
जीवनसाथी -2 भाग -80
जीवनसाथी दूसरे सीज़न का भाग 80 भी आ गया.. जीवनसाथी के पहले सीज़न में जितने किरदार थे, सभी इस सीज़न में भी आये और कुछ नए किरदार भी इस सफर में जुड़े और ऐसे जुड़े कि आप लोगों के पसंदीदा बन गए..
देखते ही देखते कहानी अपने टर्निंग पॉइंट पर पहुँच चुकी हैं…
लेकिन ये कहानी का अंत नहीं मध्यांतर हैं !!
आज के भाग में कई ऐसी बातें हों सकती हैं जो आपको विचलित कर जायें, लेकिन कहानी की मांग के लिए ऐसा होना ज़रूरी हैं !! बीच में आप लोगों की समीक्षाएं देख कर एक बार को लगा भी कि कहानी को जैसा सोचा हैं वैसा ना बढ़ा कर एक सुखद मोड़ पर लाकर ख़त्म कर दूँ लेकिन कोई भी कहानी शुरू करने से पहले ही मै उसका अंत भी तय कर चुकी होती हूँ… तो अगर यहाँ तक आकर कहानी को अलग मोड़ दे दूंगी तो शुरुआत से लिखा सब कुछ व्यर्थ हों जायेगा..
इसलिए जैसा सोच रखा था, कहानी वैसे ही बढ़ाउंगी.. बस ये वादा हैं कि कहानी कहीं भी आपको निराश नहीं करेगी !!
तो कहानी की लय में बहते रहिये, और आगे बढ़ते रहिये.. साथ ही ये यक़ीन रखिये कि ये सिर्फ एक कहानी हैं !!
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अनिर्वान ने गाड़ी में बैठते ही नेहा को फ़ोन घुमा दिया… कुछ देर रिंग जाते ही नेहा ने फ़ोन उठा लिया..
“फ़ोन क्यों नहीं उठा रहीं थी ? कहाँ रुकी हों ?”
“हाय, कहाँ जाकर मरे हम !! पहली ही रिंग में तो फ़ोन उठा लिया फिर भी इतनी बेकरारी ! हम खुश हुए मिस्टर हस्बैंड ! अब तो आप सामने जैसे ही आएंगे, हम आपको पकड़ कर चूम लेंगे !”
“बकवास बंद करो, और फ़िलहाल किस कैफे में हों बताओ ?”
“आपसे किसने कहा हम कैफेे में हैं ?”
“फिर कहाँ इंतज़ार रह रहीं हों ?”
“हम तो सदियों से आपका इंतज़ार कर रहें हैं.. वो एक शेर हैं ना
दिल दिया, ऐतबार की हद थी
जान दी, मेरे प्यार की हद थी
मर गए हम खुली रहीं आंखें..
ये मेरे इंतज़ार की हद थी….
“तुम कभी सीधी बात नहीं कर सकती ना.. ?”
“नहीं.. बिल्कुल नहीं, आपसे ऐसी बातें करने का मज़ा ही अलग हैं !!”
“तुम ना एक अलग ही नमूना हों.. आज तक तुम जैसी ना कभी पैदा हुई और ना कभी पैदा होगी.. !”
“ये तो सही कह रहें कि आज तक मुझ सी कोई पैदा नहीं हुई लेकिन आगे पैदा नहीं होगी ये नहीं कह सकतें आप ! क्योंकि मेरी बेटी बिल्कुल मेरी ही परछाई सी होगी !!”
“तुम्हें कैसे पता कि बेटी ही होगी, हों सकता हैं बेटा हों मेरे जैसा !”
अनिर्वान ने बहुत धीमें से कहा और उसकी बात सुन नेहा ख़ुशी से चहक उठी…
“हाय !! आज तो सच मौत भी आ जायें तो उसे भी गले लगा कर झूम लें… मिस्टर हस्बैंड प्लीज़ बस एक बार आई लव यू भी बोल दीजिये…. ! आज तक जाने कितनी बार ये सुनने के लिए तरस कर रह गए हैं हम और अपने कभी नहीं कहा !!
