जीवनसाथी -2/101

जीवनसाथी -2 भाग -101

   शाम ढलने लगी थी..
पिया की नज़र शेरी पर थी और शेरी पूरी तरह से शोवन  में खोया हुआ था ! उसे शोवन को गोद में उठाकर हवा में झूलाने में बड़ा मजा आ रहा था! वह शोवन के साथ एक जगह से दूसरी जगह के लिए रेस लगा रहा था, उसे अपने पैरों में खड़ा कर चला रहा था…!

उसे अपने हाथों से खिला रहा था….
पिला रहा था, उसकी हंसी से खुश हो रहा था, उसकी आँखों से महक रहा था.. !

और बाप बेटे की इस जोड़ी को देखती बैठी पिया अपनी ही सोच में मगन थी… !

वो ये सोच रहीं थी की उसके और समर के पास तो फिर भी मौका है अपने बच्चे को पाने का लेकिन शेरी के पास तो कुछ नहीं बचा था.. ।

देखा जायें तो अगर वो वाकई रेवन से प्यार करता था, तो उसके पास रेवन के प्यार की आखिरी निशानी के तौर पर शोवन ही तो था..
शोवन शेरी को रेवन की याद दिलाता था.. ।

माना की रेवन ने शेरी को कभी गंभीरता से नहीं लिया लेकिन वो कितना भी खुद को बेपरवाह और बेलौस दिखा लें लेकिन शोवन के लिए वो एक ज़िम्मेदार पिता बन सकता था…।

उसका शोवन के लिए प्यार किसी अंधे को भी नज़र आ सकता था..।
वो तो फिर भी एक माँ थी…।
जब अपना नहीं होते हुए भी वो शोवन पर जान छिड़कने लगी थी तो शेरी तो उसका पिता था..।
शोवन शेरी का ही हिस्सा था, उसका अंश !

अपने बचपन को वापस अपने सामने बढ़ते देखना, कितना अद्भुत अनुभव होता होगा किसी पिता के लिए, ये शेरी को देख कर पिया बहुत करीब से समझ पा रहीं थी.. ।

समर भी शोवन से प्यार करता था! बेहद प्यार करता था लेकिन आज शेरी ने जिस ढंग से शोवन पर लाड़ लुटाया था वो सिर्फ शेरी ही कर सकता था..

वाकई ये गोरे बड़े अलग और अजीब होते हैं… ये अपने जीवन का हर एक पल खुल कर जीते हैं.. बिल्कुल ऐसे जैसे अगला पल मालूम नहीं मिलेगा भी या नहीं..।

और हम भारतीय खुशियों के पल जीने में भी कंजूसी बरत जाते हैं, हमें लगता है उन पलों से तिजोरी भर कर रख लें, शायद बाद में ये ख़ुशी के पल काम आ जायेंगे, लेकिन ऐसा कभी होता नहीं..
जो पल गुज़र जाते हैं वो कभी लौट कर नहीं आते.. !!

शेरी खुश था.. । बहुत खुश !!

शायद उसकी ज़िन्दगी का ये सबसे प्यारा पल था… और इस पल को वो अपनी आँखों में, अपनी सांसो में, अपने एहसासो में भर लेना चाहता था.. !

शोवन के साथ बोटिंग फिर स्वीमिंग साईंकिलिंग कर के भी उसका मन नहीं मान रहा था और शोवन उसके लिए तो जैकपॉट लगा था.. !
आज उसकी मॉमी पूरा दिन उसके साथ थी ऊपर से ये शेरी अंकल भी उसे पूरा वक्त दे रहें थे….. !

आखिर वो दिन ढ़ेर सारी रंगीन यादें शेरी के दिल के ख़ज़ाने में भर कर बीत गया..

वो सब लोग वापस लौट पड़े..

“आज आप हम लोगों के साथ ही डिनर कर लीजिये.. !”

शेरी ने कृतग्यता से पिया की तरफ देखा.. जैसे इस सुंदर से दिन के लिए उसका शुक्रिया अदा कर रहा हो.. !

पिया ने गाड़ी घर की तरफ मोड़ ली.. उसने रास्ते से ही समर को भी फ़ोन लगा लिया था, वो घर लौट चुका था और उन्हीं लोगों का इंतज़ार कर रहा था..

