जीवनसाथी- 2/62

जीवनसाथी -2 भाग 62

   पंखुड़ी अपने केबिन में बैठी ऊंघ रही थी… उसने नाईट शिफ्ट की थी और उसके बाद घर जाकर सोई ही थी कि 2 घंटे बीतते ही हॉस्पिटल से स्टाफ नर्स का उसके पास फोन आ गया था, किसी अर्जेंट केस के कारण उसे वापस अस्पताल आना पड़ा था और उस जटिल डिलीवरी को निपटाने के बाद वह वापस अपने कमरे में जाने की जगह केबिन में ही आराम करने के लिए रुक गई थी…. !

   उसके दरवाजे पर नर्स ने दस्तक दी और अंदर चली आई पंखुड़ी इतनी गहरी नींद में थी कि उसे वह दस्तक सुनाई नहीं दी और नर्स ने पास जाकर उसे आवाज देकर उठा दिया ! पंखुड़ी आंखें मलते नर्स की तरफ देखने लगी तभी नर्स ने कहा कि एक सुसाइड अटेम्प्ट का केस आया है तुरंत चलना होगा…

सुसाइड अटेम्प्ट सुनते ही पंखुड़ी की आंखें पूरी तरह खुल गई वह तुरंत अपनी कुर्सी से उठ गयी और अपने केबिन के बाथरूम में घुस गई! उसने अपनी आंखों पर तेज पानी के छींटे मारे और अपने चेहरे को पोंछ कर अपना स्टेथस्कोप लेकर तुरंत अपनी केबिन से बाहर निकल गई…
वह और नर्स एक तरह से भागते हुए उस मरीज को देखने पहुंच गए…

मरीज एक लड़की थी जिसकी उम्र 24 -25 साल की थी… उसने घर पर मौजूद किसी ज़हर को पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी…!
उसके साथ उसके घर वाले उसके माता-पिता भी मौजूद थे लेकिन वह लोग इस स्थिति में नहीं थे कि उनसे उस वक्त कुछ पूछा जाए…!
नर्स के पूछताछ करने पर उसकी मां और पिता ठीक से कोई जवाब नहीं दे रहे थे, लेकिन उस लड़की का इलाज शुरू करने के लिए डॉक्टर और नर्स को यह जानना जरूरी था कि उसने कौन सा जहर पिया है.. तभी उसका एंटीडोट दिया जा सकता था…!

पंखुड़ी ने सबसे पहले उस लड़की के स्टमक वॉश की तैयारी के लिए नर्स को कहा और खुद भी उसके मुंह में ड्रेन डालने की कोशिश में लग गई….

लड़की होश में थी लेकिन कराहते हुए कुछ बड़बड़ा रही थी…

उस लड़की ने एक नजर पंखुड़ी की तरफ देखा और फिर धीरे से कहा..-” मुझे बचा लीजिए डॉक्टर प्लीज..!”

” यह तो तुम्हें पहले सोचना चाहिए था, जब तुमने यह जहर पिया!”

इसके बाद पंखुड़ी ने उसके मुंह में पाइप डाल दी, और उसका स्टमक वॉश करना शुरू कर दिया…
पेट से निकलते ढेर सारे पानी के साथ जहर भी बाहर आने लगा…
उस लड़की की हालत सुधरती देखकर पंखुड़ी उसकी मां के पास पहुंच गई…

” देखिये आंटी !!  मैं समझती हूं आपकी तकलीफ को, किसी भी मां के लिए यह सबसे बड़ा दुख होता है कि उसकी जवान बेटी ने खुद को मारने की कोशिश की है!  लेकिन बात यह भी है कि अगर आप हम लोगों की मदद नहीं करेंगे तो हम आपकी मदद नहीं कर पाएंगे !
.  आपको हमें बताना ही होगा कि इसने कौन सा जहर पिया है जिससे हम उस ज़हर का एंटीडोट इसे दे सकें..!”

