अपराजिता -132

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अपराजिता -132

शाम में राजेंद्र घर आया, तब तक भावना अपनी नयी किताबों को सलीके से सजा चुकी थी..
उसके लिए मेडिकल एंट्रेंस की सारी ज़रूरी किताबे वो दोनों साथ जाकर ला चुके थे..
राजेंद्र के आते ही वो कमरे से बाहर निकल आयी..

भावना को देख हल्के से मुस्कुरा कर राजेंद्र अपने कमरे में चला गया, उसके फ्रेश होकर वापस आने तक में भावना ने चाय बना ली..
चाय का कप हाथ में पकडे राजेंद्र ने एक घूंट भरी और अपने दूसरे हाथ में थाम रखा एक कागज़ भावना की तरफ बढ़ा दिया…

“ये क्या है ?”

“देख लो !”

भावना ने उलट  पुलट कर देखा वो किसी कोचिंग का फॉर्म लग रहा था..

वो आंखे फाडे राजेंद्र को देखने लगी..

“यहाँ शहर की सबसे अच्छी कोचिंग है अर्जुना, वहाँ के दाखिले का फॉर्म है.. भर दो तो मैं कल जमा कर आऊंगा !”

“लेकिन इसकी तो फीस लगेगी ना ?”

“हाँ लगेगी, तो क्या करना चाहिए ?” राजेंद्र ने भावना को देखते हुए कहा और भावना कुछ बोल नहीं पायी..

“अब अपनी पत्नी के लिए इतना तो कर ही सकता हूँ, और अगर ये तुम्हे एहसान लग रहा है तो ये सारा खर्च अपने हिसाब में लिख कर रख लो, जब डॉक्टर बन जाओगी तब सब सूद समेट वापस कर देना !”

राजेंद्र इतना कह कर हंस पड़ा, वो भी मुस्कुरा उठी..

चाय ख़त्म करने के बाद भावना ने राजेंद्र की मदद से  फॉर्म भर दिया..
घर से ज़रा दूर थी कोचिंग, लेकिन राजेंद्र ने उसे रास्ता समझा दिया..

“अच्छा चलो, अभी एक बार साथ ले चलता हूँ, तुम्हे रास्ता समझ आ जायेगा.. फिर अकेले जा पाओगी.. तुम्हारे लिए एक रिक्शा बाँध दूंगा !”

भावना बस एक के बाद इन सारी सहायताओ के नीचे डूबती चली जा रही थी..

“जाओ कपड़े बदल कर आ जाओ.. फिर चलते हैं !”

राजेंद्र बाहर बैठा उस फॉर्म को देखता रहा और कुछ ही  मिनट में भावना तैयार हो कर आ गयी..

दोनों राजेंद्र की बाइक पर निकल गए..
कुछ दो मोड पार करने के बाद मुख्य मार्ग से थोड़ा आगे बढ़ने पर कोचिंग इंस्टीट्यूट दिखाई देने लगी..
भावना को वहाँ अंदर ले जाकर उसने वहाँ मौजूद स्टाफ से मिलवा कर उसका परिचय दिया और फॉर्म जमा करवा दिया….

उसके बाद वो लोग वहाँ से निकल गए..!!

“भावना खाना बना लिया था क्या ?”

“नहीं,.. क्यों ?”

“फिर ठीक है, आज सोच रहा दूर्वागंज चलते हैं, सरना को भी बुला लेंगे… खाना यहीं से पैक करवा लेते हैं.. बहुत दिन से सरना से मुलाकात नहीं हुई !”

“ठीक है !”

राजेंद्र ने सरना को फ़ोन मिला लिया…

“भाई कहाँ व्यस्त है आजकल, सरना ?”

“अरे डॉक्टर साहब.. तुम बताओ क्या हालचाल है ?”

“आ रहा हूँ गांव, आ जा घर, फिर साथ में खाना खाते हैं..!”

“ठीक है गेंदा को बता देता हूँ, घर साफ सुथरा कर खाना भी बना लेगी !”

