जीवनसाथी- 2/22


जीवनसाथी 2 भाग 22

    राजा का गाना पूरा होते ही वहाँ तालियाँ बजने लगी….. कुछ देर को किसी के पास कहने को कोई शब्द ही नहीं बचा था जैसे..

   रूपा भाभी ने ही वापस माइक संभाला और कहना शुरू किया !  अब वो बाँसुरी से गाने के लिए कहने जा रहीं थीं कि भागता हुआ शौर्य आया और बाँसुरी कि गोद में चढ़ गया…
  वो अपने साथ चॉकलेट लेकर आया था.. उसने बाँसुरी कि तरफ चॉकलेट बढ़ा कर खाने कि इजाज़त मांगी और बांसुरी ने उसकी तरफ देख कर न में सर हिला दिया…
   शौर्य के ज़िद करने पर रूपा और जया उसकी तरफदारी भी करने लगीं…

“खा लेने दो ना बाँसुरी.. !”

“भाभी साहब आज सुबह से दो खा चुका हैं, और इसकी डेली लिमिट दो चॉकलेट ही हैं.. इससे  ज्यादा इसे खाना ही नहीं हैं…. अब ये वाली चॉकलेट शौर्य कल खायेंगे.. हैं न बेटा.. !”

शौर्य ने ना में सर हिला दिया और मुहं फुला कर हाथ बांध कर खुद को गुस्सा दिखाते हुए बैठ गया…. बाँसुरी ने अपने दोनों हाथों कि उँगलियों से उसके फुले हुए गालों पर उँगलियाँ लगायी और हँसते हुए उसे छेड़ने लगी…

  “छोटा गुल्ला, बड़ा गुल्ला
   शौर्य के मुहं में रसगुल्ला….  कहाँ हैं.. कहाँ हैं….  ? यहाँ है… !”

कहते हुए उसने बलून फूटने जैसे शौर्य के गालों पर किया और शौर्य हँसते हुए बाँसुरी के गले से लग गया…

” आप गंदी मम्मा हो.. !”

“अच्छा.. ! क्यों भला.. ?”

“चॉकलेट नहीं देती हों.. !”

“तो डैड से बोलो चॉकलेट देने वाली मम्मा ले आये आपके लिए, और ये गन्दी मम्मा चली जाएगी फिर.. ! इस इट ओके शौर्य.. !”

“नहीं…. !” बोल कर वो वापस बाँसुरी की बाँहों में झूल गया… 

रूपा ने बड़े प्यार से शौर्य के सर पर हाथ फेरा और उसे अपने पास खींच लिया…

“हमारे लाड़ले को किसने नाराज़ किया.. इधर आइये  शौर्य, देखिये ताई सा आपके लिए क्या लेकर आयी हैं… ?”

शौर्य उछल कर रूपा की गोद में जा घुसा और रूपा ने वहीँ कुछ दूर खड़े एक नौकर को इशारा किया और नौकर जाकर एक सफ़ेद कद में ज़रा छोटा घोडा ले आया……
   घोड़े को देख कर शौर्य किलकते हुए तालियाँ बजाते हुए घोड़े के पास जाने को मचलने लगा,और रूपा उसे गोद में लिए उस तक जाने को थीं की प्रेम और आदित्य दोनों ही एक साथ आगे बढे और फिर आदित्य शौर्य को गोद में लिए घोड़े तक पहुँच गया…  घोड़े की पीठ पर बैठा कर आदित्य उसे सैर के लिए ले गया और प्रेम वापस आ बैठा…

“प्रेम तुम ऐसे बिना निरमा का गीत सुने जा नहीं सकते… ! बचने की कोई गुंजाइश नहीं हैं तुम्हारी.. !”

रूपा के उसे छेड़ते ही प्रेम भी बोल पड़ा…

“सारा दिन इन्हीं के तो गाने सुनता हूं.. !”

