अपराजिता -133

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अपराजिता -133

वीर ने जीप तेज़ी से गेंदा के पीछे घुमा दी.. गेंदा को अब तक समझ में नहीं आया था कि वीर की जीप उसका पीछा कर रही है, इसलिए वह अपनी सामान्य चाल से आगे बढ़ती जा रही थी लेकिन गांव कस्बे में अंधेरा होने के बाद लोग अपने अपने घरो में दुबकने लगते हैं..
रात इतनी नहीं बीती थी लेकिन लोग रास्ते पर से सिमटने लगे थे..

गेंदा फुर्ती से आगे बढ़ती जा रही थी..
आगे बढ़ कर वो एक संकरी सी गली में घुस गयी.. गली संकरी ज़रूर थी लेकिन जीप के जाने लायक रास्ता बना था..
वीर ने पुरे उत्साह से गाडी अंदर घुसा दी..
गेंदा का अब भी ध्यान नहीं था, वो अपने में मगन क्या क्या बनाएगी सोचती चली जा रही थी…

गली ख़त्म हुई और एक चौड़ा सुनसान रास्ता आ गया..
वो आगे बढ़ती जा रही थी और उसके पीछे वीर कि गाड़ी थी..
उस रास्ते पर एक तरफ लम्बा सा तालाब था..

दूर्वागंज का ये वही तालाब था जहां कुछ महीनो पहले तक दो सखियाँ अक्सर बैठ कर अपने सुख दुख साझा किया करती थी….
कुसुम और भावना को आज भी वो तालाब का किनारा, वो किनारे पर बनी सीढ़ियां याद किया करती थी…

उन रास्तो से होकर गेंदा आगे बढ़ती जा रही थी कि अँधेरे का फायदा उठा कर वीर ने गाड़ी तेज़ी से बढ़ाई और गेंदा के एकदम पास ले आया..
गाड़ी के करीब आते ही उसकी आवाज़ से वो घबरा गयी..
उसने चौंक कर पीछे देखा और उसी समय उसका हाथ पकड़ कर अनंत ने उसे गाड़ी के अंदर खींच लिया..

गेंदा के पैर अब भी ज़मीन पर थे, लेकिन उसकी बाँहों को पूरी तरह से अनंत ने अपनी गिरफ्त में ले रखा था.. वीर ने वैसे ही गाड़ी आगे बढ़ा दी..
गेंदा के पैर ज़मीन पर घिसटते चले जा रहे थे, उसी घिसटने में उसके पांव की चप्पलें वहीँ छूट गयी..

वीर गाड़ी बढ़ाता जा रहा था..

“अनंत बाबू ऊपर खींच लो लड़की को !”

वीर ने खीझ कर कहा, लेकिन अनंत के अंदर जलती आग को गेंदा की तकलीफ देख कर सुख मिल रहा था, शायद इसलिए वो उसे अधर में लटकाये हुए थे..
गेंदा जी जान से अनंत के हाथ से बचने कि कोशिश कर रही थी.. अपना सर इधर उधार घुमा कर खुद को इधर उधर कर वो छूटने की कोशिश  में लगी थी, तभी अनंत ने उसके चेहरे पर एक ज़ोर का तमाचा लगा दिया..!

चलती गाडी के साथ घिसटती चली जाती गेंदा स्तब्ध रह गयी…

वो साथ ही साथ बचाने के लिए गुहार भी लगाती जा रही थी, लेकिन उस बियाबान में कोई उसकी आवाज़ सुनने वाला ना था..

उसके तलुए छिलने लगे थे.. तलुओं के साथ ही पैर का बाकी हिस्सा जो जीप के खुरदुरे हिस्से पर बार बार पड़ रहा था पर खरोंचे आने लगी थी..
गेंदा खुद की जान और इज्जत बचाने जी जान से जुटी थी… उसने अपनी पूरी ताकत लगा कर ज़ोर से सरना के नाम की पुकार लगा दी..

उस वक्त अनंत का चेहरा गेंदा के चेहरे के करीब था, गेंदा के चीखते ही आवाज़ एकदम से अनंत के कान में बम सी फूटी और हुलस कर उसने गेंदा को चार पांच  तमाचे रसीद कर दिए..

“अरे मारने के लिए लड़की पकड़वाई है क्या अनंत भाई ?”

“नहीं, पकड़वाई तो और किसी काम के लिए है, लेकिन पहले अपना गुस्सा तो ठंडा कर ले.. साली चिल्ला बहुत रही है… !”

अनंत ने वही पड़े एक रुमाल को उठा कर गेंदा के मुहं में ठूंस दिया..
और उसके सर को पीछे से पकड़ कर जीप के किनारे पर खींच कर दे मारा..
माथे से खून की धार बह निकली..

पैर पर भी जगह जगह से खून बहने लगा था.. उसका गुलाबी पजामा रक्तरंजित होता जा रहा था… शरीर में जगह जगह चोट और खरोंच के निशान पड़ते जा रहे थे..

गेंदा थकने लगी थी.. वो चाह कर भी कुछ बोल नहीं पा रही थी..

एक लम्बा रास्ता तय करने के बाद एक सुनसान सी आधी बनी इमारत के सामने वीर ने झटके से गाड़ी रोकी और उसी के साथ अनंत ने गेंदा के बांध रखें हाथो को खोल दिया… वो तेज़ी से पलट कर रेत के ढेर पर गिर पड़ी..
माथे से बहते खून में रेत लिपट कर पूरा चेहरा, धूल और  रेत से रंग गयी..

उसका कष्ट अपार था!!
और स्थिति पीड़ादायक !!
दोनों पैरो के तलवो से खून रिस रहा था, चेहरे पर अनंत की बर्बरता के प्रमाण उभर आये थे… उसकी हालत उस भयत्रस्त हिरणी सी हो गयी थी, जिसे शिकार के लिए चारों तरफ से खूंखार लकड़बग्घों ने घेर लिया हो..

लेकिन अब भी खुद की सुरक्षा उसके लिए सर्वोपरी थी..

जीप से एक एक कर सारे लड़के उतर गए..

“करना क्या है भइया जी इसका ?”..

वीर ने अनंत से पूछा

“हमसे ऐसे पूछ रहे, जैसे आज से पहले कभी तुमने लड़की नहीं उठायी ?”

“सच बोले तो नहीं उठायी.. अम्मा कसम !”

वीर ने जवाब दिया और तभी उसका एक दोस्त बोल पड़ा..

“वीर तो मनमौजी है, कर भी लेता एक आध लड़की अगवा..
लेकिन इसके दोनों बड़े भाई चंट चांडाल है। अगर उन दोनों को पता चल गया ना तो इसके साथ साथ हम सब को भी मार मार कर अधमरा कर देंगे !”

“बेवकूफ है साले दोनों.. वो बड़ा वाला तो पूरा पागल है.. पता नहीं खुद को समझता क्या है बे ? आज के ज़माने में कौन इसके जैसा लड़का पैदा होता है भला ? और वो दूसरा यज्ञ, वो अजीब ही सनकी है !
लेकिन एक बात है बेवक़ूफ दोनो गज़ब के हैं…
तुमको पता है हम यज्ञ की गाडी का ब्रेक फेल कर दिए और ये सच जानने के बाद भी वो तुम्हारा बेवकूफ भाई हमको छोड़ दिया..।
बोलता है दफा हो जाओ यहां से, आज के बाद अपना चेहरा मत दिखाना।
हमको और क्या चाहिए था, हम निकल गए। लेकिन मन ही मन हम यह सोच रहे थे कि कितना बड़ा बैझङ है, जिसने इसकी गाड़ी का ब्रेक फेल करके उसको मारने की कोशिश की, उसी को माफ करके छोड़ दिया। साला इतना भी बेवकूफ नहीं होना चाहिए।”

वीर के सामने अनंत ने सारी बातें कबूल कर ली और उसकी बातें सुनते हुए वीर ने अपना माथा पकड़ लिया।

