जीवनसाथी- 2/39

जीवनसाथी -2 भाग -39 “अंडमान स्पेशल “

      पिया अपना गाना खत्म कर खुशी से समर की तरफ देखने लगी.. लोग बहुत ख़ुशी से उसका उत्साह बढ़ाने लगे और पूरे हॉल में तालियों की गूंज गूंजने लगी |
    वहां बैठा गायक खुद उठकर पिया के पास चला आया, लेकिन वह पिया के कंधे पर हाथ डालता उसके पहले ही समर एक छलांग में पिया के पास पहुंच गया….

आर्केस्ट्रा के गायक ने पिया की तारीफ करते हुए समर को देख कर कहा…-”  इट्स रियली वेरी वेरी ब्यूटीफुल..!”

” व्हाट..?”

समर ने चिढ़कर जैसे ही जवाब दिया तुरंत गायक ने  अपनी बात संभाल ली..

” हर वॉइस… हर वॉइस इज वेरी ब्यूटीफुल..!”

” या आई नो… शी इज माय ब्यूटीफुल वाइफ..!”

समर ने  पिया के हाथ से माइक लेकर उस गायक  को पकड़ाया और जाने को था कि गायक एक बार फिर उसके सामने आकर खड़ा हो गया…

” इन्होंने इतना खूबसूरत गाया है तो, अब आप भी इन की शान में कुछ गा दीजिए..!”

पिया भी समर से रिक्वेस्ट करने लगी…
सामने बैठे लोग भी टेबल धीरे-धीरे बजा कर समर को गाने के लिए प्रोत्साहित करने लगे और आखिर में समर ने माइक संभाल लिया…

हवाओं में बहेंगे घटाओं में रहेंगे
तू बरखा मेरी मैं तेरा बादल पिया…
जो तेरे ना हुवे तो किसी के ना रहेंगे
दीवानी तू मेरी मैं तेरा पागल पिया..

हज़ारों में किसी को तक़दीर ऐसी
मिली है इक राँझा और हीर जैसी
ना जाने ये ज़माना क्यों चाहे रे मिटाना

कलंक नहीं इश्क़ है काजल पिया
कलंक नहीं इश्क़ है काजल पिया
पिया पिया पिया रे पिया रे पिया रे….

समर अपने गीत कि समाप्ति के साथ ही पिया का हाथ थामे वहाँ से जाने को तैयार था कि डेक पर लाइट्स अचानक डिम हो गयीं…
और अब तक चलता धीमा म्युज़िक तेज़ हो गया.. और एक एक कर लोग जोड़ों में उठ कर एक तरफ बने डांस फ्लोर पर नाचने लगे…
   पिया भी डांस फ्लोर पर जाने के लिए मचल उठी, हालाँकि समर का वहाँ जाने का बिल्कुल मन नहीं था,  लेकिन पिया कि इच्छा देख वो भी चला आया…

  तू सिर्फ मेरा मेहबूब मैं तेरी मेहबूबा..
   तुझे चाहेगी बा ख़ूब तेरी मेहबूबा..

पर थिरकती पिया के आज नए ही रंग सामने आ रहें थे.. !
      अस्पताल में शांत गंभीर कम बोलने वाली, और अपने काम से काम रखने वाली पिया आज बिल्कुल सोलह सत्रह साल की किशोरियों सी हरकतों पर उतर आई थीं…
    समर की कमर पर बाँहों का घेरा डाले वो झूम रही थीं और समर उसे बारबार कमरे पर चलने का इशारा कर रहा था,  जिसे समझ कर भी ना समझते हुए वो खुद में मगन थीं…

   कुछ तो माहौल का असर और कुछ पी हुई वाइन का असर उसके सर चढ़ कर बोल रहा था..

  बेधड़क बेपरवाह बेलौस पिया अपने में मगन नाच रही थीं…. डांस के बीच उसने समर का चेहरा अपनी बाँहों में भर लिया…
   वो उसके चेहरे कि तरफ अपने होंठ लेकर जाने को थीं कि समर ने एकदम से उसके हाथ नीचे कर दिये..

“पिया !! यहाँ नहीं…. बहुत लोग है यहाँ.. ! चलो कमरे में चलते हैं.. !”

हाँ में सर हिलती पिया फिर कूद कर डीजे वाले के पास अपना मनपसंद गाना बजवाने चली गयीं..

