जीवनसाथी- 2/57

जीवनसाथी -2 भाग 57


      ” ज़िन्दगी हर दफ़ा उतनी हसीन होती नहीं जितनी फिल्मों में दिखती है… बहुत बार हम जिस ज़िंदगी के ख्वाब देखते है आँख खुलने पर वही ज़िंदगी ख़ून के आँसू भी रुला बैठती है.. ! इसलिए अब तो हर किसी से यक़ीन उठने लगा है !”

“ऐसा क्यों कह रही पिया.. ? समर से कोई शिकायत है तो आपस में बैठ कर सुलझा क्यों नहीं लेते.. ? “

“आपस में बैठ कर सुलझाने के लिए सामने वाले के पास वक्त भी तो हो… ना उसके पास मेरे लिए वक्त बचा है ना मेरे पास बाकी है !”

“पर ऐसे एक दूजे से मुहँ फुलाए कब तक चलेगा.. ? क्या ज़िंदगी ऐसी ही बिता देनी है.. ? और अभी तो तू वापस आई है हनीमून से.. अरे ऐसा क्या हो गया.. ?”

पंखुड़ी पिया से मिलने उसके घर आई थी, और दोनों पिया के कमरेे में बैठी बातों में लगी थी कि उसी वक्त कमरे के दरवाज़े पर बहुत हलकी सी दस्तक हुई.. पिया के हाँ बोलते ही दरवाज़े को ठेल कर एक लगभग पांच छैः बरस का बच्चा भीतर चला आया….

उसे देखते ही पंखुड़ी ने उसके सामने ही पिया से सवाल कर दिया..

“ये कौन है पिया.. ? “

पिया ने पंखुड़ी का जवाब देने से पहले उस बच्चे की तरफ देख पूरी रुखाई से उससे अंग्रेजी में पूछ लिया..

“क्या है.. ? “

पिया के सवाल को सुन वो बच्चा सहम का अपनी नीली आँखों से उसे देखने लगा… धीरे से उसके पास आकर वो अपना सर झुकाये खड़ा हो गया…

जितना तेज़ और कठोर पिया का सवाल था उससे कहीं धीमी और भीगी सी आवाज़ में उसने जवाब दिया…

“मुझे भूख लगी है.. !”

पिया ने वक्त देखा, शाम ढलने को थी…. उसने वापस उस बच्चे से उतनी ही कड़कदार आवाज़ में पूछ लिया…

” सुबह खाना खाया था ना.. फिर भूख लग गयी.. ?”

पिया का इतना कठोर रवैया देख पंखुड़ी भी हैरान थी.. उसने धीरे से उस बच्चे की बाँह पकड़ कर उसे अपने पास खींच लिया.. और प्यार से उसका नाम पूछ लिया…

वो बच्चा अपनी पलकें झपकता पंखुड़ी को नाम बता गया.. “शोवन !”

“ये तो बड़ा अजीब नाम है,  इसके मायने क्या हुए.. ?”

उसने हँसते हुए उस बच्चे को छेड़ दिया और अपने बड़े से हैंडबैग से एक डार्क फेंटेसी का पैकेट निकाल कर बच्चे के हाथ में रख दिया…
  बच्चे ने घबरा कर पिया की तरफ देखा, पिया अब भी उसे घूर रही थी…
   शोवन ने पंखुड़ी को थैंक यू कह कर उस पैकेट को धीरे से खोला और उसमे से बिस्किट निकालते हुए कमरे के एक तरफ बनी बालकनी की ओर बढ़ गया…
   बालकनीे में उदास सा बैठा शोवन उस बिस्किट को कुतरने लगा.. उसी समय घर पर काम करने वाली लड़की ट्रे में चाय नाश्ता सजाये पिया के कमरे में चली आई…
  प्लेट में सजा गरम नाश्ता और चाय देख पिया ने उस लड़की को टोक दिया..

“सुनो.. शोवन को खाना कब खिलाया था.. ?”

“मैंने तो नहीं खिलाया भाभी.. ?”

“तुमने नहीं खिलाया.. ? मतलब.. ? मैंने तो तुम्ही से कह रखा है इसे खिलाने पिलाने के लिए.. !”

“हाँ भाभी ! मैंने इसे सुबह दूध दिया था ! उसके बाद दोपहर में खाने पूछा तब इसने मना कर दिया था..

“इसने मना कर दिया मतलब.. ? बच्चा है वो छोटा सा..! उसने मना कर दिया तो तूने दुबारा उसे खाना ही नहीं पूछा.. ?”

