
जीवनसाथी -2 भाग -29
कमरे का दरवाज़ा खोलते ही पिया की ऑंखें ख़ुशी से चमक उठी…
आज की शाम उसकी बहुत खूबसूरत गुज़री थीं, पूरी शाम वो और समर साथ थे… हॉस्पिटल से उसे लेकर समर मूवी के लिए ले गया था….
हालाँकि ये और बात थीं की वो दोनों मूवी देखने से ज्यादा एक दूसरे के साथ बातों में खोये हुए थे…
मूवी के बाद वो लोग डिनर के लिए निकल गए थे…
पिया के पसंदीदा “रॉक एन्ड शेल” से वो लोग कांटिनेंटल डिनर कर के वापस लौटे थे…
पिया ख़ुशी से भरी हुई अपने कमरे की तरफ बढ़ गयी थीं.. उसका ध्यान इस बात पर गया भी की नीचे वाले हॉल में कोई बैठा नजर क्यों नहीं आया.. लेकिन फिर लगा कि शायद रात के दस बज चुके थे इसलिए सब सोने चलें गए होंगे…
अपने कमरे का दरवाज़ा खोलते ही उसकी आँखे चमक गयी थीं…
कमरे में खुशबु वाली मोमबत्तियाँ जल रहीं थीं.. एक तरफ आर्किड के फूलों का गुलदस्ता रखा था.. और दूर से देखने पर ही बेड पर रखा छोटा सा “फनिस्ता”का पैकेट नजर आ रहा था…
वो धीमे क़दमों से उस पैकेट कि तरफ बढ़ गयी… समर उसे उतार कर गाड़ी पार्क करने चला गया था और वो तेज़ी से ऊपर इसलिए आई थीं कि समर के लिए लें रखा सरप्राइज़ गिफ्ट कमरे में लाकर रख सके…..
लेकिन समर ने पहले ही उसके लिए सरप्राइज़ प्लान कर रखा था….
वो धीमे से आगे बढ़ गयी….
समर के इस प्यारे से सरप्राइज़ ने उसकी दिन भर की थकान दूर कर दी थी… आज बहुत दिनों के बाद उनकी शाम बहुत खुशगंवार सी बीती थी….
वो पलंग तक पहुंची और उसने उस बॉक्स को उठा लिया… उसमे एक खूबसूरत सा सॉलिटियर जगमगा रहा था…
पिया हाथ में उसे निकाल कर देख रहीं थी कि पीछे से आकर समर ने उसे बाँहों में ले लिया…
“कैसा लगा… ?”
“ब्यूटीफुल… !”
“तुमसे कम… !”
“हम्म जानती हूँ, सारे हथियारों से लैस होकर आये हो, वैसे सच बताना किसने तुम्हें ये आइडियाज दिये हैं.. क्योंकि मंत्री जी का दिमाग तो सिर्फ रियासत के फायदे नुकसान सोचने में निकल जाता है……
“बीवी को खुश कैसे रखें -101 उपाय, किताब खरीदी थी रेलवे स्टेशन के बाहर से.. बस उसी से पढ़ कर सीख रहा हूँ…
“चलो अच्छा है.. कुछ तो ऐसा है जो सीख रहें हो.. वरना मंत्री जी तो स्वयं में इतने आत्ममुग्ध हैं कि उन्हें लगता ही नहीं उन्हें कुछ सीखने कि ज़रूरत है.. !”
“ऐसा नहीं है… मुझे भी सीखना है कुछ कुछ.. तुम ही सीखा दो, जैसे प्यार करना.. !”
“वो तो मै सीखा ही दूंगी, सिखाना ही पड़ेगा क्योंकि मंत्री जी को जोड़ घटाव से ज्यादा कुछ आता नहीं.. !”
“हम्म !! और अब मंत्री जी नहाने जा रहें हैं.. मै फ्रेश होकर आता हूँ तब तक तुम चाहो तो अपने शादी के जोड़े में रेडी हो जाओ ना.. प्लीज़.. मेरा मन था उसी जोड़े में तुम्हें देखने का… !”
” कितने फ़िल्मी हो ना… ! फर्स्ट नाइट मतलब शादी का जोड़ा… इट्स लाइक टिपिकल फ़िल्मी एंड चिपो..!”
“अरे मेरी क्लासी बीवी, कभी कभी हस्बैंड कि बात मान लेनी चाहिए… आखिर हमारी ख़ुशी एक दूसरे कि ख़ुशी में ही तो है…
” समझ में आ रहा है मुझे, तुम्हारी ख़ुशी किसमे हैं.. !