  लगभग डेढ़ दो घंटे नाच कूद कर जब ज्यादातर कपल थक कर चूर होकर डांस फ्लोर से नीचे उतरने लगे तब पिया भी समर के साथ उतर गयीं…

  दोनों एक दूसरे कि बाहें थामे कमरे कि ओर बढ़ गए…  

  कमरे में पहुँचने के बाद समर फ्रेश होने बाथरूम में घुस गया और पिया आईने के सामने बैठी अपना मेकअप उतारने लगी…
  थकान दोनों को ही हो चुकी थीं… समर जब तक फ्रेश होकर बाहर आया,  पिया बिस्तर पर लुढ़क चुकी थीं…
   उसकी सांसो कि गहरी आवाज़ों से मालूम चल रहा था कि वो कितनी गहरी नींद में सो चुकी है… !

   समर उसे देख मुस्कुरा उठा… “कभी कभी बिल्कुल बच्ची बन जाती हो..! “

उसका माथा चूम कर समर ने बेड के किनारे लगी लाइट्स बंद कि और खुद भी पलंग के दूसरी तरफ फ़ैल गया…
  वो लेट कर आज के खूबसूरत से दिन के बारे में सोचना चाह रहा था लेकिन थकान उस पर भी हावी होने लगी थीं…

**

अगली सुबह कुछ ठक ठक की आवाज़ से उसकी नींद खुली, उसने वक्त देखा सिर्फ छैः बजे थे लेकिन सामने पिया बिल्कुल तैयार खड़ी थीं…

“इतनी सुबह तुम ये जॉगिंग पेंट्स पहन कर क्यों तैयार हो जान.. ?”

“अच्छा हुआ आप उठ गए मंत्री जी.. मुझे डेक पर खड़े होकर सूर्योदय देखना है, और समंदर से उगता सूरज देखते हुए डेक पर ही चाय पीनी है… चलिए फटाफट रेडी हो जाइये.. !

जम्हाई लेता हुआ समर भी बिस्तर पर उठ बैठा.. सुबह जल्दी उठने की उसकी भी आदत थीं, लेकिन पिछली रात तो दोनों सोये ही 3 बजे थे.. ऐसे में उसे लगा नहीं था की पिया इतनी सुबह से उठ बैठेगी..

  वो पिया को देख रहा था कि पिया ने आगे बढ़ कर उसका चेहरा चूम लिया… -” गुड मॉर्निंग मंत्री जी, चलिए अब जाए और फटाफट रेडी हो जाएं… !”

“पिया इससे कहीं ज्यादा बेहतर आईडिया है मेरे पास.. !”

“अभी कुछ नहीं सुनना… चलिए आप निकलिए.. !”

और उसने एक तरह से धक्के मार कर समर को बाथरूम में भेज दिया…

  तैयार होकर समर और पिया सबसे ऊपरी मंज़िल के डेक पर पहुँच गए….

  बाहर मौसम वाकई बेहद खूबसूरत था.. उन्हीं कि तरह के कुछ और कपल भी वहाँ मौजूद थे… वो दोनों एक किनारे चलें गए…
   समंदर कि नीली गहरी नीली लहरें देखने वालों को मुग्ध कर रहीं थीं, उस पर आसमान में फ़ैला हल्का नारंगी रंग और उसकी पानी पर गिरती परछाई देख ऐसा लग रहा था जाने कहाँ छिपकर बैठा है वो चित्रकार जो अपनी तूलिका से अद्भुत रंग निकाल कर प्रकृति को रंगे दें रहा है…

    ठंडी हवाएं बालों को उड़ा रही थीं, और सूरज धीमे धीमे ऊपर चढ़ रहा था…

   वेटर ने आकर उन दोनों के सामने चाय के कप और कुकीज़ रख दिये… चाय के कप को दोनों हाथों के बीच पकड़े चाय कि चुस्कियों के साथ सूरज और पानी को देखती पिया के चेहरे पर उसी उगते सूरज कि लालिमा नजर आ रही थीं…

  पिया उस वक्त बहुत खूबसूरत लग रही थीं, सामने बैठा समर उसे ही देख रहा था….

“थोड़ा सामने भी देख लीजिये मंत्री जी.. ! मुझे देखने के लिए तो उम्र पड़ी है, लेकिन ये नजारा अब जाने कब देखने मिले… “

  समर झेंप गया लेकिन वो अपनी शर्मिंदगी ज़ाहिर हो जाने दें तो फिर वो समर कैसा.. ?

