
जीवनसाथी 2 भाग -24
समर और पिया को सभी ने अकेला छोड़ दिया था.. सभी जानते थे कि ये वक्त उन दोनों के लिए ही कठिन हो सकता है और इस से उन दोनों को ही अकेले निपटना होगा….
समर और पिया सरोवर कि सीढियों पर बैठे थे.. समर ने पिया का हाथ थाम रखा था और पिया अपने अंदर सब कुछ उससे कह देने की हिम्मत जुटा रहीं थी..
” पिया तुम्हें आज सारी बातें मुझे सच सच बतानी ही पड़ेंगी ! क्योंकि अब बहुत समय बीत चुका है और हम दोनों ही एक जगह ठहरे हुए हैं.. आगे नहीं बढ़ पा रहे ! अगर आज तुमने मुझे नहीं बताया तो तुम मुझे वापस अपनी जिंदगी में कभी नहीं देख पाओगी ! तुम्हें मेरे सर की कसम है, जो भी बात तुम्हारे मन में है, सब कुछ सच सच बता दो..!
पिया ने एक नजर समर पर डाली और फिर अपनी बात रखनी शुरू कर दी…. समर के सर की कसम वो खाली कैसे जाने दे देती.. ! अगर समर ने कसम न दी होती तो शायद आज भी वो चुप रह जाती..
“समर… मेरे पापा और मेरी माँ की भी लवमैरिज हुई थी.. मैं जानती हूं उस जमाने में यह सब कॉमन नहीं था… हालांकि उनकी लव मैरिज उनके घर वालों की इच्छा के अनुसार ही हुई थी लेकिन मेरे माता-पिता कि कास्ट एक होते हुए भी दोनों के प्रान्त अलग अलग थे.. .. एक उत्तर भारतीय तो दूजा दक्षिण भारतीय !यह बात मेरे घर वालों ने तुम्हारे घर वालों को साफ शब्दों में शुरू में ही बता दिया था.. और यह बात भी तुम्हारी मां को पसंद नहीं आई थी ! उन्होंने सबके सामने तो कुछ नहीं कहा था लेकिन हमारी सगाई होने के दो-चार दिन बाद जब शादी की तैयारियों की बातें चलने लगी थी, तब एक दिन उन्होंने मुझे मिलने के लिए बुलाया..
और मुझसे कहने लगी कि…
‘ अगर तुम यह चाहती हो कि तुम्हारी शादी समर से हो और पूरे रीति-रिवाज से हो तो तुम्हें उसके लिए मेरी एक शर्त माननी होगी…. ‘ मैं उस समय तुम्हारे प्यार में उस कदर डूबी थी कि मैं हर एक बात मानने को तैयार थी….
समर मैं ये नहीं कह रहीं कि तुम्हारी माँ उस वक्त गलत थी, शायद हमारा ही वक्त सही नहीं था.. !”
“पिया माँ ने क्या कहा तुमसे.. ? ऐसी कौन सी शर्त रख दी कि जिसे पूरा करने से आसान तुम्हें मुझसे शादी तोडना लगा..?”
अपने गले में अटक रहीं अपनी परेशानियों को निगलने के बाद पिया ने आत्मविश्वास से भरी अपनी आंखे सामने सरोवर में तैर रहें सारस पर स्थिर कर दी…
” समर !! आगे तुम्हारी मां ने कहना जारी रखा..’ देखो पिया हमें तुमसे किसी तरह की कोई शिकायत नहीं है! तुम एक बहुत अच्छी पढ़ी लिखी और सुंदर लड़की हो और हर तरह से हमारे बेटे समर के लिए काबिल हो, तुम दोनों की शादी से हमें कोई एतराज नहीं है ! जबकि हमारे घर पर जात पात बहुत ही ज्यादा मायने रखती है ! तुम राजपूत नहीं हो, इस बात को हम एक बार फिर भी नजरअंदाज कर देते लेकिन तुम्हारी मां दूसरे प्रांत की है..!