पिया के चेहरे पर नाराजगी साफ नजर आने लगी थी और उसके चेहरे का गुस्सा देख काम वाली लड़की भी सहम कर रह गयी…..

” भाभी घर में और भी तो काम रहते हैं मुझे, एक इसके पीछे तो नहीं सारा टाइम घूम सकती ना..! दूसरी बात इससे हमारा खाना खाया भी नहीं जाता.. इसे दाल भी तीखी लगती है.. सब्जियां भी नहीं खा पाता है.. चावल इससे खाये नहीं जाते..!

”  अरे तो वो जो भी खा पाता है वह बना दिया कर..!

” सिर्फ ब्रेड ही तो खाता है यह भाभी.. ! कल सुबह इतनी टेस्टी दाल बनाई थी मैंने, और इसने ये कह कर कि सूप बहुत बहुत तीखा है,जाकर पूरा बाउल सिंक में पलट दिया.. !”

“वो सिर्फ पांच साल का बच्चा है.. आज तक जहाँ रहता आया था उसी के हिसाब से उसका खाना पीना है.. समझी !, उसे हमारी तरह खाने पीने में अभी वक्त लगेगा.. !  अगर उसे हमारा खाना पसंद नहीं आता तो यह मतलब तो नहीं कि हम उसे भूखा छोड़ देंगे..!”

” अरे नहीं भाभी भूखा छोड़ने की तो बात ही नहीं है… मैंने सुबह पूछा था, लेकिन उसने मना कर दिया और फिर अम्मा जी इतने काम बताती है कि एकदम दिमाग से निकल गया !
    आप परेशान ना हो हम अभी इसके लिए दूध ले आते हैं..!”

” सिर्फ दूध बस नहीं ब्रेड और जैम भी लेकर आना..! तुम लोगों को समझ में नहीं आता ! वो बस पांच साल का बच्चा है, उसे अभी देखभाल की ज़रूरत है…
  ऐसे कैसे तुम उसके खाने के बारे में भूल गयी.. ?अम्मा जी ने काम पर लगा दिया तब भी अपना खाना तो खाया होगा ना, या वो भी भूल गयी… और जब खुद खाना खाने बैठी तब भी इस बच्चे का चेहरा याद नहीं आया.. हद है.. ! आज के बाद ऐसी बदतमीज़ी नहीं होनी चाहिए… आई बात समझ में !”

“जी भाभी !”

डांट खा कर काम वाली का चेहरा उतर गया और वो धीमे से बाहर निकल गयी…. 

उसके वहाँ से जाते ही पिया ने एक नज़र बालकनी में बैठे शोवन पर डाली, वो चुपचाप बिस्किट खा रहा था….
उसे देख कर पिया की ऑंखें भर आई….

“ये है कौन पिया… ?”

पंखुड़ी के सवाल पर पिया ने उसे देखा और अपने माथे पर हाथ मार लिया…

“फसाद की जड़.. !”

“मतलब.. ? मै समझी नहीं.. ?”

“मै भी कहाँ समझ पा रही हूँ… ! ये समर और उसकी गर्लफ्रेंड की नाजायज़ औलाद है जिसे समर की गर्लफ्रेंड ने मरने से पहले समर के मत्थे मढ़ दिया है.. अब ये मेरे गले में अटक गया है..
इसे देखती हूँ तो बहुत बार पिघलने सी लगती हूँ… लेकिन दूसरे ही पल जैसे ही समर को देखती हूँ सारा प्यार सारी भावुकता बह जाती है, और बस एक नाराज़गी रह जाती है… !”

पिया की बात सुनते ही पंखुड़ी की ऑंखें आश्चर्य से चौड़ी हो गयी…

“क्या कह रही है तू पिया.. ?”

“सब सच कह रही हूँ यार ! अब इसे ना उगलते बन रहा ना निगलते.. !”

उसी वक्त शोवन अंदर चला आया… शरमा कर उसने बचा हुआ पैकेट पंखुड़ी की तरफ बढ़ा दिया… पंखुड़ी ने पैकेट उसके हाथ से लेने के बजाय उसे ही रखने को कह दिया और चुपचाप ना में सर हिला कर वो समंदर सा शांत गंभीर बच्चा बिस्किट पैकेट को वहीँ छोड़ कर कमरे से बाहर निकल गया…
पंखुड़ी ने पैकेट उठा कर देखा, उसे समझ आ गया कि बच्चे ने मुश्किल से एक या दो बिस्किट ही खायी थी और बाकी का पैकेट वैसे ही उसे वापस कर गया था
पंखुड़ी कि भी आँखे भर आई..

