
जीवनसाथी -2 भाग -42
वक्त हर वक्त एक सा नहीं होता और यही वक्त की खासियत है! कुछ देर पहले का तूफान भी तूफान नहीं रहता एक वक्त बीतने पर वह भी बीत जाता है…
रात बीतने के साथ ही तूफान भी शांत हो गया था, फिर क्रूज़ को भी दिशा मिल गई थी और नेटवर्क सहीं होते ही ग्रुप के कैप्टन और क्रू का संपर्क लैंड ऑफिस से बन गया था……
ये किस्मत की ही बात थीं की बिना किसी अनहोनी और नुकसान के सायक्लोन गुज़र गया….
सुबह की किरणे आते आते उम्मीद का सूरज लें आयीं थीं…
उम्मीद, आशाएं एक बार फिर जाग उठी थीं…
मनुष्य की जिजीविषा ही ऐसी हैं कि वो अपनी परेशानियों को लाख कोसे और बार बार दुहाई दे कि इससे अच्छा तो ऊपर वाला उठा लेता, लेकिन जब वाकई मौत से आंख मिचौली हो जाएं तो जीवन का महत्व उस एक छोटे से पल में समझ में आ जाता हैं…
समर और पिया को भी साक्षात मौत के दर्शन हुए थे, और उसके बाद उनका एक दूसरे के प्रति प्रेम और बढ़ गया था…
कुछ देर पहले का समर का पिया को रेवन से जुडी सारी बातें बता देने का उत्साह ठंडा पड़ गया था……
उसने वैसे तो अपनी शादी से पहले ही अपने से जुडी सारी बातें पिया को बता दी थीं जिसमे रेवन कि दोस्ती से जुडी बात भी थीं, लेकिन वो उस वक्त भी उसी सीमा तक बातों को बता पाया था जिन्हे बताने से उसका नुकसान नहीं होना था….
और आज भी पिया को अपने साथ ज़िंदा पाकर उसने भगवान को लाख लाख धन्यवाद देकर पिया को गले से लगा लिया था..
अब वो किसी कीमत पर पिया के चेहरे कि मुस्कान नहीं खोना चाहता था…
डेक पर एक भयानक तबाही का मंज़र आँखों के सामने देखने के बाद लोग अब धीरे धीरे सामान्य होने लगे थे…
कैप्टन द्वारा सबके सुरक्षित होने कि घोषणा के साथ ही लोग अपने अपने केबिन में लौटने लगे थे…..
समर भी पिया को साथ लें केबिन कि ओर बढ़ गया… लेकिन इस सारे तूफान के चक्कर में उसके दिमाग से रेवन भी निकल गयी…
उसने सोचा जो बीत गया अब उसे याद करके अपना वर्तमान ख़राब करने से बेहतर हैं पिया की ख़ुशी का ख्याल रखा जाएं…
और बस यहीं समर चूक गया…
केबिन में पहुँचने के बाद भी पिया हलके सदमे में ही थीं… केबिन के अंदर होते ही वो कस के समर से लिपट गयी…
समर उसे बाँहों में थामे बस यूँ ही खड़ा रहा… उसके बालों को सहलाते उसे मौन सांत्वना देता रहा….
कुछ देर बीत जाने के बाद समर ने उसे खुद से अलग करना चाहा लेकिन पिया ने ना में गर्दन हिला कर उसे पकड़े रखा…
“हम दोनों ठीक हैं पिया… !”
“हम्म.. !”
पिया का छोटा सा हम्म सुन कर समर को संतुष्टि नहीं हुई…
“क्या हुआ जब क्रूज़ में दाखिल हुई तब तो बहुत खुश थीं… तुम्हारा बच्चों जैसा उत्साह देख कर ही तो मै इतना खुश था, और अब तुम…
पिया ने समर कि बात बीच में ही काट दी…
“मंत्री जी… मौत को पहली बार इतने करीब देखा… ऐसा नहीं हैं कि अस्पताल में मौत से सामना नहीं होता लेकिन कल रात समंदर से उठने वाली बड़ी बड़ी लहरों में मैंने जो देखा उसके बाद क्या ही कहूं… यूँ लग रहा था ये लहरे कहीं आपको मुझसे अलग ना कर दे…..
