेम को समझ में आ गया कि निरमा कोई गंभीर बात कहने वाली है इसलिए वह बड़े ध्यान से निर्माण की तरफ देखने लगा…

” रतन जी से ऐसी क्या बात हुई जो तुम इतनी परेशान लग रही हो..?”

” शायद आप को भी मालूम होगा कि पिंकी भी मेंस क्लियर कर चुकी है… और अब उसके इंटरव्यू का भी रिजल्ट आने वाला है..!”

प्रेम के चेहरे पर एक खुशी की लहर आकर थम गई… “हाँ !! इस बार उम्मीद है कि बेबी साहब क्लियर कर भी लेंगी.. !”

” मुझे उम्मीद नहीं, मुझे पता है कि पिंकी क्लियर करने वाली है..! और बस इसलिए चिंतित हूं..!”

” मतलब तुम कहना क्या चाहती हो..?”

” पिंकी को मैं भी शुरुआत से जानती हूं मैं मानती हूं कि वह बहुत बुद्धिमान है होशियार है पढ़ने में भी अच्छी थी और वह अपने बलबूते पर भी आईएएस का एग्जाम क्लियर कर सकती है लेकिन..

” लेकिन क्या निरमा !”

” लेकिन इस बार उसकी सेलेक्शन के पीछे मुझे उसकी मेहनत से ज्यादा कुछ और नजर आ रहा है..!”

” तुम कहना क्या चाहती हो प्लीज साफ-साफ कहो..!”

” मैं बस यही कहना चाहती हूं,  कि जो भी मुझे लग रहा है वह सच ना हो..!  रतन जी एक बहुत ईमानदार और कर्मठ अधिकारी हैं उनका बार-बार मायानगरी मेडिकल स्कैम से जुड़ी बातों के लिए मुझे फोन करके मुझसे जानकारी लेना आप मुझे सही नहीं लगा..!”

” वह अपनी क्यूरिऑसिटी के लिए तुमसे  उस बारे में बात कर रहे होंगे..?”

” काश ऐसा ही हो..!  लेकिन क्यूरिऑसिटी के लिए कोई उस केस से जुड़े  लोगों के नंबर नहीं लेता… कोई बात तो है प्रेम जी !  मैं किसी पर भी इल्जाम नहीं लगा रही हूं.. लेकिन पता नहीं क्यों मेरा सिक्स्थ सेंस सही गवाही नहीं दे रहा..! हो सकता है यह सिर्फ मेरा वहम हो कि रतन इस तरीके से पिंकी का सिलेक्शन करवाना चाहते हो लेकिन अगर यह बात सच हुई तो आने वाले चुनाव में राजा भैया के लिए बहुत कठिनाई हो जाएगी..!”

प्रेम को राजा से जुड़े हर किसी से उतनी ही मोहब्बत थी लेकिन जहां नाम राजा का आ जाता था वहां वह बाकी सब को एक तरफ कर देता था वह किसी कीमत पर राजा के नाम  पर बट्टा लगने नहीं दे सकता था..

हालांकि अभी निरमा जो भी बातें कह रही थी इनके पीछे कोई भी तथ्य निरमा के पास भी नहीं था!

निरमा खुद जानती थी कि उसके पास उसकी बातों का कोई सबूत नहीं था यह सिर्फ उसकी गट इंस्टिंक्ट थी, और इसीलिए यह बात बाहर कहीं भी कहने का कोई फायदा नहीं था पर प्रेम और निरमा का रिश्ता ऐसा था जैसे दूध और चीनी..  दोनों इस कदर एक दूसरे में खुले हुए थे कि अगर निरमा के मन में कोई बात चल रही है तो वह प्रेम के दिमाग में पहुंचे बिना खत्म नहीं हो सकते थे…
निरमा भी इस बात को अच्छे से जानती थी कि वह प्रेम से कोई बात नहीं छुपा सकती और इसीलिए उसने अपने मन की बात प्रेम से कह दी प्रेम ने भी बिना निरमा को रुके रुके उसकी सारी बात सुन ली और उसे यह भी देना था दिया कि वह अपने स्तर  पर सारी सच्चाई की तह तक जाने की कोशिश करेगा..