देखो पिया हम साफ साफ शब्दों में कह रहे हैं, हमें तुम्हारी मां के दक्षिण भारतीय होने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता बल्कि हम तो जानते हैं कि, दक्षिण भारतीय लोग पूजा पाठ में व्रत अनुष्ठान में हम से कहीं आगे रहते हैं लेकिन इस शादी में हमारे सारे रिश्तेदार भी तो आने वाले हैं.. और हमें हर किसी को जवाब भी देना होगा…
समर सिर्फ हमारा इकलौता बेटा नहीं बल्कि हमारे पूरे खानदान का इकलौता चिराग है ! उसके अलावा हमारी इस पीढ़ी में कोई बेटा नहीं हुआ, सारी बेटियां ही है… अब ऐसे में गांव से दूसरे शहरों से यहां तक कि विदेशों में रहने वाले भी हमारे सारे रिश्तेदार आने वाले हैं..
अगर यह सारे लोग तुम्हारी मां और उनके रिश्तेदारों का पहनावा और बोलना चालना देख कर हम से सवाल करेंगे तो हम कोई जवाब नहीं दे पाएंगे..?
वह तो हमारा लड़का ही शादी के लिए तैयार नहीं था और जब तैयार हुआ भी तो तुम्हारे साथ… तुमसे शादी तय होने की बात जब हमने अपने समाज के लोगों, अपने रिश्तेदारों को बताई तो जाने कितने दोस्त,कितने रिश्तेदार हमसे रूठ कर बैठ गए…! क्योंकि किसी ने अपनी बहन की बेटी को हमारी बहू के रूप में देख रखा था तो किसी ने अपनी जेठानी के बच्ची को..
समर के लिए पिछले 4 सालों से कितने रिश्ते आ रहे हैं कि हम तुम्हें बता नहीं सकते.. ! हमने रुपए पैसे धन दौलत सब के ऊपर समर की खुशी को माना है ! और इसीलिए तुम्हें अपनी बहू के लिए स्वीकार किया…! देखो बेटा शादी ब्याह सिर्फ एक लड़का और लड़की के बीच का बंधन नहीं होता, इसमें दो परिवार जुड़ते हैं.. और वह भी पूरी बराबरी से ! अब अगर तुम्हारे और समर की शादी में हमारे सारे रिश्तेदार आते हैं, और तुम्हारी मां को लेकर सवाल उठाते हैं, तो हम किस-किस का मुंह बंद करते फिरेंगे? देखो आज के जमाने में भी हमारे समाज में अपनी मनपसंद शादी करने वालों को अजीब नजर से ही देखा जाता है, तो सोचो तुम्हारे माता-पिता के वक्त की अपनी मनपसंद शादी को लोग किस नजर से देखेंगे ? हम जानते हैं तुम हमें गलत समझोगी, लेकिन हम सिर्फ इतना कहना चाहते हैं कि हमारी दो तीन बातें तुम मान लो तो राजी खुशी यह शादी निपट जाएगी…
पहली बात है कि तुम्हारे पिता के चाहे जितने रिश्तेदार तुम बुला लो लेकिन तुम्हारी माँ की तरफ के तुम्हारे कोई रिश्तेदार नहीं आएंगे..!
दूसरी बात तुम्हारी मां सिर पर गजरा नहीं लगाएगी..! और तीसरी बात तुम्हारी शादी के कार्ड में तुम्हारी मां का नाम नहीं रहेगा..!”
