
जीवनसाथी -2 भाग -28
दर्श के ड्राइवर ने उन चारों को एक साथ एक गाड़ी में बैठाया और गाड़ी भगाते हुए अस्पताल की ओर ले उड़ा …
शेखावत दर्द से तड़पते हुए बेहोश होने की हालत में पहुंच चुका था और उसकी हालत देखकर ड्राइवर तेजी से गाड़ी भगा रहा था, आखिर वो अस्पताल तक पहुंच गया और उसने अस्पताल के इमरजेंसी में शेखावत को भर्ती करवा दिया…
डॉक्टरों की देखरेख में शेखावत का इलाज शुरू हुआ और ऑपरेशन थिएटर के बाहर चरण दिगपाल और सुखबीर अपने अपने माथे पर हाथ धरे बैठे रह गए…
” पूरा रावण है यह वासुकी शेखावत ने सोचा भी ना रहा होगा कि उसका हाथ ही काट देगा कमीना… !”
” हम लोगों ने भी कहां सोचा था कि वह इस हद तक हमारे ही साथ चला जाएगा.. ? आखिर हम सब उसके साथ व्यापार कर रहे हैं और अचानक वह शेखावत पर ऐसे भड़क उठा… !”
” उसके भड़कने के पीछे का कारण कुछ ना कुछ तो है… वैसे वो साला पागल, सनकी है पूरा ! कब किस बात पर भड़क कर क्या कर बैठेगा यह कोई नहीं जानता…वैसे उसके एक से बढ़ कर एक किस्से मशहूर हैं…..
मैंने सुना था एक किसी लड़के पर भी इसका बेइंतिहा गुस्सा उतर चुका है.. हुआ ये कि एक लड़के को किसी लड़की से प्यार हो गया था, उसने एक तरफा प्यार में धोखा खाने के बाद लड़की के चेहरे पर तेजाब डालने की कोशिश की थी… वह लड़की भाग कर बचने की कोशिश में वासुकी कि कार से टकराते टकराते बची… और वासुकी ने दरवाजा खोलकर उससे सारा माजरा सुना और उसके पीछे भाग कर आते लड़के के हाथ से तेजाब की बोतल छीन कर उसकी दो उंगलियां उसी तेजाब की बोतल में डूबा दी थी….
लड़का तिलमिला कर रह गया था और उसी वक्त वासुकी ने उस लड़के को धमकी दी कि अब आइंदा इस लड़की ही नहीं और भी किसी लड़की को अगर गलत नजर से देखेगा या उन पर तेजाब डालने जैसा कोई पाप काम करने की सोचेगा भी तो उसकी आंखों में इसी तेजाब का आई ड्रॉप बना कर डाल देगा…
एक तो वासुकी का डीलडौल देखकर ही आधा तो लोग उससे डर जाते हैं… बाकी बची उसकी उटपटांग धमकियां और सजाएं…
लोगों को सज़ा भी तो अजीबोगरीब देता है वह…
” हां !! मैंने भी सुना है, वासुकी कि फर्म में काम करने वाला एक आदमी अपनी पत्नी को बहुत मारता पीटता था, एक बार गुस्से में उस आदमी ने गरम गरम कुकर उठाकर अपनी पत्नी के ऊपर फेंक दिया था और वह कुकर उसकी बीवी के चेहरे पर जा लगा.. !
गर्म कुकर से वह बेचारी कैसे कलबला कर जली होगी… अड़ोस पड़ोस की मदद से किसी तरह वो अस्पताल पहुंची, और उसी किसी पडोसी कि शिकायत पर उस औरत से मिलने वासुकी भी वहाँ पहुँच गया और जब उसने उस औरत को देखा….., उसके बाद कि तो सुन कर सिहरन सी हो जाएगी..
वासुकी उस औरत के पास गया और जब उसे यह जानकारी मिली कि उसके पति ने उसके साथ ऐसा किया है, वासुकी तुरंत उसके पति के पास पहुंचा और उसे अपने साथ लें गया और खौलते तेल की कड़ाही में उसकी दोनों हथेलियां डूबा दी…..
” हे भगवान कितनी पापी आत्मा है यह वासुकी!! लगता है 100 चांडाल मरे होंगे तब इसका जन्म हुआ है.. !
” सही कह रहे हो, मैंने तो यह भी सुना है कि यह रात रात भर जाग के मसानो के चक्कर काटता है… ! मुझे जाने क्यों यह अघोरी लगता है… !
आधी आधी रात में बैठकर श्मशान में धूनी रमाता होगा, क्योंकि जिस बेदर्दी से यह दूसरों को सज़ा देता रहता है यूं लगता ही नहीं कि इसके दिल में थोड़ी भी ममता या प्यार है…
…. इसे किसी के ऊपर तरस आता ही नहीं | चाहे तुम इसके कितने भी खास दोस्त हो, अगर इसकी नजर में कुछ तुमने ऐसा कर दिया जो गलत है, तो यह तुम्हें सजा देने से कभी पीछे नहीं हटता…
और उस पर तुर्रा यह मारता है कि मेरे बनाए संसार में मैं ही सब कुछ हूं ! अगर प्यार कर सकता हूं तो सजा देने का अधिकार भी मुझे ही है..! मेरे साथ जो गलत करेगा उसे सजा भी मैं अपने तरीके की दूंगा ! उसकी सजा चुनने का पूरा अधिकार मुझे है… !
वह तीनों घबराए हुए से बातों में लगे थे कि डॉक्टर बाहर चले आए…
डॉक्टर ने उन लोगों को बता दिया कि अब शेखावत खतरे से बाहर है.. लेकिन उसका हाथ जोड़ा नहीं जा सका..
अब आजीवन शेखावत को एक ही हाथ के साथ गुज़ारा करना होगा… !
डॉक्टर के ऐसा बताते ही वह तीनों तुरंत शेखावत से मिलने अंदर चले गए, शेखावत होश में आ चुका था और बुरी तरह से गुस्से में था….
“उस नीच औरत और इस हरामखोर वासुकी को मैं छोडूंगा नहीं..!”
दाँत भींचते हुए शेखावत ने ज़हर उगलना शुरू किया..
“मुझे किसी भी कीमत पर उन दोनों की लाश चाहिए…!”
“पर उस औरत ने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा.. ?” सुखपाल के सवाल पर वो तिलमिला गया..
“क्या बिगाड़ा है ये पूछ रहे हो तुम.. ? जन्म भर के लिए लूला कर दिया उस कमीने ने… !
और इस सब के पीछे वहीँ औरत है… कुछ तो चक्कर है इसके पीछे… और ये राज़ तभी खुलेगा जब ये औरत हमारे शिकंजे में होगी… !
हर किसी की कोई ना कोई कमी तो होती ही है… जैसे राक्षस की जान उस तोते में कैद थीं, वैसे ही इस वासुकी की जान उस कलेक्टर में कैद है…
इस तोते का टेंटुआ दबाते ही राक्षस अपने घुटनों में चल कर हम तक आएगा.. देख लेना… !”
“वो राक्षस नहीं नागराज है.. उससे पन्गा मत लो शेखावत.. ! अभी तो एक ही हाथ कटा है..पता चला दोनों हाथ दोनों पैर काट कर तुम्हें पूरा भिखारी बना कर छोड़ देगा वो अघोरी…. उसका भरोसा नहीं किया जा सकता… ! “
“इसलिए तो ऐसा प्लान बना रहा हूं की ये सांप मरेगा भी और माफ़ी भी मागेंगा…. !”
“करना क्या चाहते हो तुम… ?”
