
जीवनसाथी 2 भाग -14
प्रेम भटी का मदवा पिलाई के
मतवाली कर दीन्हि रे, मोसे नैना मिलाई के..
अनिरुद्ध ने जाकर पीछे से नेहा को बांहों में भर लिया….
आंखें बंद किए नेहा को अपनी बाहों में भरे अनिरुद्ध बांसुरी को देख रहा था….. अनिरुद्ध के नेहा के पास जाते ही दर्श भी वहां से उठकर बाहर जाने लगा, काका तो पहले ही रसोई की तरफ मुड़ चुके थे…
अनिरुद्ध को इस कदर अपने पास देखकर नेहा खुश थी… उसका गाना बंद हो चुका था और वह अपनी हथेलियों को अनिरुद्ध के हाथों पर सरकारने लगी थी…
उसकी उंगलियां धीरे-धीरे अनिरुद्ध की बाहों पर ऊपर की तरफ फिसल रही थी कि तभी अनिरुद्ध ने अचानक उसे खुद से दूर किया और अपनी आंखें खोल दी…
” यह क्या है?” वह जोर से चिल्ला उठा..
नेहा को एकाएक समझ में नहीं आया कि उसकी ऐसी कौन सी बात अनिरुद्ध को बुरी लग गई..? आखिर बाहों में तो उसी ने भरा था तो, अगर उसकी बाहों पर नेहा ने अपनी उंगलियां फिरा ली तो ऐसा कौन सा अनर्थ हो गया..? अनिरुद्ध की तेज आवाज सुनकर दर्श भी बाहर जाते हुए दरवाजे पर खड़ा रह गया.. वह भी मुड़कर अनिरुद्ध को देखने लगा! अनिरुद्ध ने तुरंत नेहा के दोनों हाथ उठाकर उसकी हथेलियां पलट दी…
नेहा की खूबसूरत सी पतली पतली उंगलियों में लंबे लंबे नाखून निखर कर दिख रहे थे….
उसने नेल आर्ट कर रखा था जिसके कारण उसकी उँगलियाँ अलग ही चमक रही थी.. उस पर अनामिका के नाख़ून में कुछ छोटे छोटे से नग जड़े थे… एक पल को अनिरुद्ध नेहा के हाथों को देखता रह गया..
नेहा खुद पर इठला गयी उसे लगा अनिरुद्ध उसके सुंदर हाथों पर मोहित हो गया है.. वो मुस्कुरा कर उसकी तरफ बढ़ी और अपनी हथेली अनिरुद्ध की तरफ बढ़ाने लगी की अनिरुद्ध ने उसका हाथ झटक दिया…
“क्या हुआ अनिरुद्ध.. ? “
“तुमने ये सारा नाश्ता मेरे लिए बनाया है.. ?”
अनिरुद्ध का अजूबा सवाल नेहा के सर के ऊपर से निकल गया…
वो आश्चर्य से उसे देखती रही… और वो वापस एक बार फिर ज़ोर से चीख पड़ा…
“जवाब क्यों नहीं दे रही… ?”
“हाँ.. हाँ.. अनिरुद्ध, सब कुछ तुम्हारे सिर्फ तुम्हारे लिए बनाया है.. !”
” मेरे लिए और क्या कर सकती हो.. ?”
“तुम बोल के तो देखो…. जो कहोगे सब करने को तैयार हूँ.. !”
“सोच लो.. कहीं बाद में मुकर न जाना.. !”
अनिरुद्ध उससे बात करते करते वही एक किनारे रखी दराज़ की तरफ बढ़ गया….
“सवाल ही नहीं उठता… तुम बोल के तो देखो अनिरुद्ध.. तुम्हारे लिए तो मै जान भी दे सकती हूँ.. !”
अनिरुद्ध ने दराज़ से कुछ निकला और मुस्कुरा कर उसकी तरफ घूम गया…
और धीमे कदमो से चलते हुए उसके पास पहुँच गया.. उसकी हथेली अपने हाथ में लेकर उसने नेहा का हाथ पलट दिया और अपने हाथ में थाम रखे नेलकटर से उसकी अनामिका का नग जड़ा नाख़ून काट कर फेंक दिया…. नेहा की आंखे चौड़ी हो गयी.. वो भौचक नज़रों से कभी दर्श और कभी अनिरुद्ध को देख रही थी… की अनिरुद्ध ने उसके दूसरे हाथ को पलट कर उसके हाथ में नेलकटर रख दिया…
“अभी के अभी ये सारे नाख़ून काट दो.. !”
