जीवनसाथी- 2/63


जीवनसाथी -2 भाग -63

बहुत दिनों बाद ऐसा हुआ था कि समर और पिया एक दूसरे के करीब थे….
   दोनों एक दूजे की आँखों में खोये थे… पिया समर की आँखों में देखते हुए उसकी कहीं बात की सच्चाई तलाश रहीं थी, लेकिन उसका दिमाग लाख समर को झूठा ठहराना चाहे समर की निष्पाप आंखें अपनी सच्चाई खुद बयां कर रहीं थी…
      दोनों एक दूजे को देखते खोये से थे…
धीरे धीरे समर कि उँगलियाँ पिया के चेहरे पर रेंग रहीं थी और पिया की आंखें बंद होने को थी कि दरवाज़े पर किसी ने ज़ोर से दस्तक देनी शुरू कर दी….

” समर भैया जल्दी से दरवाज़ा खोलिये… !”

तुलसी कि आवाज़ सुनते ही पिया झटके से बिस्तर से उठी और नाइटी पर अपना ओवर कोट डाल कर दरवाज़े पर पहुँच गयी…
उसके पीछे ही समर भी अपनी टीशर्ट डाल कर पहुँच गया…

“भाभी जल्दी नीचे चलिए… !”

“क्या हुआ तुलसी.. ?”

उससे पूछते हुए ही समर और पिया नीचे की तरफ बढ़ गए…

“वो छोटे बाबा को अचानक ख़ूब उल्टियाँ हो रहीं है…

ये सुन कर पिया भागती हुई सी नीचे पहुंची… गेस्ट रूम के बाथरूम के बाहर शोवन निढाल सा पड़ा था…

उसे देखते ही पिया ने उसे गोद में उठा लिया….

“क्या खाया था इसने… ?”

“आप ही तो खिला कर गयीं थी… !”

तुलसी के पीछे खड़ी लाली ने फट से अपना मुँह खोल दिया… और बड़ी रुखाई से बोल गयी..

लेकिन पिया को याद आ गया कि वो सैंडविच बनाने जा रहीं थी तभी तुलसी ने उसके हाथ से ब्रेड छीन ली थी… और वो उसे ठीक से बनाने कि नसीहत दे कर बाहर गार्डन में निकल गयी थी…
  उसे सब कुछ याद आ गया था कि कैसे इतनी सर्द रात में भी शोवन उसके पीछे गार्डन में चला आया था…

वो क्रोटन के गमलों के पास खड़ी उदास आँखों से सामने बगीचे में लगे झरने के पास रखी लम्बी चौड़ी सी बुद्ध की मूर्ति को देखती खोयी थी कि शोवन उसके पास आ कर उसके हाथ पर धीरे से अपनी ऊँगली से छूने लगा था, वो चौंक उठी थी.. उसने नीचे देखा तो वो मासूम सा बच्चा आँखों में आँसू लिए खड़ा था…

“क्या हुआ शोवन.. ?”

और अपनी आँसू भरी आँखों से उसने ना में सर हिला दिया था…

“बोलों ना… क्या मुझसे कुछ कहना चाहते हो… !”

पिया ने उसी के ब्रिटिश एक्ससेंट में उससे कहा था जिससे लड़का अपने मन की पीड़ा उससे कह सके और उस वक्त उस लड़के ने जो कहा था वो सुन कर पल भर को पिया भौचक्की रह गयी थी…

” मुझे आपकी तेज़ आवाज़ से डर लगता है !”

