जीवनसाथी-2/97

जीवनसाथी -2 भाग -97

राजा और बाँसुरी बड़े दिनों बाद लोगों से छिप कर अपनी लम्बी सी अकेली ड्राइव पर जाना चाहते थे.. पार्टी में सबकी नज़र बचा कर वो दोनों गार्डन के पिछले रास्ते से निकल रहें थे कि, गार्डन में बैठे बात करते विराट और शेरी की आवाज़ें राजा के कानों में पड़ने लगी..

शेरी विराट से कुछ ऐसी बात कह रहा था जिसे सुन कर राज के माथे पर बल पड़ गए..

“विराट.. वो बच्चा… मुझे बिल्कुल रेवन की याद दिला रहा है.. ! वो भी मुस्कुराती थी तब ऐसे ही उसके भी गालों पर गड्ढे पढ़ते थे। उस बच्चे की आंखें देखी कितनी शांत है । जैसे उसे पूरी दुनिया से कोई लेना-देना नहीं, बिल्कुल यही भाव रेवन के चेहरे पर रहते थे । अपने आप में इतनी ज्यादा मगन थी कि, उसने कभी मुझसे मेरा पता तक नहीं पूछा । मैं क्या करता हूं ? मेरा नाम क्या है ? मैं कहां रहता हूं ?मेरे कितने रिश्तेदार है ? कुछ भी रेवन ने जानना नहीं चाहा, जबकि मैं हमेशा उसके पीछे पड़ा रहता था कि मुझे उसके साथ रहना है । मैं उसके बारे में हर एक बात जानना चाहता था ।उसके साथ अपनी जिंदगी बिताना चाहता था। लेकिन उसे इन सब बातों से कोई लेना-देना नहीं था ।
   और इसलिए उसने मुझे अपनी जिंदगी से दूर कर दिया! वह जिससे प्यार करती थी, सिर्फ उसी की यादों के सहारे अपनी जिंदगी बिताना चाहती थी |
     मैं नहीं जानता कि मेरे और रेवन के बीच उस रात जो भी हुआ, यह बच्चा उसी की परिणति है या नहीं ? लेकिन जाने क्यों उसे देखकर उस बच्चे को छूकर मैंने रेवन को महसूस किया है !
  उस बच्चे की आंखों में मैंने उसकी मां की महक देखी है! मैं एक बार उसके पेरेंट्स से मिलना चाहता हूं प्लीज.. !”

” लेकिन इस सब में हमारे रिश्ते का क्या होगा शेरी ?”

” मैंने हमारे रिश्ते से तो कभी इंकार नहीं किया विराट, लेकिन मैंने तुमसे अपना पास्ट भी बताया था और तुम शुरू से रेवन के बारे में भी सब कुछ जानते हो.. !
क्या तुम्हें यह नहीं लगता कि अगर वह बच्चा रेवन का है तो मुझे एक बार उससे मिल लेना चाहिए | अगर वह बच्चा वाकई रेवन का है तो, उसका मतलब वह मेरा बच्चा है विराट |
   क्या तुम्हें इस बात से खुश नहीं होगी कि मेरा बच्चा, मेरा खुद का हिस्सा हमारे साथ रहे…!
  क्या हमारी दोस्ती बस इतनी कमजोर है कि, मेरे पास्ट  के सामने आकर खड़े हो जाने से तुम कमजोर पड़ जाओगे और मुझे छोड़ दोगे ?
  देखो विराट जब हमारी दोस्ती हुई, उस वक्त ही मैंने तुम्हें अपनी सारी सच्चाई बता दी थी |
हां तुम से पहले मैं कभी कमिटेड नहीं हुआ, लेकिन रेवन से जुड़ा तो था ! भले ही हमारी भावनाएं उस हद तक नहीं जुड़ी थी, लेकिन जो हुआ उसके बाद मैं कुछ समय के लिए रेवन को भूल नहीं पाया था और मुझे उसे भूलने में बहुत वक्त लग गया…!
अगर मुझे तुम्हें चीट करना होता तो मैं तुम्हें रेवन के बारे में कभी नहीं बताता !
        लेकिन जिस वक्त मैं रेवन को भुलाने की कोशिश में था उस वक्त तुमने मेरा बहुत साथ दिया है | और सिर्फ उस वक्त ही नहीं मेरे हर बुरे वक्त में तुम मेरे साथ खड़े रहे | जब सारी दुनिया मेरे खिलाफ थी, तब तुमने मेरा साथ दिया विराट | और इसलिए मैं अपनी तरफ से जिंदगी भर तुमसे दोस्ती निभाऊंगा | मैं कभी तुम्हें नहीं छोड़ कर जाऊंगा, लेकिन जो मेरी जिम्मेदारी है उसे तुम्हें भी तो समझना चाहिए..|