“किस में हैं… वाओ तुम बहुत इंटेलिजेंट हो.. बट सिर्फ ‘किस’ में नहीं और भी मेरी ख़ुशी कि चीज़े हैं…
“मालूम है.. अब जाओ जल्दी फ्रेश होकर आ जाओ..
पिया ने उसे धकियाते हुए वाशरूम के अंदर भेज दिया और मुस्कुरा कर अपना शादी का जोड़ा निकालने अलमीरा कि तरफ बढ़ गयी….
कुछ देर बाद समर गुनगुनाते हुए बाथरूम से नहा कर निकल आया… उसने देखा ड्रेसिंग के सामने बैठी पिया तैयार तो हो रहीं थी लेकिन उसने शादी का जोड़ा नहीं बल्कि साड़ी पहनी हुई थी…
अपने गीले बालों से पानी झटकता वो उसके पास पहुँच गया…. उसके कंधो पर हाथ रखें सामने के आईने में उसे देखता हुआ वो मुस्कुरा उठा…
” तुम तो मुझसे भी ज्यादा रोमांटिक हो.. सीधे साड़ी ही पहन ली… वैसे साड़ी में तुम वाकई इतनी प्यारी लगती हो कि क्या ही कहूं.. !”
“कुछ मत कहो बस फटाफट रेडी हो जाओ….. !”
“अरे मुझे रेडी होने कि क्या ज़रूरत है जानेमन.. हम तो एवररेडी हैं… !”
“जी हाँ मंत्री जी ! मै जानती हूँ, लेकिन अभी आपको कपड़े पहन कर रेडी होना पड़ेगा… महल से रूपा भाभी सा का फ़ोन आया था… !”
“क्यों क्या हुआ… ?” समर के माथे पर सिलवटे पड़ गयी…
,”कुछ नहीं… वो राजा साहब कि तरफ से कोई पार्टी है, उसके लिए वो बुला रहीं थी… शायद उन्होंने शाम को भी आपको कॉल किया था… पर आप उनका कॉल ले नहीं पाए थे..
“हाँ और मैंने कॉल बैक किया तो वो नहीं उठा पायी.. ! पार्टी कि ही बात थी तो मना कर देना था ना.. !”
“,ऐसे कैसे उनकी बात काट देती…. आखिर वो लोग महल के लोग है.. उनकी बात काटने कि मेरी ज़ुर्रत नहीं है.. अब चलो फटाफट रेडी हो जाओ…
अपनी बात कह कर पिया अपनी जगह पर खड़ी हो गयी…
उसके कंधे पर हाथ रख कर खड़े समर ने धीमे से उसकी गर्दन को चूम लिया और कपडे बदलने चला गया….
*****
बाँसुरी के सामने शिकायतों का अम्बार लगा था… दीवान एक एक शिकायत बताने के बाद दिन भर कि रुपरेखा बताता जा रहा था… किसी जिले को संभालना कोई आसान काम तो था नहीं, वो भी ऐसा जिला जिसके अंतर्गत लगभग अस्सी से ज्यादा विकासखंड जुड़े थे और एक एक विकासखंड में ढेरों गाँव…
सबसे ज्यादा समस्याएं गाँव खेड़े की ही थी……
बिजली पानी की समस्या तो आम थी ही इसके अलावा बीज किसानों की अपनी अलग समस्याएं थी..
गाँवो को अलग कर देखा जाएं तो शहर में भी इसी तरह से समस्याओ का ढ़ेर था…
वो भी इन्हीं सब से उलझ रहीं थी की बाहर से कोई शोर आने लगा…
“बाहर किस बात का शोर हो रहा है दीवान साहब !”
दीवान दरवाज़ा खोल बाहर झांक आया…
“मैडम सत्ताईस खोली क्षेत्र की औरतें हैं.. नारेबाजी कर रहीं है..
“किस बात के लिए.. ? मसला क्या है.. ?”
“मैडम उस क्षेत्र में दारू का ठेका है.. दिन भर बिना लाइसेंस के अपनी दुकान चलाये रखता है, अहाता बना रखा है उसने.. सबसे सस्ते दामों पर दारू पिलाता है तो आसपास के लोग जूझे रहते हैं उसकी दुकान पर…
यहाँ मौजूद औरतों का कहना है की दारू की दुकान रिहायशी इलाकों के पास से बंद करवा दी जाएं, या फिर उसका समय निर्धारित कर दिया जाएं… वरना घर का आदमी दिन भर दारू के अड्डे पर पड़ा रहता है… !”