“वक्त आने पर सब बता दूंगा.. अभी ये याद रखो की यहाँ से निकलने के बाद हमें वासुकी के साथ एक मीटिंग फिक्स करनी है.. उस मीटिंग में वन संरक्षक अधिकारी को भी बुलाएँगे और उस ज़मीन में बारे में सारी बातचीत इस ढंग से तैयार करेंगे कि वासुकी हमारे खिलाफ न जा सके.. ! उसके बाद वासुकी और उन अधिकारी का सपोर्ट रहने से कलक्टरनी भी ज्यादा चपड़ चपड़ न कर पाएगी.. एक बार उसका साइन हो जाएं फिर देखता हूं क्या करती है वो.. और उसका ये सिरफिरा आशिक.. !”
“मुझे तो लग रहा है वासुकी से पंगा लेना महंगा ही पड़ेगा… एक बार और सोच लो शेखावत ! जाने क्यों उसे देख कर मुझे तो लगता है लाशें खाता है ये !”
चरण कि बात पर शेखावत ने उसे घूर कर देखा और मुहं फेर कर लेट गया… वो तीनों एक दूसरे का मुहं देख कर चुप रह गए….
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राजा और शौर्य के महल में पहुंचने के अगले दिन ही पिंकी और रतन भी महल पहुंच गए…
पिंकी बहुत दिन से अपने मायके नहीं आई थी रतन का भी उस तरफ कुछ काम पड़ रहा था, इसलिए पिंकी भी सब से मिलने उसके साथ चली आई..! इतने दिनों बाद महल पहुंचकर ऐसा लग रहा था जैसे पिंकी का बचपन वापस लौट आया हो…
पिंकी खुश थीं, सभी से मिलकर सभी से बातें करके उसे बहुत अच्छा लग रहा था…! लेकिन वह भी महल में बांसुरी को बहुत मिस कर रही थी…!
वैसे भी देखा जाए तो बांसुरी उसकी भाभी बाद में थी और उसकी दोस्त पहले थी..!
उसे रह-रहकर बांसुरी के साथ बिताया मुंबई का वह समय याद आ रहा था, जब वह दोनों ही अपने उस अल्हड़ से दौर में थी जहां न किसी तरह की कोई जिम्मेदारी थी और ना ही दबाव…
उसे बार बार वह पल याद आ रहे थे जब वह अक्सर बात बातों बातों में बांसुरी के लिए देखे जा रहे रिश्तो का मजाक बनाती हुई उससे यह कहा करती थी कि इन सब को छोड़कर तू मेरे भाई से शादी कर ले…
आज इतने सालों बाद उसे अपनी कहीं वह बात याद करके हंसी आ रही थी… महल में उसके आसपास सब कुछ था… नहीं थी तो बस उसकी वह प्यारी सखी जो उसकी तैयारियों के दौरान उसके साथ रात रात भर जागा करती थी…
राजा को शौर्य के साथ हंसते खिलखिलाते देखकर जाने क्यों पिंकी को यही लग रहा था कि राजा अंदर ही अंदर बांसुरी के बिना घुल रहा है हालांकि वो यह भी जानती थी कि अभी उन दोनों को अलग हुए बहुत ज्यादा वक्त नहीं बीता था, लेकिन इसके साथ ही उसे यह भी पता था कि उसका भाई बांसुरी पर अपनी जान छिड़कने लगा था….
पिंकी के आने से पिंकी की मां, रूपा भाभी, जया भाभी सभी बहुत खुश थे और इसलिए पिंकी के आते ही घर में हवन पूजन की तैयारियां शुरू हो गई थी..! पूरा दिन हवन और पूजा पाठ में बीतने के बाद शाम को रूपा भाभी ने सारे महल वासियों के लिए एक बार फिर से पार्टी का आयोजन कर दिया था ! वैसे भी महल वासियों को बात बात पर पार्टी करने की आदत थी, और इन लोगों को जश्न मनाना अच्छा लगता था ! वह जिस तरह किसी भी बड़े दुख में एक दूसरे का सहारा बन साथ खड़े हो जाते थे, वैसे ही छोटी-छोटी खुशियों में भी उन्हें उन खुशियों को जीना आता था…
खुशियों में डूबी पार्टी की तैयारी करती रूपा भाभी के पास जया पहुंच गई और उसने रूपा को टोक दिया…
” रूपा भाभी साहब ! बांसुरी को गए हुए 2 दिन ही बीते हैं क्या ऐसे में पार्टी करना कुमार को अच्छा लगेगा..?”
