
जीवनसाथी -2 भाग -31
पिया कि शादी ऐसी हड़बड़ी में हुई थीं कि वो न ढंग से शादी कि तैयारी कर पायी थीं और ना ही छुट्टियाँ डाल पायी थीं… और इसी कारण उसे शादी कि अगली रात ही इमरजेंसी में भागना पड़ा था… बस यहीं सब सोच उसने कुछ दिन छुट्टी लेने कि सोच कर एक हफ्ते कि छुट्टियाँ डाल दी थीं….
उसकी सास ये सुन कर खुश ही हुई थीं, वैसे भी नौकरी पर जाती बहुएं सास को कुछ खास नहीं भाती हैं…
ये सुनते ही कि अगले दिन से पिया ने छुट्टियाँ डाली है समर कि माँ ने घर में कथा पूजा रखवा ली थीं… और शाम में ही पिया से कह दिया था कि अगले दिन कथा के लिए सुबह जल्दी उठ कर तैयार हो जाएं…
उसी के एक रात पहले पिया और समर को महल कि पार्टी में जाना पड़ गया था… पिया ने सोचा था रात में समर को अपनी छुट्टियों के बारे में बताएगी लेकिन उसे बताने से पहले ही वो थक कर सो गयीं थीं..
अगली सुबह पांच बजे ही उसके दरवाजे पर किसी ने दस्तक दें दी..
बड़ी मुश्किल से उसकी आंखे खुली और वो दरवाज़ा खोलने चली गयीं…
दरवाज़े पर घर कि नौकरानी खड़ी थीं..
“भाभी अम्मा जी बोली है, आपको जागा दें.. ये लीजिये चाय ! एक घंटे में नहा धो कर आप नीचे आ जाना.. !”
पिया ने घडी में वक्त देखा… सुबह के पांच बजे थे..
“अभी तो सिर्फ पांच बजे है… !”
” हां फिर..? छै बजे तक आप नीचे आ जाइएगा.. पूजा पाठ की तैयारी लगेगी, सात बजे तक पंडित जी आ जाएंगे और उसके बाद पूजा हवन सब कुछ होगा… और लगभग 11 बजे के आसपास आपको और भैया जी को लेकर अम्माजी कुल देवी के मंदिर जाएंगे…
वैसे कुल देवी के दर्शन किए बिना इनके घर पर दूल्हा दुल्हन एक साथ सोते नहीं है.. लेकिन आपकी वो क्या कहते हैं, लब मैरिज है ना.. !इसलिए अम्मा जी ने सोचा आप दोनों को टोकने से कोई फायदा नहीं है.. !”
” खैर बिना टोके भी मुझे टोक लग ही गई…. !”
पिया कि कही बात एकदम से उसे समझ नहीं आयी..
“क्या भाभी जी.. ? “
“कुछ नहीं गुड्डी तुम जाओ.. मैं तैयार होकर आती हूँ.. !”
पिया दरवाज़ा बिलकुल छेक कर खड़ी थीं.. जबकि गुड्डी का बहुत मन था कि वो अंदर कमरे का नजारा देख लें… दरवाज़े से पिया का पलंग नज़र आ भी रहा था और उसमे सोये समर कि झलक भी गुड्डी देख पा रहीं थीं… उसकी निगाहों को देख पिया ने उसे वापस टोक दिया…
“ठीक है गुड्डी, फिर तुम जाओ.. मैं आती हूँ.. !”
उसके हाथ से चाय लेकर पिया ने दरवाज़ा बंद कर दिया…
रात में सोने में उन्हें तीन बज चुका था और बस दो घंटे कि नींद के बाद उसे उठना पड़ गया था… वो अपना टॉवेल लिए बाथरूम में घुस गयीं…
नहा कर वो निकली तो उसने देखा समर अब भी गहरी नींद में सो रहा था… वो मुस्कुरा कर उसके पास चली आई….
वो धीरे से उसके पास बैठ गयीं…….
सोते हुए समर का चेहरा बहुत मासूम नजर आ रहा था… और शायद नींद में किसी मीठे से ख्वाब को देखता वो धीरे से मुस्कुरा रहा था…
उसकी मुस्कान देख पिया भी मुस्कुराने लगी… पिया के भीगे बालों से पानी कि बून्द टपकी और समर के होंठों के किनारे अटक गयीं…
पिया धीरे से समर के चेहरे पर झुक गयीं…. उसने उस पानी के बूँद पर अपने होंठ रखें और वो बून्द पी ली… वो उठने को थीं कि समर ने उसे बाँहों में जकड कर पलंग पर खींच लिया….