हाँ में सर हिला कर बाँसुरी उठ कर बाहर उन औरतों से मिलने चली गयी…
वो औरतें बाँसुरी को देखते ही चीख चिल्ला कर अपनी फरियाद उस तक पहुँचाने की कोशिश करने लगी…
बाँसुरी बिलकुल उन सब के बीच ही पहुँच गयी… और उसने हाथ उठा कर सबको शांत करने के बाद सबसे एक एक कर उनकी समस्या के बारे में पूछना शुरू कर दिया…
हर एक औरत की अलग समस्या थी पर जुड़ी सारी ही समस्याएं उस शराब के ठेके से थी…
किसी का अवयस्क बेटा बर्बाद हो रहा था तो किसी का पति नौकरी और काम धाम छोड़ अड्डे पर रात दिन पड़ा था… बाहर तेज़ धूप पड़ रहीं थी.. और उन सभी औरतों से बातचीत के बीच बाँसुरी अपने चेहरे पर हाथों से ओट किये आँखों पर पड़ने वाली धूप से खुद को बचाने की कोशिश में थी…..
धूप के कारण उसे अपनी ऑंखें खोलने में दिक्कत आ रहीं थी…
बार बार चेहरे के सामने हथेली की ओट करती बाँसुरी के पीछे उसी वक्त एक अर्दली छाता खोल कर खड़ा हो गया…
बाँसुरी ने चौंक कर देखा और पीछे खड़ा अर्दली सम्मान से उसे नमस्ते कर उसके ऊपर छाता ताने खड़ा रहा…
मुस्कुरा कर बाँसुरी उन सभी की बात सुनने लगी…
और उन सब से दूर उसी परिसर में अपनी लम्बी काली से गाड़ी से टिक कर खड़ा वासुकी भी आँखों ही आँखों में मुस्कुरा उठा…
दर्श ने उसे देखा और उसका कुछ नहीं हो सकता वाले अंदाज़ में कंधे उचका दिये…
“अच्छा तो ये कारण था जो तूने मुझे छतरी लेने के लिए दौड़ाया था…. साले कमीने… !खुद चला जाता ना.. !”
“अकेले छोड़ कर नहीं जा सकता, वरना किसी को बोलने की ज़रूरत नहीं थी… मै खुद ले आता.. ! कल के कल इस परिसर में ऊपर शेड के लिए कॉन्ट्रैक्ट डालना है दर्श… ! यहाँ उस हिस्से में बहुत धूप आती है.. लोगों को काम करने में असुविधा हो सकती है.. !”
“अनिरुद्ध वासुकी खड़ा है ना लोगों की असुविधा दूर करने के लिए… ! मैडम का ऑफ़िस है, उनकी मर्ज़ी के बिना शेड का काम कैसे चालू होगा.. !”
“मैडम के पास गांव के लोगो की अर्ज़ी जाएगी कि उनके इंतज़ार में धूप में बैठ कर रास्ता देखना पड़ता है मैडम.. कई बार बच्चे और औरतें भी आते हैं इसलिए इस हिस्से में शेड कि अत्यधिक आवश्यकता है… !”
दर्श ने दोनों हाथ जोड़ कर माथे से लगा लिए..
“आज चिनार वाला टेंडर निकलना है.. तू चलेगा मेरे साथ… ?”
“नहीं.. तू देख ले.. मै थोड़ी देर में पहुँचता हूँ.. ! वैसे भी ये टेंडर हमें नहीं लेना है.. !”
“अरे पर क्यों.. हमनें कोट तो किया था.. ?”
“हम्म, लेकिन ये कोटेशन मैंने हारने के लिए भरी थी.. तू बस देखता जा… कभी कभी कुछ ज्यादा बड़ा जीतने के लिए छोटा मोटा कुछ हारना भी पड़ता है.. !”
“तेरी माया तू ही जाने.. ! मै निकलता हूँ फिर, तू जल्दी आ जाना.. !”
दर्श दूसरी गाड़ी में वहाँ से निकल गया….