यूँ लगा कोई हैं जो हमें अलग कर देना चाहता हैं…. और मै पूरा ज़ोर लगा दूंगी पर उसके इरादों को कभी सच नहीं होने दूंगी..
कल रात बहुत डर गयी हूँ इस बात से कि, कभी आपसे अलग होना पड़ा तो मै कैसे जियूँगी…
मंत्री जी मै आपके बिना जी नहीं पाऊँगी… चाहें जो हो जाएं, चाहें हमारे बीच कितने ही झगडे हो, मतभेद हो, कुछ भी हो जाएं, मै कितना भी रूठ जाऊं, आप कितना भी रूठ जाएं पर हम किसी हाल में अलग नहीं होंगे… प्रॉमिस कीजिये… !
पिया कि फैली हुई हथेली पर समर ने अपना हाथ रख दिया…
उसकी हथेली को अपनी हथेली में लें उसने हाथ बाँधा और पलट कर पिया की हथेली चूम ली…
और उसके बाद पिया का हाथ अपने सर पर लें जाकर रख दिया…
“तुम भी एक प्रॉमिस करो… अगर कभी मुझसे कोई गलती हो जाएं, या हम दोनों एक दूसरे कि बात नहीं समझ पाए, तब भी एक दूसरे से रूठने कि जगह हम हमेशा बात कर के मसले सुलझाएंगे, ना कि एक दूसरे से बात करना बंद कर के …
दूसरी बात तुम मुझे छोड़ कर कभी नहीं जाओगी…..
पिया ने समर के सर पर हाथ रख के कसम खायी और अपनी आँखों में अटके हुए आँसू को पोंछ लिया …. ..
क्रूज़ तयशुदा वक्त से देर से पहुंचा लेकिन अंदमान के तट पर सकुशल लग गया….
अब तक खुद के खोल में सिमटा समर भी अब खुल कर पिया के साथ खुश नजर आ रहा था…..
उस चक्रवात ने उसे जीवन कि क्षणभंगुरता बता दी थीं… जब जीवन का कोई भरोसा ही नहीं कि अगले पल क्या होने वाला हैं तो क्यों न जीवन खुल के जिया जाएं…
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क्रूज़ से उतरते ही उन दोनों के लिए समर ने जो पहले से बुक कर रखी थीं गाड़ी चली आई, और वो लोग होटल हवाना के लिए निकल गए….
लम्बे ऊँचे ऊँचे हरे पेड़ो के बीच सर्पीली साफ़ काली सड़के बेहद खूबसूरत लग रही थीं… आसमान पे छाए काले बादल मौसम को सुहावना बना रहें थे…
पिया जो अब तक गुमसुम सी थीं, वापस एक बार बच्ची बन चहक उठी… उसने गाड़ी की रूफ टॉप खुलवाई और सर बाहर निकाल कर खड़ी हो गयी….
गाड़ी का ड्राइवर तमिल था लेकिन उसे थोड़ी हिंदी आती थीं…
पिया उससे उसकी टूटी फूटी हिंदी में यहाँ के बारे में पूछती जा रही थीं… और समर उन दोनों कि बातों का आनंद लिए जा रहा था…
उसके दिमाग से सृजन शिखर कि बातें एकदम ही गायब हो चुकी थीं… और गायब हो चुकी थीं रेवन !
अपने पहले से बुक किये सात सितारा होटल में उतरने के बाद वो लोग अंदर गए और एक बार फिर होटल को देख पिया कि आँखे चमक उठी….
रौशनी से जगमगाते झाड़फानूस, पैरों को धँसाता गुदगुदा कालीन, आदमी के बराबर कद काठी के लकड़ी के दरबान, और बड़े बड़े इनडोर प्लांट्स से सजा होटल का रिसेप्शन ही बहुत खूबसूरत था… समर अपनी चेक इन डिटेल्स देख रहा था तब तक एक औरत ट्रे में हॉट वेट टॉवेल लिए पिया तक चली आई…
पिया ने उसे मुस्कुरा कर टॉवल के लिए मना किया तो उसने ट्रे के दूसरी तरफ रखी वेलकम ड्रिंक उसकी ओर बढ़ा दी…
वेलकम ड्रिंक हाथ में लिए पिया समर का इंतज़ार करती घूम घूम कर होटल देखती रही… समर के आते ही वो दोनों अपने कमरे के लिए निकल गए…
एक बड़े से शानदार सुईट में प्रवेश करते ही ख़ुशी से पिया चीख उठी…
“ओह्ह माय गॉड !! ये तो जन्नत हैं… !