रूपा ने मुस्कुराकर जया की तरफ देखा और उसके गालों को थपथपा दिया..
” कुमार और शौर्य का मन बहला रहे इसीलिए तो यह पार्टी का बहाना खोजा है हमने… वरना बांसुरी को गए हुए इतना कम वक्त बीता है, कि हमारा भी कुछ करने का मन नहीं था !
हम समझ सकते हैं कुमार जब भी अपने कमरे में जाएंगे उनके सामने बार-बार बांसुरी का चेहरा आएगा… वह तो शौर्य के कारण हंसते खिलखिलाते रहते हैं लेकिन हम यह भी जानते हैं कि कुमार बांसुरी को बहुत मिस कर रहे हैं..!
अगर इस तरह के कुछ एक आयोजन हो जाएं तो इसी सब में उनका मन बहल जायेगा… “
“सही कह रहीं है आप भाभी साहेब.. !” रेखा भी वहाँ चली आई…
“आपका काम कैसा चल रहा है रेखा.. ?”
“काम तो बहुत अच्छा चल रहा है.. एक प्रोजेक्ट कि मीटिंग के लिए हमें शिमला जाना पड़ सकता है.. !”
“अच्छा.. ? कब.. ?”
“अगले हफ्ते तक जाना है.. वही सोच रहें विराज सा से बात कर के पूछे या जाना कैंसिल कर दें.. !”
“जाना क्यों कैंसिल करोगी? विराज से बात कर लो.. उन्हें आपत्ति तो नहीं होनी चाहिए, हो सकता है वो भी साथ चलें जाएं.. !”
” उनका तो बहुत मुश्किल है भाभी साहब… जब से राजनीति में उतरे हैं आजकल उनका वक्त ही उनका नहीं रह गया है… पार्टी कार्यालय में बैठे-बैठे सारा दिन जाने क्या करते रहते हैं… उसके अलावा बाकी वक्त पर उन्हें यूनिवर्सिटी में देखने जाना पड़ता है…! और वैसे भी वो राजा अजातशत्रु नहीं है जो अपनी बीवी के पीछे पीछे घूमें…. बासुँरी जैसी किस्मत हर औरत कि नहीं होती… !” ये बात सुन कर रूपा के चेहरे पर एक हलकी सी उदासी की रेखा चली आई लेकिन खुद को समान्य दिखते हुए वो बातों में लग गयी…
” हां यह बात तो है कुमार ने विराज को बहुत ज्यादा व्यस्त कर दिया है…!”
रूपा की बात सुन रेखा मुस्कुरा उठी…
” एक तरह से उनके लिए यह सही भी है रूपा भाभी सा! वरना हमारे पतिदेव में ऐबों की कमी तो है नहीं… इस समय व्यस्त रहते हैं तो थोड़ा इधर-उधर ध्यान कम जाता है…
” राजे महाराजे हैं भाई इनकी शान है यह सब..!”
जया ने माहौल को हल्का करने की कोशिश की और महल की तीनों बहुएं आपस में हंसती खिलखिलाती शाम के जलसे की तैयारियों का जायजा लेने लगी….
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पिया अस्पताल में मरीज देख रही थी कि, तभी उसका मोबाइल बजने लगा उसने देखा समर का फोन आ रहा था…
“क्या कर रहीं हो वाईफ़ी .. ?”
” कुएं में से पानी निकाल रही थी..?
” व्हाट !! तुम कहां कुएं के पास पहुंच गई?”
