
जीवनसाथी 2- भाग -75
देखते ही देखते जीवनसाथी सीजन टू का 75 वा भाग भी आ गया….
कहानी को शुरू करते वक्त मेरे दिमाग में कहानी की जो रूपरेखा थी कहानी उसी लय में आगे बढ़ रही है!
कहानी के पार्ट्स और झलक देख कर आप सब समझ चुके होंगे कि कहानी में नयी जनरेशन की कहानी भी शुरू होने वाली है !!!
अब तक कहानी को जैसा सोचा था वैसे ही आगे बढ़ी है और आगे भी जैसा सोच रखा है वैसा ही बढ़ाउंगी…
कहानी के आगे के कई भाग हो सकता है आप लोगो को पसंद ना आये या दिल दुखा जायें लेकिन बस यहीं प्रार्थना है कि थोड़े से धैर्य के साथ पढ़ते रहिएगा… कहानी सुख दुःख दोनों मोड़ों से गुज़रते हुए आगे बढ़ रही है… इसलिए थोड़ा सा धैर्य और ख़ूब सारा प्यार बनाये रखिये.. !!
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पिया लड़खड़ा कर गिर गयी और समर लपक कर उसके पास पहुँच गया…
वो उसे साथ लिए उसी के अस्पताल की तरफ निकल गया…
उस वक्त ड्यूटी में मौजूद सीनियर डॉक्टर ने पिया की जाँच परख की और उसे बधाई दे डाली…
“बधाई हो मिस्टर सिंह ! पिया माँ बनने वाली है !”
डॉक्टर के मुहँ से ये बात सुन कर समर के चेहरे पर एक लम्बी सी मुस्कान दौड़ी आई…
वो पिया के पास पहुँच गया… उसने पिया की तरफ देखा और पिया ने उसकी तरफ.. दोनों की आंखें मुस्कुरा उठी..
“थैंक यू पिया !!”
पिया मुस्कुरा कर रह गयी… समर डॉक्टर से तरह तरह की बातें पूछने लगा कि अब पिया क्या खा सकती है क्या नहीं ? उसे कैसे रहना होगा.. वगैरह वगैरह… डॉक्टर भी सब कुछ समर को बताते हुए धीरे-धीरे मुस्कुरा रही थी.. !
समर ने डॉक्टर से जिद करके पिया के लिए उसका डाइट चार्ट तैयार करवा लिया ! इसके अलावा कब उसे कितना वॉक करना है? कितना पानी पीना है ?चाय कॉफी पी सकती है या नहीं? यह सब कुछ लिखवा कर अपने पास रख लिया | पिया भी समर का पागलपन देखकर धीरे-धीरे मुस्कुरा रही थी..
आखिर पिया ही अपनी जगह से उठकर डॉक्टर को बाय बोलकर समर का हाथ पकड़े उसे डॉक्टर के केबिन से बाहर निकाल लायी | दोनों गाड़ी में जा बैठे और समर ने पिया के चेहरे को अपने हाथों में लेकर उसके माथे को चूम लिया…
” अब हम अपने घर चलते हैं…
अब तुम्हें किसी पार्टी में, रिसेप्शन में जाने की जरूरत नहीं है.. !”
” यह क्या बात हुई भला ? मैं पंखुड़ी की रिसेप्शन में जाकर रहूंगी.. दुनिया में मै पहली औरत थोड़े ना हूँ जो प्रेग्नेंट हुई है.. और ये सिर्फ प्रेग्नेंसी है कोई बीमारी नहीं… समझे !!”
“लेकिन मै तो पहली बार ही पापा बनने जा रहा हूँ ना !”
“मै कुछ नहीं जानती… मुझे पंखुड़ी की रिसेपशन में जाना है मतलब जाना है !”
पिया ज़िद करती रही और समर उसे मनाने की कोशिश करता रहा लेकिन अपनी ज़िद के आगे पिया ने समर की नहीं चलने दी…
और मन मार कर पिया को साथ लिए समर को उस पार्टी में जाना पड़ा….
वहाँ पंखुड़ी से मिल कर पिया एक तरफ लगी टेबल पर बैठ गयी और समर उससे पूछ पूछ कर खाने पीने का सामान ला कर उसके लिए रखता रहा..
समर अधिकतर फ्रूट सैलेड और जूस ही लाकर पिया के सामने रख रहा था जिन्हें देखकर ही पिया को खाने का मन नहीं कर रहा था..
” आप रहने ही दीजिए मंत्री जी मैं खुद जाकर देख लूंगी कि मुझे क्या खाना है.. !”