गाडी खड़ी करते ही, पिया को दरवाज़े पर ही उन लोगों का इंतज़ार करता समर दिख गया.. ।

गाड़ी से उतर कर शोवन सीधे समर की तरफ भागा और समर ने उसे गोद में उठा लिया.. ।
शोवन ने अपने पापा को ख़ूब सारा प्यार करते हुए दिन भर की सारी कहानी सुना डाली .. ।
बोटिंग करते हुए कैसे उसने नीले कमल तोड़ने की कोशिश की लेकिन उसके हाथ कुछ नहीं आया..।
साइकिलिंग में कैसे उसने शेरी अंकल को दो बार हरा दिया…

शोवन की बातें बड़े ध्यान से सुनता समर उसमें बीच बीच में सवाल भी करता जा रहा था..।
शेरी को अंदर आने का इशारा कर समर शोवन को गोद में उठाये अंदर चला गया..

पिया ने शेरी की तरफ देखा और उसे साथ लिए आगे बढ़ गयी..

“ये इन दोनों का रोज़ का है.. स्कूल से अक्सर मैं ही लेने जाती हूँ शोवन को.. उसके बाद हमारा सारा वक्त साथ बीतता है.. इसलिए रात में जब समर घर लौटते है तो शोवी तुरंत अपने पप्पा… सॉरी समर के पास चला जाता है.. !”

पिया ने जितने उत्साह से ये बात बतानी शुरू की, उतने उत्साह से अपनी बात पूरी नहीं कर पायी.. और उसकी बात सुन शेरी एक लम्बी सी साँस लेकर रह गया…

पिया के कपडे बदल कर आते तक में लाली ने खाना परोसने की तैयारी कर ली थी..

किचन से बाहर की तरफ गार्डन था, वहीं तंदूर में उसने तरह तरह की चीज़े लगा रखी थी….

समर ने प्रेम और निरमा को भी बुला लिया था..

प्रेम समर और शेरी बैठे बातें कर रहें थे.. उसी समय पिया भी वहाँ चली आई..
निरमा मीठी और शोवन को फ्रूट्स खिला रहीं थी..

पिया ने आते ही तंदूर की तरफ रुख कर लिया लेकिन उसे उधर जाते देख शेरी भी उसके पास चला आया..

“पिया.. तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ !”

पिया का दिल अब भी ज़ोरों से धड़क रहा था, लेकिन अब वो हर बात के लिए तैयार थी.. उसने मन ही मन खुद को मना लिया था कि वो शोवन को उसके पिता को सौंप देगी…

एक गहरी सी साँस भर कर पिया ने शेरी की तरफ देखा..
तंदूर पर पड़ी सींकों को वो अलट पलट कर सब्जियों और पनीर को हर तरफ से सेंक रहा था..

“पिया… इन सब्जियों को अगर हर तरफ से ना सेंका जायें तो ये कच्ची ही रह जाती है ना..

“अह्ह्ह हम्म… हम्म… !

पिया से कुछ कहा नहीं गया..

“बस ऐसे ही अगर बच्चे को बचपन में माँ बाप दोनों का प्यार नहीं मिले तो उसका जीवन भी कच्चा ही रह जाता है.. और ये मुझसे बढ़ कर कौन जानता है ?
जब भी अपने साथ के किसी बच्चे को उसके पैरेंट्स के साथ घूमते फिरते देखता था, तब हमेशा मेरे मन में भी यह बात आती थी कि मेरे पेरेंट्स अलग क्यूँ हुए… लेकिन वो मेरी डेस्टिनी थी, मेरी किस्मत में शायद वही लिखा था ! यहां आने के बाद और अपने बेटे को देखने के बाद उसे अपने साथ रखने का लालच मेरे मन में भी आ गया। मुझे लगा मुझे वापस एक बार फिर अपना बचपन जीने को मिलेगा। मैं अपने पिता के साथ अक्सर बेहद खूबसूरत समय बिताया करता था, अब वह समय मुझे अपने बेटे के साथ बिताने का मौका मिलेगा।

