जीवनसाथी- 2/60


जीवनसाथी -2/60

   
” बाबूराव जाओ… वह दोनों बाहर पहुंच गए हैं ? .. उन्हें अंदर लेकर आ जाओ..!”

अनिर्वान की यह बात सुनकर वहां बैठे सारे लोगों की  नजर केबिन के दरवाजे की तरफ मुड़ गई और बाबूराव उन सबको आश्चर्य में डूबा छोड़ केबिन से बाहर उन दोनों को लेने के लिए निकल पड़ा….

सभी आश्चर्य में थे कि आखिर कौन आया है…
दरवाज़े पर टिकी सबकी नजरे थम सी गयी, उन दोनों को भीतर आते देख कर….
उन दोनों को अंदर लाने के बाद बाबूराव ने अनिर्वान की तरफ देखा…

उन दोनों के भीतर आते ही उनके घर वालों में नाराज़गी की एक लहर सी दौड़ गयी…
  वही लड़का जो अब तक फुदक रहा था ने अपने ताऊ की तरफ देख कर उचकना जारी रखा….

“ताऊ जी, बस आज्ञा दीजिये अभी के अभी काट के  फेंक देना है इन दोनों को, नहर में.. !”

उस की बात सुन लड़की घबरा गयी… और घबरा कर अपने साथ खड़े लड़के के ज़रा पीछे की तरफ हो गयी…
अनिर्वान ने ये सब देखा और अपनी कुर्सी से उठ कर टेबल के सामने आया और टेबल पर टेक लगा कर खड़ा हो गया……

“हाँ तो बावलों… नाम क्या है तुम दोनों का.. ?”

सामने खड़े लड़का और लड़की जो अपने अपने घरवालों के डर से भाग गए थे, वो अनिर्वान के भेजें आदमियों द्वारा पकड़ कर थाने पर ला कर पटक दिये गए थे… और अब तक अपने बाप भाइयों को डर डर कर देखने वाली नजर अब अनिर्वान को देख घबरा रही थी…

“अरे बच्चो घबराओ नहीं… पहले अपना नाम बताओ और फिर उम्र.. !”

“सर मेरा नाम बबलू है और ये पिंकी है.. ! हम दोनों बाइस बरस के है, साथ ही पढ़ते हैं… अभी अभी मेरा नेट का एग्जाम भी क्लियर हुआ है सर… शिक्षाकर्मी में ग्रेड थ्री पर लग चुका हूँ.. !

“अरे…..

उस लड़के की बात सुन अनिर्वान ने बाबूराव की तरफ देख आश्चर्य से अपनी बड़ी बड़ी आंखें और खोल कर बड़ी कर ली…

“बाबूराव…. ये लड़का तो एलिजिबल बेचलर है… मस्कुलर भी है, पॉपुलर भी होगा ही, स्पेक्टैक्युलर तो दिख ही रहा और बेचलर भी है… फिर पिंकी के  घर वालों को क्या तकलीफ हो गयी भाया… ?”

अनिर्वान ने पिंकी के घर वालों की तरफ देखा… वही लड़का वापस फुदकने लगा…

“साहब बताया तो था आपको… जातिगत समस्या आ रही है.. !”

“हम्म.. बहुत बड़ी समस्या है ये… है ना बाबूराव.. ? सुन.. तू इधर आ.. !”

उसी लड़के को अनिर्वान ने अपने पास बुलाया, वो भी सीना फुलाए तैश में अनिर्वान के पास पहुंच गया, जैसे ही वह अनिर्वान के पास पहुंचा, अनिर्वान ने उल्टे हाथ से खींच कर उसे इतनी जोर का तमाचा लगाया कि वह 2 बार गोल घूम के वहीं जमीन पर गिर गया….
जमीन पर गिरते ही उसकी आंखें बंद हो गई और उसकी तरफ के लोग भाग कर उसे देखने चले आए…

” बाबूराव चेक करके देखना, कहीं लड़का मर तो नहीं गया…?”

बाबूराव ने तुरंत भीड़ को किनारे  किया और उस लड़के की नब्ज़ देखने लगा…नब्ज़ देखने के बाद उसने ऊपर अनिर्वान की तरफ देखकर ना में गर्दन हिला दी…

” इस ना का मतलब क्या समझूं बाबूराव ? मर गया या जिंदा है..?”

” बच गया है हुजूर..!”