” अरे ऐसे कैसे..? बताओ ना तुम क्या खाना चाहती हो ? मैं वहीं ले आऊंगा !”
वो उठ कर जाने का था कि पिया ने समर की बांह पकड़ ली और उसे अपने सामने बैठा लिया..
” आपसे कुछ बात करनी है मंत्री जी ! “
“कहो ?”
“आजकल कुछ दिनों से नाराज़ से लग रहे थे… सच सच बताना.. बात क्या थीं ?”
समर अपने बालों पर उंगलियां फिराते हुए चुपचाप बैठ गया….
” बोलिए ना मंत्री जी प्लीज.. मुझसे कोई गलती हो गई थी..?”
” उस दिन तुम्हें लेने के लिए तुम्हारे अस्पताल गया था वहां तुम अपने केबिन में मौजूद नहीं थी, लेकिन तुम्हारे टेबल पर मुझे मेरी और शोवन की डीएनए रिपोर्ट मिली !
हो सकता है यह बात बुरा लगने वाली ना हो, लेकिन मुझे यह बात बुरी लगी कि तुमने मुझसे पूछा क्यों नहीं? और नहीं भी पूछा तो चलो कोई बात नहीं चुपके से करवा लेती, लेकिन तुमने इसमें पंखुड़ी की मदद ली!
अब तुम खुद सोच कर देखो कि पंखुड़ी हमारे बारे में क्या सोचती होंगी कि हम पति पत्नी के बीच की एक बात ऐसी है जो पंखुड़ी को मालूम है, लेकिन मुझे नहीं मालूम..!”
” 1 मिनट… !! मतलब आपको यह लग रहा था कि मैंने पंखुड़ी की मदद से आपकी और शोवन की डीएनए जांच करवाई है ?”
समर सवालिया नजरों से पिया की तरफ देखने लगा..
” मंत्री जी प्लीज मुझ पर विश्वास कर लीजिएगा..!
इस डीएनए जांच के बारे में मुझे भी कुछ मालूम नहीं था | पंखुड़ी ने आपसे बात की और आपकी और शोवन की जांच करवा लेी |
लेकिन इस बारे में उसने मुझे भी जांच होते तक कुछ नहीं बताया था | जब टेस्ट की रिपोर्ट सामने आ गई, तब उसने मेरे सामने वो रिपोर्ट्स रखी थी और मैं हड़बड़ी में उन रिपोर्ट्स को अपनी टेबल पर ही भूल कर चली गई..! हां यह जरूर मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई ! क्योंकि आप की जगह अगर हॉस्पिटल स्टाफ के हाथ में भी वो रिपोर्ट्स आ जाती तो भी सही नहीं होता!
इनफैक्ट जब पंखुड़ी ने मुझसे यह कहा था कि मैं क्यों डीएनए टेस्ट नहीं करवा लेती, तब मैंने ही उसे मना किया था कि मैं आप पर विश्वास करना चाहती हूं, किसी और जांच रिपोर्ट पर नहीं !”
समर को पिया की बातों पर विश्वास हो रहा था उसने धीरे से पिया के हाथों पर अपना हाथ रख दिया…
पिया भी मुस्कुरा उठी…
” हम दोनों से अक्सर ये गलती हो जाती है.. हम एक दूसरे से पूछे बिना अपने मन में कई बातें सोच लेते हैं, और तय कर लेते हैं कि सामने वाला ऐसा ही होगा..
वैसे यह सिर्फ हम दोनों के साथ ही नहीं बल्कि ज्यादातर लोगों के साथ होता होगा इसी वजह से तो गलतफहमियां पैदा होती है..
और अगर समय रहते ये गलतफहमियां सुलझा ना ली गयी तो ये जीवन भर का नासूर बन जाता है !!
अगर हम सच में किसी से प्यार करते हैं तो उसे समझना क्यों नहीं चाहते ? हम क्यों ज़बरदस्ती उस पर अपना गुस्सा थोपने लगते हैं | जबकि हम खुद अंदर से इस बात को जानते रहते हैं कि हम गलत हैं और सामने वाला सही | बावजूद अपने झूठे अहंकार को तुष्ट करने के लिए हम बिलावजह के झगडे को बढ़ा कर महाभारत बना देते हैं और फिर जब उस झगडे का अंत होता है तो ज्वार के उतार के बाद वाला सूना समंदर ही बस रह जाता है… !
खाली खाली सा… !”
समर ने हाँ में सर हिला कर पिया की बात का समर्थन किया और आगे बढ़ कर उसे अपने गले से लगा लिया…
“प्रॉमिस करता हूँ कि अब अपनी तरफ से ऐसा कुछ नहीं करूँगा जिससे हमारे बीच कभी कोई गलतफहमी पैदा हो… !”
