
जीवनसाथी-2 भाग -102
हँसते बोलते वो शाम ढलती जा रहीं थी.. समर ने विराट को भी बुला लिया था…
विराट वहाँ सब को अपने और शेरी के मिलने का मज़ेदार किस्सा सुना रहा था, इसके अलावा वहाँ का उसका काम, उन दोनों के बीच पैदा हुई ग़लतफ़हमी जो आगे जाकर उन दोनों को एक मजबूत रिश्ते में बांध गयी, सब कुछ बताते हुए विराट एक बारगी भावुक भी हो गया..
उसे अचानक शेरी का यूँ अपने बच्चे के लिए सोचना पसंद नहीं आ रहा था लेकिन उसने खुद पर नियंत्रण कर लिया..
आखिर सबके साथ वो हसीं शाम वहाँ मौजूद हर किसी को प्यारी सी याद देकर ढल गयी..
विराट ने सबको एक साथ बैठा कर उनकी ढ़ेर सारी तस्वीरें अपने कैमेरा में निकाल ली..
किसी तस्वीर में समर की बाँह थामे पिया खड़ी थी, तो एक कैंडिड क्लिक में प्रेम समर से कुछ बातें कर रहा था और निरमा प्रेम को देखने में व्यस्त थी..
पिया शेरी के पास आई और शोवन को उसकी गोद में थमा दिया..
शेरी ने बड़े प्यार से शोवन को गोद में लिया और पिया ने अपने मोबाइल पर उस प्यारे से पल को कैद कर लिया..
डिनर के बाद भी वो सभी बहुत देर तक साथ बैठे बातों में लगे रहें, हालाँकि शोवन का सोने का वक्त होते ही पिया उसे लेकर अंदर उसे सुलाने चली गयी..
और कुछ देर बाद वापस लौट आई..
आखिर बातों का सिलसिला खत्म हुआ और प्रेम निरमा और मीठी को लेकर वापस निकल गया…
विराट और शेरी भी चले गए, और उन सब को विदा कर के पिया और समर भी ऊपर अपने कमरे में चले आये..
आखिर शेरी पिया और शोवन को छोड़ कर चला गया…
अपने कमरे में हाथ मुँह धोकर आईने के सामने बैठी पिया अपने चेहरें पर नाइट क्रीम लगा रहीं थी, और समर पलंग पर बैठा मोबाइल पर किसी को मेसेज भेज रहा था..
पिया ने आईने में ही झांक कर समर को देखा..
“जितना मैंने सोचा था उतना बुरा नहीं था वो अँगरेज़ !”
समर धीरे से मुस्कुरा उठा..
“मुस्कुरा क्यूँ रहें हो ? तुम्हें पता है वो शोवी का फादर है ये सुन कर मेरा कलेजा मुहँ में आ गया था और मैंने दिन भर में ये भी सोच लिया था कि उसका हक़ नहीं छीनूँगी और अगर उसने शोवी को माँगा तो उसे वापस दे दूंगी.. !”
समर चौंक कर पिया की तरफ देखने लगा..
अपने हाथों में क्रीम लगाते हुए वो समर के पास आकर पलंग पर बैठ गयी..
“हाँ और क्या ? मुझे लगा हम तो फिर भी दूसरा बेबी प्लान कर सकते हैं, पर उसके पास रेवन की यही याद बची है… इसलिए….
समर पिया को ध्यान से देख रहा था..
“लेकिन मुझे आश्चर्य में डुबा कर वो मुझे ही शोवन को सौंप गया.. !”
“मैं जानता था, यहीं होगा ! इसलिए जब तुमने पूछा कि वो तुम्हारे साथ जाना चाहता है तो, मैंने मना नहीं किया..
मैं पहले ही जानता था मेरी फेवरेट जोड़ी को जो देखेगा वो उनसे प्यार कर बैठेगा..
वैसे भी तुम इतनी प्यारी माँ हो कि तुम्हारे हाथ में अपने बच्चे का सुरक्षित भविष्य देखने के बाद वो कभी शोवी को अपने साथ ले जाने की सोचता भी नहीं..।
हालाँकि मैं खुद दूसरे ऑप्शन के लिए भी तैयार था..। अगर वो शोवन को ले जाने की ज़िद पर उतर ही आता तो मैं तुम्हें ही समझाता और उसे शोवी को ले जाने देता लेकिन पता नहीं क्यूँ मुझे अंदर से पता था कि तुम्हारे और शोवी के साथ पूरा दिन गुजारने के बाद वो खुद तुम्हारे और शोवी की लाइफ से अलग हो जायेगा..।”
“मतलब तुम्हें पता था की शेरी शोवन का फादर है ?”
