जीवनसाथी -2/96

जीवनसाथी -2 भाग -96

  महलवासियों के उत्साह उनकी ख़ुशी का कोई ठिकाना ना था…
कोई ऐसा इंसान जो अति प्रिय हो और उसके बारे में ये मालूम चले की वो नहीं रहा, और वो इंसान अचानक कुछ समय बाद वापस लौट आये, इससे बड़ा चमत्कार शायद ही दुनिया में कुछ और हो..
महल वालों का भी बस वहीं हाल था..

बाँसुरी के कमरे में भी सब रह रह कर उसे देखने चले ही आ रहें थे…
जबकि सारा महल उससे मिल चुका था, लेकिन महल की औरतें अपने बच्चों के साथ बाँसुरी के ही कमरे में जमी थी..
किसी का मन नहीं भर रहा था बाँसुरी को देख देख कर..
कोई वहाँ से जाना नहीं चाहता था, लेकिन राजा भी अपनी बाँसुरी के साथ अकेले समय बिताना चाहता था..
इसका उसे कोई मौका नहीं मिल पा रहा था..
वो भी कमरे में ही एक तरफ बैठा था, लेकिन वहाँ बैठी औरतों की बातों की बौछार उस तक भी पहुँच रहीं थी..

इसलिए धीरे से उठ कर वो अपने कमरे में बनी अपनी स्टडी में चला गया…
बाँसुरी को भी समझ में आ रहा था, लेकिन वो भी कुछ नहीं कर सकती थी..
रूपा भाभी निरमा को आड़े हाथों लें रहीं थी की उसने सब मालूम होते हुए भी उसे कुछ क्यों नहीं बताया…
रेखा अपने काम का ब्यौरा बाँसुरी को दे रहीं थी, जया बच्चों की कहानियाँ बता रहीं थी और रूपा बाँसुरी के बिना रहें शौर्य की…

इन सारी बातों के बीच सारे बच्चे बाहर खेल रहें थे, अकेला शौर्य ही बाँसुरी की गोद में चढ़ा हुआ था… कुछ देर बाद ही हर्ष आ कर उसे अपने साथ ले गया..

बाहर जहाँ बच्चे खेल रहें थे, अपूर्व भी वहीँ चला आया… बच्चों के साथ वो भी वहीँ बैठ गया…
उसकी नज़र शौर्य पर ही थी… शौर्य भी उससे हिला मिला सा था..
उसने शौर्य को अपने पास बुलाया और उससे वो कहाँ गया था, अपनी माँ को कहाँ से लेकर आया जैसे प्रश्न करने लगा और भोला सा शौर्य अपनी बालबुद्धि से उसके सवालों के जवाब देता गया…

शाम की तैयारी के नाम पर कुछ देर को सारी औरतें उठ कर चली गयी और तब बाँसुरी को मौका मिला अपने साहब से बात करने का…

सबके जाते ही वो लपक कर दरवाज़ा लगा आई..
वो तुरंत स्टडी में चली गयी.. वहाँ वो तुरंत राजा के पास पहुँच गयी, लेकिन राजा अपनी आरामकुर्सी पर बैठा किसी किताब को खोले हुए ही सो गया था..
वो भी तो दो रातों से जाग ही रहा था..

बाँसुरी कुछ देर को खड़ी अपने साहब का चेहरा देखती रह गयी…
अपलक निर्निमेष…
कितना अद्भुत होता है अपने प्यार को यूँ अपलक  देखना..
कितना तरसी थी वो इस चेहरे  के लिए..
इस खुशबू के लिए..
उस छुवन के लिए..
लगातार देखने के बाद, मन तब भी नहीं भरता लेकिन एक सुकून तो रहता है की हाँ ये चेहरा मेरा है, ये आंखें मेरी हैं..

बाँसुरी ने आगे बढ़ कर राजा के माथे पर अपने होंठ रख दिये..
वो पलट कर तैयार होने जाने लगी की राजा ने पीछे से उसे अपनी बाँहों में लेकर खींच लिया..

बाँसुरी भी मुस्कुरा कर उन बाँहों में कैद होती चली गयी……

अब इन बाँहों से मुक्त भी कौन होना चाहता था ?

