जीवनसाथी- 2/41


जीवनसाथी -2 भाग -41

     अपूर्व शौर्य  को गोद में लिए अस्तबल की तरफ बढ़ने लगा…
    यश को तैयार करके भेजने के बाद रेखा उसी वक्त अपने कमरे से निकलकर  यश के पीछे उसकी गाड़ी तक बढ़ रही थी कि तभी उसने शौर्य और अपूर्व को मुख्य द्वार से अलग पिछली द्वार की तरफ जाते देखा और अपूर्व को पीछे से आवाज लगा दी…

” भाई साहब आप सॉरी को लेकर उधर कहां जा रहे हैं यह तो सॉरी के स्कूल जाने का वक्त है..!”

इस तरह पीछे से ठोकर जाने के कारण अपूर्व के चेहरे पर नाराजगी से लगने लगी उसने अपने आप को शांत करने का प्रयास किया और पीछे मुड़कर मुस्कुराते हुए रेखा के पास चला आया…

”  कुंवर सा अभी स्कूल जाने के लिए बहुत छोटे हैं ऐसा नहीं लगता आप लोगों को… ?
एक तो इनकी मां साथ में नहीं है दूसरे रोज रोज स्कूल  भेज कर आप लोग इस नन्हे-मुन्ने पर इतना अत्याचार कर रहे हैं! हमसे तो देखा नहीं जाता…
   कल ही रात में यह सर्दी की शिकायत भी कर रहे थे इसीलिए हमें लगा कि आज इन्हें स्कूल ना भेजकर थोड़ा अपने साथ घुमा फिरा लिया जाए..!”

    शौर्य ने रात पहले सर्दी खांसी की कोई शिकायत नहीं की थी लेकिन उसे अपने मामा साहब का उसे बचाने के लिए इस तरह झूठ बोलना अंदर से गुदगुदा गया…
  और वह अपने मुंह पर हाथ रखकर अपनी हंसी रोक ने लगा..
   लेकिन सॉरी की खराब तबीयत की बात सुनकर रेखा के चेहरे पर तुरंत चिंता अच्छा लगने लगी उसने आगे बढ़कर अपूर्व की गोद से शौर्य को अपनी गोद में ले लिया और तुरंत अपनी हथेलियों के माथे पर रखकर उसका ज्वर नापने लगी…

” शरीर तो गरम नहीं लग रहा,  शौर्य  बेटा नाक  दिखाओ अपनी…!”

    शौर्य ने ना में गर्दन हिलाई और अपनी काकी की गोद से नीचे उतरने के लिए मचलने लगा…..

” क्या हुआ शौर्य क्या बात है बेटा..?”

रेखा ने बड़े प्यार से उसके गालों को चलाते हुए पूछा और शौर्य ने अपने अपूर्व मामा की और उंगली दिखा कर उनके साथ जाने की इच्छा जाहिर कर दी..

” शौरी आज इश्कुल  नहीं जाएगा…!”

उसकी तोतली जबान सुनकर रेखा के चेहरे पर भी हंसी  छलकने लगी…

” ठीक है आज शौर्य  स्कूल नहीं जाएगा…
  लेकिन कल से रोज जाएगा और आज शौर्य अपनी काकी साहब के साथ बाहर घूमने जाएगा… चलो हमारे साथ..!”

रोना स मूह बनाकर शौर्य ने अपूर्व की तरफ देखा और हाथ पैर पटक के अपूर्व के साथ जाने की जिद करने लगा…

” अच्छा ठीक है आप मामा साहब के साथ चले जाना लेकिन एक बार अपनी मम्मा से तो पूछ लो..!”

ना मैं गर्दन हिला कर जिद करता हुआ शौर्य अपना हाथ रेखा के हाथ छुड़ाकर अपूर्व के पीछे जा छिपा…

” रेखा बाई सा क्या आपको अपने भाई के ऊपर ऐतबार नहीं है..? क्या इस घर का राजकुमार अगर हमारे साथ चला जाएगा तो हम उसका कोई नुकसान कर देंगे..?