उस लड़की की मां रो-रो कर ऐसी बेहाल हुई जा रही थी कि उनके मुंह से कोई बोल नहीं फूट रहा था ! उनकी हालत देखकर पंखुड़ी ने पास ही लगे वाटर कूलर से पानी निकाल कर उन्हें दिया और वापस उनके पास खड़ी हो गई….
लड़की के पिता आंख मूंद कर चुपचाप बेंच पर बैठे थे…
उनकी हालत उसकी मां से भी ज्यादा खराब थी ! शायद उन दोनों को यह उम्मीद ही नहीं थी कि उनकी बेटी कभी ऐसा कोई कदम उठा भी सकती है….!

” देखिये मैं यहां आप दोनों की मदद के लिए ही आई हूं.. आप मुझ पर पूरा भरोसा कर सकती हैं ! मैं भी अपना 100% लगा दूंगी कि मैं आपकी बेटी को बचा सकूं! लेकिन इस वक्त एक-एक पल उस पर भारी पड़ रहा है! हम जितना देर से उसे ट्रीटमेंट देंगे उतना ही  उसके बचने के चांसेस कम होते जाएंगे…
मैं आपको किसी तरह की झूठी उम्मीद नहीं देना चाहती…  क्योंकि उम्मीद टूटने पर इंसान भी टूट जाते हैं ! आपकी बेटी ने खुद को मारने की कोशिश की है!
लेकिन वह अब जिंदा रहना चाहती है, और इसलिए  उसका दिमाग, उसका शरीर उसे बचाने की जद्दोजहद में लगा हुआ है! हमें बस उसकी मदद करनी है, और उसकी मदद करने के लिए हमें आपकी मदद की जरूरत है…

” बेटा, इसने मच्छर मारने वाली दवा पी ली थी..!”

उस लड़की की मां ने जैसे ही यह बताया पंखुड़ी ने उनके कंधे पर हाथ रख कर तुरंत अंदर वाले कमरे की तरफ दौड़ लगा दी…
वो और उसकी टीम जी जान से उस लड़की को बचाने में जुट गयी….
 
  काफ़ी देर की मशक्क्त के बाद लड़की की हालत में सुधार आ ही गया…. !

शाम के राउंड के वक्त पंखुड़ी उस लड़की के सामने  खड़ी उसे डपट रही थी…

“क्या ज़रूरत थी, उस भारी भरकम ज़हर को पीने की… ? आजकल तो आलआउट से मच्छर भी नहीं मरते, हम इंसानो पर क्या असर करेगी वो.. बोलों ?”

लड़की कुछ देर को खामोश रह गयी… पुलिस केस था इसलिए पुलिस भी बयान लेने पहुंची हुई थी..
  सभी तरफ से निपटने के बाद जब भीड़ कुछ कम हुई, एक बार फिर पंखुड़ी ने उस लड़की से पूछताछ शुरू कर दी… !
उस लड़की ने जो बताया वो सुन कुछ देर को पंखुड़ी भी हैरान रह गयी…
उस लड़की के अनुसार उसके माता पिता उस पर शादी कर लेने के लिए ज़ोर डाल रहें थे, और वो अभी शादी नहीं करना चाहती थी… उससे बातचीत के वक्त वहाँ सिर्फ उस लड़की की माँ और पंखुड़ी ही रह गए थे… !
   लड़की का नाम रीत था..

“देखो रीत,  तुम्हारे पेरेंट्स की भी ऐसी कोई गलती नहीं है.. ? एक उम्र के बाद हमारे समाज में शादी जैसी परम्परा निभानी ही पड़ती है.. हाँ अब आजकल इस में बदलाव दिखने लगे हैं… ! बहुत से लोग अब इस रिवाज़ से दूर भागने लगे हैं, लेकिन सच्चाई तो यहीं है कि बाकी हर एक काम कि तरह ये भी जीवन के लिए महत्वपूर्ण है !”