पंखुड़ी और शेखर हर किसी से मिलते जुलते आगे बढ़ रहे थे… शेखर के साथ काम करने वालों के साथ शेखर कुछ बातों में लग गया और पंखुड़ी पिया के पास चली आयी…
“क्या हुआ पिया ? तेरी तबीयत कुछ सही नहीं लग रही..!”
पिया ने मुस्कुराकर पंखुड़ी को धीरे से गले से लगा लिया..
” तू मौसी बनने वाली है..!”
“ओह्ह ओह्ह… बहुत सही है यार.. इसका मतलब तो यह हुआ कि शोवन तुम दोनों के लिए बहुत लकी रहा..! उस के आते ही तुम दोनों के जिंदगी में भी खुशियों की बहार डबल हो गई..! बहुत-बहुत बधाइयां पिया.. !
मैं बहुत खुश हूं तेरे लिए |”
” और मैं तेरे लिए..! पिछले 2 साल से तू शादी के लिए लड़के ढूंढ रही थी और देख फाइनली कलेक्टर मिल गया.. !”
“हाँ यार ! सच कहूं तो मैं लड़के ढूंढ ढूंढ कर परेशान होने लगी थी और इस रिश्ते को भी देखा जाए तो मॉम ने हीं ढूंढा ! मम्मी के चक्कर में गलतफहमी हुई और यहां रिश्ता हो गया! खैर…
वैसे यह बात सही है, कभी-कभी हम बच्चों को अपने बड़े-बड़े निर्णय अपने माता-पिता पर छोड़ देना चाहिए और मुझे लगता है ऐसा करके हम अपनी जिंदगी को ज्यादा आसान कर लेते है..!
मुझे याद है जब मैं कॉलेज फर्स्ट ईयर में थी मेरे अंदर अचानक से एक रात फेमिनिज्म ने अंगड़ाई ली… मुझे जबरदस्ती की चीजों का भूत सवार हो गया था..! मुझे लगता था मुझे अपने हिसाब से कपड़े पहने हैं…
फुल स्पीड में बाइक चलानी है ! लड़कों के जैसे रात में इधर-उधर बेमतलब घूम कर टाइम वेस्ट करना है..!
लेकिन अब जब मैं छब्बीस की हो चुकी हूँ, एक मेच्योर एज में पहुँच चुकी हूँ.. मुझे ये सारी चीज़े बड़ी बेमानी सी लगने लगी है…
अब समझ में आता है कि जिंदगी का मतलब है खुश रहना आपको जिन चीजों से खुशी मिलती है वह जरूर कीजिए लेकिन बिना मतलब किसी दूसरे को कुछ साबित करने के लिए अपने आप को मत बदलिए…
शेखर बहुत अच्छे हैं बहुत सुलझे हुए और समझदार हैं..!
” समझ में आ रहा है.. !
उनकी संगत का असर तुझ पर भी दिखने लग गया है, सिर्फ 4 दिन की बातों में ही उन्होंने तुझे कितना कुछ बदल दिया | अच्छा है बस ऐसे ही खुश रहे और तेरी खुशी हमेशा सलामत रहे… और अब जल्दी ही तू भी मुझे मौसी बनने की खुशखबरी सुना देना समझी..!”
पिया बात करते हुए अपनी जगह से खड़ी हुई थी कि तभी समर भागता हुआ उसके पास पहुंच गया..
” क्या हुआ? तुम खड़ी क्यों हुई ? तुम्हें कुछ चाहिए था तो मुझे बताना था ना?”
” अरे मुझे कुछ नहीं हुआ बाबा..! मैं बैठे-बैठे थक गई थी | पैर सुन्न होने लगे थे, इसलिए थोड़ा सा खड़ी हो गई..!”
” ओके तुम बैठो मैं तुम्हारे लिए जूस लेकर आता हूं..!”
” मंत्री जी यह सामने जूस रखा तो है, मैं अब तक इसे भी कहां खत्म कर पाई हूं..?”
” अब इसे मत पीना ! अब ये फ्रेश फ्रूट जूस नहीं रहा… इसे मैं पी लूंगा | तुम्हारे लिए मैं फ्रेश बनवा कर ला रहा हूं, और चुपचाप उसे खत्म कर लेना……|”
“हे भगवान !! क्या करूँ मै इनका… जब से इन्हें खुशखबरी मिली है तब से बावले हो गए हैं…!”
