जीवनसाथी-2/40


जीवनसाथी -2 भाग -40

    जीवनसाथी के पहले सीजन में आपने समर के बारे में जो पढ़ा था उसके अनुसार समर एक एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी ब्रिलिएंट बंदा है जो अपने राजा साहब को किसी भी समस्या से चुटकियों में निजात दिला देता है..
   उसका दिमाग ही उसका सबसे बड़ा हथियार रहा है, और उसने अपने दिमाग का बखूबी प्रयोग भी जगह जगह पर किया है चाहें विराज से राजपाट का काम करवाना हो चाहें ठाकुर साहब को भरी अदालत में मरवाना हो…
      अपने इन सारे कामों के बीच उसे कभी प्यार मुहब्बत करने का मौका भले ना मिला हो लेकिन लड़कियों से उसकी बिल्कुल दोस्ती नहीं थीं, ऐसा भी नहीं था… लड़कियों के बीच भी बंदा अच्छा खासा पॉपुलर था !

        उसके कई लिंक अप्स थे, जिनमे से एक थीं रेवन !!
 
रेवन एक विदेशी लड़की थीं जो भारतीय जीवन शैली पर अपनी थीसिस लिखने भारत आई थीं, जहाँ से कुछ कॉलेज छात्रो के साथ उसका राजा जी की रियासत में आना हुआ था.. और यही एक पब में विराज से हुई झड़प के बाद समर ने आगे बढ़ कर पुलिस के द्वारा मामले में हस्तक्षेप करने पर बीच बचाव किया था , जिसके बाद रेवन और समर की दोस्ती हो गयीं थीं…
   इनकी दोस्ती कुछ खास थीं, दोस्ती की सीमाओं से परे दोनों ने एक दूसरे के साथ काफ़ी क्वालिटी टाइम स्पेंड किया था और उसके बाद समर की शादी न करने की उस वक्त की मज़बूरी को देखते हुए रेवन उसे अलविदा कह पेरिस वापस लौट गयीं थीं…

  कहानी में आगे रेवन के चरित्र की कुछ जरूरतें शामिल हो सकती हैं इसीलिए जीवन साथी के भाग एक से रेवन का परिचय देने के लिए मैंने यह बातें यहां पर लिखी हैं अब हम वर्तमान कहानी में आगे बढ़ते हैं….

*****

     क्रूज़  पर सृजन को घेरकर ढेर सारे कपल्स बैठे थे उस औरत ने अपना ब्रेसलेट अपने हाथ में लिया और वहां से उठ कर चली गई उसके पीछे ही उसका पति भी चला गया उन दोनों के वहां से जाते ही पिया तुरंत उस औरत की कुर्सी पर आ बैठी…..

” सर मैं आपकी बहुत बड़ी फैन हूँ.. ये मेरे पति हैं समर और मेरा नाम हैं पिया.. ! सर अभी अभी हमारी शादी हुई हैं, हमारे भविष्य के बारे में कुछ बताइये सर.. !”

” बहुत उज्जवल भविष्य है आप दोनों का… धन दौलत  रुपया पैसा गहने देवर किसी चीज की कभी कमी नहीं रहेगी, सुख स्वास्थ्य समृद्धि सब कुछ अटूट है आप दोनों के जीवन में ! बस एक चीज नजर आती है कि आप दोनों ही अपने अपने कार्य क्षेत्र में इतने व्यस्त रहेंगे कि थोड़ा सा समय का अभाव रहेगा लेकिन बाकी सब ठीक है…!”

पिया के सवाल को सुनकर सृजन कुछ देर तक उन दोनों के हाथ देखता रहा और उसके बाद उसने फटाफट दोनों के उज्जवल भविष्य की रूपरेखा उनके सामने खींच कर रख दी…
    उसके बाद अचानक वह समर के हाथ को जरा मजबूती से पकड़ कर कुछ ध्यान से पढ़ने लगा…

” क्या देख रहे हैं आप सर.. ?”

” कुछ खास नहीं..!” सृजन के चेहरे पर चिंता के बादल से नजर आए लेकिन वह जल्द ही उड़ गए…
समर का हाथ पढ़ने के बाद वो कुछ देर के लिए समर का माथा देखने लगे और उसके बाद अपनी गहरी नज़रों से उन्होंने समर को देखा…

” आप दोनों ने अपनी पसंद से शादी की है..? उन्होंने समर की तरफ देखकर यह सवाल पूछ लिया और समर ने कंधे उचका कर हां में गर्दन हिला दी…
पिया ने समर के दूसरे खाली बाज़ू को अपनी बाँहों में लेकर मुस्कुराकर सृजन के सामने हामी भर दी..