तुम तो मेरी एक एक बात से परिचित हो, तुम्हें मालूम ही है कि रेवन को ढूंढने में मुझे कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था |
  बड़ी मुश्किल से उसके फ्रेंड बुक अकाउंट से मैंने उसका एड्रेस निकाला और वहां पहुंचा लेकिन मेरे पहुंचने तक में बहुत देर हो चुकी थी |

तुम भी तो थे मेरे साथ जब उस हॉस्पिटल के डॉक्टर ने मुझे बताया कि रेवन नहीं रही और उसके बच्चे को एक इंडियन कपल अपने साथ लेकर इण्डिया चले गए हैं !
    उसी समय मुझे समझ में आ गया था कि रेवन का बच्चा मेरा बच्चा है।  हालांकि उस वक्त भी मेरे मन में एक पल के लिए भी यह बात नहीं आई कि मैं उस बच्चे को ढूंढ कर उसे अपना लूँ, क्योंकि मुझे लगा अगर कोई कपल उस बच्चे को लेकर चला गया है तो शायद ईश्वर भी यही चाहता होगा कि वह कपल ही उस बच्चे का पालन पोषण करें ! लेकिन मैं कैसे इस बात को भूल गया कि मैं उस बच्चे का पिता हूं आखिर !

      आज छोटे से बच्चे को मैंने अपने सामने देखा तो मेरे अंदर का पिता जो पता नहीं कहां सोया पड़ा था, सर उठा कर बैठ गया !
      तुम नहीं समझ पाओगे विराट, लेकिन उस बच्चे को अपने सीने से लगाकर प्यार करने के लिए मैं किस बुरी कदर बेचैन हो गया था, यह मैं ही जानता हूं !
    हालांकि उसकी मां उसका हाथ पकड़ कर मुझसे दूर ले गयी..  लेकिन उस मां बेटे की जोड़ी को देखकर कोई भी बड़ी आसानी से कह सकता था कि वह औरत उसकी मां नहीं है…..

” यहां महल के बच्चों में से तुम किस बच्चे की बात कर रहे हो…?”

” उस बच्चे को उसकी मां शोवन बुला रही थी..वो नीली आँखों वाला बच्चा.. जिसकी बिल्कुल मेरे जैसी आंखें हैं…
वह देखो वह लेडी नजर आ रही है वही उसकी मां है…!”

” यह तो डॉक्टर पिया है, समर की वाइफ… लेकिन समर और पिया…

कुछ कहते कहते विराट रुक गया, क्योंकि उसे भी यह तो मालूम था कि समर और पिया ने एक बच्चे को गोद लिया है लेकिन उसके बारे में बहुत सारी ऐसी बातें थी जो विराट इस वक्त नहीं जानता था… |
लेकिन जिस वक्त रेवन इंडिया आई थी और रियासत में रुकी हुई थी उस समय इंडिया से वापस लौटने के पहले एक आखरी बार महल के प्रीतिभोज में शामिल हुई थी…
      वह समर के साथ आई थी, और उस वक्त विराट भी रेवन से मिला था |
            अचानक ही विराट को सारी कड़ियां आपस में जुड़ती हुई नजर आ गई | उसे समझ में आने लगा कि शेरी जो अनुमान लगा रहा है वह सच भी हो सकता है | क्योंकि रेवन इंडिया आई थी और तब उसकी मुलाकात समर से हुई थी | रेवन से महल में मिलने के वक्त विराट को भी यही लगा था उस समय समर और रेवन के बीच कुछ चल रहा है, हालांकि इस बात के बाद समर को देखकर कभी नहीं लगा कि वह रेवन से प्यार करता था ! लेकिन रेवन की आंखों में समर के लिए विराट को बहुत कुछ नजर आया था और इसके बाद सारी बातें अचानक से समाप्त हो गई थी…