उसी समय इस सब से दूर बैठा वो दूसरा आदमी समझ नहीं पा रहा था कि क्या करें और उसने मैडम को फ़ोन लगा दिया…
पूरी रिंग जाने पर भी मैडम ने फ़ोन नहीं उठाया.. दो बार पूरी पूरी रिंग गयी और फिर उस आदमी ने कुछ सोच कर उस ट्रक वाले का नंबर लगा दिया..
ट्रक वाला अपने में मग्न गाडी चला रहा था…..
उसका ध्यान दाएं बाएं कहीं भी नहीं था, इस वक्त उसकी आँखों में ख़ून उतर आया था..
उसके दिमाग की ख़ूनी प्यास बुझने का वक्त आ गया था.. वही प्यास जिसके लिए वह पिछले कई दिनों से तरस रहा था, तड़प रहा था !
आज उसके शिकारी हाथों को एक शिकार मिलने वाला था इसलिए वह अपने आप में एक जोश से भरा हुआ था!
कत्ल करने के पहले कातिल के दिमाग में कुछ अलग से बदलाव होने लगते हैं,उसके शरीर में उत्तेजना की एक लहर सी दौड़ने लगती है और ये उत्तेजना सामने वाले को मारकर ही अपने चरम पर पहुँचती हैं….
ट्रक वाले का फोन एक बार पूरी तरह बज कर बंद हो गया.. लेकिन दूसरे ही पल मोबाइल फिर रिंग करने लगा और खींचकर ट्रक वाले ने फोन उठा लिया..
” सुनो !! मेरी बात ध्यान से सुनो ! वह लड़की बांसुरी..”
उस आदमी के अपनी बात पूरी करने के पहले ट्रक वाले ने फोन काटा और अपने फोन को अपनी सीट के पीछे वाली लंबी सीट पर फेंक दिया…
वह आदमी अपने ऑफिस में बैठे-बैठे बुरी तरह मानसिक रूप से थक चुका था… उसने दो से तीन बार मैडम को और उसके बाद ट्रक वाले को यही बताने के लिए फोन लगाया था कि जिस लड़की को बांसुरी समझ बैठे हैं, वह बांसुरी नहीं कोई और है | लेकिन इस वक्त ना ट्रक वाले ने उसकी बात सुनी और ना ही मैडम ने…|
वो अपने दोनों हाथों में सिर को पकड़े टेबल पर कुहनी टिकाए बैठा था कि तभी उसकी केबिन पर किसी ने दस्तक दी…
उसे लगा उसके साथ काम करने वाला कोई लड़का होगा इसलिए अंदर से उसने खीझ कर आवाज दे दी..
” कौन है बाहर ? क्या काम है?”
” पुलिस!”
दरवाजे के बाहर पुलिस है, यह सुनते ही उस आदमी के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगी ! वह अपने कमरे में चारों तरफ अपने निकल भागने के लिए जगह ढूंढने लगा | कमरे के एक तरफ बने बाथरूम पर नजर पड़ते ही वह उसी दिशा में भाग खड़ा हुआ ! वापस लौटकर उसने टेबल पर से अपना मोबाइल, अपना लैपटॉप उठाया और बाथरूम का दरवाजा खोलने को था कि उसकी केबिन का दरवाजा तोड़ कर पुलिस की टीम अंदर आ गई…
” अरे अकेले अकेले कहां भाग रहे हैं सर..! चलिए पूरी बारात आपको लेने आई है ! आपकी बारात निकाल कर लेकर जाएंगे हम!”
सामने यूनिफॉर्म में दबंग सी खड़ी लड़की को देखकर वह कुछ देर आश्चर्य में डूबा खड़ा रह गया..
” लेकिन मैडम मेरा कसूर क्या है ? जो आप मुझे पकड़ने आई है?”
सामने खड़ी लीना उसे देख कर मुस्कुरा उठी..
“जब बेकसूर हों तो भाग क्यों रहे थे ?”
“वो मैडम.. मै तो बाथरूम जा रहा था, लू के लिए ?”
“लैपटॉप लेकर ?”