पिया पल भर को स्तब्ध रह गयी थी… बात सही भी तो थी… वो भले ही शोवन के भले के लिए उसके अच्छे के लिए नौकरो को इतनी ज़ोर से फटकार देती थी, लेकिन एक छोटे से अबोध को इस बात की क्या समझ..?
वो अभी कहाँ समझ पा रहा था कि पिया उसके पक्ष में बोल रहीं है..!
उसे तो बस उस तेज़ आवाज़ से डर लग रहा था…

अपने मन कि बात कह कर वो उतनी ही ख़ामोशी से अंदर चला गया था और जाने क्यों पिया उस एकांत में फूट फूट के रो पड़ी थी…

अपना सारा अवसाद, सारा कष्ट, सारी पीड़ा वो अपने आंसूओं के साथ बहा देना चाहती थी…
समर कि बेवफाई,  शादी के महीने भर में शोवन के रूप में मिली प्यार कि सौगात और वो सारे दुःख जो उसे भीतर ही भीतर तोड़े दे रहें थे…

यहीं तो उसका स्वभाव था… जो बात उसे खटके या पसंद ना आये वहाँ वो कुछ भी कहना ही छोड़ देती थी…
हर किसी से अलग हो कर अपने ही खोल में दुबक जाती थी !

उसे पता था कि ऐसा अबोला हमेशा रिश्तों के लिए दीमक सा होता है जो अंदर ही अंदर रिश्तों को खोखला कर निर्जीव बना जाता है पर सब जान कर भी वो ऐसी ही शांत हो जाया करती थी.. !

अभी उसकी जगह कोई और औरत होती तो लड़ झगड़ कर अपने पति का सर फोड़ चुकी होती!

… और गरज तरज कर बरस चुके दुःख के बादलों के बाद प्यार कि मीठी धूप खिला चुकी होती,  लेकिन उसके साथ ऐसा ना था… !

   वो अपने ही किसी खोल में लिपट कर समर से अचानक बहुत दूर हो गयी थी… बहुत बहुत दूर.. !!

  इतनी दूर कि अगर समर बाथरूम से सिर्फ टॉवल में बाहर निकल आये तो उसे कपड़े बदल लेने कि प्राइवेसी देने वो कमरे से ही बाहर चली जाती थी…
   और समर उदास आँखों से उसे जाते हुए देखता रह जाता था !

   शोवन को गोद में लिए हुए उसने उसे धीमे से पलंग पर लेटा दिया….
उसके माथे को छू कर देखने पर उसे महसूस हुआ कि शोवन का माथा बुखार से तप रहा है… और इतनी देर में उसे याद आ चुका था कि सैंडविच तो तुलसी ने बनाया था.. वो तो गार्डन में सिसकती रह गयी थी, उसके पीछे से इन दोनों ने पता नहीं शोवन को  क्या खिलाया… ?

“तुलसी, तुम्हारे हाथ में ब्रेड देकर मै निकल गयी थी, सच बताओ इसे क्या दिया था.. !”

“भाभी जैसा आपने बोला था सैंडविच दिया था… लेकिन चीज़ ख़त्म हो गयी थी, इसलिए मेयोनीज़ लगा दिया था… !”

धीमे से हाँ में गर्दन हिला कर पिया ने शोवन कि तरफ देखा कि शोवन वापस उठ बैठा, और धीरे से उठ कर अकेले ही बाथरूम कि तरफ बढ़ गया…

बाथरूम में पहुँचते ही उसे वापस उलटी हो गयी… पेट में जानलेवा मरोड़ के साथ दो तीन बार उलट पलट करने के बाद उसने खुद ही पानी लेकर कुल्ला किया और फ्लश करने के बाद बाथरूम को धोने के लिए टेप खोलने लगा… !
पिया से ये सब देखा नहीं गया, वो जब तक शोवन की तरफ बढती, समर ने जाकर शोवन का हाथ मुहँ धुलवाया और उसे बाहर ले आया…
 
“इसे तुरंत अस्पताल लें जाना होगा.. !”