प्रेम ने भी धीमे से कह दिया….. और सारे लोगों के चेहरे पर हंसी खेल गयी…

” उन्हें छोड़िये रूपा भाभी साहब,  यहाँ जो बेक़रार बैठे हैं उनका तो गीत सुन लीजिये… !”

निरमा ने समर की तरफ इशारा कर दिया…

और रूपा भी खिलखिला कर उसका समर्थन कर बैठी…

“हाँ भई समर चलो अब तुम भी कुछ सुना ही दो.. वैसे बाँसुरी और निरमा बता रहें थे कि, काकी सा अब तुम पर शादी  कर लेने के लिए कुछ ज्यादा ही ज़ोर डालने लगी हैं.. !”

“भाभी साहब आपको बस इतना ही पता हैं क्या.. ?”

“हाँ.. इससे ज्यादा तो नहीं पता.. क्या बात हैं.. ?”

“अरे काकी सा ने एक लड़की देख कर सब तय कर दिया है…. ” निरमा के ऐसा कहते ही सारे लोग आश्चर्य से समर की तरफ देखने लगे और समर ने शरमा  कर अपनी पलकें नीचे झुका ली,  सामने बैठी पिया भी उसे घूर घूर कर देख रही थी…

” मैं सही कह रही हूं भाभी साहब अगर आपको विश्वास ना हो तो खुद समर सा से पूछ लीजिए…!”

” सच बताइए समर, क्या सच में काकी सा ने आपका रिश्ता पक्का कर दिया है…?”

समर ने धीरे से हां में सर हिला दिया…

” मां की तबीयत इधर कुछ दिनों से कुछ ज्यादा ही ऊपर नीचे हो रही थी! यहां पर डॉक्टरों को दिखाने के बाद डॉक्टरों ने किसी बड़ी जगह जाकर दिखाने को कहा है ! मैं मां को दिल्ली लेकर जाने की सोच रहा था लेकिन पता नहीं मां के मन में क्या बैठ गया है कि, उनका कहना है एक बार तेरी शादी हो जाए उसके बाद ही मैं इलाज करवाऊंगी… मैं जानता हूं मां मुझे इमोशनल ब्लैकमेल कर रही है!  लेकिन अब मेरे पास भी कोई चारा नहीं रह गया है ! उनके हिसाब से उनके बेटे की उम्र हो गई है, और वह बुड्ढा हो गया है! अगर इस साल मैंने शादी नहीं की तो, मेरी शादी की उम्र ही खत्म हो जाएगी और बस मां की ज़िद भी ऐसी है कि उन्हें ना मैं समझा पा रहा हूं और ना पापा…..
   उन्होंने हाथ में पानी लेकर कसम खा ली कि कल के कल अगर मैंने शादी नहीं की तो वह डॉक्टर को दिखाने दिल्ली नहीं जाएंगे…!”

समर की बात सुनते ही पिया के हाथ में रखी प्लेट गिरते-गिरते बची |  बड़ी मुश्किल से उसने उस प्लेट को थामा और समर की तरफ देखने लगी | समर गहरी नजरों से उसी की तरफ देख रहा था…

” मैं क्या करूं.. मुझे समझ में नहीं आ रहा |  मैंने पूरी कोशिश की कि मां को समझा सकूं, लेकिन वो अब समझने को तैयार ही नहीं है!  उन्हें समझाने के अलावा मैं और जो कुछ भी कर सकता था, सब करके देख चुका हूं !  लेकिन मेरी बात अब ना कोई सुनने को तैयार है, और ना समझने को!  मुझे लग रहा है कि मुझे हथियार डालने ही होंगे और मां की कही लड़की से शादी करनी ही होगी..!”

” हां तो अच्छा ही है ना समर… मुझे वैसे भी परसों निकलना है ! मेरे निकलने के पहले पहले अगर तुम्हारी शादी हो जाती है, तो मैं भी दुल्हन को देख कर चली जाऊंगी ! वरना यह होता कि मैं वहां जाकर ज्वाइन करती और यहां 4 दिन बाद तुम फोन कर देते कि, भाभी साहब वापस लौट आइए मेरी शादी हो रही है.!”.