अपनी बात पूरी करते-करते पिया के आंसू बहने लगे… उसे यह बातें बताते हुए कितनी पीड़ा हो रही थी यह समर देख पा रहा था…
” अब बताओ समर क्या यह तीनों शर्तें मानने लायक थी..? मैं मानती हूं मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं, लेकिन वह प्यार मेरी मां के प्यार से ऊपर नहीं है ! मैं आज भी तुमसे कहीं ज्यादा अपनी मां से अपने पापा से प्यार करती हूं ! मुझे उनकी लव मैरिज से कोई दिक्कत नहीं है ! और ना ही मुझे उनके अलग-अलग प्रांतों के होने से दिक्कत है ! अगर मैं अपने पापा की तरफ के रिश्तेदारों से प्यार करती हूं,तो मैं अपनी मां के रिश्तेदारों से भी बहुत प्यार करती हूं..
मुझे मेरे दादा दादी चाचा चाची से जितना प्यार मिला, उतना ही मेरे नाना नानी मौसी मामा से प्यार मिला है ! और तुम नहीं जानते, मेरी शादी का सुनकर मेरे सारे रिश्तेदारों की खुशी इस कदर टूट कर बह रही थी कि सारे लोग मस्ती धमाल हंगामा करने के लिए पूरी तरह से तैयार होकर मेरे घर पहुंच चुके थे…
उनके लिए उत्तर भारतीय शादी देखना बहुत बड़ा आकर्षण था ! मेरी मौसी और मामी मेरी मां के साथ जी जान से मेरी शॉपिंग में लगी हुई थी, और बाकी लोग बाकी तैयारियों में लगे हुए थे! मेरे नाना जी बुजुर्ग होते हुए भी मेरी शादी के लिए सब कुछ छोड़कर सिर्फ मुझे आशीर्वाद देने आए थे और तुम्हें देखने आए थे …
उन सब के चेहरे की रौनक देखने के बाद मेरे घर पर किसी से यह कहने की हिम्मत ही नहीं हुई कि, आप सब मेरी शादी में नहीं आ सकते.. क्योंकि आप दूसरे प्रांत से हैं..
यहां तक कि यह सारी बातें मेरी मां से कहने की भी मेरी हिम्मत नहीं हुई ! अगर मैं उनसे कहती कि मैं तुम्हारे दक्षिण भारतीय होने के कारण मेरी होने वाली सास को परेशानी हो रही है तो मैं खुद शर्म से जमीन में आधी गड़ जाती क्योंकि यह कोई ऐसी बात ही नहीं थी जिसके वजह से तुम्हारी मां को बुरा लगना चाहिए था… !
और तीसरी शर्त कि मेरी ही शादी के कार्ड में मेरी मां का नाम ना हो…
इससे बढ़कर दुख एक बेटी की जिंदगी में क्या हो सकता है… उसके सबसे खूबसूरत पलों का यादगार वेडिंग कार्ड उसकी मां के नाम के बिना क्या अधूरा नहीं रह जाता..?
बस तभी मैंने सोच लिया की मुझे वही शादी का कार्ड छपवाना है जिसमें मेरी मां का नाम भी शान से लिखा जाएगा…!
इनमें से कोई भी ऐसी बात नहीं थी कि मैं अपनी मां से कह पाती, और ना ही तुमसे कुछ कहने की हिम्मत थी ! तुम उस वक्त अपने काम में भी मसरूफ थे, तुम्हारे पास इतना वक्त नहीं था कि मैं इतनी सारी बातें तुम्हें बताकर तुम्हारे साथ सलाह मशविरा कर सकती थी, हालांकि मैंने कोशिश की थीं और तुम्हें एक दिन फोन किया लेकिन तुम से बात नहीं हो पाई…
तुम हमारी शादी के ठीक 5 दिन पहले किसी बहुत जरूरी काम से दिल्ली चले गए थे… उस वक्त पर मैंने तुम्हें बहुत याद किया.. !
क्योंकि मैं अकेली किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पा रही थी… लेकिन बहुत सोचने के बाद मुझे यही लगा कि तुम शायद मेरी बातों का सही अर्थ नहीं समझ पाओगे ! तुम्हें शायद यही लगेगा कि तुम्हारी मां सही है,और मैं गलत हूं! और बस इसीलिए तुमसे भी बिना कुछ कहे मैंने ही अपने कदम पीछे हटा लिए !