पिया की बात सुनते ही समर ने हाँ में सर हिलाया और शोवन को गोद में लिए बाहर निकल गया…

पिया नाइटी में थी,  उसने एक बार अपनी हालत देखी और -” मै कपड़े बदल कर आती हूँ !” कह कर ऊपर सीढ़ियां चढ़ गयी…

  समर शोवन को लेकर गेस्ट रूम से बाहर निकल गया…
बाहर कीज़ ट्रे में उसकी गाड़ी की चाबियाँ नहीं थी, और इसलिए शोवन को बैठा कर वो चाबी लेने तेज़ी से ऊपर चढ़ गया…
  रात का वक्त था, पिया को लगा कोई ऊपर नहीं आएगा इसलिए हड़बड़ी में उसने दरवाज़ा ठीक से लॉक नहीं किया और उसके चेंज करते में समर दरवाज़ा खोल कर अंदर चला आया..

  समर को यूँ अंदर आया देख पिया झट से परदे की ओट में हो गयी…
   समर ने उसे देखा, एक गहरी सी साँस भरी और चाबी उठा कर बाहर निकल गया.. -” आई एम सॉरी ! मुझे नॉक कर के आना चाहिए था !”

उसका सॉरी सुन कर भी पिया के चेहरे के भाव नहीं बदले, और वो भी कपड़े बदल कर समर के पीछे सीढ़ियां उतर गयी…

वो लोग शोवन को ले अस्पताल निकल गए… अस्पताल पहुँचने तक में पिया ने बच्चो के डॉक्टर को फ़ोन कर लिया था इसलिए उन लोगों के पहुँचते तक में बच्चो का डॉक्टर भी अस्पताल पहुँच गया था…
शोवन को तुरंत भरती कर के उसका इलाज शुरू कर दिया गया…..
    पिया और समर से डॉक्टर ने वही सारी पूछताछ की जो पिया ने तुलसी और लाली से की थी..
डॉक्टर ने बताया की शोवन को फ़ूड पोइज़निंग ही हुई है.. उसने कोई ऐसी चीज़ खा ली थी जो उसके सिस्टम के लिए सही नहीं था…

“आप तो खुद डॉक्टर हैं, आप के रहते ऐसा हुआ कैसे ? बच्चे के हिसाब से उसे खाना देना चाहिए था ना !”

पिया चुपचाप सर झुका कर डॉक्टर की बात सुनती रहीं.. समर जानता था कि पिया की कोई गलती नहीं है बावजूद वो चुप रह कर सब सुनती रहीं…

डॉक्टर के जाने के बाद पिया शोवन के पास चली आयी… शोवन को इमरजेंसी से कमरे में शिफ्ट कर दिया गया था.. !
उसके लिए बेबी बेड दिया गया था और साथ में एक सिंगल अटेंडर बेड दिया गया था.. !
जिसमे कोई एक ही इंसान आराम से सो सकता था..

समर ने कमरे की व्यवस्था देख कर पिया की तरफ देखा…

“मै तुम्हें घर छोड़ कर आ जाता हूँ…मै यहीं रुकूंगा शोवन के पास.. !”

“मै भी रुकूंगी !”

पिया ने इतनी मजबूती से अपनी बात रखी कि समर उसकी बात नहीं काट पाया… !
आधी रात बीत चुकी थी… घर पर से शोवन को अस्पताल लाते समय समर की  माँ भी बाहर आ गयी थीं इसलिए उन्हें भी मालूम चल चुका था.. उनसे बात कर के उन्हें यहाँ सब ठीक है बताने के बाद समर वापस कमरे में चला आया… !

   वो जब कमरे में आया, पिया शोवन के पास बैठी उसके सर पर हाथ फेर रहीं थी… शोवन के बालों में उँगलियाँ फिराते हुए वो कुछ गुनगुना रहीं थी…
समर भी धीमे कदमो से अंदर चला आया.. उसने झांक कर देखा शोवन गहरी नींद सो चुका था… इंजेक्शन लगने के बाद उसे काफ़ी आराम हो चुका था… !