बांसुरी के ऐसा कहते ही निरमा जोर से हंस पड़ी…

” सही है !  तुम तो बस अपना फायदा देखो |  कल शादी भी अटेंड कर लेना और परसों निकल कर वहाँ  जॉइन भी कर लेना |  वैसे एक बात बताओ,  तुम्हें वहां पहुंचने में कितना वक्त लगेगा…? “

” लगभग 15-16 घंटे लग जाएंगे… परसो शाम की फ्लाइट है…!  जहां मेरी पोस्टिंग है उस शहर से लगभग दो-तीन घंटे की दूरी पर ही एयरपोर्ट है, तो मुझे यह सुविधा मिल जाएगी..!”

” तब तो अच्छी बात है|  मतलब परसो तुम्हें पैकिंग का पूरा वक्त मिल जाएगा, तो फिर कल हम सब एक साथ मिलकर समर की शादी एंजॉय कर लेंगे…

निरमा और बांसुरी की बातें सुन रूपा और जया एक दूसरे को देखने लगी!  रूपा ने बनावटी गुस्से के साथ समर की तरफ देखा और उसके बाद निरमा को उलाहना देने लगी…

” लेकिन यह तो बहुत गलत बात है, काकी सा ने हमसे कुछ कहा ही नहीं ! अब कल शादी है, और आज यहाँ  बातों बातों में हमें पता चल रहा है कि कल ही समर  की शादी है ! लेकिन हमें एक बात समझ नहीं आ रही, हम राजपूतों में तो शादी कम से कम 3 दिन की होनी ही चाहिए… फिर काकी साहब एक दिन में सब कुछ कैसे निपटा दे रही है..!”

रूपा की बात का जवाब भी वापस निरमा ने ही  दिया…

” भाभी साहब आप भी जानते हैं, कि काकी सा के लिए आपसे पूछे बिना कोई भी निर्णय लेना कितना मुश्किल है ! बात दरअसल यह थी कि, उनकी तबीयत वाकई बिगड़ रही है ! और इसीलिए काका साहब और समर सा का बहुत जोर था कि वह जल्द से जल्द दिल्ली जाए! लेकिन उन्होंने समर की शादी पहले करवाने की कसम उठा ली.. और बस इसीलिए वह अपनी जिद पर अड़ गए कि शादी जल्दी से जल्दी होनी चाहिए…  !
   अब आप तो जानते हैं कि शादी ब्याह बिना पंडितों के मुहूर्त निकलवाए  संभव नहीं है  इसीलिए आज सुबह ही काकी सा ने पंडित जी को बुलवाया था!  मैं यह सब इसलिए जानती हूं, क्योंकि हमारे प्रेम साहब ही पंडित जी को लेकर समर सा के घर गए थे | वहीं आनन-फानन में इनकी कुंडली देखकर पता चला कि, अगर कल इनका ब्याह हो गया तो हो गया ……वरना यह आजीवन कुंवारे ही रहेंगे ! बस काकी सा की नाराजगी और भी भड़क गई ! क्योंकि वह तो पिछले 2 साल से अपने लाडले बेटे के पीछे पड़ी ही थी, कि ‘अब शादी करके घर बसा लो, तुम्हारे साथ के सभी लोगों के बच्चे बड़े होकर खेलने कूदने लग गए हैं और तुम अब भी अकेले घूम रहे हो.. !’तो बस इसी कारण आनन-फानन में कल का मुहूर्त निकाला गया है..!”

” अच्छा तो ऐसी बात है!  और बताओ समर ने हमसे कुछ भी नहीं कहा, और आकर यहां आराम से बैठे हैं..  क्या इन्हें अपनी शादी की कोई तैयारी नहीं करनी..?

