जीवनसाथी -2/79

जीवनसाथी -2 भाग -79

   सुनील को झक मार के अपनी जैकेट लेकर वापस आना पड़ा… उसके पास राजा ने और कोई उपाय नहीं छोड़ा था..

कुछ लोग पैदाइशी राजा होते हैं, उनका सामान्य बोलना भी उनका आदेश लगता हैं….
ऐसा ही कुछ राजा के साथ था.. घमंड उसे छू भी नहीं गया था,  बावजूद उसका चेहरा, उसकी गंभीर वाणी उसका डील डौल सामने वाले पर एक प्रभावजन्य दबदबा सा बना देता था !!
राजा ने जो कह दिया उसे काटना नामुमकिन सा लगता था.. !

सुनील भी सर झुकाये आया और राजा के आदेश का पालन करते हुए गाड़ी में बैठ गया…

गाडी उसे साथ लिए आगे बढ़ गयी..
हताशा से उसने एक आखिरी बार पीछे मुड़ कर देखा और उसे छत पर खड़ी बाँसुरी दिख गयी….

शाम गहराने लगी थी, ऐसे में उस धुंधलके में कांच के पीछे से पहचानने में उसे हलकी सी दिक़्क़त हुई लेकिन ये वो चेहरा था जो वो अपनी आखिरी साँस तक नहीं भूल सकता था..
उसके मुहँ से एक आह निकल कर रह गयी….

राजा अपने फ़ोन पर कुछ बहुत ध्यान से देख रहा था, इसलिए सुनील की उसे टोकने की हिम्मत नहीं पड़ी.. !

दून की शानदार हवेली में जाकर गाडी खचाक से रुकी और उस हवेली के बाहर राजा अजातशत्रु के पूर्वजों के नाम का इतिहास लिखा देख सुनील की आंखें छोटी छोटी सी हो गयी…

ये कहाँ आ गया था वो ? उसने आश्चर्य से राजा की तरफ देखा, राजा उसे देख मुस्कुरा उठा !!

“आइये मेरे महल में आपका स्वागत हैं.. !”

राजा की गहरी सी आवाज़ सुन वो चौंक कर होश में आया…

वो धीरे से गाड़ी से नीचे उतर गया.. उसने अपने हाथ से शर्ट के ऊपर हाथ रख कर ही अपनी गन जांचनी चाही और गन हाथ में आते ही उसके चेहरे पर हलकी सी राहत चली आयी जो दूसरे ही पल आसपास फ़ैले गार्ड्स को देख कर गायब भी हो गयी..

उसके उतरने के साथ ही राजा भी गाड़ी से उतर कर उसके पास चला आया..

“क्या मैं ये पूछने की गुस्ताखी कर सकता हूँ कि आप का परिचय क्या हैं ? आप हैं कौन.. ?”

“जी मेरे जानने वाले मुझे अजातशत्रु के नाम से जानते हैं !”

सुनील के चेहरे पर हवाईयां उड़ने लगी…

“राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला.. ?” उसकी आवाज़ ऐसा लगा किसी गहरे कुंए के भीतर से आ रहीं हैं..

राजा ने बस एक बार गर्दन हाँ में झुका ली और महल की तरफ बढ़ते हुए उसे भी अपने पीछे आने का इशारा कर दिया…

सुनील ने अपने दोनों हाथों से अपना सर पीट लिया…

उसे उसकी माँ की कहीं बातें याद आने लगी…

“सनी !!हमारी मानो तो तुम यहाँ से यूएसए वापस लौट जाओ.. तुम उसे नहीं जानते, वो बहुत खतरनाक हैं ! अपने दुश्मन को बर्बाद करने के लिए वो साम दाम दंड भेद सब प्रयोग कर जाता हैं !!
   चेहरे मुहरे से जितना शांत और सुंदर दिखता हैं ना वो, सब बस छलावा हैं |  असल में उससे क्रूर राजा दूसरा नहीं होगा.. |
वो इस ढंग से अपनी कारगुजारी कर जाता हैं कि, सामने वाले को पता भी नहीं चलता की कब हम उसके छलावे में आ गए…

बिल्कुल जैसे वनराज होता हैं ना वैसा ही हैं वो !! जंगल का राजा शेर जैसे अपने शिकार को देख भर के मंत्रमुग्ध कर देता हैं, और उसके बाद शिकार इधर उधर हिल भी नहीं पाता, वैसा ही कुछ उसके साथ हैं.. |
वो भी अपने शिकार को पहले मंत्रमुग्ध कर देता हैं, उसके बाद उसका शिकार भी हिलने डुलने में असमर्थ हो जाता हैं..
उसने अपने हर एक विरोधी के साथ ऐसा ही किया हैं !!