“नहीं… वो… मैडम जी.. बात.. !”
उसकी आवाज़ फंसने लगी..
” ज्यादा बोलने की मेरी आदत नहीं है, इसलिए फिलहाल आप हमारे साथ चलिए | ऑफिस पहुंचकर आपको आपकी गलती बता दी जाएगी ! आइये !”
पुलिस को देखकर उस आदमी की जान उसके हलक में अटकने लगी थी…
पर अब खुद को पुलिस के हवाले करने के सिवाय उसके पास और कोई उपाय भी नहीं बचा था, उसने पुलिस वालों के सामने सरेंडर कर दिया…|
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सुनील अब भी घबराया था | कभी उस हवेली को कभी अपने सामने खड़े राजा साहब को देख रहा था | राजा अजातशत्रु उसे देख कर मुस्कुरा उठे | उन्होंने मुस्कुरा कर एक तरफ आगे बढ़ने का इशारा किया और खुद उस तरफ लंबे-लंबे डग भरते हुए चले गए..
सुनील उस वक्त अपने आप को इस कदर फंसा हुआ महसूस कर रहा था कि उसके हाथ में अब कुछ नहीं रह गया था..
सर झुका कर चुपचाप वह अजातशत्रु के पीछे बढ़ गया..
एक लंबे चौड़े से हॉल में पहुंचकर राजा खड़ा हो गया… दीवारों पर भी लकड़ी का काम किया गया था चारों तरफ गहरे महोगनी रंग का चमड़े का फर्नीचर सजा पड़ा था..
दीवारों पर ऊंची ऊंची शीशम की लकड़ी की अलमारियां सजी थी जिनमें बेशुमार किताबें भरी पड़ी थी…
फ्लोर पर वुडन फ्लोरिंग की गई थी और दीवार पर एक तरफ आदमकद तस्वीर लगी थी… |
जिसमे चार युवक एक साथ खड़े मुस्कुरा रहें थे | उनके ठीक सामने चमड़े की मढ़ी हुई ऊँची कुर्सी पर महाराज बैठे थे.. उनके ठीक पीछे खड़े दोनों युवकों में से एक राजा और दूसरा युवराज था | युवराज के बगल में विराज और राजा के बगल में विराट खड़ा था…|
सभी ने एक जैसे काले रंग के कपड़े पहने हुए थे…
तस्वीर बेहद शानदार लग रही थी | सुनील कुछ पल को उस तस्वीर को देखकर खो सा गया..
उस तस्वीर को देखने के बाद उसने वापस राजा अजातशत्रु की तरफ देखा, राजा अब भी उसे देख कर मुस्कुरा रहा था..
” आओ सुनील यहां सोफे पर बैठो !”
सुनील चुपचाप राजा का आदेश मान कर सोफे पर जा बैठा…
उसके सोफे पर बैठते हैं अचानक हॉल पर की लाइट जल उठी ..
हॉल में पहले भी उजाला था, लेकिन अब लाइट्स पूरी तरह से सुनील पर पड़ रही थी | इसके साथ ही उसके ठीक सामने की दीवार पर रखा बड़ा सा टीवी ऑन हो गया…
सुनील को अभी कुछ समझ नहीं आ रहा था, उसने पीछे पलटकर राजा की तरफ देखा, राजा धीर गंभीर गति से चलते हुए उसके ठीक सामने आ गया, और उसकी सोफे के किनारे लगे एक ऊंचे से सिहांसन नुमा कुर्सी पर बैठ गया ! ये वहीं कुर्सी थी जिसमे तस्वीर में महाराज बैठे थे !
सोफे के दोनों हैंड रेस्ट पर अपना हाथ टिकाए बैठे राजा की छवि अप्रतिम लग रही थी ! सुनील भी कुछ देर को उसे देखता हुआ खुद को भूल गया कि तभी जूतों की हल्की सी आवाज आनी शुरू हुई..