” हां….! वही मैं सोचूं, मैंने तो बेहोश करने वाला ही थप्पड़ लगाया था… पर फिर मुझे लगा लड़का जरा कमजोर तबीयत का है, कहीं मर मुरा तो नहीं गया…..

हां तो भाई किस-किस को जातिगत समस्या हैं, चले आओ ! हम इस तरह की जातिगत समस्या दूर करने में माहिर है..!”

अनिर्वान की बात सुनकर सारे लोग पीछे सरक गए…

अनिर्वान ने बाबूराव की तरफ देखा…और इशारे से कुछ कहा, बाबूराव ने उसका इशारा समझ लिया..

“हुकुम पंडित भी आ गया है, भेज दूँ.. ?”

बाबूराव के सवाल पर अनिर्वान ने हाँ में गर्दन हिला दी….

“बाबूराव आदर से बोलो… पंडित नहीं पंडित जी हैं ! पंडितों के पास जो ज्ञान है ना, वो और कोई नहीं पा सकता बाबूराव…. वो तो आजकल फर्जी बाबा इधर उधर घूमते हैं ना उन्होंने बिला वजह पंडितो को बदनाम कर रखा है.. ! “

“गलती हो गयी हुजूर ! पंडित जी को भेजता हूँ.. !”

अनिर्वान के हाँ में सर हिलाते ही बाबूराव भाग कर पंडित जी को अंदर लें आया…

अनिर्वान के इशारे पर पलक झपकते  थाने में ही पंडित जी के बतायें अनुसार हवन पूजन की सारी तैयारी हो गयी और थाने के बाहरी कमरे में शादी की सारी तैयारियाँ हो गयी…

अनिर्वान ने दोनों परिवारों के मुखिया को सामने बुलाया…

“देखिये आप दोनों के बेटा और बेटी सक्षम है, समर्थ हैं… ये दोनों आप लोगो को मनाने की कोशिश में थक कर आप लोगो को छोड़ कर भाग गए…
  आप लोग सोच कर देखिये कि जिन चार लोगों के  बारे में सोच सोच कर आप लोग अपने बच्चो की शादी नहीं कर रहें हैं क्या आपके बुढ़ापे में उन चारों में से कोई भी एक आपको पानी पिलाने आएगा ? चाय देने खाना देने आएगा.. ? आपकी दवा दारू की देखभाल करेगा.. ? नहीं…
  लेकिन अगर आज आप लोगों ने इन बच्चो की मर्ज़ी मान ली और इन्हे अपना लिया तो ये बच्चे ज़िंदगी भर आपके इस कार्य के एहसान तले दबे रहेंगे और इसी अपनापे के कारण ये आपका बुढ़ापा संवार देंगे…
मैं बदले की बात नहीं कर रहा.. !
    बात बहुत सीधी सी है कि, आप इन्हे जितना प्यार और सम्मान देंगे उतना ही प्यार और सम्मान आप को मिलेगा.. !
  दुनिया समाज के चार लोग अर्थी को कन्धा देने के अलावा कभी कहीं काम नहीं आते…
 
  और ये.. इस जैसे वेल्ले जो अभी कूद कूद कर चमक रहें हैं ये तो उस काम के वक्त पर भी सबसे पहले गायब हो जाने वालों में से हैं….

   ये समाज के उन्हीं चार में से एक है, जिसे मदद किसी कि नहीं करनी पर डरा कर सभी को रखना है..

अनिर्वान ने उस बेहोशी से उठ चुके लड़के की  तरफ इशारा कर कहा….

लड़का और लड़की के पिता पूरी तरह से अनिर्वान की बात समझ गए ये बात नहीं थी, लेकिन अब इतने लम्बे चौड़े महाकाल जैसे सनकी पुलिस वाले की बात काटने की भी उन लोगों की हिम्मत नहीं थी…..
   अनिर्वान की बड़ी बड़ी गोल लाल आंखें देख उसका विरोध करने की सोचना भी अब उन लोगो के लिए मुश्किल था !

आखिर उन सारे लोगों ने बेमन से ही सही पिंकी और बबलू की शादी में शामिल होने की मंजूरी दे दी और अनिर्वान के थाने में आने वालों के सामने पिंकी और बबलू की शादी हो गई…
पंडित जी के पढ़ें मंगलाचरण और धूप गुग्गुल की खुशबु से पूरा थाना पवित्रता की आंच से चमक गया…

अपनी जेब से ग्यारह सौ रुपये निकालकर अनिर्वान ने पिंकी के हाथ में रख दिये….

