
जीवनसाथी – 2 भाग – 65
“तुम जानते हो एक राजा और एक आम आदमी में क्या फर्क होता हैं… ?”
नन्हे से शौर्य ने न में गर्दन हिला दी…
“एक राजा राजा होता हैं, उसके पास ढ़ेर सारे अधिकार होते हैं, वो कुछ भी कर सकता हैं.. और राजा को होना भी ऐसा ही चाहिए…!
बलशाली, महा अभिमानी, शूर वीर, क्रूर, निरंकुश, चक्रवर्ती, सत्ता लोलुप, दिग्विजयी, गर्वित, स्वाभिमानी, हठी और पराक्रमी… !”
“ये सब क्या होता हैं मामा सा !”
“ये सब राजा की खूबियाँ होती हैं लाड़ कुंवर सा !”
“मतलब ये खूबियाँ डैड में भी हैं.. !”
“हाँ इनमे से कुछ तो हैं…. आपके डैड भी बलशाली हैं गर्वित हैं स्वाभिमानी हैं पराक्रमी भी हैं लेकिन बाकी बची खूबियां उनमे नहीं हैं जो एक सफल राजा में होनी चाहिए !
… वर्ना उसके राज्य को छिन जाने में वक्त नहीं लगता.. !
जब भगवान ने ही आपको राजा बना कर पैदा किया हैं तो फिर एक आम आदमी जैसा व्यवहार क्यों करना… ?
अगर राजा निरंकुश नहीं होगा तो राज्य कैसे करेगा ? हठी नहीं होगा तो अपने निर्णय पर अडिग कैसे होगा… ?
सुनो हम तुम्हें एक कहानी सुनाते हैं….
बहुत साल पहले एक राजा था, उसे सिर्फ स्वयं पर विश्वास था, लोग कहते थे वो बहुत क्रूर था.. क्रूरता की पराकाष्ठा था… उसने तय किया था कि वो समस्त भारतवर्ष को जीत कर अपना बना लेगा…
उसने अपने आसपास के राज्य में ये संदेश भिजवा दिया कि जो उसके अधीन आया उसकी जान बख्शेगा और जो नहीं आया उन्हें या तो बंदी बना लेगा या मार डालेगा….
बहुत से राजाओं ने डर कर आत्मसमर्पण कर दिया… अब एक बात बताइये लाड़ कुंवर सा, वो राजा गलत था या आसपास के समर्पण करने वाले राजा.. ?”
शौर्य को इस बात का कोई जवाब नहीं सूझा…
“आप ही बता दीजिये… !”
“वो क्रूर राजा सही था… उसने तो अपना राजधर्म निभाया लेकिन बाकी फिसड्डी राजा उसके नाम से डर कर आत्मसमर्पण करने लगे, बताओ ये कैसा राजधर्म हुआ… ?
क्षत्रियो का धर्म हैं या तो युद्ध करके शत्रु को परास्त कर दे या खुद अपने प्राणों की आहुति दे दे…. !
एक राजपूत क्षत्रिय कभी झुकता नहीं हैं… !
याद रखिये कुंवर सा, राजपूतो को झुकना शोभा नहीं देता…
साम दाम दंड भेद ये राजाओं के आचरण होते हैं… कभी झूठ भी बोलना पड़ता हैं, कभी क्रूरता दिखानी होती हैं, कभी कभी अपने सम्मान की रक्षा के लिए सामने वाले के सम्मान को अपने जूतों तले रौंदना भी पड़ता हैं…. लेकिन ये सब राजधर्म होता हैं कुंवर सा राजधर्म !!
राजा का घमंड ही उसका परिचय होता हैं… आपके डैड गलत हैं ये हम नहीं कह रहें पर उनकी नीतियों से हम सहमत नहीं हैं… !
आपके डैड हर किसी पर विश्वास कर लेते हैं, हर किसी को अपना बना लेते हैं… !
हर किसी क्षेत्र में सोचते हैं उनके प्रेम व्यवहार से बात बन जाएंगी पर यहीं पर राजा अजातशत्रु गलत कर जाते हैं… !