“मै शादी नहीं करना चाहती, ये बात नहीं है डॉक्टर.. बात ये है कि मै किसी और से शादी करना चाहती हूँ, और उससे शादी के लिए मेरे पेरेंट्स तैयार नहीं है… उनका कहना है अगर मैंने अपनी ज़िद नहीं छोड़ी तो वो लोग अपनी जान दे देंगे.. !”

उसकी बात सुन पंखुड़ी ने एक नजर उसकी माँ पर डाली और वापस कहने लगी..

“अब ये तो तुम्हारा पर्सनल मैटर हो जाता है, लेकिन आजकल जात पात ऊंच नीच कौन मानता है… ?”

“नहीं डॉक्टर वो बात भी नहीं है…..

अभी वो लड़की अपनी बात पूरी भी नहीं कर पायी थी कि पीछे से शेखर और एक लड़की उन लोगों तक पहुँच गए….
शेखर को वहाँ देख पंखुड़ी चौंक गयी… !
शेखर ने आगे बढ़ कर उस लड़की को नाराज़गी से देखा और डपटने लगा…

” मेरे रहते तुम्हें ये सब करने कि क्या ज़रूरत थी रीत ! एक बार मुझसे कहना तो था.. !”

शेखर कि बात सुन पंखुड़ी सकते में आ गयी…

ओ ओ तो ये लड़की कलक्टर साहब के साथ फंसी हुई  है…
लेकिन फिर इसके पेरेंट्स को क्या दिक़्क़त हो गयी…?
  अच्छा खास हैंडसम बंदा है.. कलेक्टर है.. !
मतलब एक तरह से पूरे शहर का मालिक है… !
हाँ उम्र थोड़ी ज्यादा होगी.. पर ज्यादा भी कितनी तीस या उससे कुछ एक साल ज्यादा.. ! पर लड़की भी तो पचीस की है ही.. !
फिर इन लोगो को मानने में क्या दिक़्क़त हो गयी… ?
  हद है… आजकल के पेरेंट्स की भी ना इच्छाएं बढ़ती जा रही है… कोई मुझसे पूछ के देखें मै तो पट से हाँ बोल दूँ.. !

मन ही मन ये सोच कर पंखुड़ी ने शेखर को टोक दिया…

“शेखर जी आप यहाँ.. ? आप जानते हैं इन्हे.. ?”

शेखर ने दुःख भरी नजर से पंखुड़ी को देखा और हाँ में गर्दन हिला दी…

शेखर के साथ आई रीत की सहेली रीत के पास बैठ कर उसका हालचाल जानने लगी और शेखर पंखुड़ी के पास आकर खड़ा हो गया…
उसी वक्त नर्स कुछ फाइल्स लेकर उसके पास चली आई… उन फाइल्स पर दस्तखत करने के लिए पंखुड़ी को वहाँ से हट कर नर्स की टेबल तक आना पड़ा और उसके पीछे शेखर भी वहाँ चला आया..

  फाइल्स नर्स को वापस देने के बाद पंखुड़ी ने देखा शेखर उसके पास ही खड़ा था… पंखुड़ी को अजब बेचैनी सी हो रही थी…. उसे शेखर से रीत के बारे में पूछने का मन कर रह था… !

“तो आप जानते है इस लड़की को… ?

हाँ में गर्दन हिला कर शेखर रीत की तरफ देखने लगा…

पंखुड़ी का मुहँ चढ़ गया…

” तो फिर समस्या क्या है.. ? आप तो अच्छे खासे एलिजिबल बेचलर हैं.. आखिर रीत के माता पिता को आपसे उसकी शादी करने में क्या दिक़्क़त हैं.. ?”

शेखर ने चौंक कर पंखुड़ी की तरफ देखा…

“रीत ने मुझसे शादी करने के लिए ये सब नहीं किया हैं ! “

“मतलब… ? फिर उसने ऐसा क्यों किया.. ? क्या आप तैयार नहीं हैं.. ?”

“अरे बाबा ऐसी कोई बात ही नहीं… वो जो रीत के पास बैठी हैं ना उसका नाम रिद्धिमा हैं.. और वो रीत की अच्छी दोस्त हैं… !”