    तो क्या शेरी जो कह रहा है, वह सच हो सकता है ? रेवन वहां शेरी से मिली और उस एक मुलाकात के बाद वह दोनों अलग हो गए लेकिन रेवन ने उस मुलाकात के परिणाम स्वरूप एक बच्चे को जन्म दिया हालांकि कुछ सालों बाद अपनी बीमारी से लड़ते हुए रेवन जब अपनी बीमारी के अंतिम चरण में थी तब उसने वापस इंडिया से अपने दोस्त समर को बुलाया और अपने बच्चे को उसके हवाले करके अपनी आखिरी सांस ली..

यह सब कुछ सोचते सोचते विराट का सर घूमने लगा था और उन दोनों से जरा हटकर दूर खड़े राजा और बांसुरी हतप्रभ से यह सब कुछ सुनते खड़े रह गए…

राजा खुली सोच वाला व्यक्ति था.. उसकी सोच धर्म जाति या जेंडर से ऊपर उठकर सोचने वाली सोच थी… बावजूद आज पल भर को उसे झटका सा लगा था, उसने कभी नहीं सोचा था कि विराट कभी ऐसे किसी रिश्ते में जुड़ जाएगा..

राजा ने ही पिंकी की अंतर्जातीय शादी करवाई थी, यहां तक कि खुद उसने भी राजपूत लड़की से नही बल्कि एक ब्राह्मण लड़की से शादी की थी !
    और भी बहुत सी ऐसी बातें थी जिनके निर्णय उसने अपनी खुली विचारधारा को दिखाते हुए लिए थे ! चाहे वह रियासत को चलाने के नियम हो या, राज्य को चलाने के !
   लेकिन आज कुछ देर के लिए वह खुद भी संभल नहीं पा रहा था | यह सब सुनकर वो एकदम से लड़खड़ा गया और बांसुरी ने उसे अपनी बाहों का सहारा देकर पकड़ लिया…

” क्या हुआ साहब कुछ ज्यादा ही परेशान से लग रहे हैं आप..!”

“नहीं… बस वो…
बाँसुरी मैं थोड़ा बैठना चाहता हूँ.. !”

“हाँ… हाँ साहब.. !”

बाँसुरी राजा को सहारा देकर अपने साथ ले गयी…
उसने एक किनारे पर की कुर्सी पर राजा को बैठा दिया.. और वेटर से इशारे से पानी मंगवा लिया..

“आप थोड़ा शांत रहिये.. ज्यादा परेशान होने से बीपी बढ़ेगा.. कोई फ़ायदा नहीं, इस वक्त ज्यादा सोचने का.. !!

“बाँसुरी…. !”

राजा कुछ बोल नहीं पाया.. वो खुद समझ नहीं पा रहा था की वो किस बात के कारण ज्यादा परेशान था..
इसलिए वो कुछ देर के लिए चुप बैठ गया…

उसके साथ यहीं होता था, अगर कोई बात उसे माफिक ना हुई तो फिर वो अपने खोल में चला जाता था, जहाँ किसी को प्रवेश करने का हक नहीं था… बहुत बार बाँसुरी को भी नहीं….