“हाँ गेंदा को बुला ले लेकिन खाना यही से लेकर आऊंगा !”

“अरे नहीं.. कहाँ बाहर का खाएंगे? बहुत दिन से गेंदा के हाथ की तीखी लहसन की चटनी और बेसन की रोटी नहीं खायी.. उसे बोल रहा हूँ, तुम दोनों बस आ जाओ !”

“अच्छा ठीक है !”

राजेंद्र ने फ़ोन रख दिया..
सरना फ़ोन रख कर अपनी गाड़ी उठाये गेंदा के घर पहुँच गया… राजेंद्र आ रहा है ये सुन कर गेंदा भी खुश हो गयी..!

“हम थोड़ी साग भाजी ले आते हैं, आप घर चल कर बैठिये !” कह कर गेंदा ख़ुशी में झोला उठाये बाहर निकल गयी..

सरना भी राजेंद्र के घर की तरफ निकल गया.. बहुत दिनों से घर बंद था, तो भावना और राजेंद्र के आने के पहले उसे घर साफ सुथरा कर बैठने लायक बनाना था.. घर की चाबी सरना और गेंदा के पास ही रहती थी..
सरना ने घर खोला और अंदर दाखिल हो गया!

घर ज्यादा गन्दा भी नहीं था, वो फटाफट सफाई में लग गया..!

गेंदा घूम घूम कर राजेंद्र की पसंद की सब्जियां खरीदने लगी!
राजेंद्र को तो उसके हाथ का बना मसाला मुर्ग पसंद था, लेकिन भावना नहीं खाती थी… और जब से भावना आयी थी, राजेंद्र ने भी शायद ही खाया हो..
वो साग भाजियों पर नजर मरने लगी.. उसकी नजर नदरू पर अटक गयी, वो उन्हेँ बहुत अच्छे से बनाती थी.. नदरू के पकौड़े भी राजेंद्र को पसंद थे, इसलिए उसने राजेंद्र की पसंद का साग, गोभी, नदरू, प्याज टमाटर और मिर्चे खरीदी और दोनों हाथ में झोले उठाये ख़ुशी ख़ुशी घर की तरफ मुड़ गयी..

******

अनंत को वीर ने अपनी गाड़ी में बैठा लिया..

दोनों एक जैसे शैतान साथ मिल गए थे।

वह लोग आगे बढ़ रहे थे कि उसी समय अपने दोनों हाथों में ढेर सारा सामान लेकर चलती हुई गेंदा रास्ता पार करने को हुई, और अचानक से जीप उसके सामने आ गयी..!

उसके हाथ का सारा सामान ज़मीन पर गिर गया.. जीप की हेड लाइट के आँखों में पड़ने से उसने अपना हाथ चेहरे पर रख लिया..

“ये कौन लड़की है ?” वीर ने कहा और पीछे बैठे उसके दोस्त झांक कर देखने लगे..

अनंत गेंदा को घूर रहा था…
गेंदा रास्ते पर गिरा अपना सामान समेटने लगी कि  अनंत कूद कर उसके पास पहुँच गया..

“हम भी मदद कर दे ?” उसने लटपटी सी आवाज़ में कहा और गेंदा ने उसे घूर कर देखने के बाद मुहं फेर लिया..
वो तेज़ी से हाथ चलाती अपना सामान समेटने लगी.. और अनंत ने उसका हाथ पकड़ लिया..

“चलो ना, हमारे साथ चलो.. तुम्हे तुम्हारे सामान के साथ तुम्हारे घर छोड़ देंगे !”

गेंदा ने अनंत की तरफ देखा और उसके मुहं पर एक तमाचा रसीद किया और अपने झोले उठा कर वहाँ से तेज़ी से चलती हुई निकल गयी..

“साली इसकी हिम्मत कैसे हुई, मुझे मारने की, चल वीर इसका पीछा कर !”