रूपा आश्चर्यचकित होकर सवाल कर बैठी…

” भाभी साहेब आप भी अच्छे से जानती हैं कि, समर  इस शादी से खुश नहीं है… वह तो बस अपनी मां के कहने पर उनकी बात का मान रखने के लिए ही यह शादी कर रहा है वरना वह तो…

   बाँसुरी ने अपनी बात कहते कहते बीच में ही छोड़ दी और सामने बैठी पिया की तरफ देखने लगी… पिया आंखों में आंसू लिए समर की तरफ ही देख रही थी और समर चुपचाप सर झुकाए अपना मोबाइल  देख रहा था……

” नहीं..! लेकिन ऐसे कैसे एक दिन में सब संभव है..! हमें तो सुनकर ही घबराहट होने लगी ! हमारी तरफ शादी-ब्याह मतलब एक पूरा जलसा होता है.. ऐसा लगता है जैसे घर में कोई त्यौहार हो !और यहां देखो आज पता भी नहीं चल रहा कि कल समर की शादी है…..

” वैसी वाली शादी भी नहीं है ना भाभी साहब… कोर्ट मैरिज है..!”

रूपा आश्चर्य से आंखें फाड़े समर की तरफ देखने लगी… एक रूपा ही क्या जया, युवराज, जय और यहां तक कि राजा खुद आश्चर्य से समर की तरफ देख रहा था… इन लोगों के साथ बैठे वासुकी और दर्श को समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या चल रहा है…?
    उन लोगों को वाकई समझ में नहीं आ रहा था कि अगर समर की कल शादी होनी थी तो यह आज यहां बैठ कर क्या कर रहा था…?

दर्श के अंदर चल रहा कोलाहल उसके चेहरे पर साफ नजर आ रहा था तभी रूपा भाभी ने देखा कि वह अपनी प्लेट में से कुछ भी नहीं खा रहा उन्होंने तुरंत उसे टोक दिया…

” दर्श लगता है आप नॉनवेज नहीं खाते..?  इसीलिए जब से प्लेट में रखकर पता नहीं क्या सोच में डूबे हुए है.. !  अगर आपको नहीं खाना तो आप दूसरी वेज वाली प्लेट उठा लीजिए!”

” नहीं-नहीं रानी साहेब..!  ठीक है!  मैं तो खाता हूं मेरा दोस्त वासुकी नहीं खाता… इसलिए वह वेज ही खा रहा है ! मैं तो इतनी देर से आपकी सुबह वाली बात पर विचार कर रहा था..!”

” हमारी कौन सी बात पर आप विचार कर रहे थे..?”

” सुबह आपने कहा था ना कि रात में हमें राजा साहब की दूसरी पत्नी से मिलने का मौका मिलेगा, लेकिन यहां पर मौजूद लोगों में हम समझ नहीं पा रहे कि उनकी दूसरी पत्नी कौन है..?

    दर्श का सवाल सुनते ही वहां मौजूद सभी के चेहरे पर जोर से हंसी खिल गई और रूपा खुद हंसते-हंसते समर के पास जाकर खड़ी हो गई…..

” यह है हमारे कुमार की दूसरी पत्नी..! रात बिरात किसी भी वक्त, समर को हमारे राजा साहब के पास पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता, यहां तक की बांसुरी भी नहीं… !
…वो कहते हैं ना एक होता है किंग और दूसरा होता है किंग मेकर !  तो हमारे यहां के किंग,  राजा अजातशत्रु जरूर है लेकिन किंग मेकर तो समर ही है… और इसीलिए हमें तो लगता है कि समर  अपने इशारों पर राजा साहब को चलाता है..
..  इसलिए तो हमारे कुमार ना हमारी सुनते हैं, ना अपनी हुकुम की.. !
.  जो भी सुनते हैं सिर्फ और सिर्फ समर की ही सुनते हैं..!”