“क्या.. ये क्या कह रहे हो.. !”
“सच कह रहा हूँ.. मुझे ये जंगलियों जैसे नेल्स रखना पसंद ही नहीं है…..
अनिरुद्ध ने ये कहते हुए चुपचाप उसे देखती नेहा को वापस नेल्स काटने का इशारा किया.. और तब तक दर्श वहाँ आकर नेहा को कैफियत देने लगा…
“औरतें तो घर के सारे विशेष काम करती हैं, खाना बनाना, साफ सफाई तब ऐसे में ये नाख़ून अड़ंगा डालते हैं न इसलिए शायद अनिर को ये पसंद नहीं आ रहे…
नेहा ने एक दर्द भरी नज़र दर्श पर डाली और अपने नाख़ून काटने लगी…
और इसके साथ ही उसके आंसू भी टप टप टपकने लगे…. अनिरुद्ध वहाँ से बाहर जा रहा था कि दर्श उसके पास चला आया…
“क्या ज़रूरत थी उसके नाख़ून कटवाने की… ?”
“वो (बांसुरी) इतने बड़े नेल्स नहीं रखती… उस दिन पेपर्स पर साइन करते वक्त मैंने देखा था.. उसकी पतली पतली उँगलियों पर सलीके से कटे साफसुथरे नाख़ून थे और मुझे वही पसंद है.. “
दर्श ने अपने माथे पर हाथ मार लिया, वो मुड़ कर नेहा के पास जाने लगा… उसे क्या लगा था और नाख़ून कटवाने का क्या कारण निकला…
ये सनकी उस कलेक्टर के पीछे पूरा पागल हो गया था…
अनिरुद्ध और दर्श विपरीत दिशाओ में आगे बढ़ रहे थे की उस दिन वाला नौकर आज फिर थोड़े से नशे में हवेली में घुस आया और दर्श से टकराते टकराते बचा…
दर्श अभी उसे शराब पीने के लिए कुछ बोलने ही वाला था की उसे आभास हुआ अगर उसने इस लड़के को ज़ोर से कुछ कह दिया तो अनिरुद्ध कहीं इसे गोली न मार दे.. वो घूर कर उसे देखते हुए अपनी धीमी आवाज़ में कुछ कहने जा रहा था की, अनिरुद्ध उन लोगों तक चला आया…
“तूने फिर पी ली.. और पी तो पी लेकिन पीकर मेरे घर के अंदर कैसे घुसा तू… तुझे जितनी पिनी है पी और मर लेकिन मेरे इलाके में ये ज़हर लेकर आइंदा दाखिल हुआ तो तेरे पैर घुटनों के नीचे से काट कर तेरे ही हाथ में डांडिया खेलने पकड़ा दूंगा, समझे… “
“इस बार माफ़ कर दीजिये हुज़ूर, अपनी माँ की कसम खा कर कहते हैं आज के बाद कभी नहीं पिएंगे.. !”
एक ज़ोर का थप्पड़ उस के गाल पर पड़ा और उसका जबड़ा हिल गया.. एक कमज़ोर सा दांत उखड मुहं से बाहर फिंक गया… वो आश्चर्य से आंखे फाड़े अनिरुद्ध को देखने लगा की अनिरुद्ध ने उसकी शंका का समाधान कर दिया…
“माँ!!! कसम खाने के लिए नहीं होती है.. और जब जब कोई मेरे सामने माँ की कसम खाता है या उसके नाम की गाली उठाता है जी करता है बोलने वाले की ज़बान काट कर अलग कर दूँ…..
अरे माँ माँ है, कोई धनिया पुदीना है जो उसके नाम की कसम खा ली… !”
सामने खड़ा नौकर अनिरुद्ध का रौद्र रूप देख कर ऐसा डरा की उसका सर घूम गया और अपने सर को थामने की कोशिश करता वो भरभरा कर ज़मीं पर गिर पड़ा…
उसी वक्त वहाँ से अनिरुद्ध को घूरते हुए नेहा बाहर की तरफ जाने लगी की अनिरुद्ध कूद कर उसके सामने आ गया और उसकी हथेली पकड़ कर मोड़ कर देखने लगा की नेहा ने वाकई नाख़ून काट लिए या नहीं… नेहा ने खीझ कर अपने दोनों हाथ छुड़ाए और बाहर निकल गयी…..
“यू इनसेन !”
