
जीवनसाथी -2, भाग – 38 अंदमान स्पेशल..
” द क्रूज़ शिप “
फ़्लाइट के लैंड करते ही समर और पिया बाहर निकले, उनके लिए बाहर पहले से गाडी उनका रास्ता देख रही थीं… वो गाड़ी उन्हें सीधे उनके क्रूज़ शिप तक लें गयी…
गहरे समंदर में एक किनारे खड़ी विशालकाय क्रूज़ शिप को देखते ही पिया की आँखे चौड़ी हो गयी…
उसने ख़ुशी से चहक कर समर की बाँह थाम ली…
” क्रूज़ तो बहुत बहुत बड़ा है मंत्री जी.. !”
“चल कर अंदर से देखिये तो सही, मजा आ जायेगा.. !
वहाँ उन लोगों के उतरते ही क्रूज़ के कर्मचारी उनका सामान लेने चलें आये… सामान दूसरी तरफ से क्रूज़ में
लोड होता था…
उन लोगों के सामान पर उनकी टिकट नंबर और क्रुज़ नंबर की स्टिकर्स चिपका कर सामान दूसरी तरफ लें जाया गया…
और वो दोनों अपने टिकट्स की जाँच और सिक्योरिटी चेक से निपटने के बाद दोनों शिप की तरफ बढ़ गए…
क्रूज़ की पंद्रह मंजिला ऊँची बनावट बाहर से देखने पर ही पिया के मन में पुलक जगा गयी थीं….
” वाओ.. ये तो बहुत सुंदर है…!”
“हाँ मुझे भी दोनों ही सुंदर लग रही है.. !”
समर और पिया क्रूज़ के अंदर दाखिल हो चुके थे.. अंदर मुख्य द्वार के भीतर खड़ी दी युवतियां हाथ जोड़ कर उन लोगो का स्वागत कर रही थीं…
पिया ने क्रूज़ के लिए कहा लेकिन समर पिया को चिढ़ाते हुए उन दोनों लड़कियों के लिए कहने लगा… पिया ने मुस्कुरा कर उसे घूरा और उन दोनों लड़कियों को नमस्कार कर समर की बाँहों में बाहें डाले अंदर की तरफ बढ़ गयी….
अंदर बहुत बड़ा सा हॉल था, जहाँ एक और रिसेप्शन पर भी दो युवतियां खड़ी थीं… उनसे लग कर एक केबिन था जो शायद मैनेजर का था…
ढ़ेर सारी मून लाइट्स और जगमगाती बत्तियों से सजा हॉल बहुत शानदार लग रहा था…
रिसेप्शन पर पहुँचने पर समर की तरफ मुस्कुरा कर उन औरतों में से एक ने उसका टिकट पूछा और टिकट में देख कर सुईट की चाबी उसकी तरफ बढ़ा दी…
चाबियों के साथ ही एक पतला सा सिक्योरिटी ब्रोशर भी था…
समर और पिया मुस्कुरा कर लिफ्ट की तरफ बढ़ गए.. तीनों तरफ से पारदर्शी कांच की लिफ्ट में ऊपर जाते हुए उन्हें सारे क्रूज़ की झलक मिल रही थीं… पिया ने समर के हाथ से चाबी लेते हुए ब्रोशर के बारे में समर से पूछ लिया…
“ये क्या है मंत्री जी.. ?”
“सिक्योरिटी गाइडलाइंस हैं… !”
“,ओह्ह तो उन नासपीटियों को लग रहा की मेरे मंत्री जी को मुझ से खतरा है.. !”
पिया ने शोखी से कहा और समर ने एक भौंह ऊपर चढ़ा ली…
“क्या करने वाली हो मेरे साथ… आज की रात ?”
“हम्म्म ! अब वो तो धीरे धीरे पता चल ही जायेगा आपको.. !”
“जो भी करना, ज़बरदस्त करना.. !”
ठंडी सी साँस छोड़कर समर ने कहा और पिया ने पंजो पर खड़े होकर समर के गालों को चूम लिया..