उसका जीवन सदा से समुद्र के ज्वर भाटा सा रहा था.. कभी सुंदर सहज सरल जीवन उसे मिला ही नहीं था.. हर पल कोई ना कोई उलझन उसके सर पर सवार रहा करती थी…
अब बाँसुरी के वापस आने के बाद उसे लगने लगा था कि शायद अब उसकी ज़िन्दगी से परेशानियां खत्म हो जाएँगी। लेकिन आज की विराट और शेरी की बातें सुन वो एक बार फिर परेशानियों में खुद को घिरा महसूस कर रहा था…

विराट के ऐसे किसी संबंध में होने से उसे व्यक्तिगत तौर पर कोई परेशानी नहीं थी… लेकिन वो इस पूरी रियासत का राजा था..।
और अगर उसका भाई प्रकृति विरुद्ध कुछ भी सोचता या करता है तो उसके लिए जवाबदेही उसकी खुद की बनती थी.. ।

उसके विरोधी तो तैयार बैठे थे उसे नीचे गिराने के लिए..
वो जानता था और मानता भी था की विराट गलत नहीं था.. लेकिन उसके विरोधी बस किसी ऐसे ही मौके के इंतज़ार में थे कि ज़रा सी चूक हो और राजा लपेटे में आ जाये..

राजा के माथे पर पसीने की बुँदे छलक आई..
बाँसुरी ने अपने आंचल से उन्हें पोंछ दिया..

“क्या आपको विराट और शेरी का रिश्ता मंजूर नहीं है साहब ?
     वैसे मैं तो यहीं कहूँगी कि, ये भी एक स्वाभाविक सी बात है… और आपको एक बड़े भाई की हैसियत से उसे स्वीकार करना चाहिए…!”

“बात वो नहीं है बाँसुरी ! लेकिन अब मैं लोगों को मनाते मनाते थक गया हूँ..।
    यूँ लगता है हर कोई मेरे कंधे पर अपनी बन्दुक रख चला रहा है..।
   मुझे विराट के रिश्ते से कोई दिक्कत नहीं, लेकिन अगर वो अपने रिश्ते पर इतना ही विश्वास रखता है तो अब तक ये सब छिपाये क्यों रखा.. ?
उसे भी मुझसे उम्मीद है कि, मैं महल वालों के सामने उसकी बात रखूं और उसके रिश्ते को मान्यता दिलाऊँ.. !
क्यों… ?
आखिर हर किसी को मुझसे ही सारी उम्मीद क्यों ?”

“क्योंकि आपमें वो काबिलियत है साहब ! आपको देख कर ही लगता है कि, आप सब ठीक कर सकते हैं !इसलिए आपके आसपास के लोगों को आप पर इतना विश्वास है.. !”

“लेकिन इस सब में मैं अपनी ज़िन्दगी तो खोता जा रहा हूँ…। बस हर किसी के हिस्से की जंग मुझे ही लड़नी है..। अरे अगर आप कुछ अलग करने की हिम्मत रखते हैं तो उसे स्वीकारने की भी हिम्मत रखिये..।
अगर आप दुनिया के सामने नहीं स्वीकार सकते तो कहीं ना कहीं आपके अंदर भी वो डर बसा है..।
तो फिर इस बात का क्या औचित्य.. ?
अगर आप इस रिश्ते में भी ईमानदार है तो पूरी ईमानदारी से उसे स्वीकार भी कीजिये.. ।
मेरी चिंता का विषय शेरी और विराट का रिश्ता तो है लेकिन साथ ही पिया भी है..
शेरी विराट से शोवन की बात कर रहा था..
इन कुछ सालों में जबसे पिया की ज़िंदगी में शोवन आया है उसे पिया और समर ने अपनी संतान मान कर पाला है..
बस दिल में एक छोटा सा डर बैठ गया है कि कहीं शेरी ने शोवन को साथ ले जाने की ज़िद पकड़ ली तो पिया और समर का क्या होगा ? “

बाँसुरी इस बात पर कुछ नहीं कह पायी.. उसकी नज़र दूर शोवन को अपने हाथ से पानी पिलाती पिया पर चली गयी..

कुछ देर बाद ही शोवन का सोने का वक्त होने लगा था इसलिए पिया रूपा से इजाज़त लेकर शोवन का हाथ थामे वहाँ से निकल गयी..

*****

घर वापस लौटने के बाद भी पिया के दिमाग में शेरी की बातें घूम रहीं थी…
उसने शोवन को हाथ मुहँ धुलवा कर उसके कपड़े बदलवा दिये और खुद कपडे बदल कर चली आयी..

