
जीवनसाथी, -2, भाग – 99
समर के पास भी परेशानियों का अंत नहीं था.. वो अभी शोवन के बारे में कुछ सोच पाता की उससे बड़ा मसला उसके सामने चला आया था !
और उसके लिए राजा से बढ़ा कर कोई मसला ना था..
पिंकी अगर इस फ़र्ज़ी सेलेक्शन में शामिल पायी जाती है तो बहुत बड़ा बवाल होना तय था..
लेकिन उसके साथ ही उसकी खुद की ज़िंदगी में भी कम बवाल नहीं मचने वाला था !
पर उसने अब तक पिया से इस बारे में कोई बात नहीं की थी..
वो राजा से इस बारे में बात करने की सोच रहा था, लेकिन राजा को परेशान देख उसने उस वक्त कुछ नहीं कहा और अपने काम में लग गया..
राजा ने विजय से दिल्ली निकलने की तैयारी की बात कहीं और खुद अपने कमरे में बाँसुरी को बताने चला गया..
बाँसुरी शौर्य की क्लास रिपोर्ट देख रहीं थी..
हर एक एक्टिविटी में उसका शानदार प्रदर्शन देख उसकी माँ फूली नहीं समा रहीं थी.. !
उसे पेरेंट्स टीचर्स मीटिंग के लिए निकलना था..
वो अपना बैग तैयार कर शौर्य की रिपोर्ट कार्ड उसमें रख रहीं थी की राजा कमरे में चला आया..
“कहीं जा रही हो ?”
“हाँ, शौर्य के स्कूल जाना है, पैरंट्स टीचर मीट है !”
“ओह्ह.. अच्छा… ! बाँसुरी..
राजा बस इतना कह कर चुप हो गया..
बाँसुरी इधर से उधर घुमती अपना ज़रूरी सामान भी पर्स में डालती जा रहीं थी, लेकिन राजा के ऐसे चुप होते ही वो चौंक कर पलट गयी और तुरंत राजा के पास आ गयी..
उसने राजा का चेहरा अपने हाथों में थाम लिया और उसकी आँखों में आंखें डाल कर देखने लगी..
“साहेब क्या बात है ?”
“कुछ नहीं… तुम जाओ.. देर हो जायेगी !”
राजा को बाँसुरी के चेहरें का उत्साह मिटाने का मन नहीं किया…
“आपको ऐसे परेशान छोड़ कर मैं चली जाउंगी ? ऐसा लगता है आपको ?”
राजा ने बाँसुरी की तरफ देखा और गर्दन झुका ली..
बाँसुरी ने धीरे से राजा की हथेली को अपने हाथ में लिया और चूम लिया..
“बताइये… क्या बात है ?”
उसने अपने कंधे पर टांग रखा पर्स उतार दिया..
“मैं कहीं नहीं जा रहीं, जब तक आप बता नहीं देते !”
.”बाँसुरी….. यूपीएससी के रिज़ल्ट में कुछ धांधली पायी गयी है… अभी अंदरूनी जाँच चल रहीं है.. लेकिन जिन सस्पेक्टेड कैंडिडेट्स के नाम अलग किये गए हैं उनमे पिंकी का नाम भी शामिल है !”
राजा के मुहँ से ये सुनते ही बाँसुरी के चेहरें का रंग उड़ गया…
उसे एकाएक समझ ही नहीं आया की वो राजा को क्या सांत्वना दे….
उसने अपने चेहरें को सामान्य बनायें रखने की पूरी कोशिश की हालाँकि अंदर ही अंदर उसका दिल भी कांप उठा था..
वो पिंकी का ज़िद्दी और अड़ियल स्वभाव जानती थी.. अगर पिंकी ने कुछ पाने की ठान ली तो फिर उसे उसके संकल्प से कोई डिगा नहीं सकता था..
पिंकी दो बार में भी ये परीक्षा पास नहीं कर पायी थी, और उस पर सोने पे सुहागा वाली बात ये थी की उसके साथ तैयारी करते हुए रतन सेलेक्ट हो चुका था, और उसके बाद तैयारी शुरू करने वाली बाँसुरी भी..
रतन तो फिर भी उसका पति था, इसलिए उससे ऐसी डाह नहीं थी लेकिन बाँसुरी के सेलेक्शन से ऊपरी तौर पर खुश होने के बावजूद अंदर ही अंदर एक छोटी सी चिलक तो थी कि बाँसुरी सेलेक्ट हो गयी पर वो नहीं हो पायी..