“जी सर हम दोनों की लव मैरिज है…!”

   सृजन ने एक नजर पिया पर डाली और वापस समर को देखने लगा..-” क्या आपकी बीवी आपके बारे में सब कुछ जानती हैं..?

” जानने लायक हर बात पिया जानती हैं..?”

” और ना जानने लायक..?

” जी आप कहना क्या चाहते हैं..?

सृजन के चेहरे पर एक लंबी और गहरी सी मुस्कान फैल गई जैसे उसकी उस मुस्कान के पीछे एक कोई गहरा राज़ छिपा हो और उस राज़ को वो पिया के सामने नहीं खोलना चाहता था…

” देखिए समर साहब आपकी हमारी सभी की जिंदगी में कोई ना कोई ऐसा किस्सा या हिस्सा होता है जो हम हर किसी से नहीं बता सकते… बल्कि कहना चाहिए कि हम किसी से भी नहीं बता सकते और कई बार यह किस्से ऐसे होते हैं कि हम अपने बहुत करीबियों से भी इन किस्मों के बारे में चर्चा नहीं कर सकते…
   जिस प्रकार कुछ ऐसे किस्से होते हैं वैसे ही कुछ खास रिश्ते भी होते हैं…..

जिनमें से एक होता है पति पत्नी का रिश्ता..

हालाँकि यह वह रिश्ता है जिसके बीच सबसे अधिक पारदर्शिता की जरूरत है, लेकिन सच्चाई भी यही है कि अगर इस रिश्ते के बीच पूरी तरह से पारदर्शिता आ जाएगी तो यह रिश्ता दो घड़ी भी नहीं जी पाएगा..!  इसलिए अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी को बचाये रखने के लिए अक्सर पति पत्नी एक दूसरे से कुछ न कुछ छुपाये रखते हैं… !”

      सृजन इतना धीमे बोल रहे थे कि उनकी आवाज सिर्फ सामने बैठे पिया और समर तक ही पहुंच पा रही थी!

       उनका काम करने का तरीका ही शायद ऐसा था, क्योंकि वह सामने वाले का माथा और हाथ पढ़ते थे और जब बात किसी के व्यक्तिगत मसले से जुड़ी हो तो उसे हर किसी को बताना या लोगों की भीड़ भाड़ के बीच किसी का भविष्य सुनाना सृजन को पसंद नहीं था…
पिया और समर के पीछे और आसपास खड़े लोग उस वक्त आपसी चर्चाओं में लगे हुए थे.. एक तरह से देखा जाए तो वह सभी लोग अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे थे…
समर से धीमी आवाज़ में बात करने के बाद सृजन समर की तरह थोड़ा और झुक गया और समर को अपनी तरफ झुकने का इशारा किया !  समर जैसे ही सृजन के पास पहुंचा वैसे ही सृजन ने  मजाक के लहजे में अपनी बात आगे कहनी जारी रखी…

”  कुछ राज छुपाए रखना जरूरी है वरना… शादीशुदा जिंदगी में भूचाल आ जाता है..!”

समर एकदम से सृजन की कही बात समझ नहीं पाया या शायद ना समझने का नाटक करते हुए अपना हाथ वापस खींच लिया…

पिया उसके ठीक बाजू में बैठी थी, उसे सृजन कि कहीं ये आखिरी बात सुनाई नहीं दी, और वह हंसकर वापस पूछने लगी…

” सर क्या बता रहे थे आप..? मुझे भी बताइए मैं भी जानना चाहती हूं, अपने पतिदेव के बारे में हर एक बात.. ! “

” एक बार आप अपने पतिदेव से भी पूछ लीजिए कि, वह यह बात चाहते हैं कि नहीं कि उनके राज़ की हर बात में आपको बता दूँ… ?”

पिया ने बनावटी गुस्से से समर की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए सामने बैठे सृजन को देखने लगी…

” मुझे नहीं लगता कि मेरे पति के बारे में ऐसी कोई भी बात होगी जो मुझे नहीं पता…!”

” इतना ज्यादा आत्मविश्वास हमेशा खतरा लेकर आता है… क्या आपको नहीं लगता कि आपको कुछ ज्यादा ही अंध विश्वास हैं अपने पति के ऊपर…!”