पंखुड़ी उस दूसरी लड़की की तरफ देखने लगी… शेखर ने अपना गला साफ किया और कहना शुरू किया…

“वो दोनों बेस्ट फ्रेंड्स हैं और…. वो दोनों लड़कियां हमेशा एक दूसरे के साथ रहना चाहती हैं… आई मीन रीत रिद्धिमा से शादी करना चाहती हैं.. !”

पंखुड़ी की ऑंखें आश्चर्य से चौड़ी हो गयी… गले में कुछ अटकता सा लगा.. उसने उन दोनों लड़कियों की तरफ देखा और उसे रीत की माँ की तकलीफ समझ में आ गयी….

रीत की माँ रीत के पास से उठ कर बाहर की तरफ चली गयी थी….
उनके चेहरे की पीड़ा, अवसाद साफ़ साफ नजर आ रहा था…. पंखुड़ी ने उन्हें देखने के बाद शेखर की तरफ देखा..

“वो लोग आपका परिचय जानते हैं.. ?”

“क्या कि मै कलेक्टर हूँ.. ?”

“हाँ… !”

“पता नहीं… पर अब सोच रहा हूँ कि उन्हें बता ही दूँ… !

पंखुड़ी ने देखा अचानक रीत की माँ फूट फूट कर रोने लगी… पंखुड़ी तुरंत उनके पास चली गयी..

शेखर भी उसके पीछे चला आया…

उनके हाथ में पानी का गिलास पकड़ा कर पंखुड़ी ने उनके कांधे पर हाथ रख दिया..

” आंटी.. ! खुद को सम्भालिये.. ! ये बताइये कि आप रो क्यों रही हैं.. ? बस ये सोच कर कि आपकी लड़की एक लड़की से ही शादी करना चाहती हैं.. ?”

“क्या ये दुःखी होने वाली बात नहीं हैं, अगर ऐसा हो गया तो हम समाज को मुहँ दिखाने लायक नहीं रहेंगे.. क्या कहेंगे रिश्तेदारों से.. ? बताओ भला ? तुम हमारी तकलीफ नहीं समझ सकती क्योंकि तुम्हारी अभी कोई औलाद नहीं हैं ना.. !”

“आंटी औलाद कहाँ से होगी, अभी तो मेरी शादी भी नहीं हुई.. !, आइये आप मेरे केबिन में चलिए, मै आपसे कुछ बात करना चाहती हूँ.. !”

वो पंखुड़ी की तरफ आश्चर्य से देखने लगी…
उन्हें साथ लेकर वो अपने कमरे में लें गयी.. शेखर भी साथ ही चला गया…

“आंटी मेरी बात ध्यान से सुनियेगा, मै आपको एक उपाय बताने जा रही हूँ.. !

“क्या ?”

” आप अपनी बेटी को टोकना बंद कर दीजिये.. !, वो अगर रिद्धिमा से शादी करना चाहती हैं तो आप ख़ुशी से उसे इजाज़त दे दीजिये… !
  देखिये सबकी अपनी अपनी चॉइस होती हैं…! भगवान ने हर किसी को एक जैसा नहीं बनाया हैं..! हालाँकि रीत और रिद्धिमा में शारीरिक तौर पर कोई चीज़ बाकी लड़कियों से अलग नहीं होगी, लेकिन इनका दिमाग अलग होता हैं और इसलिए ये अपने जैसे लोगों के साथ ही खुश रह सकतें हैं.. !
   हालाँकि इस सबके पीछे बहुत सारे कारण हैं आंटी जी… पर फ़िलहाल मै यहीं कहूँगी कि जिस तरह शादी हो जाने के बाद पेरेंट्स लड़की का खाना खर्चा उठाना बंद कर देते हैं आप लोग भी बंद कर दीजिये.. !

उन दोनों को एक साथ अपनी गृहस्थी की गाड़ी चलाने दीजिये… !