शाम की पार्टी अपनी रंगीनियों के साथ शुरू हो चुकी थी..
शहर के गणमान्य लोग इस पार्टी का हिस्सा थे..
इस पार्टी को युवराज ने ही रखवाया था और उनके इसे रखवाने का उद्देश्य भी यहीं था की पूरे शहर को बाँसुरी की वापसी की खबर मिल जाये..
कहने वाले बातें बना सकते थे ? पूछने वाले सवाल उठा सकते थे ? लेकिन अगर उन्हें मौका ही ना दिया जायें तो ?
हालाँकि युवराज भी इस बात को जानता था कि उसके और राजा के सामने सर उठा कर कुछ भी पूछने की हिम्मत किसी को नहीं थी। बावजूद लोगों के मन में पलता संशय हमेशा हमारी ज़िंदगी में ज़हर घोलने का काम कर जाता है और उसी से युवराज अपने परिवार को बचाना चाहता था..

सिर्फ राजपरिवार ही नहीं पूरे शहर और सभी जानने वालों के लिए भी ये बात बहुत बड़ी थी की लगभग ढाई साल बाँसुरी महल से दूर रही थी..
उसकी जगह कोई और थी जो यहाँ रहती थी..
वो कौन थी ? ये सब क्या था ?
जैसे सवाल मन मथने के लिए पर्याप्त थे…?

और लोगों के मन में उठ रहे हर सवाल का जवाब नहीं दिया जा सकता था, इसलिए युवराज ने इस आयोजन को करवाया था, जिससे लोग सामने से आकर अपनी महारानी को देख सकें, मिल सकें.. और अगर मन में कुछ सवाल उठ रहे हो तो उनका निराकरण कर सके..।
हालाँकि राजा युवराज समर के सामने कोई कितना भी बड़ा पदधारी हो उसकी हिम्मत सवाल पूछने की नहीं थी बावजूद एक औपचारिकता का निर्वहन तो करना ही था..

पार्टी शुरू हो चुकी थी..
लोग आ रहे थे, बाकी लोगों से मिल रहे थे.. खाते पीते बातचीत के दौर चल रहे थे…

महल से सभी लोग आ चुके थे..
समर भी पिया और शोवन को लेकर चला आया…

सब एक दूसरे से मिलते जुलते बातों में लगे थे…
पिया महल की राजसी टोली की तरफ बढ़ गयी.. उसने शोवन का हाथ थाम रखा था..

वहाँ पहुँचते ही पिया ने सबको अभिवादन किया.. और एक तरफ को बैठने लगी..
पिया को रूपा शुरू से ही बहुत पसंद किया करती थी.. उसे देख कर रूपा ने अपने पास ही बुला कर बैठा लिया.. शोवन को भी पिया ने अपने संग बैठा लिया..

इधर से उधर घूमते वेटर्स खाने पीने का सामान टेबल पर सर्व करते जा रहें थे…
पिया ने शोवन को अपनी प्लेट से ही खिलाना शुरू कर दिया..
शोवन अब लगभग सात आठ साल का हो चुका था..।

“इसे भी जाकर बाकी बच्चों के साथ खेलने दो पिया.. उसे भी अच्छा लगेगा !”

“जी रानी साहब ! कुछ थोड़ा खिला दूँ पहले…. असल में ये खाने को लेकर बहुत चूज़ी है.. सब कुछ खाता नहीं ! अगर मैंने ध्यान नहीं दिया तो ऐसे ही भूखा रह जायेगा.. और संकोची इतना है कि घर जाकर भी कुछ नहीं मांगने वाला !”

“हाँ वो तो है, एक माँ को ही बच्चे का ऐसा ख्याल रहता है !” रूपा मुस्कुरा उठी..

वहाँ मौजूद हर कोई पिया के त्याग को जानता था, सभी को मालूम था की शोवन के लिए ही पिया ने अब तक खुद का बच्चा नहीं किया था..
और साथ ही सबको ये भी दिखने लगा था की पिया शोवन के लिए हद से ज्यादा संवेदनशील भी हो चुकी थी..
वो उसे खिला रही थी की विराट वहाँ चला आया..

“क्या बात है रॉयल लेडीज़… आज तो लग रहा चाँद सितारे सब हमारे महल में उतर आये हैं !”