अपनी आँखों पर शेड्स चढ़ा कर वासुकी वापस उन औरतों कि समस्याओ और उनके बीच खड़ी बाँसुरी को सुनने लगा…
*******
समर और पिया के पार्टी में पहुँचते ही निरमा और प्रेम उनकी तरफ बढ़ आये… निरमा आगे बढ़ कर पिया के गले से लगी और उसे बधाई देने के बाद समर को बधाई दें कर सभी अंदर कि तरफ बढ़ गए….
राजा युवराज काका साहब और जय साथ बैठे थे.. रूपा और जया भी उनके साथ थे…
उनसे ज़रा हट कर पिंकी रतन बैठे थे, निरमा प्रेम समर और पिया भी राजा साहब से मिल कर उसी तरफ बढ़ गए…
सबकी टेबल पर खाने पीने का सामान रखा था… और वो लोग खाते पीते बातों में लगे थे… उसी वक्त समर कि माँ आई और पिया को अपने साथ लिए महल के बाक़ी लोगों जैसे फुफु सा और काकी सा से मिलवाने ले गयी…
रतन और पिंकी मिल कर समर को छेड़ रहें थे…
“क्यों भई समर, अब तक तो तुम बीवी का रोल अदा कर रहें थे, अब हस्बैंड बनने के बाद कैसा लग रहा है… !”
“अच्छा ही लग रहा है… वैसे अभी दिन ही कितने बीते हैं.. ?
और वैसे भी शादी एक कठिन काम है और उस पर किसी कठिन लड़की से शादी हो जाएं तो…
“सोने पे सुहागा… !”
प्रेम के ऐसा बोलते ही समर अपनी बात पूरी होने कि ख़ुशी में खिलखिला उठा, और साथ बैठी निरमा उसे घूर कर देखने लगी…
“अच्छा मतलब मै कठिन हूँ… ?”
“मैंने ऐसा कब कहा…? ये तो समर कह रहा था कि जीवन कठिन हो जाता है आदि इत्यादि, मैंने तो बस उसका आधा छोड़ा मुहावरा पूरा किया है… !”
पिंकी प्रेम कि बात सुन ताली बजाने लगी….
“अट्ठाइस… ! पुरे अट्ठाइस शब्द बोल दिये आज प्रेम भैया ने.. वैसे तो इनके मुहं से बोल ही नहीं फूटते… वैसे निरमा अब ये कुछ बोलने लगे हैं या अब भी पहले कि तरह ‘मगर मै चुप रहूँगा वाले जोन में रहते हैं ‘ !”
“उसी ज़ोन में रहने की कोशिश रहती है इनकी पर इनकी बिटिया इन्हे चुप रहने दें तब ना… दोनों ना जाने कहाँ कहाँ की बातें लेकर बैठ जाते हैं.. वो अपने स्कूल के सारे किस्से इन्हे ही सुनाती है और ये भी बिलकुल उसके बराबर के बन जाते है उसके किस्से सुनते वक्त.. मै तो एक्सिस्ट ही नहीं करती इन दोनों के बीच… मुझे बिलकुल हिटलर ममा बना कर रखा है दोनों ने… !
“फ़िज़ूल है ये… मै तो कभी हिटलर ममा नहीं बुलाता… !”
“सब जानती हूँ मै.. पीठ पीछे मेरा कितना मजाक बनाते हैं आप और आपकी बेटी.. मैं सब कुछ अच्छे से जानती हूँ …!”
” तुम बिना वजह शक करती हो मुझ पर..!”
” मैं और बिना वजह शक करती हूं आप पर… ?
आप शक करने का पूरा पूरा इंतजाम कर रखते हैं..! “
निरमा ने चेहरा बाकियों कि तरफ घुमा लिया
“आप सब को पता है..? जैसे ही मैं मीठी के रूम में पहुंचती हूं, दोनों बाप और बेटी मुझे देखकर एकदम खामोश हो जाते हैं, जैसे कि पता नहीं कौन सी चोरी पकड़ी गई हो, और मैं जैसे ही वापस निकल जाती हूं दोनों की ही ही हू हू वापस शुरू हो जाती है…!
मैं घर पर नहीं होती हूं तो अम्मा को एक किनारे करके दोनों मेरी पूरी रसोई को इस बुरी कदर से बर्बाद करके रखते हैं कि क्या कहूं..? और जैसे ही मैं घर पहुंच कर इन लोगों से पूछती हूं कि, किसने किचन में ऐसी तबाही मचाई है, तो दोनों बिल्कुल ऐसे बन जाते है जैसे, इन दोनों को कुछ पता ही नहीं है…
बाद में अम्मा चुपके से बताती हैं कि आज पापा और बेटी मिलकर मोमोज बना रहे थे…!