  ज़िम्मेदारियाँ सर पर पड़ने के बाद भी अगर वो दोनों ख़ुशी से एक दूसरे का साथ देते हुए हर कठिनाई पार कर जाती हैं तब तो आपको उन पर अपना प्यार और आशीर्वाद बनाये रखना होगा… !
   और अगर ज़िम्मेदारियों की आंच पड़ते ही उन दोनों का प्यार पिघल कर बह जाता हैं तो रीत वैसे ही घर वापस आ जाएंगी… जैसे आपके घर से गयी थी !”

” लेकिन बेटा लोग क्या कहेंगे.. ?”

“लोगो को बताएगा कौन… ? आप या मै.. ? आंटी आजकल एक लड़का लड़की बिना शादी के साथ रह लेते तब तो कोई कुछ बोल नहीं पाता ये तो फिर लड़कियां ही हैं… !
रहने दीजिये… हो सकता हैं साल भर लगे, दो साल लगे लेकिन जब ज़िंदगी के कठोर धरातल से आमना सामना होगा तब ये सारा भूत उतर जायेगा… !
लेकिन इसका दूसरा पक्ष भी आपके सामने रख दूँ… हो सकता हैं वो दोनों वाकई एक दूसरे के साथ सारी समस्याओ से जूझ कर भी खुश रह लें तब ऐसी सूरत में आपको भी उन दोनों का रिश्ता प्यार से स्वीकारना होगा…
  वैसे प्रकृति ने इंसान को ऐसा ही बनाया हैं कि हम अपने विपरीत की तरफ ही आकृष्ट होते हैं.. इसलिए कुछ समय के लिए अगर ये दोनों अपने आकर्षण को प्यार समझ भी बैठी हैं तो जैसे ही इनके जीवन में कोई बेहतर विपरीतलिंगी आ गया ये लोग अलग हो जाएँगी, लेकिन बात फिर वही अटक जाती हैं आंटी कि हो सकता हैं ये दोनों एक दूसरे पर ही टिकी रहें और उस सूरत में…

” ठीक हैं बेटा.. मै आपकी बात समझ गयी, पर समाज के लोग क्या कहेंगे… शादी ब्याह तो परिवार बढ़ाने की  भी परिपाटी हैं.. उसका क्या होगा.. ?”

“आंटी लड़के लड़की की शादीे में भी तो कभी बच्चा नहीं हो पाता हैं… तब वो कपल जिनका बच्चा ना हो वो क्या करते हैं… ? आजकल बहुत सारी मेडिकल सुविधाएँ मौजूद हैं, जिससे ये भी अपना खुद का बच्चा भी लें सकती हैं और नहीं भी लेना चाहें तो किसी नन्हे से बच्चे को गोद लिया जा सकता हैं… आंटी ये सारी बातें बाद की हैं.. अभी तो आप बस ये सोचे कि आपकी बेटी ने बहुत बड़ा कदम उठा लिया था.. और इस वक्त उसे आपके प्यार और सहारे की  ज़रूरत हैं…बाकी उसकी ज़िद कोई इतनी बड़ी नहीं की उसके लिए जान की कीमत अदा की जाये…!
   आप समझ रही ना, मै क्या कह रही… !”

उस औरत ने धीमे से हाँ में सर हिला दिया….

पंखुड़ी ने एक नज़र सामने बैठी उस औरत पर डाली और वापस बाहर निकल गयी…
  शेखर के मोबाइल पर किसी का फ़ोन आ गया था, इसलिए रिद्धिमा से बोल कर वो भी निकल गया….

*****

  रात पिया अपने कमरे की बालकनी में हाथ में कॉफ़ी का कप पकडे खड़ी अपनी सोच में गुम थी कि चुपचाप बिना किसी आहट के समर उसके पीछे आकर खड़ा हो गया…

और बिना किसी प्रस्तावना के उसने कहना शुरू कर दिया….