” सही कह रही हैं भाभी साहब!  और देखिए मैं इतना सुनता हूं बावजूद समर ने मेरी एक नहीं सुनी, और मुझे बिना बताए कल शादी करने वाला है | आज भी यहां पर कुछ फाइल्स लेकर आया था, मेरे पास |  यह नहीं कि यह बताने आया हो कि मैं शादी करने जा रहा हूं..!

राजा की बात पर समर ने  खड़े होकर सबके सामने हाथ जोड़ लिया… और चुपचाप जाकर सामने रखी फाइल को खोलकर उसमें से एक शादी का कार्ड निकाल कर रूपा भाभी के ही हाथ में रख दिया…

” भाभी मां यहां मौजूद सभी लोगों में आप ओहदे के  अनुसार आप सबसे बड़ी हैं|  इसलिए यह कार्ड आपके हाथ में रख रहा हूं… |
  शादी कोर्ट में जरूर है,  लेकिन आप सब के बिना अधूरी है..!  कल मेरी शादी में सम्मिलित होने आप सभी को सादर आमंत्रित करता हूं…!”

समर ने नजर उठाकर पिया की तरफ देखा और उसमें रखा है एक और कार्ड उठाकर पिया की तरफ बढ़ गया…

” तुमसे आज सुबह से बात करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन तुमने मेरी किसी बात का कोई जवाब नहीं दिया…!
          मैं तुमसे भी यही सब बताने के लिए आया था, लेकिन तुमने मेरी पूरी बात सुनी ही नहीं और मुझे छोड़ कर आगे बढ़ गई…
   खैर मुझे लगता है कि हम दोनों का साथ यही तक का था… कुछ मुहब्बतें अधूरी रह कर ही पूरी हो पाती हैं.. जैसे हमारी मुहब्बत ! मैं बस तुम्हें यह दुआ देना चाहता हूं कि तुम जहां भी रहो खुश रहो… मैं जानता हूं पिया, भावेश तुम्हें मुझ से कहीं ज्यादा खुश रखेगा..
   तुम वैसे भी जिस स्वभाव की हो तुम्हारे साथ रहने वाला हमेशा खुश ही रहेगा ! तुम अपने काम में भी खूब तरक्की करो और आगे वाली आने वाली ज़िंदगी भी तुम्हारी बहुत खुशहाल हो ! बस यही चाहता हूं !
हों सके तो कल मेरी शादी में आने की कोशिश ज़रूर  करना..! वैसे आना न आना पूरी तरह तुम्हारी मर्ज़ी है.. !मैं अब किसी बात के लिए तुम पर दबाव नहीं डालूंगा !”

समर ने बहुत गहरी नजर से पिया को देखा, और उसके हाथ में अपना शादी का कार्ड थमा दिया ! वह उसके पास जाकर इतने धीमी आवाज में उससे बात रहा था कि, बाकी लोग उन दोनों की बातें नहीं सुन पा रहे थे !
     बाकी लोग आपस में कल होने वाली शादी की तैयारियों की चर्चा में डूब गए थे, और समर ने पिया के हाथ में कार्ड रखने के बाद धीमे से अपनी आंख में आया आंसू आंखों ही आंखों में सुखाने की कोशिश की और मुड़कर राजा साहब के पास जाकर उनसे इजाजत लेकर वहां से बाहर निकल गया…
    पिया वहाँ ठगी सी खड़ी रह गयी…  वह आज तक समर से भाग जरूर रही थी, लेकिन कहीं ना कहीं मन ही मन वह चाहती थी कि समर आकर उसे झिंझोड़ कर उससे पूछ ले कि वह किस बात पर नाराज बैठी है..? और वो समर के कंधों पर फूट फूट कर उसे सारी सच्चाई बता दे, लेकिन समर ने उसे कुछ भी बताने का मौका ही नहीं दिया! और चुपचाप उसकी जिंदगी से अलग होकर आगे बढ़ गया…!