अब देखो ना अपने कामों कि व्यस्तता में रानी हुकुम के प्रति भी तो उदासीन हो गए हैं…
रानी हुकुम महल में अकेली उदास सी रहती हैं….
भोले अबोध से शौर्य को उसकी माँ की याद आ गयी और फिर उसका मन इन कहानी सुनाने वाले इन भले से मामा जी की बातों में नहीं लगा….
“मैं मॉम के पास जाऊं… ?” उसके भोले सवाल को सुन क्रूर अपूर्व के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान चली आई…
मुस्कुरा कर अपूर्व ने हामी भर दी… -“चलिए हम ही लें चलते हैं… ! लेकिन सुनो कोई पूछे किस के साथ थे तो क्या कहोगे… हमनें बताया था ना.. ?”
शौर्य ने हाँ में गर्दन हिला दी और मुस्कुरा दिया…
अपूर्व ने शौर्य को उसके कमरे के बाहर छोड़ा और लम्बे डग भरता हुआ वहाँ से निकल गया…
बाँसुरी के कमरे में उस वक्त रेखा और रूपा दोनों मौजूद थी…
तीनों ही साथ बैठी बातों में लगी थी कि जया भी सहायिका के साथ कुछ खाने का समान लिए अंदर चली आई..
उसी वक्त शौर्य भी भागता हुआ सा आया और बाँसुरी की गोद में बैठ गया…
बाँसुरी ने बड़े प्यार से उसे अपनी गोद में बैठा कर प्यार कर लिया… शौर्य उसके गले में अपनी बाहें डाल कर उससे लिपट गया…
“मेरी छोटी सी किशमिश.. क्या हुआ लड्डू, किसी ने कुछ कहा ? इतना डरे हुए से क्यों हो… ?”
बाँसुरी ने शौर्य को बाँहों में भर लिया और प्यार से उससे सवाल करने लगी…
” मॉम… डैड कैसे राजा हैं… ?”
शौर्य का सवाल सुन बाँसुरी के चेहरे पर एक मुस्कान चली आई…
“तुम्हारे डैड ऐसे राजा हैं जैसा कोई राजा आज तक नहीं हुआ…. तुम्हारे डैड ने भले ही ढ़ेर सारी मुश्किलों का सामना किया लेकिन कभी अपने निर्णय से डिगे नहीं… उनके जैसा शूरवीर पराक्रमी और कोई नहीं हुआ, बावजूद वो किसी को मार कर जीतने में यक़ीन नहीं करते बल्कि वो समाने वाले के दिल को यूँ जीत लेते हैं कि सामने वाला खुद उन पर अपना सर्वस्व त्याग जाता हैं… !’
बाँसुरी ने प्यार से शौर्य के गालों को चूम लिया… लेकिन इन सारी बातों के बीच रेखा तुरंत उठ कर दरवाज़े तक पहुँच गयी… लेकिन कॉरिडोर के दोनों तरफ देखने पर भी उसे कोई नज़र नहीं आया….
जाने इतनी सी देर में अपूर्व कहाँ जा छिपा था… रेखा तुरंत दरवाज़े से वापस लौट आई..
” शौर्य एक बात बताओ ? अभी किसके साथ थे तुम… ?”
रेखा के सवाल पर शौर्य ने रेखा को देखा और उछल कर बाँसुरी की गोद से उतर गया…
“किसी के साथ नहीं… मैं तो अकेला आया हूँ काकी सा !”
“झूठ तो नहीं बोल रहें हो ना शौर्य ? सच बताना कुंवर ?”
“मैं दोस्तों के साथ खेल रहा था… ?”
“कौन से दोस्त… ?”
रेखा उसकी बाहें पकड़ कर पूछ रहीं थी और शौर्य अपनी तोतली सी ज़बान में कुछ अजीबोगरीब नाम लेकर उसे चिढ़ाता जा रहा था…
उन सब की बातों के बीच जया ने रूपा और रेखा के सामने चाय के प्याले रख दिये और बाँसुरी के सामने निम्बू पानी रख दिया…
सभी को मंदिर निकलना था इसलिए खाने के लिए सभी ने मना कर दिया…
रूपा ने शौर्य को अपने पास बुलाया और उसे गोद में बैठा कर प्यार से समझाने लगी…
“हमारे लाड़ कुंवर अब अपनी मॉम की गोद में ज़रा उछलकूद कम मचाया कीजिये…. !”