“अरे.. अरे.. ये क्या कर रहें हैं मंत्री जी… ?”
” क्या हुआ… ? उकसाया तो तुमने ही है.. !”
“मैंने कहाँ उकसाया.. ? मैं तो बस पानी कि बून्द हटा रहीं थीं… अगर नहीं हटाती तो आप उस बून्द से गीले हो जाते और आपकी नींद खुल जाती….
” वाह कितना खूबसूरत तरीका था बून्द हटाने का.. लेकिन आपने बून्द हटाई और हमारी प्यास बढ़ गयीं.. उसका क्या किया जाएं… ?”
समर पिया के होंठो पर झुकने को था कि, पिया ने उसे खुद से दूर कर दिया…
“जूठा मत कर देना मुझे… अभी पूजा में बैठना है… !”
“व्हाट… !”
“यस मंत्री जी ! मेरी सासु माँ ने आज घर पर पूजा रखी है.. मैं बस उसी के लिए तैयार होकर नीचे जा रहीं हूँ… आप फ़ौरन नहा कर तैयार हो जाइए.. !”
पिया समर से खुद को छुड़ा कर आईने के सामने जा बैठी… फटाफट अपनी लिपस्टिक सही कर उसने बालो पर ब्रश फेरना शुरू कर दिया….
पलंग पर अधलेटा सा समर पिया को देखता रहा…. पिया ने उसकी तरफ देखा और मुंह बनाकर उसे चिढ़ाने लगी…
” बस इसी तरह घूर घूर कर नजर लगा दो मुझे..!
ये नहीं कि जल्दी जाकर तैयार हो जाओ..! ना खुद तैयार होने ना जा रहें और ना मुझे तैयार होने में मदद कर रहे हैं..!”
“आओ मैं मदद कर दूँ.. !”
समर एक झटके में पलंग से उतरकर पिया के पास पहुंच गया… उसने पिया के पास बैठते हुए उसके गहनों के बॉक्स को खोला और एक-एक कर उसे गहने पहनाने लगा…
कानों में झुमके पहनाने के साथ ही वह उसके कानों की तरफ झुक रहा था कि पिया ने उसके चेहरे को पकड़ कर उसे खुद से दूर कर दिया…
” आपकी सारी शैतानियां समझ में आ रही है मंत्री जी… आप सिर्फ टाइम वेस्ट कर रहे ! आप तुरंत उठे और बाथरूम में घुस जाएं.. मैं मेरे गहने पहन लूंगी..!”
बनावटी गुस्सा दिखाते हुए समर खड़ा हो गया और बाथरूम की तरफ बढ़ने लगा…
मुंह बनाते हुए समर बाथरूम के अंदर घुस गया… दरवाजे से झांक कर उसने पिया को आवाज लगा दी…
” सुनो टॉवेल दे देना मुझे..!”
” खुद लेकर जाना था ना ..! क्योंकि मैं सिर्फ 5 मिनट में नीचे चली जाऊंगी फिर आप टॉवल के लिए आवाज लगायेंगे तो मैं देने नहीं आने वाली.. !”
बड़बड़ करते हुए पिया ने टावल निकाला और समर के हाथ में पकड़ा दिया…
समर ने मुस्कुरा कर दरवाजा बंद किया और पिया वापस अपने कंगन पहनने लगी…
” सुनो पिया मेरे कपड़े भी निकाल देना प्लीज..!”
समर एक बार फिर बाथरूम से झांक कर पिया को पुकार उठा…
पिया ने हाथ के इशारे से उसे उसके कपड़े दिखा दिया…
” मुझे मालूम था आप ऐसी ही हरकतें करेंगे, इसलिए मैंने पहले ही आपके कपड़े निकाल कर पलंग पर रख दिये हैं.. “
“स्मार्ट वाइफ.. हम्म !”
पिया मुस्कुराते हुए बाथरूम के दरवाजे के पास आई और उसने समर को अंदर धक्का दे दिया…
” मैं जा रही हूं नीचे, जल्दी निकल कर आना..!”