  समर मुस्कुरा कर अटेंडर बेड पर एक तरफ को सरक कर लेट गया…

   कुछ देर बाद पिया भी उस बेड पर आकर लेट गयी…
   उसकी पीठ समर की तरफ थी और मुहँ शोवन की तरफ… कुछ देर बाद समर ने पिया के ऊपर अपना हाथ लाद दिया….!
पिया ने धीमे से पीछे पलट कर देखा, समर की ऑंख बंद थी.. हल्के से मुस्कुरा कर पिया ने सामने मुहँ घुमा लिया…

  समर ने धीरे से ऑंख खोली और मुस्कुरा कर उसने पिया को थोड़ा सा अपनी तरफ खींच लिया…

*****

हाय चका चक

चका चक है तू

हाय हाय चका चक

चका चक हूँ मैं

तपती दोपहरी सी, लड़की गिलहरी सी

मेरी जैसी चाहिए तेरे जैसे को..

फूलों वाली डाली भी हूँ

चुम्मा भी हूँ, गाली भी हूँ

बोलो कैसी चाहिए तेरे जैसे को…

नेहा रसोई में नाश्ता बनाते हुए गुनगुना रहीं थी, और वहीँ टेबल पर बैठ कर किसी गुणा भाग में लगे वासुकी का दिमाग काम में नहीं लग पा रहा था… वो जल्दी जल्दी अपना काम निपटाने में लगा था, लेकिन नेहा लगातार तेज़ आवाज़ में अपना गाना गाए जा रहीं थी…

“तुम दो मिनट चुप रहने का क्या लोगी ?”

वासुकी के सवाल पर नेहा मुस्कुरा कर उसकी तरफ घूम गयी…

“बस एक चुम्मा !”

वासुकी ने नेहा को घूर कर देखा और वापस लैपटॉप पर देखते हुए अपना काम शुरू कर दिया…

“हद बेशरम हो.. !”

वासुकी के इतना कहते ही नेहा आकर उसके कंधे से लिपट कर झूल गयी..

“ना.. बेहद बेशरम हूँ, और वैसे भी आप मेरे हस्बैंड है… आपसे कैसी शरम मिस्टर हस्बैंड ? अच्छा सुनिए मिस्टर हस्बैंड, आज मतलब अभी हमें निकलना है… तो आप जल्दी से रेडी हो जाइये.. !”

“कहाँ जाना है ?”

“भूल गए ना.. ? मुझे कल ही से पता था आप भूल जायेंगे.. !”

“अरे सही सही बताओ, कहाँ जाना है… पहेलियाँ ना बुझाओ.. !”

“मेरी एक मन्नत थी.. ! यहाँ जो देवी मंदिर है ना, वहाँ मैंने मन्नत की थी, कि जिस दिन मेरी शादी आपसे हो जाएंगी वहाँ मै सिंदूरी चुनरी और सारा सुहाग का सामान चढ़ाउंगी…

“तो… ?”

“अरे तो का क्या मतलब ! अब देवी माँ ने  मेरी ख्वाहिश पूरी कर दी और आपसे शादी करवा दी  अब मेरी पारी है….!
देवी माँ को एक थैंक यू बोलना तो बनता है ना मिस्टर हस्बैंड .. !”

“क्या बेवकूफी है यार ?”

“मिस्टर हस्बैंड.. प्यार अपनी जगह है लेकिन अगर आप मेरी आस्था पर सवाल उठाएंगे तो ये भूखी शेरनी आप पर टूट पड़ेगी… !”

वासुकी ने भौंह चढ़ा कर नेहा की तरफ देखा और ना में गर्दन हिलाकर उसने धीमे से एक फुलझड़ी छोड़ दी…

” कहाँ से लाती हो ऐसे बकवास डायलॉग ?”

” बस टेलेंट है हमारा…!
अच्छा सुनिए जल्दी से तैयार हो जाइये ना… !”

वो उसके ठीक पीछे खड़े होकर अपनी उँगलियों से उसके कंधे पर दिल बनाने लगी और वासुकी अपने दिल में उठती गुदगुदी को छिपाते हुए तुनक कर जवाब दे गया…

“मुझे कहीं नहीं जाना.. !”