“हम्म… मुझे विराट ने पहले ही बता दिया था, लेकिन मैं तुम्हें बता नहीं पाया.. ।”
पिया ने समर को देखा और ना में गर्दन हिलाती उसकी बाँहों से लिपट गयी..
“कुछ पलों के लिए वाकई बहुत घबरा गयी थी… पर आप तो मिस्टर सर्वज्ञानी है ना… आपको सब पता होता है.. !”..
“अच्छा सुनो.. अभी कुछ देर पहले तुम कुछ प्लान करने की बात कर रहीं थी.. ।”
” क्या.. ?”
“दूसरा बेबी.. ! तो प्लान करना है क्या.. वैसे मैं तो रेडी हूँ.. !”
पिया ने घूर कर समर को देखा और उसके सीने पर सर रखें आंखें मूँद ली..
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समर ने अपने आदमियों को काम में लगा रखा था….
उसे लिस्ट में धांधली करने वालों का पता लग चुका था.. इधर वो अपने ऑफ़िस में बैठा रतन का इंतज़ार कर रहा था..
रतन समर से मिलने चला आया..
समर को राजा ने ही रतन से पूछने का काम सौंपा था लेकिन ये काम इतना आसान भी नहीं था…।
रतन भी कोई साधारण आम इंसान नहीं था। अच्छे खासे बड़े शहर का जिलाधीश रहने के बाद अब चिकित्सा विभाग के सचिव का पद पूरी निष्ठा और सफलता से निभा रहा था…
रतन जैसे ईमानदार और बुद्धिमान पुरुष से इस तरह की चर्चा खुलकर नहीं की जा सकती थी, और इसीलिए राजा ने इस काम के लिए समर को चुना था..।
रतन जैसे ही ऑफिस में आया समर ने उठकर उसका अभिवादन किया और उसे बैठने के लिए कहा..
” कैसे हैं आप कुंवर सा.. ?”
” अरे यह जमाई वाला एटीट्यूड महल के लिए रखे समर साहब यहां तो आप मुझे सिर्फ रतन बुलाइए.. !”
” तब तो फिर आप भी मुझे सिर्फ समर ही बोलिए, आप भी मेरा नाम लेंगे तो मेरा काम भी आसान हो जाएगा.. !
“ऐसा क्या काम है.. ?”
” इस बार की यूपीएससी की फाइनल लिस्ट आने के बाद अंदर ही अंदर मालूम चला है कि सलेक्शन के समय कुछ धांधली भी हुई है.. !”
“अच्छा.. !”
“जी… और..।”.
“और क्या.. ?”
“इसलिए रिज़ल्ट रोक दिया गया है.. वही बुरा लग रहा है.. पिंकी का रिज़ल्ट भी इसी सब चक्करों में उलझ कर रह गया है.. !”
समर एक-एक शब्द चबाकर कह रहा था और बड़े ध्यान से रतन के चेहरे पर आने वाले भावों को नोटिस कर रहा था । रतन समर की बातों को सुनकर कुछ सोच में डूब गया। जमीन को ताकते हुए उसने 2-4 गहरी सांसे भरी और वापस समर की तरफ देखने लगा..
” पिंकी के लिए इस बार का रिजल्ट बहुत ज्यादा मायने रखता है। उसका यह तीसरा और आखिरी चांस था। और इस चांस में वह सेलेक्ट भी हो गई, लेकिन रिजल्ट आने के बाद रिजल्ट पर जो रोक लगा दी गई है उससे न जाने कितनों का भविष्य अधर में लटक गया है। पता नहीं लोग इतने बड़े एग्जाम्स में भी ऐसी धांधली क्यों करते हैं ? उन लोगों को सोचना चाहिए कि, उनके ऐसा करने से कई डिजर्विंग कैंडिडेट पीछे रह जाते हैं। हालांकि इतनी आदर्शों वाली बात अगर वह सोच पाते तो वह ऐसा करते ही क्यों.. !”