विराट ने मुस्कुरा कर सबसे कहा और वहीँ एक कुर्सी खींच कर बैठ गया..

“वहाँ विदेश में यहीं सब बहुत मिस किया.. मानता हूँ की वहाँ की ज़िन्दगी बहुत अलग है, बहुत आज़ाद है… आप को किसी तरह की रोकटोक नहीं है.. आप पूरी आज़ादी से अपने मन का काम कर सकते है.. और मैंने किया भी..
ख़ूब मन भर कर तस्वीरें खींची.. मेरी ली गयी तस्वीरों को ढेरों अवार्ड्स भी मिले… लेकिन इस सबके बावजूद मैंने अपने घर और आप सब को बहुत मिस किया.. और इसी लिए यहाँ चला आया.. !”

“वो सब तो ठीक है विराट सा, लेकिन आप ये बताओ की आप ब्याह कब कर रहे हो ?”

जया के सवाल पर विराट मुस्कुरा कर रह गया..

“ज़रूरी तो नहीं की हर कोई ब्याह करे ही ?”

“नहीं बिल्कुल ज़रूरी नहीं !”

अबकी बार रेखा ने जवाब दिया और विराट मुस्कुरा उठा
लेकिन रेखा का अगला सवाल विराट पर भरी पड़ गया…

“शादी नहीं करने का कारण क्या है ? वो भी बता दीजिये कुंवर सा ? कहीं ‘आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ ‘ वाली बात तो नहीं है ना ?”

रेखा हॅंस पड़ी और उसके साथ ही वहाँ बैठी बाकी औरतें भी हंसने मुस्कुराने लगी..

“क्या भाभी सा.. आप भी ना ?”
विराट मुस्कुरा कर मजाक को हवा में उड़ा गया लेकिन उसने इस बात का कोई जवाब भी नहीं दिया..

शोवन बहुत देर से दूर खेलते बच्चों की तरफ ललचायी नज़र से देख रहा था… पिया ने ये बात भांप ली.. उसने शोवन को जाने की इजाज़त दे दी..

शोवन भागता हुआ बच्चों की तरफ बढ़ गया..
लेकिन अभी वो आगे बढ़ रहा था की सामने से आते विराट के फिरंगी दोस्त से टकरा गया..
उस अँगरेज़ ने उसे गिरने से पहले ही संभाल लिया…

वो दोनों एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुरा दिये..
शोवन को लड़खड़ाते देख पिया भी उठ कर तुरंत उस तरफ भाग खड़ी हुई.. ।

वो आदमी शोवन को संभाल कर खड़ा कर चुका था, वो उससे उसका नाम पूछ रहा था कि, पिया वहाँ पहुंची और उसने शोवन को सीने से लगा लिया..

“तुम्हें लगी तो नहीं ना ?” पिया शोवन के हाथ पैर सर को ध्यान से देखती इससे पूछती भी जा रही थी…

” नो ही इस एब्सोल्यूटली फाइन। “उसी अजनबी ने जवाब दे दिया.. लेकिन पिया को उस वक्त शोवन के अलावा किसी से जवाब नहीं चाहिए था..
और शोवन ना में गर्दन हिला कर मना कर रहा था.. शोवन ने उस आदमी की तरफ ऊँगली घूमा कर बता दिया की उन्होंने उसे गिरने से बचा लिया…

पिया की नज़र उस आदमी पर गयी और उसी ओर टिक कर रह गयी..
गोरा रंग, भूरे बिखरे से बाल, पतली सी लम्बी तीख़ी  नाक और नीली चमकती आंखें..

पल भर को पिया को लगा जैसे शोवन ही बड़ा होकर उसके सामने खड़ा हो गया है…
वो आश्चर्य से उस अजनबी को देखती रह गयी..

“हैलो आई एम शैरी लॉरेंट !”

उस अजनबी ने अपना हाथ पिया की तरफ बढ़ा दिया और पिया उसे घूरती देखती खड़ी रहीं..

पिया का ध्यान शोवन पर गया..
शोवन उसके हाथ पर धीरे से उँगलियाँ रगड़ रहा था.. पिया ने शोवन से इशारे से क्या हुआ पूछ लिया और शोवन ने सामने खड़े उस अजनबी के बढे हुए हाथ की तरफ इशारा कर दिया… -” मॉमी…. !”

