
वह एक साधारण युवक नहीं था उस की पैदाइश ही असाधारण थी… क्योंकि लोकतंत्र में भी वह एक राजमहल में पैदा हुआ था । राजमहल में पैदा होने के बावजूद राजाओं वाला कोई एटीट्यूट कभी उसके स्वभाव में नहीं छलका…उसनें हमेशा ही खुद को एक आम आदमी बनाए रखा…..
और वो हमेशा ही एक आम आदमी बना रहना चाहता था लेकिन उसकी डेस्टिनी कुछ और ही थी… और इसीलिए, राजमहल के ढेर सारे षडयंत्रों और उसके खुद की अनिच्छा के बावजूद उसके प्रारब्ध ने उसे एक साधारण राजकुमार से एक असाधारण राजा बना दिया……
……. राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला!!
बुंदेला राजवंश में पैदा हुए अजातशत्रु का जीवन कभी भी बहुत सरल और सहज नहीं रहा। राजकुमार से राजा अजातशत्रु बनने तक के सफर में उन्होंने न जाने कितने उतार-चढ़ाव देखें और इन सारे उतार-चढ़ाव में उनकी बुद्धि के स्थान पर प्रबल कूटनीतिज्ञ की तरह समर तो उनके बाहुबल के स्थान पर उनका सर्व प्रिय मित्र प्रेम हमेशा उनके साथ खड़े रहे….
बड़े भाई युवराज का स्नेह और आशीर्वाद भी सदैव पिता के समान उन्हें मिलता रहा और इस तिकड़ी की सहायता से राजा अजातशत्रु जो पहले सिर्फ अपनी रियासत के राजा थे, ने जल्दी राजनीति में कदम रखा और अपने रियासत के साथ-साथ अपने प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए….
… जीवनसाथी के पहले भाग में आपने राजा अजातशत्रु का एक राजकुमार से राजा बनने तक का सफर तय किया….
यह एक छोटा सा बीज था जो फूल बनकर खिला था, अब जीवनसाथी के दूसरे भाग में आप पढ़ेंगे कि उस बीज़ से खिला हुआ फूल कैसे एक लहराती हुई बेल बनकर पूरे उपवन को सुरभित कर गया……
जीवनसाथी के पहले भाग में आपने अब तक पढ़ा…..
…..
अपनी सगाई कि रात मुंबई वापस लौटती बाँसुरी को ट्रेन में एक अनजान लड़का अपनी सीट देता हैं, और इत्तेफाक से अगले दिन उसके फ़्लैट पर वही लड़का रहने के लिए भी पहुँच जाता है.. ये असल में बाँसुरी कि दोस्त पिंकी का भाई राजा होता हैं..
मज़बूरी में दोनों को कुछ दिन एक ही फ़्लैट में रहना पड़ता हैं, और इसी बीच अपने होने वाले पति भास्कर और राजा के स्वभाव के बीच अनजाने ही तुलना करती बाँसुरी कब राजा से प्यार करने लगती हैं उसे भी मालूम नहीं चलता…
…. इसी बीच कुछ घटनाक्रम ऐसे होते हैं कि बाँसुरी को राजा के साथ उसकी रियासत जाने का मौका मिलता हैं और वहाँ जाकर बाँसुरी को मालूम चलता हैं कि राजा वाकई एक रियासत का राजकुमार है…
रियासत हैं तो षड्यंत्र भी होंगे… राजा और युवराज बचपन में ही अपनी माँ को खो चुके होते हैं.. उनके पिता की दूसरी पत्नी यानि राजा की सौतेली माँ राजा से कुछ विशेष ही प्रेम करती हैं, जबकि उनके अपने दो बेटे विराज और विराट भी होते हैं…
बचपन में किसी पंडित की भविष्यवाणी और जन्म से ही हाथ में एक ऊँगली कम होने के कारण युवराज को राजा साहब अपना उत्तराधिकारी नहीं बना सकते थे, और इसलिए अपने बाद उनकी गद्दी संभालने के लिए उन्हें हमेशा से ही अजातशत्रु पर भरोसा था.. लेकिन रानी माँ हमेशा ही अजातशत्रु की जगह अपने बेटे विराज को गद्दी पर बैठाने का सपना देखा करते थे और इसके लिए उन्होंने ढेर सारी चालें चली….