” पगला गए है आप अनंत बाबू, बेवकूफ यज्ञ भैया नहीं बेवकूफ आप है।
    पहले तो अगर आपने यज्ञ भैया की गाड़ी के ब्रेक सच में फेल किए हैं, तो हम भी आगे किसी काम में आपका साथ नहीं देंगे। और दूसरी बात यह यज्ञ भैया और अखंड भैया में बहुत सारी समानताएं है, देखने सुनने में भी दोनों एक जैसे लगते हैं। लेकिन स्वभाव में एक यहीं पर अंतर आ जाता है कि अखंड भैया अपना खुद का खून करने वाले आदमी को भी माफी देकर छोड़ देंगे, लेकिन यज्ञ भैया छोटी से छोटी गलती को भी सुधार के रहते हैं। वह माफ नहीं करते।

अगर उन्होंने आपको माफ करके घर से भेजा है, तो आप समझ जाइए कि वह आपके पीछे बने हुए हैं। हम आपके साथ आकर गलत फंस गए।
लड़कों चलो जीप में बैठो, निकलो यहां से।

यज्ञ भैया या उनके आदमी आसपास ही कहीं होंगे।”

वीर अपनी बात खत्म कर तेजी से जीप की तरफ बढ़ने लगा.. अनंत ने उसकी कॉलर पड़कर उसे खींच कर रोक लिया!

” पगला गए हो क्या? यहां सुनसान रास्ते में हमें लाकर छोड़ दिया। और हमें छोड़कर यहां से चले जा रहे हो?
तुम क्या बोल रहे हो बे, यज्ञ ने हमें माफ नहीं किया? हमारे पीछे खुद आ गया? अगर आया होता तो कहीं तो नजर आता? अब तक छुपा थोड़ी बैठा रहता?
और फिर क्या करने के लिए हमारा पीछा करेगा, बताओ जरा?”

“यही देखने के लिए कि अब आप क्या करने वाले हैं? यज्ञ भैया के दिमाग को कम मत आंकिये, आप फंस चुके हैं। हम जा रहे हैं यहां से वापस।”

” वीर दो तमाचा लगाएंगे ना चुपचाप गाड़ी से नीचे उतर जाओगे तुम। समझे ?
क्या हो गया है तुमको, यहां तक तुम हमको लेकर आए हो। वापस भी लेकर जाना तुम्हारा काम।”

वीर और अनंत की इस उलझी हुई बातों के बीच गेंदा ने धीरे से अपने आप को समेटा और जमीन पर खिसकती हुई उन लोगों से थोड़ा दूर चली गई। वह उठकर तेजी से सरपट विपरीत दिशा में भागने लगी। लेकिन पैर में लगे जख्म उसे भागने नहीं दे रहे थे। वह कोई आधी बनी हुई इमारत थी, जिसमें बनाने का सारा सामान बाहर पड़ा था।

ईट सरिया रेत,गिट्टी उसके पैरों में चुभ-चुभ कर उसकी गति को कम किये दे रहे थे। जैसे ही उसके भागने की आहट हुई, आपस में उलझे अनंत और वीर का ध्यान उस तरफ चला गया।

अनंत ने वीर के दोस्तों को जोर से चिल्ला कर गेंदा के पीछे भागने को कहा।

” ए जाओ रे, पकड़ के लाओ, उस साली ने हम लोगों का चेहरा देख लिया है, खाया पिया कुछ नहीं गिलास तोड़ा बारह आना!”

वीर के दोस्त यह सुनकर गेंदा के पीछे भाग खड़े हुए। उन लड़कों ने जूते पहन रखे थे, गेंदा नंगे पैरों भाग रही थी।

यह कैसे संभव था कि वह पकड़ में नहीं आती?
उन दोनों लड़कों ने दो बार छलांग सी लगाई और उस तक पहुंच गए। उसके बालों को पड़कर खींचते हुए वह लोग अनंत और वीर तक ले आए।

गेंदा का चेहरा खून से हुलस गया था। एक टिपटिपाती  ऊंची सी स्ट्रीट लाइट जल बुझ, जल बुझ हो रही थी।

गेंदा को जब वह लोग वहां लेकर आए, उस वक्त वह बत्ती जल गई। उस रोशनी में वीर ने ध्यान से गेंदा को देखा और उसे एक पुरानी बात याद आ गई। कभी किसी रोज गेंदा से उसकी रास्ते पर कोई झड़प हुई थी..

गेंदा का चेहरा कुम्हला गया था… लेकिन बावजूद वीर वो चेहरा नहीं भूल सकता था..
कुछ महीनो पहले तक इसी एक चेहरे को देखने वो दूर्वागंज के चक्कर लगाया करता था..
एक बार उसने गेंदा को रोक भी लिया.. उसे लगा उसके रुतबे और पैसे के सामने कोई भी लड़की बिछ जाएगी, लेकिन गेंदा वैसी नहीं थी..।
उसे स्वाभिमान की रूखी रोटी मंजूर थी, लेकिन वीर का प्रस्ताव मंजूर ना था।

लेकिन वीर भी अड़ियल बैल बुद्धि था। किसी औरत को सहेजना उसके बस के बाहर की बात थी।
उसके लिए बात सिर्फ धमकी चमकी पर आकर ही खत्म हो जाती थी..

प्रेम को प्रेम ही से पाया जा सकता है, ये उसने जाना ही नहीं था।

इसलिए गेंदा को भी धमकाने लगा था..
ज़बान को शहद में भिगाने की जगह उसने अपने चाकू कट्टे को ग्रीस किया और फल ये मिला कि गेंदा उसके मुहं पर उसका प्रस्ताव नकार गयी।

उस दिन के बाद से बेवकूफ वीर, गेंदा से जला भुना बैठा था।
हालाँकि उसके दिमाग में गेंदा से बदला लेने वाली कोई बात नहीं थी,  लेकिन आज इत्तेफाक से वो उसके सामने पड़ गयी थी..

“ऐसे क्या देख रहे हो वीर ?”

“आपको और कोई नहीं मिली थी, पकड़ के लाने को ?”

“काहे.. इसमें क्या खराबी है ?”

“हद दर्जे की घमंडन है ये, एक दिन तो लगा था थप्पड़ मार के सारा घमंड निकाल फेंके, लेकिन फिर रुक गए हम !”

“तो आज अपनी हसरत पूरी कर लो.. यहाँ कौन है हम सब के अलावा ?”

वीर गेंदा को ही घूर रहा था, उसके मुहं में ठूंसा कपङा उसे कुछ बोलने नहीं दे रहा था, अनंत ने उसके हाथो को पीछे बांध दिया था..

वो बेबस सी खुद को इधर उधर कर उन दरिंदो से बचने का प्रयास कर रही थी..
वीर ने एक सिगरेट निकाली और जला कर अपने होंठो से लगा ली..

वो लगातार गेंदा को घूर रहा था..
वो उसे घूरते हुए उस तक पहुंचा और अपने होंठो से सिगरेट निकाल कर उसकी गर्दन पर छुआ दी..
वो तिलमिला कर रह गयी..

“बहुत घमंड है ना अपने चेहरे का ?”

भयभीत दृष्टी से वो वीर को देख रही थी..
वीर ने उसके चेहरे पर दो एक जगह वही सिगरेट छुआ दी..

“चल अब देखता हूँ तेरा घमंड कैसे नहीं टूटता.. !”

वीर उसे अपने साथ खींच कर अंदर ले जाने लगा..
रेत के छोटे छोटे टीले, गिट्टियां कंकड़ पत्थर पैरो में चुभ चुभ कर उसका चलना मुहाल किये थे.. लगातार चलती गाड़ी से रगड़े जाने के कारण सलवार जगह जगह से फट गयी थी और पूरे पैरों में जख्म उभर आये थे..