मैं जानती थी कि सगाई तोड़ने का सारा इल्जाम मेरे सर लगेगा… ! तुम भी मुझसे रूठ जाओगे और बाकी लोग भी..
लेकिन दिल में कहीं ना कहीं एक आस थी कि तुम मुझसे एक बार कारण पूछने जरूर आओगे! हालांकि उस वक्त तुम इतने व्यस्त थे कि तुमने कारण पूछना भी जरूरी नहीं समझा.. तुम अपनी जिंदगी में और मैं अपनी जिंदगी में व्यस्त होते चलें गए …
मैं जानती थी इस सगाई के टूटने से मेरे रिश्तेदारों को बहुत दुख पहुंचा था, लेकिन उन्हें ना आने का कहकर मैं जो दुख देने वाली थी उससे सगाई टूटने का दुख कम ही था..! क्योंकि उन सब के दिमाग में यह चल रहा था कि इस वक्त मैं और तुम बेहद दुखी हैं ! और कोई ना कोई बात हम दोनों के बीच हुई है जिसके बाद मैंने सगाई तोड़ी है इसलिए सारे रिश्तेदार मिलकर मुझे सांत्वना देते रहें और अपना दुख भूल गए…
अपने उन सारे प्रिय रिश्तेदारों का चेहरा देखकर मैं भी अपना दुख भूलने की कोशिश करने लगी…
अपनी मां के सीने से लग कर मैं सुबक -सुबक कर रोती रही लेकिन उनसे कुछ कह नहीं पाई, और आज भी मैं उनसे कुछ नहीं कह पाऊंगी समर…
इसलिए तुमसे हाथ जोड़कर कहती हूं कि, तुम अपनी मां की मर्जी से किसी राजपूत लड़की से शादी कर लो…
क्योंकि अगर आज भी हमारी शादी की बात होती हैं तो मैं जानती हूं तुम्हारी मां की शर्त वापस वही होगी जो पहले थी और मैं उस बात के लिए बिल्कुल भी मंजूरी नहीं दूंगी….. !”
अपने दृढ़ निश्चय के साथ पिया सामने बहते पानी को देखती रहीं….
समर ने अपना हाथ बढ़ा कर उसकी हथेलियां थाम ली……
” तुमने यह कैसे सोच लिया पिया कि तुम्हारी समस्या मैं नहीं समझ पाऊंगा..? जैसे मेरे लिए मेरी मां दुनिया में मुझे सबसे प्यारी है, वैसे ही तुम्हें भी तो तुम्हारी मां सबसे प्यारी होगी ना ? और तुमने यह कैसे सोच लिया कि तुम्हारी मां मेरे लिए कुछ भी नहीं है… ! अगर तुमने उसी वक्त मुझे बता दिया होता तो मैं और तुम मिलकर इस बात का कोई रास्ता निकाल लेते !”
“और रास्ता यही था कि तुम अपनी मां से बात करते और उन पर दबाव डालते कि वह अपनी शर्तें हटा लें, लेकिन उस स्थिति में क्या वह राजी खुशी हमारी शादी के लिए तैयार होती..?”
” देखो पिया ऐसी परिस्थितियों में किसी ना किसी को तो दुखी करना ही पड़ता है… !
मैं मेरी मां को अच्छे से जानता हूं…
हां यह मानता हूं कि वो थोड़ी रूढ़िवादी हैं, और समाज के चार लोगों को देखकर सुनकर चलने वालों में से हैं.. ! लेकिन यह भी जानता हूं कि, उनके लिए उनके बेटे की खुशी ही सबसे ज्यादा मायने रखती है..! और पिछले साल भर से उन्होंने मुझे जिस कदर तड़पते देखा है, अब वह शायद अपनी भूल पर पछता भी रही है..! और इसीलिए उन्होंने मुझे खुद बुला कर यह सारी बातें पहले ही बता दी थीं… !