दुनिया को भले ही ये लगता हैं कि वो अपनी मीठी बातों और प्रेम से लोगों का दिल जीत लेता हैं, लेकिन सच्चाई इसके उलट हैं..|
वो अपने मकड़ जाल में ऐसे अपने विरोधी को उलझा लेता हैं कि उस में उलझे लोगों का साँस लेना भी मुश्किल हो जाता हैं..
हमनें खुद अपने भाई को उसके जाल में उलझते और तड़पते देखा हैं…
भैय्या (ठाकुर साहब ) को उसने पहले छल से पकड़वा दिया | उसके बाद पहले उन्हें जेल की चारदीवारी में कुछ दिन रख कर टॉर्चर किया, फिर जब उसका मन इस सब से भर गया तब भरी अदालत में उन पर गोली चलवा दी…

देखने वालों को लगा कि उसके मंत्री ने अपनी सुरक्षा में उन पर गोली चलायी और वो मारे गए | जबकि सच्चाई ये थी कि उनके पास जो गन पहुंचवाई गयी थी उसमे नकली गोलियां थी..  |
बेचारे मेरे भोले भैया उस षड्यंत्रकारी के मकड़जाल में उलझ कर रह गए…
उस वक्त उनका साथ देने वाला आदमी, उन तक गन पहुँचाने वाला आदमी, उनके भागने में मदद करने वाला आदमी भी असल में उसी अजातशत्रु का आदमी था.. !!

अजातशत्रु भले ही सारे जग से कहता फिरे की उसे   राजपद नहीं चाहिए लेकिन असल में उसके ख़ून में राजशाही घुली हुई हैं… इसलिए अपनी गद्दी के लिए अपने सिंहासन के लिए वो किसी का भी ख़ून बहा सकता हैं..
जाने उसके सिंहासन के नीचे कितने बेकसूर लोगों की आहें उनकी सिसकियाँ दबी पड़ी होंगी.. !

अपनी रियासत के लोगों में दो कौड़ी की चीज़े बाँट देने से कोई महान राजा नहीं बन जाता.. !
इतना ही महान था तो अपने बड़े भाई को राजा क्यों नहीं बनने दिया ?
इतना ही महान था तो विराज को गद्दी में बने रहने क्यों नहीं दिया.. ?
   उसे गद्दी में बैठाने के बाद एक बड़े भाई की तरह, एक पालक की तरह उसका साथ देने की जगह खुद हाथ बांध कर मुस्कुराते हुए उसे गलतियां करने क्यों दी ?

इसलिए कि विराज की बेवकूफियों को देख कर लोग वापस अजातशत्रु की पुकार मचाने लगें.. !!

अजातशत्रु बहुत पैने दिमाग का राक्षस हैं सनी !! उससे पार पाना इतना भी आसान नहीं हैं |  इसलिए हमनें सोच लिया हैं उसकी जान से प्यारी पत्नी को उसकी ज़िन्दगी से दूर कर देंगे.. उसके ज़िंदगी भर की कमाई उसका बेटा… उसे हम मौत के घाट उतार देंगे.. |

उस राक्षस को भी मालूम चलना चाहिए कि अपनों को खोने का गम क्या होता हैं..?
क्योंकि उससे उसका राजपाट छीनना तो नामुमकिन हैं.. उसने अपने आसपास ऐसे चेलों की फ़ौज इकट्ठी कर रखी हैं जो उसके एक इशारे पर अपने प्राण तक उत्सर्ग  करने को तैयार बैठे हैं….

ऐसे में उससे बदला लेने का सबसे सुलभ तरीका हैं उसकी पत्नी और उसके बच्चे की मौत !!