” खूब खुश रहना..!  ससुराल जाने के बाद अपने मन से इस ख्याल को बिल्कुल निकाल देना कि ससुराल वाले तुम्हारी और बबलू की शादी नहीं करवाना चाहते थे बल्कि दिल से ससुराल के हर एक इंसान को अपना लेना…
    लेकिन अपनी सास को मां जितना प्यार देने के बावजूद उन्हें सास ही समझना,  उन्हें मां मत समझना ! क्योंकि अगर तुम सास को अपनी मां समझोगी और ससुर को अपने पिता तो जिस तरह तुम अपने मायके में लाड़ और नखरा दिखाती थी, वैसा ही ससुराल में दिखाओगी !
    लेकिन ससुराल में तुम्हें प्यार भले ही मिल जाए लेकिन तुम्हारा नखरा कोई नहीं उठाएगा ! इसलिए ससुराल में  सबके लिए दिल से जितना कर सकती हो  करना जरूर लेकिन बदले में तुम्हें भी उतना ही प्रेम और सम्मान मिले इसकी उम्मीद मत रखना..! क्योंकि जब उम्मीद पूरी नहीं होती तो दिल टूट जाता है और वही से रिश्ते तड़कने शुरू हो जाते हैं…
     लेकिन जब उम्मीद से ज्यादा मिलता है तो हमेशा इंसान खुश रहता है और रिश्ते यहीं से मजबूती की तरफ बढ़ते हैं…
   इस सब को कई बुद्धिहीन ज़िंदगी से समझौता मान लेते है, जबकि ये जीवन से समझौता करना नहीं बल्कि अपने जीवन को सुखद और सुंदर बनाने की ओर पहला कदम है !
जब एक लड़की नई-नई ससुराल जाती है तो उसे घरवालों से जितनी उम्मीदें होती है उतनी ही घर वालों को भी उससे होती है और अगर दोनों तरफ से ही उम्मीदें पूरी ना हो तो शिकायतों का दौर शुरू होता है..! मैं आप लोगों से भी यही कहना चाहता हूं कि यह लड़की आपके घर आ रही है भले ही यह आपकी मर्जी के बिना आ रही है, लेकिन अब जब वो आपके घर आ चुकी हैं तो वह आपके घर की लक्ष्मी बन चुकी है, और लक्ष्मी को हम आदर के साथ अपने सर माथे सजाते हैं..!
बस इस बात का विशेष ध्यान रखिएगा कि अगर इस लड़की को आपके घर रहते हुए जरा सी भी तकलीफ हुई तो मैं बेहोश करने वाला नहीं सीधे जान निकालने वाला थप्पड़ भी मारने की क्षमता रखता हूं…!”

अपनी बात पूरी करने के बाद बाद अनिर्वान बबलू की तरफ घूम गया…

” हां तो भाई बबलू आज जिस हिम्मत से पिंकी का हाथ पकड़कर घरवालों से दूर भाग गए थे, उसी हिम्मत से पूरी जिंदगी इसका हाथ थामे रखना…
  ये नहीं की गृहस्थी के जंजाल में उलझते ही प्यार का बुखार उतर गया…
ऐसा मत करना, समझे ! वर्ना जितने प्यार से मैंने शादी करवाई है उतना ही कड़क शादी निभाते कैसे है ये भी सीखा सकता हूँ.. समझे ?
उदाहरण तो देख ही लिया है तुमने.. !”

सामने खड़े बबलू और पिंकी ने मुस्कुरा कर अनिर्वान के पैर छू लिए…

“अरे अरे खुश रहो.. मैं इतना भी बुज़ुर्ग नहीं हूँ कि मेरे पैर छुओ.. पैर छूकर आशीर्वाद लेना है तो अपने बड़ों का लो और ख़ुशी ख़ुशी घर के लिए निकलो… बाबूराव मिठाई भी तो मंगवाई है मैंने, उसे क्या तुम अपनी शादी के लिए बचा रखें हो.. कराओ भाई, सबका मुहँ मीठा करवाओ.. !”