” अरे नहीं भाई साहब आप गलत समझ रहे हैं वह बात नहीं है लेकिन…

” लेकिन क्या इतनी देर से हम आपकी बात सुन रहे हैं आप वर्षा को स्कूल न भेजने की बात पर तो राजी हो गई लेकिन उन्हें हमारे साथ भेजने के लिए राजी नहीं है…?
आपको रत्ती भर भी भरोसा नहीं है हम पर..!”

” ऐसा नहीं है भाई साहब..? आप पर बहुत भरोसा है हमें इसलिए तो यह भी अक्सर आपके कमरे में ही पड़ा रहता है पर हमें कोई चिंता नहीं होती लेकिन बात यहां पर शौर्य की है…
अगर बांसुरी और राजा साहब इस वक्त महल में मौजूद होते तो हम इतनी चिंता बिल्कुल नहीं करते लेकिन इनके माता-पिता दोनों नहीं है ऐसे में उनसे पूछ कर ही ने महल से भेजना हमें सही लगा…
    लेकिन यह बात भी सच है कि आप भी तो इस महल का ही हिस्सा है अगर शौर्य हमारे साथ जा सकता है घूमने तो आपके साथ क्यों नहीं..?
आप  सॉरी को घुमाने ले जाइए लेकिन जरा ध्यान रखिएगा इसका..!”

” बेफिक्र रहिये  रेखा बाईसा ! आप हमारी बहन है ! और अगर हमसे कुंवर सा को किसी तरह का भी नुकसान पहुंचता है तो यह आप और आपके परिवार पर कलंक लगेगा.. और हम ऐसा हरगिज नहीं होने देंगे..!
   उल्टा हम तो यहां अपने पिता साहब के लगाए उस कलंक को धोने के लिए आए हैं जिससे राजा साहब की सेवा कर करके उस धब्बे को धो सके..
    आप हम पर आंख मूंदकर भरोसा कर सकती हैं…!’

ठाकुर साहब का जिक्र आते ही रेखा की आंखों में भावनाओं का ज्वार भाटा उतरने लगा और वह भी में से अपने आंसू पोंछ कर आगे बढ़ गई……

    अपूर्व सिंह ठाकुर आया तो इस महल में अपने पिता के लिए ही था लेकिन अपने पिता के लगाए कलंक को धोने आया था या उस कलम को और मजबूत करने आया था यह तो भविष्य के गर्त में ही छिपा था….
    फिलहाल इतना तो तय था कि वह इस वक्त छोटे से शौर्य को किसी तरह का कोई कष्ट पहुंचा कर अपने लंबे चौड़े खेल को एक छोटी सी गलत चाल के आगे लुढ़कने नहीं दे सकता था…!

होठों से होठों में मुस्कुराते हुए उसने शौर्य को वापस अपनी गोद में लिया और अस्तबल की तरफ बढ़ गया…..

*****

   डेक पर चलती ठंडी हवाओं के असर से समर को नींद आने लगी थी और वह बालकनी में आराम कुर्सी पर पैर फैलाए सो गया था…

पिया ने उसके चेहरे को देखा और मुस्कुरा कर अंदर से उसे ओढ़ाने के लिए चादर  ले आई…

समर के पैरों पर से ज्यादा डालने के बाद पिया ने झुक  कर उसके माथे को चूमा और अंदर चली गई….

आज का पूरा दिन बहुत खूबसूरत जीता था बल्कि जिस वक्त से बोलो क्रूस पर आए थे तब से पिया का हर एक पल बेहद खुशनुमा बीत रहा था उसने नहीं सोचा था कि उसके हनीमून की शुरुआत इतनी खूबसूरत होगी उसे रह-रहकर समर्पण ढेर सारा प्यार आ रहा था और लग रहा था सारा प्यार अपने पति पर लुटा दे लेकिन….
..  इस सब को प्लान करने और इतनी छुट्टियां लेने के चक्कर में पिछले कुछ दिनों समर में जो हार्ड तोड़ मेहनत की थी उसके कारण आज हनीमून मनाने से पहले ही उसे नींद ने आ घेरा था…
कोई बात नहीं क्रूस पर आज आखिरी रात नहीं कल से आगे के और 3 दिन उनके हनीमून के ही थे…

और यही सोच कर मुस्कुराते हुए वह अपने फोन पर पोर्ट ब्लेयर के दर्शनीय स्थलों को खोजने में लग गयीं…

