
जीवनसाथी -2 भाग -25
बाँसुरी की निकलने कि तैयारी पूरी हो चुकी थीं.. बाँसुरी का शौर्य को छोड़ कर जाने का बिल्कुल मन नहीं था लेकिन रूपा कि ज़िद के कारण उसे छोड़ना पड़ा…
” बांसुरी हम बस यही कहना चाहते हैं कि अभी आप जाकर वहां जॉइनिंग दे दीजिये.. 15 दिन बाद वापस आकर शौर्य को ले जाइएगा… हमें पता है कि कलेक्टर साहिबा के लिए वहां सारी तैयारी अच्छे से होगी लेकिन उन 15 दिनों में वहां का मौसम, खान पान देखकर आपको भी समझ में आ जाएगा कि शौर्य के मुआफ़िक वो जगह है या नहीं…. !
” भाभी साहब सही कह रही हैं बांसुरी ! पहले तो मैंने कहा ही था कि तुम शौर्य को अपने साथ ही रखना लेकिन अब मैं भी सोच रहा हूं कि 10- 15 दिन बाद वापस आकर तुम शौर्य को ले जाना.. “
राजा इतना कहकर दूसरी तरफ निकल गया और वहीं खड़ी रेखा बांसुरी को छेड़ने लगी…
” वैसे भी लगभग 3 साल बाद आप दोनों को सेकंड हनीमून मनाने का मौका मिल रहा है तो क्यों छोड़ रही है इस मौके को..? शौर्य को हम और भाभी साहब अच्छे से संभाल लेंगे, आप अपने राजा साहब को संभालिए अपने नई पोस्टिंग वाली जगह पर… !
जंगल में मंगल कर आइये रानी साहेब… और वापस आकर हमें एक और गुड न्यूज़ सुना दीजिएगा… !”
” ना बाबा ! और रेखा, साहब मेरे साथ नहीं जा रहें.. उनका कुछ काम है इसलिए वो नहीं जा पाएंगे… !”
रेखा की बात पर हंस कर बांसुरी ने जवाब दिया और जया उसे छेड़ने लगी…
” राम और सीता के लव और कुश दोनों होना जरूरी है समझी बाँसुरी.. ! इसलिए दूसरे के लिए सोचना शुरू करो.. !”
” वाह भाभी साहब आप सब ने खुद एक के बाद दुबारा नहीं सोचा, और मुझसे दो कि उम्मीद.. ऐसा क्यों भला.. ? सबसे पहला मौका तो रूपा भाभी साहब का है..!”
” तुमसे इसलिए उम्मीद है बांसुरी कि तुमने एक छोटा सा राजा अजातशत्रु तो दे दिया अब तुम से हमें छोटी बांसुरी चाहिए..!”
सब हंसते खिलखिलाते बांसुरी को विदा करने मुख्य द्वार तक पहुंच गए.. बांसुरी एक बार फिर सब के गले लग कर अपने आंसू पोंछने के बाद दादी साहब की तरफ बढ़ चली…. दादी साहब वहीं एक किनारे व्हील चेयर पर बैठे थे! अब उनकी उम्र और तबीयत सही नहीं रहती थी! इसलिए उनका कहीं भी आना जाना जरूर कम हो गया था, लेकिन उनकी बातें आज भी बिल्कुल पहले जैसी ही चहकती महकती रहती थी… बांसुरी ने जैसे ही झुक कर उनके पैर छुए उन्होंने उसके सर पर हाथ रख कर आशीर्वादों की झड़ी लगा दी….
” हम तो चाहते हैं कि अब आप दो से तीन होकर ही वापस लौटे… शौर्य की यहां आप बिल्कुल चिंता मत कीजिएगा उसकी बड़ी मां उसकी काकी सभी यहां मौजूद हैं..! और फिर हम तो हैं ही..!”
” आप सब के रहते मुझे शौर्य की बिल्कुल भी चिंता नहीं है दादी साहब..! चिंता तो मुझे मेरी है कि, मैं उसके, उसके पापा के बिना और आप सब के बिना कैसे रहूंगी..!”