इसलिए तुमसे कह रहें हैं, तुम्हारा यहाँ रहना ठीक नहीं हैं !! तुम चले जाओ यहाँ से, वरना कहीं तुम उसके हाथ लग गए तो वो राक्षस तुम्हें भी नहीं छोड़ेगा !
उसने हमारे भैया और फिर तुम्हारे पिता दोनों को ही मार डाला हैं और उसकी इस करनी की सज़ा हम उसे दें कर रहेंगे !”

अपनी माँ की बातें याद आते ही सुनील को हलकी सिहरन सी हुई और उसने अपने आप को संभाल लिया..

उसने राजा की तरफ देखा, राजा किसी से फ़ोन में बात करता हुआ वहीं गार्डन में टहल रहा था…

छैः फुट से दो तीन इंच ज्यादा की लम्बाई, गठा हुआ कसरती बदन, चम्पई रंग, चौड़ा माथा, माथे पर करीने से सजे बाल, चेहरे पर हलकी दाढ़ी मूँछ, गहरी बोलती सी आँखें जिन पर गोल ऊपर को घूमी घनी पलकें देखने वाले को वाकई सम्मोहित कर जाती थी…
उसे अपनी माँ की कहीं बात याद आ गयी..

वाकई इस वक्त वो वनराज ही लग रहा था !!

जंगल का राजा शेर भी तो ऐसे ही अपनी लचकती चाल और गहरी आँखों से अपने शिकार को पहले सम्मोहित करता हैं, और फिर एक झटके में उसकी गर्दन दबोच लेता हैं..

क्या अंतर हैं आखिर अजातशत्रु और वनराज में ?

ये भी तो देखने वालों को पहले अपने मोहपाश में ही बांधता हैं.. ! !

तो क्या उसका मतलब वो राजा अजातशत्रु के चक्रव्यूह में फंस चुका हैं.. ?

सुनील ने पलट कर देखा हवेली के दस फ़ीट ऊँचे मज़बूत बाहरी लौह पाट बंद हो चुके थे |
और उन दरवाज़ों के अंदर की तरफ तैनात गार्ड्स अपनी रायफल थामे उसे ही घूर रहें थे..

सुनील की श्वांस प्रश्वांस की गति बढ़ने लगी… उसे समझ आ गया था कि उसका अंत समय करीब आ चुका हैं.. उसने खुद को समय के हाथों सौंप दिया और राजा अजातशत्रु के अगले वार का इंतज़ार करने लगा..

*****

अनिर्वान  हैरान परेशान सा गाड़ी भगाये जा रहा था…
शहर का अधिकतर हिस्सा गाड़ियों और धूल भरे रास्तों  से पटा पड़ा था..
महल पहाड़ी पर था और इसलिए महल से आने वाला रास्ता गोल घुमावदार और थोड़ा खतरनाक था..
अनिर्वान को मालूम था की महल से ड्राइवर के साथ निकली रानी साहब ने ड्राइवर को महल से निकलते साथ ही उतार दिया होगा, और यहीं सोच सोच कर अनिर्वान परेशान था…

वो तेज़ी से गाड़ी भगाता जा रहा था.. उसने एक बार फिर फ़ोन में नंबर लगाया और रिंग जाने लगी…

लगातार रिंग जाने के बाद फ़ोन उठ गया…

“कहिये मिस्टर भारद्वाज.. ?”

“जहाँ हैं वहीँ रुक गयी हैं ना आप ?”

“हम्म्म.. अहम्म… अह्ह्ह.. !”

“ये क्या कह रहीं हैं आप.. ? मुझे समझ नहीं आ रहा.. ! “

“वो…. अहम्म… “

अनिर्वान तेज़ी से गाड़ी चलाते हुए बात भी कर रहा था लेकिन अब उसका धैर्य चूक गया और वो लगभग चीख पड़ा…

“साफ़ साफ कहिये रानी साहिबा ! आपकी कहीं कोई बात मेरे समझ में नहीं आ रहीं !”

“अह्ह्म्म.. वो… ये.. हम्म.. !””

अनिर्वान ने खीझ कर अपना हाथ ज़ोर से स्टेयरिंग पर मारा और चीख उठा…

“साफ साफ बोलों… कहाँ पहुंची हो, जल्दी बताओ ? मैं तुम्हारी तरफ ही आ रहा हूँ, बस तब तक शांति से जहाँ हो वहीँ रुक जाओ.. !”