“अरे… यहाँ कहाँ शुरू हो गयी… अभी से मेरी इज्जत पे डाका मत डालो.. रूम पे तो पहुँचने दो.. ! ये लिफ्ट है वो भी ट्रांसपेरेंट, सबको सब दिख रहा.. !”
“,देखने दो… हमें पहचानता कौन हैं यहाँ.. !”
मुस्कुरा कर पिया ने समर की बाँहों में बाहें डाल दी…
लिफ्ट का दरवाज़ा खुलते ही सामने एक आदमी खड़ा था, उसने झुक कर उन लोगों का अभिवादन किया और उनके सामने हाथ बढ़ा दिया…
समर ने अपने हाथ की चाबी उसके हाथ में रख़ दी…. चाबी में कमरे का नंबर देख वो आदमी एक तरफ के गलियारे की और इशारा कर खुद उस तरफ मुड़ गया…
एक छोटे से गलियारे को पार कर वो लोग अपने कमरे के सामने खड़े थे..
दरवाज़े पर चाबी वाला कार्ड रख़ कर उस आदमी ने दरवाज़ा खोला और कार्ड अंदर पैनल में डाल कर अदब से झुक कर दोनों को नमस्ते कर वो बाहर चला गया…
पिया कमरे की सजावट देख कर ख़ुशी से चहक गयी… वो घूम घूम कर हर एक चीज़ देखने लगी… उस बाहर के कमरे में आरामदायक काउच सजा था… एक तरफ टीवी लगा था… काउच के दूसरी तरफ दो रिक्लाइनर सोफे पड़े थे..
एक तरफ बनी अलमारी को भी उसने झटके से खोल दिया… सेफ्टी जैकेट के अलावा उसमे दो बाथरोब रखें थे…
एक छोटे से दरवाज़े को खोलने पर बाथरूम था..
और उससे लगे दरवाज़े को खोलने पर बेहद सुंदर बैडरूम था.. जिसमे बेड के एक तरफ बड़ी से खिड़की थीं जिससे लहराता समंदर नजर आ रहा था…
पिया ख़ुशी से चहक उठी… अपना बेडरूम देखने के बाद वो ख़ुशी से समर के गले से लग गयी…
“थैंक यू.. थैंक यू सो मच मंत्री जी… इतना ब्यूटीफुल हनीमून प्लान करने के लिए…
हाय हाय.. मैं वारी जांवा, इतना रोमांटिक हो सकता है मेरा हबी मैंने सोचा ना था… !”
समर ने मुस्कुरा कर पिया को बाँहों में भर लिया…
वो उसके चेहरे को देखते हुए उसके होंठो पर झुकने को था की पिया उसकी बाँहों से छिटक कर बेडरूम के दरवाज़े से बाहर निकल गयी…
समर ने एक ठंडी साँस भरी और वो भी फुदकती हुई पिया के पीछे बाहर निकल आया..
बेडरूम से लगी दीवार पर एक बड़ा दरवाज़ा और था, जिसे बेडरूम में घुसने से पहले ही पिया देख चुकी थीं.. वो भाग कर उस दरवाज़े पर पहुँच गयी और एक झटके में उसने उस दरवाज़े को खोल दिया…
बाहर खुली हुई बालकनी थीं…..
जिसे देख पिया बिल्कुल बच्चों की तरह तालियाँ बजा कर चहक उठी…
उस बालकनी में दो लम्बी आराम कुर्सियां पड़ी थीं.. और एक तरफ डेक की तरह मुहाना था…..