पिया को वहां घुटन सी होने लगी थी!  वह कार्ड  हाथ में थामे  बांसुरी के पास आई और उस से इजाजत लेकर बाहर जाने लगी… बांसुरी और निरमा ने उसे रोकने की कोशिश जरूर की, लेकिन पिया का अब वहां मन नहीं लग रहा था वह वहां से सीधा बाहर निकल गई…

पिया महल से निकलकर अपनी गाड़ी तक पहुंची ही थी कि उसका मोबाइल घनघना उठा उसने देखा पंखुड़ी का फोन था..

” पिया ! कहां है यार तू….!”

” क्यों क्या हुआ..?” बुझी  हुई सी आवाज में पिया ने कहा…
   पिया जितना ही धीमा कह रही थी पंखुड़ी उतना ही चहक कर बात कर रहीं थी…

” तू जहां भी है वहाँ से मैं जहां बोल रही हूं वहां तुरंत चली आ… जरमल स्क्वेयर के पास सीसीडी के ठीक बगल में मैं तेरा इंतजार कर रही हूं…
अभी तुरंत के तुरंत मुझे यहां पर मिल..!”

” पंखुड़ी यार मुझे अभी कॉफी पीने का बिल्कुल मूड नहीं है!  मैं अपने फ्लैट पर जा रही हूं ! सॉरी..!”

” तुझे कॉफी पीने बुला कौन रहा है झल्ली !  तू बस यहाँ चली आ यार.. एक बहुत जरूरी काम है!  और सुन ले, अगर तू आज नहीं आई ना तो कसम से तेरी मेरी दोस्ती खत्म..!  आइंदा कभी मेरा नाम लेकर मुझे बुलाने की जरूरत नहीं है..!”

” ठीक है बिना नाम लिए ही तुझे बुला लूंगी..!”

” होशियारी तो बहुत सूझ रही है तुझे.. तो होशियारी दिखाने से अच्छा यहाँ चली आ ना..!”

पिया का दिल रो रहा था उसके दिल पर क्या गुजर रही थी वह पंखुड़ी को समझाना वह भी फोन पर बेहद मुश्किल था!  इसलिए पिया अपनी स्कूटी पर सवार होकर पंखुड़ी की बताई जगह के लिए निकल गई ! उसने सोच रखा था कि पंखुड़ी के पास पहुंचते ही वह उसके हाथ में समर की शादी का कार्ड रख देगी! जिसे देखते ही पंखुड़ी खुद ब खुद सब समझ जाएगी और उसे परेशान किए बिना उसके फ़्लैट  में जाने दे देगी…

हैरान-परेशान सी पिया पंखुड़ी की बताई जगह पर पहुंची तो उसने देखा वहां पंखुड़ी मौजूद नहीं थी !  एक किनारे पर अपनी स्कूटी खड़ी करके पिया ने अपना फोन निकाला और उसे मिला दिया… कुछ सेकंड के बाद ही पंखुड़ी पिया के पीछे से आकर उसके कंधों पर लटक गई…
  पंखुड़ी के पीछे से उसे गले लगाते ही पिया ने चौक कर उसकी बाहों को पकड़ा और पीछे देखा…
लेकिन पिया जितना चौकी थी उससे ज्यादा पंखुड़ी पिया का चेहरा देख कर चौंक गई…

” यह कैसी रोनी सूरत बना रखी है तूने पिया?  क्या हो गया…!”

पंखुड़ी की सांत्वना भरी आवाज सुनते ही पिया के आंसू बहने लगे.. उसने अपने पर्स में से निकालकर समर का शादी का कार्ड पंखुड़ी के हाथ में रख दिया…

शादी का कार्ड देखते ही पंखुड़ी के चेहरे पर गुस्से वाले भाव आने लगे…. उसने पिया की तरफ देखा और वापस एक बार कार्ड देखने लगी…
  कार्ड को अंदर से खोलकर पंखुड़ी ने नहीं देखा था ऊपरी कवर पर छपी बातों को पढ़कर ही पंखुड़ी के रोम-रोम में आग लग गई और उसने पिया की तरफ देखकर वह कार्ड ज़ोर से फाड़ दिया…