  ” मैं तुम्हारे चेहरे के पीछे के आसमान को देख रहा था.. !”

समर का बेतुका जवाब सुन वो खिलखिला उठी…

  समर अपने बिखरे बालों के बावजूद भी बहुत अच्छा लग रहा था…
  पिया ने उसकी तरफ देखा और प्यार से उसके चेहरे के तरफ बढ़ने लगी कि समर ने उसे रोक दिया..

“यहाँ बहुत लोग है वाईफ़ी… ! इस सब के लिए हमारा कमरा है ना.. !”

  पिया ने हंस कर उसके एकदम करीब आकर उसके बालों में उलझा एक तिनका निकाल कर उसके हाथ में रख दिया…

  एक के बाद एक दो चाय ख़त्म करने के बाद भी पिया का वहाँ से उठने का मन नहीं था, लेकिन अभी इतना बड़ा सा क्रूज़ उसके सामने था और उसे इसकी हर एक चीज़ देखनी थीं…
  समर अपनी जगह पर खड़ा हो गया… उसने पिया का हाथ पकड़ कर उसे भी खींच कर खड़ा कर दिया..

“अब चलें.. ?”

हाँ में गर्दन हिला कर पिया भी खड़ी हो गयीं…

वो दोनों वहाँ से आगे बढे,  समर लिफ्ट में चला गया.. उसने अपने रूम के फ्लोर का बटन दबाया कि पिया ने तुरंत फर्स्ट फ्लोर का बटन दबा दिया..

आश्चर्य से समर पिया कि ओर देखने लगा…

और पिया मुस्कुरा उठी…

“इस फ्लोर में जिम है.. !  मैं यहाँ का जिम भी देखना चाहती हूँ.. !”

“ओह्ह नो.. ! जिम कौन करता है यार अपने हनीमून पे.. !”

“मैंने पहले ही कहा था, कि मैं पूरा क्रूज़ घूमूंगी और हर एक चीज़ एक्सप्लोर करुँगी.. !”

क्या कर सकता हूँ वाले भाव देता हुआ समर चुपचाप हाथ बांधे खड़ा रहा गया…

लिफ्ट खुलते ही सामने बड़ा सा ग्लास डोर था, जिसके उस पार जिम था… !

  पूरे एक फ्लोर पर के आधे हिस्से में जिम बनाया हुआ था….
   ख़ूब सारे इक्विपमेंट्स सजे थे, और लोग उन पर चढ़े अपने शरीर कि झूलती चर्बी कम करने कि कोशिश में लगे थे…

  पिया वहाँ पहुँच कर भी चहक उठी… सारे ही ट्रेडमिल किनारे कांच पर से लगे हुए थे जिससे ट्रेड मिल पर चलते या दौड़ते हुए बाहर समंदर का नजारा देखा जा सकता था…

  वो भी एक ट्रेड मिल पर चढ़ गयीं……
समर का तो रोज़ का काम था जिम,  इसलिए वहाँ पहुँचने के बाद वो अपने नित्य के अभ्यास से अपना काम करने लगा…

  घूम घूम कर सारी मशीनों को जाँच लेने के बाद जब पिया का मन भर गया तब वो समर के पास चली आई…

” चलिए मंत्री जी,  अब चलते है.. !”

“लगता है वाईफ़ी थक गयीं.. ?”

समर ने उसे छेड़ते हुए कहा और उसका हाथ पकड़ कर वहाँ से निकल गया…

अपने कमरे में पहुँचते ही समर शरारत से कुछ गुनगुनाने लगा…

   हम तुम एक कमरे में बंद हो और चाबी खो जाएं…

  “यार वाकई ऐसा हो तो मजा आ जाएं, कम से कम मेरी बीवी घूमने की जगह मुझ पर ध्यान तो देगी “

पिया ने समर की बात सुन उसे मुहं टेढ़ा कर चिढ़ा दिया..

“हम दोनों ही जिम कर के आ रहें हैं, एन्ड वी नीड अ बाथ बैडली.. ! तो क्यों ना हम साथ में ही शॉवर लें लें.. ?”

समर ने शरारत से पिया कि आँखों में आँखे डाल कर देखा…
  और पिया मुस्कुरा उठी….

उसी वक्त कांच कि पारदर्शी दीवार से बाहर की  बालकनी में बड़ी बड़ी बुँदे गिरती दिखाई दी और पिया कूद कर दरवाज़ा खोले बालकनी में भाग गयीं…

  उसके पीछे समर भी बाहर चला आया, हालाँकि वो दरवाज़े के पास ही टिक कर खड़ा रहा….