शौर्य ने आश्चर्य से रूपा की तरफ देखा…
“क्यों रानी माँ ?”
“क्योंकि अब आपकी माँ एक बार फिर से एक छोटा राजा अजातशत्रु या छोटी सी बाँसुरी लाने वालीं हैं… इसलिए हम सब को मिल कर उनकी ज्यादा देखभाल करने की ज़रूरत हैं…
अच्छा आप बताओ कि आपको क्या चाहिए… ?”
शौर्य कुछ देर तक तो रूपा को देखता रहा फिर कुछ नहीं चाहिए बोल कर वहाँ से बाहर भाग गया…
उसके जाते ही सभी औरतें मुस्कुरा उठी….
सब अपनी बातों में लगी थी लेकिन बाँसुरी का मन शौर्य की बातों में लगा था, उसने सहायिका को शौर्य के पीछे भेज दिया…
कुछ देर बाद पंकजा अंदर आई और उसने बाँसुरी को देख बता दिया कि हफ्ते भर के टूर के बाद राजा अजातशत्रु वापस आ गए हैं…
वहाँ उपस्थित सभी के चेहरे पर मुस्कान चली आई… राजा साहब का आना ही ऐसा था कि उनके आते ही पूरी महफ़िल में जान चली आती थी…
राजा ने आते ही अपनी भाभी के पैर छुए और बाँसुरी की तरफ देख मुस्कुरा उठा…
रेखा रूपा और जया एक एक कर वहाँ से निकल रहें थे कि रूपा पल भर को ठिठक कर रूक गई….
“कुमार… अब हमारी देवरानी को सताइयेगा नहीं… ! अब वापस उनके आराम करने के दिन आ गए हैं…
राजा ने सवालिया नज़रों से रूपा फिर बाँसुरी की तरफ देखा…
बाँसुरी ने शरमा कर नज़रे झुका ली…
मुस्कुरा कर राजा ने रूपा की तरफ देखा…
“बहुत बहुत बधाई हो आपको रानी माँ… !”
“आपको भी कुमार.. ! अच्छा सुनिए, आज गुरुवार हैं और आज ही हम सबका देवी मंदिर जाना तय हुआ है, बाँसुरी की खुशखबरी के बाद उन्हें दर्शन के लिए लेकर जाना है, और वैसे कुलदेवी दर्शन की इच्छा बाँसुरी की ही थी… !”
“जैसा आप लोग सहीं समझे… बस जाने से पहले प्रेम को बता दीजियेगा, आजकल वो महल की सुरक्षा को लेकर कुछ ज्यादा ही चिंतित रहने लगा है और वही क्या मुझे भी यह डर सताता है ! इसलिए आप सभी अपने पर्सनल गार्ड्स के अलावा प्रेम की सिक्योरिटी में से लोगों को लेकर जाएंगे !
आप लोग लाइन में बीच में चलेंगे आप लोगों के दोनों तरफ सिक्योरिटी वाले जाएंगे…!”
” क्या बात है कुमार…? आप तो बिल्कुल बदल गए हैं शादी के बाद !
याद है आपकी शादी से पहले आप महल में कैसे झूठ बोल कर अपने दोस्तों की शादियों में इधर-उधर अकेले मंडराते फिरते थे ! महल को अपने राजकुमार की कितनी फिक्र होती थी कि आप बिना किसी सुरक्षा स्टाफ के अकेले चले गए हैं, लेकिन कहीं आपके साथ आपके गार्ड की फौज न भेज दी जाए इस डर से आप अक्सर झूठ बोल कर निकल जाते थे…!”
” उसी सब में तो मेरी मुलाकात मेरी हुकुम से हुई वरना सोचिए भाभी साहब अगर मैं उस समय रायपुर ना गया होता तो उस ट्रेन में कभी मेरी मुलाकात बांसुरी से नहीं हुई होती…
रायपुर में दोस्तों के साथ जो भी घटा अगर वो ना घटा होता तो मैं कभी भी मुंबई जाकर पिंकी के उस फ्लैट में नहीं रुकता !