“हम्म सही कह रहें हैं आप.. ? इन बातों से तो पिंकी भी परेशान हो रही होंगी है ना.. ?”
” हां परेशान जरूर है, लेकिन उसे खुद पर और हमारी न्यायपालिका पर पूरा यकीन है.. !” रतन की बात सुनकर समर मुस्कुरा उठा
उसी वक्त समर के ऑफिस के एक कर्मचारी ने आकर वहां लगा टीवी चला दिया और समर और रतन का ध्यान टीवी स्क्रीन की तरफ कर दिया !
टीवी पर विरोधी पार्टी के प्रमुख नेता चीख चीख कर राजा अजातशत्रु की बहन भुवन मोहिनी के यूपीएससी सलेक्शन पर आवाज उठा रहे थे.. उनके अनुसार राजा साहब ने अपनी प्रभुता और सम्पन्नता का फ़ायदा उठा कर अपनी बहन को सीट दिलवा दी थी..
वह अपने सहयोगियों के साथ इस बात पर पुरजोर बल दे रहे थे कि किसी भी हाल में भुवन मोहिनी का सलेक्शन कैंसिल किया जाए और या फिर जांच कमेटी बैठाकर दूध का दूध पानी का पानी करें।
वह लगातार सिर्फ और सिर्फ भुवन मोहिनी का ही नाम उछल रहे थे..।
इस खबर को देखते हुए रतन ने अपना हाथ अपने माथे पर रख लिया। परेशान सा वह नीचे देखता हुआ बैठा था..।
” पता नहीं अब क्या होगा ? पिंकी को कैसे संभालूंगा मैं? सबसे ज्यादा बुरा इस बात का लग रहा है कि राजा भैया को हम लोगों के कारण यह कष्ट उठाना पड़ा। यह राजनीति यह सत्ता का खेल बहुत घिनौना होता है।
जो पाक साफ होता है उसी पर बाकी लोग कीचड़ उछालने की कोशिश करते हैं! यह आदमी जो इतना चीख चीख कर राजा भैया पर इतना घिनौना इल्जाम लगा रहा है वह खुद एक से बढ़कर एक कांड करके बैठा है ! कायदे से तो इसे अभी जेल में होना चाहिए था लेकिन… अब क्या ही कहें… !”
समर ने रतन की तरफ देखा..
“इसके खिलाफ सबूत जो नहीं है इसीलिए तो जेल से बाहर घूम रहा हैं.. !”
” सबूत तो जुगाड़ने पड़ते हैं !”
समर की बात पर रतन उसे देखने लगा…
” रतन एक बात जानना चाहता हूं.. !”
समर ने आगे बढ़कर रतन के दोनों हाथों पर अपने हाथ रख दिये…
” आप पर पूरा विश्वास करके आपसे अपने दिल की बात कह रहा हूं प्लीज मेरी बात को समझ जाइएगा। आपसे बस इतना कहना चाहता हूं कि आप भी मुझ पर पूरी तरह से विश्वास कर सकते हैं, यह बात सिर्फ आपके और मेरे बीच रहेगी..।
वैसे मुझे विश्वास है बावजूद एक बार फिर आपसे जानना चाहता हूं कि क्या पिंकी का सिलेक्शन..
” निश्चिंत रहिए समर, पिंकी राजा भैया से स्वभाव से अलग जरूर है, लेकिन उसके अंदर भी वही रॉयल ब्लड है। वो गुस्सैल ज़रूर है, लेकिन बेईमान नहीं है! विश्वास रखो समर पिंकी कुछ भी कर सकती है इस सीट के लिए लेकिन कभी बेईमानी से सीट खरीदेगी नहीं..
और मेरी जानकारी के बिना तो कभी नहीं.. !”