हो हो कर हँसते हुए बाबूराव ने मिठाई का डब्बा खोल दिया…

वो अभी उन सब को निपटा रहा था कि बाहर से उसे किन्ही लड़कियों की आवाज़ सुनाई पड़ने लगी…

अनिर्वान ने बाबूराव कि तरफ देखा… बाबूराव ने बाहर कि तरफ झांक लगायी और भागता हुआ सा अंदर चला आया…

“सर, मैडम जी आई है.. ?”

अनिर्वान के चेहरे के भाव बदल गए…

“अकेले तो नहीं होंगी.. ! “

“नहीं हुज़ूर, एक और मैडम भी है.. !”

अनिर्वान ने हाँ में गर्दन हिलायी तब तक में लीना अंदर चली आई…

वहाँ मौजूद भीड़ भाड़ को देख कर आश्चर्य से  लीना अनिर्वान को देखने लगी और उसने अपने दोनों हाथ ऊपर उठा दिये और उसके बाद बाबूराव की तरफ इशारा कर दिया…

“मेरी तरफ मत देखिये, ये सब बाबूराव का किया धरा है.. !”

लीना ने उसे घूर कर ना में गर्दन हिलायी और अंदर केबिन की तरफ बढ़ गयी… उसके अंदर जाते ही अनिर्वान ने उन लोगों को वहाँ से चलता किया और केबिन की तरफ बढ़ते बढ़ते बाबूराव को तीन लोगो के लिए कॉफ़ी लाने भी कह दिया…

वो अपने केबिन में पहुंचा और अपनी सीट पर जाकर बैठा कि सामने बैठी लीना ने उससे सवाल कर दिया…

“वो सप्रे पार्क में जो फ़र्ज़ी पासपोर्ट बनाने वाला बंदा पकड़ाया था,उसका केस आप देख रहें हैं.. ?”

अनिर्वान लीना के बगल में बैठी बाँसुरी को देख रहा था और तभी लीना ने उससे सवाल कर दिया….

“हम्म… मैं ही देख रहा.. !”

“उस बन्दे से मिलना है मुझे.. !”

“क्यों.. ?”

अनिर्वान के इस सवाल पर लीना ने उसे घूर कर देखा…

“एक्सक्यूज़ मी.. !”

“यस एक्सक्यूज़!”

“अरे.. मुझे उससे कुछ पूछताछ करनी है.. !”

अनिर्वान ने मुस्कुरा कर लीना की तरफ देखा…

“मेरे रहते आपको तकलीफ करने की क्या ज़रूरत है .. आप तो बस हुकुम कीजिये, बंदा खुद आपकी मदद के लिए धरती और गगन एक कर देगा.. !”

“अब ये दोनों कौन.. ?”

लीना के बगल में बैठी बाँसुरी ने पूछा और लीना उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा दी…
धीरे से बाँसुरी के कान में झुक कर उसने अनिर्वान का परिचय दे दिया…

“आई पी एस है.. अनिर्वान भारद्वाज ! लेकिन ज़रा फ्लर्ट किस्म का है… पर काम के मामले में बहुत तेज़  है.. इसलिए फ़र्ज़ी पासपोर्ट केस में इसे अपने साथ रखना चाहती हूँ.. !”

बाँसुरी ने धीरे से हाँ में सर हिला दिया…

“ये मेरी दोस्त है बाँसुरी ! हम एक ही बैच के पासआउट हैं… ये मैडम कलक्ट्री में निकल गयी.. पर  फ़िलहाल मेडिकल लीव पर हैं….. “

“मेडिकल में हैं तो घर पर आराम करने की जगह बाहर क्यों घूम रही है मैडम… ?”

अनिर्वान ने बिना उन दोनों की तरफ देखें टेबल पर नज़र गड़ाए कहा और बाँसुरी तुरंत जवाब देने को ललक उठी…

“महल में पड़े पड़े बोर हो गयी थी… और राजा साहब अकेले कहीं आने जाने नहीं देते.. घर से निकलने पर आजकल 10 गार्ड साथ भेजते है,  इसलिए मैंने लीना को बुला लिया.. मैंने कहा लीना के साथ बस उसके थाने तक ही जा रही हूं..! वहां से सीधे घर आ जाऊंगी..!  तब जाकर अनुमति मिली है..!”

” वह तो ठीक ही करते हैं ! आखिर वो राजा साहब है, वो कभी गलत नहीं हो सकते ! आप की सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है.. इस वक्त!”