प्रेम से बात कर लेने के बाद निर्माण के मन की उलझन जरा कम हो गई थी…

” मुझसे बातों में लगे रहेंगे तो आप इंटरव्यू लेने के लिए लेट हो जाएंगे चाहिए अपना काम निपटा लीजिए..

” हाँ बस निकलता हूँ !आज महल की औरतें मंदिर भी गई हुई है ! तुम्हें बांसुरी ने बुलाया नहीं क्या..?”

आज के पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था कि बांसुरी अपने कुल देवी के मंदिर जा रहे हो और उसने निरमा से पूछा ना हो भले ही बांसुरी यह बात जानती थी कि निरमा यूनिवर्सिटी के कार्यभार के कारण बहुत बार उसके साथ नहीं जा पाते बावजूद मंदिर जाने के पहले नियम से बांसुरी एक बार निरमा को फोन जरूर करते थे और आज बांसुरी का फोन नहीं आया था..

” नहीं आज तो बांसुरी का कोई फोन नहीं आया..! हो सकता है हड़बड़ी में भूल गई हो..!”

बांसुरी मंदिर गई है यह प्रेम के मुंह से सुनकर निरमा को भी झटका लगा था और बांसुरी नहीं जाने से पहले निर्माण से नहीं पूछा यह सुनकर प्रेम को और तगड़ा झटका लगा..

लेकिन दोनों ने ही अपने चेहरे के भावों से यह स्पष्ट नहीं होने दिया…

” कोई बात नहीं एक-दो दिन में छुट्टी होगी तो तुम ही मिलने चले जाना…..
    मैं खुद हुकुम को बधाई देना भूल गया दोबारा पिता बनने की बधाई देना है उन्हें.. तो सोच रहा हूं 2 दिन बाद  तुम्हारी भी यूनिवर्सिटी की छुट्टी रहेगी तो साथ में ही महल चलेंगे और उन दोनों को दोबारा माता-पिता बनने की बधाई दे देंगे..!”

” बांसुरी मां बनने वाली हैं… ?”

निरमा को यह बात भी प्रेम से पता चली थी… उसके चेहरे का रंग उतर सा गया, और  निरमा के चेहरे के बदलते रंग प्रेम को भी कुछ गहरे रंगों से रंग गए….

****

  रूपा और रेखा बाहर से अंदर मंदिर में प्रवेश कर रही थी और उनके अंदर जाते में बाँसुरी दर्शन कर बाहर निकल भी आई…
    लेकिन मंदिर परंपरा के अनुसार मंदिर में पूजा करवाने वाले पुरोहित सभी महिलाओं को एक साथ वहां की पूजा करवाया करते थे मंसूरी को बाहर जाते देखकर रूपा ने आवाज लगा दी..

” बाहर कहां जा रही हो बंसरी वापस आ जाओ अभी तो पूजा बाकी है..?”

” हमने तो पूजा कर ली भाभी साहब !!आप लोग कर लीजिए !”

रेखा ने पलटकर बांसुरी को देखा और हाथ हिलाकर उसे अंदर आने का इशारा कर दिया…

बांसुरी ना में गर्दन हिला रही थी कि जया उसके पास पहुंच गई और बड़े प्यार से उसकी हथेली को थाम कर उसे अंदर ले आई…

पुरोहित जी ने उन चारों को अपने सामने बैठा कर विधिवत पूजा करवानी शुरू कर दी….
पूजा में  तकरीबन आधा घंटा लग गया… बांसुरी को लगातार बैठे रहने में परेशानी होने लगी थी रूपा उसकी इस तकलीफ को समझ रही थी…!

” बस कुछ दिन की बात है बांसुरी तेरा हम सब एक साथ उठेंगे..!”