और उस बालकनी से सामने हिलोर मारता दूर दूर तक फ़ैला नीला काला समंदर नजर आ रहा था… हालाँकि रात हो जाने के कारण समंदर का नीला पानी इस वक्त गहरे रंग का नजर आ रहा था, लेकिन नीचे के सारे फ्लोर और पूरा क्रूज़ रंगबिरंगे चमकते लट्टुओं से रोशन बेहद खूबसूरत नजर आ रहा था…
पिया वहीँ पड़ी आराम कुर्सी पर पसर गयी… और चारों तरफ आँखे घुमा घुमा कर देखने लगी…
समर एक तरफ को पीठ टिका कर खड़ा हो गया… समंदर से आती ठंडी हवाएं उन दोनों को तरोताज़ा कर रही थीं…
पिया ने समर की तरफ देखा और उसे अपने पास आने का इशारा कर अपनी बाहें फ़ैला दी…
समर मुस्कुरा कर खड़ा ही रहा उसी वक्त बाहर दरवाज़े पर दस्तक होने लगी…
समर तुरंत बाहर निकल गया….
पिया वहीँ बैठी नज़ारे देखती रही…
बाहर वेटर उनके डिनर का पूछने आया था.. समर उसे बाहर ही रोक पिया के पास चला आया…
“डिनर करने नीचे जाना है या यहीं मंगवा लूँ… वैसे तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूं इस क्रूज़ में 3 रेस्टोरेंट है..! तुम जहां भी चाहो वहां का खाना खा सकती हो..! अगर नीचे जाकर खाना है तो हम किसी भी रेस्टोरेंट में चले जाएंगे.. और अगर इस वक्त तुम्हारा रूम पर आराम करने का ही मूड है तो हम खाना यही मंगवा लेंगे…!”
“नो वेज़,… मैं बाहर जाकर हर चीज़ एक्सप्लोर करना चाहती हूँ मंत्री जी… बस फटाफट चेंज कर के रेडी हो लूँ, फिर चलते हैं..!”
” ओके जान!!”
समर ने वेटर को भेज दिया और खुद भी कपडे बदल कर दरवाजा बंद करके बाहर वाले काउच पर टीवी चला कर पसर गया…
” सुनो थोड़ा जल्दी रेडी होना.. मुझे भूख लगने लगी है!”
समर की बात सुनकर पिया ने मुस्कुराकर हां में सिर हिलाया और अपना बैग खींचते हुए बेडरूम में घुस गई…
समर बाहर बैठा टीवी के चैनल बदलता रहा…
कुछ देर में बेडरूम का दरवाजा खोलकर पिया समर के सामने चली आई…
ग्रे सिल्वर सीक्वेंस की बॉडीकॉन ड्रेस में अपने खुले बालों और होंठों पर लगी शिमर बेज़ लिपस्टिक में पिया बेहद खूबसूरत लग रही थीं..
वो जैसे ही समर और टीवी के बीच आकर खड़ी हुई, समर उसे देखता रह गया…
पिया समर की तरफ थोड़ा सा झुकी और उसने समर के हल्के से खुले हुए मुहं को बंद कर दिया…..
“क्या हुआ मंत्री जी… ? होश उड़ गए.. ?”
समर ने मुस्कुराकर हां कहा और अपनी बाहें फैला दी पिया ने तुरंत ना में गर्दन हिलाई और अपने हाथ में पकड़ रखे क्लच को कंधों पर टांगते हुए बाहर निकलने के लिए अपनी हील्स खटकाती आगे बढ़ गई कि तभी समर ने उसे आवाज दे दी….
” आज तो मेरी डॉक्टर साहिबा पहचान में नहीं आ रही… लग ही नहीं रहा है कि यह वही सुखी सड़ी डॉक्टरनी है जो सिर्फ कॉटन के कुर्ते जींस पर डाली रहती है..!”
पिया ने बालों को हाथों से उड़ाते हुए मुड़कर समर की तरफ गहरी आंखों से देखा…
” यह तो आपकी नजरों का फेर है मंत्री जी, जो आपको नारियल के खोल के अंदर छिपी मलाई नजर नहीं आई.. !”
” बात तो सही है तुम्हारी, लेकिन इतनी दूर से क्यों कह रही हो, पास आकर बता दो..!”
” अभी पास आने का वक्त नहीं है… आपको भूख नहीं लग रही..?”
” लग तो रही है, लेकिन अब प्यास ज्यादा लग रही है..!”