वो आईने के सामने बैठी अपने हाथ में बाॅडीलोशन लगा रहीं थी कि अपने बिस्तर से उठ कर शोवन उसके पास चला आया.. और बड़े प्यार से अपनी छोटी छोटी उँगलियों से लोशन को पिया के चेहरे पर लगाने लगा..
उसकी भोली सी हरकत पर रीझ कर पिया ने उसके गाल चूम लिए…

उसके बालों पर हाथ फिरा कर पिया ने उसे सोने जाने के लिए बोला और वापस पलट गयी..
समर वहीँ पलंग पर बैठा माँ बेटे को देख देख कर मुस्कुरा रहा था..।

वो उन दोनों को हमेशा उनकी हरकतों पर छेड़ता रहता था.. ।

उसी वक्त पलंग पर चढ़ते हुए शोवन को पलंग के किनारे से ज़रा सी लग गयी.. वो “मॉमी ” चीख उठा और पिया भाग कर उसके पास चली आई..

उसे उठा कर पिया ने पलंग पर बैठा दिया और उसकी बाँह देखने जांचने लगी..
उसके पूछने पर शोवन ने बाँह में वो जगह बता दी जहाँ उसे चोट लगी थी.. पिया ने प्यार से उसकी बाँह चूम ली..
शोवन ने भोला सा मुहँ बना कर अपनी मॉमी को देखा और पिया ने उसका माथा चूम लिया..

समर बहुत देर से दोनों की नौटंकी देख रहा था.. उसने भी अपना लैपटॉप एक तरफ रख दिया.. और शोवन को अपनी गोद में खींच कर उसे सुलाने लगा..

“आराम से सुलाओ.. ज्यादा ज़ोर से उसके माथे लगनी नहीं चाहिए… नाज़ुक है मेरा बच्चा !”

समर ने पिया को घूर कर देखा और वापस शोवन को सुलाने लगा..

“ओह्ह..मुझे ज़ोर से लग गयी.. !”

समर चीख उठा..

“कहाँ लगी ?”

पिया समर के पास चली आई..

समर ने अपनी कलाई दिखा दी..

“मुझे भी शोवन वाली दवा चाहिए.. !”

शरारत से समर ने कहा और पिया ने मुस्कुरा कर उसकी कलाई चूम ली..

“अरे यहाँ भी सुबह जिम के वक्त लग गयी थी.. !”

समर ने अपने कंधे पर ऊँगली रख दी..

पिया ने मुस्कुरा कर उसके कंधे पर अपने होंठ रख दिये..

“यहाँ पर शेव करते समय लग गयी थी.. !”

समर ने अपने गले पर ऊँगली रख दी…

पिया ने घूर कर देखा और धीरे से उसके पास आ गयी.. की समर ने अपने होंठो पर ऊँगली रख दी..

“खाना खाते समय आज कट गया था यहाँ !”

पिया उसे घूरते हुए मुस्कुराने लगी और तभी शोवन आंखें बंद किये ही बोल पड़ा..

“पा.. मैं अभी तक सोया नहीं हूँ… !”

समर ने उसे देखा और उसके चेहरें पर धीरे से थपकियाँ देते हुए बड़बड़ाने लगा..

“सोना भी मत बच्चे…! ये आजकल के बच्चे भी ना, चाहते ही नहीं की इनकी जायदाद में हिस्सेदारी मांगने वाला चला आये…. .
एक इकलौता बने रहना है इन्हें बस… !”

“हम्म्म… ुह्ह्ह्ह..!”

शोवन का कुनमुनाना सुन कर पिया उसके दूसरे तरफ चली आई और प्यार से उसे अपनी बाँहों के घेरे में ले लिया..
समर ने उसे बाहर चलने का इशारा किया और पिया ने उसे आँखों से ही डपट कर सोने का इशारा कर दिया…

समर ने उसे देखा और अपना लैपटॉप वापस खोल कर अपना काम करने लगा…

उसी समय समर के मोबाइल पर विराट का मेसेज आ गया…

क्रमशः

aparna…
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