चेहरा उतार कर नेहा ने वासुकी की तरफ देखा… और पुरे राग में वापस गाना शुरू कर दिया….

वो हैं ज़रा खफा ख़फा
तो नैन यूँ चुराए हैं
के हो
ना बोल दूँ तो क्या करूँ
वो हँस के यूँ बुलाए हैं
के हो…

हँस रही है चांदनी
मचल के रो ना दूँ कहीं
ऐसे कोई रूठता नहीं…
ये तेरा ख़याल है,
करीब आ मेरे हसीं,
मुझको तुझसे कुछ गिला नहीं
बात यूँ बनाए हैं
के हो..

नेहा एक बार फिर ज़ोर से गाने लगी और लैपटॉप पर नज़र गड़ाए वासुकी के होंठो पर हंसी आते आते उसने रोक ली…

वासुकी -“स्टॉप इट !! सच बताओ क्या लोगी चुप होने का.. ?”

नेहा -“मंदिर चलो मेरे साथ, वो भी अभी के अभी !”

वासुकी – “ज़िद्दी हो तुम !”

नेहा -“जानती हूँ… आपके जैसे अड़ियल के साथ निभाने के लिए मेरे जैसा ज़िद्दी होना पड़ता है.. ! मै तो बस कभी कभी ये सोचती हूँ कि हम दोनों का बच्चा कैसा होगा.. क्या ज़बरदस्त कॉम्बिनेशन पैदा होगा ना… !
अच्छा  ये बताइये कि वो दिखने में किस पर जायेगा, मुझ पर या आप पर… ?
वैसे सुंदर तो आप भी बहुत हो, लेकिन अगर लड़की हुई और वो आप पर चली गयी तो ज़रा दिक़्क़त… “

नेहा खुद में मगन ख़याली पुलाव पकाये जा रहीं थी कि वासुकी लैपटॉप बंद कर के उठ गया और नेहा की कलाई पकड़ कर तेज़ी से बाहर निकल गया…
हँसते खिलखिलाते नेहा भी उसके कदम से कदम मिलाती उसके साथ चलने लगी..

वो दोनों गाड़ी तक पहुंचे ही थे की दो बड़ी काली गाड़ियां वासुकी के मेंशन में आकर रुकी और गाड़ी से उतरते लोगों को देख कर वासुकी के माथे पर बल पड़ गए…
उसने नेहा की तरफ देखा और नेहा ने नाराज़गी से मुहँ बना कर उसके सामने हाथ फ़ैला कर उसे उन लोगों के पास जाने का इशारा कर दिया…

“मै इंतज़ार कर रहीं हूँ मिस्टर हस्बैंड… हमें मंदिर जाना है याद रखना….

लेकिन फिर उस दिन उन दोनों का मंदिर जाना नहीं हो पाया… !!!
*****

अनिर्वान अपने केबिन की खिड़की पर खड़ा था और बाहर चाय की टपरी पर एक पुराना सा गाना चल रहा था..

     ऐसे मत सताइए, ज़रा तरस तो खाइए
     दिल की धड़कन मत जगाइए….
     कुछ नहीं कहूँगा मैं, ना अन्खड़ियाँ झुकाइए
      सर को काँधे से उठाइये…..

     के ऐसी नींद आये है के ओह्ह हो ओह्ह हो.. हो..
     वो हैं ज़रा खफा खफा….

इस गाने को सुनते हुए अनिर्वान कुछ पुरानी यादों में खो कर रह गया था …

अपनी टेबल पर आकर उसने बाबूराव को बुलवा भेजा…

“बाबूराव.. ये बताओ दोस्त.. यहाँ कोई देवी मंदिर है.. ?”

“कौन सी देवी का हुज़ूर… ?”

“देवी तो सभी आराध्य होती है ना बाबूराव… तो जो भी मातारानी का मंदिर हो आसपास, वहीँ चलें जायेंगे.. !”

