जीवनाथी-2 भाग-2

जीवनसाथी सीज़न 2 – 2

   “क्यों भई मंत्री जी के घर कॉल लगा या नहीं.. ?”

थाने में एक बार फिर उस नए सनकी ऑफिसर की आवाज़ गूंज गयी…

  “लग गया है हुज़ूर,  रिंग जा रही है,  ये ये उठ भी गया.. !” दूसरी तरफ से भुवन के फ़ोन उठाते ही कॉन्स्टेबल ने उसे तुरंत थाने पहुँचने का फरमान सुना दिया..
उधर से भुवन की रिरियाने की आवाज़ सुन अनिर्वाण ने फ़ोन ले लिया…

“क्यों बे ! थाने से फ़ोन जाने पर तुम साले वहाँ से एक्सक्यूज़ दे रहे हो.. ?”

“नहीं सर ! हम बस ये कह  रहे थे की घर पर बहुत बड़ी पार्टी चल रही है.. शहर के गणमान्य लोग आये हुए हैं तो इस वक़्त जरा निकलते नहीं बन पा रहा.. अगर आप इजाज़त दें तो सुबह सुबह आ जायेंगे आपके दर्शन पाने.. !”

“मै कोई मंदिर का घंटा लगता हूँ जो सुबह सुबह बजाने आओगे.. चलो ठीक है फिर.. सुबह ही आओ तुम.. मंत्री जी को साथ लेकर आना.. !”

“उनकी क्या जरूरत सर,  हम ही उनका सारा काम देखते हैं… !”

“उनकी तिजोरी का नंबर भी जानते हो क्या.. ?”

“आप क्या कह रहे हैं सर.. ?”

“वही कह रहे जो तुमने सुना.. भई तुम ही ने कहा की उनका सब काम देखते हो तो हमें लगा उनकी तिजोरी भी.. खैर छोड़ो…
.. सुबह पहुँचों तुम और आते आते शहर के सबसे अच्छे जूते के शो रूम से हवाई चप्पल खरीद लाना.. “

भुवन को सामने वाले की फरमाइश बड़ी अजीब लगी लेकिन उसने ज्यादा कुछ पूछे बगैर हाँ कह दिया..

अनिर्वाण के फ़ोन रखते ही कॉन्स्टेबल पूछ बैठा…

“हुज़ूर आपको चप्पलें चाहिए तो हम ले आये.. ?”

“नहीं बिलकुल नहीं… हम जिसे तबियत से जूतियाते हैं न उसी से उसी के साइज का चप्पल मंगवाते हैं.. समझे.. उससे चप्पल काहें मंगवा रहे है.. !”

“उसी को पीटने.. ?”

“बिलकुल सही पकडे हो बाबूराव.. !”

मुस्कुरा कर अनिर्वाण अपनी कुर्सी से उठा और टहलता हुआ बाहर निकल गया….

   बाहर हेड कॉन्स्टेबल थाने के बहरी कम्पाउंड में सिगरेट फूँक रहा था,  अनिर्वाण कुछ गुनगुनाते हुए उसके पास  पहुँच गया…

    मै जिंदगी का साथ निभाता चला गया..
    हर फ़िक्र को धुंए में उड़ाता चला गया….

    जो मिल गया उसी को मुक़द्दर समझ लिया
    जो खो गया मैं उसको भुलाता चला गया
    मैं ज़िंदगी…

  अनिर्वाण को आते देख उसने तुरंत सिगरेट छिपाने  की कोशिश की जिसे लपक कर उसने पकड़ लिया…

“अरे डनहिल है भई, छिपा क्यों रहे हैं.. ! वैसे रफ़ी साहब कि आवाज़ और साहिर साहब के अल्फ़ाज़ गज़ब कहर ढाते हैं.. क़भी तो लगता है हमारे ही जज्बात बयाँ कर दिए हैं शायर ने.. “

  कॉन्स्टेबल को लगा अनिर्वाण को सिगरेट से कोई तकलीफ नहीं है उसने अपनी उंगलियों में थाम रखी सिगरेट उसकी तरफ बढ़ा दी…

“नहीं मै नहीं पीता.. !न मैं सिगरेट पीता हूँ न शराब ! ये सब कमज़ोरों के नशे हैं.. मुझे तो मेरे काम का ही भरपूर नशा है…. आधी रात ऑफिस से लौटने के बाद डेढ़ घंटा जिम में पसीना बहाता हूँ,  उसका जो नशा चढ़ता  है न उसकी बराबरी तुम्हारी डनहिल नहीं कर सकती… ! खैर.. मुझे किसी के पीने से भी कोई दिक्कत नहीं बस जब तक उसके धुंए से किसी और को कोई दिक्कत न आये.. “

बोलते बोलते ही अनिर्वाण के स्वर बदलने लगे थे..

“बस सर यहीं सोच कर यहाँ बाहर एकांत में पी रहे थे.. !”

अनिर्वाण की एक भौंह ज़रा ऊँची उठ गयी उसने इधर उधर देखा, आसपास लोग थे, कुछ आना जाना भी कर रहे थे.. !