अच्छा और यह दोनों अपनी पाककला को करने के बाद उस आइटम को खा ले तो फिर भी राहत है, लेकिन इनके बनाए मास्टरशेफ के नमूने अक्सर हमारे प्रेम साहब के घोड़े खाते हुए मिलते हैं…
हमारे यहां के घोड़े चने नहीं खाया करते, वह खाते हैं मोमोज, चिल्ली पनीर, फ्राइड राइस, चाउमीन… कहे दे रही हूं प्रेम साहब किसी दिन आप के घोड़ों को ना आपके बनाएं खाने से दस्त लग जाएंगे…!”
” देखा मैंने कहा था ना तुम बेवजह शक करती हो..! मुझे कुकिंग में कोई शौक नहीं है… कभी कभार पकोड़े बना लिया करता था बस..!
प्रेम ने शरारत से निरमा की तरफ देखा और निरमा शरमा कर दूसरी तरफ देखने लगी….
” नहीं.. पर प्रेम भाई साहब का यह कहना कि बीवियां बेवजह शक करती हैं इस बात से मैं भी इत्तेफाक रखता हूं…!
अबकी बार रतन ने कहा और पिंकी उसे घूरने लगी..
” कब किया है मैंने तुम पर शक.. बताओ जरा..? तुम दिन दिन भर अपनी मीटिंग में बिजी रहते हो, पर मैं बस दो-चार बार फोन करती हूं.. ! तुम तुम्हारी खूबसूरत सी सेक्रेटरी के साथ दौरे पर दौरे करते हो लेकिन मैं सिर्फ फोन ही तो करती हूं.. तुम रात में आठ बजे डिनर पर आ जाऊंगा बेबी, मेरा वेट करना कह कर मुझे इंतजार करवाते रहते हो, रात में 11 बजे आते हो और कहते हो टीएल मीटिंग खत्म नहीं हुई और वही हमें डिनर सर्व कर दिया गया… मैं चुपचाप मान जाती हूं, इसके बाद भी कह रहे हो कि शक कर रही हूं..!”
” यह अभी जो आप सबके सामने हमारी मोहतरमा ने कहा कि मैं सिर्फ दो से चार बार फोन करती हूं यह दो से चार बार इनके वीडियो कॉल आते हैं, और हमें दुनिया वालों से फोन छुपा कर इन्हें दिखाना पड़ता है, कि हम टीएल मीटिंग में आदमियों के साथ ही मीटिंग कर रहे हैं..
जब दौरे पर जाता हूं तब भी मैडम के वीडियो कॉल ही आते हैं.. अब जनदर्शन कार्यक्रम के बीच में वीडियो कॉल उठा के इन्हें यह दिखाना कि मैं उस वक्त कहां मौजूद हूं कितना कष्टकर होता है, यह मैं ही समझ सकता हूं! और रही बात डिनर नहीं करने की तो वह बचा हुआ डिनर बड़े सलीके से हमारी पिंकी मैडम अगले दिन गर्म करके हमें खिला देती हैं…!”
” हां तो अच्छा करती है ना… वैसे भी कलेक्टर साहब खाना वेस्ट नहीं करना चाहिए..!”
समर रतन को चिढ़ाने लगा और रतन ने अपनी आपबीती उन सबके सामने रख दी…
” भाई समर, अगर रात के खाने का पराठा सब्जी दूसरे दिन सुबह गर्म करके मिलेगा तो फिर भी राहत है.. लेकिन एक रात पहले की बिरयानी अगर नाश्ते में मिलती है ना तो दिल पर क्या गुजरती है मैं ही जान सकता हूं.. !
और उस पर हमारी मैडम जी हमारे सामने बैठकर एकदम एग्जॉटिक ब्रेकफास्ट करती हैं.. !ड्राई फ्रूट, फ्रूट एंड जूस साथ में क्लब सेंडविच पीनट बटर के साथ और हम क्या खाते हैं नाश्ते में बासी बिरयानी…
बताओ शहर के लोगों को पता चले कि उनके जिलाधीश महोदय की उनके घर पर यह दुर्गति है तो लोग क्या सोचेंगे..? यार क्या इमेज रह जाएगी..? पर यह भी है कि सब यह जानते हैं कि भले ही कलेक्टर शहर का कलेक्टर होगा लेकिन शादी तो आखिर राजकुमारी से की है ना तो झेलना तो पड़ेगा ही..!”