क्योंकि कमरे में लकड़ी का फर्श लगा हुआ था इसलिए दबाकर चलने के बावजूद जूतों की ठक ठक साफ सुनाई दे रही थी | जैसे-जैसे वह आवाज करीब आती जा रही थी जाने क्यों सुनील के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी…
उसने आवाज की दिशा में मुड़ कर देखा और कुछ ही पलों में काली शर्ट और फॉर्मल पैंट्स में प्रेम आकर उसके ठीक पीछे खड़ा हों गया…
सुनील ने चौंक कर प्रेम की तरफ देखा और वापस राजा की तरफ देखने लगा..
” इनका परिचय भी जानना चाहते हो क्या..?”
सुनील ने गले में अटकी थूक निगल ली…
“मेरा परिचय जानने से बेहतर यह होगा कि आपका परिचय फिलहाल उनको दे दिया जाए जो बहुत बेसब्री से आपके आने का इंतजार कर रही हैं…!”
उसी वक्त सुनील का फोन बजने लगा…
सुनील ने फोन उठाया और अपने कान से लगा लिया दूसरी तरफ से उसकी मां थी..
” कहां हो तुम ? हम सुबह से तुम्हें फोन लगा रहे हैं ! तुम्हारे असिस्टेंट को भी कहा था कि, तुम्हें इत्तिला कर दे कि तुम्हारे यूएस वापस लौटने के लिए हमने टिकट्स बुक करवा दिए हैं ! अभी तक तो तुम्हें हमारे पास पहुंच जाना चाहिए था सनी, तुम हो कहां..?”
अपनी मां की बात सुनकर सुनील ने एक ठंडी सी आह भरी और वापस अपने पीछे एक नजर देखा…
अब तक प्रेम ने अपनी गन निकालकर सुनील की गर्दन पर धीरे से रख दी थी…
” मैं बस यही….
” क्या हुआ सुनील ? ऐसे लड़खड़ाते हुए क्यों बात कर रहे हो ? सुबह से 16 बार हम कॉल कर चुके हैं और तुम्हारा फोन रीच ही नहीं पकड़ रहा था…!”
सुनील ने अपना फोन देखा और राजा की तरफ देखने लगा…
राजा ने बड़ी अदा से अपने दोनों हाथ ऊपर उठा दिये…
” इसमें मेरा कोई हाथ नहीं है ! यह जो तुम्हारे पीछे खड़ा है ना इसके दिमाग में कुछ ना कुछ खुरापात चलती रहती है ! तुम्हारे फोन का नेटवर्क जाम करवा रखा था इसने !
यह ऐसा ही है…..
एक तो यह अजूबा, दूसरा इसके शौक अजूबे !! इसे शिकार खेलने का बहुत शौक है और यह अपने शिकार को सीधे-सीधे नहीं मारता | पहले उसे खूब छकाता हैं, और जब इसका शिकार थक कर खुद इसके पैरों पर गिर पड़ता है तब ये अपना असली कमाल दिखाता है… ऐसे ही नहीं प्रेम हमारी रियासत का रखवाला बन गया है..!”
अपनी बात पूरी करने के बाद राजा ने सुनील को फोन पर बात करने का इशारा किया…
उसी समय एक के बाद एक फोन के नोटिफिकेशन सुनील के मोबाइल पर आने लगे… उसने देख लिया कि उसकी मां बहुत देर से परेशान होकर उसका फोन घुमा रही थी…
और इसके साथ ही सामने के टीवी स्क्रीन पर कुछ चमक गया..
जैसे ही टीवी स्क्रीन ऑन हुआ, प्रेम ने आगे झुक कर सुनील के मोबाइल पर कॉल के नीचे वीडियो कॉल को प्रेस कर दिया…
सुनील के मोबाइल से प्रेम ने पहले ही टीवी को कनेक्ट कर दिया था…
इसलिए अब सुनील का मोबाइल टीवी पर नजर आ रहा था..
वीडियो कॉल जाते ही कुछ देर में सुनील की माँ ने वीडियो कॉल एक्सेप्ट कर लिया और अब टीवी स्क्रीन पर सुनील की मां नजर आ रही थी…
उन्होंने अपनी मोबाइल स्क्रीन पर जैसे ही सुनील को बैठे देखा और उसके पीछे खड़े प्रेम को देखा वह चौक कर सुनील की तरफ सवालिया नजरों से देखने लगी..