उनके सब कुछ बताने के बाद भी मैंने तुमसे कुछ नहीं कहा था..! मैं जानना चाहता था कि तुम किस लेवल तक धैर्य रख सकती हो, और सच बोलूँ पिया, तो आज मुझे इस बात पर गर्व है कि मैंने तुम जैसी लड़की से प्यार किया..!
मेरी नजर में मेरी मां की इज्जत बनी रहे इसलिए तुमने आज तक मुझसे कुछ नहीं कहा! आज भी जब मैंने तुम पर अपनी कसम चढ़ाई है तो तुम मजबूरी में मेरे सामने सारी बातें कबूल कर पाई हो.. ! मैं जानता हूं ऐसी लड़की कभी मेरे पेरेंट्स को दुखी नहीं करेगी..!
पिया मेरी मां ने मुझसे किसी बात के लिए माफी नहीं मांगी क्योंकि शायद उन्हें जो उस वक्त सही लगा उन्होंने वह तुमसे कह दिया, लेकिन वक्त के साथ धीरे-धीरे उन्हें समझ में आ गया कि उनकी मांगे कितनी कमजोर थी और नाजायज भी ! और इसीलिए उन्होंने अपनी भूल को सुधारते हुए मुझे सब कुछ बता दिया…
लेकिन मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा था…!
” वो कहते हैं ना अपने समय से पहले कभी कोई मनोरथ सफल नहीं होता ! बस तुम दोनों का शादी का वक्त यही तय था इसीलिए उसके पहले तुम लोगों का लगन होते-होते रह गया..!”
बांसुरी की आवाज सुनकर वह दोनों अपनी जगह से खड़े हो गए और पिया आगे बढ़कर बांसुरी के गले लग गई…
उसकी आंखों में आंसू झिलमिला रहे थे, उसी वक्त उसे सामने से अपनी मां और समर की मां एक साथ आते हुए नजर आए..! उन दोनों को साथ साथ हंसते मुस्कुराते देखकर पिया के चेहरे का सारा दुख बह गया और उसने आगे बढ़ कर उन दोनों के ही पैर छू लिए …
” पिया !! मेरी मां ने ही तुम्हारी मां तुम्हारे पापा को फोन करके बुलाया है.. और सिर्फ तुम्हारे पेरेंट्स ही नहीं तुम्हारे दोनों पक्ष के रिश्तेदार भी यहां आ चुके हैं….!”
समर के ये कहते तक में पिया ने देखा दोनों ही तरफ के रिश्तेदार हँसते मुस्कुराते उन लोगों तक चलें आ रहें थे…
इसके बाद देखते ही देखते सब कुछ होता चला गया..
समर ने पिया का हाथ थामा, और उसे बड़े प्यार से वहां दूर बने मंडप की तरफ ले गया….
वैसे तो पिया और समर के माता-पिता यही चाहते थे कि आज एक बार फिर सगाई करके कुछ दिनों बाद की शादी की तारीख निकाली जाती लेकिन समर चाहता था कि बांसुरी के यहां से जाने से पहले ही उसके सामने और उसके आशीर्वाद से उसका और पिया का ब्याह हो जाए और इसीलिए उसने सबको आज के लिए ही मना लिया….
सभी बड़ों के आशीर्वाद से समर और पिया वहां एक दूजे के साथ परिणय सूत्र में बंध गए….
मंदिर से सारे लोग गाड़ियों में सवार होकर महल की तरफ निकल गए…
महल के किनारे वाले बगीचे में जहां राजा साहब का जनदर्शन कार्यक्रम हुआ करता था.. सुबह से ही समर की शादी की तैयारियां चल रही थी…. ! बड़े-बड़े रेशमी शामियाने टांगे गए थे, उनमें बड़े-बड़े झूमर, झाड़फानूस लटक रहे थे….