महल की सारी महिलाओं से मिलने के बाद वह युवराज के सामने हाथ जोड़कर खड़ी हो गई… राजपूती परंपरा के कारण उस महल की महिलाएं कभी किसी भी पर पुरुष के पैरो पर नहीं झुकती थीं…
हालाँकि बाँसुरी ह्रदय से अपने जेठ के पैरों पर झुकना चाहती थीं.. उनका विराट व्यक्तित्व ही ऐसा था, लेकिन उन्होंने उसे हमेशा छोटी बहन के सामान स्नेह दिया था….
एक बार सबसे विदा लेने के बाद बाँसुरी ने शौर्य को गोद में लेकर जी भर कर प्यार किया और अपने आंसू पोंछ कर गाड़ी में जा बैठी…
उसके बैठने के बाद वो रुमाल में अपनी आँखे साफ कर रहीं थीं कि उसके ठीक बगल में राजा आ बैठा… उसने धीरे से उस तरफ देखा तो शौर्य राजा कि गोद में बैठा था… बांसुरी ने सवालिया नजरों से राजा की तरफ देखा और राजा ने आंखों से उसे आश्वासन देकर शौर्य को अपने आप से चिपका लिया..
” तुम उसे छोड़ कर जा रही थी और तुम्हें जाते देखकर वह भी रोने लगा…! इसीलिए मैंने सोचा एयरपोर्ट तक इसे भी साथ ले चलता हूं..!”
” लेकिन साहिब एयरपोर्ट पर यह मुझे जाते हुए देख पाएगा..! खैर आपने कहा है कि आप उसके कारण ही रुक रहे हैं उसके पास तो मुझे यह तसल्ली है कि आपकी गोद में शायद वह मुझे बाय कर पाएगा…!”
राजा बांसुरी की तरफ देख कर मुस्कुराने लगा…
” तुम चिंता मत करो हुकुम, हमारा शौर्य मेरी गोद में अभी सो जाएगा… वैसे भी इसकी आदत ही है चलती गाड़ी में अगर यह मेरी गोद में है तो मुश्किल से 10 मिनट होते ही यह सो जाता है… अच्छा एक बात बताओ बाँसुरी, तुम्हें यह तो नहीं लग रहा कि मुझे तुम्हारे साथ चलना चाहिए था…?”
” चाहती तो मैं भी थी कि, आप मेरे साथ चले लेकिन मैं यह भी जानती हूं कि आपके लिए मेरे साथ चलना मुश्किल है..!”
मुस्कुराकर राजा ने शौर्य को अपने सीने से लगाया और धीरे-धीरे उसके बाल सहलाने लगा… उनकी गाड़ी एयरपोर्ट की तरफ भागती चली गई ! सामने ड्राइवर के साथ समर बैठा हुआ था और पीछे लगभग 11 गाड़ियों में राजा और बांसुरी के सशस्त्र बॉडीगार्ड्स मौजूद थे….
राजा के सामने चार अलग-अलग बुलेट प्रूफ गाड़ियां चल रही थी… राजा के ठीक सामने वाली गाड़ी में प्रेम और तीन और गार्ड मौजूद थे….
एयरपोर्ट पर सारी गाड़ियां रुकते ही गार्ड्स उतरकर राजा और बांसुरी के चारों तरफ चले आए.. वो सारे ही लोग तेज कदमों से चलते हुए एयरपोर्ट में दाखिल हो गए….
गेट से अंदर घुसने के बाद सिक्योरिटी चेक के लिए जाने से पहले बांसुरी ने राजा की तरफ देखा और और उसका हाथ थाम लिया… शौर्य अब समर की गोद में था और राजा ने जैसा कहा था शौर्य गहरी नींद में सो चुका था….
“हुकुम ! एक बात कहूं.. ?”
“हाँ कहिये… !”
“मैं भी चल रहा हूं तुम्हारे साथ.. ! चलो अंदर .. !”
बाँसुरी की आँखे आश्चर्य से चौड़ी हो गयी,
“आप सच कह रहें साहेब… ?”
हाँ में सर हिला कर राजा ने बाँसुरी को कन्धों से थाम लिया….
“फिर मुझे बताया क्यों नहीं… ?”
“क्योंकि आज सुबह तक अपने एक काम में उलझा हुआ था ….. इसलिये मुझे खुद नहीं पता था जा पाउँगा या नहीं…. अभी कुछ देर पहले ही समर ने आकर खुशखबरी दी की मैं तुम्हें छोड़ने जा सकता हूं… !”
“लेकिन साहब.. फिर शौर्य… ?”
राजा ने आगे बढ़ कर समर के हाथ से शौर्य को ले लिया… -” ये हमारा नन्हा राजकुमार हमारे साथ जायेगा.. !”
बाँसुरी के साथ रूपा ने ज़िद कर के महल की सबसे कार्यकुशल सहायिका को उसके साथ कर दिया था.. इसके आलावा एक खाना बनाने वाला रसोइया और प्रेम के दो गार्ड्स भी बाँसुरी के साथ जा रहें थे…
बाँसुरी ने राजा के सामने ख़ूब रो धो कर उसे पंद्रह नौकरो की फ़ौज भेजने से रोक लिया था पर इन तीन लोगों को लेकर जाने का रूपा ने एक तरह से आदेश दे दिया था इसलिए बाँसुरी फिर रूपा की बात काट नहीं पायी…
बाँसुरी और शौर्य के साथ राजा जी की शाही सवारी गोविंदगढ़ के लिए रवाना हो गयी….
*****
सही समय पर उनका प्लेन लैंड हुआ और वो लोग एयरपोर्ट से बाहर निकल आये….
उनके बाहर निकलते ही कलेक्टर साहिबा के स्वागत के लिए उस जिले के महानुभाव अधिकारी कर्मचारी वहाँ मौजूद थे…
बाँसुरी के साथ आते राजा को देख सब आश्चर्य से इस राजसी जोड़ी को देखते रह गए…
सबने आगे बढ़ कर उनका स्वागत किया और उनके लिए आयी गाड़ियों में सभी सवार होकर गोविंदगढ़ के लिए निकल गए….
लगभग दो घंटे के सफर में कुछ छोटे मोटे गांव छोड़कर शेष सारा रास्ता जंगल ही था.. घने जंगलों को पार कर चार छोटी बड़ी पहाड़ियां पार करने के बाद शहर की उजास दिखनी शुरू हुई….
शहर के मध्य भाग को पार करने के बाद वहाँ की वी आई पी रोड में स्थित कलेक्टर आवास के सामने आकर गाड़ियां खड़ी हो गयी…
कलेक्टर आवास का बाहरी परिसर काफी जगह में फैला हुआ था…. एक बड़े से गेट और ऊँची ऊँची दीवारों से ढँके कलेक्टर आवास का तिल भर भी बाहर के रास्ते से नजर नहीं आता था…
गेट खुला और गाड़िया अंदर दाखिल हो गयी…
बाँसुरी और राजा गाड़ी से नीचे उतर आये…
उनके पीछे ही बाँसुरी की सहायिका सपना शौर्य को गोद में लिए उतर आयी…
बगीचे के एक तरफ पत्थरो से घिरा छोटा सा झरना था जिसमें पत्थरों के अंदर से पाइपलाइन को कनेक्ट करके उसे बहुत ही सुंदर प्राकृतिक झरने का रूप दिया गया था…
काले काले पत्थरों से बने झरने में एक तरफ बड़ी सी गौतम बुद्ध की प्रतिमा स्थापित की गई थी…
झरने से मोहक आवाज़े आ रहीं थीं.. चारों तरफ ऊँचे ऊँचे पेड़ लगे थे, कई मोहक बेले इधर उधर फ़ैल कर दीवारों पर चढ़ी हुई थीं… लेवेंडर, इवनिंग प्रिमरोज से बगीचा महक रहा था..
उस लम्बे चौड़े बगीचे में उतना ही खूबसूरत लाल पत्थरों से बना घर था… घर के सामने के हिस्से में एक सुंदर सा झूला पड़ा था.. शौर्य उसे देखते ही उसमे बैठने को ललचाने लगा और सपना उसे लेकर झूले की तरफ बढ़ गयी….
राजा और बाँसुरी बाकी लोगों के साथ अंदर बढ़ गए..
कलेक्टर आवास में काम करने वाले सारे कर्मचारी एक क़तार में खड़े अपनी कलेक्टर साहिबा का इंतज़ार कर रहें थे… सबने झुक कर अभिवादन करने के बाद अपना परिचय दिया और राजा साहब और रानी बाँसुरी की सेवा में लग गए…
बाँसुरी घर में अंदर घूम घूम कर सारा घर देखने लगी…
घर का अधिकतम भाग लकड़ी से बना था और घर बहुत खुला और हवादार था… ढ़ेर सारी खिड़कियों के अलावा खुली गैलरी भी ख़ूब प्रकाश और हवा दे रहीं थीं….
रसोई भी काफी लम्बी चौड़ी और हवादार थीं.. घर का इंटीरियर केरल के वूडन हॉउस से प्रेरित लग रहा था…
कुल मिला कर बाँसुरी को घर बहुत पसंद आ रहा था… लेकिन राजा को घर का इतना खुला होना असुरक्षा का भाव दे रहा था…
जब बांसुरी घर के भीतरी भाग में घूम फिर कर घर को देख रही थी उस वक्त पर राजा अपने गार्ड के साथ घर के बाहरी हिस्से को देखकर घर की सुरक्षा और असुरक्षा का अनुमान लगा रहा था….
इतने सबके बावजूद बांसुरी और राजा का ध्यान इस बात पर बिल्कुल नहीं था कि कहीं दूर खड़ा कोई बांसुरी की हर एक हरकत पर नजर रखे हुए था….
और आज से ठीक 4 साढ़े 4 साल पहले जब बांसुरी पहली बार महल गई थी उस वक्त जैसे महल के अलग-अलग हिस्सों में उसकी तस्वीरें खींची गई थी उसी तरह आज भी घर के हर एक हिस्से पर जहां से भी बांसुरी नजर आ रही थी उसकी तस्वीरें कोई खींचता चला जा रहा था….
बांसुरी का चलने का तरीका, उसका बोलने का अंदाज़, उसका अपनी उंगलियों से बालों को पीछे करना, उसका बात करते हुए बीच बीच में अपने कान को हाथ लगाना.. बातों के बीच अपनी जीभ से अपने बाएं तरफ के पैने दाँत को छूना… ये सब नजारे कोई चुपके से अपने कैमरे में कैद किये जा रहा था…
उन्हें गोविंदगढ़ पहुँचने में रात हो चुकी थीं… सब कुछ देखने के बाद दोनों ही फ्रेश होकर खाने की टेबल पर चलें आये…
रूपा ने शौर्य के लिए हालाँकि खाने पीने की कई चीज़े साथ रख दी थीं पर बाँसुरी उसे घर का बना ताज़ा खाना ही देना पसंद करती थीं…
महल से आये रसोइये का आज पहला दिन था इसलिए आवास पर काम करने वाले रसोइये ने बिना उसकी मदद किये ही शुद्ध देसी खाना ही राजा और रानी को परोसा था….
शुद्ध घी में ढ़ेर सारी मिर्च लहसन और टमाटर के साथ हींग में छौंकी दाल, आग में जलाकर कुचले टमाटर धनिये की तीखी चटनी के साथ बैगन का भरता और घी में डूबी हाथ की डली रोटियां…
खाना देख कर ही राजा जी की भूख जग गयी थीं… खाना खा कर राजा साहब की प्रसन्नता का ठिकाना नहीं था…
उन्होंने वहां काम करने वाले सेवक को बुलाकर अपने हाथ की घड़ी उतार कर उसके हाथ में रख दी…
” अरे हुजूर इसकी का जरूरत रहीं ..? हम तो हियाँ कलक्टरनी मेडम की सेबा के लिए ही बुलाइये गए है..
“ज़रूरत है सेवक राम ! आपके हाथ का टेस्टी खाना खा कर इतना तो समझ में आ गया है कि हमारी हुकुम महल के हमारे खाने को मिस नहीं करेंगी और दूसरी बात हो सकता है आपका यह घी प्रेम हमारी हुकुम पर भी एक 2 इंच की परत चढ़ा दे..! और तीसरी बात राजाओं महाराजों का ये ट्रेंड होता है भई… पहले के राजा अपना मोतियों का हार भेंट करते थे, अब मॉडर्न राजा अपनी राडो भेंट करते हैं.. “
” अच्छा तो आप चाहते हैं कि मैं मोटी हो जाऊं..?”
” सच कहूं तो चाहता तो हूं.. !”
“क्या.. ?”
“तुम्हें.. ?”
बांसुरी ने बनावटी गुस्से से राजा को देखा और मुस्कुरा कर उठ गई… शौर्य को भी वह अपने साथ ही खिला चुकी थी और उसे लेकर अब वो सुलाने ले जाने से पहले ब्रश करवाने लेकर जा रही थी…
” साहब वहां अपनी व्यस्तताओं में शौर्य के दांतो को मत भूल जाइएगा..! प्लीज याद से इसे सुबह और रात में सोने के पहले ब्रश जरूर करवा दीजिएगा..!”
” तुम तो मुझे बिल्कुल ही निकम्मा करार दे बैठी हो हम्म .!”
” निकम्मे तो बिल्कुल भी नहीं है आप… ! हमारे कमरे के बाहर के सारे काम आप बड़ी लगन और ईमानदारी से करते हैं! लेकिन जब बात आपकी बीवी और बच्चे की आती है तो आप टिपिकल हस्बैंड बन जाते हैं..!”
” गलत कह रही हो शौर्य के मामले में सब कुछ याद रखता हूं..!”
बांसुरी ने पलट कर अपनी कमर पर दोनों हाथ रख लिए और एक भौंह ऊपर चढ़ा कर ध्यान से राजा को देखने लगी… वो भी बाँसुरी और शौर्य के पीछे ही बैडरूम में चला आया था…
” तो फिर बताइए शौर्य एक्सेक्ट कितने मंथ का हो गया…?”
” हम्म ! ढाई साल का.. !”
बांसुरी में ना में गर्दन हिला दी…
” यार एक आध महीना ऊपर नीचे चलता है..!”
” अच्छा बताइए शौर्य का अगला वैक्सीनेशन डेट कब का है..?”
” अब इसके लिए तो मुझे शौर्य का वैक्सीनेशन चार्ट देखना पड़ेगा…. तुमको भी देट थोड़ी ना याद होगी…?”
“मुझे याद है.. ! मैं माँ हूं उसकी… ! अच्छा वह छोड़िए आप यह बताइए कि शौर्य का फेवरेट कलर कौन सा है…?”
राजा के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी और माथे पर बल पड़े हुए थे अपने माथे पर अपनी दोनों उंगलियों से सहलाते हुए वह खुद पर ही झेंपने लगा…
“शायद रेड.. !”
“यस रेड एन्ड ब्लू.. क्योंकि कैप्टन अमेरिका उसका फेवरेट है..”
” हां यह तो मुझे पता था..!”
” चलो झूठे… कुछ नहीं पता आपको..! अभी अगर मैं यह पूछना शुरु कर दूं कि राजा साहब बताइए आप की रियासत की जनसंख्या कितनी है? या फिर आपके रियासत में कितने लोगों के घर पर टॉयलेट बन चुके हैं? आप की रियासत के कितने किसानों को आपने कर्ज माफी दिलवा दी है? आपकी रियासत में कुल कितने सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां पर इंग्लिश मीडियम स्कूल खोल दिया गया है? या फिर आप की रियासत के कितने बच्चे आईआईटी मेडिकल में सेलेक्ट हो गए हैं? तो सारे जवाब उंगलियों में गिन कर फटाफट दे लेंगे…”
राजा शरमा के नीचे देखने लगा… अपने बालों पर उंगलीया फिराते हुए वह कुछ गुनगुनाने लगा…
” बस यह एक अच्छा तरीका आपने सीख लिया है… जैसे ही बांसुरी नाराज हो तो फटाफट वह पहली मुलाकात वाला गाना गा दो, कितनी भी नाराज हो इसके चेहरे पर मुस्कान आ ही जाएगी…! है ना.. ?”
” पर वह गाना था भी तो बहुत प्यारा और वह गाना जब भी गुनगुनाता हूं मुझे उस वक्त की बांसुरी की याद आ जाती है… जो रसोई में खाना बनाते हुए उस गाने को गुनगुना रही थी और उस दिन तुम्हारे ऑफिस जाने के बाद मैं सारा दिन बस उस गाने को खोजता रह गया था…
साथी एक साथी मिल गया….
महरूम थे….
उलझे सवालों के जायज़ जवाब मिले ना….
…. राहें फिर मुड़ी और साथी एक साथी मिल गया…
राजा प्यार से गुनगुनाने लगा और बांसुरी जाने क्यों भावुक होकर राजा के पास चली आई… उन दोनों की बातों के बीच ही शौर्य वापस सो चुका था…
उसे बिस्तर पर लेटाने के बाद राजा के कंधे पर सर रखे बांसुरी भावुक हुए जा रही थी… जाने क्यों इस गाने को सुनते हुए उसकी आंखों से दो बूंद आंसू टपक पड़े…
” यह क्या है.. ? तुम्हें रुलाने के लिए थोड़ी ना सुनाया था..?”
” कल आप वापस चले जाएंगे.. यह सोच सोच कर रोना आ रहा है..! कितना अजीब होता है यह प्यार जब हम पहली बार मिले थे तब हमें मालूम नहीं था कि हमारा जिंदगी भर का साथ होगा, और उस वक्त हमें जितना भी समय एक दूसरे के साथ मिलता था बेहद कीमती लगता था…
और फिर हमारी शादी हो गई, हमारी राहें एक दूसरे के साथ जुड़ गई.. हम साथ-साथ अपनी जिंदगी के रास्ते पर आगे बढ़ने लगे, लेकिन यह कैसा खेल रचाया भगवान ने कि हम जीवन साथी होते हुए भी हमेशा साथ नहीं रह पाते…
.. कभी मेरी पोस्टिंग कहीं और हो जाती है तो, कभी आप को अपने काम के कारण महीने महीने भर महल से दूर रहना पड़ता है, और शौर्य के होने के बाद जब हमें साथ रहने का मौका मिला तो एक बार फिर मुझे यहां आना पड़ गया..!”
” चिंता ना करो हुकुम, तुम्हें खुद से दूर ज्यादा दिन तक नहीं रहने दूंगा… मेरे अंदर चलने वाली सांसे तुम हो अगर तुमसे ज्यादा दिन तक दूर रहा तो जी नहीं…
बांसुरी में अपनी उँगलियाँ राजा के होठों पर रख दी..
” बहुत फिल्मी हो गए हैं आप..? जब देखो तब बस फिल्मी डायलॉग मारते रहते हैं…!”
” और बहुत रोमांटिक हो गई है मेरी हुकुम..! जब देखो तब मुझे प्रोवोक करती रहती है.. !”
“अच्छा.. ? अभी ऐसा क्या किया मैंने.. ?”
“बताऊँ… क्या किया… ? “
खिलखिला कर बाँसुरी राजा से दूर भाग गयी.. लेकिन उसी समय उसे लगा जैसे उनके कमरे की खिड़की के ठीक बाहर कोई साया था जो अचानक तेज़ कदमों से वहाँ से गायब हो गया…
राजा परेशान न हो जाएं सोच कर बाँसुरी ने कुछ नहीं कहा.. उसे भी लगा की हो सकता है गार्ड्स चक्कर लगा रहें हों…
उसने जाकर खिड़की बंद की और परदे लगा कर वापस राजा के पास चली आयी…
*****
अगली सुबह उसने ऑफ़िस के लिए हलकी गुलाबी सिल्क की साड़ी निकाली और एक हाथ में चौड़ी पट्टे की घडी और दूसरे में दादी सा का पहनाया कंगन पहन कर तैयार हो गयी…
शौर्य को पहले ही सपना ने तैयार कर दिया था.. उसे अपने हाथ से फटाफट नाश्ता करवा कर उसे खूब सारा प्यार करने के बाद बांसुरी ऑफिस के लिए निकलने लगी कि राजा ने उसकी कलाई पकड़ ली…
बांसुरी ने पलटकर राजा को घूर कर देखा क्योंकी शौर्य के साथ सपना भी वहीं मौजूद थीं… .
राजा ने उन लोगों की तरफ ध्यान नहीं दिया और बांसुरी को पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया..
“क्या हुआ साहब… !”
राजा पहली बार इतना भावुक नजर आ रहा था ! राजा ने अपनी कलाई में हमेशा पहनने वाले रुद्राक्ष को निकाला और बांसुरी की कलाई में लपेट कर लॉक कर दिया….
सोने के सुंदर मनको के बीच सुसज्जित एकमुखी रुद्राक्ष राजा ने बचपन से अपनी कलाई में पहन रखा था…
इसे उसकी मां ने उसकी कलाई में बांधा था… और इस रुद्राक्ष के बारे में राजा ने बांसुरी को बताया था कि किसी पहुंचे हुए संत ने उसकी मां को यह रुद्राक्ष देकर कहा था कि यह हमेशा तुम्हारी रक्षा करेगा…
क्योंकि वह बचपन में बहुत शैतान था और हर वक्त इधर-उधर गिरता पड़ता रहता था इसलिए उसकी सुरक्षा के लिए जब वह छोटा था उसी वक्त उसकी मां ने उसकी कलाई में तीन चार बार लपेट कर उसे अच्छे से बांध दिया था… जैसे-जैसे राजा की उम्र बढ़ती गई वैसे-वैसे उस रुद्राक्ष के घेरे भी कम होते गए…
और आज राजा ने पहली बार उस रुद्राक्ष को अपने हाथ से निकाल कर बांसुरी की कलाई में बांध दिया था…
” यह क्या कर रहे हैं साहब.. यह तो मां की निशानी है..?”
” हां तो.. मेरी मां की निशानी है जो मैं अपने बेटे की मां को देना चाहता हूं… इसमें गलत क्या है..?”
” आप कभी-कभी इतनी भावुकता कर जाते हैं कि, मुझे लगता है, मैं आपकी भावनाओ के सैलाब में बह जाउंगी.. !”
” मेरे यहां से जाने के बाद यह तुम्हारी रक्षा करेगा बाँसुरी.. !”
” अब तो आप ऐसे बिहेव कर रहें साहब जैसे कि मैं कोई जंग लड़ने जा रही हूं..! मेरी पोस्टिंग ही हुई है यहां.. कुछ महीनों की बात है, मैं फिर खुद आवेदन देकर अपना ट्रांसफर करवा लूंगी…अच्छा अब चलती हूं, देर ना हो जाएं.. !”
” जल्दी आना बाँसुरी.. तुम्हारा बेटा और उसका पापा दोनों तुम्हारा इंतज़ार करेंगे.. !”
” मुझे पता है मेरे यहां से जाते ही आप शौर्य को लेकर टिपिकल फादर बनकर टीवी के सामने बैठ जाएंगे और वीडियो गेम्स में भिड़ जायेंगे.. !”
” आखिर क्यों ना भिड़े.. ? कितना कम मौका मिलता है हम दोनों बाप बेटे को मैन टू मैन टॉक करने का… साथ साथ गेम्स खेलने का..!!”
मुस्कुरा कर उन दोनों के माथे को चूम कर बांसुरी बाहर निकल गयी….
*****
कलेक्टर परिसर में बांसुरी की गाडी मुख्य गेट से अंदर प्रवेश कर गयी… जनदर्शन और समस्या समाधान दिवस ना होने के बावजूद भी यूं लग रहा था जैसे वह पूरा कस्बा अपनी नई कलेक्टरनी को देखने के लिए उमड़ा पड़ा है…
गाड़ी से उतरकर एक नजर सबकी तरफ देखकर हाथ उठाकर अभिवादन करने के बाद बाँसुरी तेज कदमों से परिसर के अंदर दाखिल हो गई…
वहां भी ढेर सारे लोग वेटिंग में बैठे उसका इंतजार कर रहे थे…
परिसर में आगे बढ़ते में उसके साथ कदम से कदम मिलाकर एक मझौले कद का थोड़ा भारी शरीर का आदमी चलने लगा…
“मैडम मैं दीवान हूं… आपका सेक्रेटरी… !
बांसुरी में उसे देखकर गर्दन एक बार झुका दी.. दीवान अपने हाथ में रखी ढेर सारी फाइल्स के साथ तेजी से बांसुरी के साथ कदम मिलाते हुए उसके कक्ष की तरफ बढ़ते हुए उसे वहां मौजूद लोगों के बारे में भी बताने लगा…. ..
” मैडम आज भले ही आपकी जॉइनिंग है और पहला दिन भी लेकिन आपसे मिलने वालों की भीड़ लगी हुई है…
सबसे पहले तो शेखावत साहब वेटिंग में है.. !
” अच्छा..! क्या सुबह सबसे पहले उन्होंने ही फोन से नंबर लगाया था..?”
” मैडम वो पिछले हफ्ते से आप से मिलने का नंबर लगा चुके हैं.. !”
” ऐसी क्या हड़बड़ी है उन्हें, मुझसे मिलने की..! और ऐसी क्या खूबी है उनमें जो आपने उन्ही का नाम सबसे पहले लिया ?”
” मैडम उनकी एक खूबी हो तो बताऊँ… ! यहां के खानदानी रईसों में से एक है… ढेर सारे व्यापार का केंद्र है उनका नाम… यहां का हर छोटा-बड़ा कॉन्ट्रैक्ट उनके सामने से होकर गुजरता है ! फिलहाल जंगलों की अवैध कटाई रोकने का पिछले कलेक्टर ने आदेश पारित किया था, उस आदेश को इस आदमी शेखावत ने कैंसिल करवाने की कोशिश शुरू की … लेकिन उस कैंसिलेशन के पहले ही पुराने कलेक्टर साहब का यहां से तबादला करके आपको यहां ले आया गया…
अब जब तक आप उस कैंसिलेशन पर साइन नहीं कर देती तब तक शेखावत का वो काम अटका हुआ है बस इसीलिए वह आपके आने की राह इतनी शिद्दत से देख रहा था…”
” मतलब चाहता क्या है..? जंगलों की अवैध कटाई करने के पीछे उसका…”
” उसका उद्देश्य सिर्फ जंगल की लकड़ी नहीं है मैडम… इससे बहुत ज्यादा गहरे तक वह आदमी घुसा हुआ है..जितना ज़मीं के ऊपर नजर आता है उससे डबल अंदर धंसा है.. !”
बांसुरी और दीवान बातों ही बातों में बांसुरी के कक्ष तक पहुंच गए…
दरवाजा खोलकर बांसुरी अंदर जैसे ही दाखिल हुई, वह एक पल को चौक पर खड़ी रह गई… क्योंकि उसकी कुर्सी के ठीक सामने जो टेबल थी उसकी दूसरी तरफ एक आदमी बैठा उसकी राह देख रहा था…
बांसुरी उसे देखते हुए गोल घूम कर अपनी टेबल के पार जाकर अपनी रिवाल्विंग चेयर में बैठ गयी…
उसके वहां बैठते ही सामने बैठे आदमी ने अपना परिचय देना शुरू कर दिया…
” नमस्कार मैडम हमारा नाम मिसाल सिंह शेखावत है..!”
बाँसुरी ने हाथ उठाकर उसे रुकने का इशारा किया और दीवान की तरफ देखकर उसे कुछ लाने को कहा…
दीवान ने एक रजिस्टर लाकर बांसुरी के सामने रख दिया… उस रजिस्टर के पन्ने को खोलकर बाँसुरी ने पहले ही पेज पर कुछ लिखने के बाद अपना साइन किया और उसके बाद दीवान को वो रजिस्टर थमा दिया…
उसके बाद बांसुरी सामने बैठे उस आदमी की तरफ मुड़ गई…
” जी अब कहिए.. क्या कह रहे थे आप..?”
” परिचय दे रहे थे अपना, जो हम एक बार ही देते हैं..! अब आगे अगर हमारा परिचय चाहिए तो एक बार शहर घूम कर आ जाइयेगा .. !”
” फिलहाल मेरे पास इतना वक्त नहीं है कि मैं लोगों का परिचय पाने के लिए शहर घूमती फिरुँ.. ?
“हम्म ! गर्वित हैं आप अपने पद पर… !”
” बिल्कुल..! और होना भी चाहिए..! क्योंकि इतनी मेहनत से इस पद तक पहुंची हूं, उसका सम्मान बनाए रखना भी तो जरूरी है… आप कहिये.. क्या कह रहे थे..? और जितनी जल्दी कहें उतना अच्छा होगा, बाहर भीड़ मेरा इंतज़ार कर रहीं है… “
“ये कागज़ देख लीजिये.. यहाँ तक पहुँचते वक्त पिछला सब तो इस दीवान ने आपके सामने उलटी कर ही दिया होगा…
मैं जानता हूं ये ज़मीन सरकार के लिए बेहद कीमती है.. लेकिन उससे कहीं ज्यादा कीमती यह मेरे लिए है कलेक्टर साहिबा.. इस बीहड़ में आकर आप अपना ज्ञान बांटने की जगह अपने पास सुरक्षित रखें तो आपके लिए ज्यादा बेहतर होगा..
जैसा हम लोग कहते रहे वैसा अगर चलती रहीं तो आपका जीवन और आप सुरक्षित रहेंगी….वरना हर पैदा होने वाले को एक न एक दिन मरना ज़रूर है…
जानती हैं ना आप जंगल का राजा शेर होता है.. और हमारे इस जंगल में हम चार शेर ही राज करते है.. समझी आप… “
और शेखावत ने अपनी गन बाँसुरी के सामने टेबल पर उसकी तरफ घुमा कर रख दी…..
क्रमशः
aparna…..