        लेकिन इसके साथ ही यह बातें धीरे-धीरे समझ में आने लगी कि मैं अपने बेटे के साथ अपने बचपन को जी सकता हूं, लेकिन मेरा बेटा अकेले मेरे साथ अपने बचपन को कहीं खो देगा !
क्योंकि इस वक्त उसे अपने पिता से ज्यादा अपनी मां की जरूरत है, और उसकी इस ज़रूरत को सिर्फ तुम पूरा कर सकती हो !
     तुम और समर परफेक्ट कपल हो, और मेरे शोवन  के लिए परफेक्ट पेरेंट्स भी !
       शायद मैं भी उसे वह सब नहीं दे सकता जो तुम दोनों के पास रह कर उसे मिलेगा | तुम्हारे प्यार की गर्माहट, तुम्हारी देखभाल और सबसे बढ़कर तुम्हारे इंडियन कल्चर के संस्कार |
    बस एक गुजारिश करना चाहूंगा, अगर कभी मैं उससे मिलना चाहूँ तो  मुझे उससे मिलने की इजाजत दे देना ! अगर तुम दोनों इजाज़त दो तो कभी कभी मैं उससे फोन पर बात कर लिया करूंगा !
    मेरे लिए इतना ही बहुत है !
    मैं कहीं टिक कर कर रहने वालों में से नहीं हूँ ! मेरा कोई ठिकाना नहीं है !
   जगह-जगह घूमते रहना ही मेरी नियति है ! और देखा जाए तो अपने बच्चे को लेकर घुमाते हुए मैं उसे एक सुरक्षित और सुंदर भविष्य तो नहीं दे सकता ना… !

शोवन तुम्हारा ही है पिया.. सिर्फ तुम्हारा !
तुमसे उसे छीन कर मैं शोवन के साथ ही गलत कर जाऊंगा… और मैं जानता हूँ अगर शोवन से भी पूछा जायें तो वो मेरी जगह तुम दोनों को ही चुनेगा… !”

पिया की आँखों से आँसू बह रहें थे..
शेरी की भी आंखें नम थी..
उसे भीगी पलकों में देख पिया पल भर को चौंक गयी..

“बताओ ये गोरे रोते भी है… पहले तो सदियों हम पर राज करके हमें खून के आंसू रुलाया और अब देखो…खुद रोने लगा.. !”

पिया को अपनी मूर्खता भरी सोच पर हंसी भी आई लेकिन उसने खुद को संभाल लिया.. असल में तो उसके दिल में पिछले कुछ दिनों से जो भारी से बादल ठहर गए थे, अचानक बरस पड़े थे..
और राहत भरी ठंडी बयार बह चली थी..

“मॉमी.. क्या हुआ ?”

शोवन ने आकर अपनी मॉमी के गालों में ढुलक आये आँसू पोंछ दिये और पिया ने उसे अपनी बाँहों में भर लिया..
निरमा ने पिया के कंधो पर हाथ रखा और उसे साथ लिए आगे बढ़ गयी..
शेरी भी वापस आकर समर और प्रेम के साथ बैठ गया..

खाने पीने और बातों में वो प्यारी सी शाम ढल गयी…
और जाते जाते पिया के दिल का बोझ भी ले गयी…

******

राजा ने जैसा सोचा था वैसे किसी कारण से उसे दिल्ली नहीं बुलाया गया था, बल्कि दिल्ली से बुलाने का विशेष कारण चुनाव था…
     दिल्ली में बैठे पार्टी प्रमुख उसे अपनी पार्टी में मिलाना चाहते थे, उन्हें पूरा विश्वास था इस बार फिर राजा अजातशत्रु की पार्टी भारी बहुमत से विजई होगी इसलिए वह चाहते थे कि राजा अजातशत्रु अपनी पार्टी को उनकी पार्टी में विलय कर दें, और उनके साथ हाथ मिला ले! राजा अजातशत्रु ने सोच-समझकर निर्णय देने की बात कही और वहां से निकल गए…!

वहां से निकलने के बाद राजा ने बांसुरी को फोन मिला लिया, बांसुरी राजा का इंतजार करती बैठी थी,  वो तीनों वहां से कहीं घूमने निकल गए..

गाड़ी में भी राजा को परेशान देखकर बाँसुरी ने उससे  पूछ ही लिया..

” क्या हुआ साहिब, कुछ ज्यादा ही परेशान लग रहे है?”

” फिलहाल पार्टी प्रमुख चाहते हैं कि मैं अपनी स्वतंत्र पार्टी को उनकी पार्टी के साथ विलय कर दूँ,  और चुनाव में इस बार उनकी पार्टी की तरफ से खड़ा रहूं ! उन्होंने इसके लिए ढेर सारे प्रलोभन भी दिए हैं, जैसे सीएम का पद मुझे ही दिया जाएगा, मेरे मंत्रिमंडल को चुनने का और बनाने का पूरा हक सिर्फ मेरा होगा, और भी इसी तरह के ढेर सारी बातें हैं.. !”

“हम्म फिर आपने क्या कहा ?”

” अच्छा तुम बताओ हुकुम कि मुझे क्या कहना चाहिए था..!”