पंखुड़ी भी मुस्कुरा उठी…
“ये तो बड़ी प्यारी सी बात है ना पिया कि तेरे मंत्री जी एक बार फिर तेरे लिए बावले हो गए है.. बस इतना ध्यान रखना कि इस बावलेपन का नतीजा कहीं शोवन को ना भुगतना पड़ जायें… !”
पंखुड़ी की बात सुन पिया सोच में पड़ गयी…. समर अकेला ही तो बावला नहीं हुआ था… वो भी तो अपनी ख़ुशी में मगन आज सुबह से ही शोवन की बातें भुला बैठी थीं…
ना ही शाम में उसे सूप दिया और ना स्कूल की बातें पूछीं…..
अचानक पिया के चारों तरफ उदासी के मनहूस से बादल छाने लगे…
शेखर दोस्तों को छोड़ पिया और पंखुड़ी की तरफ चला आया…
उसी वक्त रिदान और लीना भी वहाँ चले आये…
लीना ने आगे बढ़ कर शेखर को बधाई दी…
“अब तू भी किसी को पकड़ कर शादी कर लें मरजीना.. ! मै तो तेरे हाथ से निकल गया… !”
” तू हाथ से नहीं भी निकलता ना तो भी तुझसे कभी शादी नहीं करती.. !”
“क्यों भाई.. शेखर तुझे वो काँटों वाला जानवर साही लगता है क्या.. जो उससे शादी करने से तुझे कांटे गड़ जाते… ?”
“मुझे कुत्तो से एलर्जी है.. !”
लीना ने कहा और ज़ोर से हंसने लगी.. उसकी बात सुन पंखुड़ी भी हंसने लगी… दोनों ने एक दूजे को ताली मारी और शेखर रिदान उन दोनों को देखने लगे..
शेखर के माथे पर सिकुड़न देख रियान धीरे से पूछ बैठा…
“बहुत दोस्ताना लगता है.. !”
“मुझे तो पुराना याराना लगता है… !”
शेखर ने भी उसी टोन में कहा… और उन दोनों की बात सुन लीना और पंखुड़ी मुस्कुरा उठी… उन सब को हँसते मुस्कुराते छोड़ पिया उन सब से बिदा लेकर घर के लिए
निकल गयी…
उसे अचानक शोवन की बहुत याद आने लगी थीं…
रास्ते भर उसने समर से भी इस बारे में कुछ नहीं कहा…
घर पहुँचते ही वो सीधा शोवन के कमरे में पहुँच गयी…
शोवन अकेला अपने कमरे में बैठा अपने छोटे से टॉय के साथ बात कर रहा था… कुछ देर को उसके कमरे के दरवाज़े पर पिया थम कर खड़ी रह गयी… उसकी आँखों में ममता और पश्चाताप के आँसू आ गए…
वो डॉक्टर थीं, वो अच्छे से समझती थीं कि गर्भावस्था में हॉर्मोन्स के लेवल बढ़ते घटते रहते ही है..
जिसके कारण अनावश्यक व्याकुलता और भावुकता से स्त्रियों को दो चार होना पड़ता है…
पल भर को पिया को लगा उसकी कोरी भावुकता भी कहीं हार्मोनल मूड स्विंग का छलावा तो नहीं, लेकिन नहीं… शोवन को देखते ही उसके अंदर भावनाओँ का जो ज्वार भाटा हिलोर मारना शुरू किया उसकी कोई कैफियत उसके पास नहीं थीं…
वो तेज़ी से आगे बढ़ कर शोवन के पास पहुँच गयी…
उसका दिल कर रहा था वो शोवन को गले से लगा लें, लेकिन अब भी उसके और शोवन के बीच एक हलकी सी दूरी बनी हुई थीं…
शोवन जितना समर से हिला हुआ था उतना पिया से नहीं खुला था… अब भी उसके मन में पिया को लेकर संकोच कि एक महीन सी दीवार खड़ी ही थीं !
पिया चुपके से उसके पास बैठ गयी… शोवन ने उसे देखा और वापस अपने खिलौने में मगन हो गया…
पिया की आँखों में आँसू आ गए…..
“शोवी… तुमसे एक बात कहूं… ?”
“यस आंटी.. !”
“क्या तुम मुझे मॉम बुला सकते हो… ? और अपने हीरो अंकल को डैड… ?”
शोवन अपनी गहरी नीली आँखों से पिया को लगातार देखें जा रहा था.. उसे शायद पिया की बात पर यक़ीन नहीं हो रहा था…
“मै सच कह रही हूँ. शोवन ! बोलो. जवाब दो.. !”