“पिया !!  जानता हूं तुम मुझसे बेहद नाराज हो और तुम्हारा नाराज होना जायज भी है, क्योंकि तुम सारी सच्चाई जानते नहीं हो !
  मैं जानता हूं अब भी तुम मुझे सुनना नहीं चाहती! लेकिन मैं तुम्हें सब कुछ सच बता देना चाहता हूं…
तुम्हारा सच जानना बेहद जरूरी है इसलिए क्योंकि हम पति और पत्नी है हम दोनों के बीच ऐसा कोई राज नहीं होना चाहिए, जिसके कारण सामने वाले के मन में किसी तरह के शक की कोई गुंजाइश ना बचे… ..
बस तुमसे इतनी गुजारिश है कि मेरी बात पूरी होने से पहले यहां से चले मत जाना…

पिया उसी तरह चुपचाप खड़ी रही और उसके वहां से ना जाने से समर को हिम्मत मिल गई और उसने आगे बोलना जारी रखा….

” रेवन और मेरे बीच सिर्फ दोस्ती थी.. दोस्ती भी ऐसी जो बहुत पाक और साफ थी ! हम दोनों काफी करीबी दोस्त थे, बावजूद हमने अपनी सीमाएं कभी पार नहीं की ! रेवन के साथ दोस्ती में रहते हुए भी मुझे कभी आभास नहीं हुआ कि, रेवन दिल ही दिल में मुझसे प्यार करने लगी थी.. मेरे घर परिवार से मिलने के बाद शायद रेवन ने यह सोच लिया था कि  मेरा और उसका एक साथ कोई भविष्य नहीं है! इसीलिए शायद उसने कभी अपने मन की बात मुझसे नहीं कहीं, और जैसे ही उसका काम यहाँ समाप्त हुआ वह मुझे छोड़कर इंडिया से वापस लौट गई…!
लेकिन मुझसे दूर जाने के बाद शायद उसे अपनी मोहब्बत का एहसास हुआ और वह मुझे भुलाने की कोशिश में और भी ज्यादा मुझ में उलझती चली गई..! इसी बीच उसकी जिंदगी में एक लड़का आया और दोनों ने एक दूसरे के साथ…
   शोवन उन दोनों के प्यार का नतीजा था… हालांकि उन दोनों के बीच जो भी हुआ उसके बाद रेवन ने उस लड़के से साफ कह दिया कि वह उस लड़के से प्यार नहीं करती और इसलिए वह भी स्पेन वापस लौट गया…!
दोनों ने आपस में किसी तरह का कोई कांटेक्ट नहीं रखा था इसलिए जब रेवन को मालूम चला कि वह मां बनने वाली है तो वह उस लड़के को भी नहीं बता पाई…!
  वह मेरी जगह शायद किसी और को देना ही नहीं चाहती थी…
  और इसीलिए उसने सिंगल पैरेंटिंग का रास्ता चुना, हालाँकि ये रास्ता कठिन तो था लेकिन फिर भी उसने यही निर्णय लिया!
   उसके परिवार में भी कोई ऐसा सदस्य नहीं था जिनके साथ रहकर वह अपनी जिंदगी गुजार सकती थी, इसलिए उसने शोवन की जिम्मेदारी अकेले अपने ऊपर ही ले ली..
सब कुछ तब तक सही चलता रहा जब तक रेवन को उसकी बीमारी के बारे में मालूम नहीं चला और जैसे ही रेवन को यह मालूम चला कि वह बीमार है उसने अपना इलाज करवाना शुरू कर दिया….!
लेकिन इलाज के दौरान ही उसे मालूम चल गया था कि उसकी जिंदगी बहुत कम बाकी है और इसीलिए उसे अपने बाद शोवन की चिंता होने लगी..
उसके आसपास कोई ऐसा इंसान नहीं था जिस पर वह भरोसा करके अपने बच्चे का हाथ उसे सौंप सके,  अपने बच्चे की जिंदगी भर की जिम्मेदारी सौंपने के लिए उसे जाने क्यों सिर्फ मेरा ही नाम सुझा और उसने मुझसे अपनी तकलीफ कह कर शोवन का हाथ मेरे हाथों में सौंप दिया…
   रेवन से मिलने से पहले मै खुद उसके बच्चे के बारे में कुछ नहीं जानता था और इसलिए तुम्हें कोई भी आधी अधूरी बात नहीं बताना चाहता था..!
  मै उस वक्त चाहता था कि तुम रेवन से ही सारी सच्चाई जान लो, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया और रेवन तुमसे बात करने के पहले ही…