पिया सीढ़ियां उतर कर नीचे चली गई… नीचे उसकी सासू मां ने एक लड़की बुला रखी थी.. जो मेहंदी का कोन हाथ में पकड़े पिया का ही रास्ता देख रही थी..! पिया ने मेहंदी वाली को देखते ही सासू मां की तरफ देखकर सवाल पूछ लिया…
” आपके यहां कथा के पहले भी मेहंदी लगाई जाती है क्या मम्मी जी..!”
” नहीं ऐसा कोई रिवाज तो नहीं है, लेकिन तुम दोनों की शादी जितनी जल्दबाजी में हुई, उस समय हमें इतना वक्त ही नहीं मिला कि इस तरह की रस्में की जाए.. तो सोचा आज कथा करवा रहे हैं तो उसके पहले ही तुम्हें हाथों में मेहंदी और पैरों में आलता लगवा देते हैं…
इसके बाद शाम के समय अड़ोस पड़ोस की औरतों को बुलाया है तुम्हारी मुंह दिखाई की छोटी सी रसम भी हो जाएगी, और इसके अलावा जो छोटी मोटी शादी के बाद की रस्में होती हैं वह भी निभ जाएँगी.. !
आखिर इकलौता लड़का है हमारा… हमारे भी ढेर सारे अरमान थे, समर की शादी को लेकर..!
पहले हम सोचा करते थे हफ्ते भर चलेगी ऐसी शादी करेंगे समर कि | अब हमें क्या पता था कि सिर्फ 1 दिन ही नहीं कुछ घंटों में ही समर की शादी निपट जाएगी | पर चलो जो हुआ ठीक हुआ…
वैसे भी जिसके जो किस्मत होती है वही मिलता है..!”
पिया को समझ में नहीं आया कि उसकी सास उसके लिए सकारात्मक बोल रही है या नकारात्मक……! इसलिए उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और मेहंदी वाली के सामने हाथ खोल कर बैठ गई….
मेहंदी वाली लड़की अपने काम की एकदम पक्की थी उसने बमुश्किल 10 से 15 मिनट में पिया के दोनों हाथ भर कर मेहंदी लगा दी…
उसी वक्त घर की पुरानी कामवाली आलते का कटोरा लिए चली आई.. पिया के पैरों को एक मलमल के कपड़े के ऊपर रखकर उसने पहले उसके दोनों पैरों पर अच्छे से हल्दी पोती और उसके बाद उस पर आलता लगा दिया….
पिया खुद ही अपने पैरों को देखती मोहित हो गई… इससे पहले उसने कभी आलता नहीं लगाया था! बहुत बचपन में जब कभी कन्या भोज के लिए उसे अड़ोस पड़ोस की आंटी लोग खाने पर बुलाया करती थी, तब वह कभी-कभी उसके नन्हे पैरों में ऐसे ही लाल रंग लगा दिया करती थी और वह अपने लाल-लाल पैरों को देखती खुश होती नाचती रहती थी! आज सालों बाद उसके पैर इतने सज रहे थे.. वह मुस्कुराते हुए अपने पैरों को देखती हुई खोई हुई थी कि तभी उसकी दूर के रिश्ते की बुआ साथ चली आई…
” अरे यह क्या दुल्हन के पैर में बिछुए तक नहीं है… ना पायल पहन रखी है दुल्हन ने ना नथ है..? कैसी नवेली दुल्हन है तुम्हारी शकुन भाभी !”
बुआ जी ने समर की मां से सवाल कर दिया! अब समर की मां क्या बताती कि किन परिस्थितियों में समर और पिया की शादी हुई थी.. वह तो शादी के बाद उन्होंने जिन जिन मेहमानों को यह बताने के लिए फोन किया कि समर की शादी हो गई है, वह सारे मेहमान बिना बुलाए ही उनके यहां बधाई देने चले आए थे ! और इसीलिए समर के माता-पिता उन सबको देखते हुए इस सारे आयोजन को करने के लिए मजबूर हो गए थे… !
” अरे दीदी, बहू डॉक्टर है ना इसे ज्यादा छुट्टियां भी ना मिली थी.. बस इसीलिए शादी के अगले दिन ही इसे अस्पताल भागना पड़ा… अब वहां कहां यह सब पहन कर जाती बस इसलिए हमने कहा उतार दो, जब घर में रहा करो तब पहन लिया करो..!