” जिस गांव मैं सुबह तुम उतार कर गए थे, बस उसी पनघट पर हम अब तक खड़े हैं सैंयां जी… .!”
” मैं तो सुबह तुम्हें अस्पताल में छोड़ कर गया था..!”
” तो फिर यह सवाल क्यों पूछ रहे हो.? अस्पताल में मरीज़ ही तो देखूंगी… !”
” ओहो मेरी क्लासी वाईफ़ी मुझे स्टाइल से जवाब दे रही है..!”
“यस माय क्लासी हस्बैंड.. ! वैसे आप क्या कर रहें हैं.. ?”
“हम तो अब तक कुंआ खोद रहें हैं… ?”
“क्यों.. ? राजा साहब की रियासत में कुआं खोदने का काम शुरू हुआ है क्या..?”
” हम अपने खुद के लिए कुंवा खोद रहे हैं.. प्यासे जो हैं…!”
” क्यों आपके शानदार फाइव स्टार ऑफिस में आर ओ नहीं लगा हुआ है.. पानी नहीं मिलता आपको वहां…?”
” पानी वाली प्यास नहीं है भई… बीवी की प्यास है… जाने कब बुझेगी…?”
” छी मंत्री जी..! इतने वल्गर हो गए हैं आप..?”
” हाय बस इतने में ही वल्गर लग गया ? अभी तुम्हें पता ही क्या चला हमारे बारे में..? 2 दिन हो चुके हैं हमारी शादी को और हमारी वाइफ है कि दो दिन से इमरजेंसी में नाइट पेशेंट देख रही है…!”
” आज नहीं देखना पड़ेगा… ! आज एमरजैंसी वाला डॉक्टर छुट्टी से वापस लौट आया है.. उसका बुखार उतर गया है! “
खुशी से चहकते हुए पिया ने धीरे से फुसफुसाकर फोन में कहा और दूसरी तरफ से समर के भी खुशी से चिल्लाने की आवाज पिया को सुनाई दें गयी ..
” अरे इतना खुश मत हो.. आप के आस पास वाले सोचेंगे कि पता नहीं मंत्री जी की कौन सी लॉटरी लग गई..?”
” मेरी वाइफी लॉटरी से कम है क्या..? तो शाम को तुम्हें लेने आ जाऊं…? तुम्हारे हॉस्पिटल से तुम्हें पिक कर लूंगा.. वहां से हम मूवी चलेंगे, मूवी के बाद एक शानदार डिनर और उसके बाद तुम मैं और हमारा बैडरूम..!”
” आइडिया बहुत अच्छा है हस्बैंड ! अगर आपके पास कोई काम ना आ गया तो..! क्योंकि मेरी तो शाम की कोई ड्यूटी नहीं है और मैं ऑल फ्री हूं..!”
“इसी बात पर कुछ मिल जाता तो अच्छा रहता.. ?”
“पागल हैं क्या.. ? यहाँ बाहर मरीज़ो का जमघट लगा कर अंदर डॉक्टर अपने पतिदेव से फ़ोन पर बात कर रहीं यहीं बहुत ख़राब साऊंड करता है, उस पर मोबाइल पर किस… छी इट्स सो चीप रोमांस.. ! मैं नहीं कर सकती… !”
” रोमांस के भी टाइप्स होते हैं क्या.. ?”
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बिल्कुल होते हैं, क्लासी एंड चिपो…!एंड ऑफकोर्स आई लाइक क्लासी वन.. !”
“हम्म ठीक है… बहानेबाज बीवी… देख लूंगा तुझे भी और तेरी अकड़ को भी… आओ कभी हवेली पर.. !”
“शाम में बिल्कुल टाइम पर पहुँच जाना… मैं इंतज़ार करुँगी.. !”
हंस कर पिया ने फ़ोन रख दिया…
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क्रमशः
aparna….
अगले भाग कि झलक….