” क्या मंत्री जी..? यह सर क्या पूछ रहे हैं…?  क्या मुझे आप पर अंधविश्वास है और क्या मेरा विश्वास गलत है..!”

   समर  बिना कोई जवाब दिया चुपचाप बैठा था… उसकी समझ से परे था कि सृजन की किस बात का वह किस ढंग से और क्या जवाब दें..?

” तुम भी क्या बातें लेकर बैठ गई हो..?
समर वहां से अचानक खड़ा हो गया… और उसे मनाने के लिए पिया भी खड़ी हो गई…

” अरे मंत्री जी प्लीज आप गुस्सा मत हो यार , आप बैठ जाइये….
    मैं आपके लिए अभी आपका मनपसंद स्वीट लेकर आती हूं !’
   और पिया ने फिर समर की एक ना सुनी…
   उसकी बाहँ पकड़ कर उसे वापस कुर्सी में बैठाया और खुद उसके लिए स्वीट्स लेने के लिए बुफे  काउंटर की तरफ चली गई…

समर सृजन के सामने बैठ तो गया था लेकिन सृजन की ऊटपटांग बातों से उसका दिमाग बिल्कुल बुरी तरह उखड़ चुका था…
  उसने सृजन को नज़रअंदाज़ कर इधर-उधर देखना शुरू कर दिया लेकिन सृजन मुस्कुराते हुए अपनी गहरी आंखों से समर को ही देख रहा था…

” तुम्हारे बच्चे के बारे में जानती है तुम्हारी बीवी..?”

  सृजन ने एकदम से बम फोड़ा और समंदर की लहरों को देखते हुए समर की नजरें चौंक कर सृजन पर टिक गई…

” क्या बकवास कर रहे हो तुम..?” समर बौखला गया..

” मैं कोई बकवास नहीं कर रहा हूं, तुम्हारे माथे की लकीरों में तुम्हारे हाथों की लकीरों में हर जगह यही लिखा है कि तुम्हारा घर परिवार है, तुम्हारी बीवी और बच्चे तुमसे दूर है..!”

” पिया से पहले मैंने किसी से शादी नहीं की, मेरी कोई बीवी नहीं है.. और ना ही कोई बच्चा है..!”

” अगर तुम्हें वाकई इस बारे में नहीं पता है तो ये अफसोस की बात है..
लेकिन जैसी तुम्हारी रेखाएं बदल रही है, तुम्हें जल्द से जल्द अपने बच्चे के बारे में खबर मिल जाएगी…!”

   सृजन ने यह बातें बहुत ही धीमे शब्दों में कही थी… सारी बातें सिर्फ समर और सृजन ही सुन पा रहे थे ! लेकिन सृजन की कही बातें सुनकर समर के दिमाग में एक विस्फोट सा हुआ था और वह इतना विचलित हो गया था कि उसका अब वहां बैठने का बिल्कुल मन नहीं कर रहा था
   वह अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ..! लेकिन उसके उठकर खड़े होते तक में सृजन वहां से उठकर बाहर निकल गया…
    लोगों की भीड़ जो अब तक सृजन को घेरे बैठी थी सृजन के वहां से जाते हैं उसके पीछे भागती हुई आगे बढ़ गई….

पिया समर के पसंदीदा गुलाब जामुन लेकर आई तब तक में सृजन और वहां की भीड़ छंट चुकी थी…

पिया ने गुलाब जामुन की कटोरी मुस्कुराकर समर  के सामने रख दी और इधर उधर देखते हुए समर से सृजन के बारे में सवाल कर लिया…-” क्या हुआ मंत्री जी सृजन सर कहां चले गए..?”

समर का मूड इतना उखड़ चुका था कि उसे पिया की कोई बात सुनाई नहीं दी और वो कमरे में जाने के लिए निकल गया…
..  पिया उसकी तरफ भागती हुई आगे बढ़ गई….