“हम्म्म…. !”

अनिर्वान का पारा उबलने लगा… और वो अपना पूरा दम लगा कर चीख पड़ा…

“नेहा….. ! क्या मजाक हैं ये.. ? तुम समझती क्यों नहीं ? मैं बहुत परेशान हूँ.. तुम्हें कैसे समझाऊं कि तुम्हारी जान को कितना खतरा हैं..!”

“हाय वारी जांवा…!
   तरस गए थे हम मिस्टर हस्बैंड आपके मुहँ से अपना नाम सुनने के लिए.. !”

“शटअप यू इडियट !! फ़ोन रखो और जहाँ हो वहीँ चुपचाप रुक जाओ !”

“नहीं… एक बार और हमारा नाम लीजिये ना.. प्लीज़ !!”

“पागल हो गयी हो क्या ? तुम्हें अपनी जान की फ़िक्र नहीं.. पर मुझे तो हैं.. !”

“तो करिये ना.. हम तो चाहते ही हैं कि आप हमारी फ़िक्र करें.. ख़ूब फ़िक्र करें.. हमसे प्यार करें.. आखिर बार बार नकारने  के बावजूद आप हमारे प्यार में गिरफतार हो ही गए ना !”
.

“तुम फ़ोन बंद करो..

“ऊँहुँ… ना.. !”

“बकवास बंद करो नेहा, फ़ोन बंद करो… !”

“पहले एक बार बोलिये.. !”

“क्या बोलना हैं.. ?”

“आई लव यू नेहा !! लव यू सो मच !!”

“तुमसे बड़ी पागल लड़की  मैंने अपनी ज़िंदगी में नहीं देखी.. तुम्हें मेरी बात ही नहीं समझ आ रहीं ! “

“तो आप मेरी बात समझ लीजिये ना मिस्टर हस्बैंड !! तरस गए थे हम आपके मुहँ से अपना नाम सुनने के लिए.. कैसे कैसे बहाने बना कर हम महल से  निकलते थे, लेकिन आपके चेहरे पर कभी हमें देख कर हलकी सी भी ख़ुशी नजर नहीं आई..|
    लेकिन दिल ही दिल में हम ये भी जानते थे कि आप ऊपर से कितने भी खड़ूस बन जायें, आप भी हमारा इंतज़ार करते थे.. |
करते थे ना !! बोलिये !”

“हम्म !”  अनिर्वान का छोटा सा हम्म सुन कर नेहा पूरे जोश से चहकने लगी..

” हम जानते हैं, जब हम अपनी सैंडल खटकाते हुए चलते थे तो उसकी हर एक खटक आपके दिल में धुकधुकी मचा देती थी कि कहीं आपकी बीवी इतनी ऊँची हील्स में सम्भल ना पायी और गिर पड़ी तो… ?
तभी तो हमारे लिए इतनी आरामदायक जूतों कि जोड़ियाँ भिजवा दी आपने,  हैं ना .. !”

“बस करो.. ये सब फ़ोन पर बताने की ज़रूरत नहीं हैं.. !”

“आपकी नज़र से देखें तो आपको हमसे मिलने की भी कहाँ ज़रूरत हैं…?  लेकिन हमें आपकी बेहद ज़रूरत हैं.. !! और सिर्फ हमें ही नहीं हमारे बच्चे.. !”

“स्टॉप इट नेहा !! कैसे समझाऊं तुम्हें.. हो सकता हैं कोई हमारी बातचीत सुन रहा हो… प्लीज़ तुम फ़ोन बंद करो.. ! “

” बस एक बार पहले बोल दीजिये जो सुनने के लिए हमारे कान तरस रहें हैं.. !”

“फ़ोन काटो.. !”

“आप चाहें तो आप ही फ़ोन कट कर दीजिये ना !”

“तुम जहाँ हो वहीँ रुक जाओ,  मै पहुँच रहा हूँ… !”

“मिस्टर हस्बैंड.. एक छोटी सी प्रॉब्लम हो गयी हैं…

नेहा आगे कुछ कह पाती कि नेटवर्क के कारण फ़ोन डिस्कनेक्ट हो गया…

इस सबसे अलग कहीं दूर बैठे उस आदमी ने अपने कान से हेड फ़ोन हटाया और एक दूसरे आदमी को फ़ोन घुमा दिया..