” तुम भी कैसी बात करती हो शकुन भाभी ! दिया जा बेटा हमारा वहां से बैग उठा ला.. उन्होंने अपनी इकलौती बेटी को कमरे में दौड़ा दिया…
दीया ने पिछली शाम ही कोई वीडियो बनाकर टकाटक में अपलोड किया था और इसीलिए वह उसमें आए व्यूज और कमेंट को देखने में व्यस्त थी… उसके इतने जरूरी काम के बीच उसकी मां ने उसे एकदम ही गैर जरूरी काम बता दिया और वह भुनभुनाती हुई उठकर अपनी मां के कमरे से उनका बैग उठाकर ले आई…
उसके हाथ से बैग लेकर उन्होंने उसे खोला और उसके अंदर से एक बहुत सुंदर रेशमी सा पाउच निकाल लिया…
” वैसे तो भाभी मुंह दिखाई के लिए बहू के लिए हम अंगूठी लेकर आई हैं, लेकिन साथ में पायल और बिछुए भी लाए थे, तो ऐसा करते हैं दीया भी तो इसकी ननंद होती है तो दिया से बिछुए पहनवा देते हैं… !”
” लेकिन बिछुए पहनाने की रस्म तो भाभी पूरी करती है ना..? लड़की की भाभी !
लेकिन यहां तो पिया भी एकलौती है इसके भी आगे पीछे कोई भाई बहन नहीं है..!”
” अब शादी तक तो भाभी आपने बिना मुहूर्त देखे कर ली… 1 दिन की शादी निपटाई है, उसके बाद अब इतना सोचेंगे कि यह रसम यह निभाए वह रसम वो निभाएं, तब तो हो चुका..!
हमारी दिया से ही करवा दो और जो नेगचार देना है दिया को ही दे देना..!”
समर कि माँ ने हाँ में गर्दन हिला दी और दिया कि माँ ने उसके हाथ में बिछिया पकड़ा दी…
दिया भी नयी उम्र कि लड़की थीं उसे ये सब मालूम न था.. -“इसे क्या करना है.. ?”
“अरे अपनी भाभी के पैर में पहना दें, नेग मिलेगा.. !”
अपनी माँ कि बात सुन उसने मुहं बिगाड़ा और बालों को समेटते हुए पिया के पैर के पास बैठ गयीं…
पिया के पैरो को पकड़ वो बिछुए पहनाने जा रहीं थीं कि पिया ने उसे रोक दिया…
“दीजिये मैं खुद पहन लुंगी.. !”
“अरे नहीं ऐसे कैसे खुद पहन लोगी.. फिर नेग.. ?”
बुआजी कि बात आधी ही काट कर पिया ने अपने पर्स से कुछ रुपये निकाले और सामने बैठी अपनी नंद के हाथ में रख दिये…
“नेग लेने का तो आपका हक बनता है… आपने अपनी इतनी कीमती चीज़, अपना भाई जो मुझे दिया है.. !”
दिया ने भी मुस्कुरा कर रूपये पकड़ लिए… उसी वक्त ऊपर से समर कि आवाज़ सुनाई दी…
“पिया… सुनो !ज़रा ऊपर आना.. !”
उसकी आवाज़ सुनते ही पिया ऊपर निकल गयीं…
“अरे पर आपको बुला क्यों रहें हैं… ?” दिया के सवाल पर वो उसे जवाब देकर धीरे धीरे सीढ़ियां चढ़ गयीं…
“कुछ सामान चाहिए होगा… !”
पिया का जवाब सुन वहाँ बैठी समर कि माँ उसकी बुआ और बहन दिया सभी मुस्कुरा उठी…
“इनके खुद हाथ में मेहंदी लगी है.. ये जाकर क्या और कैसे निकाल कर देंगी… ?” समर कि बुआ के ऐसा कहते ही वो तीनों हंसने लगी… और उनकी बातों से अनजान पिया ऊपर कमरे में पहुँच गयीं…
ऊपर समर नहा कर निकल चुका था और अपनी शर्ट के बटन लगा रहा था…
पिया कमरे के अंदर आई और उसकी पायल कि आवाज़ से चौंक कर वो पीछे पलट गया…
“ये क्या इतना सब छन छन पहन लिया… ?”
“मुझे तो अच्छा लग रहा है… !”