जगह-जगह गोलाकार आकृति में कुर्सी और टेबल गुलाबी रेशमी कपड़ों से ढके सजे हुए थे..! हर एक टेबल में बीच में बड़ी बड़ी सुंदर आकार की खुशबू वाली मोमबत्तियां लगी हुई थी..! कुछ कुछ दूरी पर लंबे चौड़े आदम कद फूलों के गुलदस्ते रखे थे जिनमें उसी समय मंगवाए गए ताजे फूल महक रहे थे….
जगमगाती लड़ियों से सुसज्जित शामियाना झिलमिला रहा था….
मेहमानों का भी आना शुरू हो चुका था और इसके साथ ही महल के सारे लोग एक के बाद एक लंबी लंबी गाड़ियों में आकर उस शामियाने में दाखिल होते गए…
शादी भले ही बहुत जल्दबाजी में की गई थी लेकिन शादी किसी ऐसे वैसे कि नहीं राजा अजातशत्रु के सबसे खास उनके महामंत्री समर सिंह की थी…
हालाँकि समर नई पीढ़ी का नौजवान लड़का था.. और उसे शादी ब्याह में ढेर सारा रुपया बहाना कभी भी पसंद नहीं था ! और इसलिए वह अक्सर अपनी मां से यही कहा करता था कि वह कोर्ट में शादी करके बस एक रिसेप्शन दे देगा ! लेकिन उस समय कौन जानता था कि एक दिन वाकई समर की शादी ऐसे ही होगी कि बस मंदिर में फेरे हुए और रिसेप्शन दे दिया…
दूल्हा दुल्हन को बड़े प्यार से सर के ऊपर चुनरी से ढंक कर स्टेज तक ले आया गया….
पिया और समर स्टेज पर खड़े थे और एक-एक करके दोनों के ही घरों के रिश्तेदार आते जा रहे थे…
समर के घर परिवार की औरतों को देख कर पिया आश्चर्य में डूबी खड़ी रह गई… उसने समर की तरफ देखा और समर ने मुस्कुरा कर अपनी पलकें झपका दी…
वैसे तो राजपूतों की शादी में अमूमन महल वासी औरतें रेशमी पोशाक और बोरला, नथ, चौरस कंगन जैसे राजपूती गहनों में ही सजा करती थी, लेकिन आज का दृश्य अलग सा था…!
समर की मां उसकी मौसी, बुआ और बाकी सारे रिश्तेदार औरतें प्योर सिल्क की महंगी महंगी साड़ियों में सजी थी..! उनके जेवर भी पारम्परिक राजपूती गहनों से इतर दक्षिण की झलक लिए हुए थे…
चौड़े चौड़े गलबन्द हारों में कहीं लक्ष्मी विष्णु विराजमान थे तो कहीं राधा कृष्ण… लगभग सभी औरतों ने पूरे कान को ढकने वाले बड़े-बड़े से डिजाइनर झुमके पहन रखे थे… माथे पर बड़ी-बड़ी गोल लाल बिंदिओं के अलावा सभी के बालों में मोगरे का गजरा महक रहा था…
इन सब को देखकर पिया आश्चर्य में डूबी खड़ी थी कि तभी पंखुड़ी ने धीरे से उसकी कोहनी में छू कर उसे दूसरी तरफ देखने का इशारा किया…
पिया ने मुंह फेर कर दूसरी तरफ जैसे ही देखा, आश्चर्य से उसकी आंखें वापस चौड़ी हो गई…
क्योंकि उसकी मां और बाकी सारी रिश्तेदार औरतें पारंपरिक राजपूती परिधान ‘पोशाक’ में बहुत खिल
रही थी….
पिया की आंखों में आंसू छलक आए… उसने समर की तरफ देखा समर ने उसे देखा..
पिया ने धीमे से समर को “थैंक यू” कह दिया….