“हुज़ूर पास में तो नहीं है…. लेकिन लगभग पच्चीस किलोमीटर पर एक बहुत प्रसिद्ध मंदिर है… यहाँ के राजा साहब की कुलदेवी का मंदिर है.. !”

“पर राजा साहब की कुलदेवी का मंदिर आम जनता के लिए खुला होगा… ?”

“जी हुज़ूर ! पहले नहीं खुलता था पर जब से राजा अजातशत्रु राजा बने हैं उन्होंने मंदिर सब के लिए खोल दिया है.. बस हफ्ते के गुरुवार मंदिर महल की रानियों के दर्शनार्थ सुबह के समय आम जनता के लिए बंद रहता है, शाम में वो भी खुल जाता है.. !”

“हम्म… तो इस गुरुवार मंदिर चलने का प्रबंध करो बाबूराव… मंदिर दर्शन को जाना है हमें और हाँ कुछ ज़रूरी समान भी खरीदना है, जैसे सिंदूरी चुनरी और चूड़ी बिंदी सुहाग का सामान वगैरह …..

बाबूराव आश्चर्य से मुहँ फाड़े अनिर्वान को देख रहा था…

ये आदमी हर दफा आश्चर्य के एक नए कलेवर को सामने ले आता था… जब बाबूराव को लगता की वो अनिर्वान को थोड़ा सा समझने लगा हैं उसी पल वो पलटी मार कर कुछ और ही बन जाता…..
जाने किस ग्रह से आया था ये, दुनिया वालों से बिल्कुल अलग…
पूरी दुनिया के सामने अपने निराले मस्तमौला अंदाज़ में रहने वाला ये सनकी अकेले में क्यों अचानक इतना खामोश हो जाया करता है..

आखिर क्या है ये ? और कौन है ?

बाबूराव सोचते हुए बाहर निकल गया…

“मेरे बारे में ज्यादा सोचो मत बाबूराव, क्योंकि मेरे बारे में जितना सोचते जाओगे उतना ही मुझ में उलझते जाओगे….

“जी हुजूर !”, कहता बाबूराव झटके से बाहर निकल गया और…

अपनी कुर्सी पर बैठ अपनी रिवोल्विंग चेयर इधर से उधर घुमाता वासुकी धीमे से अपना पिछला वाक्य पूरा करने लगा…

“मै वो ज़हरीला सांप हूँ जो अपने पास आये को काटना ना भी चाहें तब भी मेरे ज़हर से सामने वाला बच नहीं पाता…
जो मेरे करीब आता है वो दूर चला ही जाता है !!”

एक गहरी और ठंडी सी साँस भर कर उसने अपनी आंखें मूँद ली…

*****

   महल में नाश्ते की टेबल पर सारी औरतें बैठी थी… महल के पुरुष खा कर निकल चुके थे और बच्चो को भी स्कूल भेज दिया गया था…
  रूपा, रेखा, जया बुआ जी और बाँसुरी टेबल पर थे, महल की सहायिकाएं उन लोगों की प्लेट परोस रहीं थी..
वहाँ देखा जाये तो सिर्फ बुआ जी का ध्यान ही खाने पर था, बाकी रूपा रेखा और जया अपने अपने बच्चो के बारे में बात कर रहीं थी.. बाँसुरी उन सब की बातें सुन रहीं थी..
उसी वक्त उसके मोबाइल पर कोई मेसेज आया.. और पढ़ने के बाद वो हल्का सा मुस्कुरा उठी…

उसके सामने नाश्ते की प्लेट परोसी गयी थी…

उसकी प्लेट में गार्लिक ब्रेड, कुछ फ्रूट्स और थोड़ा सा पास्ता रखा था… उसने ही अपनी पसंद से ये सब मंगवाया था…
लेकिन गार्लिक ब्रेड का टुकड़ा हाथ में लेते ही उसे उसकी खुशबु से उबकाई सी आने लगी…

“क्या हुआ बाँसुरी.. ? तुम्हें ब्रेड पसंद नहीं आ रहीं तो कुछ और ले लो.. !”

