
जीवनसाथी -2 भाग -17
अनिरुद्ध वासुकि ने निकलने से पहले ही नेता जी से उस लड़की का पता ठिकाना भी पूछ लिया था….
वासुकि के तेज़ कदमों से आगे बढ़ते ही दर्श भी उसके साथ हो गया था…
उन दोनों को बाहर आते देख उनका ड्राइवर भाग कर गाड़ी निकलने जाने लगा, उसे ना में इशारा कर वासुकि ने खुद अपने हाथ से गाड़ी निकाली और दर्श के बैठते ही गाड़ी तेजी से आगे भगा दी..
वो लोग वहां से सीधे उस लड़की के घर के पते को ढूंढते हुए आगे बढ़ते गए…
एक पुरानी सी वर्कर्स कॉलोनी में उस लड़की का घर था….. वासुकि ने उसके घर के सामने जाकर गाड़ी खड़ी कर दी… उन लोगों के गाड़ी से उतरते में उन्हें महसूस हुआ कि किसी ने आकर घर का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया है…
वासुकी और दर्श ने एक दूसरे की तरफ देखा और दरवाजे की तरफ बढ़ गए ! अनिरुद्ध ने जाकर दरवाजे पर दस्तक दी लेकिन अंदर से कोई आवाज नहीं आई… दो-तीन बार दस्तक देने के बाद भी जब अंदर से कोई जवाब नहीं मिला तब वासुकी ने कहना शुरू किया…
” देखिए मेरी बात सुनिए, मैं यहां आपकी मदद के लिए ही आया हूं.. !अगर हो सके तो एक बार दरवाजा खोल दीजिए !”
अनिरुद्ध के बार बार समझाने पर आखिर धीरे से दरवाजा खुल गया…
एक घबराई हुई सी मरियल सी औरत दरवाजे पर थी… उसका शरीर पीला पड़ा हुआ था और वेदना से चेहरा कुम्हलाया हुआ था उसने दरवाजा खोला और सामने राक्षसों जैसे लंबे चौड़े दो लड़कों को देखकर वो एक पल को थोड़ा चौक गई….. वापस दरवाजा बंद करने को थी कि अनिरुद्ध ने दरवाजे को धक्का मार कर अंदर प्रवेश कर लिया….
” आपकी बेटी से मिल सकते हैं माताजी.. !”
उस औरत ने दर्द भरी नजरों से उसी कमरे में एक तरफ एक खाट पर बैठी लड़की की तरफ नजर घुमा दी… उनकी नजरों का अनुसरण करते हुए अनिरुद्ध और दर्श भी उस तरफ मुड़ गया वहां इसी औरतों की तरह कुम्हलायी हुई एक और आकृति बैठी थी…
अनिरुद्ध उसी की तरफ बढ़ गया…
” मुझसे डरना या घबराना मत, मैं तुम्हारी मदद करने के लिए आया हूं ! बस मैं कुछ सवाल पूछूंगा हो सके तो उनका जवाब दे देना.. क्योंकि मुझे आगे कैसा कदम उठाना है यह तुम्हारे जवाब पर निर्भर करता है..!”
उस लड़की ने डबडबाई आंखों से अनिरुद्ध की तरफ देखा और वापस नीचे देखने लगी…
” अब आप लोगो को क्या सवाल पूछना है साहब? यहां तो रोज ही हमें आकर कोई ना कोई डरा धमका कर जा रहा है..!जबसे इसने पुलिस में रपट लिखाई है रोज़ हमें मार देने कि धमकियाँ मिल रही है…
“गुंडे आकर आपको धमका रहें हैं.. ?”
“क्या गुंडे क्या पुलिस वाले.. ? सभी धमका रहे हैं साहब.. मेरा मेरी बेटी के सिवा और कोई नहीं है… मैं पालेकर कि कपड़ा फैक्ट्री में ही काम करती हूँ, और बेटी को यहीं के कॉलेज में पढ़ा भी रही हूँ.. मेरी बेटी होशियार है, इसलिए उसे कॉलेज में एडमिशन के लिए मुझे ज्यादा पैसा नहीं देना पड़ता… इसे क्षात्रवृत्ति मिलती है, उसी से इसका काम चल जाता है.. मेरी बेटी बहुत मेहनती है साहब.. शाम को कॉलेज से आने के बाद आसपास के बच्चो को ट्यूशन भी पढ़ा लेती है.. चार पैसे जुड़ जाते है साहब..