“शट अप ! कम ऑन.. जल्दी चलो ना.. नीचे सब मजे कर रहें होंगे.. !”
समर का पिया को देखने के बाद अब कमरे से निकलने का मन नहीं था…. लेकिन पिया ने उसकी बांह पकड़ कर उसे खींच लिया और समर एक तरह से पिया के कंधों पर लटका उसके साथ कमरे से बाहर निकल गया…
” मंत्री जी हमारा क्रूज़ पर का सफर कितने दिन का है..?”
” 2 दिन का है डॉक्टर साहिबा..! उसके बाद हम पहुंचेंगे पोर्ट ब्लेयर वहां 1 दिन रुकने के बाद हम हैवलॉक बीच जाएंगे इसके बाद ज्यादा टाइम नहीं है.. इसलिए पोर्ट ब्लेयर से हमारी फ्लाइट से वापसी है..!”
” पर मुझे तो आपने सिर्फ 3 दिन का हनीमून बताया था..!”.
” हां तो अंडमान में तो हम 3 दिन ही रुक रहे हैं ना..! मैडम 2 दिन तो हमारा क्रूस पर है इसे मैंने काउंट नहीं किया था..!”
” अच्छा..! मतलब क्रूज़ पर आप हनीमून नहीं मनाने वाले हैं…?”
शैतानी नजरों से समर को घूरती पिया बोल उठी और उसकी बात सुनकर समर ने एक बार फिर उसे बाहों में भरने की कोशिश की और समर को धक्का देकर पिया लिफ्ट की तरफ भाग गई…
सेकंड फ्लोर पर एक रेस्टोरेंट मौजूद था और बाकी के दो रेस्टोरेंट सबसे ऊपर पंद्रहवी मंज़िल पर थे..
वो दोनों पंद्रहवीं मंज़िल पर पहुँच गए…
वहाँ बड़ा सा ओपन टेरेस रेस्टोरेंट था.. जहाँ डेक से लगी हुई टेबल कुर्सियां सजी थीं… एक तरफ गाना बजाना चल रहा था, और दूसरी बुफे लगा हुआ था…
पिया इस माहौल को देख कर ख़ुशी से फूली नहीं समा रही थीं…..
समर ने सब तरफ नजर दौड़ाई और एक किनारे वाली टेबल पकड़ कर बैठ गया… उन दोनों के बैठते ही वेटर कुछ कॉम्प्लीमेंट्री ड्रिंक्स के बारे में बताने चला आया.. उसके मेन्यू को देख कर पिया ने अपने लिए वाइट वाइन मंगवाई और समर ने रम..
ड्रिंक्स के साथ स्टार्टर्स लेते हुए भी पिया पूरी तरह से ऑर्केस्ट्रा में मग्न थीं…..
ऑर्केस्ट्रा पर गा रहा गायक हर एक से उसकी पसंद पूछ कर गाने गाता जा रहा था..
उसकी नजर गाने के बीच में समर और पिया पर पड़ी और उसने उन लोगों से इशारे से पूछा कि वह कोई गाना बताना चाहते हैं या नहीं..? पिया ने तुरंत हाथ खड़ा करके अपनी मंशा बता दी…
ऑर्केस्ट्रा में से एक लड़का अपने हाथ में ट्रे लिए उन लोगों तक पहुंच गया…
उस ट्रे में एक छोटी सी नोटबुक और एक पैन रखी थी..
उस नोटबुक पर अपनी पसंद का गाना लिखकर गायक के पास भेजना था ! पिया उस नोटबुक को उठा पाती उसके पहले ही समर ने उठा ली…
” तुम्हारे लिए कुछ लिखकर भेजता हूं..”
पिया ने मुस्कुराकर हां में सर हिला दिया और समर ने अपनी तरफ से एक गाना लिखकर भेज दिया और ऑर्केस्ट्रा में बैठा गायक उस गाने को पढ़कर अपने साथ वालों के साथ धुन को ट्यून करने लगा…
उसके बाद उसने जैसे ही गाना शुरू किया पिया अपनी जगह पर खुशी से खड़ी हो गई और धीरे-धीरे तालियां बजाने लगी…
गायक सोनू निगम का गाया एक बहुत प्रसिद्ध गाना गा रहा था….