इसलिए ये सम्भव भी था कि साम दाम दंड भेद लगा कर वो अपनी सीट पक्की करना चाहती हो। लेकिन ये सारी बातें उस भाई से नहीं कहीं जा सकती थी जिसके लिए उसकी छोटी बहन सिर्फ बहन नहीं बल्कि उसकी बेटी सामान थी..
बाँसुरी ने आगे बढ़ कर राजा को अपने गले से लगा लिया..
कुछ देर तक दोनों एक दूसरे को थामे यूँ ही बैठे रहें..
कभी कभी कुछ मौकों पर लफ्ज़ एकदम ही चूक जाते हैं, और तब एक प्यार भरा स्पर्श ही काफ़ी होता है ज़ख्मो पर मरहम लगाने..
कुछ देर बाद बाँसुरी ने राजा को खुद से दूर किया और उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा दी..
“एक गाना गाने का मन कर रहा है, नाराज़ नहीं होंगे तो गा लूँ !”
बाँसुरी का भोला सवाल सुन राजा ने हाँ में सर हिला दिया..
तूफ़ान को आना है, आ कर चले जाना है
बादल है ये कुछ पल का, छा कर ढल जाना है
परछाईयाँ रह जाती, रह जाती निशानी है
ज़िंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी है
एक प्यार का नगमा है..
राजा के चेहरे पर हलकी सी मुस्कान चली आयी..
उसने बाँसुरी को देखा और आगे अपने मन की बात कहने लगा..
“मुझे दिल्ली जाना है बाँसुरी.. आज ही निकलना है.. ! विजय टिकट देख रहा है, हो सकता है शाम तक निकल जाऊं !”
बाँसुरी पल भर के लिए खामोश सी हो गयी, उसे अचानक कुछ नहीं सुझा..
“ठीक है, मैं आपका सामान रख देती हूँ.. कितने दिन के लिए निकलना होगा ?”.
“अभी कुछ पक्का नहीं है, हो सकता है कल रात ही वापस लौट जाऊं, हो सकता है वक्त लग जाये.. !”
“ठीक है.. आप बिल्कुल परेशान ना हो.. जो होगा अच्छा ही होगा…
साहब, एक बात कहूं ?”
“हाँ बोलों !”
“आप एक बार रतन सा से बात क्यूँ नहीं करते? मुझे लगता है वो आप से झूठ नहीं बोलेंगे !”
“बाँसुरी यहीं बात मैं भी सोच रहा था ! अभी दिल्ली जाकर देख लूँ की वहाँ किस लिए बुलाया गया है, उसके बाद आकर रतन और पिंकी से बात करुंगा !”
हाँ में गर्दन हिला कर बाँसुरी राजा की तैयारियों में लग गयी..
******
विराट शेरी को समझाना चाहता था लेकिन जाने शेरी के मन में क्या ज़िद सवार हो चुकी थी…
वो पिया से मिलना चाहता था..।
आखिर विराट ने समर से बात की और पिया से मिलने उसके घर की तरफ बढ़ गया.. ।
पिया उस वक्त घर पर ही थी…
एक दिन पहले खेलते हुए शोवन को हलकी सी चोट लग गयी थी जिसके कारण उसने उसे स्कूल नहीं भेजा था…
जिस वक्त शेरी को साथ लिए विराट पिया के घर पहुंचा पिया दोपहर का खाना निबटा कर बाहर बगीचे में बैठी थी.. उसी के साथ शोवन भी था..।
दोनों माँ बेटा एक दूसरे के साथ क़्वालिटी टाइम बिताते हुए पेंटिंग कर रहें थे..
पिया चारकोल स्केच पर काम कर रही थी.. बड़ी बारीकी से वो एक लड़की के बालों को बना रहीं थी.. एक एक बाल पर वो इतना बारीक काम कर रही थी, कि लग रहा था उसका बनाया वो स्केच बोल पड़ेगा..
वहीँ उसके पास बैठा शोवन अपने नीले पीले रंगों से कैनवास पे रंग भर रहा था..
शोवन के चेहरे की ख़ुशी देख शेरी भी मुस्कुरा उठा..
“हैलो पिया भाभी सा !”
विराट ने जैसे ही कहा, पिया चौंक गयी.. विराट के साथ आये शेरी को देख उसके चेहरे पर मुस्कान आते आते रह गयी..
“आज आप घर पे है..? क्लिनिक नहीं गयी ?”
“हाँ आज काम भी ज्यादा नहीं था और फिर कल शोवी को ज़रा चोट भी लग गयी थी.. !”
विराट और शेरी वहीं बैठ गए..
पिया ने अपनी पेंसिल्स एक तरफ रखी और हाथ धोकर चली आयी..
“आई मस्ट से… आप बहुत सुंदर स्केचेस बनाती है !”