“पिया इसके बारे में घर पर क्या बोला तुम लोगों ने.. ?”

“यहीं कहा है कि ये समर के किसी दोस्त का बच्चा है !वो दोस्त और उसका सारा परिवार एक हादसे में नहीं बचा इसलिए इसे हमें लेकर आना पड़ गया और अब से ये यहीं रहेगा.. ! और कहते भी क्या यार ! मेरा तो मन था अपनी सास के सामने सारी सच्चाई बोल दूँ… बहुत नाज है ना उन्हें अपने बेटे पर… फिर मालूम चलता कि क्या है उनका बेटा.. ! और क्या है उसकी सच्चाई… ?”

पिया कि आँखों में ख़ून उतर आया था.. लेकिन पंखुड़ी कुछ सोचती सी बैठी थी…

“पिया तूने कहा कि ये बच्चा समर और उसकी गर्लफ्रेंड का है… है ना.. ?”

“हम्म्म !”

“लेकिन यार ये कहीं किसी एंगल से समर का बेटा नहीं लग रहा… मतलब तू देख… समर भी गोरा है लेकिन इस बच्चे का गोरा रंग बिल्कुल अलग बअंग्रेज़ो सा है… ऑंखें भी समर की नीली नहीं हैं… ! खैर वो तो इसकी माँ की रही होंगी… !”

“नहीं, इसकी माँ की आँखें तो भूरी थी… ?”

पिया को रेवन की भरी हुई ऑंखें याद आ गयी…

” ओके.. ! चल मान लिया कि ये अपनी माँ कि प्रतिमूर्ति होगा तब भी कुछ तो अपने बाप का आना था यार… ये तो किसी एंगल से समर का बेटा नहीं लग रहा… ना चेहरे कि बनावट, ना बाल, ना आँखे ना हाथों कि गोलाई ना शरीर कि बनावट… !  मै जानती हूँ मै अपनी डॉक्टरी दिखा रही पर तू खुद एक बार समर और इस बच्चे को ध्यान से देख, क्या कुछ भी मिलता है इनमे… ?”

पिया ने पल भर के लिए वहीँ रखी समर कि तस्वीर पर नज़र डाली… उस तस्वीर में मुस्कुराते समर से वाकई वो बच्चा दूर दूर तक नहीं मिलता था… लेकिन था तो समर का ही बच्चा !! इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता था…

पिया ने पंखुड़ी की बात का कोई जवाब नहीं दिया और गुमसुम सी खिड़की से बाहर देखती रही…
पंखुड़ी को भी समझ में आ गया था कि समर के बच्चे वाली बात पिया के दिल को ज़बरदस्त तरीके से दुख गयी है… वाजिब भी था ! उसे खुद सुनते साथ समर पर बेहद गुस्सा आने लगा था….
   लेकिन उस बच्चे कि शक्ल देख उसके मुहँ से बेसाख्ता समर और उस बच्चे कि तुलना निकल गयी थी…

“वैसे तेरा गुस्सा जायज़ है पिया.. ! अगर समर की  जगह मान लें, ये तेरे किसी पूर्व प्रेमी का दिया तोहफा होता तो क्या समर इसे इसी तरह सहजता से अपना लेता, जैसे तूने अपनाया है.. ?
  हरगिज़ नहीं..!  इस मामले में पुरुषों की सोच महिलाओं से हमेशा ही अलग होती है ! पुरुष तो अपनी पत्नी के पूर्व प्रेमी को भी हंस के नहीं मिल सकते फिर अपनी पत्नी के पूर्व प्रेमी से हुए बच्चे की तो बात ही छोड़ दो… !
  उसे अपनाना तो पूरी तरह से असंभव है, बल्कि ऐसा होने पर पति हमेशा पत्नी को उसके बच्चे के साथ घर के दरवाजे से बाहर का रास्ता दिखा देते हैं!  लेकिन जब खुद उन पर आती है तब वह अपने प्रेम की दुहाई देकर अपनी पत्नी को, अपने बच्चे को अपनाने के लिए मना ही लेते हैं..!
जानती हूं समर ने जरूर तेरे बहुत हाथ पैर जोड़े होंगे….