  अभी वो और कुछ कहता की अनिर्वाण का एक ज़ोरदार तमाचा उसका चेहरा लाल कर गया…

” एक्टिव स्मोकर से कहीं ज्यादा पैसिव स्मोकर कैंसर से मर रहे है, और तुम साले यूँ सिगरेट फूँक फूँक कर स्वयं यमदूत बने लोगों का स्वर्ग का टिकट काट रहे हो.. अबे जब मालूम है की कुछ होना जाना नहीं है, बस फेफड़े फुकेंगे तो क्यों फूंकते हो.. अब ये मत कह देना की महादेव के भक्त है वरना भगवान का नाम बदनाम करने के जुर्म में दूसरा थप्पड़ खा जाओगे.. !”

सामने खड़े कॉन्स्टेबल ने तुरंत सिगरेट बुझाई और सॉरी सर कह चुप खड़ा रह गया…

“आइंदा अगर फूंकने का मन हुआ भी न तो ऐसी जगह जा कर फूंकना जहाँ आसपास न इंसान हो न जानवर.. मसान में बैठ कर फूंका करो, समझे !!”

“जी सर !”

“चलो फूटो अब तुम.. ! बाबूराव… अब मै निकल रहा हूँ,  थोड़ा घर जाकर आराम कर लिया जाये…

“लेकिन सर आपने तो मंत्री जी को बुलवा रखा है…. वो यहाँ आपका इंतज़ार करेंगे !”

“फिर ? करने दो इंतज़ार… किसी महापुरुष ने कहा भी है.. जो मजा इंतज़ार में है वो दीदार में कहाँ.. ?”

  अनिर्वाण तेज़ क़दमों से थाने की सीढ़ियां उतर रहा था की सामने गार्डनर को कुछ सलाह देती लीना अचानक से मुड़ कर सीढ़ियों पर ऊपर की ओर बढ़ी और सामने से आते अनिर्वाण से टकरा गयी…
   संतुलन बिगड़ कर गिरने से पहले ही उसे अनिर्वाण ने थाम लिया.. यूनिफॉर्म में लीना को देख वो ये तो समझ गया की लड़की इसी विभाग से है.. उसे ठीक से खड़ा करने के बाद वो बिना उसकी ओर देखें ही निकल गया…
   उस पर एक उड़ती  नज़र डाल लीना भी अंदर चली गयी…

” क्या बात है ? आज नाईट स्टाफ अब तक थाने में मौजूद है वरना तो जब आओ एक आध कॉन्स्टेबल को छोड़ बाकि स्टाफ घर निकल चुका होता है.. !”

  लीना ने सारे स्टाफ को एक नजर देख हाजिरी रजिस्टर देखी और अंदर केबिन में कुछ जरुरी फाइल्स लेने चली गयी..
  बाहर अनिर्वाण ने बाबूराव को बुलाया..

“बाबूराव ये मानुषी चिल्लर जैसी दिखने वाली पुलिस वाली कौन है .. ?

” साहब चिल्लर नहीं ये पूरा दो हजार का कड़क नोट है…  असिस्टेंट कमिश्नर है लीना देवराज !”

“गज़ब !!लेकिन ट्रेनिंग के दौरान कहीं दिखी नहीं.. खैर हो सकता है हमसे जूनियर कैडर की होंगी.. !चलो ये तो बढ़िया है बाबूराव…
.. सफर अच्छा कटता है जब साथ चलने वाला साथी मजेदार हो… “

“सर बहुत कड़क है.. लफंगो को यूँ मसल के रख देती है जैसे मच्छर !गुस्सा तो सर नाक पे रहता है हमेशा.. !”

“अरे बाबूराव मै उस चिल्लर की नहीं तुम्हारी बात कर रहा था यार, तुम्हारे साथ चलते हुआ मेरा यहाँ का सफर मजेदार होने वाला है..

बाबूराव ने शरमा कर आपने बालों पर हाथ फेर लिया और अनिर्वाण मुस्कुरा कर कुछ गुनगुनाते हुए आगे बढ़ गया…

      ग़म और खुशी में फ़र्क न महसूस हो जहाँ
     मैं दिल को उस मुक़ाम पे लाता चला गया
     मैं ज़िंदगी……

******

   पिया आपने कमरे में बैठी अपनी मोटी मोटी किताबों में सर खपा रही थीं की उसका फ़ोन बजने लगा…..
  उसने देखा तो फ़ोन उसकी होने वाली मौसी सास का था..
बेमन से पिया ने फ़ोन उठा लिया..

” प्रणाम मौसी जी !”

“खुश रहो ! पिया क्या कर रही हो अभी.. ?

  पिया को लगा कहीं घर पर हूँ ये कहने पर ये चिपकू फैमिली उसके घर मिलने न आ जाये.. उसने बात घुमाने की कोशिश की..

“जी बस हॉस्पिटल में थीं.. कुछ केस था.. !”

“हॉस्पिटल में कहाँ  हो.. ?”

पिया के दिमाग की घण्टी बजने लगी.. कहीं ये लोग अस्पताल तो नहीं पहुँच गए… ?

“आप हॉस्पिटल आई हैं क्या मौसी जी.. ?”