पिया को जैसे होश सा आया.. उसने धीरे से अपना हाथ बढ़ा दिया..
शैरी ने पूरी गर्मजोशी से पिया से हाथ मिलाया और मुस्कुरा दिया..
लेकिन जाने क्यों उसे देखने के बाद पिया मुस्कुरा नहीं पायी….

उसे एकाएक लगने लगा की शोवन को गोद में लेकर वहाँ से भाग जाये, सामने खड़ा नवयुवक उससे कुछ औपचारिक बातें पूछने बताने लगा लेकिन पिया के कान में कोई बात नही पड़ रही थी..

ऐसा कैसे संभव था..
हूबहू वहीं नक्शा !
वहीं ऊँची लम्बी सी नाक, वहीं गुलाबी रंग, भूरे बाल और वहीं गहरी झील सी नीली आंखें…

बातों बातों में उस युवक ने अपनी नाक पर से ऊँगली घुमाई…
और पिया की साँस अटक कर रह गयी..
बिल्कुल इसी अदा से शोवन भी अपनी ऊँगली नाक पर से घूमाता था..

तो क्या ये लड़का रेवन का बॉयफ्रेंड था..
रेवन को तो इस का नाम गाँव कुछ मालूम नहीं चला था..
इसलिए इसका नाम जान कर कुछ होना नहीं था..
जब तक ये शेरी अपनी कहानी नहीं बता देता तब तक कुछ भी सोचना व्यर्थ था..

लेकिन शेरी के साथ खड़े शोवन को देख एक मंदबुद्धि भी कह उठेगा की शेरी ही शोवन का बाप है..
फिर ये इतनी आत्मीयता से विराट के साथ यहाँ क्या कर रहा था…

कहीं ऐसा तो नहीं की उन लोगों के द्वारा शोवन को लेकर आ जाने के बाद ये उस हॉस्पिटल में पहुंचा हो और वहाँ के डॉक्टर्स ने इसे ये बता दिया हो की शोवन को कुछ लोग इण्डिया ले गए.. !
वैसे उस डॉक्टर के पास समर ने अपना पता ठिकाना तो लिखवा भी दिया था…
तो कहीं सच में ये आदमी शोवन की तलाश में विराट के साथ यहाँ तो नहीं चला आया….

हे भगवान.. अगर इसने शोवन पर अपना अधिकार जाता दिया और उसे साथ ले जाने की ज़िद कर बैठा तो वो कुछ नहीं कर पायेगी..

लेकिन इन दो ढाई सालों में साथ रहने के बाद क्या अब शोवन के बिना की ज़िंदगी की वो कल्पना भी कर सकती थी..

रात दिन सोते जागते शोवन शोवन उसके मुहँ में बसा रहने वाला नाम था.. वो क्या खायेगा क्या पहनेगा कहाँ खेलेगा कहाँ जायेगा सब कुछ पिया ही देखती थी..
अक्सर वो उसे साथ लेकर अपने अस्पताल भी चली जाती.. दिन रात उसके साथ गुज़ारती..

शोवन के आने के बाद से उसका और समर का अकेले डिनर पे जाना भी बंद हो चुका था.. जब तक वो छोटा था बाहर का नहीं खा सकता था, पिया ने बाहर जाना बंद कर दिया था और अब जब से उसने बाहर खाना शुरू किया था सन्डे का डिनर मेन्यू भी शोवी ही तय करता था…

पिया ने खुद को शोवन में इतना घुला मिला दिया था की उसने अपने खुद को ही भुला दिया था..

” इज़ दिस योर सन ?”

“अह्ह्ह.. हम्म… शोवी सुनो.. चलो.. हम उधर चलते हैं.. तुम्हें कुछ खिला दूँ.. !”

वो शोवन का हाथ पकड़ अपने साथ खींच कर ले जाने लगी तभी वहाँ समर चला आया.. उसके साथ ही हर्ष भी था.. वो शोवन को लेने आया था..

हर्ष को देख शोवन खुश होकर उसके साथ भाग गया..
और समर ने पिया के चेहरे का उड़ा हुआ रंग देख उससे इसका कारण पूछ लिया..