” मना कर देना चाहिए था ! इसमें कौन सी बड़ी बात है? आपने पिछली बार भी अपने दम पर अपनी पार्टी को जीत दिलवाई थी। आपकी जीत पूरी तरह से आपकी और आपके ईमानदार लोगों की थी। बाकी दोनों ही पार्टी आपसे पीछे थी..।
आपको याद ही होगा कि उस वक्त भी आपके पास ही बहुमत था और उनमें से एक पार्टी को आप से हाथ मिलाना पड़ा था। आपको किसी के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ी थी, और अब आप के 5 साल के कार्यकाल का फल मिलने का समय आ चुका है। अब तो आपके दोस्तों और दुश्मनों सबकी आंखें खुल चुकी हैं। सबको दिख चुका है कि राजा अजातशत्रु क्या है ?और क्या कर सकते है ?जब पहली बार चुनाव लड़ कर भी आपने अपने दावे की हर एक सीट पर अपना कब्जा जमा लिया था तो, अब तो 5 साल आपका सुशासन आपकी जनता देख चुकी है ।अब तो हर किसी को पता है कि आप ही जीतने वाले हैं ।ऐसे में पक्ष क्या और क्या विपक्ष, हर कोई आपको इसी तरह से प्रलोभन देकर अपनी तरफ बुलाएगा ही, लेकिन मैं जानती हूं कि मेरे राजा साहब को इन झूठी पार्टियों की ज़रूरत नहीं है..
आप अकेले सक्षम है साहब !
आपको ना यह लोग पिछली बार हरा पाए थे और ना अब हरा पाएंगे…
6 महीने बाद चुनाव होने हैं, और अब तो इस चुनावी रण का बिगुल बज चुका है। और मैं जानती हूँ, इस बार आप के खिलाफ खड़े होने वाले हर एक व्यक्ति की जमानत तक जब्त हो जाएगी, इतने प्रचंड बहुमत से आप जीतने वाले हैं…।”

” क्या बात है मेरी पंडिताइन भविष्यवाणी भी करती है..?”

” भविष्यवाणी तो करती है और इस बार आप की चुनावी रणनीति तैयार करने में आपके महामंत्री का साथ भी देने वाली है !”

” तुम अपनी बातों से ना मुझे हर बार एक मीठे से जाल में फांस लेती हो, बहुत टेंशन में पार्टी कार्यालय से बाहर निकला था और इसीलिए तुरंत तुम्हें फोन किया और देखो तुम से बात करते ही पल भर में सारा टेंशन पता नहीं कहां गायब हो गया ,और अब ऐसा लग रहा है बस शिमला की वादियां हमें बुला रहीं हैं.. !
वैसे  हुकुम तुम इतनी बार पहाड़ों पर जा चुकी हो, तुम्हें ऐसा क्या पसंद है पहाड़ो में.. ?”

“पता नहीं साहब.. लेकिन शहर के हो हल्ले से दूर पहाड़ों पर एक अलग सा सुकून मिलता है। लंबे-लंबे चीड़ के पेड़ और उनके बीच से उगता सूरज बहुत प्यारा लगता है। इन पहाड़ों की शुद्ध हवा, यहां की सौंधी मिट्टी, झरनो  के बीच से बहता यहां का साफ पानी यहां के मेहनतकश लोग मुझे यहां की हर चीज प्रकृति से जुड़ी नजर आती है। यहां की कलकल बहती नदियां भी बहुत अपनी सी लगती है..!”

गाड़ी आगे बढ़ती जा रहीं थी…. बाँसुरी राजा के कंधे से टिकी बैठी उस सुंदर रास्ते को देखती जा रहीं थी..

थोड़ा आगे एक लकड़ी के बने छोटे से कैफे में राजा ने गाड़ी रुकवा दी..

बाँसुरी को बाहर से देखने में जगह कुछ खास नहीं लगी..
शौर्य भी गाड़ी में सो चुका था..
इस बार राजा अपनी किसी सिक्योरिटी को साथ लेकर नहीं आना चाहता था लेकिन उसके पद की गरिमा के अनुसार उसे गार्ड्स रखने ही थे..

राजा के गाड़ी से उतरते ही उसके गार्ड्स पहले उतर कर आगे बढ़ गए.. हालाँकि राजा ने उन्हें सिविल ड्रेस में रहने की ताकीद कर रखी थी जिससे किसी बाहर वाले को ये आभास ना हो की उन लोगों के साथ सिक्योरिटी है..