  समंदर के जहाज पर जब आसमानी बारीश कि बुँदे गिरती है तो लगता है जैसे वाकई प्रकृति अपने दोनों हाथों से अपना खुला खज़ाना लुटा रही है…

   बारीश और बादलों से समंदर कि लहरें भी तेज़ी से डेक पर टकरा कर एक शोर पैदा कर रही थीं.. उस पर गहरे काले बादलों ने कुछ देर पहले के चमकते सूरज को पूरी तरह ढक लिया था…
      तेज़ तेज़ चलती ठंडी हवाओं के बीच बिजली भी चमक कर अठखेलियां कर रही थीं… और पिया इस मौसम का लुत्फ़ उठा रही थीं.. दोनों हाथों से बूंदो को उड़ाती पिया खुल कर पानी में भीग रही थीं…

   बारीश में भीगती पिया बेहद खूबसूरत लग रही थीं…

    बालकनी के बीचोबीच खड़ी वो दोनों हाथ फैलाये बारीश कि बूंदो का लुत्फ़ उठा रही थीं…

   उसकी टीशर्ट उसके बदन से चिपक गयीं थीं.. काली कैप्री के नीचे उसकी सुडौल टांगे बारीश के पानी से भीग कर और गुलाबी नजर आ रही थीं…

   माथे पर यहाँ वहाँ उसके बाल चिपक से गए थे… वो चेहरा आसमान की ओर किये अपने चेहरे पर पानी की बुँदे महसूस कर रही थीं…

   पानी के बुँदे उसके माथे पर से होते हुए उसके होंठों को छू कर उसके गले से गुज़रते हुए नीचे बहती चली जा रही थीं और दरवाज़े पर खड़ा समर उस बून्द के साथ उन जानलेवा गहराइयों में धंसता चला जा रहा था….

  अजंता एलोरा की प्रतिमाओं सी दिखती पिया पानी में भीगती पूर्ण समर्पण की इच्छा से अपने पति की ओर बाहें फैलाये खड़ी थीं, और अपनी पत्नी को पूरी तरह से पा लेने की इच्छा से उद्वेलित समर हाथ बांधे खड़े उसे बस देख रहा था….
  

   पिया का दिल कह रहा था की समर भी आकर उसके साथ भीग लें… बारीश के इस पानी में उसे जी भर कर प्यार कर लें लेकिन ज़रा दूर खड़ा समर चाह कर भी पिया की तरह बावला नहीं हो पा रहा था… आसपास के लोग, उनकी नजर उसे ऐसा करने से रोक रही थीं…

हालाँकि इस क्रूज़ पर बहुत से हनीमून कपल थे… और खास कर इस माले पर सारे ही हनीमून सुइट्स ही थे, इसी से हर एक कपल खुद में व्यस्त था, उनके पास औरों को देखने का समय ही कहाँ था ? लेकिन समर बाबू पिया को भीगते देखते रहने के आलावा वहाँ और कुछ नहीं करना चाहते थे…

   दोनों ही प्रेम चाहते तो थे पर दोनों के तरीके अलग थे….

   वो चाहती थीं प्रकृति की गोद में वो खुल कर समर्पण कर दें और दोनों एक हो जाएं, जबकि वो यही सब अपने कमरे के एकांत में करने का अभिलाषी था….

   धीमे से बारीश कम होने लगी, और भीगी हुई पिया अंदर चली आई…

   लेकिन उसके कमरे में आते तक में समर नहा कर तैयार हो चुका था…
  पिया उसे देख मुस्कुरा उठी..

“अरे आप तो तैयार भी हो गए… मुझे लगा था हम साथ में शावर लेंगे.. !”

“हाँ लेना तो चाहता था पर तुमने सारा टाइम वहाँ बालकनी में वेस्ट जो कर दिया… !”