कमरा बहुत बड़ा था…. घुसते साथ के हिस्से में एक बड़ा सा गोलाकार लेदर काउच था, जिसके ठीक सामने टीवी केबिनेट थीं..
उस काउच के एक तरफ कि सारी दीवार कांच कि थीं जिसके उस पार बालकनी थीं और सामने लहराता समंदर था..
उसी बड़े हॉलनुमा कमरे में आगे बढ़ने पर इनडोर स्विमिंग पूल था, जिसमे कुछ छोटी छोटी जेली फिश और स्टार फिश तैर रही थीं….
पूल के पानी में लाइट्स और म्यूज़िक का संगम था..
वहाँ से एक तरफ को गोलाकार कमरा था, जिसमे एक बड़ी सी दीवार पर एक बड़ा सा टीवी लगा था, उसके ठीक सामने गोलाकार बहुत बड़ा सा बेड था जिसमे गद्दा और कुशन डले हुए थे… उसमे आराम से बैठ साथ लगी खिड़कियों से बाहर समंदर का नजारा देखते हुए टीवी भी देखा जा सकता था…
पिया घूम घूम कर कमरे के हर हिस्से को देख कर ख़ुशी से चहकती जा रही थीं
.उसे देख लग नहीं रहा था कि एक रात पहले यही पिया किस कदर डरी सहमी सी थीं….
कमरे से लग कर एक छोटी रसोई सी थीं जिसमे फ्रिज रखा था, जिसके अंदर तरह तरह कि महंगी शराब सजी थीं…
पिया सब कुछ देख कर वापस बाहर के कमरे में आई तब तक समर कपडे बदल कर घूमने के लिए तैयार हो चुका था…
“अभी कहाँ जा रहें हैं हम.. ?”
“रॉस बीच, और जेल .. ! थकी तो नहीं हो ना.. वरना रेस्ट कर लो पहले.. !”
ना में गदर्न हिला कर पिया भी अपने कपडे बदलने चली गयी…..
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निरमा जया और रेखा तय समय पर रेस्टोरेंट पहुँच चुके थे…..
रेखा ने पहले ही टेबल बुक कर रखी थीं… उनके अंदर जाते ही मैनेजर ने आगे बढ़ कर तीनों का स्वागत किया..
“वेलकम रॉयल लेडीज़ ! “
वो बड़े सम्म्मान के साथ उन लोगो को उनके टेबल की तरफ लें गया…
तीनों ने अपना मनपसंद खाना ऑर्डर किया और बातों में लग गयी…
“निरमा यहाँ ढ़ेर सारे कपड़े उठा कर लाना मुश्किल था, इसलिए यहाँ से लौटते हुए हम मेरी शॉप पर चलेंगे.. !”
“हाँ ठीक हैं, वैसे आप दोनों क्या पहनने वाले हो.. ?”
“हमने अब तक खुद के लिए कुछ डिज़ाइन नहीं किया हैं, जया गोल्डन ड्रेस पहन रहीं हैं.. !”
“अरे वाह, मतलब इस बार आप लोगों का ट्रेडिशनल पोषाक नहीं रहेगा.. !”
निरमा के सवाल पर वो दोनों मुस्कुरा उठी.. -” नहीं, इस बार तो रूपा भाभी भी पार्टी गाउन पहनने रेडी हैं… और वैसे भी अब कुछ ही समय तो बचा हैं.. मन भर के कपड़े पहन लो, वैसे भी अब हमारे बच्चे बड़े हो रहें हैं… देखते ही देखते वो लोग जवान और हम बूढ़े हो जायेंगे.. !”
“तुम होंगी बूढ़ी, हम तो तब भी जवान ही रहेंगे.. !” रेखा की बात पर जया ने हँस के चुटकी ली… और रेखा ने हाँ में गर्दन हिला दी…
“वैसे हमारे बच्चे भी लगभग साथ के ही हैं… और हम खुद भी… वैसे जया ठीक कह रही हैं…. !
हम लोग जल्दी जल्दी माँ बन गयीं थीं ना, तो हमारे बच्चे बड़े हो गए तब भी हम यंग ही रहेंगे.. !”