“बस यहीं सुनना था.. अब आप मेरी बात ध्यान से सुनिए.. हमारे पास इसके खिलाफ सबूत नहीं भी है तो क्या हुआ..? सबूत तैयार भी तो किए जा सकते हैं। बस हमें इस बात का ध्यान रखना कि यह सारी बातचीत सिर्फ आपके और मेरे बीच में रहे और राजा साहब तक यह बात ना पहुंचे, क्योंकि राजनीति में उतरने के बावजूद वह अब भी चाहते हैं कि हर एक काम इमानदारी से हो।
लेकिन उन्हें नहीं पता कि कीचड़ में आधे धंसे आदमी से लड़ने के लिए हमें खुद उस कीचड़ में उतरना पड़ता है.. मैं नहीं चाहता कि राजा साहब पर उस कीचड़ के छींटे उड़े इसलिए मैं चाहता हूं इस आदमी से इसके कीचड़ में उतर कर मैं ही लड़ाई लड़ लूं…
” एक राजा की सफलता में उसके मंत्री का कितना बड़ा योगदान होता है यह तुम्हें देख कर ही समझ में आ जाता समर ! तुमने जो प्लान बनाया है मैं उसमें तुम्हारे साथ हूं। तुम्हें जिन जिन चीजों की जरूरत है, वह सारी चीजें शाम तक में तुम्हारे पास पहुंच जाएंगी। और सब कुछ तुम्हारे प्लान के हिसाब से चला तो कल यह आदमी वापस इसी टीवी पर माफी मांगता नजर आएगा.. !”
उसके बाद तो सब कुछ होता चला गया। समर को अपने प्लान पर पूरा भरोसा था और अपने प्लान की सफलता पर भी। लेकिन उसे उस प्लान को शुरू करने से पहले बस इस बात की तसल्ली करनी थी कि पिंकी गलत तो नहीं है। क्योंकि अगर पिंकी गलत होती तो वह इस प्लान में बुरी तरह से फेल हो जाता, लेकिन रतन से बातचीत करके उसके हाव भाव देखकर समर को यह एहसास हो गया कि रतन और पिंकी झूठ नहीं बोल रहे हैं ।
और इसीलिए उसने अपना काम करना शुरू कर दिया। उसे पहले से ही अंदाजा था कि विपक्षी पार्टी के लोग राजा अजातशत्रु के शानदार व्यक्तित्व को नीचे गिराने के लिए इस तरह की उल जलूल हरकतें कर रहे हैं। भले ही सारी दुनिया जानती है कि राजा अजातशत्रु कोई गलत काम नहीं कर सकते और ना ही वह कभी किसी गलत तरीके से अपनी बहन को सीट दिलवा सकते हैं, बावजूद विरोधी पार्टी के नेता ने अपने लोगों को राजा अजातशत्रु और पिंकी के खिलाफ इस तरह उकसाना शुरू कर दिया कि उनकी टीम के सारे लोग राजा साहब को बदनाम करने की कोशिश में लग गए..।
लेकिन बात यही है कि झूठ कितनी भी बुलंद आवाज में चीख-चीखकर कहा गया हो और सच्चाई कितनी भी खामोश हो लेकिन एक ना एक दिन वह वक्त आ ही जाता है, जब लोगों को असल सच्चाई मालूम चल जाती है। और चीखता चिल्लाता झूठ एक तरफ सर झुकाए खड़ा रह जाता है…।
विरोधी पार्टी का जो नेता टीवी पर चीख चीख कर राजा अजातशत्रु और भुवन मोहिनी के बारे में बढ़-चढ़कर बातें बना रहा था, उसने खुद ने जाने कितने काण्ड कर रखें थे..
वो शुरू से ही लालची और स्वार्थी प्रवृत्ति का रहा था..।
उसने राजनीति में जब प्रवेश किया था, तभी से उसकी नजर सत्ता के सर्वोच्च सिंहासन पर थी, लेकिन उसे यह भी मालूम था कि वहां तक पहुंचने के लिए उसे सीढियों की जरूरत होगी और इसीलिए उसने उस वक्त के प्रबल सत्ताधारी को अपने प्रलोभन और बातों से अपनी तरफ मिला लिया..
वह दिग्गज नेता भी कोई बहुत दूध के धुले थे नहीं, और इसीलिए उन्होंने इसे अपने साथ ले लिया और इसके बाद इस के कारनामे एक-एक करके निखरते चले गए..
ना जाने कहाँ कहाँ इसने डाके डाल रखें थे..।
एक समय में जमीन का धंधा करने वाला यह आदमी एक तरह से भू-माफिया बन चुका था और जमीन की खरीद-फरोख्त में इसने खूब सारा पैसा बनाया था। उसी समय सरकार की एक जमीन जो इसमें लीज पर लेकर कुछ काम शुरू किया था को किसी दूसरे व्यापारी को ऊंचे दाम लेकर इसने बेच दी थी.. ।
यह मामला प्रकाश में आया तब इसने कुछ पैसे खिलाकर मामले को दबाने की कोशिश की और उसके बाद एक-एक कर इसके कोई ना कोई मामले निकलते चले गए थे..।
ऐसे ही एक बार डांसर की मौत के मामले में भी इसका हाथ होने की बात आई थी, लेकिन इसने उस केस को भी दबा दिया..