पंखुड़ी की बात बीच में ही काट कर पिया बोल पड़ी…

” नहीं !!  उसने कोई हाथ तो नहीं जोड़ें बल्कि जब हम नीदरलैंड से  इसे लेकर लौट रहे थे तब उसने मुझसे बात करने की कोशिश भी की लेकिन मेरा उस वक्त कुछ भी सुनने का मन नहीं था और मैंने समर को कसम दे दी कि अब वो इस बच्चे और इसकी माँ से जुड़ी कोई भी बात मुझसे नहीं कहेगा…..
बस तब से कोई ढंग से बातचीत ही नहीं हुई..!”

” यह क्या बात है यार.. ? मतलब तुम दोनों की ठीक से बात नहीं हो रही..?”

” काम की बातें हो जाती हैं, जैसे.. नाश्ता कर लो, खाना खा लो,… बाकी आज कल  मन ही नहीं करता उससे बैठकर बात करने का ! जब भी सोचती हूं कि समर के साथ बैठ लूं,  कुछ बातें करूं… इस बच्चे का चेहरा सामने घूमने लगता है और दिल करता है फूट-फूट कर रोने लगूं.. !”

” तेरी तकलीफ मै समझ रही हूं पिया, लेकिन यह कोई उपाय तो नहीं होता! तुम दोनों पति पत्नी हो, अभी पूरी जिंदगी पड़ी है तुम्हारे सामने… ऐसे ही अबोला किये क्या पूरी जिंदगी काट दोगे..? ये तो सम्भव नहीं है ना.. ? “

” इसका कोई उपाय भी तो नहीं है पाखी !”

” है पिया !!  हर कठिनाई का, हर दुश्वारी का उपाय होता है बस हम उपाय देखना या ढूंढना नहीं चाहते..!
     जब कभी रिश्तो में कड़वाहट आने लगे तो बैठकर एक दूसरे से बात करके उस मामले को सुलझाया जा सकता है… लेकिन अगर आप सामने वाले को वक्त ही नहीं दोगे, उससे बात ही नहीं करोगे, उसकी तकलीफ नहीं जानोगे, या अपने दिल की तकलीफ उसे नहीं बताओगे तो उसे कैसे मालूम चलेगा..?
देख पिया मैं समर का पक्ष नहीं ले रही…!
  मैं जानती हूं उसने बहुत ज्यादा गलत किया है! लेकिन अगर वह तुझे कुछ बताना चाहता है तो उसे एक मौका तो दे !
    इस तरह से अपनी कसम देकर तो तूने अपनी खुशियों के दरवाजे पर खुद ही मोटा सा ताला लटका लिया…?
     हो सकता है वह तुझे बताना चाहता हो कि उसके और उसकी गर्लफ्रेंड के बीच क्या रिश्ता रहा होगा ?  यह जो कुछ भी हुआ वह किस अनजान गलती के तहत हो गया? या किस कोरी भावुकता में बह कर वह दोनों यहां तक पहुंचे कि,  उनका एक बच्चा भी हो गया.. ?  या फिर ये भी तो हो सकता है कि ये बच्चा समर का है ही नहीं और उसकी गर्लफ्रेंड का किसी और से पैदा हुआ बच्चा वो सिर्फ भरोसे के कारण समर को दें गयी हो.. !
   उसे समझने और जानने का एक मौका तो दे..!”

पंखुड़ी की बातें सुनती बैठी पिया के चेहरे के भाव बदल तो रहें थे… लेकिन अब भी उसे देख कर ये समझना मुश्किल था कि वो वाकई समर को मौका देना चाहती है या नहीं… ?

  वो सोच ही रही थी कि उसके मोबाइल पर महल के नंबर से फ़ोन आने लगा…
उसने देखा, महल से बड़ी रानी लिखा आ रहा था… उसने रूपा का नाम बड़ी रानी नाम से ही सेव कर रखा था…

” 1 मिनट पंखुड़ी महल से बड़ी रानी साहिबा का फोन आ रहा है मैं अटेंड कर लूं..!”