बांसुरी ने मुस्कुराकर अनिर्वान को देखा… और फिर लीना की तरफ देखने लगी… -“तुम्हारे थाने में चाय वाय  नहीं मिलती…?”

बांसुरी की बात सुनकर लीना अनिर्वान की तरफ देखने लगी…. अनिर्वान ने लीना को देखकर धीरे से हाँ  में गर्दन हिला दी…

” कॉफी मंगवाई है..!  बाबूराव लेकर आता ही होगा..!”

” लेकिन मुझे तो कॉफ़ी से ज्यादा चाय पसंद है…!”

बांसुरी ने रोनी सी सूरत बना कर लीना की तरफ देखा….
लीना वापस अनिर्वान की तरफ देख उसे घूरने लगी… अनिर्वान ने बांसुरी की तरह धीरे से देखा और बांसुरी उसे देखकर मुस्कुरा उठी…

” हां तो मिस्टर ह… भारद्वाज ! मैं कॉफी नहीं पियूंगी.. मेरे लिए हो सके तो चाय मंगवा दीजिए या फिर रहने दीजिए… मैं नहीं चाहती कि आपको मेरे कारण कोई भी कष्ट हो..

” कष्ट वाली तो कोई बात ही नहीं है मैडम ! कौन सा मुझे जाकर बनाना है!
    आपके लिए कॉफी की जगह चाय ही आ जाएगी..

अनिर्वान आवाज लगाकर आर्डर बदलवा पाता उसके पहले ही बाबूराव तीन कप में कॉफी लेकर चला आया…
अनिर्वान ने एक कप लीना के सामने किया और एक कप बाबूराव को वापस पकड़ा दिया…

” बाबूराव यह कॉफी तुम पी लो और इसकी जगह 1 कड़क अदरक वाली चाय आर्डर कर देना..!  कलेक्टर साहब कॉफी नहीं चाय पीना पसंद करती हैं..!”

  लीना ने अपना कॉफी का कप उठा लिया लेकिन अचानक ही उसे कुछ याद आया और वह चौंक कर बांसुरी की तरफ देखने लगी…

” लेकिन बांसुरी, लबसना में तो हम जब तक साथ थे तुम अक्सर कॉफी ही पिया करती थी ना ! अब अचानक क्या हुआ जो चाय पसंद आने लग गई है..!”

‘ “उस वक्त भी तो चाय पिया करती थी..! और जब हम दिल्ली में थे तब वह छोटू के ढाबे की भी तो हम चारों चाय ही पिया करते थे,  तुम मैं रेहान और शेखर..!  पहले मुझे कॉफी ज्यादा पसंद थी अब भी दोनों ही पी लेती हूं लेकिन इस वक्त चाय पीने का मन कर रहा है..!”

लीना ने अपना कप उठा लिया था और धीरे-धीरे कॉफी पी रही थी, लेकिन अनिर्वान अब तक चुपचाप बैठा था !  थोड़ी देर बाद बाबूराव ने एक बड़ी सी कप में चाय लाकर बांसुरी के सामने रख दी ! बांसुरी ने  चाय का कप उठाया और अपने होठों से लगा लिया इसके बाद अनिर्वाण भी अपनी कॉफी पीने लगा…

बांसुरी जाने क्यों पूरे मन से चाय नहीं पी पा रही थी.. कुछ घूंट पीने के बाद उसने चाय का कप नीचे रख दिया…

” क्या हुआ चाय भी पसंद नहीं आई..?”

लीना के सवाल पर बांसुरी ने मुंह बिगाड़ते हुए अपनी गर्दन ना में हिला दी…

” पता नहीं क्यों लेकिन आज चाय में भी स्वाद नहीं आ रहा…
    मुझे चाय से भी अजीब सी स्मेल आ रही है…! मैं नहीं पी पाऊंगी सॉरी…!  तबीयत भी कुछ ठीक नहीं लग रही, मैं अब जाना चाहती हूं लीना !”

अनिर्वान ने चौंक कर बांसुरी की तरफ देखा….

” तबीयत अच्छी नहीं लग रही तो पास ही में हॉस्पिटल है, आपको वहां लेकर जाते हैं..!”

“अरे नहीं… उसकी ज़रूरत नहीं है ! मैं ठीक हूँ,.बस आराम करना है.. थोड़ी थकान सी लग रही… !”