एक और बहुत ही कद्दावर नेता की ज़मीन के अच्छे खासे बड़े टुकड़े पर भी इसने अपना दावा ठोंक दिया था….।
उस नेता ने जब इस बात को कोर्ट तक ले जाने की बात कहीं तब ये ज़रा नरम पड़ा और अपने गॉडफादर के द्वारा दोनों को समझाइश दिये जाने के बाद उस नेता से भी इसने खुद होकर हाथ मिला लिया था..।
इसके बारे में कहावत सी प्रचलित हो चुकी थी कि इसे लड़ाई का कीड़ा है और यह जब तब किसी न किसी को अपनी बदगुमानी के कारण काटता रहता है..।
इसी के लोग पीठ पीछे इसे मधुमक्खी का छत्ता कहते थे और इससे उलझने से बचते थे..।
लोग गलत ना भी हो तब भी इसके मकड़जाल से दूर ही रहना चाहते थे..।
अपने लड़ने के शौक के कारण ही इस बार ये राजा साहब से उलझ पड़ा था। क्योंकि वह राजा साहब का स्वभाव भली प्रकार जानता था, वह जानता था कि राजा साहब कभी पलट कर उसकी बदतमीजियों का जवाब नहीं देंगे और शांत रहेंगे ।
लेकिन वह भूल गया था कि राजा साहब के बगल में समर खड़ा है, जो जैसे को तैसा जवाब देना जानता है। अगर वह राजा साहब की तरफ एक पत्थर उछालेगा तो उसके बदले में समर पत्थरों का पूरा का पूरा पहाड़ उस पर फेंक कर ही मानेगा..
अभी भी यही हुआ..
समर ने अपने आदमियों को काम पर लगा दिया था और उन लोगों ने इस नेताजी के कुछ करीबियों को ही धर दबोचा और नेताजी के खिलाफ एक के बाद एक सबूत जुटाकर समर के पास सब कुछ पहुंचा दिया। इसके साथ ही रतन ने अपने स्तर पर बातचीत करके इन नेताजी के पुराने कारनामों की गुमशुदा फाइल्स निकलवाई और उन पर भी काम शुरू कर दिया..
वो नेता जी अपने घमंड में गुम इस बात को भूल बैठे थे कि उनका सामना किस से हुआ है?
और इस बार वह सिर्फ एक तरफ से नहीं चारों तरफ से लपेटे गये। इस बार वह इस बुरी कदर फंसे कि उनके गॉडफादर भी उन्हें बचाने के लिए आगे नहीं आ पाए…
यूपीएससी की सीट में हुई धांधली की जांच के लिए तैयार की गयी कमेटी ने भी सारी खोजबिन करके अपना परिणाम तैयार कर लिया और उस परिणाम में यही साबित हुआ कि यूपीएससी परीक्षा में किसी भी तरह की कोई धांधली नहीं की गई है…
और यह काम सिर्फ उन्हीं नेताजी के द्वारा जानबूझकर फैलाई हुई गलतफहमी के कारण हुआ था। पर इस तरह जिन लोगों का नाम संदिग्ध पात्रों की लिस्ट में था उन सब की तरफ से समर ने को नेताजी पर मानहानि का दावा भी ठोंक दिया। इस सब का परिणाम यह निकला कि हर तरफ से दबाव बनने के कारण और पार्टी की तरफ से भी दबाव बनने के कारण नेता जी को मीडिया में आकर सरेआम राजा साहब से अपने किए की माफी मांगनी पड़ी … ।
अगले दिन ठीक उसी वक्त पर वापस वो नेता जी, टीवी स्क्रीन पर हाथ जोड़े अपने बोले शब्दों को वापस लेते हुए नजर आ रहे थे..।.
महल में उत्साह की लहर दौड़ गयी.. .
सबसे पहले निरमा और प्रेम ही बधाई देने के लिए महल चले आए..
