जीवनसाथी-2/94

जीवनसाथी -2 भाग -94

   कहानी….

ये जब रची जाती है तो, रचने वाला इसमें डूबता है और जब पढ़ने वाला पढता है तब वो भी उसमें डूबता है…

अगर कहानी लिखने और पढ़ने वाले को खुद में नहीं डूबा पा रहीं तो इसका मतलब वो कमज़ोर है, और उसे लिखें जाने का कोई औचित्य नहीं..

सबसे पहले राजा और बाँसुरी शादी डॉट कॉम में जन्म लेकर खड़े हुए..
उनकी एक पहचान बनी…
अपनी एक अलग पहचान..
आप सब ने ख़ूब पसंद भी किया ! कहानी कुल तैंतीस भाग की थी जिसे लगभग बाइस लाख पाठक पढ़ चुके हैं और अब भी वो कहानी बराबर पसंद की जा रहीं है..
कहानी के 33वे भाग पर 1123 समीक्षाओ का भोग भी मिल गया..

खैर..

शादी डॉट कॉम में बहुत सी समीक्षाओं में कहा गया कि कहानी को जल्दी खत्म कर दिया, आगे बढ़ाइए..
लेकिन एक बार खत्म करने के बाद मुझसे वहीं कहानी आगे नहीं बढ़ाई जाती… और इसलिए मैंने जीवनसाथी लिखने का फैसला किया..

जब जीवनसाथी का पहला सीज़न तैयार किया तब कभी नहीं लगा था कि राजा रानी की ये कहानी आप सब के द्वारा इतनी पसंद की जायेगी कि राजा अजातशत्रु नाम एक किवदंती सा बन जायेगा..

मुझे इस कहानी को रचने में बहुत मज़ा आया, और उतना ही आप पाठकों ने भी इस कहानी और इसके किरदारों को सर आँखों पर बिठाया…
आपके स्नेह से अभिभूत हो गयी..

लेकिन हर एक कहानी को एक सुंदर अंत तो देना ही होता है.. इस कहानी को भी ख़त्म करना ही था, जो मैंने कर दिया…

लेकिन फिर से एक बार वहीं किस्सा शुरू हुआ..
इस कहानी को और लम्बा लिखना था,  कहानी का अंत जल्दबाज़ी में हुआ आदि इत्यादि…

लेकिन कहानी को मैंने मेरी तरफ से समाप्त कर दिया था, फिर से वहीं सब लिखने का मन नहीं था, लेकिन आप पाठकों का इस कहानी से इस कदर जुड़ाव देख कर दूसरा सीज़न लिखने की सोची..

लेकिन किसी सफल कहानी का दूसरा सीज़न लिखना आसान नहीं होता…
क्योंकि हर बार आपकी रेस खुद आपके साथ होती है..
पिछली दफ़ा लिखते वक्त आपने जो गोल सेट कर रखा है अगर आप उसके पास नहीं पहुँच पाते हैं तो, ये आपकी नाकामी की शुरुवात होती है..
ऐसे ही एक अनसुलझे से डर के साथ मैंने जीवनसाथी का नया सीज़न लिखना शुरू किया..

पुराने किरदारों के बारे में पिछली बार ही इतना लिख दिया था कि अब कुछ बाकी ही नहीं बचा था लिखने को…
बस इसलिए कुछ नए किरदार रचे..
कुछ नए किस्से बुने और लिख दी js2…

लिखते वक्त मुझे नहीं पता था कि मेरा रचा किरदार वासुकी इस कदर पसंद किया जाने लगेगा की लोग उसे राजा अजातशत्रु के बराबर का स्थान दे बैठेंगे..
बहुत अच्छा लगा की आप सब ने वासुकी के किरदार को इतना पसंद किया..

नागो के साम्राज्य के दो नाग बहुत फेमस हैं…
तक्षक और वासुकी…

अनिरुद्ध का किरदार ऐसा लिखना था जो दिल दिमाग में हलचल मचा दे और इसलिए उसका नाम भी वैसा ही दमदार चाहिए था..
कहानी का प्लॉट तैयार करते समय नाम सोचा था तक्षक भारद्वाज..
हाँ सच में.. यक़ीन मानिये..

लेकिन मैंने कहा ना मैं कहानियां लिखती नहीं मेरे  किरदार खुद अपनी कहानी लिखवाते हैं..
वहीं हुआ.. जब तक्षक भारद्वाज को लिखने बैठी तो नाम लिखाया अनिरुद्ध वासुकी !!
और उसका दूसरा रूप अनिर्वान भारद्वाज..

सबको मार काट के एक बार में जीवन मरण के प्रपंच से मुक्त कर देने वाला पुलिसवाला अनिर्वान था..

और अपनी मेडम के पीछे सर झुका कर पूरी दुनिया पर रूल करने वाला था वासुकी..
अनिरुद्ध वासुकी..

कभी कभी तो मैं खुद अपने रचे पात्रों से मिलने को बेचैन हो जाती हूँ… फिर खुद को समझा लेती हूँ.. नहीं ये बस कोरी कल्पना है..

जीवनसाथी का दूसरा सीज़न अनिरुद्ध वासुकी के किरदार के रियासत में आने से शुरू हुआ था और उसके हमेशा के लिए लंदन जाने पर ख़त्म हो गया.. !

लेकिन आप कीमती पाठकों की बहुमूल्य राय है की थोड़ा सा पापा वासुकी और उनकी प्रिंसेस कलि को पढ़ना है.. साथ ही राजा बाँसुरी को भी थोड़ा गढ़ना है… और थोड़ा सा समर पिया भी.. थोड़ा सा महल के किस्से भी..

तो इस थोड़ा थोड़ी में सोचा दो एपिसोड और लिख कर ही अब लीप लूंगी..
वरना अगला एपिसोड लीप के बाद का ही होना था..

पर जब आप सब पढ़ना चाहते हैं….तो
   मुझे तो फिर लिखने में मज़ा आता ही है…

तो चलते हैं जीवनसाथी कहानी के तीसरे अध्याय की तरफ…

अभी एक या दो एपिसोड के बाद शुरू हो जायेगा जीवनसाथी का नया अध्याय…

नयी जनरेशन और नए किस्सों के साथ..

साथ बनायें रखियेगा…

aparna….

5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Newest
Oldest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments