जीवनसाथी- 2/16

जीवनसाथी 2 भाग 16

  रिदान मुस्कुरा कर आगे बढ़ गया…
अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में चिया को रखा गया था.. उसके पास पहुँचते ही लीना ने उसे आपने सीने से लगाया और बिलख पड़ी… आसपास खड़े डॉक्टर्स ने उसे ऐसा करने से मना  किया और वहाँ से बाहर जाने को कहा….लीना खुद पर काबू ही नहीं कर पा रही थी…
  उसे खुद पता था कि वो ऐसे अस्पताल में अपनी गुड़िया को सीने से लगा कर नहीं बिलख सकती लेकिन वो अपनी कोरी भावुकता कि कैफियत ही नहीं पा रही थी…. उसे गुड़िया को छोडने का मन ही नहीं कर रहा था…

“मेरी लाड़ो, मेरी चिड़िया.. तुझे कुछ हो जाता तो मैं क्या करती… ?”

लीना वैसे तो काफी मजबूत महिला थी उसे आज तक किसी ने रोते बिलखते नहीं देखा था, लेकिन आज उसका सब्र का बांध जैसे टूट गया था…. संयम से इतने दिन तक बनाया दुर्ग ढह गया था.. उसे खुद भी अपने रोने पर शर्मिंदगी सी लग रही थी पर उसके बस में कुछ नहीं था…
   वहाँ मौजूद डॉक्टर भी उसके ओहदे और उसके साथ खड़े कलेक्टर को देख ज्यादा कुछ नहीं कह पा रहे थे कि पिया ने आगे बढ़ कर लीना के कंधे पर हाथ रख दिया….

  “आप सम्भालिये खुद को.. ! आपको ऐसे देख कर बच्ची और घबरा जाएगी.. अभी वो पहले से काफी बेटर है.. !बल्कि आप चाहे तो कुछ घंटों के बाद उसे घर ले जा सकती है..!”

  लीना ने पलट कर पिया कि तरफ देखा,  और पिया ने हाँ में सर हिला दिया.. पंखुड़ी दूसरे डॉक्टर के साथ मिल कर बच्ची कि फाइल देख रही थी…

  शेखर और रिदान एक साथ खड़े लीना को ही देख रहे थे, और पंखुड़ी बीच बीच में बाकियों कि नज़र बचा कर शेखर को देख रही थी…

  “तुम ऑफिस से आ रही हो ना… अगर तुम्हें काम है तो तुम जाओ मैं यहाँ देख लूंगा.. !”

रिदान कि बात पर लीना ने न में सर हिला दिया..

“मैं अपनी बच्ची को छोड़ कर कहीं नहीं जाउंगी… बल्कि तुम दोनों जाओ, अगर ज़रूरत हुई तो मैं बुला लुंगी.. !”

  लीना के ऐसा बोलते ही शेखर और रिदान ने एक दूसरे को देख कुछ इशारा किया और शेखर वहीँ एक कुर्सी खींच बैठ गया….

“ये फ़र्ज़िना है रिदान, ऑफिस टाइम पर ही सारे काम निपटाती है.. ये यहाँ से नहीं खिसकेगी.. !”

लीना ने घूर कर शेखर को देखा…

“क्या यार तुम भी ना.. कुछ भी कह जाते हो.. एक तरफ तो वो चिया कि तबियत के कारण परेशान है,  दूसरी तरफ उसका फर्जीवाड़ा उजागर कर रहे हो.. !”

लीना ने अबकी बार रिदान कि तरफ घूर कर देखा और उसे एक घूंसा दिखा दिया, और रिदान डरने का अभिनय करने लगा…

“अरे ऐसे घूर मत यार मैं तेरे नेत्रों से भस्म हो जाऊंगा.. !”

  “इसका नाम करीना है, तो ये वाकई खुद को करीना  समझने लगती है यार.. !”

शेखर कि बात पर रिदान ने उसके कंधे पर धौल जमाया और हामी भर दी…

“शट अप यू इडियट्स ! ये हॉस्पिटल है और तुम दोनों अधिकारी हो वो भी प्रशासनिक.. तुम्हें देख के कौन ये कहेगा कि यहाँ कलेकटर और पंचायत सी ई ओ बैठे है.. तुम्हारी बातें सुनकर तो यूँ लग रहा जैसे दो छिछोरे बात कर रहे.. !”

“कसम से मरजीना तूने दिल लूट लिया.. मतलब कतई जादूगर किस्म कि हो तुम, क्योंकि हम दोनों अंदर से पूरे छिछोरे ही हैं.. हम कभी नहीं बदल सकते.. !”

“कमीनो तुम दोनों वाकई नहीं बदल सकते, सारे सरकारी प्रोटोकॉल कि धज्जियां उड़ा दो..  यहां मौजूद डॉक्टर क्या सोचेंगे यह तो देख लो..!”

शेखर और रिदान ने वही खड़ी पिया और पंखुड़ी की तरफ देखा…
   पिया ने तुरंत अपने होठों के सामने उंगली करके ज़िप खींच दी और पंखुड़ी ने भी अपने होठों के ऊपर उंगली रखे ना में सर हिला दिया….
तब लीना ने पीछे पलट कर देखा और पंखुड़ी को देख कर उसे पहचानने की कोशिश करने लगी पंखुड़ी मुस्कुरा कर लीना के पास आ गयी…

” लीना जी शायद आपने मुझे नहीं पहचाना हम कुछ दिनों पहले मिले थे… मेरा नाम डॉ पंखुड़ी है..!”

” ओह हां हम मिले थे, मुझे याद आ गया ! कैसी हैं आप डॉक्टर..?”

” मैं तो ठीक हूं लेकिन उस वक्त मुझे नहीं पता था कि आप मैरिड हैं और आपकी इतनी क्यूट सी बच्ची भी है..!”

” ओह्ह नहीं, डॉक्टर मैं मैरिड नहीं हूं! और यह चिया है मेरी दीदी की बेटी है..  बल्कि मुझे कहना चाहिए यह उनकी आखिरी निशानी है मेरे पास..!
.  मेरी दीदी और जीजा जी अब इस दुनिया में नहीं है..! उस समय चिया 3 साल की थी, जब एक रोड एक्सीडेंट में वह दोनों नहीं रहे.. उसके बाद से चिया  मेरी जिम्मेदारी नहीं मेरा प्यार भी बन गयी…  इसकी जिम्मेदारी उठाते हुए कभी मुझे कोई बंधन नहीं महसूस होता.. मुझसे मेरे कई रिश्तेदारों ने कहा कि अच्छा हुआ तुम चिया का सहारा बन गई…
..लेकिन उनसे कैसे कहूं, क्या समझाऊं कि मैं चिया का सहारा नहीं बल्कि चिया मेरे जीने का सहारा बन गई है.. इसके बिना पल भर भी काटना मुश्किल होता है…
    इतनी प्यारी सी बच्ची है, अभी सिर्फ 5 साल की है, लेकिन यह बहुत गंभीर बीमारी से लड़ रही है… !
  इस बीमारी में इसे हर दो-तीन महीने में ब्लड ट्रांसफ्यूजन करवाना पड़ता है.. कभी-कभी अचानक ही इसकी तबीयत ऐसे ही बहुत खराब हो जाती है|  और तब अक्सर मुझे या मां को इसे लेकर अस्पताल दौड़ना पड़ता है…

” आपके घर पर और लोग भी तो होंगे ना लीना जी..!”

” हां !! कहने के लिए तो बहुत बड़ा परिवार है मेरा, माँ  के आलावा हम चार भाई बहनों का परिवार! लेकिन जब बाकी भाई बहनों के अपने परिवार होते हैं तो वह अपने माता-पिता और बाकियों पर ध्यान कहां दे पाते हैं?  बड़ी दीदी की निशानी चिया उनके बाद से ही मेरे पास रह रही है…  छोटे भाई और छोटी बहन की शादी हो चुकी है.. सब अपनी अपनी जगह व्यस्त है, पिताजी अब रहे नहीं ! मैं और मां दो लोग ही रहते हैं.. मेरा भी अधिकतर समय बस ऑफिस में निकल जाता है… इसलिए चिया की जिम्मेदारी अकेले मां पर पड़ जाती है ! हालांकि मैंने फुल टाइम मेड रखी हुई है, लेकिन फिर भी मेड तो मेड ही होती है…

” आपको और चिया को देखकर कोई कह नहीं सकता कि, आप दोनों मां बेटी नहीं है.. मुझे तो यही लगा कि आप उसकी मां है..!”

” मासी भी तो मां ही होती है..”

उन लोगों की बातों के बीच शेखर ने आकर धीरे से लीना को वहां से उठा लिया था.. और बातचीत के बीच ही वह सारे लोग वहाँ से निकलकर बाहर चले आए थे.. बाहर कॉरिडोर में लीना और पंखुड़ी बातों में लगी थी और इतनी देर में शेखर और रिदान जाकर सबके लिए कॉफी ले आए…

” लीना जी एक बात पूछ सकती हूं..? “

“जी बिलकुल !”

“आप कलेक्टर साहब को कैसे जानते हैं…?”

” अरे इस फर्जी पागल को मैं क्यों जानती हूं यह सवाल पूछो.. ?”

“आई बड़ी कटरीना.. ! क्यों जानती हूँ पूछो.. !  शुक्र मनाओ कि मेरे और रिदान की संगत के कारण तेरा भी थोड़ा कैरियर संवर गया..  अगर कोचिंग क्लास में सर  के बाद मैंने तुम दोनों को एक्स्ट्रा क्लास लेकर नहीं पढ़ाया होता ना तो आज भी तुम लोग दिल्ली के उसी कोचिंग क्लास में बैठकर रट्टा मार रहे होते…!”

उस समय की बात जैसे ही शेखर ने कही, तीनों दोस्तों के चेहरे पर एक ट्यूबलाइट जैसी चमक भरी मुस्कान आ गई.. तीनों को अपने दिल्ली के वह सुनहरे दिन याद आ गए, जब वह साथ में बैठकर दिन-दिन भर पढ़ा करते थे, नोट्स बनाया करते थे और साथ ही मस्ती किया करते थे….
   वही समय जो कभी एक दूसरे के साथ गुलजार हुआ करता था, आज व्यस्तता के कारण एक दूसरे से कई कई बार फोन पर बात करने की भी इजाजत नहीं दे पाता था ! लेकिन इसके बावजूद दिलों में दूरियां किसी के भी नहीं आई थी….!

दिल्ली में इन तीन खास दोस्तों के साथ बांसुरी भी थी,
और इन चारों की चौकड़ी थी…. हालाँकि मस्ती मजाक सिर्फ यही तीनों करते थे, बांसुरी अधिकतर वक्त एक किनारे खामोश खड़ी रहा करती थी, लेकिन उसकी उस खामोशी ने भी किसी के दिल के तार बजा दिये थे…
..  आज यहां दिल्ली की यादों में खोए तीनों आपस में हंसी मजाक कर रहे थे लेकिन शेखर को रहकर अचानक बांसुरी की याद आ गई!  और पल भर के लिए उसके चेहरे की रंगत उड़ गई, लेकिन उसने जल्दी ही अपने आप को सामान्य कर लिया!  हालांकि उसके चेहरे के बदलते रंग रिदान और लीना से छिपे नहीं रह सके…

” मैं एक और बात पूछ सकती हूं..?”

  पंखुड़ी के सवाल पर लीना ने हंसकर हामी भर दी…

” जी कलेक्टर साहब को आपका नाम बिगाड़ने में क्या मजा आता है..!”

” इसका जवाब स्वयं कलेक्टर साहब देंगे… वह बात ऐसी है डॉक्टर पंखुड़ी की जब हम लोग तैयारी कर रहे थे यूपीएससी की…
   उस वक्त एक शाम हम लोगों ने खूब सारी पढ़ाई की और उसके बाद हम मंदिर के लिए निकल गए, क्योंकि यह लीना मैडम हर मंगलवार को मंदिर जाया करती थीं…
    वहां सीढ़ियों पर बाहर एक बाबा जी धूनी रमाये  बैठे थे, उन्होंने जैसे ही हम सबको देखा, लीना को देखकर जोर से आवाज दी और कहा.. ‘अरे कटरीना इधर आओ ! हमारी यह फर्जीना मैडम उसकी बातों में आ गई और तुरंत उसके पास पहुंच गई..! उसने इनका माथा पढ़ा और लगा बकवास करने..
   उसने कहा तुम्हारी किस्मत में कुछ भी नहीं है, तुम्हारी किस्मत बहुत खोटी है, जो भी मिलेगा वह हाथ से बह जाएगा ! और एक लड़का ही तुम्हारे जीवन में बदलाव ला सकता है ! हो सकता है वह दोस्त बनकर तुम्हारी जिंदगी में शामिल हो.. वो परम पवित्र आत्मा जब तक तुम्हारे साथ रहेगा, तुम्हारा कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता…! उसके साथ रहते हुए तुम्हें हर रास्ते पर सफलता मिलेगी ! हर मोड़ पर खुशियां तुम्हारा इंतजार करेंगी,  बस शर्त यह है कि वह लड़का कभी तुम्हारा असली नाम ना ले..!
   जिस दिन उसने तुम्हारा असली नाम ले लिया तुम्हारे जीवन से यह चमत्कार अपने आप गायब हो जाएगा! और बस उस दिन से मैं जिन्न तरह इन दोनों से लिपट गया कि अब बेटा मैं तेरा गुड लक बनकर तेरे साथ घूमुंगा और अगर मैंने तेरा असली नाम ले लिया तो तेरा सारा गुडलक  खत्म हो जाएगा…बस इसीलिए मैं कभी मरजीना का नाम नहीं लेता..!”

“ओह्ह नहीं……!”

पंखुड़ी ने लीना की तरफ देखा और..

” लीना मैं सच में जानना चाहती हूं..!”

पंखुड़ी के मासूमियत से ऐसा कहते ही वहां मौजूद सभी लोग जोर-जोर से हंसने लगे…

” छी शेखर तू वाकई बहुत पकाता है यार… इतनी लंबी कहानियां कहां से लाता है तू…?  जा प्रतिलिपि इंस्टॉल कर और उसमें लेखक बन जा! खूब फॉलोवर मिलेंगे तुझे! “

पंखुड़ी ने लीना की तरफ देखा और लीना आगे कहने लगी

” यह खुद बहुत बड़ा फर्जी कलेक्टर है पंखुड़ी, बस किस्मत से कलेक्टर बन गया है..  बार-बार कलेक्टर बोलकर सिर पर मत बैठाओ.. इसे शुरू से ही अपने दिमाग पर बहुत घमंड था! इसका हमेशा से यही कहना था कि मेरे पास अनाप-शनाप दिमाग है !लेकिन देखो मेरा नाम तक तो याद नहीं रख पाता ! मुश्किल से दो अक्षर और दो मात्रा का नाम है और उसे भी यह बार-बार बिगड़ता रहता है..! “

”  लीना जी मुझे ऐसा लगा कि शेखर सर आपका नाम बिगाड़ते नहीं बल्कि आपको यूं ही चिढ़ाने के लिए ऐसा कहते हैं… आप उनके खास दोस्त है ना इसीलिए..!”

पंखुड़ी के भोलेपन पर शेखर लीना और रिदान एक दूसरे की तरफ देख कर हंस पड़े….
 
“क्यों मैंने ठीक कहाँ ना शेखर जी?”  मासूमियत से पूछा गया पंखुड़ी का सवाल बिना जवाब के ही खो जाता क्योंकि कुछ पलों के लिए शेखर भी उस अल्हड़ सी डॉक्टर कि बातें सुन कहीं खो सा गया, लेकिन तभी रिदान ने जवाब दे दिया..

” आप ठीक समझ रही है पंखुड़ी जी, अब कुछ कुछ मुझे भी ऐसा लग रहा है..!”

रिदान अब पंखुड़ी के भोलेपन पर मजे ले रहा था.. और पंखुड़ी बिना उसकी बात समझे मुस्कुराने लगी..

” वैसे पंखुड़ी जी आपका नाम बहुत खूबसूरत है…मेरा ये पागल दोस्त तो आपका इतना कठिन नाम ले ही नहीं पायेगा, ये पंखुड़ी की जगह आपको कभी ककड़ी तो कभी मकड़ी बुलाएगा.. खैर गोली मारिये इसे, वैसे आप किस मर्ज़ की डॉक्टर है..?”

” अभी तो सर जूनियर रेजिडेंट हूँ यहाँ…मेरा स्पेशलाईज़ेशन नहीं हुआ है अभी… !”

” अच्छा !!  स्पेशलाईज़ेशन…?   वो किस पर करना चाहती हैं आप ..?”

” मुझे बच्चे बहुत पसंद है, तो मैं बाल रोग में ही करना चाहूंगी…!”

” बहुत बढ़िया ! बहुत बढ़िया ! बच्चे तो मुझे भी बहुत पसंद है..! वैसे मेरा नाम रिदान है ! और मैं भी शेखर और लीना के साथ की ही बैच का हूँ ! फिलहाल यहां इस शहर में पंचायत सीईओ की पोस्ट पर काम कर रहा हूं ! अगर आपको कभी भी पंचायत से जुड़ी कोई भी समस्या हो तो आप बेझिझक मुझसे बात कर सकती हैं..!”

शहर में रहने वाली पंखुड़ी को पंचायत से भला क्या समस्या हो सकती थीं..

” पंचायत से जुड़ी समस्या के लिए आपसे जरूर बात करूंगी सर..!”

पंखुड़ी ने भी हामी भर दी…
   शेखर और लीना रिदान को इस तरह पंखुड़ी से बातें करते देख रहे थे…..

” हमारे कैंटीन की कॉफी आप लोगों को पसंद आई ना..? आप लोग अगर कुछ और भी लेना चाहें तो मैं मंगवा देती हूं..! स्नैक्स भी टेस्टी हैं.. !”

भुक्कड़ पंखुड़ी को फिर खाना याद आ गया…

” नहीं पंखुड़ी हम लोग और कुछ नहीं लेंगे, बस मुझे यह बता दो कि चिया की छुट्टी कितनी देर में होंगी..?”

” लीना जी!! यह तो चिया के डॉक्टर ही बता पाएंगे फिर भी मैं एक बार कोशिश करती हूं, पता करने की…

उन लोगों को वहीं छोड़कर पंखुड़ी अंदर चली गई.. अंदर मौजूद पिया वहां के विशेषज्ञ चिकित्सक से ही बातें कर रही थी, वह चिया के केस के बारे में ही जानकारी ले रही थी कि उसी वक्त पंखुड़ी भी वहां पहुंच गई…

पंखुड़ी के शेखर लोगों के पास से अंदर जाते ही शेखर ने रिदान की पीठ पर एक ज़ोर का धौल जमा दिया…

” साले कमीने लड़की देखी नहीं कि लाइन मारना शुरू.. जगह और लोग तो देख लिया कर !”

“हाँ जैसे तू बहुत जगह देख कर बातें कर रहा है… यहाँ कोई छिप कर हमारी बात सुन रहा होगा तो सोचेगा कैसे आईएएस हैं ये लोग! ढंग से बात तक नहीं  करना जानते.. ?  लोगों को भी लगेगा कि इतने बद्तमीज़ प्रशासनिक अधिकारी भी होते हैं.. !”

“अबे तो है तो हम भी इंसान ना.. प्रशासनिक में आते ही वैसे भी ज़िन्दगी गेंदा फूल बन जाती है… हर मंत्री संतरी के चरणों पर अर्पण होते रहो.. प्रोटोकॉल के हिसाब से आधी इंच मुस्कुराओ,  हंसो मत, बोलो मत सिर्फ काम करो, खूब काम करो और जब पूरी ईमानदारी से काम कर के कोई निर्णय ले लो, तब ऊपर से मंत्री के साले का फ़ोन आ जाता है ! और अपने ही आदेश को समाप्त कर नया आदेश निकालो फिर अपने पहले आदेश के निरस्तीकरण के लिए जाँच बैठाओ… अब इस सब में हम खुल के जीवन जीते ही कब है.. तू बता…?
   तूने तो ट्रेनिंग होने के बाद अपना कैडर बदल लिया था, तू तो फिल्ड में काम कर रही, क्या परेशान नहीं होती तू….. “

“क्या कर सकते हैं शेखर.. ये सब ज़िन्दगी का हिस्सा है.. !”

“बस उसी तरह मेरी ज़िन्दगी का एक अहम् हिस्सा तुम दोनों भी हो.. और मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता.. तुम दोनों ही हो जिनके सामने मैं अपने असली रंग में रहता हूँ.. आई रियली लव यू… !”

  उसी समय बाहर आती पंखुड़ी ने शेखर कि कही बात सुन ली, वो भी सबसे आखिरी वाली.. और उसका दिल जाने क्यों कैसा तो हो गया…..
  बहुत अनमने मन से वो वहाँ चली आयी…

“लीना जी बस दो घंटे में छुट्टी हो जाएगी.. !”

“चल तब तो फ़र्ज़िना अब तुझे लेकर ही घर लौटूंगा.. और वो भी गाना गाते हुए… ..

“ले जायेंगे ले जायेंगे दिल वाले दुलहनीय ले जायेंगे… ये गाएगा शेखर याद रखना.. !”

रिदान भी शेखर से जुगलबंदी में लग गया… और लीना अपनी इतनी परेशानी के बावजूद मुस्कुरा उठी…

“तुम दोनों मुझे हंसाये बिना मानोगे नहीं ना.. !”

“ना, बिलकुल नहीं.. !”

लीना ने उन दोनों को देखा और इधर उधर गर्दन हिलाते हुए मुस्कुरा कर शेखर और रिदान का एक एक हाथ थाम लिया… तीनो भावुक होकर कुछ पलों के लिए खामोश खड़े रह गए, फिर वापस शेखर और रिदान अपने रंग में वापस आ गए…

जब तक चिया कि छुट्टी नहीं हुई, उन दोनों दोस्तों ने लीना को अकेला नहीं छोड़ा….
  चिया कि छुट्टी होते ही उसे साथ लेकर वो लोग निकल गए… लीना को ऑफिस की किसी ज़रूरी फाइल में साइन करना बाकी रह गया था, इसलिए उसने ऑफिस की तरफ गाड़ी घुमवा ली…
   उसके साथ गाड़ी में रिदान था….
शेखर वहाँ से अपने ऑफिस की तरफ निकल गया था.. साइन करके लीना के लौटने तक में रिदान गाड़ी से बाहर निकाल कर चिया को गोद में उठाये इधर उधर कुछ दिखा रहा था और वो अपने प्यारे अंकल कि गोद में मजे से सब देखती किलकारी मार रही थी…..

  अनिर्वान भी उसी समय उस ऑफिस में किसी काम से आया और उसकी नज़र रिदान और उसकी गोद में इठलाती चिया पर पड़ी… और उसी वक्त अंदर से बाहर निकल कर लीना ने चिया कि पीठ सहलाई और गाड़ी कि तरफ बढ़ गयी.. उन तीनों के बैठते ही गाड़ी आगे बढ़ गयी….

  “ओह्ह तो ये है वो… !”

अनिर्वान के ऐसा कहने पर बाबूराव ने कुछ कहना चाहा लेकिन फिर चुप रह गया…

“बोल दो बाबूराव क्या कहना चाहते हो.. ?”

“साहब चाय कुछ ज्यादा तो नहीं खौल गयी होगी.. ?”

अनिर्वान ने अपने बालों में उँगलियाँ फिराई और फटाफट गाड़ी में बैठ कर उसे थाने चलने का निर्देश दे दिया…

“खौल खौल के फट ना गयी हो.. “

अनिर्वान ने चुटकी ली और ड्राइवर ने गाड़ी भगा दी…

*****

  अनिरुद्ध और दर्श निकलने की तैयारी कर चुके थे… वो दोनों खाना खाने बैठे थे कि काका बाहर से अंदर चलें आये…

“अनिर, वो कपडा फैक्टरी वाले पालेकर साहब मिलने आये हैं.. !”

” उन्हें बैठाइये काका,  मैं आता हूँ.. !”

“थोड़ा जल्दबाज़ी में लग रहे हैं, मैं उन्हें पानी देता हूँ, तुम खाना खत्म कर के आ जाओ.. !”

काका ने पानी ले जाकर उन्हें दे दिया…  लगभग पांच से सात मिनट में ही अनिरुद्ध भी दर्श के साथ बाहर बैठक में चला आया.. बैठक काफी बड़ी थीं इसलिए उस बड़े से हॉल में बीच से जो सीढ़ियां ऊपर कि ओर जाती थीं उसके दोनों ही तरफ आलीशान सोफे लगे हुए थे…..

  उनमें से एक तरफ कि बैठक व्यवस्था को कांच के स्लाइडर से घेर रखा था.. दो तरफ से दीवारे और दो तरफ से पारदर्शी कांच से घिरी वो बैठक निहायत ही निजी मीटिंग के लिए प्रयोग में लायी जाती थीं….
अनिरुद्ध का इंतज़ार करते हुए पालेकर साहब उसी बैठक में बैठे थे…

अनिरुद्ध के वहाँ पहुँचते ही पालेकर अपनी जगह पर खड़े हो गए…..