” यह कौन सी जगह है ? कहां हो तुम इस वक्त..?”
राजा अपनी जगह से उठा धीर गंभीर मंथर गति से चलते हुए सुनील के पास आकर उसके ठीक बगल में सोफे पर बैठ गया…
अपने एक पैर पर दूसरे पैर को रखने के बाद उसने अपने उस पैर पर अपना एक हाथ रखा और दूसरे हाथ को उसने बड़ी शान से सुनील के कंधे पर रख दिया…
” राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला..!”
औरत के मुंह से अनायास ही राजा का नाम निकल पड़ा…
” मेरे बेटे को कैद करके तुम करना क्या चाहते हो..?”
” बस एक छोटी सी डील.. ! “
“क्या ? क्या हैं वो डील ?”
” अपने जितने आदमियों को मेरे परिवार के लोगों के आसपास छोड़ रखा है सबको वापस बुला लो..! मैं आपके बेटे की जान बख्श दूंगा, इसे मैं खुद ही यू एस ए की फ्लाइट में बैठा दूंगा !
लेकिन शर्त यह रहेगी कि आप और आपके सारे लोग इसके साथ वापस लौट जाएंगे.. !
मुझे खून खराबा कभी भी पसंद नहीं रहा..
अभी भी आपके इतना सब करने के बावजूद मैं शांति से मामला सुलझाना चाहता हूं ! आपके भाई ने जो किया उसकी मौत के जिम्मेदार वह खुद थे..|
कोर्ट रूम में ठाकुर साहब के साथ जो हुआ उसके लिए दोषी मै नहीं वह खुद हैं | लेकिन जब इंसान अपने आप के घमंड में चूर हो जाता है तब इस कदर अंधा हो जाता है कि उसे सही और गलत में फर्क नजर नहीं आता..!”
” ये बात तो तेरे साथ भी हैं अजातशत्रु ! तुझे भी सही और गलत में अंतर कहां समझ में आता है ? तुझे लगता है कि तू सही है और बाकी सारे गलत, लेकिन एक बार मेरे नजरिए से देख तब तुझे पता चलेगा कि तू कितना गलत है..?”
” तो आपके नजरिए से मुझे क्या करना चाहिए..? अपनी बीवी और बच्चे को आपके सामने लाकर मरने के लिए छोड़ दूं ?क्या मैं उनकी रक्षा नहीं करूं..? “
” हुकुम इस औरत से बात करने का कोई फायदा नहीं है..!”
प्रेम से उस औरत की बातें बर्दाश्त नहीं हो रही थी | उसने राजा की तरफ देखा और अपने मन के भाव कह दिये | राजा ने हाथ दिखा कर उसे रोक दिया और सुनील की तरफ देखकर वापस धीरे से मुस्कुराने लगा..
” प्रेम में बिल्कुल भी धैर्य नहीं है, उसने हाथ में गन पकड़ ली है तो…
सुनील ने हड़बड़ा कर अपनी मां की तरफ देखा और चीख पड़ा…
” आप अब भी वहां पर बैठी इस आदमी से ज़िरह कर रही है ? मॉम आप को समझ में नहीं आ रहा कि मेरी जिंदगी पर बन आई हैं…
जो मेरे पीछे खड़ा है ना यह पूरी तरह से सनकी और पागल है | इसकी आंखों में मैंने देखा है कि, यह मुझे राजा अजातशत्रु का एक इशारा पाते ही ठोंक देगा | और आप अब भी सब्जी वाले से जैसे बारगेन करते हैं वैसे ही सामने से बार्गेन कर रही हैं |
यह राजा अजातशत्रु है | वही अजातशत्रु जिसके बारे में आप रोज रोज मुझे किस्से सुनाया करती थी | इसी आदमी की दरिंदगी के किस्से आपने सुनाएं हैं, और आज जब मैं इसके सामने विवश पड़ा हुआ हूं, तब आप मुझे लेकर बारगेन कर रही है..! अरे चलिए ना.. कम ऑन मॉम ! वापस छोड़िए.. भूल जाइए सारे बदले की कहानी..!”
