अपराजिता -135

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अपराजिता -135

   अनिर्वान ने गेंदा के सर पर हाथ फेरा और उसे हिम्मत रखने का दिलासा देकर वहाँ से बाहर निकल गया..

उसी समय अस्पताल में भागते दौड़ते से राजेंद्र भावना और सरना दाखिल हो गए..

एक रात पहले जब राजेंद्र भावना के साथ घर पहुंचा तब सरना उसके घर पर मौजूद था.. साफ सफाई करने के बाद वो उन लोगो का रास्ता देखते बैठा था..

कुछ देर में ही वो लोग पहुँच गए.. और सरना उन दोनों के लिए चाय बना कर ले आया..

गेंदा के बारे में सरना और राजेंद्र दोनों ने आपस में पूछताछ कर ली, लेकिन दोनों को ही उसके बारे में  कुछ मालूम नहीं था.. सरना ने कहा भी कि वो गेंदा से मिला था और उसे बताया भी था, और उन लोगो के आने की खबर से वो खुश ही थी.. और इसलिए वो खुशी मे सामान लेने भी गयी थी।

लेकिन जब बहुत देर तक गेंदा नहीं पहुंची तो उन लोगो को लगा कि देर हो जाने के कारण वो अपने घर चली गयी होगी..।
सरना और राजेंद्र खूब देर तक बातें करते रहे और भावना घर को ठीक से जमाती रही।

कुछ देर बाद सरना ने ही आलू और लौकी की पकौड़ियाँ निकाल ली.. भावना उसकी मदद करती रही और सरना ने सीलबट्टे में चटनी पीस ली….

पकौड़ो के साथ चाय लेने के बाद राजेंद्र घर जाने के लिए उठ गया.. लेकिन तब तक काफी रात बीत चुकी थी।

इतनी रात में अकेले जाना सुरक्षित नहीं होगा ये सोच कर राजेंद्र भी वहीँ रुक गया..
भावना ने उस बाहर वाले एकमात्र कमरे में ज़मीन पर ही बिस्तर लगा दिया।
सरना का घर ज़रा दूर था इसलिए वो निकल गया..

उसके जाने के बाद बर्तन धुल कर भावना ने रसोई ठीक की और सोने चली आयी…

कुछ देर बातें करने के बाद भावना राजेंद्र थक कर सो गए..
लगभग आधी रात के वक्त उनके दरवाज़े पर कोई दस्तक देने लगा।
राजेंद्र ने ही दरवाज़ा खोला राजेंद्र आश्चर्य से सामने खड़े सरना को देखने लगा, और उस वक्त सरना ने राजेंद्र से सबसे पहले यह सवाल किया कि

“क्या गेंदा यहां आई है?”

जिसके जवाब में राजेंद्र चौंक गया क्योंकि सरना खुद जानता था कि गेंदा वहां नहीं आई और तब सरना ने बताया कि जब वह बीती रात अपने घर पहुंचा तब तक वह यही सोच रहा था कि गेंदा शायद अपने घर चली गई और इसलिए वह भी अपने घर पहुंच कर छत पर चला गया और सो गया।
लगभग बारह बजे के आसपास गेंदा की मां उसे ढूंढते हुए सरना के घर पहुंची और जब सरना को पता चला कि गेंदा अपने घर वापस ही नहीं गई तो वह एक बार फिर गाड़ी निकाल कर राजेंद्र के घर चला आया।

यह बात सुनकर राजेंद्र और भावना दोनों आश्चर्य चकित हो गए। राजेंद्र ने तुरंत अपनी भी गाड़ी निकली और वह दोनों लोग गांव में गेंदा को ढूंढने निकल गए। रात भर ढूंढने के बावजूद उन्हें गेंदा कहीं नहीं मिली। वह दोनों थककर पुलिस स्टेशन जाने की सोच ही रहे थे कि भोर के वक्त उन्हें दो बाइक पर सवार लड़के प्राथमिक अस्पताल की तरफ से लौटते हुए नजर आए।

जाने क्या सोचकर राजेंद्र ने उन लड़कों को रोक लिया और उनसे पूछताछ में पता चला कि उन्होंने एक लगभग अठारह उन्नीस बरस की लड़की को बहुत जख्मी हालत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती करवाया है। यह सुनते ही वह तीनों लोग भाग कर अस्पताल की तरफ चले आए, और यहां आकर उन्होंने अपने सामने गेंदा को लूटी पिटी सी हालत में देख कर चौंक गये।
   गेंदा राजेंद्र और सरना को देखते ही सिसकने लगी। दोनों उसके पास चले आए। राजेंद्र उसके बालों पर हाथ फेरने लगा, और गेंदा सुबक-सुबक कर रोती रही। उसी के पास खड़ी भावना भी आगे बढ़ गई। उसने गेंदा के दोनों हाथ थाम लिए, राजेंद्र ने वहीं खड़ी डॉक्टर रेशम की तरफ देखा और इशारे से उससे पूछ लिया कि किसी तरह का फिजिकल एसॉल्ट हुआ है या नहीं?