समर ने इस सारी बातचीत के बीच एक बार झांक कर पिया की तरफ देखा…
पिया उसकी मां के साथ काकी सा और फुफु सा के साथ बैठी बातें कर रही थी.. वह भी बीच-बीच में समर को झांक कर देख लेती थी…
दोनों की नजरें मिली और दोनों का ही ध्यान अपने अपने हाथ पर बंधी रिस्ट वॉच पर चला गया घड़ी की सुई 2 बजा रहीं थी…
अगले दिन सुबह पिया की ड्यूटी थी और उसे अब घर जाने की और सोने की जल्दी हो रही थी उसने अपने हाथ की घड़ी की तरफ समर को देखकर इशारा किया.. और समर ने हां में सिर हिला दिया…
समर को पिया की तरफ देखते हुए प्रेम और रतन दोनों ने हीं देख लिया…
” क्या बात है समर बाबू.. ! दो पल की भी जुदाई बर्दाश्त नहीं हो रही..! ऐसे ठीक भी है नई-नई शादी हुई है ना, अभी तो बीवी उतना शक भी नहीं करती होगी..!”
” सच कहूं रतन सा, मेरी बीवी मुझ पर शक ही नहीं करती..!”
” ऐसा तुम्हें लगता है.., पर सच यह है कि ऐसा होता नहीं,,, दुनिया की कोई भी बीवी ऐसी हो नहीं सकती जो अपने हस्बैंड पर शक ना करें..!”
” पिया पढ़ी लिखी है समझदार है..!”
” कहना क्या चाहते हो मेरी निरमा पढ़ी-लिखी नहीं है..? या पिंकी पढ़ी-लिखी नहीं है..?”
” अरे प्रेम साहब आजकल एकदम घोड़े पर सवार हो गए हैं..? क्या बात है प्रेम बाबू..?”
समर ने प्रेम के कंधे पर एक धौल जमाते हुए कहा और प्रेम और रतन एक दूसरे को देखने लगे…
” अगर इतना ही विश्वास है अपनी पिया पर तो एक चांस ले कर देख लो समर..?
रतन के ऐसा बोलते ही निरमा तुरंत बोल पड़ी…
” नई-नई शादी हुई है उनकी, अभी आप लोग क्यों उन दोनों के बीच में जबरदस्ती दूरियां पैदा करने का काम कर रहे हैं! समर इन दोनों की बात सुनने की कोई जरूरत नहीं है..! तुम्हें पिया का किसी तरह का कोई टेस्ट लेने की जरूरत नहीं है..! एक बात यूनिवर्सल ट्रुथ है कि बीवियां ज्यादा समझदार होती है और फिजूल में कभी भी अपने पति पर शक नहीं करती..!”
” तो हो जाए दूध का दूध पानी का पानी..! लेकिन शर्त यह है कि यहां मौजूद हम पांचों में से कोई भी पिया से कुछ भी नहीं कहेगा और तुम्हारे पास सिर्फ 2 दिन का समय है, समर ! तुम हमें यह साबित कर दो कि पिया तुम पर चाहे तुम कुछ भी कर लो शक नहीं करेगी…! बोलो मंजूर है..?”
” मंजूर है..!”
प्रेम ने निरमा की तरफ देखा और फिर पिंकी की तरफ देखने लगा…
” क्या आप दोनों लेडीस पर हम इस बात के लिए ट्रस्ट कर सकते हैं कि हमारे बीच लगी यह शर्त पिया तक नहीं जाएगी…?”
निरमा ने कंधे उचका दिए और पिंकी ने भी धीरे से हां में सर हिला दिया…
रतन ने हंसते हुए समर की तरफ हाथ बढ़ाया और समर ने अपना हाथ आगे कर दिया…
उन दोनों के हाथों पर प्रेम ने अपना हाथ रखा और मुस्कुराकर समर की तरफ देखने लगा…
” 2 दिन का समय है तुम्हारे पास… पर इन 2 दिनों में तुम बिना किसी चीटिंग के पिया को यकीन दिलाने की पूरी कोशिश करोगे कि तुम उसे चीट कर रहे हो..! गॉट इट!”
समर ने मुस्कुराकर हां में सिर हिलाया और पिया की तरफ देखने लगा… पिया उसे ही देख रही थी ! उसने वहां से क्या हुआ का इशारा किया और समर ने मुस्कुरा कर ना में सर हिला दिया…
क्रमशः
aparna…