हाँ में गर्दन हिला कर बाँसुरी ने अपनी प्लेट खिसका दी, बावजूद उसे उठ कर बाथरूम की तरफ भागना ही पड़ा…
कुछ देर में वो अपना मुहँ हाथ पोंछती हुई वापस आ बैठी…

” क्या हुआ बाँसुरी,  तबियत सही नहीं लग रहीं क्या… ?”

“हाँ भाभी साहेब,  कुछ खाने का मन नहीं कर रहा.. !”

“कोई बात नहीं,  दूध पी लो… !”

“दूध तो देखने का भी मन नहीं कर रहा.. !”

उसके ऐसा बोलते ही बाँसुरी की सहायिका पंकजा बोल पड़ी…

” चार दिन से इनके कमरे से दूध की गिलास जस की तस वापस लौट रहीं है बड़ी रानी सा … !”..

“अरे.. तो बताना चाहिए था ना बाँसुरी ! चलो आज ही हम डॉक्टर को बुला लेते है.. तुम्हारी जाँच भी हो जाएंगी…  जब से वापस आई हो तुम्हारी  तबियत सही नहीं लग रहीं…
कुमार को भी इसी वक्त अपने टूर पर जाना था…
जब से तुम वापस आयीं हो  कुमार के टूर कुछ ज्यादा ही बढ़ गए है..  !”

“सही कह रहीं है आप भाभी साहेब ! हम भी यहीं सोच रहें थे कि पहले बाँसुरी इतने दिनों के लिए उस बीहड़ में चली गयी… और जब वापस आई तो कुंवर सा के दौरे शुरू…

जया ने भी रूपा की  बात का समर्थन कर दिया…

और उन लोगों की बातों का कोई जवाब दिये बिना ही बाँसुरी उठ गयी…

“भाभी साहेब, मै अपने कमरे में जा रहीं, मुझे तबियत सही नहीं लग रहीं है… आप निम्बू पानी भिजवा दीजियेगा… !”

बाँसुरी वहाँ से जाते हुए अचानक रुक गयी और रूपा के पास चली आई…

” भाभी साहब,  इस गुरुवार को कुल देवी के दर्शनों के लिए जाने का मन है… क्या मै जा सकती हूँ.. ?”

“हाँ क्यों नहीं बाँसुरी ! इसमें पूछने की क्या बात है.. ! इस गुरुवार मंदिर जाने के लिए हम साहब को पहले ही बता देंगे, हम सभी एक साथ चलते हैं.. !
सभी के दर्शन हो जायेंगे… !
दादी हुकुम की तबियत भी सही नहीं चल रहीं, उनके लिए भी पूजा करवानी ही थी…
अच्छा बाँसुरी तुम जब से आई हो दादी हुकुम से मिलने नहीं गयी हो ना.. ?”

“नहीं भाभी साहेब, अब तक नहीं जा पायी हूँ… आज ही शाम चली जाउंगी… !”

” हम्म.. ये पहली ही बार हुआ होगा कि तुम इतने दिन दादी हुकुम से नहीं मिली… मिल लेना .. ?”

हाँ में सर हिला कर बाँसुरी अपने कमरे में चली गयी…

वो अपने कमरे में पहुंची कि थोड़ी देर में पंकजा उसके कमरे में दस्तक देने लगी..

“क्या हुआ पंकजा.. ?”

“हुकुम!!  डॉक्टर आयीं हैं… ?”

“कौन…. पिया… ?”

“नहीं पिया मैडम कहीं व्यस्त थी, अस्पताल से कोई और डॉक्टर आयी है.. !”

“ठीक है भेज दो.. !”

पलंग पर लेटी पड़ी बाँसुरी उठ कर बैठ गयी और डॉक्टर का इंतज़ार करने लगी…

*****

क्रमशः

aparna

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