शेरी पिया की तारीफ कर बैठा..
“जी.. शुक्रिया !”
“मुझे भी ये आर्ट पसंद है, लेकिन मुझे कलर्स से खेलना ज्यादा अच्छा लगता है, आपके बेटे की तरह !”
शेरी की बात पर पिया मुस्कुराना चाहते हुए भी मुस्कुरा नहीं पायी.. जाने क्यूँ उसका दिल धड़क रहा था..
“मैं आप लोगों के लिए चाय लेकर आती हूँ !”
पिया उठ कर अंदर चली गयी..
लेकिन उसका मन उस गोरे पर ही अटका रह गया था..
“ये अँगरेज़ कभी अच्छी नियत के हो ही नहीं सकते, जब जहाँ कोई अच्छी चीज़ देखेंगे इनकी लार टपकने लगती है ! हर चीज़ पर इन्हें अपना अधिकार चाहिए !”
खुद में बड़बड़ करती पिया रसोई में चली आई.. रसोई में लाली कुछ काम कर रहीं थी, उसे चाय बनाने का बोल कर वो डेनिश कुकीज़ का डिब्बा खोल कर प्लेट में सजाने लगी..
“भाभी जी कितनी कप चाय बना लें ?”
“हम्म…. चढ़ा लो 2 कप !”
पिया को खोया खोया सा देख कर लाली ने वहीँ से बाहर झांक लगा ली..
“ये अँगरेज़ कौन बैठा है भाभी? वो भी हमारे गोरेलाल के साथ !”
लाली शोवन को गोरेलाल ही बुलाती थी..
“विराट भाई साहब के दोस्त हैं !”
“ये तो ललमुँहा अँगरेज़ लग रहा.. हाय भाभी जे इसका चेहरा हमारे गोरेलाल से कित्ता मिल रहा.. कोई ना जानता हो तो इसे ही हमारे छुटके का बाप समझ लें ! हैं.. नहीं ?”..
पिया का दिल धक से रह गया..
बात बात में क्या कह गयी थी ये लड़की… जब इसे ये समझ आ रहा तो उसी के दिमाग में जो आ रहा वो गलत कैसे हो सकता है.. ?
उसने जब से शेरी को देखा था तब से उसके दिमाग को चैन नहीं मिला था..
लाली को सब कुछ बाहर लेकर आने की बात कह वो बाहर निकल गयी..
अब तक में शेरी शोवन के पास पहुँच उसकी पेंटिंग में अपनी उँगलियों की कलाबाज़ी दिखाने लगा था…
शोवन को भी उन अंकल की बातों में बड़ा मज़ा आने लगा था..
वो अंकल उसे बिल्कुल उसकी मॉमी की तरह एक एक बारीकी सीखा रहें थे.. उसका हाथ पकड़ कर पेण्ट ब्रश को सही से पकड़ना कैसे है.. पानी में डूबाने के बाद उसे कैसे क्लीन करना है, पेण्ट के स्ट्रोक्स कैसे लेना है.. ये सारी बारीकियां शेरी शोवन को बड़े प्यार से समझा रहा था..
आज तक दुनिया हमेशा ही एक माँ के विचारों से परिचित होती आई थी कि, आखिर एक माँ अपने जिगर के टुकड़े के लिए क्या सोचती है?
लेकिन एक बाप क्या सोचता होगा ये, कभी किसी ने जानने की कोशिश नहीं की..।
आखिर एक पुरुष भी तो अपने अंश को अपने सामने पा कर उसी तरह आल्हादित होता होगा जैसे एक माँ !
खुद का हिस्सा, अपने हाड मांस से बना अपना बेटा किसी पिता को गौरवान्वित करने के लिए काफ़ी होता होगा ना !
मन ही मन सोचती पिया वहाँ चली आयी..
“हे पिया…शोवी बहुत टेलेंटेड है !”
ना दीदी ना भाभी, सीधा पिया.. ये अँगरेज़ भी ना ज़रा सी भी औपचारिकता नहीं रखते.. कुछ नहीं तो मैडम ही बोल लो.. पर नहीं ये तो अपने से दस साल बड़ी को भी बकायदे नाम से ही बुला लेते है..
पिया मन ही मन सोचती उसकी बात पर हामी भर बैठी..
“चाय.. !”
उसने विराट और शेरी की तरफ चाय बढ़ा दी..
उसके निकाल कर रखें यूरोपियन शैली के नाश्ते के साथ ही अपना दिमाग लगा कर लाली मूंग की कचौड़ियॉं और तीखी चटनी भी ले आई.. पिया ने एक नजर उसे घूर कर देखा भी और वो शैतानी सी मुस्कान दे अंदर चली गयी..