और अगर पिंकी के फ्लाैट में नहीं रुकता तो बांसुरी के साथ उन स्वर्णिम दिनों को जीने का मौका नहीं मिलता… आज भी मेरी जिंदगी के सबसे खूबसूरत दिन है वह..!
” अब तो बांसुरी शादी होकर आ गई है ! अब उसके साथ रहने वाले दिनों से भी क्या ज्यादा खूबसूरत वो दिन थे..!
” बांसुरी के साथ बीता हर एक दिन मेरी जिंदगी का बेहद खूबसूरत दिन है भाभी सा, लेकिन शादी के पहले उन कुंवारे दिनों की बात ही कुछ अलग होती है.. खैर ये आपको कैसे पता चलेगा आप और हमारे युवराज भैया ने तो बस एक दूसरे को देखा झट पसंद किया और चट शादी कर ली… कोर्टशिप जैसी चीज तो आपको और भैया को पता ही नहीं है..!”
“हाँ हाँ सारा रोमांस बस आप और आपकी हुकुम के हिस्से ही आया है… है ना.. !”
मुस्कुरा कर रूपा ने कहा और हँसते हुए बाहर निकल गयी…
” बस घंटे भर में निकलेंगे बाँसुरी… !”
बाँसुरी ने हामी भरी और राजा की तरफ देखने लगी…
“अभी अचानक मंदिर क्यों जाना है… ?”
“बस मन कर रहा देवी माँ से अपने और बच्चे के लिए आशीर्वाद लें लूं.. !”
मुस्कुरा कर राजा ने बाँसुरी के सर पर हाथ रखा और धीमे से हिला दिया… -“अपना ध्यान रखा करो हुकुम… बहुत कमज़ोर हो गयी हो.. !”
“तबियत सही नहीं है ना साहब ! शायद इसलिए आपको कमज़ोर लग रहीं हूँ… और ऐसे घूर घूर कर क्या देख रहें हैं.. नज़र लगा देंगे क्या.. !”
” देख रहा हूं कि तुम्हारा चेहरा हल्का सा बदला हुआ सा लग रहा है…!”
बाँसुरी ने अपने गालों पर हाथ रख कर देखा और राजा को प्यार से घूरने लगी…
” आपकी नजर का फेर है, वरना मेरे चेहरे में कुछ भी नहीं बदला…!”
” बदला है हुकुम !! तुम्हारा वह पैना सा कैनाइन (दांत) जिसे अक्सर तुम बातों के बीच या कुछ सोचते हुए अपनी जीभ से छुआ करती थी… वह दांत वैसा नहीं लग रहा जैसा था… या शायद तुम्हारी वह आदत ही तुम भूल गई हो..!”
” हो सकता है साहब एक्सीडेंट के वक्त वो दांत थोड़ा बहुत कहीं से टूट गया हो, उस वक्त तो कहां-कहां क्या क्या टूटा फूटा कुछ याद ही नहीं है.. मुझे तो लगता है मैं बहुत सारी बातें भी भूलने लगी हूं…!”
राजा बहुत ध्यान से बांसुरी की तरफ देख रहा था…. वो धीमे कदमों से आकर उसके सामने बैठ गया उसने धीरे से बांसुरी की हथेली अपने हाथों में थाम ली..
” परेशान मत हो हुकुम मैं तुम्हारे साथ हूं… पति पत्नी का साथ सिर्फ उनके स्वस्थ रहने तक ही तो नहीं रहता ना ! मैं समझता हूं उस एक्सीडेंट ने तुम्हारे जीवन में बहुत बड़ा बदलाव किया है !
सिर्फ तुम्हारे चेहरे मोहरे ही नहीं तुम्हारे स्वभाव और आदतों में भी बहुत सारा बदलाव मैं देख पा रहा हूं ! लेकिन साथ ही में यह भी समझता हूं कि दिमाग पर लगी गहरी चोटें अक्सर जिंदगी में इस तरह के बदलाव ले आती हैं ! लेकिन घबराओ मत मैं हर कदम पर तुम्हारे साथ हूं ! और मैं पूरी कोशिश करूंगा कि धीरे-धीरे तुम्हें अपनी पुरानी वाली बांसुरी बना लूं…
अच्छा तुम्हें याद है जब हम पेरिस गए थे… !”