पंखुड़ी ने हां में गर्दन हिला थी और पिया ने तुरंत फोन उठा लिया…

कुछ देर रूपा से बात करने के बाद  अपनी सहमति देकर उसने फोन रख दिया…
पंखुड़ी ने इशारे से ही फोन में दूसरी तरफ से क्या कहा जा रहा था पूछ लिया और पिया उसे रानी रूपा सा से हुई बातचीत बताने लगी…

” आज महल में शाम को कोई पार्टी है, बस उसी के लिए बड़ी रानी साहेब का फोन था ! मुझे और समर को डिनर के लिए बुलाया है..! और सारी फैमिली को भी… नीचे सासु माँ को फ़ोन करने के बाद उन्होंने मुझे भी एक फ़ोन घुमा दिया…
यार ये महल के लोग भी ना गज़ब के हैं…  खुद इतने बड़े लोग हैं, राजे महाराजे हैं यह लोग…
   लेकिन इतनी ज्यादा कर्टसी फॉलो करते हैं ना कि, बहुत बार शर्मिंदगी सी होने लगती है !  अब बताओ जब नीचे मम्मी जी को इनवाइट कर ही लिया था तो मुझे अलग से फोन करने की क्या जरूरत थी..?”

रूपा से बात करने के बाद पिया का मन थोड़ा अच्छा हो गया था और उसे देखकर पंखुड़ी भी मुस्कुरा उठी..!

उसी वक्त शोवन के नाश्ते की प्लेट लेकर  कामवाली ऊपर चली आई..

” देख लीजिये भाभी ! आपके कहे अनुसार ब्रेड और जैम के साथ दूध भी लेकर गई थी, लेकिन उस बच्चे ने खाने से मना कर दिया..!”

” हां फिर.. ? अभी बिस्किट खा कर उसका पेट भर गया था,  यह दूध यही छोड़ दो मैं पिला दूंगी !  बाकी सब ले जाओ !”

पंखुड़ी पिया की मन:स्थिति समझ पा रही थी और इसीलिए वह अपनी जगह पर खड़ी होकर मुस्कुरा उठी..

” पिया अब मैं चलती हूं ! तुझे भी शाम को महल जाना
  है, और उसके लिए तुझे तैयार होना पड़ेगा..! वक्त भी कहाँ बचा है.. ! इसे भी लेकर जाएगी..?”

पंखुड़ी ने दूध के गिलास की तरफ देख कर पिया से पूछा और पंखुड़ी का इशारा समझ कर पिया ने धीरे से हाँ में सर हिला दिया..

” हां.. महल में भी सबको इस बच्चे के बारे में मालूम है और सब यही जानते हैं कि यह समर के बहुत खास दोस्त का बच्चा है जो अनाथ था इसलिए इसे हमने गोद ले लिया है..!
इसे तो खासतौर पर बुलाया है रूपा रानी सा ने ! उन्हें यह बड़ा प्यारा लगता है…और उनके साथ साथ राजा साहब को भी…  वो तो इसे पल भर के लिए अपनी गोद से उतारते नहीं है !”

“हम्म ! पिया एक छोटी सी बात बोलूं… ?”

पंखुड़ी ने धीरे से इजाज़त मांगी और पिया ने हाँ में गर्दन हिला दी…

“तू इसके लिए कुछ हल्का फुल्का सैंडविच या ऐसा ही कुछ बना कर लें जाना… वहाँ महल की पार्टी का खाना ये शायद ही खा पाए..  वैसे यह सब तुम मुझसे बेटर जानती हो, पर जाने क्यों मैंने ऐसे ही तुमसे  कह दिया..!”

पिया ने मुस्कुरा कर हामी भर दी…..

पंखुड़ी के उठ कर जाते ही पिया भी बेमन से उठ कर अपनी अलमारी खोल कर खड़ी हो गयी…
   उसने अपने लिए एक हल्की नीली सी साड़ी निकाल ली…
   उसके साथ गहने में क्या पहनूं यहीं सोच रही थी कि कमरे में उसकी सास आ गयी…

“पिया.. बेटा महल जाना है तो उसी हिसाब से कुछ अच्छा पहन लेना…

पिया अपनी सास कि इस बात का मतलब अच्छे से समझती थी.. उनका मतलब हमेशा गहनों से होता था.. उन्हें सदा ही लगता था कि गहने पहनने में पिया आलस कर जाती है…
  उन्हें मोटे गहने भाते थे जबकि पिया हलके फुल्के गहने ही पहनना पसनद करती थी.. इस वक्त उसका उनसे बहस करने का मन नहीं था उसने चुपचाप हाँ में सर हिला दिया लेकिन वो वहाँ से टलने वाली नहीं थी..

“दिखाओ.. कौन सा सेट पहन रही हो.. सुनो वो रोज़ गोल्ड वाला पहन लो ना.. तुम लोगो के फैशन का भी है और अच्छा भरा भरा सा भी है… !”