रेशम ने पूरी बातें अपने डॉक्टरी लहजे में राजेंद्र को स्पष्ट कर दी। गेंदा के साथ रेप नहीं हुआ, यह सुनकर तो उन तीनों को राहत मिली थी, लेकिन गेंदा की जो हालात सामने नजर आ रही थी उसे देखकर उन तीनों की भी रूह कांप गई थी।

रेशम से गेंदा की स्थिति का जायजा लेने के बाद वह लोग उसे अपने साथ ले जाना चाहते थे, इसी सबके बीच में बाहर बैठे अथर्व और मानव घर लौटने का विचार करने लगे..

गेंदा की हालत फिलहाल बहुत खराब थी, उसे अस्पताल में भर्ती करके लगातार दवाइयों के इंजेक्शन और सलाइन लगाने की जरूरत थी। लेकिन वह जानती थी कि राजेंद्र भी एक डॉक्टर था और राजेंद्र ने रेशम को यकीन दिलाया कि वह गेंदा को अपने साथ जिला चिकित्सालय लेकर चला जाएगा, और वहीं पर भर्ती करवा लेगा।
इस बात पर रेशम भी राजी हो गई। आनन फानन में राजेंद्र ने जिला चिकित्सालय में फोन करके एंबुलेंस बुलवा ली और सारी तैयारी के साथ वह लोग गेंदा को लेकर जिला चिकित्सालय के लिए निकल गए।

इन्हीं सब बातों में रेशम ने अनिर्वान को कॉल लगाकर यह सारी जानकारी दे दी। अनिर्वान जाने से पहले अपना नंबर रेशम के पास लिखवा कर गया था।

इतना सब होते-होते दिन चढ़ गया था। रेशम भूखी प्यासी वहां आई हुई थी। उसकी हालत गेंदा को देखकर वैसे भी बहुत खराब हो गई थी।
ग्रेसी ने उसे भी घर लौट जाने की सलाह दी। मानव और अथर्व भी उसे यही समझ रहे थे कि अब गेंदा इस अस्पताल से बेहतर जगह पहुंच चुकी है। इसलिए उसे भी वापस लौट जाना चाहिए, उन लोगों का कहा मानकर रेशम वापस लौट गई..।

***

अनिर्वान ने उन दोनों लड़कों के कहे मुताबिक उस जीप के नंबर के आधार पर जीप का पता ठिकाना निकलवा लिया।
   वीर और अनंत ने सोचा नहीं था कि गांव खेड़े की बात इतनी महत्वपूर्ण भी हो सकती है। उन लोगों को यही लगा गांव की कोई गंवार लड़की थी जो भाग कर कहीं जा चुकी होगी। और इसके बाद अपने घर लौट गई होगी। यही सोचकर वह लोग वहां से अपने घर चले गए। अनंत फिलहाल यज्ञ के डर के कारण वीर के साथ उसके घर तो नहीं गया, लेकिन वही एक सस्ते से लाज में ठहर गया ।
उसे वहां उतारकर वीर अपने घर जा चुका था। अपने कमरे में सोए पड़े वीर को इन सब के बारे में कोई जानकारी नहीं थी..।

पुलिस को सारी जानकारी देने के बाद उन दोनों लड़कों ने यज्ञ को फोन कर दिया। यज्ञ उस वक्त किसी काम से बाहर निकला हुआ था। उसने उन लड़कों का फोन उठाया और उनसे बात करने लगा।

उन दोनों लड़कों ने पिछली रात की सारी कहानी यज्ञ को जस की तस सुना दी। यह सुनकर यज्ञ आश्चर्य चकित रह गया क्योंकि एक दिन पहले उन दोनों लड़कों ने बाकी सारी बातें तो यज्ञ से बताई थी लेकिन यह बात नही बताई कि अनंत किसी लड़की के पीछे था और वीर के साथ था..

असल में यज्ञ के लिए काम करने वाले यह दो लड़के उसके घर से ज्यादा परिचित नहीं थे। यह लड़के जमीन जायदाद के मामलों में उसका काम देखा करते थे। गांव खेड़ा में घूम कर ऐसे किसान जो अपनी बिना खेती वाली जमीन को बेचना चाहते हो, उनसे संपर्क कर यह यज्ञ के लिए कस्टमर जुगाड़ करते थे। इसीलिए यज्ञ और अखंड के अलावा यह दोनों घर पर किसी और से परिचित नहीं थे..

अनंत की तस्वीर तो यज्ञ ने इन दोनों को भेज दी थी, इसलिए उसे पहचान कर यह लोग उसका पीछा कर रहे थे। लेकिन वीर को इन लोगों ने ज्यादा करीब से देखा नहीं था। इन दोनों को यह आशंका तो हुई कि अनंत शायद वीर की जीप में है, लेकिन इन दोनों को अपने ऊपर पूरा भरोसा नहीं था। इसीलिए उन्होंने यज्ञ से यह बात नहीं कही थी।

लेकिन अगली सुबह जब उन्होंने यज्ञ को फोन किया तो अपने मन की आशंका के साथ सारी बातें बता दी। यह सारी बातें सुनते ही यज्ञ का खून खौलने लगा। उसने अपना सारा काम-धाम समेटा और घर की तरफ मुड़ गया…

***

अनिर्वान थाने में बैठा धीरेंद्र वाले केस की फाइल को तैयार कर रहा था कि किस तरह धीरेंद्र पर चार्ज शीट तैयार की जाए कि उसी वक्त बाबूराव वहाँ चला आया..

“साहब गाडी के मालिक का पता ठिकाना मिल गया है ?”

“किसकी गाड़ी है ?” अनिर्वान ने पूछा

“साहब मानौर के सरपंच अखंड परिहार के नाम पर गाड़ी बुक है !”

“क्या ?”

“हाँ साहब.. !”

अनिर्वान अपनी जगह से उठ कर खड़ा हुआ और अपनी टीम को साथ लेकर मानौर की तरफ  निकल गया..

मानौर पहुँच कर ठाकुरों की हवेली के सामने उसने गाड़ी रोक दी.. और बाबूराव और बाक़ी लोगो के साथ हवेली के दरवाज़े पर पहुँच गया..
वहाँ खड़े दरबान ने अनिर्वान को देख कर नमस्ते किया और अंदर खबर देने भाग कर चला गया..

उस बुलंद दरवाज़े को ठेल कर अनिर्वान अंदर दाखिल हो गया..
अंदर बहुत बड़ा सा ओसारा था, जिसमे एक तरफ घर भर की गाड़ियां खड़ी थी..
अनिर्वान एक एक जीप और कार को देखता आगे बढ़ रहा था, और उसी जीप के पास जाकर खड़ा हो गया..
उसने अपनी जेब से एक छोटी सी पर्ची निकाली जिस पर गाड़ी का नंबर लिखा था।  उस पर्ची से गाड़ी का नंबर मिलाया और जब तसल्ली हो गयी कि ये वही गाडी है, तब उसने साथ आये एक हवलदार को गाड़ी की छानबीन करने का इशारा कर दिया।

वो खुद भी घूम घूम कर गाडी का मुआयना करने लगा..
सामने ड्राइवर की बाजु वाली सीट के पास बाहरी हिस्से में कुछ खून के धब्बे नजर आ रहे थे, इसके साथ ही सामने वाले हिस्से में मिरर के पास नीचे तरफ भी खून के धब्बे मौजूद थे…
ये सब देखते हुए अनिर्वान का खून खौलने लगा था..
वो सब कुछ इमेजिन कर पा रहा था कि किस तरह इन दरिंदो ने चलती गाडी के साथ गेंदा को घसीटा होगा, कैसे उसका सर पकड़ कर पटका होगा..
.ये सब सोच सोच कर अनिर्वान का गुस्सा बढ़ता चला जा रहा था..

उसी समय अखंड बाहर निकल आया..

“सर… आप ? आइये ना बाहर कहाँ खड़े हैं ?”

“बाहर ही मेरा काम है अखंड बाबू, जरा यहाँ आइये !”

“जी कहिये ना ! कल्लू साहब के लिए कुर्सियां यही ले आओ, और चाय के लिए रसोई में बुलवा दो !”

“नहीं कुर्सियों की ज़रूरत नहीं है.. फ़िलहाल आप से एक बहुत ज़रूरी काम है !”

“जी कहिये, हम से क्या काम है ?”

“ये जीप आपके नाम रजिस्टर्ड है ?”

“हाँ जी !”

“मतलब ये आपकी जीप है ?”

“जी हमारी ही है.. मतलब हमारे घर की !”

“आपकी है या नहीं ?”

“हाँ लेकिन चलाता हमारा छोटा भाई है.. !”

अनिर्वान के माथे पर बल पड़ गए..

“नाम बताइये भाई का !”

“वीर सिंह परिहार… ये गाडी वही अपने उपयोग में लाता है.. बाक़ी हमारी वाली वो खड़ी है और एक गाडी यज्ञ लेकर बाहर गया है.. वैसे क्या बात हो गयी है सर ?”

“वीर सिंह को बुलवाइए !”

“बात क्या हो गयी सर ?”

“अखंड… वीर को बुलवाओ.. !” अनिर्वान ने ऑर्डर सा दिया और अखंड ने तुरंत वहीँ खड़े नौकर को वीर को बुलाने भेज दिया….

इतनी देर में सीढ़ियां उतर कर कुसुम भी नीचे चली आयी थी…
उसके पीछे ही तेज़ी से चलती हुई काकी भी चली आयी..

“क्या हुआ… क्या हो गया अखंड ?”

“काकी, वीर को बुलवा दीजिये !”

“काहे बुलवा दे ? वो आधी रात में तो वापस आया है, अभी सो रहा.. बाद में आइयेगा उससे मिलने !”

उन्होंने अनिर्वान को देख कर कहा और अनिर्वान ने उनकी बात का जवाब दिए बिना अर्थपूर्ण दृष्टी से अखंड की तरफ देखा, अखंड ने काकी के पीछे खड़ी कुसुम की तरफ देखा और उसे अंदर जाकर वीर को बुला लाने का इशारा कर दिया..
.कुसुम अंदर चली गयी..

वो सीढ़ियों की तरफ जाने को थी कि नौकर को मुहं लटकाये आते देखा और उसे पूछ लिया..

“क्या हुआ कल्लू भैया ? वीर उठा या नहीं ?”

“नहीं भाभी जी.. भैया जी दरवाज़ा नहीं खोल रहे !”

“ठीक है हम देखते हैं !”

कुसुम तेज़ी से ऊपर चली गयी… उसने दरवाज़े पर दस्तक दी और अंदर से वीर चीख पड़ा..

“क्या हुआ कल्लू, समझ नहीं आ रहा क्या कि हमको सोना है.. अभी नहीं आएंगे बाहर !”

“वीर.. वीर बाबू.. हम हैं कुसुम ? बाहर आइये, आपसे मिलने कुछ लोग आये हैं !”

कुसुम कभी वीर को जगाने नहीं आती थी, उसे आया देख वीर चौंक कर जाग गया..

“कौन आया है भाभी ?”

“पुलिस वाले है वीर… क्या हुआ है ?”

पुलिस का नाम सुनते ही वीर घबरा गया..
वो तुरंत उठा और अपने कमरे का पिछला दरवाज़ा खोल कर पिछली सीढ़ियों से नीचे उतर गया..

वो दबे पांव घर के पिछली तरफ से बाहर निकल जाना चाहता था..लेकिन पीछे तरफ खुलने वाला दरवाज़ा बाहर के आंगन से नजर आता था..
इसलिए वो दबे पांव निकल रहा था..

वो जा ही रहा था कि अनिर्वान की उस पर नजर पड़ गयी..

“ऐ रुको.. कौन है वो जो वहाँ से भाग रहा ?” अनिर्वान ने अखंड से पूछा और अखंड झूठ नहीं बोल पाया..
वो चुप रहा गया और अनिर्वान एक छलांग लगा कर उस तक पहुँच गया..
लेकिन उसके पहुंचने से पहले वीर एक झटके में बाहर निकला और दरवाज़े पर बाहर से सांकल लगा दी..

अनिर्वान तुरंत वापस आया और वही आकर खड़ी कुसुम की तरफ देखा..

“ये वीर था ?” कुसुम ने हाँ में गर्दन हिला दी और अनिर्वान तुरंत बाहर की तरफ भागा, अपनी गाड़ी निकाल कर वो तुरंत वीर के पीछे निकल गया।
   उसने अपने दो कॉन्स्टेबल वहीँ छोड़ दिए जो उस जीप को जब्त कर अपने साथ जाँच के लिए ले गए..।
उसी वक्त यज्ञ भी वहाँ पहुँच गया.. उसके आते ही अखंड  ने उसे सारी बात बताई और उसके साथ बैठ कर अनिर्वान के पीछे निकल गया..

वीर भाग रहा था, लेकिन उसके कदमो से तेज़ जीप की चाल थी.. भागते हुए वीर को पीछे से अनिर्वान ने गर्दन से पकड़ा और गाड़ी रोक दी..

“साले भागा नहीं होता तो ये कन्फर्म भी नहीं होता कि तूने ही कल रात वाला कांड किया है.. हम लोग तो गाड़ी की तलाश में आये थे, लेकिन हमें देख कर भाग कर तूने साबित कर दिया कि तू ही गुनहगार है !”

वीर खुद को छुड़ाने की जद्दोजहद में लग गया..

“हमें पकड़ने का वारंट है आपके पास ?”

“अरे ओ कानून की किताब, मुझे कानून मत सीखा,मेरे थाने में मेरा कानून चलता है.. समझा..?
अब ये बता कि तेरे साथ कल कौन कौन था ? एक बार में भौंका नहीं तो फिर तू सोच भी नहीं सकता कि तेरा क्या हाल करूँगा !”

“कोई नहीं था, हम तो घर पर थे सारी रात, शाम आठ बजे से घर आ गए थे !”

“बेटा तेरी अम्मा ने चीख चीख कर एलान किया था कि उनका लाड़कुंवर आधी रात बीतने के बाद घर लौटा है, और इसलिए उसे देर तक सोने दिया जाये.. !”

अनिर्वान समझ गया था कि अड़ियल बैल बिना कोड़े के भागेगा नहीं..

अनिर्वान ने वीर की गर्दन को अपनी हथेली के कब्जे में लिए और जीप को भागा दिया… गिरते पड़ते वीर को जीप के साथ भागना पड़ रहा था..

“गलत कर रहे हो ऑफिसर, छोड़ेंगे नहीं तुम्हे हम !”

“हमें छोड़ोगे तब जब पकड़ पाओगे बाबू, फ़िलहाल तो तुम हमारी कैद में हो.. “

अनिर्वान ने उसे खींच कर जीप में सवार किया और  अपने साथ थाने लेकर पहुँच गया..

उसे खींचते हुए अपने केबिन में ले जाकर एक तरफ को पटक दिया..
वीर गुस्से में अनिर्वान को घूर रहा था..

अनिर्वान ने वीर की तरफ देखा और और बाबूराव की तरफ देख कर पानी मंगवा लिया..

उसके मंगवाने पर दो ग्लास में पानी हाज़िर हो गया.. वीर बडी हसरत से पानी की तरफ देखने लगा….

“पीना है पानी ?”

वीर ने मुहं फेर लिया..

“बाबूराव वो गाना सुना है ?”

“कौन सा हुज़ूर ?”

“इस अंजुमन में आपको आना है बारबार..
  दीवारों दर को गौर से पहचान लीजिये.. “

अनिर्वान ने गया और वीर की तरफ देख कर ठहाका लगा दिया..

क्रमशः

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sarika Tripathi
sarika Tripathi
1 year ago

best part

Neeta
Neeta
1 year ago

🙏🙏🙏🙏

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💐💐💐💐♥️♥️♥️♥️♥️⭐⭐⭐⭐⭐

Meera
Meera
1 year ago

असली dogy तो अभी भी बाहर है पर अच्छा किया इस लाड़ कुंवर को भी सिगरेट के जलन का एहसास करवाएगा अनिर्वाण साहब ,

Deepa verma
Deepa verma
1 year ago

बड़ा अच्छा किया अनिर बाबू जी एक कमबख्त को तो पकड़ा। एक नालयक को और पकड़ कर अच्छे से जूते से पूजा करना।दोनो हैं ही इसी लायक😠

Archana Singh
Archana Singh
1 year ago

Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻

जितेन्द्र कुमार वैश्य Jitendra Kumar Vaish
जितेन्द्र कुमार वैश्य Jitendra Kumar Vaish
1 year ago

अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे अब समझ में आयेगा जब ढंग से ठुकाई करेंगे अनिवार्न सर बहुत सुंदर पार्ट 🙏🙏🙏🙏🙏💖💖💖💖💖💖🌹🌹🌹🌹🌹🌹👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👌👌👌👌👌😘😘😘

Kavita Agarwal
Kavita Agarwal
1 year ago

Bht badiya anirvan chodega nhi in dono ko superb part

Ashok Garg
Ashok Garg
1 year ago

Very nice part of the story and very interesting 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊

Suman pant
Suman pant
1 year ago

अब देखना है क्या होता है