थोड़ा आगे बढ़ कर उसने चलने में अशक्त होती गेंदा को ज़ोर से आगे धकेला और वो सामने की तरफ गिर पड़ी.. उसके कुर्ते का एक हिस्सा फ़ट कर वीर के हाथ में रह गया…

उसी समय अनंत वहाँ चला आया..
उसने गेंदा पर हाथ डाला और बाक़ी के कपड़े को खींचने जा रहा था कि उसके हाथ को गेंदा ने दोनों हाथों से पकड़ा और मुहं में लेकर ज़ोर से काट दिया..

अनंत बिलबिला उठा…
गेंदा को एक भद्दी सी गाली देकर उसने मुट्ठी में रेत उठा कर उसके चेहरे पर फेंक दी.. आँखों में धूल जाने से वो और परेशान हो गयी और अनंत गेंदा पर टूट पड़ा..

***

रेशम उठकर अंदर चली गई, और अथर्व मुस्कुरा कर मानव के सामने बैठ गया।

दोनों लोग आपस में बातों में लग गए..

रेशम रसोई में काम कर रही थी, लेकिन उसके कान यहीं लगे थे। उसे यही लग रहा था कि आखिर मानव कैसे बात शुरू करेगा, ऐसा क्या हो सकता है कि मानव अथर्व को समझा सके कि उसके साथ जो हुआ है उसमे उसका कोई कुसूर नहीं था.।

वो सोचती हुई नाश्ता बनाती रही..

“क्या हुआ रेशु.. मैं आऊँ क्या मदद करने ?”

“नहीं मानव.. मैं कर लूंगी !”

“आपकी बहन को सच में कुछ आता भी है, या यूँ ही बस उल्लू बनाती रहती ?”
अथर्व ने मजाक में कहा और मानव और अथर्व हंस पड़े…
अथर्व को ऐसे हँसते बोलते देख कर रेशम की साँस में साँस आ गयी थी। लेकिन मन ही मन एक डर मौजूद था कि हो सकता है ये तूफान से पहले वाली शांति हो…

आज छुट्टी का दिन था, इसलिए उसे अस्पताल नहीं जाना था.. अब अथर्व की भी छुट्टियां ख़त्म होने को थी.. वो बाहर से कितनी भी शांत नजर आये उसके मन में हाहाकार मचा हुआ था..
उसका अतीत उसका पीछा ही नहीं छोड़ रहा था। और एक के बाद एक वो इसी दुविधा में घिरी जा रही थी क्या करें..?

वो अपना काम करती जा रही थी कि अथर्व रसोई में चला आया..

“कुछ मदद कर दूँ क्या ?”

उसके ऐसे अचानक आने से वो चिहुंक गयी..

“नहीं… कर लूंगी मैं !”

अथर्व ने देखा एक तरफ कड़ाही में सब्ज़ी बन चुकी थी, दूसरी तरफ रेशम पूड़ियाँ निकाल रही थी.. अथर्व ने आगे बढ़ कर वहीँ धुले रखें फल उठा कर काटना शुरू कर दिया..
फलों को काट कर वो बाहर ले गया.. उसके साथ ही ट्रे में पानी के गिलास भी ले गया..

वो रेशम की मदद करने तो आ गया था, लेकिन उसने एक बार भी रेशम की तरफ देखा नहीं था..
रेशम को समझ में आ गया कि अथर्व उससे वाकई नाराज़ है..।

मानव के आ जाने से वो भले ही उपरी तौर पर सामान्य दिखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वो सामान्य हुआ नहीं है..
उसके मन में कुछ तो बात चल रही है..।

वो क्या है, इसे कैसे जानू, इसी उहापोह में रेशम लगी थी..
जब मन स्थिर ना हो तो कोई काम सही नहीं होता..
जैसे तैसे नाश्ता निकाल कर वो बाहर लेकर आयी और तभी उसका फ़ोन बजने लगा..

उसकी स्टाफ नर्स का फ़ोन था..

“हेलो ग्रेसी सिस्टर, बोलिये ?”

“मैडम… एक केस है, आप आ सकती है क्या ?”

“क्या केस है ? मुझे बताएं मैं आपको मेडिसिन बता देती हूँ.. आप दिलवा दीजियेगा !”