पिया ने ना में गर्दन हिला दी..
समर ने अपनी प्लेट से पनीर का एक टुकड़ा पिया के मुहँ में डाला और उसके कंधो के चारों ओर अपने बाजू डाल उसे अपने साथ लेकर आगे बढ़ गया..

विराट एक गहरी साँस छोड़ शेरी के पास चला आया..

दोनों आपस में कुछ बातें करने लगे.. बातें करते हुए वो दोनों एक तरफ को निकल गए…

रेखा ने धीरे से साथ बैठी जया की तरफ देखा और मुस्कुरा उठी..

“हमें तो लग रहा है माँ का लाड़ला बिगड़ गया !”

रेखा की बात को समझ कर जया भी हलके से मुस्कुरा उठी..

“अब आजकल ये सब कॉमन हो गया है रेखा ! क्या कह सकते हैं.. सबकी अपनी अपनी भावनाएं हैं.. जैसे हम गलत नहीं ये भी गलत नहीं.. !
प्रेम ही तो है, कब किससे हो जाये, कोई जानता है क्या ?”

“सही कह रहीं हैं आप भाभी साहेब ! ये भी तो नहीं कह सकते की हमारा प्रेम सच्चा और इनका झूठा है ? हमारे प्रेम में भी आखिर क्या है ? एक बेमतलब के रिश्ते को ढो ही तो रहें हैं हम.. !
ना विराज सा के पास हमारे लिए फुर्सत है ना अपने बेटे के लिए.. वो तो आप सब इतने अच्छे है कि हमारा मन लगा रहता है, वरना हमारी शादी तो अब शादी ही नहीं रह गयी है !
कभी एक वक्त लगा ज़रूर था की विराज सा सुधर जायेंगे लेकिन अब समझ आ गया है की एक बार कुत्ते की पूंछ सीधी भले हो जायें उन्हें ना सुधरना था ना सुधरेंगे.. !”

“दिल छोटा मत करो रेखा.. तुम पर तो हम सभी को गर्व है, जिस तरीके से तुम अपना काम सँभालते हुए अपने यश को भी बड़ा कर रही हो ये बात मानने लायक है.. !
अच्छा सुनो, सुना है आदित्य कुंवर सा केसर के साथ रुक गए हैं..
बाँसुरी ने तो साथ चलने की ख़ूब ज़िद की थी लेकिन केसर ने ज़िद पकड़ ली और आधे रास्ते ही उतर गयी… उन्हीं के पीछे आदित्य कुंवर भी उतर गए..
क्या आदित्य कुंवर का बाई सा के साथ कुछ… ?

“पता नहीं भाभी सा… हम खुद केसर बाई सा से कहाँ मिल पाए हैं, मिलना तो बहुत चाहते हैं, लेकिन अब तक हमारे जाने का कुछ ठीक ही नहीं हुआ..
अब तो लग रहा है महल पर एकदम से आसमानी देवी देवता प्रसन्न हुए है तभी तो पहले बाँसुरी के सकुशल लौटने की खबर मिली और फिर केसर बाई सा की..
अब बस यही लग रहा है की महल की इन खुशियों को किसी की नज़र ना लगे… !”

जया और रेखा की बातों से अलग बाँसुरी का पूरा ध्यान राजा पर ही था..
राजा भी लोगों की नज़र बचा कर बाँसुरी को देख लेता था…
राजा ने बाँसुरी को देखा और धीरे से कुछ इशारा किया.. बाँसुरी ने हामी भरी और राजा पलट कर बाहर निकल गया..

“मैं अभी आई !” कह कर बाँसुरी भी बाहर की तरफ निकल गयी…

उसने जाते जाते शौर्य पर एक नजर डाली वो बड़े मजे से बच्चों के साथ खेल रहा था…

बाँसुरी तेज़ी से चलती राजा के पास पहुँच गयी.. दोनों ने एक दूसरे का हाथ थामा और बगीचे के पिछली तरफ से निकलने को थे की उन दोनों के कान में कुछ आवाज़े पड़ी..

वो दोनों आगे बढे.. वहाँ विराट और शेरी मौजूद थे..
उन्हें देख और सुन कर राजा और बाँसुरी चौंक कर खड़े रह गए..

  राजा कुछ आगे बढ़ा और उन्हें देख राजा के माथे पर बल पड़ गए..

क्रमशः

aparna….

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