पिया यहीं असली सच्चाई हैं, अब इसे मानना ना मानना तुम्हारे ऊपर हैं ! मैंने अपनी तरफ से हर एक सच्ची बात तुम से कह दी हैं… “

समर अपनी बात कहने के बाद कुछ पल वहाँ खड़ा पिया के जवाब का इंतज़ार करता रहा और फिर वापस अपने कमरे में चला गया…

पिया रात अधिक हो जाने पर कमरे में गयी, तब तक समर सो चुका था… !
वो चुपचाप उसके बगल में लेट गयी…
    समर गहरी नींद में था… नींद में उसका हाथ पिया के ऊपर चला आया…
पिया ने चौंक कर उसकी तरफ देखा, लेकिन वो गहरी नींद सोया हुआ था…!
पिया की साँसे बढ़ने लगी… उसने धीरे से उसका हाथ उठा कर हटाने की कोशिश की और समर ने पिया की कलाई पकड़ कर उसे अपने पास खींच लिया…
    समर ने पिया के कानों में अपने होंठ रख दिये….

“तुम्हें इतना परेशान करने के लिए आई एम सॉरी पिया ! अब कभी कोई ऐसी बात नहीं होगी जिससे तुम्हें परेशानी हो.. !”

पिया अब भी अपने मन की उलझन से निकल नहीं पा रही थी… उसका गुस्सा इतने दिनों में कम तो हुआ था लेकिन पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ था.. !

इंसान का मन ही तो हैं जाने कब सच्चा हैं और कब चालाकी कर झूठ गढ़ गया.. !

समर तो वैसे भी अपने राजा साहब के लिए दुनिया भर के तिकड़म करने में महारथी था तो क्या राजा साहब के सारे काम समर पूरी ईमानदारी से करता होगा.. ?
क्या राजा साहब के लिए उसने कभी किसी से झूठ नहीं बोला होगा… ?
समर जैसा इंसान झूठ ना बोले ये संभव ही नहीं था….? आखिर कोर्ट रूम में ठाकुर साहब को मारने का प्लान बनाने वाला समर ही तो था… !
   माना कि उसने ये सब राजा साहब के बचाव के लिए किया लेकिन सहारा तो झूठ का ही लिया… हो सकता हैं उसी तरह आज भी खुद को बचाने के लिए झूठ का सहारा ले रहा हो.. !

पिया ने समर की तरफ देखा… दोनों का चेहरा एक दूसरे के करीब था…
  समर अपनी गहरी आँखों से उसे ही देख रहा था… उसकी आँखों में पिया को चाह कर भी किसी तरह की बेवफाई नज़र नहीं आ रही थी..
समर की सांसो की आवाज़ में खोती पिया ने आंखें मूंद ली…
पिया का एक मन समर से दूर भाग जाने का कर रहा था,लेकिन उसके अंदर की औरत समर की छुवन से पिघलती चली जा रही थी…  मदहोश हुई जा रही थी… उसकी खुशबु में बहक जाने को तैयार थी, समर में पूरी तरह डूब जाने को तैयार थी..
     पिया के चेहरे पर सरकती समर की उँगलियाँ उसकी गर्दन पर पहुंची थी कि उनके कमरे पर किसी ने ज़ोर से दस्तक देनी शुरू कर दी… 

” समर भैया जल्दी दरवाज़ा खोलिये… !”

तुलसी की आवाज़ सुन समर और पिया दोनों ही चौंक कर उठ बैठे….

पिया ने अपने गाउन पर ओवर कोट डाला और दरवाज़ा खोलने चली गयी…

क्रमशः

aparna…..
  

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