रेखा की बात पर बाक़ी दोनों हंसने लगी..
“तुम्हारा बेटा तो अभी से रंग दिखा रहा हैं अपनी डायनेस्टी के… !”
निरमा ने हँसते हुए रेखा को देख कर कहा..
“क्यों क्या हुआ.. ?” रेखा पूछ बैठी
“मेरी मीठी को लव यु लिख कर पर्ची पकड़ा रहें हैं छोटे नवाब.. !”
निरमा के बताते ही जया और रेखा ज़ोर से हॅंस पड़े और उनके साथ ही निरमा भी हंसने लगी..
“अपने बाप के लक्षण हैं उस पर और क्या… ? वैसे नीरू तुम्हारी मीठी हैं भी बहुत प्यारी.. !”
“प्यारी क्या हैं, पूरी लड़ाका हैं..घर पर जब तक रहेगी, पूरा घर सर पर उठाये रहती हैं… घर के हर नौकर को खुद के पीछे घुमाती हैं.. उसके पापा ने उसे इतना सर चढ़ा रखा हैं कि क्या बताऊँ..! प्रेम समझते ही नहीं, कि कल को शादी होगी दूसरे घर जाएगी, तो कुछ तो तमीज़ सीखा दो..
उनका यही जवाब होता हैं कल जाएगी ना.. कल कि कल सोचेंगे अभी मुझे मेरी बेटी को प्रिंसेस बनाये रहने दो.. !”
निरमा कि बात पर रेखा जया मुस्कुरा उठी…
जया मुस्कुरा कर कह पड़ी..
“वैसे मीठी, प्रिंसेस से कम भी नहीं हैं निरमा… तुम दोनों से अपने मन कि बात कहें तो, हमें हर्ष के लिए मीठी बहुत पसंद हैं.. !
हालाँकि बच्चे तो अभी छोटे हैं.. लेकिन इन्हे बढ़ने में कितना वक्त लगना हैं…
पर अगर युवराज भाई सा और रूपा भाभी सा को ऐतराज़ न हो तो मीठी हर्षवर्धन के साथ ख़ूब जंचेगी… !”
जया कि बात सुन निरमा कुछ देर को अचानक कुछ कह ना पायी…. बस मुस्कुरा कर रह गयी…
“हमारे मुहं की बात छीन ली आपने जया … मुझे भी कुछ कुछ ऐसा ही लगता हैं और इसी बहाने मीठी हमारे महल में चली आएगी.. !
क्योंकि एक बेटी बाहर जाएगी तो एक वापस आ जाएं तो हम सभी को राहत मिलेगी.. !”
कुछ सोच कर रेखा ने कहा और जया मुस्कुरा उठी….
” हाँ रेखा ! हमारी परी को तो भेजना ही पड़ेगा ससुराल.. हालाँकि उसके पापा तो यही चाहते हैं की कोई घर जंवाई मिल जाएं… बताओ, ऐसा पॉसिबल हैं क्या.. !
हमें तो परी के लिए डर भी बहुत लगता हैं..!”
“क्यों.. ?” निरमा के पूछने पर जया फीका सा मुस्कुरा के बोल पड़ी…
” पता नहीं हर वक्त कहाँ खोयी रहती हैं… उसकी अपनी सपनों की दुनिया हैं.. जहाँ से बाहर वो निकलना नहीं चाहती…
ना उसे ज्यादा लोगों से मिलना जुलना पसंद है ना, खेलना कूदना बस अपनी 2-4 डॉल और खिलौनों के बीच ही सारा वक्त बिजी रहती है..!”
” थोड़ी सी इंट्रोवर्ट है लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि आप उसके लिए परेशान हो.. हर एक बच्चे का अपना अलग स्वभाव होता है..!”
” हां हम भी समझते हैं.. और यह भी लगता है कि कुछ बड़ी होगी तो अपनी हमउम्र लड़कियों के साथ घुलने मिलने से शायद थोड़ा बोलने भी लग जाए…
अभी तो बोलना उसके लिए बेहद मुश्किल है जब तक जरूरत ना हो मुंह ही नहीं खोलती.. !”