” क्या यार अनिर, उस लड़की के सामने इतनी चीखा चिल्ली मचाने की क्या जरूरत थी? बिचारी डर कर भाग गई ना..?”
” कहीं नहीं भागी है वो….. मैं जानता हूं वह ज़रूर वापस आएगी और…
” और क्या अनिर.. ?”
अनिरुद्ध के चेहरे की खूनी मुस्कान देखकर दर्श घबरा गया लेकिन अनिर मुस्कुराते हुए कमरे से बाहर गुनगुनाता चला गया…..
अकेला चला था मै, हाँ मै
न आया अकेला..
मेरे संग संग आया तेरी
यादों का मेला… !
*****
पिया ने अपने मन को कठोर करने की ठान ली थी, उसने तय कर लिया की अब वो बिना ज्यादा सोचे विचारे भावेश को जल्दी से जल्दी आगे बढ़ने को बोलेगी… क्योंकि अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो तो पागल ही हो जाएगी….
उसे समर पर से अपना दिमाग हटाना ही होगा… वो क्या करे जिससे उसका दिमाग उस पर से हटने लगे….
वो यही सब सोचते हुए अस्पताल जाने के लिए तैयार होने लगी…
उसी वक्त भावेश का फ़ोन आने लगा… भावेश अक्सर उसे सुबह शाम मेसेज किया करता था, फ़ोन किया करता था पर पिया का बात करने का मन तो माने.. उसे भावेश से बात करने का, उसके जवाब देने का दिल ही नहीं किया करता…..
शुरुवाती दिनों में वो उसे बहुत कठोर शब्दों में जवाब दे भी दिया करती थी लेकिन अब उसने थोड़ा संयम से काम लेना शुरू कर दिया था..
उसे समझ में भी आने लगा था की भावेश में कोई कमी नहीं थी.. एक सामान्य सा लड़का था जो अपनी होने वाली पत्नी की ख़ुशी के लिए कुछ भी कर सकता था…
उसमे सब कुछ अच्छा था बस बात ये थी की पिया उससे प्यार नहीं करती थी, और इसका कारण समर था.. सिर्फ समर.. !
तैयार होकर पिया अस्पताल पहुँच गयी.. आज अस्पताल में कुछ ज्यादा ही साफ सफाई चल रही थी.. मुख्य द्वार पर गेंदे की माला लगायी गयी थी…
वो सारी सजावट देखते हुए अपने केबिन की तरफ बढ़ गयी…
वो आगे बढ़ रही थी की पीछे से पंखुड़ी ने उसे आवाज लगा दी…
“हाय पिया, अच्छा हुआ तू आ गयी, चल यार थोड़ी मदद करवा दे.. !”
“ये सब हो क्या रहा हैं पाखी.. ?”
“तुझे नहीं मालूम क्या.. ?”
“नहीं… क्या हो रहा हैं.. !”
“शहर के कलेकटर को अतिरिक्त प्रभार दिया गया हैं, राष्ट्रिय स्वास्थ्य मिशन का.. तो आज यहाँ उनका निरीक्षण होना हैं… बस उसी सब की तैयारियां हैं.. !”
“ओह्ह तो ये कब तक प्रभार में हैं.. ?”
“जब तक अगला कोई अधिकारी नहीं आ जाता.. !”
बातों के बीच बीच में पाखी के मोबाइल पर कोई नोटिफिकेशन भी आ रहे थे… और वो बीच बीच में देखती भी जा रही थी..
पिया का ध्यान इस बात पर गया और वो ध्यान से पंखुड़ी की तरफ देखने लगी.. फटाफट सारा काम निपटा कर वो लोग केबिन की तरफ बढ़ गयी…
पिया ने अपना एप्रन निकाला और कुर्सी पर लटका कर अपनी कुर्सी पर बैठ गयी.. पाखी फटाफट बैठ कर वापस अपने मोबाइल में कुछ करने लगी.. …
पिया लगातार उसे घूरती बैठी थी….
“तेरा हो गया हो तो ज़रा आज के मरीज़ो की अपडेट भी दे दे मुझे.. “
“अम.. हाँ.. बस दो मिनट.. !”
“तू कहाँ लगी पड़ी है.. ?किसी से चैट कर रही है क्या.. ?” पिया के सवाल पर पाखी ने हाँ में सर हिला दिया..
“हाँ यार, एक मैरिज साईट पर मम्मी ने प्रोफाइल बना दी थी… अब उसी पे कुछ दो चार लड़कों की प्रोफाइल थी, जिनके पीछे मम्मी पड़ी हुई थी.. अब उनमें से एक प्रोफाइल मुझे ठीक लग रही है…
” तो तू अस्पताल के मरीजों को छोड़कर उसी लड़के के साथ चैटिंग में लगी पड़ी है..!”
” अरे नहीं यार, उससे वैसी वाली चैटिंग नहीं हो रही मेरी..!”
” फिर.. फिर कैसी चैटिंग हो रही है..?
” देख.. मैं तुझे शुरू से सारी बातें बताती हूं! प्रोफाइल तो मम्मा ने बनाया, लेकिन बाद में उसे मैंने एडिट कर दिया !क्योंकि मैं अपनी पहचान नहीं बताना चाहती थी ! जानती है, बहुत से लड़के सिर्फ मेरा प्रोफेशन देखकर और यह देखकर कि मैं कमाती हूं मुझसे जुड़ जाना चाहते हैं.. शादी कर लेना चाहते हैं ! लेकिन मैं एक ऐसे लड़के से शादी करना चाहती हूं जिससे मेरी पसंद नापसंद मेल खाएं, जो मेरे साथ कम्पेटिबल हो.. इसलिए मैंने मेरी प्रोफाइल में अपनी जॉब और अपनी पढ़ाई से रिलेटेड कुछ नहीं डाला…
यहां तक कि मैंने अपनी तस्वीर भी नहीं डाली है…
” गजब की उल्लू है तू, शादी करने के लिए तू अपनी पहचान छुपाकर लड़का ढूंढ रही है..!”
” हां बिल्कुल!! क्योंकि मैं यह चाहती हूं कि लड़का मुझे मेरे गुणों के कारण पसंद करें, ना कि मेरी पढ़ाई लिखाई और जॉब के कारण और ना ही मेरी शक्ल सूरत के कारण.. वरना तुझे तो पता ही है कोई अगर मेरी फोटो देख ले तो वैसे ही वह अपने होश खो बैठेगा और मैं नहीं चाहती कि…
” तू नहीं चाहती कि कोई तेरी खूबसूरती के कारण तुझ से शादी करें..
मेरी मां!! तू कैसे अपनी खुद की तारीफ कर लेती है यार..? तेरे जितना बड़ा सेल्फ ऑबसेस्ड पर्सन मैंने अपनी लाइफ में नहीं देखा..!”
पिया की बात सुनकर पंखुड़ी मुस्कुराने लगी…
“हां भई!! होता है ऐसा! किसी किसी को अपने आप से भी प्यार होता है…. जैसे मुझे !
मुझे मुझसे ही मोहब्बत है…. एक्चुली क्या हैं की मै मेरी फेवरेट हूँ… वो करीना का डायलॉग था न जब वी मेट वाला, वो मेरे लिए ही तो बना हैं.. !
तुझे पता हैं, दिन भर में मैं 4 बार अपने आपको आईने में देख लेती हूं…!”
” यह तो बहुत कम गिनाया आपने पाखी मैडम..!
तू कम से कम 56 बार खुद को आईने में देखती है… मुझसे पूछ!
तेरे केबिन में भी तूने आईना फिट कर रखा है… बेसिन के ऊपर !
वरना इस पूरे अस्पताल में किसी डॉक्टर के केबिन में आईना नहीं है..”
पंखुड़ी एक बार फिर लजा गई…
” अब डॉक्टर पिया जी, अगर आपने मेरी तारीफ पूरी कर दी हो तो मैं आगे बताऊं कि मेरा क्या चल रहा है..?”
” बताइए !! बिल्कुल बताइए..!”
” मम्मी के बनाए प्रोफाइल को मैंने जब से हैंडल करना शुरू किया, मैंने अपने हिसाब से अपना एक नया प्रोफाइल तैयार कर लिया.. अब उनके चुने लड़कों में से एक लड़का मुझे ठीक लग रहा था! क्योंकि उसने भी अपनी जॉब पढ़ाई लिखाई के बारे में कुछ भी नहीं लिखा था! यहां तक कि उसकी भी शक्ल उसमें नहीं लगी हुई है !लेकिन उसकी और मेरी बातें बहुत मिलती-जुलती हैं! मतलब मुझे जो चीजें पसंद है ना ज्यादातर वह चीज है उसे पसंद हो या ना हो लेकिन उन चीजों को वह नकारता नहीं है… “
” मतलब मुझे समझ नहीं आया..?”
” मतलब बहुत सिंपल सी बातें हैं यार ! उसकी और मेरी ऑलमोस्ट बातचीत होने लग गई है… सुबह सोकर उठने से लेकर रात में सोने तक बीच-बीच में हम दोनों की चिटचैट चलती रहती है…
अब जैसे कल, उसके कुक को किसी काम से बाहर जाना था और उसका खुद भी अपने हाथ से कुछ बनाकर खाने का मन था तो, उसने मुझसे पूछा कि मुझे क्या बनाना चाहिए मैंने उसे पास्ता की रेसिपी बता दी गई और वह बनाता गया…
यह देख… उसने पास्ता की फोटो भी भेजी हैं ..!”
पिया की तरफ पाखी ने अपना फ़ोन बढ़ा दिया…
” वाह क्या कमाल की अंडरस्टैंडिंग है…
तो इसी से डिसाइड कर लिया तूने कि तू उससे शादी कर सकती है…!
” अरे नहीं यार और भी ढेर सारी बातें हैं.. अब जैसे शादी को लेकर ही जो मेरी सोच है, उससे काफी मिलती-जुलती उसकी सोच भी हैं ! हालांकि उसके साथ एक छोटी सी प्रॉब्लम है… उसकी लाइफ में कोई लड़की थी, मतलब अफेयर नहीं था, उसके दिल में उस लड़की के लिए मोहब्बत थी और वह भी बहुत गहरी वाली….
लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि अब वह लड़की उसकी लाइफ में नहीं है… और तू सोच यह बात उसने मुझसे पहले दिन ही कह दी…!”
” कमाल है !! और फिर तूने क्या किया..?
पिया की बातों से साफ लग रहा था कि उसे पंखुड़ी की बात में रत्ती भर भी इंटरेस्ट नहीं आ रहा था, लेकिन बोर होते हुए भी वह पंखुड़ी की बातों को झेल रही थी..
” फिर क्या मैंने भी उसे बताया कि मेरी भी जिंदगी में एक लड़का था लेकिन अब वह नहीं है..!”
पिया आश्चर्य से आंखें फाड़े पंखुड़ी की तरफ देखने लगी…
“हैं… तेरी जिंदगी में कौन था..? और कब आया भई? कब आया कब गया हमें तो पता ही नहीं चला? मैं तो शुरु से तेरे साथ हूं..!”
” नहीं यार ऐसा कहना पड़ता है… अपने आप को इमोशनल दिखाने के लिए !
वरना उसे क्या लगेगा तेईस साल की मेच्योर लड़की और उसकी लाइफ में आज तक कोई लड़का ही नहीं आया…. मै अब कोई बच्ची तो हूँ नहीं.. !
कभी-कभी प्रेस्टीज इश्यू की भी बात हो जाती है… जब सामने वाला आपको बता रहा है कि उसकी लाइफ में कोई थी तो मैंने भी कह दिया कि मेरी लाइफ में भी कोई था….
.. और वैसे भी यार आज के जमाने के हिसाब से देखा जाए तो मुझ जैसी स्मार्ट, सुंदर, इंटेलिजेंट लड़की की लाइफ में अब तक तीन चार लड़कों को आकर चले जाना चाहिए था… लेकिन मेरी किस्मत ही खराब है ! जिस लड़के को मैं पसंद आती हूं वह मुझे नहीं पसंद आता और जो मुझे पसंद आता है वह….
” वह किसी काम का नहीं रह जाता..!”
” अच्छा!! ऐसे क्यों बोल रही है भला..?”
” सही तो बोल रही हूँ ! जब कॉलेज फर्स्ट ईयर में थे तो तुझे फाइनल ईयर के प्रोफेसर से प्यार हो गया था याद है..? उनके केबिन में जानबूझकर अपने फालतू असाइनमेंट को पूछने के लिए बार-बार घुसा करती थी, और बाहर निकल कर उनकी सिगरेट की स्मेल की तारीफ किया करती थी… मुझे सब अच्छे से याद है… !
और उसके बाद जब उनकी टेबल पर उनकी बीवी और दो बेटियों की फोटो देखी तब तेरे इश्क का भूत तुरंत फुर्र से उड़ गया…!”
” तो क्या करती ? शादीशुदा प्रोफेसर से प्यार में पड़ना तो बेवकूफी है ना ?”
पंखुड़ी ने इतने भोलेपन से कहा कि पिया को हंसी आ गई…
” और उसके बाद वो जो जिम वाला बंदा तुझे पसंद आया था… वह याद है..?”
” हां यार!! वहां भी बुद्धू बन गई मैं..?
” उस समय तू सिर्फ 21 साल की थी और वह 45 का था… पता नहीं कैसे तुझे उसमें रितिक रोशन नजर आने लगा था !
वह तो अच्छा हुआ जिम में जब तू वेट्स उठा रही थी और उसने तेरी मदद करते हुए’ बेटा संभाल कर किया करो.’ कहा !
उस वक्त पाखी जो तेरे चेहरे का रंग उड़ा था ना, कसम से मेरे पास उस वक्त कैमरा होता तो मै तेरी तस्वीर उतार लेती…
.. मेरा तो बुरा हाल था, हंस हंस के पेट में बल पड़ गए थे और सारे जिम के लोग मुझे देख रहे थे कि, हो क्या गया है मुझे..?”
पाखी का मुंह लटक गया और पिया वापस उस बात को याद कर जोर जोर से हंसने लगी…
” और हां फिर वह तीसरे आए, अस्पताल में मिले कलेक्टर साहब…!
वह याद है कि नहीं तुझे? जिसने तुझसे एक झूठ कहा था कि वह अपनी बेटी का एडमिशन करवाना चाहते हैं.. ! वह भी तो तुझे पसंद ही आ गया था! और वैसे देखा जाए ना, तो वह तेरे साथ सबसे ज्यादा जमता था ! दिखने सुनने में भी सही था, उम्र का फासला भी ज्यादा नहीं रहा होगा!
पढ़ाई लिखाई, जॉब, प्रोफेशन सबके हिसाब से देखा जाए तो वह सबसे ज्यादा कम्पेटिबल लग रहा था, लेकिन तूने वहां पर अपनी बात आगे क्यों नहीं बढ़ाई.. ?
मुझे तो लगता था कि उसके और तेरे बीच कुछ खिचड़ी पक रही है….”
” मैं भी सच कहूं तो मुझे यह बंदा सबसे ज्यादा ठीक लगा था.. लेकिन मैं उसके बारे में कुछ भी सोच पाती उसके पहले ही मेरे दिमाग में यह बात आई कि उसने खुद को मेरे सामने शादीशुदा बताया और यह भी बताया कि उसकी एक बेटी है, फिर मुझे लगा कि यह मेरे सामने ऐसे झूठ क्यों बोल रहा है..? इसके पीछे जरूर कुछ तो राज़ है…
वरना बातचीत करने में और ऐसे सोशल लाइफ में देखा जाए तो यह बहुत सही बंदा है! लेकिन वह लड़कियों से बात करने पर हमेशा सबसे पहले यह क्यों बताता है कि वह मैरिड है और उसकी बच्ची है और वह भी झूठ बोलता है तो…
जानती है पिया उसके ऐसा करने का क्या कारण है..?
पिया ने ना में सिर हिला दिया
“तू जानती है तो, तू ही बता दे..!”
पंखुड़ी का चेहरा एकदम से गंभीरता के आवरण में घिर गया…
” मुझे लगता है उसे लड़कियों में इंटरेस्ट नहीं है..!”
” व्हाट.. ?…. यू मीन…!”
पिया की आंखें आश्चर्य से चौड़ी हो गई… और उसकी बात सुन पंखुड़ी धीरे-धीरे हां में सिर हिलाने लगी…
” याह… तुझे सही लग रहा है…. आय थिंक ही इस इंटरेस्टेड इन बॉयज…!”
” शिट यार! सारी दुनिया के नमूने पाखी तुझे ही मिलते हैं..! चल कोई बात नहीं अब इस डेटिंग साइट वाले लड़के से ही बात आगे बढ़ा ले.. हो सकता यही बात बन जाए…
वैसे सच कहूं तो मुझे वो कलेक्टर तेरे लिए बड़ा पसंद आया था ! मैं तो सपने भी देखने लगी थी कि, जल्दी ही तेरी और उसकी शादी का कार्ड मेरे हाथ में रहेगा…!”
” कोई बात नहीं पिया..! जब होनी होगी शादी भी हो जाएगी यार…”
किसी फिलोसफर के जैसे चेहरा बनाकर पाखी ने कहा और अपने मोबाइल को खोल कर वापस कुछ एक मैसेज भेजा और पिया की तरफ देखकर उसने अपनी एक आंख दबा दी…
पिया भी मुस्कुराने लगी कि उसी समय उनके केबिन का दरवाजा नॉक करके एक नर्स भीतर चली आई…
” मैडम कलेक्टर साहब आ गए हैं..!”
हां में सर हिला कर पिया और पंखुड़ी उठकर दरवाजे से बाहर चले गए, उन दोनों को ही कलेक्टर साहब का स्वागत जो करना था….
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कलेक्टर ऑफिस की मीटिंग में अनिर्वान और बाकी लोगों को यही मालूम चला था कि कलेक्टर साहब को स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन दोनों का ही अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है… और इसीलिए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और पुलिस विभाग के अधिकारियों को बुलाकर मीटिंग ली थी…
अनिर्वान ने सोचा था कि मीटिंग से निकलने के बाद वो लीना को साथ लेकर अपने ऑफिस के लिए निकल जाएगा, लेकिन जब तक वह मीटिंग से निकला, उसने नोटिस किया कि उसके निकलने से पहले ही लीना शेखर के साथ वहां से गायब हो चुकी थी… अपना सा मुंह लेकर अनिर्वान अपने ऑफिस पहुंच गया….
उसका मूड काफी उखड़ा हुआ था, अपने केबिन में जाने के बाद उसने बाबू राव को बुला लिया…
” यह बाहर तीन चार लड़के जो बैठे हैं.. कौन हैं..?
अनिर्वान के सवाल पर बाबूराव उन लड़कों के बारे में उसे बताने लगा…
” साहब आप के आदेश पर कल रात जो रेव पार्टी चल रही थी शहर में, वहीं से लड़कों को पकड़ा गया है..
” ईतनी लंबी चौड़ी रेव पार्टी में सिर्फ यह चारों पकड़े गए..?”
” साहब बहुत सारे लोगों को पहले से मालूम चल गया था कि वहां छापा पड़ने वाला है, तो काफी लोग तो खिसक गए थे और कई लोग हमारी धरपकड़ के समय भाग गए…!”
” पार्टी जहां थी, वहां से गेस्ट लिस्ट निकालो और उसमें मौजूद सारे लोगों के नाम मेरे पास लेकर आओ… !”
” साहब बहुत बड़े बड़े घर के बच्चे इंवॉल्व हैं..!”
” हां तो..? बाबूराव सदियों से यह परंपरा चली आ रही है कि इस तरह की रेव पार्टी में बड़े घर के बच्चे ही मौजूद मिलते हैं.. किसी रिक्शेवाले के बच्चे के हाथ में इतना पैसा नहीं होता कि वह इस रेव पार्टी में घुस सके… समझ रहे हो…?
यह वह नामुराद औलादे हैं, जो अपने बाप के काले पैसों को इसी तरीके से उड़ा कर उनके मुंह पर कालिख पोतती है.. मै ये नहीं कह रहा कि बच्चों को आजादी मत दो या पैसे मत दो…
लेकिन उन्हें रुपयों की कदर करना तो सिखाओ.. इस तरह नशे में बहाकर यह बच्चे पैसों के साथ साथ अपने खुद के समय की भी बर्बादी कर रहे,और अपने शरीर को भी खत्म कर रहे हैं…
अच्छा बाबूराव वो विधायक जी का टट्टू था… जो उस दिन मिलने आया था, क्या नाम बताया था उसका…?”
” साहब भुवन नाम था उसका..!”
” उस दिन तो ठीक से मुलाकात नहीं हो पाई उससे.. वह आया और उसी वक्त हमें जाना पड़ गया…उसे भी वापस बुलवाओ यार.. उस मुलाकात में मजा नहीं आया था.. !”
” जी साहब.. ! इन चारों का क्या करे.. ?”
“करना क्या हैं.. ले कर आओ चारों को अंदर… बहुत दिन से गोश्त नहीं खाया हैं… बनाना जानते हो बाबूराव… ?”
बाबूराव के चेहरे पर पसीना छलक उठा.. माथे का पसीना पोछते हुए उसने धीरे से हाँ में गर्दन हिला दिया…
“अरे तुम इतना घबरा क्यों गए यार.. इन लड़को को मार कर पकाने की बात थोड़े न कर रहा हूँ…. राक्षस थोड़े न हूँ यार…..
वैसे थोड़ा सा राक्षस तो हूँ मैं.. ! चलो जाओ ले आओ उन लोगों को अंदर… पहले इनकी खबर लेते हैं फिर सोचेंगे आज खाना क्या हैं.. ?”
चारों लड़कों को पकड़कर बाबूराव दो और हवलदारों की सहायता से अंदर ले आया…
.. चारों के चेहरे पर अकड़ साफ देखी जा रही थी ! अस्त-व्यस्त कपड़े, बिखरे हुए बाल, हाथों में झूलती महंगी घड़ियां, गले की चेन सब उन्हें हर एंगल से रईस बाप की बिगड़ी औलाद दिखा रही थी….
” हां तो भई खूब रुपयों की गंगा बहती है तुम्हारे घरों में… कुछ गलत तो नहीं कह रहा हूं मैं.. ?
मेरा बस यही कहना है कि रुपयों की गंगा में तैरो चाहे नहाओ…
रोज नहाओ, मजे करो लेकिन इतना भी ना करो कि डूब जाओ…
क्योंकि अच्छे से अच्छा तैराक भी प्रकृति के खिलाफ खड़ा होकर तैरना चाहेगा तो डूब ही जाएगा..”
उनमें से एक लड़का चीख पड़ा..
” तुम जानते नहीं मेरा बाप कौन है..?”
“तुम खुद जानते हो.. ?”
अनिर्वान के सवाल पर लड़का बौखला गया, अनिर्वान बैठा बैठा मुस्कुराता रहा…
” साले अगर तू खुद जानता ना कि तेरा बाप कौन है तो तू इस तरह उसके नाम का फजीता नहीं काटता होता… चल मिलकर आते हैं तेरे बाप से…”
अनिर्वान अपनी जगह से खड़ा हो गया और अपनी शर्ट को सही से टक इन करते हुए टेबल के पीछे से चलते हुए उन लड़कों के सामने आकर खड़ा हो गया… उसके आकर खड़े होते ही सारे लोग नीचे से ऊपर उसे देखने लगे…
उनके सामने खड़ा वह साढ़े छह फुट का महामानव अपनी कद काठी से ही उन लोगों को कंपा देने के लिए काफी था.. उनमें से तीन की तो बोलती बंद हो गई, लेकिन चौथा जो कुछ ज्यादा ही अकड़ रहा था वह वापस एक बार फिर अपनी अकड़ में बौराने लगा…
” मायनगरी हॉस्पिटल के डीन है वह..!”
” अब वह डीन हो चाहे दीनदयाल.. अब तो अनिर्वान भरद्वाज उनसे मिलकर रहेगा और उनसे उनके बेटे के कारनामे का हिसाब भी मांग कर रहेगा… !
सालों तुम जैसे लड़कों के कारण ही ना पूरी यूथ बर्बाद हो रही है…
तुम जैसे रईसजादों को देखकर तुम से कम उम्र के लड़के तुम्हारे जैसा बनना चाहते हैं….
तुम्हारा यह दो कौड़ी का टशन और तुम्हारे ये फालतू से स्टाइल देख कर तुम्हारे ही जूनियर लड़के तुम जैसा बनने के चक्कर में और रोल बाजी मारने के चक्कर में तुम्हारे जैसे ट्रेंडिंग दिखने के लिए नशा करने लगते हैं…
शोऑफ के लिए शुरू हुई ये आदत ही धीरे धीरे लत बनने लगती है..
और फिर तुम नशा नहीं करते हो, नशा तुमको पीने लगता है..!
और एक दिन तुम्हारी एक एक नस को ऐसे गला देता है कि वह तड़पन तुम्हारी जान लेकर ही थमती हैं.. …
हमारा देश युवाओं का देश माना जाता है, और अगर हमारे देश का युवा इस तरह खुद को फूंकने लगेगा तो क्या होगा हमारे देश का…?
मुझे झूठ चोरी मक्कारी बेईमानी जालसाजी से जितनी नफरत है ना उससे कहीं ज्यादा नफरत इस नशे से है…
मेरा यह मानना है कि इस नशे में तुम लोगों के गुम होने के पीछे कहीं ना कहीं तुम्हारे अभिभावक है..
चलो फिर आज तुम्हारे दीनदयाल जी का इंटरव्यू ले ही लिया जाए…!”
अपनी बात कहते कहते लय में आगे बढ़ते हुए अचानक चुप हो जाना अनिर्वान की आदत थी…
बड़े-बड़े कदम भरता अनिर्वान आगे बढ़कर अपनी गाड़ी में बैठ गया और उसके पीछे उसके कदम से कदम मिलाने के लिए चारों लड़कों को दौड़ते हुए चलना पड़ा…
वह लोग भी उसके साथ जाकर उसकी जीप में सवार हो गए और अनिर्वान के कहने पर ड्राइवर ने गाड़ी अस्पताल की तरफ भगा दी…..
क्रमशः
aparna…..