” मुझे तो शुरु से ही यह महल और महल के लोग पसंद ही नहीं आते.. और यह समर तो मुझे कभी भी सही नहीं लगा… !
   तेरे जैसी अच्छी लड़की को जो संभाल कर नहीं रख सका, वह किसी काबिल नहीं है ! मुझे इस लड़के पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है.. ! इससे ज्यादा घटिया और नाकाबिल इंसान मैंने आज तक अपने जीवन में नहीं देखा…

” ऐसी बात नहीं है पंखुड़ी ! वह इतना भी बुरा नहीं है! बस ये समझ लो कि समय ने हमारा साथ नहीं दिया..

” यह सारी बकवास बातें ना तू रहने दे… तेरे जैसी अच्छी लड़की के लिए तो एक से बढ़कर एक लड़कों की लाइन लग जाएगी ! मैं उस दिन तुझे इसी समर के लिए समझा रही थी, अब मुझे अफसोस हो रहा है ! जो लड़का तुझे बैठाकर तेरी परेशानी नहीं सुन सकता, तेरी समस्या को सुलझा नहीं सकता,  वह कहीं से भी तेरे लायक नहीं है!  भावेश ही तेरे लायक है!  और तू चुपचाप उसी से शादी कर ले…! यार ये प्यार मुहब्बत ना वैसे भी शादी के बाद दिमाग से निकल ही जाता है.. !”

” मैं क्या करूँ पंखुड़ी, मेरा मन भावेश से बिल्कुल नहीं मिलता और फिलहाल मैं यह सब कुछ नहीं सोचना चाहती..!  अभी मैं बहुत दुखी हूं !
      और तूने भी यार,  कार्ड फाड़ कर फेंक दिया…!”

“तो तुझे करना क्या था उस कार्ड का…?”

” मैंने अंदर से उस कार्ड को पढ़ा तक नहीं था…!”

“अपनी सौतन का नाम पढ़ने का बड़ा शौक हो रहा है तुझे.. ! हां शायद तू यही सोच रही होगी कि समर शादी किससे कर रहा है ?  अरे भाड़ में जाने दे उस लड़के को, और उसकी होने वाली बीवी को..!  हमें क्या करना.. ?
        तू अभी इसी वक्त चल मेरे साथ..!
    पास में एक बहुत गजब का रेस्टोरेंट खुला है “पिंड बलूची”..  मैंने सुना है वहां की बिरयानी गजब की टेस्टी है… एक बार खाएगी ना सारी परेशानियां भूल जाएगी..”

” यार पंखुड़ी मेरा कुछ खाने का मन नहीं है इस वक्त..!”

” यही तो तुम लोग गलत करते हो यार ! तू खुद डॉक्टर है, तुझे पता है कि जब हम अपनी पसंद का खाना खाते हैं तो हमारे शरीर में हैप्पी हार्मोन सिक्रीट होते हैं, और वह हारमोंस हमें खुश रखते हैं.. तो क्यों ना दुखी होने के बाद हम कोई अच्छी सी डिश खा ले और अपने मन को बहला ले… “

“यार पंखुड़ी तुझे खाने के सिवा कुछ सूझता है कि नहीं… “
  पिया ने पंखुड़ी कि बात आधे में ही काट दी…

“सूझता है मैडम ! बहुत कुछ सूझता है.. वही तो बताने तुम्हें यहाँ बुलाया है… चलो मेरे साथ..

“पर कहाँ… ? हम कहाँ जा रहें हैं… ?”

“आ तो सही.. ! तुझे मारने नहीं ले जा रहीं जो तू इतना घबरा रहीं है… चल मेरे साथ.. !”

पिया जानती थी पंखुड़ी से पीछा छुड़ाना इतना भी आसान नहीं था.. वो चुपचाप उसके साथ आगे बढ़ गयी…

क्रमशः

aparna….






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