“बस समझो पांच मिनट में पहुँच जायेंगे.. देखो न देखते देखते ही शादी के दिन कैसे करीब आते जा रहे हैं,  इसलिए भावेश से हम सब ने कहा की अब शॉपिंग शुरू कर ली जाये.. आज वो भी टाइम निकाल कर  तैयार हो गया तो हमने सोचा की तुम्हें तुम्हारे अस्पताल से ही उठा लेते हैं… ठीक है न.. !”

“नहीं मौसी जी.. मै अस्पताल में बिलकुल भूत लग रही हूँ,  मुझे फ्रेश होने की बहुत ज़रूरत है.. आप ऐसा करें की आप लोग शॉपिंग के लिए पहुंचिए,  मै सीधे वहीँ आपको मिलती हूँ.. !”

“पक्का.. ? तुम्हें दिक्कत तो न होगी वहाँ तक अकेले आने में.. ?”

“नहीं नहीं,  बिलकुल नहीं.. आप लोग पहुँच कर शॉपिंग शुरू कीजिये मै वहीँ पहुँचती हूँ.. वैसे कहाँ आना है मुझे.. ?”

“24 मॉल जा रहे हैं हम लोग,  वहीँ ‘मीना बाजार ‘ आ जाओ.. ठीक है ? जल्दी पहुंचना, वरना हमारी संगत में तुम्हारा भावेश बोर होने लगेगा.. !”

तुम्हारा भावेश सुन पिया का मुहँ कसैला हो गया..एक फीकी सी हंसी हंस कर उसने फ़ोन रखा और फटाफट तैयार होने लगी…

  तैयार होने के बाद बार बार उसका मन कर रहा था की किसी तरह समर तक ये खबर पहुँच जाये की वो शॉपिंग के लिए जा रही है..
..लेकिन वो बतायें कैसे.. ? वो समर से नाराज थीं,  इतनी नाराज कि उसने उससे शादी तोड़ ली थीं.. और उसके बाद उसकी माँ ने रिश्तों कि झड़ी लगा दी थीं..
भावेश और उसकी फैमली उसकी माँ को बहुत पसंद आ गए थे और बातों ही बातों में पिया समझ भी न पायी और बात यहाँ तक पहुँच गयी थीं कि बस महीने भर बाद उसकी भावेश से सगाई थीं और उसके दो महीने बाद शादी…
   पिया ने एक दो बार अपनी माँ से बताने कि कोशिश भी कि थीं कि उसे भावेश उतना पसंद नहीं है लेकिन उसकी माँ ने उसकी बात सुने समझे बिना उसे अपनी बात समझानी शुरू कर दी थीं…

और इसी सब में उसका और समर का मसला किसी ठन्डे बस्ते में दब कर रह गया था…

अब भी रातों में सोते वक़्त अक्सर वो समर के साथ गुजरे पलों में खो जाया करती थीं…
कितने बेसब्रे थे मंत्री जी..
  ज़ाहिर है वक़्त कि तो हमेशा ही उनके पास कमी हुआ करती थीं,  जब मिलते थे उसे कस कर अपने सीने से लगा लिया करते थे….
… लेकिन जैसे ही थोड़ा भी आगे बढ़ने को होते कि मंत्री जी का मरदूद फ़ोन घनघना उठता था और एक हाथ से पिया कि ज़ुल्फ़ों से खेलता समर दूसरे हाथ में फ़ोन थामे बातों में लग जाता और फिर कब उसी फ़ोन में बातें करता वो पिया का माथा चूम उसे बाई बोल निकल जाता वो खुद नहीं समझ पाती…

  कितना व्यस्त रहता था वो… इसी लिए तो वो उससे अलग हो गयी थीं, बावजूद आज भी वो उसकी छुअन के लिए वैसे ही तड़प उठती थीं जैसे तब…

अपने फ़ोन कि गैलरी में समर कि तस्वीरें देखती पिया तैयार होकर निकलने ही वाली थीं कि उसके दिमाग में घंटी बजी….

   उसने अपनी एक सेल्फी खींची और अपने फ्रेन्डबुक के प्रोफाइल पर उस तस्वीर के साथ कैप्शन डाल दिया…
      24 मॉल में वेडिंग शॉपिंग के लिए जाते हुए…

  उसने फ़ोन बंद कर पर्स में डाला और मुस्कुरा कर घर के दरवाजे को लॉक कर बाहर निकल गयी…

हालाँकि उसे उम्मीद बहुत कम थीं कि समर उसका फ्रेन्डबुक अकाउंट कि अपडेट देखेगा लेकिन ये उसका भरम था…
   समर के फ़ोन पर जैसे ही पिया के नाम का नोटिफिकेशन आया उसने झट मोबाइल खोला और देख लिया… पिया शॉपिंग जा रही है वो भी अपने होने वाले पति के साथ…
   मुस्कुरा कर समर ने अपना फ़ोन जींस कि जेब में डाला और अपनी गाड़ी कि तरफ बढ़ गया.. इत्तेफाक से आज उसके पास भी वक़्त था और आग तो दोनों तरफ बराबर ही लगी थीं….

क्रमशः

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