” और एक मेरी है मीठी जब तक गहरी नींद आ कर सो ना जाए तब तक उसका मुंह बंद ही नहीं होता…
इतना बोलती है कि बोल बोल कर मेरे सर में दर्द कर देती है अब मैं अगर उसे उसके बोलने के लिए टोकूं तो उसके पापा मुझ पर गुस्सा करने लगते हैं…
सारी दुनिया भर के किस्से अपने पापा को बैठकर सुनाती है.. और उसके पापा दुनिया भर का काम छोड़कर बस आराम से बैठ कर उसके किस्से ही सुनते रहते हैं..!”
” प्रेम भैया की तो चुप रहने की वैसे भी आदत है…. पहले तुम्हारी सुनते थे, अब तुम्हारी बेटी की सुनते हैं!”
जया की इस बात पर रेखा और जया दोनों हंस पड़े उनकी हंसी सुनकर निरमा भी हंसने लगी..
” देखा हम तीनों आए थे यहां लेडीज डे आउट करने कि हम अपनी पार्टी करेंगे, अपनी बातें करेंगे,.. लेकिन यहां भी हम अपने बच्चे और पति इन्हे ही लेकर बैठे हैं…
किसी ने सच कहा है एक औरत की शादी हो जाए उसके बाद उसकी जिंदगी में और कुछ नहीं होता….
सिर्फ शादी होती है और शादी के साइड इफेक्ट..!”
रेखा की बात पर एक बार फिर उन दोनों के कहकहे लग उठे…
” मैं तो इसीलिए मीठी की बहुत जल्दी शादी के पक्ष में ही नहीं हूं..!”
” हमारे तुम्हारे सोचने से कुछ नहीं होता निरमा…
यह बच्चे जो करेंगे अपनी मर्जी से करेंगे…!”
हंसी कहकहों और ढेर सारी गपशप के बीच तीनों औरतों ने अपना मनपसंद खाना खाया और बातें करते हुए खाना खत्म करने के बाद वहां से निकलकर रेखा की शॉप चली गई….
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पिया तैयार होकर समर के सामने आई तो वो उसे देखता रह गया… डेनिम की शॉर्ट्स और ब्लैक टीशर्ट में ऊँची पोनीटेल और आँखों पर शेड्स लगाए पिया बहुत खूबसूरत लग रही थीं…
पिया ने उसकी आँखों के सामने चुटकी बजायी और मुस्कुरा कर अपने स्पोर्ट्स शूज़ की पहनने लगी…
समर ने झुक कर पिया के शूज़ सही किये और लेस बांध दी…
वापस उठ कर उसे एक बार गले से लगाया और उसका माथा चूम कर उसका हाथ थामे उसे अपने साथ लें चला…
उनके लिए होटल की तरफ से लम्बी सी लिमोज़ीन खड़ी थीं…एक बार फिर पिया चहक उठी..
” वाओ लिमो… मजा ही आ गया मंत्री जी !
गाड़ी में अंदर बैठते ही ख़ुशी से पिया ने समर को चूम लिया…
“क्या बात हैं.. ? मुझे पता होता की तुम्हे लिमोज़ीन पसंद हैं तो तुम्हे शादी के तोहफे में यही दे देता.. !”
“अच्छा.. ?”
चहकती हुई पिया रास्ते के दोनों ओर अपनी आँखे बड़ी बड़ी कर देखने लगी…
वो खिड़की के कांच से बाहर गुज़रते नज़ारे देख रही थीं कि, समर ने गाड़ी के जाने किस हिस्से से दो वाइन के गिलास निकाल कर वाइन भरी और पिया के सामने कर दिया…
पिया ने मुस्कुरा कर ग्लास थाम लिया.. दोनों ने ग्लास एक दूसरे से टकरा कर चियर्स किया और हलके हलके घूंट भरने लगे…
रास्ता बेहद खूबसूरत था…. खुला गहरा नीला आसमान था, और उनके सामने सर्पीली काली चिकनी सड़क भागती जा रही थीं…..
दोनों तरफ के हरे भरे पेड़ों के साथ गाडी में बजता मधुर गीत उनके कानों में रस घोल रहा था…
उस गाने को ध्यान से सुनती पिया ने सोचने कि मुद्रा में भौंह सिकोड़ी..
“क्या हुआ… ?” समर के सवाल पर पिया ने उसे देखा..
“आपने ये गाना पहचाना… ?”
“सुना हुआ तो लग रहा हैं, पर पहचान में नहीं आ रहा… !”