हाँ में सर हिला कर पिया ने हामी भरी और उन्हें टालने के उद्देश्य से उन्हें एक काम पकड़ा दिया…

“मम्मी जी, अगर आप रेडी हो गए हैं तो प्लीज़ शोवन को भी तैयार कर लेंगे क्या.. ? असल में मुझे तैयार होने में वक्त लगेगा !”

“हाँ क्यों नहीं… कहाँ है शोवन ? मै उसे अपने साथ लें जाती हूँ.. !”

“नीचे ही होगा… यहाँ बस थोड़ी देर को आया था, फिर निकल गया.. !”

“ठीक है मै देख लेती हूँ !”

वो शोवन को आवाज़ लगाती नीचे चली गयी और पिया तैयार होने लगी….

वो तैयार होकर नीचे उतरी तब तक समर भी वापस आ चुका था.. वो नीचे बैठा चाय पी रहा था, और वहीँ ज़मीन पर बैठा शोवन नीचे पूरी दुनिया के नक़्शे का पज़ल फैलाये बैठा उसे जोड़ने की कोशिश में था… ! पिया ने एक नज़र उस पर डाली और चुप चाप रसोई में चली गयी… उसकी सास अभी तक तैयार नहीं हुई थी…

” मम्मी जी आप तैयार नहीं हुई… ?

” हम लोग कहाँ जायेंगे वहाँ ! वैसे भी वहाँ की पार्टी का खाना हम दोनों से ही खाया नहीं जाता और आज कल इतनी रात तक जागा भी नहीं जाता… फिर सुबह उठने में अलग दिक्कत हो जाती है.. ! “

” हम्म  !” हामी भर कर पिया ने रसोई में काम करती मेड को देख कर उसे पीनट बटर सैंडविच बनाने को कहा और अपने लिए पानी निकालने लगी…

” सैंडविच किसके लिए पिया.. ? समर ने तो नाश्ता  करने से मना किया है.. ! “

“शोवन के लिए बनवा रही हूँ मम्मी जी ! वो भी वहाँ का मसालेदार खाना नहीं खा पायेगा… !”

“अच्छा उसे खिला कर लें जाएगी.. ?”

“हाँ ! या फिर साथ में लें जाउंगी… और वहीँ खिला दूंगी.. !”

उधर से गुज़रते हुए समर ने पिया की ये बात सुनी और  उसके चेहरे पर एक हलकी सी मुस्कान तैर गयी…..

  शोवन वहीँ नीचे बैठा खेल रहा था… उसे पिया ने उठा कर देखा और उसके कपडे पिया को पसंद नहीं आए….
  शोवन अपने कुछ एक कपड़ों के साथ ही उन लोगों के साथ चला आया था और उसके पास अधिकतर कपडे ब्रिटिश तर्ज़ पर ही थे…

आज भी समर की माँ ने घर की काम वाली से उसके बैग से निकलवा कर एक क्रीम शर्ट के साथ उस पर भूरे रंग की बड़े बड़े चेक्स वाली पैंट और कोट पहना कर उसे तैयार करवा दिया था…

पिया को शोवन की ड्रेस बिल्कुल पसंद नहीं आई… उसने उसे देखा और उसे साथ लेकर नीचे के गेस्ट रूम में पड़े उसके बैग के पास लें गयी… उसका पूरा बैग उलट पलट कर आखिर उसे एक लाल रंग की मिकी माउस बनी टीशर्ट और काली पैंट मिल गयी… पिया ने शोवन के भारी भरकम कोट पैंट को उतार कर उसे हलकी सी टीशर्ट पैंट पहनाया और उसके करीने से सजे बालो को भी थोड़ा अलग ढंग से सेट कर दिया…. उसे साथ लेकर निकलते हुए पिया उसे कुछ समझाने लगी और वो पिया की हर बात पर हामी भरता गया…

सीढ़ियों से उतर कर आता समर, पिया का हाथ पकड़ कर आते हुए शोवन को देख हलके से मुस्कुरा उठा…

वो आगे बढ़ कर पिया से कुछ कहने जा रहा था कि पिया ने वहीँ पड़ा अपना पर्स उठाया और अपनी सास को आवाज़ देकर तेज़ कदमों से बाहर निकल गयी…

“मम्मी जी हम लोग निकल रहें हैं.. !”

समर उससे कुछ कहते कहते रह गया…

शोवन का हाथ पकड़ कर वो भी उसके पीछे बाहर निकल गया…

क्रमशः

aparna….

5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Newest
Oldest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments