
जीवनसाथी -2 भाग -48
सुबह वासुकी की नींद किसी आवाज से खुली और वह चौंक कर उठ गया…
नींद खुलते ही उसे रात की सारी बातें याद आ गई.. उसने अपने बगल की खाली जगह को देखा.. वहां उस वक्त नेहा मौजूद नहीं थी ! लेकिन पलंग के ठीक बगल के कॉर्नर टेबल पर उसकी चूड़ियां उसके झुमके उसका गले का हार उसके बालों की क्लिप गजरा उसका दुपट्टा सब कुछ रखा था और वह सब देखकर वासुकी को पिछली रात याद आ गई…
वह अपनी जगह से उठा और कमरे की खिड़की पर जाकर खड़ा हो गया जहां से उसे बांसुरी का घर साफ साफ नजर आ रहा था…
इतने दिनों में आज पहली बार हुआ था कि वह अपने वक्त से कहीं अधिक देर तक सोता रह गया था, वरना सुबह 5 बजे से उठकर वो बाँसुरी के पीछे जौगिंग के लिए निकल जाया करता था…
उसने तुरंत अपना फोन निकाला और किसी को फोन करने लगा, उस तरफ से बात होते ही उसके चेहरे पर राहत के भाव चले आए…
उसके सुबह उठकर ना जाने के बावजूद उसके बॉडीगार्ड ने बांसुरी को आज भी रोज की तरह जॉगिंग के वक्त कवर कर रखा था ! हालाँकि बांसुरी यह बात कभी भी नहीं जान पायी थी..
राहत की सांस लेकर वासुकी ने अपना फोन एक तरफ रखा और पलंग पर बैठा ही था कि बाथरूम का दरवाजा खोल कर नेहा बाहर निकल आई…
” अरे आप उठ गए.. ? मुझे तो लगा था कि मैं नीचे जाकर आपके लिए चाय बना कर फिर आपको उठाने आऊंगी, बिलकुल वैसा ही, जैसा फिल्मों में होता है.. !”
” कुछ ज्यादा ही फिल्मी नहीं हो तुम.. ?”
“हां फिर.. ? हसबैण्ड भी तो कुछ कुछ हीरो जैसा मिला है मुझे…. !”
नेहा की तरफ देखकर ना में गर्दन हिलाकर वासुकी उठकर बाथरूम की तरफ जाने लगा…
” सुनिए मिस्टर हसबैंड ! आप अपनी रोज की आदत के हिसाब से टॉवल मत लेकर जाइएगा ना ?”
” क्यों ?”
अपने सवाल के साथ ही वासुकी ने नेहा को घूर कर देखा..
” क्योंकि ज्यादातर हस्बैंड बिना टॉवल के ही बाथरूम में घुस जाते हैं, और फिर वहां से जोर-जोर से अपनी वाइफ को आवाज देकर टॉवल मांगते हैं..! हाउ रोमांटिक ना..?”
” व्हाट रोमांटिक..? मुझे बेवकूफ लगते हैं ऐसे आदमी जो हर काम के लिए किसी और पर निर्भर करते हैं..!”
” ठीक है, जैसे आपकी मर्जी!”
वासुकी को उसकी पीठ पर हाथ रख धकेलते हुए नेहा ने बाथरूम के अंदर धकेल दिया…
हालांकि इस सारी बातचीत के दौरान वासुकी वाकई टॉवेल अपने साथ लेकर जाना भूल गया…
नेहा ने भी इस बात पर कुछ खास ज्यादा ध्यान नहीं दिया और तैयार होकर नीचे चली गई…
वह नीचे रसोई में काका के साथ नाश्ते की तैयारी कर रही थी और वहीं उन लोगों के साथ खड़ा दर्श अखबार पढ़कर रोजमर्रा की खबरें उन दोनों को सुना रहा था कि उसी वक्त ऊपर से वासुकी की आवाज उन तीनों के कानों में पड़ी…
” काका ऊपर आइए ज़रा.. ?”
वासुकी की आवाज़ सुनकर काका और दर्श एक दूसरे को देखने लगे….
” सुबह-सुबह अनिर को क्या हो गया.. ? ऊपर कमरे से काका को तो कभी ऐसे आवाज नहीं लगाता..?”
तभी नेहा को समझ में आ गया कि बातों-बातों में उलझ कर वासुकी बिना टॉवल के ही नहाने चला गया था ! और इसीलिए वह काका को टावल देने के लिए आवाज लगा रहा था ! उसके चेहरे पर हंसी खेलने लगी !
उसने मुस्कुराकर फटाफट अपने हाथ धोए और दर्श और काका की तरफ 1 मिनट में आई का इशारा करती हुई भागती हुई सीढ़ियां चढ़ गई…
वासुकी उस वक्त भी बाथरूम में मौजूद था और बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ था…
” क्या हुआ मिस्टर हस्बैंड..? आप मुझे आवाज दे रहे थे..?”
” तुम्हें नहीं, काका को बुलाया था..!”
“झूठ मत बोलिए आपने काका को आवाज देकर इशारा मुझे ही किया था.. आप चाहते तो यही थे कि मैं आऊं और आपको टॉवल पकड़ा दूँ !बताइए सच है कि नहीं..?”
” तुम इतनी सारी बकवास कर कैसे लेती हों.. ?फटाफट टॉवल दो और जाओ नीचे..!”
” देखा सही पकड़ा ना !
मैं तो नीचे ही समझ गई थी कि आपको टॉवल चाहिए था..!”
नेहा ने टॉवल बाथरूम के दरवाजे के खुले हिस्से से अंदर बढ़ा दिया…
वासुकी ने जैसे ही टॉवल लेने के लिए हाथ बाहर किया, नेहा दरवाजे को अंदर की तरफ धकेल कर खुद भी टॉवल के साथ अंदर दाखिल हों गयी…
” अरे पागल हो गई हो क्या..? यहाँ क्या कर रही हो..? बाहर जाओ!”
” पागल तो आपने कर दिया है मुझे ! मैं नहीं जा रही कहीं बाहर!”
” बेवकूफ लड़की!”
वासुकी ने नेहा को मोड़ा और बाथरूम का दरवाजा खोलकर उसे बाहर धक्का दे दिया..
हंसती खिलखिलाती नेहा कमरे में बाहर टेबल का सहारा लिए गिरती गिरती बच गई….
वो धीमे धीमे कुछ गुनगुनाते हुए वासुकी के कपड़े निकालने लगी…
उसी वक्त बाथरूम का दरवाज़ा खोल कर वासुकी बाहर चला आया… उसने नीचे टॉवेल बाँध रखा था..
उसे आते देख नेहा पलंग पर एक टांग पर दूसरी टांग चढ़ाये बैठ गयी और उसे देखने लगी…
साथ ही बहुत धीमी आवाज़ में वो कुछ गा भी रही थीं..
” ऐसे क्या घूर रही हो मुझे..?”
” आप ऐसे बेयर बॉडी हैंडसम लग रहे हो मिस्टर हस्बैंड.. !”
” दूसरी तरफ मुंह करो.. मुझे कपड़े बदलने है..!”
” आप भी तो कपड़े लेकर बाथरूम में जा सकते हैं..!”
” मतलब तुम मेरी बात नहीं सुनोगी..!”
” नहीं बिल्कुल नहीं..!”
” बहुत जिद्दी हो.. !”
” आपसे थोड़ी कम!”
” ठीक है आंखें बंद कर लो..!”
” नहीं करूंगी ! आपको ऐसा देखना अच्छा लग रहा है मुझे ..!” शरारत से नेहा मुस्कुरा उठी…
“हद है बदतमीजी की..! कोई शरम हया है की नहीं.. ?”
” आप पति है मेरे, आपसे कैसी शर्म.. ?
और दूसरी बात कल रात आपकी शर्म कहां गायब हो गई थी…?”
नेहा की बातों से परेशान वासुकी ने अपने माथे पर हाथ मारा और उसके पास आकर उसका मुंह दूसरी तरफ घुमा कर उसे बैठा दिया…
” अब जब तक मैं ना बोलूं, तब तक तुम पलट कर नहीं देखोगी ! तुम्हें मेरी कसम है..!”
नेहा को वासुकी की इस हरकत पर जोर से हंसी आ गई लेकिन वह चुपचाप दूसरी तरफ मुहँ किये बैठी रही…
लेकिन अब भी वह कुछ गुनगुना रही थी जिसके कारण वासुकी को थोड़ी दिक्कत हो रही थी..!
” यह क्या गुनगुना रही हो इतनी देर से..?”
” जोर से गाकर सुना दूं..? वैसे आप ही के लिए गा रही हूं..!
बैरी पिया बड़ा बेदर्दी इश्..
हो.. बैरी पिया बड़ा बेदर्दी
दिल का दर्द ना जाने
सौदाई, हरजाई, ज़ुल्मी राम दुहाई
कैसे कहूँ, कासे कहूँ हाए राम
दिल का दर्द ना जाने, ना जाने
ना जाने, ना जाने जाने जाने हाए…
बैरी पिया बड़ा रे बेदर्दी
हो हो.. बैरी पिया बड़ा बे
यह गा रही थी मैं, लेकिन जोर से गाती तो आपको बुरा लग जाता ! इसलिए धीरे-धीरे गुनगुना रही थीं.. !”
“सारी फालतू चीज़े ही पसंद आती है तुम्हे.. !”
” नहीं! ऐसा नहीं है मिस्टर हस्बैंड !
आप तो कहीं से भी फालतू नहीं है..! और आप मेरी पूरी जिंदगी का मेडल है ! मेरे लिए गोल्ड मेडल ! मेरी ट्रॉफी हैं आप !
मैंने कुछ तो अच्छे काम किए रहे होंगे जो 2 दिन के लिए सही आप मुझे पति के रूप में तो मिले..!”
” तो 2 दिन बाद तुम मुझे तलाक देने वाली हो..?”
वासुकी नेहा के करीब आकर उसके चेहरे के पास झुक कर अपना सवाल पूछ गया और उसके बालों से झड़ती पानी की बूंदे नेहा के गालों पर मोती सी बिखर गई….
” हाय यह उनकी अदा यह उनके अंदाज़,
हर दफा दिल लिए जाते हैं वो ..
जाने कैसे जिएंगे हम उनके बिना
कि हमारी जान भी अपने साथ ले जाते हैं वो …”
” अच्छा तो यह बेकार सा शेरो शायरी का शौक भी पाल रखा है आपने…?”
” हाय मिस्टर हस्बैंड जब आप इतने प्यार से मुझे आप कहते हो ना तो सच्ची.. दिल बाग़ बाग़ हों जाता है ! यूँ लगता है पूरे बदन में बिजली कौंध गई… रियली आई लव यू..!”
वासुकी ने एक नजर नेहा पर डाली और कमीज की बाहों में कफ के बटन लगाते हुए नीचे जाने के लिए आगे बढ़ गया…
” अरे मिस्टर हस्बैंड 1 मिनट रुकिए… !”
” अब क्या हो गया?”
नेहा वासुकी के पास आई और उसके कफ के बटन खोल कर उसकी बांहें मोड़ कर कोहनी तक कर दी…
” आपका यही स्टाइल तो पहली बार में मेरी जान ले गया था.. तो जब तक आपके साथ हूं प्लीज मेरे लिए मेरी खातिर इसी स्टाइल में रह लीजिये.. !”
” तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता ! यू आर इंपॉसिबल..!”
अपने बालों पर हाथ फिराते हुए वासुकी तेज कदमों से सीढ़ियां उतर गया और उसके पीछे मुस्कुराती हुई नेहा भी उतर गई !
लेकिन नेहा ने इस बात पर गौर जरूर किया कि उसने जिस तरीके से वासुकी की बाहें ऊपर तह कर दी थी उन्हें वापस वासुकी ने नहीं खोला और वैसे ही रहने दिया…
नाश्ते की टेबल पर पिछली रात की तरह ही ढेर सारी डिशेज मौजूद थीं…
वासुकी के बैठते ही नेहा ने उसके सामने एक छोटी सी कटोरी रख दी, जिसमें एक रात पहले के भीगे हुए ड्राई फ्रूट्स रखे थे..
वासुकी और दर्श वैसे तो रोज भीगे हुए बादाम खाते थे लेकिन आज किशमिश अंजीर और छुहारे भी उसमें मौजूद थे..
सवालिया नजरों से वासुकी ने काका की तरफ देखा और काका ने घबराते हुए नेहा की तरफ इशारा कर दिया ! इतनी देर में नेहा ने एक बाउल में कुछ कटे हुए फल वासुकी और दर्श के सामने रख दिये…
” आप भी हम लोगों के साथ ही नाश्ता कर लीजिए भाभी जी..!”
दर्श के भाभी बोलते ही वासुकी के गले में कुछ अटक गया.. उसे खांसी आने ही वाली थी कि अपनी जगह से खड़े होकर नेहा ने तुरंत उसकी पीठ पर धीरे-धीरे सहलाना शुरू किया और उसके सामने पानी का गिलास रख दिया…
पानी का एक घूंट भर कर वासुकी ने गिलास वापस नीचे रख दिया और दर्श को एक बार घूर कर अपने सामने रखे फल खाने लगा…
” नहीं पहले आप दोनों को गरमा गरम नाश्ता खिला दूँ उसके बाद मैं और काका खा लेंगे..!”
ऐसा कहकर नेहा रसोई में चली गई, जहां काका गरमा गरम पराठे सेंक रहे थे…
एक कटोरी में आलू और गोभी की सब्जी के साथ हरी चटनी कुछ प्याज़ के लच्छे और साथ में गरमा गरम आलू के पराठे लिए नेहा बाहर चली आई..
दर्श और वासुकी दोनों के सामने एक एक प्लेट रखने के बाद वह वापस रसोई में चली गई…!
काका आलू के पराठे बेलते जा रहे थे और मक्खन में उन्हें सेंक कर नेहा वापस बाहर आकर दर्श और वासुकी की प्लेट पर रखती जा रही थी…
इसी के साथ उसने दूसरी तरफ चाय भी चढ़ा रखी थी…
कुछ देर में ही वह दोनों के लिए चाय भी लेकर बाहर चली आई..!
” नेहा यह चाय क्यों लेकर आई हो..?”
दर्श के सवाल पर नेहा मुस्कुरा उठी..
” मैंने सुबह ही काका से आप दोनों के नाश्ते के बारे में पूछ लिया था और उन्होंने मुझे बता दिया था कि आप दोनों सिर्फ फल ड्राई फ्रूट और कॉर्न फ्लेक्स और दूध ही खाते हैं..! मुझे लगा ओ माय गॉड सुबह का नाश्ता इतना बोरिंग !
इसीलिए मैंने आज अपनी पसंद का नाश्ता बनाया और मुझे आलू के पराठे चाय के साथ भी बहुत अच्छे लगते हैं..!
इसलिए आप लोगों का नाश्ता खत्म होने के पहले ही मैंने चाय बना ली..!
जिससे कम से कम एक निवाला चाय के साथ आप लोग भी खा कर देखिए !
और खासकर आप मिस्टर हस्बैंड!
आपको पता होना चाहिए कि आपकी वाइफ की पसंद क्या है..?”
नेहा उन दोनों को देख कर मुस्कुराने लगी… उसी समय काका उसकी भी नाश्ते की प्लेट लेकर बाहर चले आए…..
” बहु जी अब आप भी खा लीजिए..!”
नेहा ने हाँ में गर्दन हिलाई और अपनी प्लेट पकड़कर अपने सामने रख ली !
वासुकी के ठीक बगल की कुर्सी में बैठी नेहा ने अपने पराठे का एक निवाला तोडा और उसे गोल रोल जैसा बना कर चाय में डिप करने के बाद खा लिया ..
मुंह में आलू का पराठा जाते ही नेहा की आंखें बंद हो गई उसने उसके स्वाद को महसूस करते हुए अपनी तारीफ करनी शुरू कर दी…
” सुभान अल्लाह क्या कारीगरी है मेरी..! वाकई कभी-कभी लगता है कि मैं तो गुणों की खान हूं..! कितना टेस्टी परांठा बनाया है मैंने ! ऊपर से एकदम क्रिस्पी और अंदर के आलू, वाह क्या कहने..! मजा ही आ गया काका… जियो नेहा जियो.. !”
नेहा की बात खत्म होते ही दर्श ने भी एक फुलझड़ी छोड़ दी…-” और अपने पति का खून पियो..!”
उसी वक्त काका ने किसी काम से नेहा को आवाज दी और वह उठकर भीतर चली गई..
दर्श का भी नाश्ता खत्म हो चुका था, इसलिए उसने अपनी प्लेट और कप उठाई और उन्हें अंदर रसोई में रखने चला गया..!
वासुकी ने ध्यान से इधर-उधर देखा और जब उसे तसल्ली हो गई कि वहां कोई मौजूद नहीं है ! तब उसने नेहा की प्लेट के पराठे से एक टुकड़ा तोड़ा और उसी की चाय के कप में डिप करके अपने मुंह में रख लिया…
अचानक से उसे यह मीठा और तीखा स्वाद एक साथ अजीब सा लगा लेकिन कुछ देर बाद उसके होठों पर एक हल्की सी मुस्कान चली आई…
रसोई के दरवाजे के भीतर खड़ी नेहा वासुकी को देख कर मुस्कुरा उठी…
नेहा जैसे ही बाहर आई वासुकी ने अपने सामने रखी अपनी प्लेट और कप उठाई और उन्हें सिंक में डालने के बहाने रसोई में चला गया…
नेहा मुस्कुराते हुए नाश्ता करने लगी…!
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समर महल में राजा साहब से मिल चुका था.. वो जानता था इस वक्त गुरूजी के पास पहुंचना कितना ज़रूरी था लेकिन रेवन ने जिस तरीके से बात की थीं, उसकी भी चिंता स्वाभाविक थीं..
राजा साहब तो वैसे भी अनोखे थे.. जग से निराले !
उन्हें खुद की परेशानियों से ज्यादा सदा से दूसरों की तकलीफ का ध्यान रहता था..
समर ने उनसे रेवन से जुडी कोई बात नहीं छुपाई.. और प्रेम और राजा के सामने समर ने अपने और रेवन के रिश्ते की सारी सच्चाई कह सुनाई…
और ये सारी बातें सुन कर राजा साहब के चेहरे पर चिंता की रेखाएं खिंच गयी…..
“देखो समर ! ज़रूरी नहीं कि किसी का कोई पास्ट ना हों… .
बस बात इस कारण उलझती सी लग रही है कि तुमने शादी से पहले पिया से कुछ भी बताया क्यों नहीं.. अगर पिया को पहले ही पता होता तो शायद उसका रिएक्शन कुछ और होता.. पर खैर !!
अब उसे सारी सच्चाई एक बार में बता दो..!”
” लेकिन मैं सोच रहा था हुकुम कि मैं एक बार रेवन से मिल लेता… और यह भी सोच रहा हूं कि अपने साथ पिया को लेकर जाता हूं, जिससे वह खुद रेवन से मिलकर उसके मुंह से सारी सच्चाई जान ले..!”
” यह भी सही है..! कब निकलना है तुम्हें..?”
” हुकुम आज ही निकलने की सोच रहा था, लेकिन दिल में बार-बार यह भी बात आ रही थी कि आज ही गुरुदेव से मिलने के लिए आपके साथ भी निकलना था…!”
” तुम उस बात की चिंता मत करो समर ! मैं हुकुम के साथ हूं!”
प्रेम के ऐसा कहते ही राजा ने भी उसकी बात का समर्थन किया और समर को प्यार से समझाइश देकर रेवन के पास जाने की इजाज़त दें दी….
राजा और प्रेम के समर के ऊपर भरोसा दिखाने से समर को अंदर से थोड़ी हिम्मत मिली और वह उन दोनों से मिलकर उनका आशीर्वाद लेकर वापस लौट गया…
उसके घर लौटने तक में पिया भी अपने अस्पताल से वापस आ चुकी थी…
समर सुबह से बिना खाए पिए जो निकला था सीधे अभी शाम ढले वापस लौट कर आया था! उसे अपने जाने की तैयारी भी करनी थी! हालांकि उसने पिया को सुबह ही बता दिया था इसलिए उसे उम्मीद थी कि शायद पिया ने उन दोनों का सामान पैक कर लिया होगा…
थके हारे वापस आकर समर सोफे पर ही लुढ़क गया…
” क्या हुआ बेटा? बहुत थके हुए से लग रहे हों.. चाय बना कर लें आये तुम्हारे लिए…?”
समर के पास बैठी उसकी मां उसके माथे पर प्यार से हाथ फेरने लगी.. और समर ने अपनी बंद की हुई आंखें खोल ली.. .
” हां मां चाय की जरूरत तो है.. !
वैसे तुम्हारी बहू नजर नहीं आ रही..!”
” हां वह तो कब से आ गई, अपने कमरे में कुछ उठा-पटक कर रही है.. !
पता नहीं कहां जाने की तैयारी कर रही है..?”
यह सुनकर समर के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई ! उसे इस बात की राहत सी लगी कि पिया उसके साथ जाने को तैयार है और उसकी और अपनी तैयारियों में लगी है…
समर परेशान तो था ही अपने ख्यालों में गुम वहीं बैठा था कि उसकी मां उसके लिए चाय और पानी लेकर चली आई…
ट्रे में रखी कुकीज और बाकी नाश्ते की तरफ समर का ध्यान ही नहीं गया, उसने बस चाय का प्याला उठाया और चुपचाप पीते हुए ऊपर अपने कमरे की सीढ़ियां चढ़ने लगा..
” अरे शांति से बैठ कर चाय पी ले फिर ऊपर चले जाना..!”
” नहीं माँ थोड़ी हड़बड़ी है ! एक बहुत जरूरी काम से नीदरलैंड जा रहा हूं ! आज रात 3 बजे की हमारी फ्लाइट है नीदरलैंड की..!”
” हमारी मतलब..? बहुरानी भी जा रही है क्या..?”
मां के सवाल पर समर ने हां में गर्दन हिलाई और अपनी चाय लिए ऊपर चला गया….
ऊपर कमरे में अपना बैग जमाती बैठी पिया ने ऑंख उठाकर समर की तरफ देखा भी नहीं…
समर को ये बात बुरी तो लगी लेकिन उसने बिना कुछ कहे एक तरफ सोफे पर बैठ कर अपनी चाय पीनी जारी रखी…
“तुमने चाय पी.. ?”
समर के सवाल पर पिया चुपचाप अपना काम करती रही..
“पिया तुमसे पूछ रहा हूँ.. तुमने चाय पी या नहीं.. ?”
पिया ने समर की तरफ गहरी सी नजर से देखा..
“आपको वाकई इस बात से फर्क पड़ता है.. ?”
“क्यों नहीं पड़ेगा पिया.. ?”
“लगता तो नहीं.. ! अगर फर्क पड़ता होता तो इतना बड़ा कदम उठाने से पहले एक बार सोचते ज़रूर.. !”
पिया की बात का कोई जवाब दिये बिना समर हाथ मुहँ धोने वाशरूम में घुस गया…
फ्रेश होकर बाहर निकलने के बाद उसने धीरे से पिया की तरफ देखा और एक तरफ की अलमारी खोल कर एक ट्रॉली बैग निकाल लिया…
उसे पिया का नाराज़ चेहरा देख समझ में आ गया था की पिया ने सिर्फ खुद की पैकिंग की है, और उसे अभी अपनी पैकिंग खुद करनी है..
बैग खोल कर वो अलमारी से अपने कपड़े निकलने जा रहा था की पिया ने एक दूसरा बैग उसके सामने पटक दिया… – “आपकी पैकिंग कर दी है… एक बार खुद भी देख लीजिये की मैंने सब सही रखा है या नहीं…
कभी लगा था कि आपको अच्छे से जानती हूँ लेकिन अब आँखों पर चढ़ा वो चश्मा निकल गया है… अब तो मुझे खुद पर इतना विश्वास ही नहीं रहा कि, मै आपको जानती भी हूँ या नहीं…
इसलिए देख लीजियेगा.. कुछ काम ज्यादा लगे तो रख लीजियेगा… !
एक जला हुआ ताना सुना कर पिया कमरे से निकल गयी…
लेकिन उसके इस तरह जाने के बावजूद समर के चेहरे पर पिया के रखें सामान को देख हल्की सी मुस्कान चली आई…
वो अपना बैग बंद कर रहा था कि प्रेम का फ़ोन आने लगा…
” हों गयी तैयारी.. ?”
प्रेम के सवाल पर समर ने हाँ कह दिया …
” तुम्हे एयरपोर्ट छोड़ने बिशुन को भेज दूंगा..!”
प्रेम के ऐसा कहने पर समर ने उसे टोक दिया.. -” पर क्यों.. ? मै मेरे ड्राइवर को बुला लूंगा ना.. !”
“अरे तुम्हारे ड्राइवर को आज विराज लेकर गया है.. उसे किसी रैली के लिए ज़रूरत थीं ना.. !”
” अरे हाँ याद आया ! मै तो भूल ही गया था.. !”
“समर तुम ठीक तो हों ना.. ! सुबह भी उखड़े उखड़े से लग रहे थे.. !”
“मै ठीक हूँ प्रेम !”
प्रेम ने समर को कुछ और ज़रूरी बातें बता कर फ़ोन रख दिया…
निरमा को मालूम था कि आज प्रेम को राजा साहब के साथ गुरुदेव से मिलने के लिए दूसरे शहर निकलना है और इसीलिए निरमा ने अपने ऑफिस से लौटने के बाद जल्दी-जल्दी सारी तैयारियां कर ली थी…!
इन्हीं तैयारियों के लिए निरमा आज छुट्टी लेना चाहती थी लेकिन यूनिवर्सिटी का काम इतना बढ़ा हुआ था कि आज वह छुट्टी भी नहीं ले पाई..
इसी से थकी हारी निरमा को काम के दबाव में इधर से उधर भागते और फटाफट काम निपटाते देखकर प्रेम को उस पर तरस आने लगा…!
प्रेम का सारा सामान पैक करने के बाद निरमा ने फटाफट उसका पसंदीदा खाना भी बना लिया था…
अधिकतर महिलाओं की जो समस्या होती है वही निरमा को भी अक्सर झेलनी पड़ती थी ! जिस दिन ऑफ़िस में उसे सबसे ज्यादा काम होता था, उसी दिन उसके घर पर काम करने वाला रसोईया भी छुट्टी ले लिया करता था ! अम्मा खुद पिछले हफ्ते भर से अपने बेटा बहु से मिलने गांव गई हुई थी ! इसलिए आज निरमा को सब कुछ अकेले ही करना था..!
मीठी को भी फटाफट उसका होमवर्क करवा कर निरमा ने टीवी के सामने टिका दिया था जिससे वह निर्बाध गति से अपना काम निपटा सकें..
प्रेम अपनी आदत से मजबूर घर आने के बाद नहाने चला गया था..
नहा कर आने के बाद वह मीठी के साथ खेल रहा था और निरमा को इधर से उधर भाग दौड़ करते देख रहा था ! आखिर प्रेम से रहा नहीं गया और वो उठकर रसोई में चला आया..
” क्या कर रही हो इतनी देर से..?”
” खाना बना रही थी..!”
” क्यों कुक नहीं आया..?”
” नहीं ! यही तो होता है मेरे साथ ! आज जब आप 3 दिन के लिए हम दोनों को छोड़कर बाहर जा रहे हो तो मैंने सोचा था आज का दिन छुट्टी ले लूंगी, और पूरा वक्त आपके साथ गुजार लूंगी! लेकिन आज यूनिवर्सिटी से भी छुट्टी नहीं मिली ! उसके बाद सोचा घर वापस लौटने के बाद आपकी तैयारी करके शाम को आपके साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड कर लूंगी, तो पता चला हमारे कुक महाराज भी गायब हो गए..!
अब तो यह हाल हो गया की कमर टूट रही है, कंधे दर्द कर रहे हैं और सिर भारी होने लगा है..!”
” मतलब हमारी मैडम को अब एक चाय की दरकार है..!”
” वाकई चाय की बहुत जरूरत है, लेकिन बनाने की भी हिम्मत नहीं है..!”
” कोई बात नहीं तुम चलो बाहर..! “
निरमा को बाहर कुर्सी पर बैठा कर प्रेम वापस रसोई में गया और उसने चाय चढ़ा दी.. उसे निरमा की प्रेगनेंसी वाला वह वक्त याद आ गया जब निरमा किसी के भी हाथ की चाय नहीं पी पाती थी ! उस वक्त पर वह सिर्फ और सिर्फ प्रेम के हाथों से बनी चाय ही पी पाती थी ! और इस बात पर अक्सर बांसुरी रूपा भाभी रेखा ही नहीं बल्कि घर पर काम करने वाली सुमित्रा और अम्मा जी भी उसका मजाक बनाया करती थी !
वह खुद इस बात को नहीं समझ पाती थी कि क्यों बाकी लोगों के हाथ की बनी चाय से उसे ऐसी स्मेल आती थी कि उसे लगता था कि उसे उल्टी ही हो जाएगी !
एक प्रेम ही था जिसके हाथ की बनी चाहे वह बड़े आराम से पी लिया करती थी ! उस बात को याद करते हुए प्रेम के चेहरे पर एक गहरी सी मुस्कान छा गई ! चाय चढ़ा कर वह अपने कमरे में गया और वहां से तेल की शीशी उठा लाया…
” यह तेल क्यों लेकर आ रहे हैं आप..? सामान में रखना था क्या..?”
” जी नहीं ! मैं आपके बालों में तेल डालने के लिए लेकर आ रहा हूं ! चाय चढ़ा दी है, जब तक चाय पक रही है, तब तक आपके बालों में थोड़ा मसाज दे देता हूं..!”
निरमा खुशी से चिल्ला कर खड़ी हो गई और प्रेम के गले से लग गई…
प्रेम ने उसे सोफे पर नीचे बैठाया और खुद ऊपर बैठकर उसके बालों पर हल्के हाथों से मसाज देने लगा इसके साथ ही गर्दन पर उंगलियां फिराते हुए धीरे-धीरे उसके कंधों पर भी मसाज देने लगा…
आराम मिलते ही निरमा की आंखें बोझिल सी होने लगी….
राहत के भाव के साथ निरमा ने आंखें बंद कर ली… 10 मिनट बीतते ही मीठी भागकर अपने पापा के पास आ गई…
” पापा बस, अब मम्मी को दूर करो और मुझे गोद में ले लो..!”
मीठी को शुरू से ही अपने पापा को किसी के साथ शेयर करना पसंद नहीं था ! वह अक्सर प्रेम और निरमा को एक साथ बैठे बात करते देखकर उनके बीच घुसकर प्रेम के गले में बाहें डाले बैठ जाती थी…!
आज भी उसके आते ही निरमा मुस्कुरा कर खड़ी हो गई और प्यार से प्रेम के गालों को चूम कर रसोई में चाय छानने चली गई…
” आज मौसम कुछ ज्यादा ही खराब नहीं हो रहा है..? आप लोग अपना जाना आगे नहीं कर सकते क्या..?”
निरमा ने बाहर चलती तेज आंधी तूफान को देखकर प्रेम से कहा…
” नहीं !! गुरुदेव से मिलने जाना हुकुम के लिए बहुत जरूरी है..! लेकिन बाहर वाकई मौसम बहुत खराब है और ऐसे में एयरवे से जाना वाकई परेशानी भरा हो सकता है..!”
” हां मुझे तो इस मौसम में फ्लाइट में बहुत डर लगता है..!”
निरमा ने चाय की कप प्रेम को पकड़ाई और उसके बगल में ही बैठ गई..
” तुम घबराओ मत! दो दिन में तो हम वापस आ जाएंगे..! लौटते वक्त बांसुरी को भी वापस लेकर आना है..!”
” हां आज सुबह ही उससे बात हो रही थी, तब उसने बताया भी की उसकी छुट्टियां अप्रूव हो जाएंगी और 2 दिन बाद वह आप लोगों के साथ वापस लौट आएगी..!
बेचारी महीने भर से शौर्य और राजा भैया को छोड़कर अकेली वहां अपने काम के लिए पड़ी हुई है..! सही है ना औरत को कहीं ना कहीं कॉम्प्रोमाइज करना ही पड़ता है !
अगर वह कैरियर देखती है तो फैमिली पीछे रह जाती है ! और अगर फैमिली पर फोकस करें तो कैरियर कहीं पीछे छूट जाता है !
इन दोनों के बीच एक साथ तारतम्य बना कर चलना बेहद मुश्किल है..!”
” पर तुमने वह कर दिखाया है..!”
प्रेम ने निरमा को देखते हुए मुस्कुराकर कहा और निरमा ने प्रेम के कंधे से सर टिका कर आंखें मूंद ली.. !
क्रमशः
aparna…..

Hello mam …aap season 3 ki jagah season 2 ke parts kyon upload kar rahe ho ..?
Season 2 यहाँ शिफ्ट कर रही जिससे पढ़ने के उत्सुक पाठक उसे भी पढ़ सके.. बाक़ी आज से js3 के पार्ट्स भी आएंगे