इंडियन फ़ूड की तारीफ करता वो भोला अँगरेज़ उन कचौड़ियो पर टूट पड़ा.. उसका तीखी लाल चटनी की महिमा से शायद पाला नहीं पड़ा था, इसलिए अपनी औकात से ज्यादा उसने अपनी प्लेट में परोसा और पहला ही निवाले में कचौड़ी में लाल चटनी भर कर मुँह में रख ली..
उसने जैसे तैसे वो निवाला निगल तो लिया लेकिन उसकी आँखों से पानी निकल आया..
अपने दोनों हाथों से मुँह में होने वाली जलन को भागने हवा करता वो परेशान हुआ जा रहा था और उसकी परेशानी को देख शोवन और विराट भी परेशान हुए जा रहे थे..
उसकी हालत देख पिया झटपट अंदर भाग गयी..
वो रसोई में गयी और फ्रिज से मिठाई निकालने लगी.. वहीं एक तरफ खड़ी लाली की हंसी नहीं रुक रही थी.. वो रसोई में खड़ी खड़ी बाहर चलता सब देख रही थी..
“बड़ा मज़ा आया, उस गोरे का मुहँ जल कर लाल भभुका हो गया !”
पिया ने एक नज़र उसे घूर कर देखा..
“तुझे क्या मिल जाता है लाली ऐसा करके. ! सुधर जा, किसी दिन तेरी ये आदत तुझे ले डूबेगी !”
पिया जानती थी कि लाली अपने सांवले रंग के कारण अपने से अधिक गोरे लोगों को देख जलभुन कर खाक हो जाती थी.. इसी जलन में उसने एक बार शोवन को भी तकलीफ पंहुचायी थी..
लेकिन अब पिया का प्यार देख कर वो भी धीरे धीरे उस प्यारे से बालक से जुड़ गयी थी….
पिया मिठाई लिए तुरंत बाहर भागी.. और शेरी के सामने रख दी.. शेरी ने उसकी तरफ मासूमियत से देखा..
“इसे खा लीजिये आराम मिलेगा !”
उसने तुरंत मिठाई का टुकड़ा उठाया और मुँह में रख लिया.. उसे वाकई आराम मिल गया..
एक आराम भरी साँस छोड़ कर उसने पिया की तरफ देखा..
“थैंक्स पिया !”
पिया ने हलके से मुस्कुरा कर सर हिला दिया…
शोवन भी मुस्कुरा कर अपनी मॉमी से जाकर लिपट गया..
उसने धीमे से अपनी मॉमी के गालों को चूम लिया..
पिया ने मुस्कुरा कर शोवन के चेहरें को अपनी हथेली में थाम लिया..
“यहाँ घूमने लायक कौन कौन सी जगह है ?”
शेरी ने पिया से पूछा… पिया विराट की तरफ देखने लगी..
जवाब विराट ने ही दिया..
“रियासत तो घूम ही चुके हो.. पहाड़ी पर हमारा कुलदेवी का मंदिर है, यहाँ से आगे चौकी बाज़ार है जहाँ आसपास के गाँवो का लोकल सामान मिलता है और कुछ पहाड़ियां हैं.. !”
“क्या आप लोग भी मेरे साथ चलेंगे ?”
शेरी ने पिया से ही पूछा.. पिया से कोई जवाब देते नहीं बना..
“लेकिन कल तो मेरा हॉस्पिटल… !
पिया अभी अपने हॉस्पिटल का बहाना बनाती उसके पहले शेरी ने बोल दिया..
“कल संडे है !”
पिया से कुछ कहा नहीं गया…
तब तक शोवन पिया के गले से झूल गया..
“हम जायेंगे मॉमी.. !”
शोवन की बात काटना पिया के लिए मुश्किल था, उसने मुस्कुरा कर उसे बाँहों में भर कर हाँ कह दिया..
वो उसे बाँहों में भरे खिलखिला रहीं थी और विराट का केमेरा हाथ में लिए शेरी चुपचाप उनकी तस्वीरें खींच गया..
पिया को उसकी ये हरकत पसंद नहीं आयी..
कुछ ज्यादा ही अनौपचारिक नहीं हो रहा था ये गोरा ? माना की विराट का दोस्त है पर इसका मतलब ये तो नहीं की अपना हक जताते हुए किसी और की बीवी का नाम लेकर पुकारने लगा…
फिर अगले दिन साथ घूमने पूछ बैठा, और अब ये तस्वीरें..
आखिर उससे रहा नहीं गया..