एक ठंडी सी सांस छोड़ कर उस औरत ने अपना दूसरा फोन उठाया और एक नंबर मिलाने लगी…
दूसरी तरफ से किसी के फोन उठाते ही वह जोर-जोर से बोलने लगी…
“उस ट्रक वाले को रोक दो.. !”
सामने वाले का जवाब सुने बिना उन्होंने फोन काट दिया और वापस अजातशत्रु की तरफ देखने लगी…
” छोड़ दो अब हमारे बेटे को..!”
” छोड़ देंगे, लेकिन पहले आपको बहुत सारी बातें तो बता दें…! प्रेम तुम भी इस तरह खड़े मत रहो आकर साथ बैठ जाओ..!
राजा के ऐसा कहते ही प्रेम धीरे से सुनील की दूसरी तरफ बैठ गया…
एक तरफ प्रेम और दूसरी तरफ राजा अजातशत्रु….
उन दोनों शेरों के बीच बैठा सुनील बिल्कुल किसी भयभीत चालाक लोमड़ी सा लग रहा था, जो उन लोगों के बीच फंस तो जरूर गया था…
लेकिन उसका दिमाग अब भी वहां से निकल भागने के लिए तेजी से काम कर रहा था…
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” तुम उस वक्त क्या कह रही थी नेहा, कि कुछ गड़बड़ हो गई है..?”
” हां एक गड़बड़ तो हो गई है मिस्टर हस्बैंड, लेकिन आप नाराज मत होइएगा हम स्पीड कंट्रोल में रखे हुए हैं..!”
” लेकिन गड़बड़ हुई क्या है ? वो तो बताओ..?”
” गाड़ी के ब्रेक हल्के लूज़ हो गए हैं..
थोड़ा ज्यादा जोर से दबाने पर ही लग रहे हैं..!”
अनिर्वान ने अपने माथे पर अपना हाथ मार लिया….
” शिट !! मतलब तुम अब तक गाड़ी ड्राइव कर रही हो तुम अब तक कहीं रुकी नहीं..!”
” इसीलिए तो नहीं रोक पाए, वरना आपका आदेश हो मिस्टर हसबैण्ड और हम आपकी बात ना माने ऐसा हो सकता है क्या?”
परेशानी में भी नेहा खिलखिला उठी…
“अगर तुम्हें कुछ हों गया ना नेहा तो पूरी दुनिया को आग लगा दूंगा.. !”
अनिर्वान की बात सुन नेहा पल भर को चुप रह गयी.. ख़ुशी से उसकी आँखों से दो बूँद ढुलक पड़ी… और तभी उसे रास्ते के दूसरी तरफ से आती अनिर्वान की गाड़ी दिखाई दे गयी..
ऐसा लगा जैसे तपती दुपहरी में सुकून भरी बुँदे बरस गयी हों…
उसके चेहरे पर एक लम्बी सी मुस्कान चली आई..
“अब तो हम खुद दुआ करेंगे कि हमें कुछ हों जायें और आप दुनिया को आग लगा दें… !!”
अनिर्वान को भी नेहा की गाड़ी नजर आने लगी और उसकी आँखे राहत से पल भर को बंद हों गयी…
लेकिन अगले ही पल बीच के चौराहे से तेज़ी से आती ट्रक ने अचानक अपना रास्ता बदला और नेहा वाले रास्ते की ओर मोड़ दिया…
नेहा जब तक में गाड़ी को एक किनारे मोड़ पाती उस तेज़ गति की ट्रक से नेहा की गाड़ी ज़ोर से टकराई और गेंद की तरह उछल गयी…
हवा में उछल कर गाडी वापस ज़मीन से टकराई कि ट्रक ने उसे अपने सामने से धकेलते हुए उसका कचूमर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी…
गाड़ी के इंजन में दबाव बढ़ने से पैदा हुई ऊष्मा से एक छोटा सा ब्लास्ट हुआ और गाडी ने आग पकड़ ली…
क्रमशः
aparna….