“वेस्ट कर दिया… ? अरे जब संसार के मालिक ने हमारे लिए शॉवर चला दिया था फिर इस बाथरूम  के नन्हे से शॉवर की क्या औकात… ? मैं तो बालकनी में आपके साथ भीगना चाहती थीं.. ! खैर कोई नहीं.. बाद में भीग लेंगे.. मैं फटाफट नहा कर आती हूँ.. अब तो पेट में चूहे कूद रहें… “

  पिया ने बहुत खूबसूरत सी पर्पल फ्लोरल ड्रेस पहनी और बालों को पोनीटेल में बांध कर तैयार हो गयीं…

समर भी इस वक्त शॉर्ट्स और टीशर्ट में ही था.. दोनों नाश्ता करने चलें गए…

   नाश्ते में बुफे था, अपनी प्लेट पकडे पिया हर एक डिश के पास से गुज़र रही थीं, तभी बेख्याली में अपने ठीक सामने खड़े एक आदमी से वो टकरा गयीं..

“ओह्ह सॉरी,  मैंने देखा नहीं.. !” पिया अभी अपनी बात कह रही थीं कि वो आदमी पलटा और उसे देखते ही पिया के मुहं से एक चीख निकल गयीं…

“ओह्ह माय गॉड !! आप और यहाँ… सर मैं आपकी बहुत बहुत बड़ी फैन हूँ…… !”

  पिया सामने खड़े उस व्यक्ति को देख ख़ुशी से चहक उठी…

“आप मुझे जानती हैं… ?”

“ऑफकोर्स सर ! मैं आपके लिखें डेली अपडेट्स पढ़ती हूँ और फॉलो भी करती हूँ.. !”

सामने खड़ा व्यक्ति मुस्कुरा उठा…  ये एक सामान्य कद काठी का साधारण सा दिखता आदमी था पर उसके चेहरे का अपरूप तेज़ उसका आत्मविश्वास से दमकता रंग उसके असाधारण व्यक्तित्व कि चुगली कर रहा था…

   मुस्कुरा कर वो आगे बढ़ने को था कि तभी एक और औरत उनकी तरफ लपक पड़ी… -” सर आप तो सृजन शिखर शर्मा हैं ना.. !”

उस ने हाँ में सर हिला दिया..

“ओह्ह सर, आज तो कुछ और भी माँगा होता तो भगवान ज़रूर दें देते… मैं अभी कुछ देर पहले ही आज का मेरा फोरकास्ट पढ़ना चाह रही थीं, लेकिन नेटवर्क प्रॉब्लम के कारण पढ़ नहीं पायी… अब तो आपसे सामने से होकर ही पूछ लेंगे सर.. !”

सृजन शिखर मुस्कुरा उठा.. उसने अपनी नाश्ते कि प्लेट कि तरफ  इशारा किया और आगे बढ़ गया… पिया और वो औरत उसके पीछे पीछे भाग चली…
पिया ने समर को भी इशारे से वहीँ बुला लिया.. और फिर देखते देखते उस नव परिचित को घेर कर लगभग बीस बाइस लोग बैठ गए…

वो आदमी और कोई नहीं बल्कि दिल्ली का सबसे प्रसिद्ध भविष्यवक्ता था…
  सृजन शिखर कि उम्र भले ही ज्यादा नहीं थीं, लेकिन उसने ग्रह नक्षत्रों पर ऐसी ठोस पढाई कर रखी थीं कि हाथ और माथे कि रेखाएं देख वो बहुत स्वाभविक तरीके से सामने बैठे व्यक्ति का भविष्य भूत सब कुछ चटपट कह जाता था….
  
   पिया ने जैसे ही समर को उसका परिचय दिया, समर के चेहरे पर अवज्ञा के भाव चलें आये….

” ये चालीस बयालीस का छोकरे सा दिखने वाला लड़का एस्ट्रोलॉजर है… क्या बकवास है.. !” पिया कि बात पर समर झुंझला उठा,  हालाँकि उसकी झुंझलाहट का असली कारण उसका पिछली दो बार से अधूरा रह गया रोमांस था…

और पिया उसे आवाज़ धीमी रखने कि गुज़ारिश करती उसे सृजन के कारनामे सुनाने जा रही थीं कि उस भीड़ में से एक औरत सृजन से उसकी उम्र को लेकर सवाल कर गयीं…और सृजन मुस्कुरा कर बोलने लगा..

“शक्ल से जितने का भी दिखूं, हो तो उनचास का गया हूँ… !”

वहाँ बैठी महिलाओं के चेहरे पर कौतुहल जाग गया.. उसके मक्खन चेहरे को देख वो कहीं से चालीस से एक दिन ऊपर नहीं लग रहा था…

पर सृजन भी बातों का अजब व्यापारी था.. उसने सामने बैठी औरत को लपेटे में लेना शुरू कर दिया..