सामने बैठी बांसुरी अपनी आंखें खोल कर राजा के चेहरे को देखने लगी उसकी आंखों को देख कर ही राजा को समझ में आ गया कि शायद बांसुरी पैरिस वाली बात को कभी रिकॉल नहीं कर पा रही है.. उसने बांसुरी की हथेली पर धीरे-धीरे अपने हाथों की उँगलियों को चलाना शुरु किया और बांसुरी की आंखों से धीरे से दो बूंद आंसू टपक पड़े…
” आई एम सॉरी साहब ! हम चाह कर भी सब कुछ याद क्यों नहीं कर पाते हैं ! अब भी बहुत सी ऐसी बातें हैं जो हमें याद नहीं आ पाती… | महल को देखकर यहां के लोगों को देखकर इन सब से मिलकर हमें ऐसा लगता है कि हम इन सब के बारे में जितना याद करते हैं उससे कहीं ज्यादा हमारे दिमाग में यादें घूम रही हैं | लेकिन ऐसा लगता है यह सारी यादें हमारे दिमाग के अंदर किसी काले अंधेरे कमरे में कैद होकर रह गई है | और हम चाह कर भी उसका दरवाजा खोल नहीं पा रहे हैं….|
हमारी मदद कीजिए साहब | हम महल में हर किसी से यह बात कह भी नहीं सकते कि, हम बहुत सारी बातें भूल चुके हैं… |
… हालाँकि यह बात है कि हमने महल के लोगों को याद रखा है, हमें अपने सारे नाते रिश्तेदार याद है मायके के भी और ससुराल के भी…| लेकिन उनकी बातें भूलते जा रहें हैं !
अभी कल ही वीना दीदी से बात हो रही थी… उन्होंने बताया कि पापा की तबीयत अब पहले से काफी बेहतर है… हमारी मां और पापा वीणा दीदी और जीजाजी के साथ रामेश्वरम घूमने जा रहे हैं… !
दीदी हमसे भी बार-बार कह रही थी कि साथ चलो, लेकिन हम जानते हैं कि इस वक्त हमारी तबीयत इतनी अच्छी नहीं है कि हम कहीं भी ज्यादा स्ट्रेस लेकर घूम सके…!”
राजा चुपचाप बैठा बांसुरी को ध्यान से देखते हुए उसकी एक एक बात सुन रहा था..
” साहब हम जानते हैं, आप हमारी पल-पल मदद करेंगे | हर कदम पर आप हमारे साथ रहेंगे, बस आप धीरे-धीरे सब याद दिलवाते जाइएगा और हमें याद आता जाएगा..!”
” बांसुरी सबसे पहले तो अपने बात करने के तरीके को याद कर लो ! तुम कभी भी मैं के लिए हम नहीं बोला करती थी…!”
बांसुरी ने अपनी पलकें उठाकर राजा की तरफ देखा उसी वक्त उनके कमरे के दरवाजे पर दस्तक होने लगी…
” अंदर आ जाओ..!”
राजा की गहरी लेकिन तेज आवाज उस कमरे में गूंज उठी! जाने क्यों बांसुरी को एक पल के लिए राजा को देखकर डर सा लगा लेकिन फिर उसने खुद को संभाल लिया ! पंकजा दरवाजा खोलकर अंदर चली आई…
” रानी साहब बाहर बड़ी रानी और रेखा बाईसा आपका इंतजार कर रही है… गाड़ियां लग गई है मंदिर जाने के लिए!”
बांसुरी ने राजा की तरफ देखा और राजा ने गर्दन घुमा कर उसे जाने का इशारा कर दिया…
बांसुरी धीमे से उठकर बाहर की तरफ बढ़ने लगी कि उसी समय बाहर से भागता हुआ शौर्य आ गया और बांसुरी से टकराते टकराते बचा | बांसुरी ने उसे प्यार से गोद में उठाने का प्रयास किया कि तभी राजा ने उसे रोक दिया…
” बांसुरी रुको !! अभी अपनी सेहत का ख्याल रखो.. शौर्य को इस तरह खड़े हुए गोद में मत उठाओ..!”