“सारी रिकॉर्डिंग भेज रहा हूँ…
अब तक सब जिसे रानी बाँसुरी मान बैठे थे वो बाँसुरी नहीं हैं.. बल्कि बाँसुरी की कोई हमशक्ल हैं !!
बहुत बड़ी गफलत हो गयी हैं..!”

“तो ये कौन हैं.. ?”

“कोई नेहा हैं.. इससे ज्यादा इस वक्त कुछ मालूम नहीं चला.. तुम मैडम को बता दो.. !”

“अरे मैडम प्रूफ मांगेंगी…!
   ऐसे कैसे मान लें कि ये रानी बाँसुरी नहीं हैं..!  हो सकता है उन लोगों को यह पता चल गया हो कि उनके फोन हम सुन रहे हैं, और इसीलिए रानी बांसुरी को बचाने के लिए उन्होंने यह नेहा वाला खेल खेला हो..!”

इस बात को सुनकर पहला आदमी भी सोच में डूब गया…

” हां सही कह रहे हो, ऐसा भी हो सकता है |  क्योंकि शक्ल सूरत में तो वह बिल्कुल रानी बांसुरी जैसे ही लगती है..! इतना ज्यादा कोई कैसे मिल सकता है | वही कद काठी वैसा ही रंग रूप, हर एक चीज मिलती है उनकी! ऐसा तो संभव नहीं है..! 
   लेकिन एक बात समझ नहीं आयी, अगर ऐसा था तो वह उस पुलिस वाले को अपना हस्बैंड क्यों बोल रही थी..?
   अगर आनी बांसुरी होती तो वह तो राजा अजातशत्रु के अलावा और किसी को अपना हस्बैंड नहीं बोल सकती….?”

”  कौन पुलिसवाला ? वो सनकी भारद्वाज .. ?”

“हाँ.. उसे ही वो अपना पति….

उस आदमी ने अभी अपनी बात पूरी भी नहीं की थी कि उसके कमरे का दरवाजा खुला और  दरवाजा खोलने की आहट पर वह आदमी चौक कर पलट गया और उसके हाथ से उसका मोबाइल फोन छूट कर नीचे गिरा और बिखर गया…

दरवाजा खोल कर अनिर्वान भारद्वाज उसके सामने खड़ा था…

” अभी-अभी तुमने अपनी मौत का नाम लिया और तुम्हारी मौत तुम्हारे सामने खड़ी है..!”

उस आदमी को वाकई अनिर्वान को उस वक्त वहाँ देख कर लगा कि नए ज़माने के कपड़ों में साक्षात् यमराज ही उसे लेने पधार चुके हैं… उसने बिना किसी हील हुज्जत के खुद को उसके हवाले कर दिया..

अनिर्वाण ने उसके माथे पर अपनी गन तानी और खींचकर उसे अपने पीछे खड़ी टीम के हवाले कर दिया…

” बाबूराव यह किस से बात कर रहा था ? और इसके लिंक कहां तक जुड़े हुए है ? सारी डिटेल्स इसके फोन और इससे निकलवाओ !
  आधे घंटे के अंदर मुझे सारी जानकारी चाहिए..!”

अनिर्वान ने तुरंत उसे अपनी टीम के हवाले किया और गाड़ी निकाल कर वापस रोड पर दौड़ा दी…

अनिर्वान को पहले ही इस बात का शक हो गया था कि उसका फ़ोन टैप किया जा रहा हैं |  और उसी टैप लिंक को हैक कर के दर्श ने उसे इस बन्दे का नंबर पता करके दें दिया था !
     उसी नंबर के माध्यम से वो जीपीस की सहायता से इस आदमी तक पहुँच गया था..

उसे लगा नेहा किसी मोड़ पर रुक गयी होगी.. उसने गाड़ी में बैठते ही वापस नेहा को फ़ोन मिला लिया… !!

इधर वो दूसरा आदमी अब तक इसी पसोपेश में था की मैडम को ये बात बताई जायें या नहीं…

आखिर उसने कुछ सोच कर मैडम को फ़ोन लगा दिया…

क्रमशः

aparna…

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