“क्या आप मुझे पूरी बात बता सकती हैं… ?”
अनिरुद्ध के चेहरे का ठहराव था या उसकी विश्वास जोड़ती आंखे, वो माँ बेटी कुछ देर में ही दर्श और अनिरुद्ध से अब बता देने को राज़ी हो गयी….
इस बार बेटी ने बोलना शुरू किया..
“साहब मैं जिस कॉलेज में पढ़ती हूँ, साहब का बेटा राहुल भी वहीँ पढता है… आते जाते अक्सर वो और उसकी टोली के लोग छेड़ते रहते थे साहब.. !”
“तुम्हारी राहुल से बातचीत या दोस्ती वगैरह थीं क्या.. ?”
“नहीं साहब, वो बड़े लोग है.. हम जैसे गरीबों से क्या दोस्ती करेंगे?. लेकिन हाँ परेशान बहुत किया करते थे..उस दिन कॉलेज का वार्षिक सम्मेलन था.. सुबह से कॉलेज में मेला सा लगा था, ढ़ेर सारी प्रतियोगिताएं हो रहीं थीं, रंगोली प्रतियोगिता में मैंने भी भाग लिया था.. पूरा दिन ये सब चलने के बाद शाम को डांस और गाने का रंगारंग कार्यक्रम था.. मैंने भी भाग लिया था डांस में…
जब मैं पीछे चेंजिंग रूम से निकल कर स्टेज कि तरफ जा रही थीं तभी सामने से आते राहुल से टकराते हुए बची, और उसने वापस ऊलजलूल बातें कहनी शुरू कर दी… !
साहब उस लड़के ने शायद पी रखी थीं, उसने मेरी कलाई पकड़ रखी थीं और वो मुझे लेकर इतनी ख़राब बातें बोल रहा था कि मैंने कस कर उसके तमाचा धर दिया.. वो तिलमिला गया था साहब, मैंने उसे धक्का दिया और स्टेज की तरफ बढ़ गयी.. पर मुझे क्या मालूम था कि मैं अपनी ही मौत का रास्ता बना कर आयी हूँ…
मेरा डांस ख़त्म हुआ और मैं अपनी सहेलियों के पास आ गयी.. उस सारे कार्यक्रम के बाद सबका खाना पीना हुआ और हम सब घर के लिए निकल गए.. मुझे नहीं मालूम था आगे किसी सुनसान राह में वो जानवर अपनी टोली के साथ खड़ा मेरा इंतज़ार कर रहा था…
मेरी सहेलियाँ और मैं साथ ही आ रहे थे.. इसी कॉलोनी में ज्यादातर लोगों के घर है… वो भी ये बात जानता था… जैसे ही मैं अपनी सहेलियों से विदा लेकर अपनी गली में मुड़ी उसके दोस्तों ने पीछे से मेरे मुहं पर कपड़ा डाल कर मुझे पकड़ लिया और घसीट कर गाड़ी तक ले गए.. मैं चिल्ला भी नहीं पा रही थीं.. उन लोगों ने मुझे गाड़ी में डाला और हाथ पांव बांध कर वापस कॉलेज ले गए….
और वहाँ ले जाकर इसी राहुल ने….. मेरे साथ ज़बरदस्ती की…. इसके दोस्त भी शायद वही करते लेकिन पुलिस पेट्रोलिंग गाड़ी का सायरन सुन कर सब डर गए और भाग गए…. राहुल भी वहाँ से भाग गया.!मैं कैसे अपने घर तक वापस आयी मैं ही जानती हूँ.. उसके बाद चार दिन मैं घर से बाहर नहीं निकल पायी.. पांचवे दिन बहुत हिम्मत कर के कॉलेज गयी, तो फिर ये लड़के मेरे साथ बदतमीजी करने लगे और उस समय इन लोगों ने इस कदर बेइज्जती की कि थक कर माँ के बार बार मना करने के बावजूद मैं पुलिस स्टेशन चली गयी और रिपोर्ट दर्ज़ करवा दी… “
“तुम्हारा मेडिकल परिक्षण हुआ था.. ?”