राजा ने बांसुरी को क्यों रोका यह बात बांसुरी भी समझ गई ! उसने पंकजा की तरफ इशारा किया और पंकजा ने शौर्य को गोद में ले लिया | बांसुरी के साथ ही पंकजा और शौर्य भी मंदिर के लिए निकल गए | और राजा उन लोगों के पीछे दरवाजे तक आकर खड़ा हो गया | वह जाती हुई बांसुरी को बड़ी गहरी नजरों से जाते हुए देखता रहा….
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समय का चक्र गोल-गोल घूमता हुआ आखिर मोबाइल पर मौजूद उस फोटो पर रुक गया और फोटो क्लियर होकर खुल गई लेकिन जब तक में सुनील उस तस्वीर को देख पाता मोबाइल ब्लिंक होकर पूरी तरह से बंद हो गया…
सुनील का फोन पूरी तरह से डिस्चार्ज हो चुका था उसने इधर-उधर चार्जिंग पॉइंट ढूंढने की कोशिश की लेकिन उसे वहां आसपास कोई चार्जिंग नहीं दिखा ! तब तक मैं अनिर्वान और चंद्रभान की बहस बढ़ती जा रही थी | अनिर्वान ने चंद्रभान की तरफ उंगली दिखा कर उसे एक तरह से धमकी दे डाली…
” आपके ऊपर काफी समय से नजर थी मेरी…. मुझे यह तो पता था कि आप बहुत सारे कामों में लिप्त है लेकिन उन कामों में आपका नाम साबित करने के लिए सबूतों की जरूरत थी, वह भी इकट्ठा करना शुरू कर चुका हूं…
और जिस दिन इन सबूतों से आपका पाप का घड़ा भर गया उस दिन वह पाप का घड़ा फूटे ना फूटे मैं खुद उसे उठाकर फ़ोड़ दूंगा…
याद रखियेगा मेरी बात को..
अनिर्वाण भारद्वाज कभी खोखली धमकी नहीं देता…!”
अनिर्वान वहां से मुड़ने को था कि तभी चंद्रभान के इशारे पर उसके एक आदमी ने पीछे से चाकू का वार अनिर्वान पर करने की कोशिश की…
अनिर्वान ने उसका हाथ पकड़कर एक झटके में मोड़ दिया और वो चाकू अनिर्वान के हाथ में आ गया… अनिर्वान ने एक झटके में सामने पलटकर वो चाकू चंद्रभान के गले पर रख दिया…
” बहुत क्रूर हूं मैं चंद्रभान ! मुझे पल भर भी नहीं लगेगा तेरा गला काटने में लेकिन इस वक्त मैं अपनी वर्दी में हूं और जब तक मैं वर्दी में रहता हूं तब तक हर काम लॉ एंड ऑर्डर के अंदर रहकर करता हूं ! अगर इस वक्त मैं अपनी वर्दी में नहीं होता तो तू भी यहां जिंदा खड़ा नहीं होता!
दूसरी बात आज मुझे देवी मंदिर भी जाना है… इसलिए मंदिर जाने के पहले अपने हाथ ख़ून से नहीं धोऊंगा… !”
अनिर्वान पलटा और जाने को था कि सुनील ने आगे बढ़कर उसके माथे पर अपनी गन रख दी…
” तुम कौन हो.. ? तुम्हारा असली परिचय जानना चाहता हूं मैं..?”
अनिर्वान ने एक नजर अपने बगल में खड़े सुनील की तरफ देखा और उसके हाथ से उसका मोबाइल छीन कर जमीन पर जोर से पटक कर उसपर अपने जूते रखकर बचे खुचे मोबाइल को भी तोड़ दिया…
” जो मोबाइल मौके पर डिस्चार्ज हो जाए, उसका टूट जाना ही बेहतर है…!”
मुस्कुराकर अनिर्वान ने अपने माथे पर तान रखी गन को धीरे से हटाया और वहां से निकल गया….
सुनील और चंद्रभान एक दूसरे की तरफ देखते रह गए….
क्रमशः
aparna….
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