“मुझे तो ये ‘तू मिले दिल खिले और जीने को क्या चाहिए’ लग रहा !”
“वही सांग हैं मैम, नागार्जुना सर का मूवी का सांग का तेलुगु वर्शन ‘तेलूसा मनसा ‘ हैं… सुपर स्वीट सांग हैं मैम !”
“डेफिनेटली ! बहुत ब्यूटीफुल सांग हैं… “
गाड़ी में बजते गीत के साथ पिया भी सुर मिलाने लगी… -” एक नजर प्यार से देख लो फिर से ज़िंदा कर दो.. !” पिया ने गीत कि एक पंक्ति समर को देख कर गयी और मुस्कुरा कर उसकी बाँहों के घेरे में सिमट गयी…
कुछ देर में ही वो लोग सेलुलर जेल पहुँच गए..
“हम अपने हनीमून पर जेल घूमेंगे मंत्री जी.. ?”
“हाँ जिस ढंग से आपने मुझे कैद किया हैं, और आप मेरे दिल कि जेलर बन बैठी हैं..
पहले आपको जेल घुमाना तो बनता हैं.. !”
दोनों जेल के अंदर वहाँ मिले गाइड के साथ उस जेल के महत्व और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को मिलने वाली वहाँ पर कि प्रताड़ना और सजा के किस्से सुनते हुए भावुक हो गए……
जेल काफ़ी बड़ी और व्यवस्थित थीं.. इस वक्त भी वहाँ पर्यटकों कि खासी भीड़ मौजूद थीं..
पिया ने वहाँ पर के पिलर दरवाज़ों,चाक, छव्वे, छत पर अलग अलग पोज़ में अपनी और समर कि ढ़ेर सारी तस्वीरें खींच ली…
एक तस्वीर में वो समर के पीछे से उसे अपने बाँहों में जकड़े उसकी पीठ पर सवार नजर आ रही थीं… उस तस्वीर को उसने तुरंत ही अपने फ्रेन्डबुक अकाउंट में अपलोड कर दिया…
कैप्शन के साथ.. – “मंत्री जी अपने (आजीवन ) ज़िंदगी भर के कैदी के साथ.. अंदमान सेलुलर जेल में.. !”
घूम घूम कर पूरी जेल देख लेने के बाद ही पिया वहाँ से निकलने को तैयार हुई…
दोनों वापस गाड़ी में जा बैठे…
समर का सब कुछ पहले से प्लान था इसलिए ड्राइवर भी जानता था कि अब गाड़ी कहाँ लेकर जाना हैं..
वो वहाँ से सीधे बीच कि तरफ गाड़ी दौड़ा गया…
बीच से कुछ पहले एक ऑफ़िस जैसा था….. वहाँ लें जाकर ड्राइवर ने गाड़ी रोक दी…
“आओ पिया.. ये आयलैंड डाइवर्स का ऑफ़िस हैं, सी बीच जाने के पहले यहाँ हमारे कुछ टेस्ट होंगे.. !”
“कैसे टेस्ट.. ?”
“अरे सिम्पल से.. जैसे बीपी शुगर.. बस ! ये सब इसलिए करते हैं कि हम वाटर स्पोर्ट्स के लिए पूरी तरह फिट हैं या नहीं.. !”
“ओके.. !”
उस ऑफ़िस के अंदर लगभग पांच छः लोगो कि टीम मौजूद थीं, जिनके साथ ही एक मेडिकल विभाग का बंदा भी था.. उसी ने ढ़ेर सारे सवालों के साथ पिया और समर का हेल्थ चेकअप किया और दोनों को ओके कार्ड दे दिया..
वहाँ से निकलने के बाद दूसरे रूम में उन दोनों को पानी में ब्रीदिंग करने कि टेक्निक्स बताई गयी..
इसके बाद उन्हीं में से एक लड़के ने उन्हें पानी में जाने से पहले याद रखने वाले ज़रूरी सेफ्टी मेज़र्स बतायें और फिर एक छोटा सा टेस्ट पेपर उनके सामने रख दिया..
समर तो इसमें से कुछ भी सुन नहीं रहा था.. उसका ध्यान पूरी तरह से पिया पर था.. इसलिए वो उस लड़के से पूछ बैठा..
“ये क्या हैं.. ?”
“क्वेश्चन पेपर.. !”