राजा साहब और बांसुरी भी अपनी छोटी सी ट्रिप पूरी करके आ चुके थे और उन दोनों की भी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। महल के लोग शाही दीवान खाने में बैठे टीवी स्क्रीन पर उस नेता की बातों को सुन रहे थे..।
संदिग्ध कैंडिडेट की लिस्ट में से कुछ दो चार लोग भी वहां मौजूद थे, उन्हीं में से किसी एक ने आगे बढ़कर उस नेता के चेहरे पर कालिख मल दी, और एक दूसरे कैंडिडेट ने आकर टूटे-फूटे चप्पलों की मालाओं से उस नेता जी का श्रृंगार कर दिया…।
“अरे ये तो कुछ ज्यादा ही हो गया… आजकल मॉब का भरोसा नहीं है! लोगों में गुस्सा इतने चरम पर पहुंच गया है कि कल तक जो लोग इन नेताजी के पीछे इनके दुमछल्ले बने घूम रहे थे, आज उनमें से कई लोग इनके खिलाफत में ही रोड पर उतर आए हैं.. !”
” उसका कारण यह है राजा साहब कि उन लोगों को पहले इन नेताजी के द्वारा बहुत बेवकूफ बनाया गया था। और वह लोग इनकी भक्ति में सही गलत भूल कर आप को गलत साबित करने में लग गए थे..! आज जब इन लोगों की आंखों से वह गलत पट्टी उतरी है, तब जाकर उनको एहसास हुआ है कि यह लोग कितने गलत थे और आप कितने सही..!”
“मुझे खुद को सही साबित करके कुछ नहीं मिलने वाला है समर, लेकिन हाँ कोई ज़बरदस्ती का झूठा आरोप लगाए तो दिल तो दुखता ही है !”
” राजा साहब वह कुछ भी करके आप से आगे नहीं बढ़ पा रहे थे और उनकी इसी जलन ने उन्हें इतना नीचे गिरने के लिए मजबूर कर दिया..!”
“खैर… अब ये सब छोड़ कर आज हम सब जश्न मनाते हैं क्यूंकि सही मायनो में आज पिंकी के रिज़ल्ट की ख़ुशी मनाने का मौका मिला है.. क्यूँ समर.. ?”
“जी हुकुम !”..
वहाँ मौजूद सभी लोग हँसते खिलखिलाते बातों में लग गए.. रूपा ने अपनी आदत के मुताबिक पहले ही पार्टी की तैयारी कर रखी थी..
बातें करते खाते पीते महल के लोगों के सर से आखिर एक और मुसीबत उतर गयी थी…
क्रमशः
aparna…
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कलि उस झील के किनारे खड़ी बड़े ध्यान से उसका पानी देख रही थी..
वो खूबसूरत सी झील पर्यटन का विशेष आकर्षण थी..
पिछले हफ्ते उसके कॉलेज की ट्रिप को यहाँ लाया गया था लेकिन उसे अपने पिता से यहाँ आने की इजाज़त नहीं मिली थी..
रो धोकर कलि ने सारा घर सर पर उठा लिया था..
इसलिए आज उसे अपने साथ लेकर वासुकी यहाँ घुमाने लाया था..
कलि मुस्कुरा कर उस सुंदर दृश्य को देख रहीं थी, की उसी रेलिंग के पास खड़े तीन चार लड़के उसे देख कर आपस में बातें करते हुए उसे छेड़ने लगे..
कलि खुद में मगन अपने मोबाइल से तस्वीरें लें रहीं थी और लड़के उसे घूरते हुए कहकहे लगा रहें थे..
तभी उनमे से एक लड़के ने अपना मोबाइल निकाल कर कलि की तस्वीर लेने के लिए जैसे ही उसकी ओर मोबाइल घुमाया, उसी वक्त कलि के ठीक बगल में वासुकी आकर खड़ा हो गया..
उसने धीरे से कलि के कंधे को अपनी बाँहों के घेरे में ले लिया और एक नज़र उन लड़कों पर डाली..
वो लड़के उसे देखते ही घबरा गए, और एक एक कर बहाने बनाते हुए वहाँ से चम्पत हो गए..
अगले एपिसोड की झलक…
aparna…

Kya is story ke sare episodes upload ho gye???🙄🙄
हाँ नेहा जी आप मुझी पेज पर जाकर जीवनसाथी season 2 को खोलियेगा.. सारे पार्ट्स मिल जायेंगे