हमें सहमति देखकर बांसुरी भी पूजा में बैठे रहे पूजा पाठ में पढ़ने के बाद उन चारों को ही पुरोहित जी ने मंदिर में प्रदक्षिणा करवाई और सुहाग के सामान के साथ माता की चुनरी चारों के ही हाथ में रख दी…

उन चारों ने  माता की मूर्ति के सामने प्रणाम करने के बाद पुरोहित जी को प्रणाम किया और जब तक मैं रूपा और रेखा उन्हें दक्षिणा आदि देती बांसुरी बाहर निकल गई…

  रेखा ने उसे बाहर जाते देखा आज वापस रूपा की तरफ देख कर मुस्कुराने लगी…

“बाँसुरी के स्वभाव में बदलाव तो हुआ है… पहले काम बोलने वाली, धैर्य रखने वाली बाँसुरी को आजकल किसी बात में धैर्य नहीं रह गया है.. भूख लगे तो किसी का इंतज़ार किये बिना हि खा लेना, सब खाने बैठे हो और इसका मन ना हो तो उठ कर चलें जाना… नींद आ रही हो तो कमरा बंद कर सो जाना, ये तक देखें बिना कि शौर्य कहाँ है… !
  क्या ये सारे बदलाव उस एक्सीडेंट के कारण ही हैं भाभी साहब.. ?”

“हाँ और नहीं तो क्या रेखा.. ? ऐसे परिवर्तन आ जाते है स्वभाव में, डॉक्टर ने साफ साफ बताया था.. और फिर पिया ने भी तो कहा था… याद है ?”

रेखा मुस्कुरा उठी,  उसे मालूम था कि रूपा पिया को  बेहद पसंद किया करती थी.. महल में कोई बीमार पड़े वो तुरंत पिया को याद कर लिया करती थी, पिया भी उनकी बात का विशेष मान रखा करती थी !
   महल में कोई आयोजन हो रूपा का पिया को बुलाना ज़रूरी होता था… यहीं कुछ लोग हमेशा इकट्ठे हुआ करते थे…
   महल से वो चारों और पिया और निरमा.. !
निरमा का नाम याद आते ही रेखा को झटका सा लगा.. आज उसने निरमा से मंदिर के लिए नहीं पूछा था..

“भाभी साहब आपने निरमा से मंदिर के लिए पूछ लिया था ना.. वैसे तो वो अपनी यूनिवर्सिटी में व्यस्त होगी.. ? फिर भी.. !”

रूपा ने ना में गर्दन हिला दी…

” हमें निरमा से पूछने की जरूरत ही कब पड़ती है वह तो बाँसुरी  पहले पूछ चुकी होगी..! इसलिए तो हमने  निरमा की जगह पिया को फोन कर लिया था.. ! भले ही हम सबको लाख पता हो कि निरमा का यूनिवर्सिटी का काम होता है बावजूद बांसुरी बिना निरमा से पूछे नहीं रह सकती ! आप चाहे तो एक बार कंफर्म कर लीजिए!”

रेखा ने हां में गर्दन हिला दी और रूपा के साथ बाहर निकल आई…
जया ने आगे बढ़ती बांसुरी के कंधे पर हाथ रख दिया..

  बांसुरी ने मुस्कुराकर जया की तरफ देखा और जया ने भी मुस्कुराते हुए उससे पूछ लिया…-” निरमा को मंदिर जाने के लिए पूछा था ना?”

बांसुरी के चेहरे पर इस सवाल को सुनकर कोई भाव नहीं आया और यह देखकर वह तीनों ही आश्चर्यचकित हो गई..

” क्या हुआ ? “

बांसुरी ने जया की बात सुनकर ना में गर्दन हिला दी…

” निरमा का तो कॉलेज होता है ना, मुझे लगा वह कहां हम लोगों के साथ आ पाएगी..?”

“तो तुमने नहीं पूछा क्या.. ?”

रूपा के सवाल पर बांसुरी ने ना में गर्दन हिला दी…
और पलट कर दूसरी तरफ निकल गयी…

  इन सब से दूर अनिर्वान हाथ बांध कर एक दीवार से टेक लगाए खड़ा था.. उसके सुरक्षा कर्मियों के अलावा महल के गार्ड्स भी चारों तरफ फैले हुए थे…

बाँसुरी पलट कर आगे बढ़ते हुए एक झाड़ी के पास किसी जंगली फूल की तरफ बढ़ने लगी… अनिर्वान की नज़र उसी पर थी, वो उसे टोकना चाहता था, लेकिन इतने लोगों के बीच कैसे टोके ये सोचते हुए वो धीरे से उसकी तरफ बढ़ने लगा…

  पहाड़ी के किनारे कहीं पर तो दीवार उठा  दी गई थी और कहीं-कहीं पर फैंस लगी हुई थी लेकिन कुछ हिस्से ऐसे थे जो खुले हुए थे और नीचे की तरफ जाने के लिए उनमें रास्ता बना हुआ था हालांकि यह काफी ओ बेखबर रास्ता था और इस पर चलना खतरनाक था बांसुरी उसी दिशा में किसी फूल के लिए आगे बढ़ रही थी…
एक तरफ को खड़ी रूपा रेखा और जया अपनी बातों में लगी थी अनिर्बान बांसुरी को ठोक देना चाहता था लेकिन रूपा और बाकी औरतों के कारण वह उसे खुलकर कुछ कह नहीं सकता था अनिर्बान का पूरा ध्यान बांसुरी के कदमों पर था..
मंदिर से बाहर आने के बाद बांसुरी ने अपनी सैंडल पहन ली थी जिनमें लगभग 3 इंच की हील्स मौजूद थी और उसकी हील्स पर नजरें टिकाए अनिर्वान का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा था !
    वह कभी बांसुरी की सैंडल तो कभी रूपा के चेहरे की तरफ देख रहा था..
वह चाहता था किसी तरह रूपा आगे बढ़ कर उसे रोक ले…

  डगमगाती हुई पगडंडी में बांसुरी उतरने को थी कि तभी अनिर्वान ने रूपा को आवाज लगा दी…

” रानी साहेब अगर आपकी आज्ञा हो तो आप लोगों के लिए कुछ चाय पानी मंगवा दूं..?”

   हालाँकि  राज महल की महिलाओं की बातचीत के बीच किसी और का बोलना प्रोटोकॉल का उल्लंघन था लेकिन अनिर्वान  ने कब किस प्रोटोकॉल का पालन किया था आज भी उसके लिए सारी दुनिया ही उसके जूते की ठोकर पर थी,  और जहां बात बांसुरी के स्वास्थ्य और उसकी सुरक्षा से जुड़ी हो वहां पर तो उसके दिमाग में एक ही बात कौंधती थी “भाड़ में जाए दुनिया !!”

उसके इस तरह से आवाज देते ही रूपा रेखा और जया तीनों ही चौक कर उसकी तरफ देखने लगे…
और उसी वक्त रूपा की नजर बांसुरी पर पड़ गई और उसने जोर से बांसुरी को आवाज लगा दी….

” बांसुरी वहां कहां उतर रही हो तुरंत वापस आओ..
तुम जानती हो ना इस वक्त तुम्हें तुम्हारी सेहत का सबसे ज्यादा ध्यान रखना चाहिए ! एक तो तुम मेरे मना करने के बावजूद हिल्स पहन कर आ गई, उस पर इन उबड़ खाबड़ पगडंडियों में उतरने जा रही हो…
  कहीं तुम्हें जोर से झटका लग गया या फिसल कर गिर गई तो पेट में पल रहे बच्चे का क्या होगा..?”

रूपा हड़बड़ा कर यह सब बोलते हुए बांसुरी की तरफ आगे बढ़ गई थी अनिर्बान भी उसी तरह बढ़ चुका था और जैसे ही रूपा कि कहीं आखरी बात अनिर्बान के कान में पड़ी क्या उसने बांसुरी की तरफ देखा और बांसुरी पगडंडी में उतरते हुए रुक कर वापस मुड़ गयी…

बांसुरी रूपा के पास चली गई और रूपा ने बिल्कुल बड़ी बहन की तरह उसे वापस एक बार डांट लगा दी रेखा और जया भी उसकी खैर कुशल पूछने लगे….
वह चारों आगे बढ़ रही थी कि अनिर्बान ने धीरे से बांसुरी के पास से गुजरते हुए अपने मन की बात उससे कह दी…

” अपना ख्याल रखा कीजिए..!”

बांसुरी ने चौक पर उसकी तरफ देखा और बाकी औरतों के साथ गाड़ी की तरफ बढ़ गई..!

मुस्कुराकर अनिर्वान भी उन लोगों के पीछे उनकी गाड़ी की तरफ बढ़ गया….

क्रमशः

aparna….

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