“आप बहुत क्लासिक चॉइस वाली लगती हैं…. बुरा मत मानियेगा लेकिन कोई भी सामान पसंद आपको उसकी कीमत से आता है… !”

उस औरत का पति ये बात सुन खिलखिला उठा…

“बहुत सही सृजन साहब,  मान गए आपको.. ! हमारी मोहतरमा जब भी शॉपिंग के  लिए जाती है इनका ध्यान शॉप कि सबसे कीमती चीज़ पर अटका रहता है..
 

“इसलिए शायद आपने इनके साथ शॉपिंग जाना छोड़ दिया है.. !”

सृजन उस औरत को बड़ी गहरी नजर से देख रहा था… और उसके सवाल पर उस औरत का पति हॅंस हॅंस कर दुहरा हो गया… उसके पति को दलाल स्ट्रीट से फुरसत मिलती तब तो कहीं जाता..

“बिल्कुल सही पकडे है आप.. ! आजकल ये शॉपिंग पर अकेले ही जाती हैं.. !”

“वो तो अच्छी बात है कि आप इन्हे अकेले शॉपिंग पर जाने देते हैं लेकिन दुबई तक अकेले मत भेजा कीजिये जनाब, ज़माना ख़राब है.. !”

सृजन कि ये बात सुन वो आदमी सवालिया नजरों से सृजन को देखने लगा, लेकिन उसकी बीवी के चेहरे का रंग उड़ गया….
  सृजन ने ये बात सामने बैठी उस औरत कि कलाई को बड़े ध्यान से देखते हुए कहा था…
  और उसकी बात भांपते ही वो औरत अपनी कलाई पर हाथ फेरने लगी…

“सृजन साहब ! यहाँ तो आपकी भविष्यवाणी गलत साबित हो गयीं… ये ब्रेसलेट तो कैरेटलेन का है.. ?”
  उस औरत का पति बोल उठा

सृजन ने मुस्कुरा कर उस औरत को सवालिया नज़रों से देखा, ऐसी गहरी भेदभरी आँखें कि सामने वाले कि रूह तक झांक आएं….

“क्या मैं गलत बोल रहा हूँ… ? अगर आपको दिक़्क़त ना हो तो क्या मैं ये ब्रेसलेट देख सकता हूँ.. ?”

उस औरत ने झिझकते हुए ब्रेसलेट उतार कर दें दिया…

“मैं असल में प्रिशियस स्टोन पर भी काम करता हूँ, ये बहुत समान्य सी बात है… हाथ कि रेखाएं पढ़ने वाले अक्सर रेखाओं कि गति  सुधारने के लिए कुछ अलग अनोखे पत्थर पहनने कि भी सलाह देते हैं.. बस इसलिए मेरा एक काम इन पत्थरो की तलाश करना और उन्हें लोगों को पहनाना भी है…”

सृजन ने उस ब्रेसलेट को चारों तरफ से देखा और मुस्कुरा उठा… 

“इज़ाबेल इम्प्रेसी दुबई से खरीदा हुआ ब्रेसलेट है ये !”

उसकी आत्मविश्वास से भरी बात सुन कर एक पल को सभी वहाँ सन्न रह गए… उस औरत ने धीमे से अपने माथे का पसीना पोंछा और धीरे से गुनगुना कर कहने लगी…

“इस बार आप वाकई फेल हो गए सृजन साहब ! ये मुंबई कैरेटलेन से लिया है मैंने.. !”

और अपना ब्रेसलेट उसके हाथ से वापस लेकर वो अपनी नाश्ते कि प्लेट उठाये वहाँ से चली गयीं…

उसके जाते ही सृजन के चेहरे पर एक भेद भरी मुस्कान तैर गयीं…
       उस औरत के जगह खाली करते ही पिया सृजन के ठीक सामने बैठ गयीं…

“सृजन सर ! कुछ हमारे बारे में भी बता दीजिये.. ये मेरे हस्बैंड है समर..और मैं हूँ पिया  !”

सृजन ने मुस्कुरा कर समर को हेलो कहा लेकिन समर का ध्यान अभी अभी वहाँ से उठ कर गयीं उस औरत कि तरफ था….

  और सृजन एक बार फिर बड़े ध्यान से समर के माथे पर लिखी उन रेखाओं को पढ़ने लगा जो शायद पिया के भविष्य में भूचाल ला सकती थीं….

क्रमशः…

aparna…

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