प्यार तुझे जब से किया,भूल बैठा मैं सब को
तूने मगर जाना नहीं, धड़कनो की तलब को…
हो मेरे एहसास में,तू ही तू बस गयी
कौन तुझको बताये….
दीवाना तेरा तुझे ही बुलाये, ये मर्ज़ी तेरी….
तू आये ना आये,
दीवाना मैं हूँ दीवाना तेरा, दीवाना मैं हूँ दीवाना तेरा
मौसम है मस्ताना,उसपे दिल दीवाना
दीवाना तेरा तुझे ही बुलाये, ये मर्ज़ी तेरी….
तू आये ना आये,
दीवाना तेरा तुझे ही बुलाये….
पिया इस गाने को सुनकर खुशी से पागल हुई जा रही थी… उसने अपनी जगह से उठकर समर की तरफ कदम बढ़ाए और उसके गले के चारों ओर अपनी बाहें डाल कर उसके गले से लिपट गई…
धीरे से उसके कानों में अपने होंठ ले जाकर उसने प्यार से उसे “थैंक यू “बोल दिया…
” मोस्ट वेलकम वाइफी..!”
समर ने भी प्यार से उसके कान में मोस्ट वेलकम कहा और उसे कमर से पकड़ कर उसकी कुर्सी पर ले जाकर बैठा दिया…
” मुझे यहां क्यों बिठा दिया..? मैं तुम्हारी गोद में बैठना चाहती थी..!”
पिया ने झूठी नाराजगी दिखाते हुए समर से कहा और समर मुस्कुरा कर रह गया…
उसने अपने चारों तरफ इशारा किया और पिया को अपनी ही कुर्सी में बैठे रहने के लिए मना लिया…
पिया और समर वापस ऑर्केस्ट्रा सुनते हुए खाने लगे तभी ऑर्केस्ट्रा में गाते हुए गायक ने पिया को आवाज लगा दी..
” एक्सक्यूज मी मैडम!! अगर आप गाना चाहें तो आप भी आकर गा सकती हैं..!”
” कौन मैं..?”
पिया ने उससे सवाल किया और उसने हां में जोर से गर्दन हिला दी.. पिया ने समर की तरफ देखा और मुस्कुरा कर गाना गाने के लिए खड़ी हो गई कि समर ने उसकी कलाई पकड़ ली…
” उस बंदे को भी कोई और नहीं मिली… मेरी ही बीवी को लाइन मार रहा है..
रहने दो गाना गाने की जरूरत नहीं है..!”
शरारत भरी मुस्कान से पिया ने समर की तरफ देखा और चहक उठी..-” क्या बात है… ? मंत्री जी को जलन हो रही है..? कोई बात नहीं, थोड़ा बहुत जल लीजिये… मैं जा रही हूं आपके लिए गाना गाने..!”
ज़रा-ज़रा-सी बातें, तेरी मुझको याद आती हैं
मेरे दिल को तड़पाती हैं, रातों में….
ज़रा-ज़रा-सी बातें, बीते लम्हे ले आती हैं..
तस्वीरें-सी बन जाती हैं….आँखों में
ज़रा-ज़रा-सी बातें…
कोई बनाके बहाना, मेरे घर वो तेरा आना,
हर शाम मिलने के लिए…
हलके गुलाबी थे वो, जो फूल तूने मुझको,
एक रोज़ लाके थे दिए…
और अब फूलों की ख़ुशबूएँ, जो कहीं आती हैं..
मुझको तन्हा कर जाती हैं…. राहों में
ज़रा-ज़रा-सी बातें, तेरी मुझको याद आती हैं
मेरे दिल को तड़पाती हैं, रातों में…..
ज़रा-ज़रा-सी बातें…..
क्रमशः
aparna…
