जीवनसाथी- 2/23


जीवनसाथी 2 -भाग 23

    पिया का इस वक्त पंखुड़ी के साथ कहीं जाने का मन नहीं था लेकिन पंखुड़ी उसे जबर्दस्ती अपने साथ एक दुकान में लेकर घुस गई…

” पिया तू अब अपने दिमाग से यह ब्रेकअप वाला ना मसला दूर कर दे..
यार इस ब्रेकअप वाले मसले में ना मैं अनुष्का से पूरी तरह इत्तेफाक रखती हूं.. !”

” अब यह अनुष्का कौन है?”

पिया की झुंझलाहट बढ़ती जा रही थी और पंखुड़ी उसके मजे ले रही थी…

” लो कर लो बात ! तू अनुष्का को नहीं जानती? अबे  यार  विराट की बीवी.. !”

” कौन विराट पाखी? न मैं किसी विराट को जानती  हूं,  ना अनुष्का को.. !”

” बस तुम जैसे कुछ खडूस डॉक्टरों के कारण ही डॉक्टर बदनाम है..  अबे क्या क्रिकेट खेलता है विराट कोहली…. क्रिकेटर की बात कर रही हूं मैं !और अनुष्का शर्मा, अपनी पीके वाली रिपोर्टर! “

” ओह्ह गॉड तेरी बातें और तू पाखी.. !  लेकिन अनुष्का की कौन सी ब्रेकअप स्टोरी  है जिससे तू इत्तेफाक रखती है.. !”

” दिल पर पत्थर रख के मुंह पर मेकअप कर लिया.. मेरे सैंया जी से आज मैंने ब्रेकअप कर लिया.. ! इससे सुरीला ब्रेकअप कहीं और नहीं सुनने में आ सकता!  पिया !!  यह गाना युग परिवर्तन करने वाला गाना है ! यार पहले के जमाने की लड़कियां ब्रेकअप हो जाए तो अकेले अपने कमरे में बैठकर आंसू बहाती रहती थी, और लड़के किसी दूर पहाड़ी पर बैठकर सिगरेट फूंकते रहते थे !  लेकिन आजकल ऐसा नहीं है ! आजकल लड़कियां ब्रेकअप होने पर मेकअप लगाती हैं समझी..

पिया से बात करते हुए पंखुड़ी उसका हाथ पकड़े उसे एक बड़ी सी दुकान में घुसा कर ले गई…

” तुझे फिर से कपड़े खरीदने हैं पंखुड़ी. ? “

पंखुड़ी ने मुस्कुराते हुए जोर-जोर से हां में गर्दन हिला दी और पिया को साथ में बैठा कर ढेर सारे कपड़े देखने लगी..  जबरदस्ती पिया से पसंद करवा करवा कर उसने लगभग 11 जोड़ी कपड़े खरीद लिए..

” अब चले मैडम पाखी और कितनी शॉपिंग बाकी है तेरी.. !”

” रुक ना यार !! पिछले डेढ़ घंटे से बैठे हैं और इसने  कॉफी तक नहीं पिलाई.. !”

दुकानदार ने पाखी की बात सुन ली थी..

“जी मैम !!  बस कॉफ़ी भी आ रहीं है.. तब तक आप लोग चाहें तो इससे मैचिंग पर्स देख लीजिये..

पंखुड़ी ने हाँ में सर हिला दिया… -” लेकिन देर बड़ी लगा देते हैं आप लोग कॉफ़ी लाने में.. !”

“पाखी यार इतनी शॉपिंग क्यों कर रहीं है तू.. ? बात क्या हो गयी.. ?”

“अब पूछी ना तूने पते की बात.. ! कल मेरी सगाई है.. बस उसी की तैयारी के लिए तुझे बुला रहीं थी.. .. 
अब ये मत बोलना की कल उस दगाबाज़ की शादी में तुझे कोर्ट जाना है.. !”

पिया का मुँह लटक गया… -” मेरी भी कहाँ हिम्मत है उसे किसी और का होते देखने की.. ! वैसे पंखुड़ी तुझे कैसे पता की उसकी शादी कोर्ट में होने जा रहीं है.. ?”

“तूने ही तो बताया था अभी अभी.. ! खैर छोड़ यार उस जैसी पनौती का नाम लेने से हमारे भी काम बिगड़ेंगे.. ! अब उसे छोड़ और ये पर्स देख.. कौन सा अच्छा लग रहा है.. ?”

पिया ने अपनी पसंद से दो पर्स अलग कर दिये.. वहाँ से निकल कर पंखुड़ी उसे शूज, नाइट वियर्स एक एक कर हर काउंटर पर साथ लिए घूमती रही और ढेर सारी शॉपिंग करती रही…
आखिर में इतनी सारी शॉपिंग करने के बाद पंखुड़ी पिया को लेकर एक रेस्टोरेंट में घुस गई…

” क्या खाएगी पिया..?”

” कुछ नहीं यार, भूख नहीं है..!”

” खा ले.. फिर वैसे भी घर जाकर तो कुछ अपने लिए बनाएगी नहीं… ! आज तेरा मूड जो ऑफ है और  आज तुझे अपना ब्रेकअप सेलिब्रेट जो करना है… मैं जानती हूं इसीलिए तू रोंदू गाने बजाकर उन्हें  सुनते हुए अपने ब्रेकअप को महसूस करते हुए आंसू  बहायेगी.. इस से अच्छा है कि आज तू  मेरे साथ मेरे रूम पर रुक जा..!”

” नहीं यार !! आज मूड नहीं है,  मैं अपने रूम पर ही ठीक हूं.. !”

” ठीक है.. जैसी तेरी मर्जी!  चल मेरे साथ थोड़ा बहुत कुछ तो खा लें….
पिया को जबरदस्ती अपने साथ कुछ थोड़ा बहुत खिलाकर पंखुड़ी उसे लेकर फिर पार्लर में घुस गयी !  पिया का बिल्कुल ही मन नहीं था लेकिन पंखुड़ी ने जबरदस्ती बैठा कर उसका फेशियल और कंप्लीट ग्रूमिंग करवा दिया….

” सगाई तो तेरी है मैडम, मेरी क्यों ग्रूमिंग करवा रही है..?

” भाई तुम दुल्हन की खास दोस्त हो !  तुम्हें भी मेरी तरह चमकना चाहिए! और दूसरी बात तुम्हारे एक्स को यह पता ही नहीं लगना चाहिए कि, तुम उसे छोड़कर दुखी हो या उसे यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उसने तुम्हें छोड़कर बहुत अच्छा काम किया ! कहीं बाई चांस उसकी नजर कल तुम पर पड़ जाए तो उसे यही महसूस होना चाहिए कि मैंने क्या छोड़ दिया..!”

पिया का मन इतना खराब था कि उसका पंखुड़ी से ज्यादा बहस करने का भी मन नहीं था, और एक तरह से उसे पार्लर में अच्छा भी लग रहा था ! धीमे चलते म्यूजिक और डिम लाइट के बीच जब पार्लर वाली उसका फेशियल कर रही थी तो वह धीरे से आंखें बंद किए अब अपने और समर के बारे में सोचने लगी…. सोचते सोचते उसके दिमाग में यही बातें आ रही थी कि अगर वह अपनी समस्या समर  से एक बार कहती तो समर उसके जवाब में उससे क्या कहता… उसके पास अपने सवालों का कोई जवाब नहीं था! लेकिन उसका मन बार-बार तड़प रहा था कि वह एक बार समर से मिल ले…
पार्लर का काम निपटने में रात हो चुकी थी…
  पिया ने सोचा भी कि समर को एक बार फोन कर लेना चाहिए लेकिन पंखुड़ी ने उसका फोन छीन कर अपने पर्स में डाल दिया, और दोनों अपने इतने सारे सामान के साथ पंखुड़ी के घर पहुंच गए…

उसके बाद पंखुड़ी ने इधर-उधर की बातों में लगा कर पिया को समर को फोन करने का मौका ही नहीं दिया..  अगली सुबह पिया के जागने तक में पंखुड़ी उठ चुकी थी.. पिया के जागते ही वह उन दोनों के लिए चाय बना कर ले आयी…

” पंखुड़ी मुझे यह समझ में नहीं आ रहा है कि तेरी आज सगाई होनी है और तेरी मम्मी और तेरे पापा का  कोई अता पता नहीं है… ऐसे कैसे..?”

” अब गया तेरा ध्यान इस बात पर..! मुझे तो लगा था कल रात आते ही तू सबसे पहले यही पूछेगी कि, मेरे पेरेंट्स कहां है?  तुझे याद तो होगा ही,  इसी शहर में मेरी मासी  भी रहती है… मम्मी कल रात में आ कर  मासी के घर पर ही रुके हैं !क्योंकि मम्मी और मासी  मिलकर सारी तैयारियां कर रहे हैं.. पापा आज सुबह पहुंचने वाले हैं..!”

” ओके !!  आंटी तो यहां तेरे पास भी रुक सकती थी..!”

” हां लेकिन यहां मेरा रूम काफी छोटा है ! मम्मी को दिक्कत भी हो जाती.. और फिर अभी हम लोग रेडी होकर सीधे मासी के घर ही जाएंगे..! वहीं से हमें सगाई वाले हॉल में जाना है!”

पिया को हालाँकि इन सारी फ़िज़ूल  बातों में कोई मजा नहीं आ रहा था लेकिन वह पंखुड़ी से कहती थी क्या..?  सब कुछ किया धरा तो उसी का था…. समर ने भी जी जान लगाकर उससे सारी सच्चाई जानने की कोशिश की थी, लेकिन वह समर को बता ही नहीं पाई कि उसकी समस्या क्या थी?  और आज बातें उसके हाथ से निकल कर काफी आगे जा चुकी थी…
    समर आज अपनी मां की पसंद की किसी और लड़की से शादी कर रहा था ! शायद उसकी मां चाहती भी यहीं थी, क्योंकि कुछ भी कहो उनके मन में शुरू से एक खटका तो था कि पिया ठाकुर नहीं थी..! शायद इसी बात के कारण समर की मां पूरे मन से पिया को कभी भी स्वीकार नहीं कर पाई थी… वह अपनी सोच में गुम थी कि उसका फोन बजने लगा फोन उसकी मां का था…..

” मां इतनी सुबह सुबह कैसे फोन किया..?

” क्यों?  अपनी बेटी को फोन करने के लिए अब  उसकी परमिशन लेनी पड़ेगी क्या..?

” अरे नहीं ! मेरा मतलब था कोई जरूरी काम है क्या..?”

” हां !!बहुत जरूरी काम था, इसीलिए तुझे फोन किया है..  तेरे पापा की तबीयत  पिछले कुछ दिनों से ठीक नहीं चल रही थी, यहां अपने शहर में दिखाया भी था ! लेकिन डॉक्टर कुछ सही सलाह नहीं दे पा रहे, इसलिए तेरे पास पहुंच गई हूं ! हम लोग स्टेशन पर ही हैं बस तेरे घर पहुंच रहे हैं..!”

पिया ने अपने माथे पर अपना हाथ मार लिया ! आज ही सबको आकर यहां इकट्ठा होना है !आज जब वह मन भर कर रोना चाहती है, आज जब अकेली अपने कमरे में पड़ी रहना चाहती है!  आज जब वह अपनी लव लाइफ को अपने ही सामने खत्म होते हुए देखना चाहती है…  सुबक सुबक कर रोना चाहती है, तब हर कोई उसे अपनी लाइफ में इंगेज करने पर तुला हुआ है!
     एक तरफ पंखुड़ी उसे अकेला नहीं छोड़ रही, दूसरी तरफ मां और पापा भी आ गए… अरे 2 दिन बाद आ जाते तो क्या बिगड़ जाता…?
उसके चेहरे पर के भाव देखकर पंखुड़ी तुरंत उसके पास आकर बैठ गई..-” क्या हुआ पिया ? कुछ परेशान लग रही है..?”

  “अब क्या बोलूं.. मम्मी और पापा भी आज ही आए हैं.. !मम्मी का कहना है पापा की तबीयत कुछ ठीक नहीं थी! उनके कंपलीट हेल्थ चैकअप के लिए यहां मेरे पास आए हैं !अभी स्टेशन पर हैं! कुछ देर में मेरे घर पहुंच जाएंगे! चल पंखुड़ी अब मुझे घर जाना पड़ेगा..!”

” तू मेरी सगाई में आ रही है ना पिया..?

” आऊंगी!! यार पक्का आऊंगी..!”

” पता नहीं क्यों मुझे तुझ पर भरोसा नहीं हो रहा! और मुझे तो इस बात पर ही भरोसा नहीं हो रहा कि आंटी और अंकल आए हैं… तू आंटी का नाम लगा कर मेरे पास से भाग कर अपने घर चली जाना चाहती है ! जिससे कि तुझे मेरी सगाई में न आना पड़े…
      अजीब दोस्त हैं..
   माना कि आज तेरी जिंदगी का सबसे कड़वा दिन है  लेकिन तेरी दोस्त का तो सबसे मीठा दिन है ना..! तू  अपने दोस्त की खुशी में खुश नहीं होगी..?

” इतना ड्रामा क्यों क्रिएट कर रही है यार.. ? मैंने तो नहीं बोला कि मैं नहीं आ रही हूं..!”

” नहीं..!  तू रुक मैं अंकल आंटी को फोन करके यहीं  बुला लेती हूं.. ! पता नहीं मुझे लग रहा है, अगर तू मेरे पास से चली गई तो तू  मेरी सगाई में नहीं आएगी !”

इसके बाद पंखुड़ी ने पिया की एक नहीं सुनी और उसका फोन उठाकर उसकी मम्मी को फोन करके वही अपने पास बुला लिया…

11 बजे तक सभी लोग नहा धोकर तैयार हो चुके थे…
पंखुड़ी ने पिछले दिन लिया बहुत सुंदर सा गुलाबी लहंगा पहना हुआ था….
   पिया को उसने और पिया की माँ ने जिद करके एक बहुत खूबसूरत सा रानी कलर का सुनहरी ज़री से सजा गोटा पट्टी वाला लहरिया लहंगा पहना दिया…. दुपट्टा झीना सा था जिस पर सुनहरी ज़री का बारीक सा काम था… कानों में पिया ने कुछ भी पहनने से इंकार कर दिया…

“यार इतना गॉडी लहंगा है.. इसके साथ ज़ेवर पहन लुंगी तो दुल्हन लगने लगूंगी… !”

“हाँ तो क्या हो गया… एक न एक दिन तो दुलहन बनेगी ही मेरी बेटी.. !”

पिया की मां ने आगे बढ़कर पिया की नजर उतार ली… अपने बालों को खुला ही छोड़ कर पिया पंखुड़ी के साथ निकलने को तैयार थी कि पंखुड़ी ने एक दिन पहले खरीदी नई सुंदर सी रानी कलर की सैंडल भी उसके पैरों के सामने रख दी..

” अब जब लहंगा इतना खूबसूरत पहना है तो यह भी पहन ही ले, मैचिंग हो जाएगा और साथ में ये  रानी कलर का बटुआ..!”

” तू तो महारानी बना दे मुझे..! सगाई तेरी है मेरी नहीं..!”

” हां लेकिन दुल्हन की सगाई में उसकी सहेलियों को ज्यादा खूबसूरत दिखना होता है तभी तो अच्छे लड़के मिलेंगे ना यार समझा कर..!”

पंखुड़ी ने धीरे से पिया के कान में कहा और अपना पर्स उठा कर आगे बढ़ गई..

” आज सोच रही हूं कार निकाल लेती हूं.. क्यों आंटी?”

” और नहीं तो क्या..?  तू अपनी सगाई में अपनी स्कूटी पर ही जाने वाली थी क्या?”

” यह देखो..! अकेले जाना होता तो मैं अपनी सगाई में अपनी स्कूटी पर ही चली जाती! क्योंकि यह जो डॉक्टर पंखुड़ी है ना इसका टशन ही अलग है ! लेकिन वह क्या है कि तुम्हारा इतना लंबा सा लहंगा फिर अंकल आंटी, सब के साथ कार ही शोभा देगी.. !”

   दराज़ से कार की चाबी निकालकर पंखुड़ी गाड़ी निकालने आगे बढ़ गई और उसके साथ ही पिया के माता-पिता और पिया भी बाहर निकल गए……

    पंखुड़ी आराम से गाड़ी चलाई जा रही थी पिया उसके बाजू वाली सीट में बैठी थी और पिया के माता-पिता पीछे….
   पंखुड़ी ने गाने चला दिये….

ये शर्म है या हया है,क्या है
नजर उठाते ही झुक गयी है
नजर उठाते ही झुक गयी है
तुम्हारी पलकों से गिर के शबनम
हमारी आँखों में रुक गयी है

जिहाल-ए-मस्कीं मकुन-ब-रन्जिश

बहाल-ए-हिजरा बेचारा दिल है
सुनाई देती है जिसकी धड़कन
तुम्हारा दिल या हमारा दिल है…..

पिया उदास सी बैठी इस गाने को सुन रही थी.. उसने सीट पर पीछे की तरफ सर टिकाया और आंखें बंद करके बैठ गई..! कुछ 15 से 20 मिनट के बाद पंखुड़ी  ने मंदिर के सामने जाकर गाड़ी खड़ी कर दी….
पिया की नजर खुली,  किसी बड़े से मंदिर के सामने गाडी रुकी थी…

” यह तो कोई मंदिर है पंखुड़ी..!”

” मेरी सगाई यही होनी है पिया..!”

पिया अपने माता पिता के साथ उतर गई ! पंखुड़ी के साथ ही वह मंदिर की सीढ़ियां चढ़ने को थी कि, तभी सीढ़ियों पर ही उसकी नजर बांसुरी निरमा रूपा और जया पर पड़ गई, उन चारों को वहां देखते ही उसके चेहरे पर आश्चर्य की रेखाएं खींच गई.. ! उसे अंदर ही अंदर इतनी देर से जो महसूस हो रहा था, क्या वह सच था.. ? उसे कल से ही ऐसा लग रहा था कि पंखुड़ी और यह सारे लोग मिलकर उसके साथ कोई खेल खेल रहे हैं..! लेकिन उसका दूसरा मन इस बात को मानने को तैयार नहीं था!  क्या राज महल के लोग उस जैसी अदना सामान्य सी लड़की के लिए इतना कुछ कर सकते हैं..? 
वह बांसुरी के पास जाकर  सभी को अभिवादन करके खड़ी हो गई..

” बहुत प्यारी लग रही हो पिया..!”
पिया ने मुस्कुरा कर उन्हें धन्यवाद कहा और उन सब से ही सवाल कर लिया..-” आप लोग यहां कैसे?”

पिया का जवाब दिया निरमा ने… 
” जैसे हम सभी का परिचय तुमसे हुआ, वैसे ही पंखुड़ी को भी हम लोग जानते हैं..! चलो सब ऊपर मंदिर में चलते हैं..!”

सब लोग मंदिर की सीढ़ियां चढ़कर ऊपर जाने लगे.. पिया का जाने क्यों दिल बार-बार धड़क रहा था उसने धीरे से बांसुरी से पूछ लिया..

“रानी साहेब आपसे एक बात जानना चाहती हूं ! आप लोग आज समर की शादी में क्यों नहीं गए..?”

” हम सब समर की शादी में ही तो आए हैं..  इसी मंदिर में समर की शादी हो रही है.. !”

” लेकिन कल तो उन्होंने कहा था कि कोर्ट में शादी है..!”

” अच्छा तो तुम कोर्ट जाना चाहती हो, समर को रोकने के लिए..!”

” नहीं मेरा वह मतलब नहीं था..!”

” फिर क्या मतलब था तुम्हारा पिया..? क्या तुम वाकई अब भी समर को नहीं रोकना चाहती..
    वह देख लो, सामने ब्लैक टक्सीडो में तुम्हारा ना हो सका पति किसी और के गले में मंगलसूत्र बांधने की तैयारी में खड़ा है ! अभी भी वक्त है, तुम्हारे पास चाहो तो जाकर रोक लो उसे..! क्योंकि एक बार गया वक्त वापस नहीं आता ! यह जिंदगी है फिल्म नहीं कि आज समर किसी से शादी कर ले और 10 महीने बाद उसे तलाक देकर तुमसे शादी कर ले ! वह सब कुछ फिल्मों में होता है, असल जिंदगी में नहीं! यहां पर अगर आप एक बार किसी के साथ बंध गए, तो आपको पूरी जिंदगी उस रिश्ते को निभाना होता है..! एक और बात तुमसे कहना चाहती हूं, अगर गलतफहमी का कारण समर है और उसकी किसी ज्यादती से परेशान होकर तुमने अपने कदम पीछे लिए हैं, तब तो मैं तुम्हें कभी भी फोर्स नहीं करूंगी कि तुम शादी करो ! लेकिन अगर तुम्हारे मना करने का कारण तुम दोनों के अलावा कोई तीसरा है, तो मैं जरूर कहूंगी कि अपनी गलतफहमी दूर करो और जिंदगी में आगे बढ़ो..! क्योंकि यह बात हमेशा याद रखना कि जिंदगी दो लोगों को एक दूसरे के साथ गुजारनी है.. उन दोनों के अलावा और कोई भी तीसरा उनकी जिंदगी में इतना महत्वपूर्ण स्थान नहीं रखता !
      मैं मानती हूं सास ससुर जेठ जेठानी देवर देवरानी ननंद हर किसी का अपना महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन अगर जिंदगी खुशगवार रखनी है तो पति और पत्नी का एक दूसरे पर प्यार और विश्वास बनाए रखना सबसे ज्यादा जरूरी है ! क्योंकि अगर वह दोनों एक दूसरे से सच्चे अर्थों में प्यार करते हैं, और एक दूसरे पर विश्वास करते हैं तो बाकी  किसी तीसरे में इतनी हिम्मत नहीं होती कि उनके बीच में आकर अपनी जगह बना पाए…”

बांसुरी से बात करती पिया पीछे ही खड़ी रह गई थी..! और बाकी सारी औरतें आगे बढ़ गई थी !  पंखुड़ी भी धीमे से आ कर पिया के पास खड़ी हो गई.. उसने पिया के कंधे पर हाथ रख दिया…
पिया की आंखें आंसूओ से बोझल हो रही थी कि, तभी उसने देखा सामने से मुस्कुराता हुआ समर उसके पास चला आया…

” पिया अगर कह सकती हो तो आज सब कुछ कह दो…  अगर आज तुमने कुछ नहीं कहा तो मैं समझ जाऊंगा कि तुम वाकई मुझसे शादी नहीं करना चाहती…
    और मैं तुम्हारे सर की कसम खाकर कहता हूं कि, मैं आज के बाद तुम्हें कभी अपना चेहरा नहीं दिखाऊंगा…

समर की बात सुनते ही पिया के आंसू छलकने लगे… उसने समर का हाथ अपने दोनों हाथों में थाम लिया और उन्हें अपने माथे पर लगा कर रोने लगी..
समर ने उसे एक हाथ से थाम कर अपने सीने से लगा लिया.. और उसे साथ लिए मंदिर के दूसरी तरफ आगे बढ़ गया…

मंदिर के पिछली तरफ एक कमल सरोवर था उसी की सीढ़ियों पर पिया और समर आजू-बाजू बैठे हुए थे समय ने पिया का हाथ थाम रखा था…

” तुम मुझ पर पूरा विश्वास कर सकती हो,  और मुझे सब कुछ सच-सच बता सकती हो..!”

” समर  सबसे पहली बात तो यह है कि मैं तुम्हारी तरह राजपूत नहीं हूं.. यह बात शुरू से ही तुम्हारी मां को खटकती थी ! भले ही उन्होंने कभी तुम्हारे सामने यह जाहिर नहीं होने दिया लेकिन मन ही मन उनकी ख्वाहिश यहीं है कि उनकी बहु उन्हीं की तरह खानदानी राजपूत हो !  दूसरी बात रुपए पैसों के मामले में भी हम लोग तुम्हारे सामने बहुत छोटे हैं.. हम किसी तरीके से तुम्हारी बराबरी नहीं कर सकते…”

” पिया राजा साहब की शादी का किस्सा तुम्हारी आंखों के सामने कई बार बयां किया है … बांसुरी हुकुम भी तुम्हारी तरह ही एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की थी,  और वह भी राजपूत नहीं थी ! इसके बावजूद राजा साहब ने उन्हें जिस प्यार और सम्मान से रखा है, उसके बाद तुम्हारे मन में यह बातें अब तक चल रही है..? तुम्हें क्या लगता है, मैं राजा साहब का भक्त होते हुए कभी तुम्हें यह महसूस होने दूंगा कि तुम किसी भी चीज में मुझसे थोड़ी सी भी कम हो..?”

” यह बात नहीं है समर..  तुम पर तो मुझे खुद से ज्यादा भरोसा है, लेकिन मुझे यह लगा अगर मेरी तुमसे शादी हो जाएगी तो तुम अपनी मां और मेरे बीच  फंसकर ना रह जाओ…..

” वह सब मेरा सिर दर्द था ना, तुम्हें सोचने की क्या जरूरत है..? तुम बताओ कि तुमने मना किस बात के कारण किया…?

” समर… मेरे पापा और मेरी माँ की भी लवमैरिज हुई थी..  मैं जानती हूं उस जमाने में यह सब कॉमन नहीं था… हालांकि उनकी लव मैरिज उनके घर वालों की इच्छा के अनुसार ही हुई थी लेकिन मेरे माता-पिता कि कास्ट एक होते हुए भी दोनों के प्रान्त अलग अलग थे.. ..  एक उत्तर भारतीय तो दूजा दक्षिण भारतीय !यह बात मेरे घर वालों ने तुम्हारे घर वालों को  साफ शब्दों में शुरू में ही बता दिया था.. और यह बात भी तुम्हारी मां को पसंद नहीं आई थी ! उन्होंने सबके सामने तो कुछ नहीं कहा था लेकिन हमारी सगाई होने के दो-चार दिन बाद जब शादी की तैयारियों की बातें चलने लगी थी, तब एक दिन उन्होंने मुझे मिलने के लिए बुलाया..
   और मुझसे कहने लगी कि…
        ‘ अगर तुम यह चाहती हो कि तुम्हारी शादी समर से हो और पूरे रीति-रिवाज से हो तो तुम्हें उसके लिए मेरी एक शर्त माननी होगी….

क्रमशः

aparna….

आखिर क्या थी वह शर्त  जिसे सुनकर पिया ने उस शर्त को मानने से ज्यादा आसान सगाई को तोड़ देना समझा..? क्या उस शर्त को सुनने के बाद समर पिया से शादी मंजूर करेगा या अपनी मां का साथ देते हुए पिया को हमेशा हमेशा के लिए छोड़ देगा..!
कुछ ऐसे ही सवालों के साथ मिलेंगे कहानी के अगले भाग में….
  तब तक पढ़ते रहिये… मौज करिये.. !!








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