“जी साहब ! हुआ था, लेकिन चार दिन बीत चुके थे इसलिए बहुत सी….
कहते कहते उसकी माँ शांत हो गयी…
दोनों माँ बेटी बड़ी मुश्किल से ये सब बता पा रही थीं, इतनी जरा सी बात बताने में भी दोनो कि ही तकलीफ महसूस कि जा सकती थीं… उन दोनों को देख यूँ लग रहा था जैसे इन चार पांच दिनों में माँ न जाने अपनी बेटी कि चिंता में कितनी बूढी हो गयी है!
और बेटी को देख लग रहा था पुरे संसार से बदला लेने कि कसम खा कर वो लाचार सी बैठी अपनी किस्मत को रो रही है… !
“उन लोगों ने किसी तरह के मुआवजे कि बात कही.. ?” अबकी बार सवाल दर्श ने किया… और उसके इस सवाल पर वो लड़की चीख उठी…
“मुआवज़े में मुझे उस राहुल कि मौत चाहिए.. बताइये दे पाएंगे.. !”
उसकी आँखों में गुस्से से खून उतर आया था… उसकी बेबसी उसकी मज़बूरी साफ़ साफ नज़र आ रही थीं…
“वैसे मुझे आप पर पूरा भरोसा है लेकिन फिर भी सजा देने से पहले मुल्जिम के खिलाफ साबुत देख लेना अपनी तस्दीक करने के लिए ज़रूरी होता है.. अगर आप लोग सही समझे तो क्या मैं मेडिकल रिपोर्ट… “
अनिरुद्ध अभी मेडिकल रिपोर्ट मांग भी न पाया था कि अलमीरा से निकाल कर उस लड़की कि माँ ने उनके सामने वो रिपोर्ट फेंक दी, जिसमे इस बात कि तस्दीक हो गयी कि लड़की के साथ ज़बरदस्ती हुई है….
रिपोर्ट सरकारी अस्पताल की थीं इस लिए अनिरुद्ध का उस रिपोर्ट पर भरोसा न करने का सवाल ही नहीं उठता था….
उसकी आँखों में खून उतर आया था… वो बुरा था बहुत बुरा, उसके सारे धंधे बुरे थे, मनी लॉन्ड्रिंग, ज़मीन कि सौदेबाज़ी, लोगों को डरा धमका कर पैसे वसूलना, के आलावा अपने रास्ते में आने वालों को उखाड़ कर अपने रास्ते से दूर फेंक देना, उसकी आदतों में शुमार था! लेकिन एक धंधा ऐसा था जिससे वह हमेशा दूर रहता था और वो था ड्रग्स का धंधा… हर तरह के नशे से और नशा करने वालों से उसे सख्त नफरत थी और इसके साथ ही नफरत थी ऐसे लड़कों से जो औरत की इज्जत करना नहीं जानते…!
अनिरुद्ध ने अपनी छोटी सी उम्र में अपने ढेर सारे अनुभव के साथ लोगों को अच्छे से पहचानना सीख लिया था… और इसीलिए पहली बार में ही उस औरत के घर में प्रवेश करते साथ उसने उस लड़की की तकलीफ को सूंघ कर परख लिया था…
वह समझ गया था कि उस लड़की के आंसू नकली नहीं थे और वह जो कह रही थी उसमें और उसकी एक-एक बात में सच्चाई थी…..
उसने उस लड़की के सर पर हाथ रखा और उसे सांत्वना देने लगा…
” चलो मेरे साथ..!”
लड़की अपनी डबडबाई आंखों से कभी दर्श और अनिरुद्ध और कभी अपनी मां को देख रही थी…
उसकी मां अपने माथे से पसीना पोंछते हुए उन दोनों को देखने लगी…
” इसे कहां ले जा रहे हैं साहब..?”
” अगर हम दोनों पर विश्वास है तो आप अपना जितना जरूरी सामान बांध सकते हैं, एक साथ करके रख लीजिये और हमारे साथ चलिए..!”
इतना कहकर अनिरुद्ध वासुकी उस कमरे से बाहर निकल गया उसके पीछे ही दर्श उन दोनों को साथ लिए बाहर चला आया… उस लड़की की मां ने आनन-फानन जितना समेट सकती थी अपना सामान एक बैग में डाला और दर्श के साथ ही आकर अनिरुद्ध की गाड़ी में बैठ गई….
अनिरुद्ध वासुकि ने फिर गाड़ी सीधे थाने की तरफ भगा दी…. पुलिस स्टेशन के सामने घनी झाड़ियों के नीचे उसने अपनी गाड़ी रोकी और और उस लड़की को साथ लिए नीचे उतर गया…
अपने लंबे-लंबे डग भरता अनिरुद्ध वासुकि पुलिस स्टेशन के अंदर पहुंच गया… रात का समय था पुलिस पेट्रोलिंग जीप शहर में इधर-उधर घूम घूम रही थी और इसीलिए उस वक्त थाने में थाना इंचार्ज के अलावा सिर्फ दो हवलदार मौजूद थे….
अनिरुद्ध थाने के अंदर दाखिल हुआ, उसे देखते ही दोनों हवलदार उसके पास चले आए, उसने थाना इंचार्ज के बारे में इशारे से पूछा….
हवलदार ने अपनी उंगली सामने की चारदीवारी की ओर घुमा दी…
अनिरुद्ध ने देखा हवालात के अंदर राहुल उसका एक दोस्त और थाना इंचार्ज साथ बैठे बियर पी रहे थे… अनिरुद्ध लोहे की सलाखों को इत्मीनान से खोल कर भीतर चला आया…
” अरे वासुकि साहब आइये आइये… आज इधर कैसे आना हुआ… ?”
“इनके पूज्य पिताजी आये थे.. इनकी अर्जी लेकर.. ! जिस ढंग से पालेकर साहब ने रोना रोया था मुझे तो लगा था यहां उनका बेटा कलप रहा होगा लेकिन यहां तो इसकी ऐश चल रही है…..”
” हां तो आइए ना, आप भी शामिल हो जाइए आपको किसने मना किया है..!”
थाना इंचार्ज की बात पर अनिरुद्ध वासुकी उसकी तरफ देख कर मुस्कुराने लगा…
” मैं पीता नहीं हूँ, वैसे आपका स्वागत सत्कार मुझे याद है..पिछले महीने ही शायद आपने अपनी बेटी की शादी की थी… और वह भी इतनी धूमधाम से की थी कि पूरा शहर जगमगा गया था, उस रात ऐसा लग रहा था पूरा शहर दिवाली मना रहा है…!”
अनिरुद्ध वासुकी के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर थाना इंचार्ज शरमा गया, और शरमाने से उसके चेहरे का काला सा रंग हल्का सा गुलाल मिला देने से जामुनी सा चढ़ गया……
” अब क्या बताऊं.. इकलौती बेटी है मेरी.. तो जो कमाया उसी की शादी में लगा दिया.. बस वह खुश रहे और क्या चाहिए मुझे… ? बस कहो, गंगा नहा ली मैंने, अब तो इस जिंदगी से और कुछ नहीं चाहिए..?”
” पक्का और कुछ नहीं चाहिए..? या एक आध प्रमोशन…. रिटायरमेंट के पहले.. ?”
वासुकि की गहरी आंखों और उसके भीगे से सवाल पर थाना इंचार्ज चौक कर उसे देखने लगा….
और अनिरुद्ध राहुल की तरफ मुड़ गया…
” राहुल सच सच बताना क्या हुआ था..?”
अनिरुद्ध के इस सवाल पर राहुल ने उसे देखा और उसकी बात हंसी में उड़ा दी…
“क्यों पोर्न सुनने का बहुत शौक है क्या… ?”
इतना कह कर वो ज़ोर से कहकहे लगाने लगा और अनिरुद्ध वासुकि के दिमाग के अंदर सारे ग्रह नक्षत्र एक गोलाई में चक्कर काटने लगे……
अनिरुद्ध को लगा राहुल का कहकहा सुन कर उसका सर फट जायेगा… राहुल के दोस्त ने अनिरुद्ध के चेहरे के बदलते भावों को देख कर राहुल को चुप रहने का इशारा भी किया लेकिन विनाश काले विपरीत बुद्धि साबित करते हुए राहुल अपनी नशे से लटपटाती जिव्हा से अनाप शनाप बकने लगा….
“उस लड़की के साथ मैंने जो किया सही किया… साली ने पुरे कॉलेज के सामने मुझे थप्पड़ मारा था न, मेरी इज्जत उतारेगी वो, उसकी इतनी हिम्मत.. ?अब देखता हूँ किस मुहं से कॉलेज वापस आएगी… ?”
इसके पहले कि वो और कुछ कहता.. वासुकि ने दीवार कि ओट में खड़ी उस लड़की सारिका को हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया…
“इसी मुहं से आएगी… !”
राहुल और उसके दोस्त फटी हुई आँखों से उन्हें देखने लगे….
“ये.. ये यहाँ क्या करने आयी है…. ?”
अनिरुद्ध ने उस लड़की कि तरफ देखा…
“क्या करना चाहती हो सारिका इसके साथ… ? डरो मत… मैं तुम्हारे साथ हूं! तुम जो करना चाहती हो वह बोलो”
” इसकी शक्ल नहीं देखना चाहती हूं..!”
” तो बिगाड़ दो इसकी शक्ल….”
सारिका रोने लगी लेकिन उससे आगे बढ़कर कुछ भी नहीं हुआ… अनिरुद्ध ने उसे कंधे से पकड़ कर झुका दिया और राहुल के ठीक सामने बैठा दिया… राहुल भयभीत नजरों से सामने बैठी सारिका और उसके पीछे खड़े महामानव भूत जैसे अनिरुद्ध को देख रहा था…
अनिरुद्ध की बड़ी-बड़ी लाल आंखें उस समय खौफ बरसा रही थी…
उन आंखों को जो व्यक्ति 2 मिनट लगातार देख ले वह वैसे ही उन से निकलती लपटों की गर्मी से ही जलकर मर जाता…. उस आंच को सह नहीं पाने के कारण राहुल ने अनिरुद्ध वासुकी की तरफ से अपना चेहरा हटा लिया और उस लड़की को देखने लगा…
” तो क्या करना चाहती है तू.. ? यहां रुक कर मेरे साथ.. ?
मेरा चेहरा नहीं देखना चाहती तो रफा दफा हो जा यहां से…!”
राहुल की बात पूरी होने से पहले उस लड़की ने एक धीमा से तमाचा उसके गाल पर मार दिया.. थप्पड़ इतना धीमा था कि अगर राहुल के चेहरे पर कोई मच्छर भी होता तो नहीं मरता.. अनिरुद्ध के जोर देने पर उसने एक दूसरा थप्पड़ भी मारा पर वह भी यूं ही बेकार चला गया…
” तुम्हें चेहरा बिगाड़ना नहीं आता सारिका… अनिरुद्ध ने उस लड़की को एक किनारे किया और अपने पैर की ठोकर से एक बार में ही राहुल को जमीन पर चित गिरा दिया…
अपने जूते के सोल से राहुल के चेहरे पर लगातार प्रहार कर करके अनिरुद्ध ने उसके चेहरे से खून की नदियां बहा दी…. बचने की कोशिश में राहुल ने अपने दोनों हाथों से अनिरुद्ध के पैर पकड़ लिए और अपनी पूरी ताकत लगा कर उसने अनिरुद्ध के पैर पर अपने दांत गड़ाने की कोशिश की, लेकिन उसके दांत किसी कठोर चीज़ से ऐसी बुरी तरह टकराये की उसका एक दांत हिल गया… वो वासुकि का पैर अपने चेहरे से नहीं हटा पाया लेकिन उसके चेहरे पर जगह-जगह खरोंच और घाव के निशान ज़रूर बन गए और लगातार खून बहने लगा…. …
यह सब देखकर थाना इंचार्ज तुरंत अपनी जगह पर खड़ा हो गया और सलाखों से बाहर अपनी सर्विस रिवाल्वर लेने के लिए जाने को था कि दर्श ने आगे बढ़कर सलाखों के दरवाजे को बंद करके सांकल लगा दी…
” अनिर खुद आपसे बात करने आया है, और आप यहां से जा रहे हैं…?”