रानी मां के कॉलेज के समय के मित्र ठाकुर साहब जिनकी उत्तराखंड के पास एक छोटी सी रियासत थी के साथ मिलकर उन्होंने अजातशत्रु को रास्ते से हटाने के लिए ढेर सारी चालें चली…
अपनी जिंदगी में इन तमाम परेशानियों से जूझते राजा को बांसुरी से और बांसुरी को राजा से सच्चा प्यार हो जाता है… लेकिन जब राजा अपनी रियासत में अपनी रानी मां से बांसुरी और अपने बारे में बात करता है तो रानी मां सबसे पहले यही शर्त रखती हैं कि अगर उसे बांसुरी से विवाह करना है तो उसे राज गद्दी छोड़नी होगी, जिस बात के लिए राजा सहर्ष स्वीकृति दे देता है…. लेकिन इस बात से बांसुरी परेशान हो जाती है क्योंकि वह यह नहीं चाहती कि उसके कारण राजा को अपनी रियासत छोड़ना पड़े| लेकिन वक्त अपनी करवट बदलता है और राजा और बांसुरी की शादी के साथ साथ राजा को गद्दी पर बैठने का भी अवसर मिल जाता है |
ढ़ेर सारे उतर चढ़ाव के साथ आख़िर वो दोनों ही अपना प्यार पा लेते हैं… और राजा और बाँसुरी कि शादी हों जाती हैं….
और इसके साथ ही राजा का राज्याभिषेक भी हो जाता है| वहीं ठाकुर साहब की बेटी रेखा के साथ रानी मां के बेटे विराज की शादी हो जाती है|
राजा की चचेरी बहन पिंकी एक नीची जाती के होशियार युवक से प्रेम करने लगती हैं, लेकिन राजा जानता हैं कि उसके परिवार वाले इस रिश्ते को क़भी मंजूरी नहीं देंगे और इसलिए वो पिंकी और रतन की शादी करवा देता हैं…
इसके बाद परिस्थितियों से लाचार राजा को अपने पिता की गद्दी संभालनी पड़ती हैं और वो राजकुमार से राजा अजातशत्रु बन जाता हैं…
अपनी पत्नी के आत्मसम्मान को बचाये रखने के लिए वो उसे आईएएस कि पढ़ाई भी करवाता है….
राजा और बाँसुरी कि कहानी के समानांतर एक और कहानी चलती है प्रेम और निरमा की….
निरमा जहां बांसुरी की दोस्त है वही प्रेम के छोटे भाई प्रताप की गर्लफ्रेंड भी… प्रताप प्रेम को निरमा से मिलवाना चाहता है, लेकिन इसी बीच प्रताप का एक्सीडेंट हो जाता है…
अस्पताल में प्रताप के फोन में आए निरमा के मैसेज से प्रेम को यह पता चलता है कि निरमा मां बनने वाली है और इसके कुछ देर बाद ही प्रेम को डॉक्टर आकर बताते हैं कि प्रताप को नहीं बचाया जा सका…..
परिस्थितियों के आगे विवश प्रेम और निरमा को प्रताप की अंतिम निशानी को बचाए रखने के लिए एक दूसरे से शादी करनी पड़ती है | और यहां से शुरू होती है इनके जीवन की एक नई कहानी…..
दो एक दूसरे से बिलकुल अनजान दिल ज़िंदगी की राहों में साथ चलते चलते कब एक दूसरे के लिए धड़कने लगते हैं ये दोनों ही नहीं जान पाते….
जीवनसाथी में एक और प्रेम कहानी थी अदिति और भास्कर की…
बांसुरी का बॉस भास्कर जिससे बांसुरी की सगाई हुई थी उस पर अक्सर वो धौंस जमाया करता है…
इत्तेफाक से भास्कर के ऊपर की पोजीशन पर एक लड़की यानी अदिति की नियुक्ति होती है | इत्तेफाक से अदिति और भास्कर एक ही कॉलेज के पढ़े हुए होते हैं….
… अदिति आधुनिक विचारों वाली लड़की है जिसे भास्कर का बात बात पर बांसुरी को दबाना पसंद नहीं आता… धीरे-धीरे अदिती की संगत में भास्कर को अपनी गलतियां महसूस होने लगती है, और वह उन्हें सुधारने की कोशिश भी करता है…. लेकिन इसी बीच बांसुरी भास्कर को अपने और राजा के बारे में बता देती है….
आदित्य के साथ रहते-रहते भास्कर का दिमाग काफी हद तक खुल चुका होता है और वह बहुत ही सुलझे तरीके से बांसुरी से अपनी शादी को तोड़ देता है….