मुस्कुराती हुई वह शाम ढल गई…
लेकिन जाते-जाते समर और पिया को एक ऐसे अटूट बंधन में बांध गई, जिसके बाद दोनों ने ही अपने सारे गिले शिकवे भुला कर पूरे मन से एक दूसरे को अपना लिया था…
पिया की औपचारिक विदाई भी महल के ही एक हिस्से से करने की बात चल रही थी कि निरमा ने आगे बढ़कर बात संभाल ली और पिया की विदाई निरमा के घर से करने के बाद पिया के माता-पिता बाकी सारे रिश्तेदार और पंखुड़ी वहां से पिया से गले लग कर चले गए…
रोती बिलखती पिया ने जल्दी ही वापस आने का वादा किया और अपने ससुराल में पहला कदम रखने की रीत पूरा करने आगे बढ़ गई……
अपने सास-ससुर के पैर छू कर पिया की गृह प्रवेश की रस्म भी पूरी हो गयी और वो घर के भीतर दाखिल हो गई…
उसकी चुनरी से बंधा समर भी उसके साथ ही था.. !
इतने दिनों से पिया और समर के बीच की खटास देख कर, समर की मां के मन में चल रहा द्वन्द भी समाप्त हो चला था.. और उन्हें समझ में आ गया था कि उनके बेटे की खुशी ही उनके लिए वास्तविक खुशी थी ! और इसीलिए उन्होंने भी पिया को पूरे मन से अपना लिया था… !
खाना-पीना निपटने के बाद पिया को उसके कमरे में पहुंचा दिया गया….!
पिया अपने कमरे की खिड़की पर खड़ी बाहर निकला हुआ चांद देख रही थी कि तभी समर कमरे में चला आया…
अंदर आकर उसने कमरे का दरवाजा धीरे से बंद किया और धीमे कदमों से चलता हुआ पिया के ठीक पीछे जाकर खड़ा हो गया..!
पिया खिड़की पर खड़े कुछ गुनगुना रही थी और समर ध्यान से उसकी गुनगुन को समझने की कोशिश कर रहा था….
उसने धीरे से पिया के कंधे पर अपना सिर रख दिया..!
पिया ने पहले मुस्कुरा कर उसकी तरफ देखा और वापस बाहर निकले चाँद को देखकर गुनगुनाने लगी…. समर के हाथ अब पिया के चारों तरफ लिपटने लगे थे…
” कब से इंतजार कर रहा था इस घड़ी का..?”
” बस इसी घड़ी का इंतजार था आपको.. शादी का नहीं..?”
” अरे..!! बिना शादी के तुम इतना करीब आने कब देती?”
” मतलब मैं अगर आने दे देती तो, खुद चले आते.. थोड़ी भी लाज शर्म संकोच नहीं आपमें मंत्री जी.. !”
” हाय आपके इस ‘मंत्री जी’ ने तो जान ले रखी थी… जिस दिन से नाराज हुई थी, मुझे मंत्री जी बोलना छोड़ दिया था तुमने!”
” और क्या छोड़ दिया था..?”
” सब कुछ तो छोड़ दिया था.. अब जब मुझे ही छोड़ दिया तो फिर..?”
पिया ने आगे बढ़कर समर के होठों पर अपनी उंगली रख दी जिसे समर ने झुककर चूम लिया…..
पिया ने शर्मा कर अपनी आंखें झुका ली और समर ने उसके चेहरे को थाम कर उसकी तरफ देखते हुए उसकी ओर बढ़ना शुरू किया ही था कि फोन की घंटी बजने लगी…
फोन की रिंग सुनते ही पिया ने समर का हाथ झटक दिया और दूसरी तरफ मुंह फेर कर खड़ी हो गई..
” देखा मैं जानती थी… आज के दिन भी आपको वक्त नहीं मिलेगा, अपनी बीवी के लिए ! आने लगे आपके फोन! जाइये फ़ोन उठाइये.. देखें कौन जीवन मृत्यु के बीच झूला झूल रहा है..?”