उसी वक्त राजा का फ़ोन आने लगा… मोबाइल देख बाँसुरी के चेहरे ओर मुस्कान चली आयी..

“देखा ! फ़ोन भी आने लगा… वापस आने ही कहेंगे साहब ! जानती हूँ.. !”

मुस्कुरा कर बाँसुरी में फ़ोन उठा लिया…

बांसुरी के अपनी जगह पर खड़े होते ही लीना भी उसके साथ खड़ी हो गई.. और वह दोनों अनिर्वान के केबिन से बाहर निकल गयी…
  अनिर्वान चुपचाप खड़ा उन दोनों को जाते देखता रहा..!

****

     सुबह तैयार होकर समर नीचे नाश्ते की टेबल पर आया तब तक बाकी लोग टेबल पर बैठ चुके थे… मेड ने शोवन को नहला धुला कर तैयार कर दिया था… वो भी टेबल पर चुप चाप बैठा था…
समर के पिता का नाश्ता लगभग हो चुका था… समर से मिलने के बाद वो अपने काम से बाहर निकल गए.. समर की माँ के एनजीओ से दो महिलाएं आई थी, वो भी उनसे मिलने बाहर निकल गयी…
   समर टेबल पर बैठा नाश्ता कर रहा था, और मेड को गरम पराठा परोसने बोल कर पिया ने एक प्लेट में आलू का पराठा लिया और शोवन के पास पहुँच गयी… उसके सामने समर की माँ ने ब्रेड और बटर परोस रखा था…
पिया ने उस प्लेट को एक किनारे रखने के बाद शोवन के सामने आलू पराठे की प्लेट रख दी… उसके साथ ही दही की कटोरी भी..

शोवन ने आँखे उठा कर पिया की तरफ देखा और पिया चेहरे पर कोई भाव लाये बिना उसके पास की कुर्सी खींच कर बैठ गयी..

“ये खा कर देखो.. तुम्हें अच्छा लगेगा.. !”

शोवन ने बिना कोई सवाल जवाब किये छुरी और कांटे की सहायता से पराठा काटना शुरू किया और पिया ने एक ठंडी सी साँस छोड़ कर पराठे के अपने हाथों से  छोटे छोटे टुकड़े कर दिये…

अब शोवन कांटे में उन टुकड़ो को फंसा कर खाने की कोशिश करने लगा…

समर ने शोवन को खाते देख कर अपने पास रखा पानी का ग्लास उठा कर शोवन की तरफ बढ़ाना चाहा कि शोवन की प्लेट के दूसरी तरफ रखा एक बच्चो वाला डिज़ाइनर ग्लास पिया ने उठा कर समर को दिखा दिया…
समर  को लगा कि उस डिजाइनर ग्लास में शायद दूध होगा इसलिए पिया को समझाने के लिए समर बोलने लगा…-” आलू के पराठे में मिर्च बहुत तेज है, कहीं उसे तीखा ना लग जाए इसलिए मैं उसे पानी दे रहा था..!”

पिया ने घूर कर समर की तरफ देखा और उसकी बात का जवाब देने लगी…-” मुझे भी पता है कि आलू के पराठे के मसाले में कितनी मिर्च है और मैं भी जानती हूं कि वह छोटा बच्चा है जो मिर्च नहीं खा सकता, इसीलिए उसके लिए अलग से मैंने आलू का मसाला तैयार करवाया था…!”

समर अपनी बात पर झेंप कर रहा गया और अपनी प्लेट देखने लगा…

“दही भी उसके लिए ग्रीक योगर्ट मंगवाया है, जिससे उसे ज्यादा खट्टा ना लगे.. !”

पिया की इस बात पर समर के चेहरे पर हलकी सी मुस्कान चली आयी, लेकिन उसकी पिया की तरफ देखने की हिम्मत नहीं थी…

“तुमसे कुछ बात करनी है पिया !” भीगी हुई सी आवाज़ में आखिर समर ने अपनी सारी हिम्मत समेट कर पिया की तरफ देख कर कहा और उसी वक्त पिया भी समर की तरफ देखने लगी…

“मुझे भी….

क्रमशः

aparna…..

आखिर क्या कहना चाहती है पिया… क्या वो अपनी परेशानियों से बाहर निकलने के लिए समर से अलग होना चाह रही है या उसके मन में कुछ और चल रहा है, मालूम चलेगा अगले एपिसोड में….
..

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