“मैडम एमएलसी (मेडिको लीगल केस ) है!”

“एमएलसी ? क्या केस है ? एबॉर्शन ?”

“नहीं मैम.. एक नजर में रेप लग रहा ? बाक़ी मालूम नहीं.. जाँच करनी पड़ेगी.. पुलिस को भी इन्फॉर्म करना पड़ेगा.. आप आ जाइये, फिर कर देते हैं.. आप आइये उसके बाद यहाँ के सरपंच को भी बुलाना पड़ेगा !”

रेप सुनते ही रेशम का सर घूम गया, ऐसे केसेस से उसे वैसे भी बहुत डर लगता था..

वो अपना सर पकड़ कर वहीँ बैठ गयी..

उसी समय अथर्व वहां चला आया, उसे ऐसे बैठे देख वो तुरंत रेशम तक पहुँच गया..

“क्या हुआ.. रेशु ? किसका फ़ोन था ? रेशु.. तुम ठीक तो हो ?”

रेशम ने आंखे उठायी उसकी पलके भीगी हुई थी..

अथर्व की आवाज़ सुन कर मानव भी भाग कर अंदर चला आया..

“क्या हुआ रेशु ?”

खुद को संभाल कर रेशम खड़ी हुई..

“मुझे अभी तुरंत अस्पताल जाना होगा.. !”

“ओह क्या हुआ ?”
.
“बताती हूँ !”

क्रमशः

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Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago

Very Imotional and critical n typical condition in this part

Kirti Saxena
Kirti Saxena
1 year ago

हे भगवान ये गेंदा किन राक्षसों के बीच फंस गई बस कैसे भी करके गेंदा इन पापियों के चंगुल से बच जाए 🙏🙏बहुत ही इमोशनल भाग है आज का।

Neeta
Neeta
1 year ago

🙏🙏🙏👌

Meera
Meera
1 year ago

Ohh , ye गेंदा के साथ क्या हो गया , कुछ गलत होने से पहले ही वहा यज्ञ पॉच गया हो महादेव ,🙏🙏
रेशू को ऐसे घबराते देख और वहा अखंड और यज्ञ भी मौजूद हो , ये गेंदा का केस , ये सब एक साथ , क्या ही होगा dr साहिबा !!

Deepa verma
Deepa verma
1 year ago

अरे नहीं अनिरुद्ध वासुकी के होते हुए गेंदा के साथ ऐसा कैसे हो सकता है।उस नालायक अनंत को तो मौत की सजा मिलनी चाहिए।कितनी विकट परिस्थिती में फंस गई बेचारी गेंदा।

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

आज का भाग बहुत ज्यादा इमोशनल था, अनंत और वीर दोनों नशेड़ी गेंदा के पीछे पड़ गए और उसे टॉर्चर कर रहे पर ना जाने क्यों मन मानने को तैयार नहीं कि गेंदा के साथ वो रेप कर सकेंगे,ये विश्वास है मुझे आप पर कि किसी बेकसूर मासूम के साथ ऐसी ज़्यादती तो नहीं होने देंगी बाकी देखते है अगले भाग में 🙏🏻, लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻।

Last edited 1 year ago by Manu Verma
Raniya Memon
Raniya Memon
1 year ago

Kahi ye genda to nahi….😳

Ritu Jain
Ritu Jain
1 year ago

Ohh no ek aurat ko insaan kyun nahi samjhte yeh rape karne wale itni barbarta kaha se aa jati hai en logo mein ek aurat ke ander janam lekar ek aurat ka cheer haran karne wale papiyon ka anth bahut bura hota hai.

Shalini Jain
Shalini Jain
1 year ago

Aaj kya tha…samajh nahi aaya..pahele aapne likha yagya ke aadmi anant ke peche Lage huye hai yadi aisa tha to veer aur anant itna bada kaand kaise kar diya 🤔🤔

Mandeep kaur
Mandeep kaur
1 year ago

Outstanding part🌹👌🌹🌹