इतनी देर से कमरे के दरवाज़े पर चुपचाप हाथ बांधे खड़े समर को लगा कि अब उसे भी उन लोगों के पास चला जाना चाहिए….
वो भी पिया के पास बैठ गया..
“बोलो शोवन… तुम क्या चाहते हो… ?”
शोवन की आंखें भीग गयी और उसने धीमे से अपनी जेब से रुमाल निकाल कर अपने आँसू पोंछ लिए…
पिया के भी आँसू बहने लगे…. समर ने पिया को ना रोने का इशारा किया और आगे बढ़ कर शोवन को अपने पास खींच कर अपनी गोद में बैठा लिया …
शोवन धीमे से समर के गले से लग गया… और समर ने उसे अपनी बाँहों में भर लिया….
पिया भी पीछे से शोवन को पकड़ कर उन दोनों से चिपक गयी….
समर दीवार से टेक लगाए बैठा था.. शोवन उसके गले से लगे हुए ही सो गया और पिया उन दोनों के पास ही बैठी रही…
जब समर ने देखा कि बच्चा गहरी नींद सो गया है.. उसने उसे बिस्तर पर लेटा दिया… और पिया की बाँहों को थाम कर उसे खड़ा कर दिया…
वो दोनों कमरे से निकलने वाले थे कि पिया ने समर को टोक दिया…
” शोवन को अब हम अपने कमरे में अपने साथ ही रख सकते हैं क्या ? वैसे भी हमारा कमरा काफ़ी बड़ा है.. उसके एक .तरफ मै शोवन ने खेलने के लिए भी इंतज़ाम कर लूंगी… कम से कम दस साल का होने तक तो हमारे साथ हमारे कमरे में सो लें, फिर आगे अगर उसे ज़रूरत लगी तो उसका दूसरा कमरा तैयार कर लेंगे…
और मंत्री जी… एक बात और कहना चाहती थीं….
क्या हम शोवन को गोद लें सकतें हैं… ?”
समर ने पिया की तरफ देखा और हाँ में गर्दन हिला दी…
“वैसे सच कहूं पिया तो ये मेरी भी मर्ज़ी थीं कि हम शोवन को लीगली एडॉप्ट कर लें… ! तुमने मेरे दिल कि बात कह दी…
शायद इसी को कहते हैं जीवनसंगिनी होना…
मेरे दिल की बात बिना कहें ही समझ जाती हो..
तुम अक्सर मुझे मुझसे भी ज्यादा प्यार कर जाती हो… “
“क्या बात है मंत्री जी… आप तो आजकल शायर हुए जा रहे हैं… ?”
“तुमसे प्यार हुआ था और अब हम इश्क़ फरमा रहे हैं,
बस इसीलिए आजकल मंत्री जी शायर हुए जा रहे हैं.. !”
“तो अब अपने अंदर के मिर्ज़ा ग़ालिब को सुला कर अपने अंदर के डैड को जगाइए..
और बच्चे को उठा कर धीरे धीरे सीढ़ियां चढ़ जाइये…..”
समर ने पिया को एक तरफ किया और शोवन को धीरे से गोद में उठा लिया…. उसे साथ लेकर दोनों अपने कमरे में पहुँच गए…
पलंग में एक तरफ उसे लेटा कर समर कपड़े बदलने चला गया और शोवन के बालों पर हाथ फेरती बैठी पिया किसी गहरे ख्याल में खो गयी….
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क्रमशः
aparna….
दिल से…
जानती हूँ आज का भाग वाकई छोटा हो गया…. आप लोगों को 20 मिनट के पार्ट्स छोटे लगते हैं तो ये तो वाकई सिर्फ दस मिनट का ही है लेकिन यक़ीन मानिये क्लिनिक की भागदौड़ के साथ इस सर्दी और गले के दर्द ने बेहाल कर दिया है….
बस इसलिए ये भाग ज्यादा नहीं लिख पायी…
कोशिश रहेगी की कल ही इसकी भरपाई कर सकूँ…
पढ़ते रहिये, मस्त रहिये, मगन रहिये…
मुझे पढ़ने और सराहने के लिए आपका भर भर कर आभार शुक्रिया नवाज़िश….
और हाँ जी भूल ना जाना… एक छोटा सा पाप सौ पुण्य पर भारी पड़ जाता है…
जानती हूँ मेरी कहानी पढ़ कर बहुत पुण्य कमा रहे आप लोग लेकिन समीक्षा ना देकर जो पाप काट लेते हैं ना फेर उसका कोई रिटर्न फ़ाइल नहीं होता….
इसलिए पुण्य का टैक्स बचाओ…
समीक्षा भर कर !!!
aparna….