थाना इंचार्ज ने अपने चेहरे का पसीना पोछा और दर्श को एक तरफ धक्का देने लगा…
दर्श का उल्टे हाथ का एक जोर का थप्पड़ थाना इंचार्ज के चेहरे पर पड़ा और वो घूम के नीचे गिर पड़ा
” क्या कर रहे हैं सर? आप सीनियर हैं ! एक दो महीने में रिटायर होने वाले हैं! हम लोग आप को रिस्पेक्ट दे रहे हैं…. इसलिए चुप कर बैठे हैं.. और आप हमें रोकने का प्रयास कर रहे हैं… प्लीज आप शांति से अपनी जगह बैठे रहिये, और अनिर को अपना काम आराम से करने दीजिए…”
अनिरुद्ध ने राहुल को एक बार फिर सीधा उठा कर बैठा दिया अबकी बार उसने सारिका की तरफ देखा और पूछा….
” अब क्या करना चाहती हो इसके साथ..?
राहुल की अपने सामने इतनी फजीहत और कुटाई देखकर सारिका का गुस्सा भी बांध तोड़कर आंखों के रास्ते बहने लगा था…. अपने गुस्से में पागल होती तमतमाती सारिका ने अनिरुद्ध की तरफ देखा…
” मैं इस नीच पापी की जान ले लेना चाहती हूं…”
अनिरुद्ध ने अपनी पैंट में खोंस रखी रिवाल्वर निकालकर सारिका के सामने कर दी…..
” कर लो अपनी इच्छा पूरी…! क्योंकि अगर तुम पुलिस और न्याय व्यवस्था के सामने झोली फैला कर अपने लिए न्याय मांगोगी तब भी तुम्हें न्याय मिलने में सालों सालों लग जाएंगे…
हो सकता है न्याय इतना इंतजार करवा कर मिले कि तुम उस न्याय को देखने सुनने समझने के लिए जिंदा ही ना बचो ! क्योंकि उस समय-अवधि में यह लड़का और उसका बाप मिलकर तुम्हें और तुम्हारी मां को जरूर मरवा देंगे…
इसलिए अपने हक के लिए भीख मत मांगो, अपने लिए न्याय खुद छीनो, लड़ो और आगे बढ़ो….
मैंने गन का सेफ्टी लॉक खोल दिया है तुम्हें बस ट्रिगर पर उंगली रखकर उसे पूरी ताकत से पीछे की तरफ खींचना है….
” अरे पागल हो गई है क्या.. ?सारिका मैं राहुल हूं, राहुल… मुझे मारने की कोशिश मत करना….., मेरा बाप तुझे जिंदा नहीं छोड़ेगा.. याद रखना!”
अनिरुद्ध ने एक नजर राहुल पर डाली और वापस सारिका को देखने लगा…
” इस वक्त सिर्फ ये याद रखो सारिका, की यही वह लड़का है जिसने जानबूझकर तुम्हें दुनिया के सामने बेइज्जत करने की कोशिश की है ! जिसने जानबूझकर तुम्हारे चरित्र पर हमेशा हमेशा के लिए वह काला धब्बा लगाया है, जिसके बाद उसे लगता है कि तुम दुनिया के सामने सर उठाकर नहीं चल सकती ! आज साबित कर दो इस बदगुमान लड़के ने वो काम किया है कि यह इज्जत के साथ इस दुनिया में जीने लायक नहीं है…..
सर उठा कर चलने की इसकी हिम्मत नहीं होनी चाहिए… इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है तुम इस हादसे के पहले जितनी पवित्र थी, आज भी उतनी ही हो… अपनी और अपनी मां के भविष्य को लेकर चिंतित होने की तुम्हें जरूरत नहीं…. सारा इंतजाम हमनें कर दिया है ! तुम्हें बस एक ही काम करना है,ट्रिगर दबाना है…
याद करो सारिका वह हर एक पल याद करो जिस समय इस लड़के ने तुम्हें नर्क जैसी यंत्रणा दी थी…. इसके आगे अनिरुद्ध की कही बातें एक धमाके की आवाज में खो कर रह गई…
उस धमाके के साथ एक के बाद एक तीन गोलियां सारिका ने राहुल के ऊपर चला दी…. पीछे बैठा उसका दोस्त माफी की याचना कर रहा था…
अनिरुद्ध ने इशारे से उसे अपने पास बुलाया… और सारिका की तरफ देख कर पूछ लिया…
“क्या ये भी शामिल था… ?”
सारिका ने न में गर्दन हिला दी और अनिरुद्ध ने उसे एक ज़ोरदार घूंसा जड़ दिया….
“इंसान का व्यक्तित्व बहुत बार उसकी संगति से भी मापा जाता है… कर्ण लाख सद्गुणी रहा हो पर था वो दुर्योधन का मित्र और इसलिए द्वारिकाधीश को आँखों में आंसू लिए भी अर्जुन से उस पर तीर चलवाना पड़ा था … तो..
अनिरुद्ध आगे कुछ कहता उसके पहले वो लड़का उसके पैरो में गिर पड़ा…
“सिर्फ इसके रुतबे से डरकर इसके साथ था सर.. मैं आज ही ये शहर छोड़ कर बाहर कहीं पढ़ने चला जाऊंगा.. न मैं आज से किसी राहुल को जानता हूँ न किसी सारिका को.. !”
“गुड़ बॉय.. !” दर्श ने उस लड़के के बालों पर हाथ फिराया और उसे दरवाज़े से बाहर धकेल दिया…
अनिरुद्ध दर्श और सारिका बाहर चलें आये… उनके पीछे थाना इंचार्ज और दोनों हवलदार भी थे…
अनिरुद्ध ने तीखी नज़र उन तीनों पर डाली और अपना सवाल उछाल दिया……
“किस किस ने क्या क्या देखा है यहाँ… ?”
अनिरुद्ध के पूछने के तीखे तरीके से ही वो लोग सब समझ गए……
उनमें से एक हवलदार तुरंत गला साफ़ कर सामने चला आया…
“साहब मुझे तो बहुत मोटा चश्मा लगा है.. कल ही रात में टूट गया था, बनाने दिया है.. आज भी देखिये बिना चश्मे के आया हूँ.. कुछ साफ साफ नज़र ही नहीं आ रहा… !”
अनिरुद्ध ने मुस्कुरा कर दूसरे हवलदार की ओर देखा…
“साहब मुझे तो मोतियाबिंद हो रखा है… आंख में ऐसी जाली पड़ी है की अब जब तक ऑपरेशन न हो जाएं लगता है कुछ दिखेगा नहीं साफ साफ.. !”
अनिरुद्ध मुस्कुरा कर थाना इंचार्ज की तरफ मुड़ गया.. वो पहले ही अनिरुद्ध के धक्के से अपना संतुलन खोकर ऐसा गिरा था की अब तक उसके रोम रोम में दर्द की भयानक लहर उठ रही थीं….
उसके कलपुर्जे उसका साथ छोड़ने को तैयार थे… अनिरुद्ध की जैसे ही उस पर नज़र गयी, वो भडभड़ा के बोलने लगा…
“रईस बाप का बिगड़ैल लड़का था, एक लड़की से रेप के चार्ज में थाने में बंद था… थाने लाने से पहले ही इतना नशा कर चुका था की यहाँ आने के बाद थानेदार से ही उलझ पड़ा और उसकी गन छीन कर सबको ये कह कर धमकाने लगा की अगर उसे नहीं छोड़ा गया तो या तो वो किसी को मार देगा या खुद अपनी जान ले लेगा… बस इस सब नौटंकी में उसके हाथ से गोली चल गयी जिससे खुद को बचाने के लिए मुझे इसे गोली मारनी पड़ी…. “
“स्मार्ट बॉय.. तुम उतने भी बुरे नहीं जितने पहली बार में मैंने सोच लिया था.. !”
“लेकिन अनिरुद्ध ! अब पालेकर इस लड़की को छोड़ेगा नहीं !”
“इस लड़की का इंतज़ाम मैं पहले ही कर चुका हूँ.. ! तुम बस इस कमीने का देख लेना.. !”
“तुम चिंता मत करो, सब हो जायेगा… !”
अनिरुद्ध मुस्कुरा कर वहाँ से बाहर निकल गया… जाते जाते दर्श ने एक छोटा बैग वहाँ थाना इंचार्ज को दिखते हुए छोड़ा और वो भी निकल गया…..
उन लोगों के बाहर निकलते में बाहर एक बड़ी लारी उन्ही लोगों का इंतज़ार करती खड़ी थीं.. उस गाड़ी में सारिका और उसकी माँ को चढ़ाने के बाद अनिरुद्ध और दर्श वापस घर की तरफ मुड़ गए….
आज ही उन लोगों को राजा साहब की रियासत के लिए निकलना था….
क्रमशः
aparna