“व्हाट.. ? लेकिन क्यों.. ?”
“सर सिंपल सा हैं.. आप ट्राई तो कीजिये.. !”
” यार स्कूल के ज़माने से क्वेश्चन पेपर नाम से ही चिढ हैं मुझे.. !”
समर ने मुहं बना कर पिया कि तरफ देखा..
“अभी तक ये बेचारा अपना गला फाड़ फाड़ के हमें समंदर में डूबने से बचने के जो तरीके सीखा रहा था उसी का एग्जाम पेपर लें रहा हैं कि हमनें सब ठीक से सुना और हम वाकई पानी में जाकर एन्जॉय करेंगे या डूब मरेंगे…
“ओह्ह यार ! मै तो तुमको देखते बैठा था, मैंने तो वाकई नहीं सुना.. !”
“तो अपने लॉजिकल ब्रेन को यूज़ कर लीजियेगा मंत्री जी.. बाक़ी सब के लिए तो बीरबल बन जाते हैं आप, फिर अपनी ही बीवी के लिए…. “
“अपनी बीवी के लिए तो शाहरुख़ खान हूँ मै.. !”
“मुझे तो क्रिस हेम्सवर्थ पसंद हैं.. ! सुपर हॉट, डैशिंग,… !”
“ओह्हो… देख रहा हूँ मेरी बीवी नॉटी होती जा रही हैं..
” होती नहीं जा रही…मै हूँ.. ! चलिए आप पेपर लिखिए अपना.. !”
दोनों के पेपर्स लेने के बाद उस लड़के ने मुस्कुरा कर समर को देख अपनी टूटी फूटी हिंदी और इंग्लिश मिला जुला कर समर को कुछ कहा और मुस्कुराने लगा.. पिया भी उसकी बात सुन कर हॅंस पड़ी..
” क्या बोल के गया ये.. अपनी भाषा में ये गली दे गया क्या मुझे… ?”
समर ने पिया से पूछा और पिया ने हाँ में गर्दन हिला दी..
“तुम्हे उल्लू बोल गया हैं.. !” और वो हँसने लगी..
उसके बाद स्कूबा डायविंग कि छोटी सी ट्रेनिंग देने के लिए उन्हें ऑफ़िस के पास वाले उथले पानी में लें जाया गया…
जहाँ उनकी आँखों पर एक मोटा फेस मास्क जैसा लगाना था..
समर ने जैसे ही मास्क लगाया उसकी नाक बंद हो गयी और वो ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगा..
“मेरी नाक बंद करवा दी यार इन लोगों ने.. अब साँस कैसे लूंगा.. ! “
. उसने तुरंत वो मास्क चेहरे से उतार दिया और पिया हाथ बांध कर गुस्से में उसे घूरने लगी..
“अभी अंदर यही बताया गया था कि ये मास्क लगाने पर नाक बंद हो जाएगी, और पानी में हमें मुहं से साँस लेनी हैं.. !”
” मुहं से साँस.. ? लेकिन पानी के अंदर कैसे.. ?”
“ये भी बताया गया था.. पर आपने सुना ही नहीं..
!”
अपनी जेब से एक ब्रीदिंग इंस्ट्रूमेंट निकाल कर पिया ने समर के हाथ में रख दिया.. -” अब ये क्या हैं.. ?”
“इसे ही मुहं में डाल कर हम इसकी सहायता से साँस लेंगे और छोड़ेंगे.. !”
समर ने गंभीर सा चेहरा बना कर पिया को देखा.. और पूछ बैठा…
” अच्छा ये बताओ कि अगर मुझे पानी के अंदर बेचैनी सी लगी और मै ऊपर आना चाहूँ तो मुझे क्या बोलना पड़ेगा… ?”
पिया ने बनावटी गुस्से से समर कि तरफ देखा और उसे उस लड़के ने अंगूठे और उंगलियों कि सहायता से जो इशारे सिखाये थे वो समर को सिखाने लगी…
सब सिखाने के बद उसने लाड़ से समर के माथे पर एक चपत लगा दी..
वहाँ मौजूद क्रू के लोगों ने जैसे ही उन्हें साथ चलने के लिए कहा…
समर ने पिया को अपनी गोद में उठा लिया और सामने समंदर के पास खड़ी बोट कि तरफ बढ़ गया…
क्रमशः…
aparna….