“सॉरी लेकिन मुझे आपका ये तस्वीरें लेना पसंद नहीं आया.. क्या मैं तस्वीरें देख सकती हूँ !”
पिया के एक बार पूछते ही उसने मुस्कुरा कर केमेरा उसकी तरफ बढ़ा दिया..
तस्वीरें देखते देखते पिया आश्चर्य में डूबती चली गयी..
उसकी और शोवन की इतनी प्यारी तस्वीरें उसमें थी कि वो पल भर को सब भूल उन तस्वीरो में खो गयी.. किसी तस्वीर में वो शोवन के बालों पर हाथ फेरती मुस्कुरा रही है और उसका पूरा चेहरा भी नज़र नहीं आ रहा.. बस उसकी गोद में बैठा शोवन हँसता हुआ नजर आ रहा है.. किसी तस्वीर में शोवन उसके माथे को चूमता नज़र आ रहा है….
एक तस्वीर में दोनों की उँगलियाँ आपस में जुडी सी दिख रहीं.. वो उन तस्वीरो में खोती जा रहीं थी की विराट की आवाज़ उसके कानों में पड़ी..
“हम लोग अब चलते हैं भाभी सा.. कल फिर आप तैयार रहिएगा.. कल मुझे थोड़ा काम से विराज भाई सा के साथ कहीं जाना है, तो शेरी आपको लेने आ जायेगा.. !”
पिया ने हाँ में गर्दन हिला दी..
शेरी ने खड़े होकर बड़े सम्मान के साथ पिया के सामने हाथ जोड़ दिये…
शोवन के हाथ पर ताली देकर वो मस्तमौला बेपरवाह सा मुसाफिर वहाँ से निकल गया…
लेकिन आज जाते जाते वो जाने क्यों पिया के मन की घबराहट भी अपने साथ ले गया था।
अब तक उसे देख कर पिया को लगता था ये आदमी अगर शोवन का पिता निकला तो ये शोवन को साथ ले जायेगा, लेकिन आज उससे मिलने के बाद पिया के मन से ये डर निकल गया था, उस डर के स्थान पर शेरी के लिए घर कर आई ममता से वो पल भर को घबरा गयी..
उसे तो उस अँगरेज़ पर तरस आने लगा था..
सच है भारतीय पुरुषो से ये गोरे कितने अलग होते हैं.. ना किसी पर बिना वजह का हक़ जताते है ना खुद पर किसी तरह का हक जताना पसंद करते हैं..।
बावजूद अपनी मुहब्बत को अपने तरीको से ज़ाहिर कर ही देते हैं..
अगर कहीं सच में ये शोवी का पिता हुआ तो ?
ये एक ऐसा सवाल बन कर उसके सामने खड़ा हो गया था जिसका जवाब फ़िलहाल पिया सोचना ही नहीं चाहती थी..
बहुत बार होता है ना जब दिल दिमाग इस कदर परेशान हो उठता है की फिर उस पल में आकर हम कुछ सोचना ही नहीं चाहते, ना अच्छा ना बुरा..
उस वक्त हम सब कुछ छोड़ देते है उस ऊपर वाले पर की अब आपको हमारे लिए जो सही लगे वहीं करना, बस वैसा ही कुछ पिया के साथ हुआ था.. उसने भी खुद को नियति के हाथों छोड़ दिया था..
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राजा को निकलना था, युवराज से मिल कर वो कमरे में आया…
बाँसुरी और शौर्य से मिल कर निकलने को था कि सामान ले जाने वाली सहायिका को बाँसुरी ने आवाज़ देकर बाकी के बैग भी ले जाने का आदेश दे दिया….
राजा ने आश्चर्य से उसकी तरफ देखा..
“ये एक्स्ट्रा बैग.. ?”
“मेरे हैं.. !”
“तुम्हारे… ?”
“हाँ साहब, मैं और शौर्य भी आपके साथ चलेंगे.. ! वहाँ का आपका काम निपटने के बाद आसपास कहीं घूम भी लेंगे.. एक छोटी सी फैमिली ट्रिप ही हो जायेगी..
पता नहीं क्यों आपको अकेले भेजने का मन नहीं हुआ !”
राजा ने आगे बढ़ कर बाँसुरी को गले से लगा लिया..
“बाँसुरी… सच कहूं तो अकेले जाने का मन भी नहीं हो रहा था ! लेकिन टिकट्स.. ?”
“हमारी भी हो चुकी है… मैंने समर को पहले ही फ़ोन कर लिया था !”
राजा के चेहरे से सुबह से गायब मुस्कान वापस लौट आई…
बाँसुरी का हाथ थामे वो बाहर निकल गया..
क्रमशः
aparna….