सिक्योरिटी के दो आदमी साधारण कपड़ो में अंदर जाकर इधर उधर देख कर बैठ गए…
उसके बाद राजा बाँसुरी और शौर्य आये.. उनके पीछे फिर दो सिक्योरिटी गार्ड साधारण कपड़ों में चले आये..

शौर्य की नींद खुल चुकी थी..

अंदर से वो कैफे काफ़ी बड़ा था… लकड़ी का पूरा काम कर और नकली जानवरो को लगा कर उसे नकली ज़ू के   तरीके से सजाने की कोशिश की गयी थी..

शौर्य को वहाँ बहुत सारी चीज़े नज़र आ रहीं थी.. उसे देखने में मज़ा आ रहा था..
वो एक बड़े से शेर के पास पहुँच गया..
वो उस शेर को पकड़ कर देखने वाला था की साथ खड़े उन्हीं के एक सिक्योरिटी गार्ड ने उसे टोक दिया..

शौर्य वहाँ से एक उल्लू को देखने चला गया.. शौर्य उसकी गोल गोल घूमती आँखे देख उसमें ऊँगली डालने वाला था की वापस गार्ड ने उसे टोक दिया..

शौर्य ने उसे घूर कर देखा और गुस्से में अपनी मम्मा के पास चला आया और शिकायत करने लगा..

“मम्मा ये लोग मुझे परेशान कर रहें हैं.. प्लीज़ इन्हें मना करो की ये मेरे पास ना आये..
मुझे ये लोग पसंद नहीं है .. !”

शौर्य की बात सुन बाँसुरी कुछ कह पाती उसके पहले ही राजा बोल पड़ा..

“तुम ये गलत कह रहें हो शौर्य ! तुम्हें ये लोग क्यूँ पसंद नहीं ? सिर्फ इसलिए की ये तुम्हें कुछ गलत जरने से रोक रहें ?”

“लेकिन वो कौन होते हैं मुझे रोकने वाले.. मैं एक प्रिंस हूँ !”

राजा और बाँसुरी उसकी ज़िद भरी बात सुन कर हॅंस पड़े..

“हाँ मेरा बेटा प्रिंस तो है, क्यूँ राजा साहब इसमें तो कोई शक नहीं है ना ?”

“नहीं.. बिल्कुल नहीं.. लेकिन शौर्य अगर तुम प्रिंस हो तब तो तुम्हें इनका और भी सम्मान करना चाहिए ना बेटा..
देखो उन्हें भी पैसों की ज़रूरत है और उसके लिए वो हमारे यहाँ काम करते हैं… उन्हें हम फ्री के पैसे नहीं देते हैं बेटा.. इसलिए हम उन पर किसी तरह का एहसान नहीं कर रहें और ना ही वो हमारे यहाँ काम कर रहे है इसलिए हमें ये इजाज़त मिल गयी है कि हम उनकी बेइज्जती कर सकें…।
हर एक इंसान का अपना सम्मान होता है..।
देखो उन अंकल को… वो तुम्हारे सिक्योरिटी गार्ड है.. वो तुम्हारी सुरक्षा का ध्यान रखते है, तुम्हारी सुरक्षा के लिए वो अपनी जान की बाजी भी लगा सकते हैं और उनके इस काम के बदले मैं उन्हें पे करता हूँ..
अब ऐसे में मैं उन पर नहीं बल्कि वो मुझ पर एहसान कर रहें..
उनके घर पर भी उनका एक नन्हा सा बेटा होगा ना.. जिसके लिए वो हीरो होंगे…
उनका बेटा उनका सम्मान करता होगा ना..
क्यूंकि वो भी उस सम्मान के अधिकारी है जिस सम्मान के अधिकारी तुम्हारे पिता..
इसलिए शौर्य कभी किसी के काम को देख कर उसे नीचा मत दिखाना बेटा..
हर एक इंसान का आत्मसम्मान होता है और हमें कभी किसी के सम्मान को ठोकर नहीं मारनी चाहिए !”

शौर्य को राजा की बड़ी बड़ी बातें पता नहीं कितनी समझ आई लेकिन थोड़ी देर मुहँ लटका कर बैठे रहने के  बाद वो एक बार फिर उस कैफे के काउंटर की तरफ बढ़ गया.. जहाँ एक बाउल में कैंडिज़ रखी गयी थी..
उसे वहाँ अपना प्रिंस वाला रुतबा दिखा कर वो कैंडी वसूलनी थी…

क्रमशः…

aparna….

5 4 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Newest
Oldest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments