
जीवनसाथी 2- भाग 43
स्कूबा डायविंग कि ट्रेनिंग के बाद उन दोनों को एक बड़ी सी बोट में गहरे समंदर में ले जाया जाने लगा.. उनके साथ लगभग चार पांच लोगो कि टीम मौजूद थीं…
बोट पर बैठने के बाद भी उन्हें वापस एक बार सुरक्षा से जुडी बातें बताई जाने लगी… पिया बहुत ही ज्यादा एक्साइटेड लग रही थीं, लेकिन पानी में कूदने के नाम पर समर कि जान मुहँ को आ रही थीं… उसे तैरना आता था बावजूद उसे पानी से डर लगता था.. खासकर समंदर के पानी से…
उन लोगो को आँखों पर मास्क लगाया गया और फिर पैरों में कुछ विशेष मछली के पंखो जैसे जूते पहना दिये गए…
मुँह में ब्रीदिंग इंस्ट्रूमेंट डाल कर पिया पूरी तरह तैयार हो चुकी थीं..
बोट के किनारे पर उन्हें बैठा कर पीछे लुढ़काया जाना था… पिया ने समर कि तरफ देखा और मुस्कुरा कर बोट के मुहाने पर बैठ गयी..
समर को ये पानी में फेंकने का आईडिया ही वाहियात लग रहा था…
उसने पूछा भी कि उतरने का और कोई तरीका नहीं हैं…. उसके सवाल पर वहाँ मौजूद क्रू हंसने लगा…
पिया जैसे ही बोट के किनारे बैठी समर उसके करीब आ गया लेकिन चेहरे पर लगे मास्क के कारण एक निश्चित दुरी पर उसे रुकना पड़ गया…!
. पिया के हाथ थाम कर उसने आँखे झपकी और पिया मुस्कुरा उठी… !
मुहँ में इंस्ट्रूमेंट होने से वो बोल नहीं पा रही थीं.. दोनों एक दूसरे को देख रहें थे कि क्रू के एक लड़के ने पिया को पीछे धक्का दे दिया…..
और समर के देखते ही देखते पिया पानी में अंदर चली गयी… |
पिया के गायब होते ही उसके पीछे क्रू के दो लड़के भी जम्प कर गए..|
समर घबरा कर पीछे मुड़ा और अपने मुहँ से इंस्ट्रूमेंट निकालने को हाथ बढ़ा रहा था कि उसे भी धक्का दे दिया गया…
घबराया सा समर पानी में गिरते ही नीचे कि तरफ बढ़ने लगा…
और………
और….
जैसे जैसे वो समंदर कि गहराइयों में उतरता चला गया उसके सामने एक नयी दुनिया आती चली गयी….
बहुत गहरे तक वो पानी में नीचे उतरता गया…. बड़े आराम से वो पानी में बिना किसी मेहनत के उतरता जा रहा था, उसके अगल बगल क्रू के बाक़ी दो लड़के मौजूद थे…..
कुछ देर में उसे पिया नजर आने लगी …
समंदर कि गहराई पर नज़ारा ही अलग था…….
पानी का रंग हर एक जगह पर बदलता सा दिख रहा था… कहीं नीला कहीं गहरा नीला तो कहीं हरा…
नीचे कोरल का अद्भुत संसार सजा हुआ था…. और इन कोरल में रहने वाली रंगबिरंगी मछलियों का भी
..
कहीं पीली काली धारियों वाली मछली तो कहीं लाल काली, कहीं सिल्वर फिश तो कहीं छोटी छोटी काली नीमो फिश…. समंदर के अंदर का ये अद्भुत संसार अपने अंदर इतने रंग समेटे बैठा था ये ज़मीन पर रहने वाले इंसान तब तक नहीं समझ सकते थे जब तक समंदर में उतरकर अपनी आंखों से खुद ना देख ले….
पिया और समर के लिए यह चमत्कारी दृश्य था….
कोरल भी अलग-अलग रंगों और आकृति में बेहद खूबसूरत लग रहा था….
पानी के अंदर पाई जाने वाली कुछ वनस्पतियां भी वहां मौजूद थीं… |
पानी के किनारे ऊपर पाए जाने वाले लाल रंग के कोरल से यहाँ का कुछ अलग था, शायद पानी में रहने कि वजह से रंग हलके थे पर फिर मछलियों के रंग इतने तीखे और चमकीले कैसे थे… ?
ये सवाल अनुत्तरित था.. ?
पिया बहुत खुश नजर आ रही थीं… पानी के अंदर किसी भी चीज़ को छूना मना था, खास कर मछलियों को…
क्योंकि पर्यटन के कारण पर्यावरण को कष्ट ना होने पाए इस बात का वहाँ विशेष ध्यान रखा जाता था…
पिया मछलियों के झुण्ड कि तरफ जैसे ही बढ़ती वो सब एक साथ वहाँ से ऊपर की ओर बढ़ जाती… यूँ लग रहा था मछलियों और पिया के बीच कोई खेल चल रहा था…
समर भी वहाँ कि खूबसूरती में खुद को भी भुलाये बैठा था….
पिया का तो नाचने का मन कर रहा था… एक एक चीज़ बेहद खूबसूरत थीं… और प्रकृति की उस सुंदरता को इतने पास से निहार कर दोनों का ही मन नहीं भर रहा था…
तयशुदा अवधि पूरी होते ही वो दोनों क्रू की मदद से ऊपर चलें गए…..
ऊपर पहुँचते ही दोनों कि ख़ुशी खिल कर नजर आ रही थीं… बोट में बैठते ही पिया समर के गले से लग गयी….
“थैंक यू सो मच मंत्री जी.. ! लाइफ टाइम एक्सपिरिएंस था ये…. !
समंदर बहुत सुन्दर था… ! बहुत बहुत सुन्दर… |
अब समझ आ रहा कि हमारे विष्णु जी क्षीरसागर में क्यों निवास करते हैं… !”
समर ने पिया को थाम रखा था…
यहाँ से बोट उन्हें बाहर ले गयी….
समर और पिया आज ही समंदर के बाक़ी अनुभव भी देख लेना चाहते थे इसलिए स्नेरकलिंग और सी वॉक के लिए वो लोग हैवलॉक बीच कि तरफ बढ़ गए…
वैसे भी समंदर के अंदर जाने से पहले कुछ हल्का ही खाना होता हैं और दोनों हल्का नाश्ता कर के चलें थे…
वो पूरा दिन उनका समंदर के अंदर के अनुभव संजोने में बीत गया….
स्नर्कलिंग और स्काई वॉक में भी दोनों ने अद्भुत अनुभव प्राप्त किया और गले तक ख़ुशी में सराबोर होकर बीच से बाहर आये.. !
शाम को थक कर दोनों वहीँ के रोज़ रिसोर्ट में पहुँच गए….
वहाँ उनके लिए बीच पर ही कैंडल लाइट डिनर कि व्यवस्था थीं…
पिया अपने साथ बैग में कपड़े लेकर आई थीं……
पिया और समर पहले कमरे में ही चलें गए..
नहा कर तैयार होने के बाद पिया जैसे ही चलने को तैयार हुई समर को बिस्तर पर पड़े देख उसने उसे उठा दिया…
” जल्दी उठो, अभी सोना नहीं… मुझे बहुत भूख लगी हैं… !”
समर भी उसे छेड़ने के लिए ही सोने का नाटक कर रहा था.. उसने पिया कि बाजू पकड़ ली और पिया ने ना में सर हिला दिया… -” नो मंत्री जी, अभी तो सोचना भी मत… मै बिल्कुल भूखी शेरनी बनी हुई हूँ अभी.. !”
“तो आओ ना, मुझे खा जाओ.. !”
“नहीं इस वक्त तो खाना ही चाहिए… ! और वो भी टेस्टी सा… !”
समर को हल्का सा धक्का लगा कर पिया कमरे से बाहर निकलने लगी…. समर भी मुस्कुरा कर उसके पीछे निकल गया…
सी बीच पर बहुत सुंदर तैयारी थीं… उनके कमरे से होकर उनके डिनर एरिया तक रास्तों में चमकते बिजली के लट्टू लगे थे.. जिनके जलने से रास्ता रोशन हो गया था…
समर ने प्यार से पिया कि बाँहों को थाम लिया और दोनों साथ साथ आगे बढ़ गए…
डिनर टेबल पर कैंडल जल रही थीं, और समर कि पहले से ऑर्डर कि हुई महंगी सी वाइन रखी हुई थीं…
उन दोनों के बैठते ही उनके लिए विशेष तौर से तैयार किया सी फूड और तरह तरह के पारम्परिक व्यंजन परोसे जाने लगे ……
पिया ने स्पून समर की ओर बढ़ाया और समर ने मुस्कुरा कर उसका पहला बाइट ले लिया….
दोनों साथ साथ बेहद खुश थे…. पंख लगा कर ये दिन जाने कहाँ उड़े चलें जा रहें थे…
उन दोनों को ही सोने का दिन और चांदी सी राते बीतती जा रही थीं…
रात अपने कमरे में पहुँचने के बाद भी दोनों के उत्साह में कोई कमी नहीं थीं…
आखिर उनकी चिरप्रतीक्षित सुहाग की रात आ गयी थीं….
एक दूसरेे में खोये, एक दूसरे के प्यार में डूबे समर और पिया को फिर किसी का होश नहीं रहा… अपने प्रेम की मंज़िल पाने को तरसते दोनों प्रेमियों ने एक दूसरे के प्रति पूर्ण समर्पण से अपना तन मन अर्पण कर दिया….
वो रात कैसे और कब बीत गयी उन्हें पता ही नहीं चला…
******
वासुकी के कमरे में बैठे दर्श और वासुकी किसी ज़रूरी बातचीत में लगे थे कि नेहा का फ़ोन चला आया…
” तुम… ? तुम वापस कब आई.. ?”
” ग्रेट वासुकी ! तुम्हे भेजना तो याद रहा लेकिन मेरी वापसी कि डेट भूल गए… खैर… !!!
तुमसे उम्मीद करना मेरी बेवकूफी हैं… तुमसे मिलना चाहती हूँ.. कब मिल सकते हो.. ?”
“अभी दर्श के साथ ऑफ़िस में हूँ.. चाहो तो आ जाओ.. !”
“बाहर खड़ी हूँ, तुम्हारे गेट के.. !”
” बाहर क्यों खड़ी हो अंदर आ जाओ..!”
” तुम्हें बाहर गेट तक आना पड़ेगा मुझे रिसीव करने के लिए..!”
” व्हाट द हेल.. यह सब क्यों..?”
” अच्छा जी एक तरफ तो मुझसे इतना बड़ा काम करवाने जा रहे हो, दूसरी तरफ मेरी छोटी-छोटी इच्छा भी पूरी नहीं कर सकते..!”
” ब्लैकमेल कर रही हो मुझे..?”
” जो चाहे मान लो..!”
” ठीक है!! मैं आ रहा हूं…!”
वासुकी ने अपने बालों पर हाथ फिराया और उठ कर अपने ऑफिस से बाहर निकल गया…
गेट के बाहर अपनी शानदार गाड़ी में बैठी नेहा उसका इंतजार कर रही थी.. !
यह गाड़ी भी वासुकी ने ही नेहा को बतौर तोहफा दी थी…!
वासुकी जैसे ही नेहा के पास पहुंचा, नेहा ने कांच के अंदर से ही उसे इशारा किया और उसके इशारे को मानकर वासुकी ने उसके लिए दरवाजा खोल दिया…
मुस्कुराती हुई नेहा नीचे उतर गई…
” चलो अब अंदर चलो..!”
वासुकी यह बोल कर आगे बढ़ गया कि तभी नेहा ने उसकी कलाई थाम ली और वासुकी को रुकना पड़ा… उसने पीछे मुडकर देखा, नेहा अपनी जगह खड़ी उसे देख रही थी…
” अब क्या हुआ मैडम.?”
” ऐसे लेकर जाने की बात थोड़ी हुई थी..?”
” फिर..?”
” मुझे गोद में उठाओ और अंदर ले चलो..!”
वासुकी ने अपनी कलाई उसके हाथ से छुड़वाई और “भूल जाओ” कह कर आगे बढ़ गया…
” सोच लो वासुकी ! अगर एक बार मैं यहां से चली गई, तो वापस नहीं आऊंगी और तुम्हारा प्लान अधूरा रह जाएगा…!”
वासुकी जाते-जाते रुक गया… उसके माथे पर बल पड़ गए उसे परेशानी सी होने लगी क्योंकि वह नेहा से हमेशा ही दूर भागा करता था और नेहा उसके काम के एवज में उसके और भी ज्यादा करीब आने की कोशिश करती जा रही थी…
अगर अनिरुद्ध वासुकी खुद प्यार में नहीं पड़ा होता तो शायद वह नेहा की तकलीफ को समझ नहीं पाता ! लेकिन वह समझता था कि नेहा भी उसी दर्द से गुजर रही है जिस दर्द से वह खुद गुजर रहा था…
एक तरफा प्रेम का दर्द…!!!
अपने एहसास उस इंसान से ना बता पाने का दर्द जिससे आप इस दुनिया में सबसे ज्यादा मोहब्बत करते हैं ! हालांकि उसके और नेहा के प्यार में यहीं आकर अंतर हो जाता था कि वह बांसुरी के सामने कभी कुछ नहीं कह पाता था ! उस की बोलती बंद हो जाती थी !
और नेहा उसके सामने सबसे अधिक मुखर हो जाती थी, और बात बात पर अपने प्यार का इजहार करती चली जाती थी…!
शुरुआत में तो नेहा में बांसुरी की सिर्फ झलक नजर आती थी लेकिन अब धीरे-धीरे नेहा बांसुरी का ही दूसरा प्रतिरूप नजर आने लगी थी ! हालांकि मुंह खोलते ही सामने वाला समझ सकता था कि बांसुरी बांसुरी थी और नेहा नेहा..
वासुकी मुड़कर लंबे डग भरते हुए नेहा के पास पहुंचा और बिना उसकी तरफ देखे उसे झटके से अपनी गोद में उठा लिया…
तेज तेज कदम उठाकर वह कुछ ही पलों में ऑफिस पहुंच गया…!
ऑफिस के दरवाजे पर पहुंचकर वह नेहा को अपनी गोद से उतारने ही वाला था कि नेहा ने अपनी बाहें उसके गले पर डाल दी और उससे शिकायत करने लगी..-” नहीं मुझे यहां नहीं उतरना..!”
” फिर और कहां जाना है तुम्हें..?”
” ऊपर ! मुझे तुम्हारे पहली मंज़िल वाले ऑफिस पर जाना है! वहां तुमसे बात करनी है..?”
” ऐसी कौन सी बात है जो तुम ग्राउंड फ्लोर के ऑफिस केबिन में नहीं कर सकती..?”
” ऐसी एक बात है, और वह बात मैं ऊपर पहुंच कर ही तुम्हें बता सकती हूं..!”
उसे एक बार गुस्से में घूर कर ना में गर्दन हिलाकर वासुकी सीढ़ियों की तरफ बढ़ने को था कि नेहा ने वापस उसे कसकर पकड़ लिया और मुस्कुराने लगी…
” क्या हुआ..? तुम क्या बस डीलडौल के बाहुबली हो..? और अंदर से ऐसे ही फिसड्डी..?
एक 48 किलो की लड़की तुमसे उठाई नहीं जा रही… बताओ..?”
” डोंट टेल मी कि तुम सिर्फ 48 किलो की हो..?”
” एक्सक्यूज मी!! मैं हाइट और वेट के प्रोपोर्शन में एकदम परफेक्ट हूं…! और मेरा वेट एक्जेक्टली 48 किलो ही है..!”
एक गहरी सी सांस छोड़ कर उसे उठाए हुए वासुकी सीढ़ियां चढ़ने लगा…
वासुकी के माथे पर पसीना छलक आया था, जिसे अपने हाथ से नेहा ने बड़े प्यार से पोंछ दिया…
ऊपर के कमरे के दरवाजे के बाहर पहुंचते ही वासुकी ने नेहा को उतारना चाहा कि नेहा वापस उससे चिपक गयी..
” नहीं नहीं… यहां नहीं उतरना मुझे..!”
वासुकी ने उसे खा जाने वाली नजरों से घूर कर देखा..
” अब यह मत बोलना कि तुम्हें वापस नीचे जाना है..!”
नेहा ने बड़े प्यार से ना में सिर हिला दिया..
” मैं तो बस यह कह रही थी कि मैं दरवाजा हाथ से खोल देती हूं मुझे ऑफिस के अंदर ले चलो प्लीज..!”.
एक गहरी सी फूंक उसके चेहरे पर छोड़कर वासुकी ने अपने ही हाथ से दरवाजा खोला और पैर की ठोकर से दरवाजे को अंदर मारकर नेहा को गोद में लिए ही अंदर चला आया…
” चारों तरफ देख कर बता दो किस कुर्सी में तुम्हें बैठना है, मैं वहीं ले जाकर तुम्हें पटक दूंगा…!”
नेहा को वासुकी को इस तरह छेड़ने में बहुत मजा आ रहा था और उसने हंसते हुए एक बड़े काउच की तरफ इशारा कर दिया…
वासुकी नेहा को उस काउच तक ले कर गया की नेहा वापस चिल्लाने लगी…
“नहीं नहीं .प्लीज़ मुझे फेंक मत देना….. !”
वासुकी ने वापस उसे घूर कर देखा और धीमे से काउच पर रख दिया…
“थैंक यू मिस्टर वासुकी.. आई लव योर स्टायल एंड एटीट्यूड.. इन्फेक्ट एवरीथिंग.. !”
“बट आई डोंट लाइक यू.. !”
” आई डोंट केयर… !”
“बताओ.. क्या कहना चाहती थीं.. ?”
“ओह्ह माय गॉड.. !! मै तो यहाँ तक आने में ये भूल ही गयी थीं कि मुझे तुमसे कुछ बताना भी था…
मेरे साथ आओ.. मै तुम्हे बताऊँ कि मै तुम्हे क्या बताना चाहती थीं… !”
नेहा अपनी जगह से उठी और उस केबिन के एक तरफ बने परसनल केबिन कि तरफ बढ़ गयी.. वासुकी भी उसके पीछे बढ़ गया…
उस कमरेे में एक आदमकद आइना लगा था.. वो जाकर सीधे उस आईने के सामने खड़ी हो गयी…
उसके ठीक पीछे खडा वासुकी उसे देखता खड़ा रहा…
उसे समझ नहीं आ रहा था कि नेहा क्या कहना चाहती हैं लेकिन फिर आईने में नेहा का प्रतिबिम्ब देख वो अचानक से चौंक गया.. उसे लगा जैसे सामने बाँसुरी खड़ी हैं…
वासुकी ने नेहा को ध्यान से देखते हुए उसके कांधे पर हाथ रखा और धीमे से कंधे से होते हुए उसके हाथ में फिसलता वासुकी का हाथ नेहा कि हथेली तक पहुँच गया…
उसकी उँगलियों में अपनी उँगलियाँ फंसा कर वासुकी ध्यान से उन उंगलियों को देख रहा था कि नेहा उसके करीब चली आई…
” मुझे तुम्हारे लिए काम करने के बदले तुमसे कुछ चाहिए वासुकी… !”
“मांग लो.. जो चाहो सब मांग लो.. !”
“पहले भी प्रॉमिस कर चुके हो… अब मुकर नहीं सकतें तुम !”
“वासुकी ने अगर ज़बान दी हैं तो वो मुकरेगा नहीं… तुम ऐसा क्या मांगने वाली हो… ?”
” तुम्हे ये दिखाने आई थीं कि तुम्हारे काम के लिए मै पूरी तरह से तैयार हूँ और तुमसे मुझे क्या चाहिए ये मै तुम्हे बाद में बताउंगी.. !”
“नहीं… तुम वैसे भी बहुत सस्पेंस बना चुकी हो.. मुझे आज ही जानना हैं कि तुम चाहती क्या हो मुझसे… !
“मै तुम्हे चाहती हूँ वासुकी.. क्या तुम्हे ये नजर नहीं आता.. !”
“ओह्ह स्टॉप ईट नेहा… तुम खुद को तैयार रखो, कभी भी तुम्हे बुला सकता हूँ.. !”
“मंजूर हैं… ! मै आज शाम तुम्हारे घर आउंगी.. उसके बाद आज शाम से परसो सुबह तक का हर पल मुझे तुम्हारे साथ चाहिए… तुम हर काम मेरी मर्ज़ी से करोगे, मेरी हर बात मानोगे बिल्कुल एक आइडियल हस्बैंड कि तरह.. !
मै जानती हूँ तुम्हारे काम में घुसने के बाद शायद मुझे तुम्हारे साथ रहने का कभी मौका ना मिले !
तो बस ये चाहती हूँ कि आज शाम से परसो सुबह तक कि अपनी ज़िन्दगी का ये हिस्सा मेरे नाम कर दो.. बोलो मंज़ूर हैं.. ?”
वासुकी सोच में पड़ गया… उसके पास नेहा कि बात मानने के आलावा कोई चारा नहीं था…
उसने उसकी तरफ देखते हुए हाँ में गर्दन हिला दी..
” मेंरी ज़िन्दगी के ये चालीस घंटे तुम्हारे हुए नेहा.. तुम जैसा चाहोगी वैसे रहूँगा, तुम्हारी हर बात मानूंगा और जो तुम कहोगी वो सब करूँगा… आई प्रॉमिस !”
नेहा ने गहरी सी आँखों से वासुकी को देखा और मुस्कुरा कर अपनी जगह से उठ गयी…
“शाम का इंतज़ार रहेगा वासुकी…. अब चलती हूँ..ढ़ेर सारी तैयारियां करनी हैं… जल्दी ही वापस आउंगी… मेरा इंतज़ार करना.. !”
नेहा उसके ऑफ़िस से निकल कर सीढ़ियां उतर गयी….
और वासुकी उसे जाते हुए देखता रह गया….
*****
इश्क़ में डूबे समर और पिया गहरी नींद सो रहें थे कि समर का फ़ोन बजने लगा…
ना समर कि आँख खोलने कि हिम्मत हो रही थीं और ना पिया कि…
दोनों ही गहरी नींद में डूबे रहें…
कुछ देर में ही वापस मोबाइल बजने लगा….
अबकी बार पिया कि आँख खुली ज़रूर लेकिन फ़ोन उठाने कि अब भी उसने ज़हमत नहीं उठायी…
कुछ देर कसमसा कर वो उठी और फ़ोन उठाया तब तक में फ़ोन कट गया…
लेकिन वो उठ कर बैठ गयी… उसने समय देखा, सुबह हो चुकी थीं…
उसने एक बार अपने बगल में सो रहें समर को देखा और उसके माथे को प्यार से चूम कर वो बाथरूम में घुस गयी….
उसके नहा कर निकलने के बाद भी समर सोया पड़ा था…
पिया तैयार होने के साथ साथ यहाँ वहाँ फ़ैला पड़ा सामान भी पैक करने लगी…
उसी वक्त समर का फ़ोन तीसरी बार बज उठा…. इसके पहले जो दो कॉल आये थे, उन्हें बिना देखें ही पिया नहाने घुस गयी थीं.. इसलिए इस बार वो फ़ोन कि आवाज़ सुनते ही समर को उठाने लगी…
“मंत्री जी तीसरी बार बजने के बाद अब फ़ोन कटने वाला हैं.. ! आप उठा क्यों नहीं रहें.. ?”
आलस से बिस्तर पर आधी नींद में खोये से समर ने सामान समेटती पिया ने कहा और उनींदी सी आवाज़ में समर ने उसे ही फ़ोन उठा ने को कह दिया..
अब कि बार जैसे ही फ़ोन बजा, पिया ने फ़ोन उठा लिया..
नंबर इंटरनेशनल था… किसी लड़की का कॉल था.. बड़ी मीठी सी बोली में उधर से किसी ने कहा..
“हैलो सैमर ! डिस इस रेवन दिस साइड.. ! हाउ आर यू… !”
एक ब्रिटिश एक्सेंट में बात करती लड़की कि आवाज़ सुन पिया चौंक गयी.. उसने मुड़ कर देखा समर मीठी सी नींद सो चुका था..
क्रमशः
aparna…..