समर ने फोन उठाकर देखा और मुस्कुरा कर पिया के पास चला आया… उसने फ़ोन पिया के हाथ में रख दिया…
” डॉक्टर साहिबा.. मेरा नहीं आपका फोन बज रहा है..!”
पिया ने दातों से अपनी जीभ काट ली..
माथे पर अपना ही हाथ मार कर उसने अपना फोन उठा लिया ! दूसरी तरफ से अस्पताल की स्टाफ नर्स बोल रही थी!
” डॉक्टर पिया, एक इमरजेंसी केस था इसलिए आपको थोड़ी देर के लिए आना पड़ेगा..!”
” पर केस क्या है..? और सिस्टर मैं तो आज छुट्टी पर हूं..!”
” हां आपने सुबह छुट्टी डाली थी मैम, लेकिन इमरजेंसी केस आ गई है..! एक बच्चे की पॉइज़निंग का केस है, और फिलहाल ड्यूटी डॉक्टर को बुखार आ जाने की वजह से वो अभी अभी घर के लिए निकले हैं…. ! उन्होंने कहा तो था कि कोई इमरजेंसी केस आ गया तो, मुझे बुला लेना लेकिन इस वक्त फोन करने पर वह उठा नहीं रहे हैं.. ! सेकंड ड्यूटी डॉक्टर आज आप ही थी मैम..!”
” बच्चा कितना बड़ा है..? और कौन सी पॉयज़िनिंग हुई है…?”
” 14 साल की बच्ची है मैम ! शायद फिनायल पी कर आई है..?
” ओह्ह.. ! ठीक है स्टमक वॉश की तैयारी करो… मैं तुरंत पहुंच रही हूं..!”
पिया ने माफी मांगने वाली नजरों से समर की तरफ देखा और समर ने आ कर उसे प्यार से गले से लगा लिया…
” तुम फटाफट जाकर कपड़े चेंज करो.. मैं गाड़ी निकलवाता हूं..!”
” आप परेशान मत हों मंत्री जी, मैं ड्राइवर के साथ चली जाऊंगी..!”
समर ने मुस्कुरा कर न में गर्दन हिलाई और ड्राइवर को गाड़ी निकालने के लिए कहने लगा..
सिर्फ 10 मिनट में ही पिया अपना भारी भरकम सा जोड़ा और गहने उतार कर सादी सी एक जींस के ऊपर कुर्ती डालकर और बालों को ऊंचा पोनीटेल में बांधकर तैयार होकर बाहर चली गई…
हाथों में आज की ही पहनी ताजी-ताजी चूड़ियां थी इसलिए उसने उन्हें नहीं उतारा..!
उसे वापस अपने डॉक्टरी रूप में देखकर समर मुस्कुरा कर उसके पास चला आया…
उसके चेहरे को हाथ में थाम कर समर ने उसके माथे को चूम लिया…
” जाओ अपने इन्हें हाथों से उसके जीवन को बचा लो..!”
अपना बैग उठाए पिया कमरे से बाहर निकल गई और समर भी उसके पीछे निकल कर दरवाजा बंद कर उसके साथ चलने लगा..
” आप कहां चल दिए..?”
” आप ही ने तो कहा अपने ड्राइवर के साथ जाएंगी.. तो अब शादी के बाद आपका पर्सनल ड्राइवर तो मैं ही हूं..!”
” नहीं समर प्लीज आप परेशान मत हो..! आप आराम कीजिए! क्योंकि कल फिर दिन भर आपको काम में व्यस्त रहना है! मैं जल्दी से काम निपटा कर आ जाऊंगी..!”
” हम जल्दी से काम निपटा कर आ जाएंगे… समझी..! चलो..!”
पिया की बाहों में अपनी बाहें डालें समर ने कदम आगे बढ़ा दिये….
आखिर अब दोनों ही जीवन साथी थे और उन्हें अपने जीवन के इस सफर में यूं ही साथ साथ आगे जो बढ़ना था…..
क्रमशः
aparna….
“
अगले एपिसोड की झलक…..