दर्शनीय स्थलों को ढूंढने के बाद  वह अपनी आज की तस्वीरें देखने लगी उसे अपनी और समर की तस्वीरें बहुत प्यारी लग रही थी उसने अपने फ्रेंड बुक अकाउंट पर एक-एक करके अपनी और समर की प्यारी प्यारी फोटो अपलोड करनी शुरू कर दी इसके साथ ही समर के अकाउंट को टैग भी कर दिया हालांकि समर फ्रेंड बुक पर पिछले कुछ समय से बिल्कुल एक्टिव नहीं था लेकिन पिया बराबर एक्टिव थी….
   और उसने ज्यादा सोचे विचारे बिना समर को टैग कर अपनी और समर की हनीमून पिक्स अपलोड कर दी…

    कुछ देर बाद ही उसे भी थकान सी लगने लगी और वो भी अंदर अपने बेड पर गहरी नींद सो गयीं…

    आधी रात के वक्त उसे लगा जैसे उसके चेहरे पर कुछ चल रहा हैं… चौंक कर उसकी नींद खुल गयीं…
  समर उसके बेहद करीब था, और ठीक उसके सामने लेते वो इसे बहुत प्यार से देख रहा था…
   
   “बहुत थकी हो… ?”

      समर के इस सवाल पर शरारत से मुस्कुरा कर पिया ने अपनी बाहें फ़ैला दी…….
   समर उसकी बाँहों में समा गया… दो मुहब्बत करने वाले दिल आज अपने प्यार की परिणति पाने को बेक़रार थे… शादी को हफ्ता बीत जाने के बाद भी दोनों को एक दूसरे के लिए इतना वक्त नहीं मिल पाया था कि दोनों अपने प्रेम का विस्तार पा सके…
    आज दो खुशबुए एक दूसरे में घुलने को तैयार थीं,  दो सुमन एक दूसरे में गूंथने को तैयार थे कि तभी उनके कमरे के दरवाज़े पर दस्तक होने लगी…
   चौंक कर समर पिया के ऊपर से हट गया…

  अपने कपड़े सही कर वो तुरंत दरवाज़े तक पहुंचा और दरवाज़ा खोल दिया…

  ” सर वी आर सो सॉरी लेकिन बाहर तूफान आया हुआ हैं,  और हमारा सम्पर्क तूफान के कारण लैंड ऑफ़िस से फ़िलहाल के लिए कट गया हैं… आप लोग अपने सेफ्टी जैकेट्स पहन कर ही रूम में रहें.. और अगर आपको खतरे कि कोई भी बात लगे या आप अलार्म बजता सुने तो तुरंत पास के डेक तक पहुँच जाइएगा… ! हमें लग रहा हैं हम किसी सायक्लोन का शिकार बन गए हैं.. !”

  उस आदमी ने समर को जल्दी जल्दी अलर्ट किया और अगले केबिन कि ओर बढ़ गया… और उसकी बात सुन पिया चौंक कर पलंग पर उठ बैठी…
  उसे अंदर वाले कमरे तक उसकी बात सुनाई दे रही थीं…
  समर ने दरवाज़ा बंद किया और तुरंत पिया के पास चला आया…

” पिया…  आओ कपड़े बदल कर सेफ्टी जैकेट्स पहन लो.. !”

  हाँ में सर हिला कर घबराई सी पिया ने समर कि तरफ देखा और पलंग से उतर गयीं…
  समर ने अलमीरा से जैकेट्स निकाले और पिया को पहनाने आगे बढ़ गया..

“समर !! पाता हैं जब से हम क्रूज़ पर चढ़े थे मुझे टाइटेनिक मूवी कि बहुत याद आ रही थीं… और देखो…

समर ने मुस्कुरा कर उसकी बात काट दी..

“अच्छा इसलिए तुम वो टायटेनिक पोज़ बनवा कर फोटो खिंचवा रही थीं… !”

ऐसी मुश्किल घडी में भी समर और पिया के चेहरे पर एक भीनी सी मुस्कान चली आई…

“एक बात कहूं मंत्री जी.. ! मुझे ये बात सुन कर बहुत डर नहीं लग रहा,  क्योंकि आप जो साथ हैं.. बस भगवान से यही प्रार्थना हैं कि जो रोज़ और जैक के साथ हुआ वो हमारे साथ न हो.. हम आज तक साथ जियें हैं आगे कुछ हो  दोनों को हो जाएं… हम साथ ही मर जाएं.. !”

  समर ने पिया को गले से लगा लिया…

“तुम्हे कुछ बताना था पिया… !”

“कहिये ना मंत्री जी.. ! अब क्या वाकई आप कयामत का इंतज़ार कर रहें हैं.. ?
   ख़ुदा करें कि कयामत हो,  और तू बतायें.. !”

पिया अपनी ही बात पर हंसने लगी..

“उसके पहले तुम अपनी ये डेढ़ इंच कि फ्रॉक बदल कर ट्रैक पैंट्स डाल लो… !”

  पिया के छोटे से नाइट वेयर का मजाक उड़ा कर समर ने उसे उसके पैंट्स पकड़ाए और अपना लाइफ जैकेट खोलने लगा..

“पहले आप उस तरफ मुँह कीजिये, तब बदलूंगी.. !”

“अच्छा अब भी कुछ बाक़ी हैं क्या छुपाने को.. !”

पिया को छेड़ते हुए समर ने दूसरी तरफ मुहं घुमा लिया और पिया ने फटाफट कपड़े बदल लिए..
समर ने खुद से पहले उसे जैकेट पहनाया और फिर सारे लॉक्स कसने के बाद उसने अपना जैकेट पहन लिया…

  उसी वक्त बाहर भगदड़ सी मचने कि आवाज़ आई और समर ने दरवाज़ा खोल कर देखा और लोगों को एक तरफ को भागते देख खुद भी पिया का हाथ पकड़े बाहर निकलने लगा कि पिया ने उसे खींच कर अपने करीब किया और उसके गले से लग गयीं…

“एक प्रॉमिस कीजिये मंत्री जी.. !”

“बोलो पिया.. !”

“चाहें कुछ भी हो जाएं, आप मुझ से पहले मरेंगे नहीं.. !”

” पागल लड़की.. !”

समर ने पिया के सर पर एक चपत लगा दी…  और झिलमिलाई आँखों से पिया ने समर का हाथ अपने सर पर रख लिया…

“प्रॉमिस कीजिये मुझसे.. कि आप हर हाल में खुद को बचाने कि कोशिश करेंगे, न कि मुझे.. !”

“मैं हम दोनों को बचाने कि कोशिश करूँगा.. !”

  पिया ने गहरी सी साँस ली और समर को डबडबायी आँखों से देखने लगी.. समर पिया के चेहरे पर झुक गया…

वो दोनों भी अपना कमरा छोड़ कर बाहर डेक पर चलें आये.. डेक पर जहाज के कैप्टन और बाक़ी स्टाफ लोगों को गिन कर उनका नाम और शहर लिखवा रहें थे, हालाँकि ये सब पहले से उनके पास मौजूद था लेकिन जब कभी ऐसी कोई अप्रत्याशित घटना होती तब क्रूज़ के नियम के अनुसार सबका नाम वापस वहाँ दर्ज़ होना ज़रूरी था…
   इसके साथ ही उन लोगो को गिन कर बीस पच्चीस कि संख्या में अलग भी किया जा रहा था, कि अगर क्रूज़ पर पानी बढ़ने लगे तब सेफ्टी बोट्स का प्रयोग कर लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके… !
  माहौल डरावना सा होने लगा था… पिया समर का हाथ कस कर थामे खड़ी थीं….

******

     बाँसुरी अपने ऑफ़िस में कुछ काम देख रही थीं कि उसका मोबाइल घनघना उठा…
उस वक्त बाँसुरी इतनी व्यस्त थीं कि वो फ़ोन नहीं उठा पायी… उसे एक छोटा सा काम निपटा कर तुरंत टी एल मीटिंग के लिए निकलना था…
   इसलिए उसने सोचा गाड़ी में बैठ कर फ़ोन देख लेगी…
  उधर रेखा ने अपूर्व को बातों में उलझाए हुए ही बाँसुरी को कॉल लगा दिया था,  लेकिन बाँसुरी के न उठाने से वो समझ गयी कि बाँसुरी व्यस्त होगी… और फिर अपूर्व भी ऐसी गूढ़ गंभीर बातें कहने लगा कि रेखा के पास कोई चारा नहीं रह गया था…
   उसने शौर्य को एक बार चूम कर अपूर्व को सौंप दिया…
     और पलट कर अपने कमरे में जाने लगी कि सामने से आती पंकजा उसे दिख गयी..
  और पंकजा को देखते ही रेखा उस पर बरस पड़ी.. कि उसने शौर्य को स्कूल क्यों नहीं भेजा.. पंकजा गिड़गिड़ा कर माफ़ी मांगने लगी…

“ठीक हैं, अब हमारे सामने रोने से क्या फायदा.. तुम इसी वक्त अपूर्व भाई सा के पीछे जाओ और जब तक शौर्य वहाँ खेल रहा हैं उसके साथ बनी रहना.. अगर शौर्य को हमनें अकेला पाया तो समझ जाना तुम्हारी नौकरी उसी वक्त खत्म !”

“जी हुकुम !” पंकजा एक तरह से भागती हुई अपूर्व के पीछे निकल गयीं…
   रेखा उसे देखने के बाद कमरे कि ओर बढ़ रही थीं कि निरमा का फोन चला आया…

  एक ही साथ हुई शादियाँ फिर बच्चे इस सब ने निरमा रेखा और बाँसुरी के बीच कि औपचारिकता को लगभग समाप्त कर दिया था…
  बाँसुरी और निरमा तो पहले ही सखियाँ थीं,  रेखा के साथ भी निरमा की  खासी दोस्ती हो गई थी…
    रेखा का शुरुआत से काम बुटीक का था, लेकिन अब उसने अपने काम को फैला कर अपने शौक को भी अपने काम का हिस्सा बना लिया था और अब वह ज्वेलरी डिजाइनिंग का भी काम करने लगी थी….

उसने देखा कि निरमा उसे फोन कर रही है तो उसने तुरंत फोन पिक कर लिया…

” हां बोलो  निरमा ! तुम रेडी हो गई क्या..?”

”  हां लगभग तैयार हूं.. और तुम..?”

” मैं बस रेडी होने जा रही.. जया भी लगभग तैयार ही हैं..!”

” ओके..!  तो तुम मेरे लिए ड्रेस और ज्वेलरी भी लेकर आओगी ना..?

” क्या महल की पार्टी में पहनने के लिए..?”

” हां मैं बाहर शॉपिंग के लिए जाऊं इससे अच्छा है तुम से ही ले लूं..!”

” नाइस आइडिया लेकिन हम वहां फाइव स्टार  में बैठकर मेरी ड्रेसेस और ज्वेलरी थोड़ी ना देखेंगे..?  वहां से लंच करके निकलते हुए मेरी शॉप पर चले जाएंगे या फिर  मैं शाम को महल में ही मंगवा लूंगी अपने असिस्टेंट से बोलकर..! इस इट ओके..?”

” ओके..!  बच्चे स्कूल चले गए ना..?”

” अरे शौर्य नहीं गया है, इसलिए मुझे लग रहा था मैं शौर्य को लेकर आ जाती हूं..!”

” क्यों नहीं गया..? क्या हो गया..? तबीयत तो ठीक है ना उसकी..?”

निरमा को शौर्य की चिंता लग गई…

” हां वह ठीक है.. लेकिन.. !”

  रेखा की बात आधे में ही काट कर निरमा बोल पड़ी…

”  शौर्य अभी हैं कहाँ.. ?”

“अपूर्व भाई साहब के साथ हैं, बस इसलिए ज़रा चिंता सी… !”

निरमा ने आधे में ही रेखा कि बात काट दी..

” मैं इन्हे भेज देती, लेकिन ये भी राजा भैया के साथ बाहर गए हुए हैं….. आदित्य कहाँ हैं.. ?”

आदित्य का नाम आते ही रेखा के चेहरे पर राहत के भाव चलें आये…

“निरमा हम पांच मिनट में फ़ोन करते हैं.. !”

रेखा ने झट से फ़ोन रखा और आदित्य को फ़ोन लगा लिया… उसे अपने ढंग से समझा कर फ़ोन रखने के बाद रेखा के चेहरे पर राहत के भाव चलें आये और वो अपनी लंच पार्टी के लिए तैयार होने चली गयीं…

क्रमशः

aparna….

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