“वासुकि एक मुसीबत हो गयी है.. !”

“कहिये पालेकर जी.. ! बेझिझक कहिये.. !”

पालेकर ने दर्श कि तरफ एक नज़र देखा… उनका इशारा अनिरुद्ध और दर्श दोनों समझ गए…

“दर्श मुझसे अलग नहीं है… आप ये मान लीजिये कि वो और मैं एक ही हैं….. आप निश्चिन्त होकर कहिये.. !”

“वासुकि !! हम साफ बात कहना पसंद करते हैं बिना किसी लाग लपेट के हम तुम्हें शुरू से सब बता रहे हैं… वो बात ऐसी है कि, हमारे बेटे का कहीं किसी लड़की के साथ कुछ चक्कर चल रहा था.. अब जानते तो हो आजकल कि लड़कियां कितनी चालू हो गयी है..  जहां अच्छे घर का लड़का देखा बस फंसा लिया |  वैसे ही कॉलेज में किसी लड़की ने हमारे राहुल को भी अपनी खूबसूरती के जाल में उलझा लिया… | और जी आजकल की लड़कियां इतनी शातिर हो गई है कि इनका क्या कहा जाए… ?
   राहुल को अपने में फंसाए रखने के लिए यह अपनी हदें भी पार कर गई | अब इसके बाद पहले तो खुद अपनी मर्जी से सब कर लिया, अब उसके बाद वो  राहुल के ऊपर दबाव बनाने लगी कि हमसे शादी कर लो.. अब बताओ ये भी कोई बात हुई भला..?
    दिल बहलाने वाली हर चीज़ को घर पर तो नहीं लाया जा सकता ना..?
    इस बात में हमारा राहुल समझदार निकला, उसने शादी से साफ इंकार कर दिया, तो लड़की पहुँच गयी थाने… और राहुल पर रेप का झूठा केस दायर करवा दिया..
अब पुलिस अभी अभी आयी और हमारे मासूम से बेटे को पकड़ कर ले गयी.. रेप का चार्ज लग जायेगा तो फिर ज़मानत भी नहीं हो पायेगी.. बस इसलिए भागते दौड़ते तुम्हारे पास चलें आये…..
  तुम्हारा कहा टालने कि यहाँ किसी को हिम्मत नहीं है ना.. ? एक बार तुम फ़ोन कर दोगे तो पुलिस वाला क्या उनका बाप भी राहुल को छोड़ने पर मजबूर हो जायेगा…

“कितने लड़के हैं आपके पालेकर जी.. !”

अनिरुद्ध के सवाल पर दर्श उसे देखने लगा..वो समझ गया कि ये उलटी खोपड़ी वाला लड़का कुछ और ही सोच रहा है !
   और पालेकर गर्व से चौड़े हो गए बताते हुए कि उनके पांच लड़के हैं…

“ये राहुल ही सबसे छोटा है.. बस अब इसी कि शादी बाकी है… बातचीत चल भी रही है… इसी महीने भगवान ने चाहा तो रिश्ता तय भी हो जायेगा,  बहुत बड़े खानदान में रिश्ता होने जा रहा है.. मुंबई में पांच बेडरूम हॉल का फ्लैट दहेज़ में देने वाला है राहुल का होने वाला ससुर… दुबई में उसका जमा जमाया कारोबार है, इकलौती लड़की है तो राहुल को वहाँ का कारोबार का सेटअप भी दिया जा रहा है.. !”

“अरे बस बस पालेकर साहब.. ये तो बिग फैट वेडिंग बता दी आपने.. बढ़िया है   !”

“आप घर जाइये पालेकर जी, मैं खुद आपके लड़के को लेकर आता हूँ.. !”

पालेकर हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया और उसके वहाँ से निकलते ही दराज़ से अपनी गन निकाल कर अनिरुद्ध वासुकि बाहर निकल गया…
पीछे से उसे आवाज देता दर्श भी उसके पीछे भाग खड़ा हुआ…

“पता नहीं अब ये सनकी क्या करने जा रहा है.. चेहरे से तो गुस्से में लग रहा था..  ?”

काका ने वहाँ के कप ग्लास समेटने वाले नौकर से कहाँ और अनिरुद्ध कि गाडी को धुंआ उड़ाते हुए देखते खड़े रहे…

क्रमशः

aparna……

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