जब बाँसुरी और राजा की शादी हो जाती है उसके बाद भास्कर भी अदिति के साथ शादी कर लेता है…..
पूरब का दूल्हा और पश्चिम की दुल्हन की तर्ज पर इनकी खट्टी मीठी नोंक झोंक से भरी जिंदगी की गाड़ी भी धीरे-धीरे पटरी पर आ ही जाती है….
जीवनसाथी की चौथी प्रेम कहानी राजकुमारी भुवन मोहिनी और रतन की थी…..
राजकुमारी भुवन मोहिनी अपने राज महल के नियमों और कायदों की हमेशा ही धज्जियां उड़ाते आई है, और इसीलिए वह घर से बाहर निकलना चाहती है… इसके लिए वह आईएएस बनने का सपना देखती है! और यही सपना अपने घरवालों को दिखाती है | उसका भाई राजा इसमें उसकी पूरी मदद करता है| और महल से बाहर निकलकर दूसरे शहर में रहकर पढ़ने के लिए घरवालों से उसे मंजूरी भी दिलवा देता है…. मुंबई के फ्लैट में रहती राजकुमारी भुवन मोहिनी को आईएएस की तैयारी के दौरान अपने साथ पढ़ने वाले एक छोटी जाति के युवक रतन से प्यार हो जाता है….
यह प्यार इस कदर परवान चढ़ता है कि अपनी पढ़ाई लिखाई भूलकर पिंकी रतन में डूब जाती है | लेकिन रतन बहुत ही प्रैक्टिकल युवक है, और उसका पूरा ध्यान पिंकी के साथ-साथ अपनी पढ़ाई पर भी होता है….
… अपने प्रथम प्रयास में ही रतन आईएएस क्लियर कर लेता है लेकिन पिंकी मेंस में अटक जाती हैं…
राजा इन दोनों के प्यार के सामने झुक जाता है | और मुंबई में ही इन दोनों की शादी करवा देता है | उन्हें एक फ्लैट और गाड़ी गिफ्ट करके वह घर वापस लौट जाता है…..
… इस सब के बावजूद रतन बार-बार पिंकी को आगे पढ़ने के लिए प्रेरित करता है लेकिन पिंकी चाह कर भी पढ़ाई आगे नहीं बढ़ा पाती…. इसी बीच उसे यह खुशखबरी मिलती है कि वह मां बनने वाली है और उसका मन पढ़ाई से और भी उचाट हो जाता है…|
वह अपनी जिंदगी में खुश और संतुष्ट है लेकिन रतन अब भी चाहता है कि पिंकी आईएएस की तैयारी करें और बनकर दिखाएं…..
दोनों की जिंदगी ऐसे ही खट्टे मीठे मोड़ों के साथ आगे बढ़ती रहती हैं, कि राजा के प्रयासों से आखिर राज महल अपनी बेटी पिंकी को माफ कर देता है और उसे और उसके पति को अपना लेता है….
जीवनसाथी के पहले भाग में यही चार मुख्य प्रेम कहानियां थी और इन्हीं कहानियों ने एक साथ मिलकर जीवनसाथी की रेल गाड़ी को पटरी पर आगे बढ़ाया था, और जिसे आप सब ने भरपूर सराहा और सर आंखों पर बिठाया…..
……… धीरे से इस कहानी में कुछ और कहानियां भी जुड़ी जो अपने अंत तक नहीं पहुंच पाई………
* जैसे कि शेखर और पंखुड़ी की कहानी?
* अदित्य और केसर की कहानी?
* समर और पिया की कहानी…
* इसके अलावा, रेखा और विराज की जोड़ी का क्या हुआ?
* रोहित कहां गया?
* लीना की शादी किससे हुई ?
* रिदान इतने दिनों से कहां गायब है?……
इस तरह के ढ़ेर सारे सवालों के जवाब लेकर आ रहा हैं… जीवनसाथी -2
पिछले सीज़न में जहाँ राजा जी पहले राजकुमार से राजा और फिर मुख्यमंत्री बने, इस सीज़न में उनकी छलांग विधान सभा से लोक सभा की होगी…
आप लोग समझे नहीं क्या… ?
हो सकता हैं इस बार राजा अजातशत्रु प्रधानमंत्री बन जाये… पर जो भी वो तो अंत होगा…
… सफर तो अब शुरू हो रहा हैं….
कहानी का पहला भाग हम शुरू करने जा रहे हैं एक नए किरदार की एंट्री से….
मायानगरी के 61 वे भाग में अपने पढ़ा था की नेता जी के गुर्गे अभिमन्यु समझ कर किसी और लड़के का पीछा करते चले जाते हैं, और एक सुनसान गली में वह लड़का उन दोनों की ही जमकर पिटाई कर देता है….. उसी का किडनैप करने आए उन दोनों लड़कों को उन्हीं की बाइक में बैठाकर वह उनके साथ उन्हें थाने लेकर पहुंच जाता है….
अब आगे…….
जीवनसाथी सीज़न -2
पहला भाग
थाने के सामने पहुंचने पर पीछे बैठे उस लड़के ने गाड़ी वहां थोड़ी देर को रुकवाई और फिर जाने क्या सोचकर गाड़ी दूसरी तरफ मुड़वा दी…
… कुछ आगे चलने पर तीन चार आड़ी टेढ़ी सुनसान गलियों से पार करते हुए उसने एक बड़ी सी बिल्डिंग के नीचे गाड़ी रुकवाई और पार्किंग में डलवा कर उन दोनों लड़कों को अपनी गन की नोक पर ऊपर 10वे माले पर ले गया…
अपने फ्लैट का ताला खोल उसने उन दोनों को अंदर धक्का दिया और एक बार फिर दोनों पर लात घूंसो की बारिश कर दी वह बार बार उन लोगों से अपने पीछे भेजे जाने वाले का नाम पूछता रहा…
.. पर वह दोनों भी एक नंबर के जब्बर थे चुप के चुप ही रहे… उसने भी फिर ज्यादा पूछताछ नहीं की और दोनों के चेहरे पर काले कपड़े डालकर उनके हाथ पैर बांधकर फ्लैट में एक बार फिर ताला डालकर जाने कहां निकल गया….
… पूरा दिन वह दोनों लड़के भूखे प्यासे वहां पड़े रहे आधी रात के वक्त वह वापस आया और उन दोनों को लेकर फिर नीचे चला गया… एक बार फिर उसने एक लड़के को चाबी देकर बाइक में चलाने के लिए सामने बैठाया और दूसरे को बीच में बैठा कर सबसे पीछे खुद बैठ गया और अपनी गन गाड़ी चलाने वाले के ऊपर तान दी इस बार फिर वह उन दोनों को ले कर उसी थाने में वापस आ गया….
उन दोनों ही लड़कों को गन की नोक पर उतार कर वो अंदर लेकर गया….थाने के अंदर जाते ही दोनों को एक-एक लात मारकर उसने गन अपनी जेब में डाल दी…. थाने में मौजूद सभी लोग उन तीनों ही लड़कों को अजीब नजरों से देख रहे थे ….
” ऐसे क्या घूर कर देख रहे हो ? कभी आदमी देखे नहीं क्या?”
उसकी गरजती आवाज सुन एक बार को पूरा थाना थर्रा गया…
हेड कांस्टेबल ने हिम्मत दिखाते हुए उसके सामने आकर उससे पूछ लिया…
” तुम कौन हो बे? और यह गधों को हांकते हुए यहां कहां चले आए? ये थाना हैं सर्कस नहीं !”
” ओके! तो यह दोनों तुम्हें जोकर और मैं तुम्हें रिंग मास्टर लग रहा हूं..|”
” साढ़े छह फूट का रिंग मास्टर.. ?” तभी एक दूसरे हवलदार ने चुटकी ली और जोर जोर से हँसने लगा…
उस लड़के ने अपनी जेब से अपना आई कार्ड निकाला और सामने टेबल पर पटक दिया… वहां बैठे हवलदार ने जैसे ही उस आई कार्ड को देखा वह खड़ा हुआ और उसने जोरदार सैल्यूट उसे मारा..
उसके ऐसा करते ही थाने के लगभग सभी लोग वहां भागते हुए चले आए और एक एक कर उस कार्ड को देखने लगे…
.. जैसे जैसे वो लोग कार्ड देखते जा रहे थे, उस आदमी को सैल्यूट मारते जा रहे थे… एक ने आगे बढ़कर उसके लिए उसके केबिन का दरवाजा खोल दिया… और वह बड़ी शान से अंदर की तरफ बढ़ गया जाते-जाते उसने उन दोनों लड़कों को अपने पीछे अंदर लाने कह गया…
अपनी कुर्सी में बैठने के बाद उसने वापस उन दोनों को देखा और कल से पूछता सवाल वापस दुहरा दिया…
” हां तो बोलो बेटा चंगू मंगू तुम्हारे बाप का नाम क्या है..?”
वह दोनों अब भी चुप खड़े थे और उन दोनों की चुप्पी अब उस तीसरे का गुस्सा भड़काने लगी थी…. उसने टेबल पर जोर से हाथ मारा और साथ खड़े हवलदार से पूछा…
” आसपास कहीं समोसा बनता है क्या..?
” बनता हैं ना हुज़ूर, यही पास में है छगन हलवाई ! क्या गजब के समोसे बनाता है, एक खाएंगे चार खाने का मन करेगा, और उसकी बनायीं लाल मिर्च और लहसुन की चटनी तो वाह ! ले आये.. ?
” ले आओ.. ! उसका ले आओ सुनकर वह दोनों लड़के एक दूसरे को हल्की मुस्कान के साथ देखने लगे उन दोनों को लगा कि वह उन्हें तोड़ नहीं पाया, लेकिन उसका अभी बाकी की बात कहना बाकी था…
” ले आओ समोसे हटाकर, उसका गरम कड़ाहा विथ गरम तेल !”
“कड़ाहे का क्या करेंगे साहब !”
“इन दोनों की उँगलियाँ तल कर खाऊंगा.. ! विथ लाल मिरिच और लहसुन की चटनी “
यह सुनते ही उन दोनों के चेहरे का रंग उड़ गया और वहीं खड़े हवलदार का मुहँ आश्चर्य से खुला रह गया… उसने सामने कुर्सी पर बैठे नए नवेले असिस्टेंट कमिश्नर की तरफ देखा…
“आप मांसाहारी हैं हुज़ूर ?”
” हम सर्वाहारी हैं, जब जैसी जरूरत होती है वैसा खाना खा लेते हैं |अच्छा सुनो वापस आते आते एक अच्छा बड़ा वाला चाकू भी लेकर आना छोटे-मोटे चाकू से तो उंगलियां कटेंगी नहीं, ठीक है बाबूराव ? यही नाम हैं ना तुम्हारा ?”
बिना कुछ बोले बस हां में सर हिला के वह तुरंत केबिन से बाहर भाग गया…
.. कुछ देर में ही थाने का हेड कॉन्स्टेबल उसी कॉन्स्टेबल के साथ वापस आया और उन्होंने एक बार फिर पूछा कि क्या साहब ने वाकई गरम कढ़ाह मंगवाया है और उसके हां कहते हैं यह लोग वापस चले गए ….
थोड़ी देर बाद ही थाना परिसर में एक तिपाई के ऊपर गर्म कड़ाहे में तेल खौलाया जा रहा था | और नए नवेले अभी अभी ज्वाइन किए हुए कमिश्नर साहब हाथ में बड़ा सा चाकू लेकर उन लड़कों की तरफ बढ़ रहे थे कि तभी उनमें से एक उनके पैरों पर गिर पड़ा…
” शहर के विधायक जी ने भेजा था हम लोगों को.. मायानगरी यूनिवर्सिटी का एक लड़का है, और एक लड़की जो जाली दस्तावेजों के सहारे मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम के लिए बैठे थे | असल में वह दोनों ही फर्जी निकले और और वह दोनों लड़का लड़की पुलिस की तरफ से भेजे गए लोग थे | और उनके सहारे पुलिस ने छापामार कार्यवाही करके उस पूरे गिरोह को एक बार में पकड़ लिया था | इसी बात पर विधायक साहब नाराज थे और वह उन दोनों बच्चों को मरवा देना चाहते थे…
” नाम क्या था उस लड़के और लड़की का?
” नाम नहीं पता, हमें बस जगह बताई गई थी कि, उस होटल की उस पार्टी में वह लड़का मिल जाएगा उसका फोटो भेजा गया था… आपने मेरा जो मोबाइल जब्त करके अपने पास रखा हुआ है, उसमें फोटो है | आप खुद देख लीजिए ! पीछे से हूबहू आपके जैसा ही लग रहा था ! ऐसी ही अनाप-शनाप लंबाई थी और ऐसे ही घुंघराले से बड़े बड़े बाल… बस आपको देखकर गलतफहमी हो गई और हम दोनों आपके पीछे चले आए | अम्मा कसम पता नहीं सुबह किसका मुंह देख कर उठे थे जो आपको गलती से पकड़ लिया… इस बार छोड़ दीजिए आगे से सच कह रहे हैं, ईमानदारी और सच्चाई का ही काम करेंगे, कोई गलत काम नहीं करेंगे हुजूर…
” पक्का सच बोल रहे हो ?”
“अम्मा की कसम खा कर बोल रहे हैं साहब!”
” ठीक है मैं भी अपनी अम्मा की कसम खाकर कहता हूं अगर आइंदा कभी मेरे हत्थे चढ़े तो सिर्फ उंगलियां नहीं पूरा हाथ काट के तल कर खा जाऊंगा वह भी बिना चटनी के…..
और वह एक और फेमस डायलॉग है ना पाप को जलाकर राख कर दूंगा… वह भी पसंद है मुझे और मेरी पर्सनालिटी पर सूट भी करता है तो याद रखना मैं पाप को जलाने से ज्यादा पापी को जलाने में यकीन करता हूं…. और मुझे यह सारे शब्द हैं ना, जलाना तलना काटना खाना बहुत पसंद है….”
इसके बाद उसने उन दोनों को थाने में डालने का हुक्म दिया, और एक दूसरे कॉन्स्टेबल को बुलाकर विधायक जी के घर पर फोन करके उन्हें थाने बुलाने को कह दिया…
” बाबूराव तुम मेरा चेहरा क्या देख रहे हो यार, बाहर वो कड़ाहा जल जल कर खाक हुआ जा रहा है, उसमें जाकर बढ़िया समोसे तलो, और गरमा गरम समोसे और चटनी लेकर आओ हमारे लिए…
सर्वाहारी है भाई अगर उंगलियां खा सकते हैं तो समोसे भी खा सकते हैं…!”
बाबूराव तुरंत समोसे की प्लेट लिए हाजिर हो गया…
” साहब एक बात पूछें वैसे आप हैं कहां से?”
” मैं फ़िलहाल बैंगलोर से आया हूं और नाम हैं अनिर….
….अनिर्वान भरद्वाज ! यहाँ आज ही कमिश्नर की पोस्ट पर ज्वाइन किया हैं… और एक बात मेरा काम करने का तरीका जरा हटके हैं.. लेकिन बहुत फ़िल्मी भी हूं मैं……
” जी साहब ! ” सर हिलाकर वो बाहर निकल गया..
एक लड़का उसी समय थाने भर के लिए चाय लेकर चला आया…… गुनगुनाते हुए वो आ ही रहा था कि उसने सबको ऐसे सतर खड़े देख पूछ लिया…..
” क्या हो गया आज थाने में सब को सांप क्यों सूंघ गया है..? किसी भूत को देख लिए क्या.. ?”
“भूतों के बाप को देखा हैं.. तुझे भी देखना हैं तो जा अंदर चाय दें आ.. !
“ये विराज सिंह किस बेवकूफ का नाम हैं.. !”
तभी अंदर से वापस उसकी आवाज़ गरजती हुई पुरे थाने को हिला गयी और बाबूराव वापस भाग कर अंदर चला गया…
” साहब वो यहाँ के मुख्यमंत्री राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला के छोटे भाई हैं… “
सामने बैठें अनिर्वान ने पूरी गोलाई में अपनी गर्दन घुमाई और विराज के नाम की फाइल उठा कर सामने टेबल पर पटक दी…
“अजातशत्रु सिंह बुंदेला !!! ” उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान चली आयी…
“आधे घंटे में इस विराज को मेरे सामने हाजिर करो.. !”
अनिर्वान का तुगलकी फरमान सुन बाबूराव आंख फाडे कुछ पल उसे देखता ही रह गया.. और फिर जी हुज़ूर बोल बाहर निकल गया …..
” बाप रे ! ये सनकी लगता हैं पुरे थाने को ले डूबेगा……
क्रमशः
aparna……

राजा आजाद शत्रु सिंह बुंदेला एक कालजयी किरदार
सिर्फ किरदार ही नहीं कई लोगों के दिमाग में चलता हुआ एक साक्षात स्वरूप …. एक ऐसा स्वरूप जो एक मां ने अपने बेटे में देखा, एक प्रेमिका ने अपनी प्रेमी में देखा, एक पत्नी ने अपने पति में देखा, एक बहन ने अपने भाई में देखा.
वह पुरुष जो किसी भी स्त्री के जीवन को संपूर्ण बनाने में सक्षम हो उसके जीवन को खुशियों से भर दे सम्मान से भरदे।
Nice ji
Aprajita ke character yaha bhi aa gye wah mza aa gya
जितनी बार पढ़ो इस कहानी के किरदारों को वो उतने ही दिल के करीब हो जाते हैं राजा की हुकुम और रानी के साहब 😘🥰❤️