लिफ्ट में समर जैसे ही दाखिल हुआ पिया उसके पीछे दाखिल हो गई लेकिन साथ ही वह बार-बार सृजन के बारे में भी सवाल करती रही…
      समर ने अपना गुस्सा ना बढ़ने देने के लिए चुप रहना ही बेहतर समझा, और वह पिया के सवाल पर ध्यान न देते हुए कांच की पारदर्शी दीवार के बाहर देखता रहा…

पिया समर के पीछे खड़ी थी…लिफ्ट में भी काफी रोमांटिक माहौल था…

.  उसमें ऊपर नीचे आते जाते समय एक रोमांटिक म्यूजिक बजने लगता था इसके साथ ही लिफ्ट की लाइट भी अलग-अलग रंगों के साथ बदलती जाती थी…
. पिया ने रोमांटिक माहौल को देखते हुए पीछे से समर को अपनी बाहों में भर लिया…  लेकिन समर ने पूरी कोमलता से उसके दोनों हाथों को पकड़कर अपने से दूर कर दिया..! लेकिन पिया भी मानने को तैयार नहीं थीं,   उसने वापस समर को अपनी बांहों में भरा और इस बार समर ने पिया की बाँह को अपने दोनों हाथों से पकड़कर झटक दिया…

” तुम्हें एक बार में समझ में नहीं आता क्या..? मुझे इस तरह से पूरी दुनिया के सामने लिपटना चिपटना हरगिज़ पसंद नहीं है… !
जो करना हैं अपने कमरे में करो …..
  सारे अरमान वहाँ बंद कमरे में पूरे कर लो ना.. लोगों को दिखाना ज़रूरी हैं क्या की हम कपल हैं.. !”

  समर ने गुस्से में कुछ तेज़ आवाज़ में ही कहा था, लेकिन पिया खुद में इतनी मग्न थीं कि उसका ध्यान समर के उखड़े मूड पर नहीं गया…..

  पिया उसकी बाहें पकड़े झूलती रही..

दोनों अपने कमरे में दाखिल हो गए और पिया सृजन कि बताई बातें याद कर कर के खुश होती रही..

   ” देखा मंत्री जी सही बताते हैं ना गुरूजी !! मैं इनका बताया फोरकास्ट हमेशा पढ़ती हूँ… हमारे लिए भी कितना अच्छा अच्छा बताया ! धन दौलत सब रहेगा हमारे पास.. पर एक मिनट बच्चे के लिए तो कुछ बताया ही नहीं.. मंत्री जी उन्होंने आपको कुछ बताया क्या.. ? “

समर चुपचाप काउच पर बैठा, कांच से बाहर फैले समंदर को देख रहा था…

“मंत्री जी आप सुन रहें या नहीं.. ? या मैं यूँ ही कुछ भी कह रही हूँ.. वैसे बच्चो के बारे में कहूं तो बच्चे मुझे बहुत प्यारे हैं…!
   बहुत ही प्यारे..!
   लेकिन ये भी बात हैं कि उनकी ज़िम्मेदारी उठाने के लिए मुझे अभी थोड़ा वक्त चाहिए.. ! इसलिए हम कम से कम दो साल बेबी प्लान नहीं करेंगे… !”

  पिया अपनी अनर्गल बातों में खोयी थीं और समर के दिमाग में सृजन कि बातें घूम रही थीं…

   पिया आकर समर पर झुक गयीं… उसने धीरे से उसके बालों को सहलाना शुरू किया और अपनी उँगलियाँ उसके चेहरे पर फेरने लगी….

समर ने धीरे से उसकी उँगलियाँ झटक दी… पिया को लगा ये भी प्यार का ही एक रूप हैं… उसने मुस्कुरा कर उसकी गर्दन के चारों ओर अपनी बाँहों का घेरा डाल लिया..

   समर इस वक्त एकांत चाहता था… पूरा एकांत !!

  ऐसे में उसने पिया कि बाँहों से खुद को आज़ाद किया और बाहर निकल गया…
   बालकनी में जाकर उसने एक सिगरेट जलाई और वहाँ रखी कुर्सी पर निढाल हो गया….

  समर कभी भी खुद के लिए इतना नहीं सोचता था, उसके पास भी शुरू से ही क्या नहीं था… !
   बेशुमार धन दौलत, महल का संरक्षण, एक सुरक्षित भविष्य !! जैसा उसके पिता का महल से संबंध था उसे देखते हुए अगर समर कुछ नहीं भी करता तब भी उसके पास किसी चीज़ कि कमी नहीं होनी थीं…

     लेकिन समर ने शुरू से ही खुद को अनुशासन में बांध कर रखा था…. 

   इतने रईस घर का लड़का होने पर भी रईसों वाला कोई लटका उसके स्वभाव का हिस्सा नहीं था…..
      बदतमीज़ी से बात करना, दूसरों कि तौहीन करना, फ़िज़ूल में पैसे उड़ाना, कभी भी देर रात तक चलने वाली पार्टी में अपना वक्त ज़ाया करना ये सब उसे कभी पसंद नहीं आया……
             अपने समय से हर काम करना और अपनी दिनचर्या को दुरुस्त रखना ही उसे पसंद था…

   उसने बिना ज़रूरत के कभी कोई काम नहीं किया था, हर काम का नफा नुकसान तौल कर ही वो काम किया करता था… !

       फिर इतना सब सोच समझ के करने वाले लड़के से ऐसी कौन सी चूक हो गयीं थीं… ?

   समर कुर्सी पर बैठा बाहर फैले समंदर पर नजर गड़ाए सिगरेट फूँक रहा था और अपनी पिछली ज़िन्दगी के बारे में सोच रहा था…

      सोचते सोचते अचानक उसे रेवन कि याद आ गयीं…
   वो उसकी दोस्त थीं, बल्कि दोस्त से कुछ आगे ही बढ़ चुके थे दोनों… तो क्या सृजन जिस की बात कर रहा वो रेवन हैं… ?
   तो क्या रेवन का कोई बच्चा भी हैं.. ?

  सोचते सोचते समर के सर में दर्द होने लगा था… आज तक सबको उनके सर दर्द ने निकालने वाले के सर में दर्द हो रहा था और फ़िलहाल उसके पास इससे निकलने का कोई उपाय नहीं था…

पिया धीरे से बालकनी का दरवाज़ा खोले वहीँ चली आई… उसके हाथ में दो बड़े बड़े कॉफ़ी के कप थे..
  वो भी आकर वही बैठ गयीं…
उसने समर की तरफ कॉफ़ी बढ़ाई और अपना कप पकड़े मुस्कुरा कर उसे देखने लगी…

“क्या हुआ मंत्री जी.. ? आप तो एकदम से उदास हो गए हैं.. ? ऐसा क्या बता दिया ट्रिपल एस ने.. ?”

आश्चर्य से समर ने पिया की तरफ देखा…

“सृजन शिखर शर्मा, हुआ ना ट्रिपल एस या फिर कह लो एस 3.. !”

पिया की वही बातें जो कभी सुनने पर कानों में अमृत सी बरसती थीं अभी कोलाहल सी लग रही थीं… समर का उससे बात करने का बिल्कुल मूड नहीं था लेकिन समाने से होकर बीवी को नज़रअंदाज़ भी नहीं किया जा सकता था, वो भी अपने हनीमून पे…

तो क्या उसे पिया से पहले रेवन से प्यार हुआ था.. ? नहीं.. !! कभी नहीं !!
   प्यार तो उसने बस पिया से ही किया, तभी तो उसके लिए अपने घर वालों से भी लड़ गया और सबको मना कर उससे शादी कर ली… फिर.. ?

उसके लिए रेवन सिर्फ एक दोस्त थीं, उससे ज्यादा कुछ नहीं, लेकिन रेवन के लिए वो बहुत कुछ बन बैठा था… !
    रेवन उससे दिल से जुड़ चुकी थीं और उसे छोड़ कर जाने के लिए भी हरगिज़ तैयार नहीं थीं… !

   लेकिन समर के समझाने पर वो उसके साथ बिताये कुछ खास लम्हो की महक अपने दिल में कैद किये वापस लौट गयीं थीं…

  समर अपने माता पिता को जानता था…. भले ही वो इकलौता था और भले ही उसके माता पिता उतनी संकीर्ण मानसिकता के नहीं थे, परन्तु एक विदेशिनी किरिस्तान को वो लोग अपनी बहु के तौर पर कभी अपनाने को तैयार नहीं होते….

   अपने में खोये समर की धीमें से आंख बंद हुई और वहीँ उसे झपकी लग गयीं….

******

    निरमा मीठी को स्कूल भेजने के बाद आज खुद तैयार होने की जगह आराम से अपना चाय का प्याला पकड़े लिविंग रूम में बैठी थीं कि प्रेम जॉगिंग कर के बाहर से लौट आया…

    आकर पंखे के नीचे बैठ वो अपनी टीशर्ट उतार पसीना सूखा रहा था कि उसकी नजर आराम से चाय पीती निरमा पर चली गयीं…

“क्या हुआ.. ? आज यूनिवर्सिटी नहीं जाना क्या.. ?”

  प्रेम के लिए उसके सामने जूस का गिलास रख निरमा ने ना में गर्दन हिला दी…

“आज छुट्टी ली हैं मैंने.. ?”

“अरे वाह.. ! ये तो बढ़िया हैं.. मैं तो अक्सर कहता हूँ कि बीच में ब्रेक लेना चाहिए.. !”

“हम्म.. आज हमारा गर्ल्स डे आउट हैं.. !”

“गर्ल्स डे आउट !! ” ये बोल कर प्रेम ज़ोर से खिलखिला उठा…

और निरमा उसे घूर कर देखने लगी…

“हाँ तो… गर्ल्स ही हैं हम.. ?”

“ओके बाबा ! तुम्हारे अलावा और कौन कौन जा रहा हैं बाहर.. ?”

“मैं रेखा और जया भाभी.. !”

“ओह्ह ! रूपा भाभी क्यों नहीं… ?”

“वो हैं नहीं ना.. ! वो अपने मायके गयीं हैं.. ! कुछ काम हैं वहाँ !”

“ओह्ह ! बच्चो को लेकर जाने वाले हैं आप लोग या नहीं.. ?”

निरमा ने शरारत से प्रेम को देख ना में गर्दन हिला दी…

“आज बच्चो को नहीं लेकर जायेंगे… असल में बच्चो को लेकर जाओ तो पूरा वक्त उन्ही के पीछे निकल जाता हैं, फिर हम लेडीज़ आराम से बातें तक नहीं कर पाती हैं.. इसलिए बच्चे सारे महल में ही रहेंगे…
   मीठी के लिए अम्मा को बोल दिया हैं कि जैसे ही स्कूल से आये उसे तैयार कर कुछ खिला पिला कर महल ही लें जाएँगी…
   वहाँ फुफु साहब हैं ही और बाक़ी ढ़ेर सारी लड़कियां हैं बच्चो को देखने… हम लोग भी आ ही जायेंगे… !”

“रूपा भाभी सा हर्ष को साथ लें गयीं होंगी ना.. ?”

“नहीं ! शौर्य के कारण हर्ष को छोड़ गयीं हैं.. ! बाँसुरी भी नहीं हैं… और ऐसे में शौर्य कि सारी देखभाल रूपा भाभी ही तो करती हैं.. अभी उन्हें अचानक जाना पड़ा, दूसरी बात उनके पीहर में सुना बहुत ज्यादा ठण्ड पड़ती हैं, उसलिए इस मौसम में बच्चो को लें जाने से युवराज हुकुम ने मना कर दिया…
  शौर्य वैसे भी पंकजा से बहुत हिला मिला हैं,  इसलिए उन्होंने हर्ष को भी छोड़ दिया… !
  सच कहूं तो हर्ष और शौर्य को देख कर एकदम युवराज भाई साहब और राजा भैया की याद आ जाती हैं… हर्ष बिल्कुल युवराज सा की तरह शौर्य का ध्यान रखता हैं और शौर्य बिल्कुल राजा भैया की तरह मनमौजी हैं.. !”

प्रेम मुस्कुरा कर उठ गया और ऊपर अपने कमरे में नहाने चला गया…

  निरमा भी चाय खत्म कर रसोई में अम्मा को काम समझाने लगी…
  समय कम मिलता था इसलिए निरमा ने भी खाना बनाने के लिए एक रसोइया रख लिया था…
लेकिन उसे सुबह का नाश्ता खुद बना कर प्रेम को खिलाना पसंद था.. उसे लगता था किसी एक वक्त का खाना तो वो खुद बना लें…
  दोपहर और रात में उसे बिल्कुल वक्त नहीं मिल पता था इसलिए प्रेम की ज़िद पर उसने रसोइया रख लिया था….
   वो फटाफट प्रेम के लिए नाश्ता बनाने लगी…..

******

    महल में पंकजा बाँसुरी की सबसे खास नौकरानी थीं… अपनी नयी पोस्टिंग में जाने से पहले बाँसुरी ने यहीं सोचा था कि पंकजा को साथ के जाएगी तो शौर्य कि देखभाल भी हो जाएगी…
   लेकिन जब उसने वहाँ देखा कि एक ढंग का अस्पताल तक नहीं हैं तब उसने शौर्य को राजा साहब के साथ वापस भेज दिया था…
  पंकजा शौर्य कि अच्छी देखभाल करती थीं उस पर रूपा भाभी भी थीं… 
  बाँसुरी के जाने के बाद से उन्होने स्वयं ही शौर्य की सारी जिम्मेदारी उन्मुक्त ह्रदय से खुद पर लें ली थीं… हर्ष अब लगभग दस साल का होने आया था, ऐसे में उसमे काफ़ी हद तक समझदारी भी आ चुकी थीं…
    इसलिए रूपा को शौर्य के लिए काफ़ी वक्त मिल जाता था…
   बाँसुरी के जाने के बाद एक तरह से पूरा महल शौर्य का पालक बन बैठा था….
  वैसे भी शौर्य वहाँ का सबसे छोटा,सबका लाड़ला  राजकुमार था, लाड़ दुलार की कोई कमी ना थीं…

  रेखा का भाई अपूर्व सिंह भी शौर्य पर कुछ ज्यादा ही लाड़ लड़ाता था…
   इस वक्त भी शौर्य और यश अपूर्व के कमरे में ही खेल रहें थे कि पंकजा उसके कमरे में चली आई…

” ठाकुर सा, शौर्य बाबा के स्कूल जाने का समय हो गया हैं… उन्हें लेकर जाती हूँ, तैयार कर के स्कूल भेजना हैं.. !” उसकी बात सुनते ही यश उठ कर वहाँ से बाहर निकल गया..

अपूर्व ने बच्चो कि तरह मुहं फुला कर शौर्य को देखा…

” हमारा लाड़ला लड्डू  स्कूल जायेगा.. ? या मामा सा के साथ खेलेगा.. ?”

शौर्य ने लाचारगी से अपूर्व कि ओर देखा और फिर पंकजा को देख ना में गर्दन हिला दी…

” शौरी इछकुल नहीं जायेगा.. !”

  शौर्य कि मीठी सी तोतली बोली सुन पंकजा मुस्कुरा उठी..

“शौर्य बाबा स्कूल तो जाना पड़ेगा… वरना आप मम्मा के पास कैसे जायेंगे.. मम्मा ने प्रॉमिस लिया हैं ना, कि आप रोज़ स्कूल जाओगे तो मम्मा आपके पास जल्दी वापस आ जाएँगी.. !”

” अरे ऐसे बच्चे को बार बार उससे दूर बैठी उसकी माँ कि याद क्यों दिलाती हो.. ? देखती नहीं फिर वो उदास हो जाता हैं.. !”

अपूर्व ने शौर्य को उठा कर गोद में बैठा लिया…

” नहीं जायेगा आज हमारा राजकुमार ! कहीं नहीं जायेगा ! ये अपने मामा सा के साथ आज रियासत घूमने जायेगा.. ! वो भी घोड़े पर !” उसकी बात सुन शौर्य ताली बजाने लगा..

“माफ़ कीजियेगा ठाकुर सा, लेकिन बाबा का बहुत हर्ज़ा हो रहा हैं..पिछले तीन दिन से बाबा स्कूल नहीं गए हैं.. और अगर रानी हुकुम को पता चला तो हमारी खैर नहीं… !”

“जाओ भागो यहाँ से… कौन बताएगा तुम्हारी रानी हुकुम को.. ? राजा साहब काम से बाहर गए हुए हैं,  रानी सा खुद नहीं हैं.. रूपा जीजा सा भी नहीं हैं.. अब बचा कौन.. ? तुम.. ! तुम भी अपनी जबान बंद रख लेना.. अरे बहुत छोटा बालक हैं अभी…!
  दो एक रोज़ स्कूल का हर्ज़ा होने से कोई खास ऐसा फर्क नहीं पड़ जायेगा… समझी…
वो राजकुमार हैं और राजकुमार ही रहेगा… ! उनकी नियति स्कूल जाने न जाने से नहीं बदल जाएगी… !

अपूर्व सिंह अपनी बात पूरी कर शौर्य को गोद में लिए कमरे से बाहर निकल गया,  उसके पीछे ही परेशान हाल पंकजा भी निकल गयीं.. उसी वक्त अपने कमरे से स्कूल के लिए तैयार होकर निकलते यश ने रुक कर शौर्य के स्कूल के लिए पूछा और फिर मस्ती से उछलते कूदते स्कूल निकल गया…

  अपूर्व शौर्य को गोद में लिए अस्तबल कि तरफ निकल गया….

******

क्रमशः

aparna….


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