” अच्छा तो मुझे भी लग रहा है.. अब जब भी मेरी वाइफी मेरे आस पास होंगी, मुझे इस छनछन से पता चल जाएगा…!”
समर पलटकर पिया के पास आ गया..! पिया ने अपने दोनों हाथ खोल कर उसे दिखा दिए कि उसके हाथ में मेहंदी लगी है, इसलिए वह अभी उसका कोई काम नहीं कर सकती…
समर ने पिया के करीब आकर अपने बालों को जोर से हाथों से झटक दिया उसके गीले बालों की पानी की बूंदे पिया के गालों और गर्दन पर अटक कर रह गयीं…..
पिया के दोनों हाथों को अपने हाथों से पकड़ने के बाद समर ने पिया को ज़रा पीछे खिसका कर धीरे से पिया की गर्दन पर अपने होंठ रख दिये …
पिया सिहर कर रह गई… उसने धीरे से समर के कानों में कहा…-” छोड़ो मुझे.. मुझे नीचे पूजा में जाना है..!”
” छोड़ दूंगा… मैं तो बस उस बून्द को पी रहा था.. वरना तुम्हारे कपड़े भीग जाते ना…!”
” बहुत शैतान हो तुम..!”
” शैतान तो वाकई हूं, लेकिन अभी तुमने मेरी शैतानियां देखी कहां है..? अभी भी देखो कितनी शराफत से तुम्हारे दोनों हाथ पकड़ लिए, वरना तुम मुझे धक्का मारने के लिए अपने दोनों हाथ मेरी शर्ट पर रख देती और उसके बाद तुम्हारी बिगड़ी हुई मेहंदी की डिज़ाइन देखकर नीचे सबको समझ में आ जाता कि तुम ऊपर से मेरे साथ क्या कर के नीचे वापस जा रही हो..!”
” छी कितने गंदे हो ना तुम..!”
” अच्छा जी एक तो तुम्हारे हाथों की मेहंदी बचा ली… उसके बावजूद मैं गन्दा हूँ….
अब तो बेटा रात को देखना तुम कि मैं कितना बड़ा हैवान हूँ… !”
समर पिया के होंठो की तरफ बढ़ रहा था कि तभी पिया के कमरे के दरवाजे पर दिया ने दस्तक दे दी…
” भाभी जल्दी कीजिए… नीचे पंडित जी आ गए हैं.. आप दोनों का ही इंतजार हो रहा है..!”
“हाँ… बस अभी आई… !”
बड़ी मुश्किल से अटक अटक कर पिया ने अपनी बात कही और समर से खुद को छुड़ाकर कमरे के दरवाजे की तरफ निकल गई.. समर ने अपने बालों पर हाथ फिराया और पिया के पीछे से आकर दरवाज़ा खोल दिया…
पिया उससे बचती हुई आगे निकल गयीं और वो उसके पीछे सीढ़ियां नीचे उतर आया…
पिया ने एक दिन पहले ही शाम को पंखुड़ी को भी फोन करके पूजा का निमंत्रण दे दिया था !
वही समर की भी पिछले कुछ दिनों में शेखर से अच्छी खासी दोस्ती हो गई थी उसने शेखर को बुला रखा था…!
नीचे मेहमान आ कर पूजा में बैठ चुके थे ! पिया और समर के पहुंचते ही दीया ने उन दोनों का गठबंधन किया और दोनों को एक साथ पूजा में बैठा दिया…
कथा सुनते हुए बीच में पिया कि नींद से बोझिल पलकें झपकी जा रहीं थीं, कि बाजू में बैठी पंखुड़ी ने उसे टोक दिया…
” क्या हुआ.. ?रात भर सोई नहीं है क्या, जो यहां कथा सुनते हुए सो रही है..?”
” हां यार रात में सोने में देर हो गयीं थीं.. !”
” जब मालूम था कि अगले दिन सुबह पूजा होनी है ना तो थोड़ा सा कंट्रोल कर लेना था ना..?”
पिया ने पंखुड़ी की बात समझने के बाद उसे घूर कर देखा…
” जैसा तू सोच रही है,ऐसी कोई बात नहीं है..! हम शाम को पार्टी से ही लेट वापस लौटे थे, इसलिए देर हो गई..!”
” तब तो फिर तुरंत ही सो जाना चाहिए था..!”
” उसके बाद मैं तुरंत ही सो गई थी मेरी मां..! वैसे तू कथा पूजा में ध्यान लगा..!”
पिया की बात पर पंखुड़ी ने हाँ में गर्दन हिला दी…
” सही कह रही है, अभी मुझे मन लगाकर पूजा पाठ करना चाहिए ! तभी तो मुझे भी एक अच्छा सा वर मिलेगा ! वैसे पिया प्रसाद में क्या बना है तेरे घर..?”
पिया ने पंखुड़ी की तरफ घूर कर देखा और दूर खड़े नौकरों की तरफ देखने लगी.. उनमें से एक नौकर ने पिया का इशारा समझ कर उन लोगो की तरफ चाय का कप लेकर आ गया… पिया ने चाय का कप उठाकर पंखुड़ी की तरफ बढ़ा दिया और पंखुड़ी ने मुस्कुराकर उस कप को पकड़ लिया…-” थैंक यू यार.. !बड़ी तलब लगी थी.. सच्ची ! वैसे पिया खाना कब तक मिलेगा..?”
” थोड़ी देर तो भूखी रह ले भुक्कड़ ! शादी भी करना है, और भूखी भी नहीं रहना!
तुझे पता है शादी वाले दिन पूरा दिन व्रत करना पड़ता है..!”
” मैं वैसी शादी करूंगी जिसमें व्रत नहीं करना पड़ता हो.. !”
समर ने धीरे से पिया की कमर पर अपनी कोहनी मारी.. और उसे चुप बैठे रहने का इशारा किया और पिया चुपचाप हाथ जोड़कर सामने मुंह घुमा कर बैठ गई….
क्रमशः
aparna….
वासुकी का पूरा ध्यान वहाँ बाँसुरी पर था, लेकिन वो जैसे ही जूस लेकर पलटा बाँसुरी अपनी जगह से गायब थीं…..
इतनी बड़ी पार्टी में इतने सारे लोगों के बीच उसने अपना पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ बाँसुरी पर रखा था, और अब वो अचानक गायब हो गयी थीं…
अब तक शांत बैठा वासुकी अचानक अपनी जगह
से उठा और तुरंत पार्टी हॉल की उस भीड़ में घुस इधर से उधर उसे ढूंढने लगा….
बाँसुरी जहाँ बैठी थीं वो उस जगह पर पहुँच गया… बाँसुरी ने इतनी देर से जो गुलाबी पर्स पकड़ रखा था वो वही पड़ा था…
तो बाँसुरी कहाँ चली गयी ? अगर वो पार्टी से निकल कर घर गयी होती तो अपना पर्स भी ले जा चुकी होती.. मगर पर्स यहाँ रखा था तो बाँसुरी कहाँ थीं….
पार्टी में एकतरफ गीत संगीत की महफ़िल सजी थीं… दूसरी तरफ लोग खाते पीते पार्टी का लुत्फ़ उठा रहें थे… पार्टी में घूम घूम कर शेखावत हर किसी से बातें कर रहा था.. उसी से पूछ लेना चाहिए सोच कर वासुकी उसे ढूंढने लगा…
पर ये देख कर उसका दिमाग सांतवे आसमान पर पहुँच गया की शेखावत का भी वहाँ कोई अता पता नहीं था…
ये शानदार होटल शेखावत का ही था.. यहाँ का चप्पा चप्पा उसका जाना चिन्हा था… अगर वो बाँसुरी को किसी ऐसे तहखाने में ले गया जिसके बारे में बाक़ी लोगो को पता ही न हो तो कोई उस तहखाने को कभी खोज तक ना पायेगा….
सोच सोच कर वासुकी के दिमाग की नसे तनने लगीं… माथे पर उलझन भरी रेखाएं लिए वो बाँसुरी को ढूंढने आगे बढ़ रहा था की नशे में धुत चरण उसके सामने पड़ गया….
“क्या हुआ वासुकी….. तुम भी बाँसुरी बजाना चाहते हो क्या … ?”
नशे से लटपटाती ज़बान में उसने जैसे तैसे कहा…और उसका वाक्य पूरा होने के पहले एक ज़ोरदार तमाचा उसका गाल लाल कर गया….
वासुकी ने ज़मीं पर गिरे चरण की कॉलर पकड़ी और उसे खींचते हुए बाहर की तरफ ले गया….
अगले भाग की झलक…