अनंत गाडी में बैठ गया, और वीर ने गाडी गेंदा के पीछे भगा दी…

और तभी उन लोगो से ज़रा सी दूर पर खड़े दो लड़को ने अपनी बाइक वीर की जीप के पीछे लगा दी..
उनमे से पीछे बैठे लड़के ने अपनी जेब से फ़ोन निकाला और किसी को फ़ोन करने लगा..

***

अनंत जब घर से निकला उसके बाद यज्ञ उसके पीछे चलता हुआ बाहर तक चला आया..

“भैया जी.. एक बात कहें ?” मंतोष मिनमिनाया

“जानते हैं क्या बोलना चाह्ते हो.. यही ना कि इतने बड़े गुनाह के बाद उसे यूँ ही क्यों छोड़ दिया ?”

मंतोष और प्रकाश ने हाँ में एक साथ गर्दन हिला दी..

“क्यूंकि हम जानते हैं ये सांप है.. जिस तरीके से माफ़ी मांग कर गया है, ये बाहर जाकर कुछ न कुछ कांड करेगा ही। इसलिए गांव के ही दो लड़को को उसके पीछे लगाने के लिए फ़ोन कर दिया है..
अब वो दोनों उसकी हरकत पर नजर बनाये हुए हैं.. ! और जैसे ही वो हमें या भैया को नुकसान पहुँचाने वाला होगा, हमें तुरंत मालूम चल जायेगा और इस बार उसे रंगे हाथो पकड़ कर पुलिस के हवाले कर देंगे..
हमारी विडिओ रिकॉर्डिंग भी उसके खिलाफ काम कर जाएगी..
मंतोष समझा करो बाबू, वो हमारा रिश्तेदार भी तो है, अगर उसके सीसीटीवी काण्ड के बाद उसे पुलिस के हवाले कर देते ना, तो हमारे खुद के घर के लोग उसके आंसू देख उसे माफ़ कर देते और पुलिस को भी चलता कर देते, इसलिए उसे जाने दिया..।

हम जानते है वो शांति से बैठने वालों में से नहीं है.. !
उसे पुलिस के हवाले तो करना ही है, लेकिन उसके हाथ पैर पूरी तरह से तोड़ कर, उसे अपंग बना कर जिससे आइंदा कभी भी गलत करने से पहले लाख बार सोचे.. !”

“मान गए भैया जी.. हम तो सोच रहे थे कैसे आपने उस निर्लज्ज पापी को जाने दे दिया.. !”

“ऐसे कैसे हमसे बच कर निकलेगा.. यज्ञ सिंह परिहार अखंड सिंह परिहार नहीं है, जो अपने साथ गलत करने वाले को माफ़ कर दे.. यज्ञ अपने साथ गलत करने वाले का भी पूरा हिसाब रखता है, और वक्त आने पर ब्याज के साथ उसे वापस कर जाता है !”

मंतोष और प्रकाश के चेहरे पर संतुष्टि के भाव नजर आने लगे, दोनों वापस अपने काम पर लग गए और यज्ञ अपने उन लड़को को फ़ोन करने में लग गया..

कुछ देर बाद ही अंदर से प्रकाश उसे बुलाने चला आया..

“भैया जी भाभी आपको अंदर बुला रही हैं !”

यज्ञ ने हामी भरी और अंदर चला गया.. लेकिन वो ऊपर जाता उसके पहले नीचे आंगन में बैठे अखंड ने उसे अपने पास बैठा लिया..
वो उससे किसी ज़मीन के बारे में पूछताछ करने लगा, लेकिन यज्ञ का ध्यान ऊपर छत से झांकती कुसुम पर था..
कुसुम यज्ञ से सारी जानकारी लेना चाहती थी, उसे बाहर क्या हुआ कुछ मालूम ना था। वो जानना चाहती थी अनंत के साथ ऐसा क्या हुआ कि वो अचानक चला गया, लेकिन यज्ञ को मौका ही नहीं मिल रहा था कि वो कुसुम से मिल कर उसे सब बता सके।

वो अखंड से बातों के दौरान उसकी नजर बचा बचा कर ऊपर देख लेता और ऊपर से झांकती कुसुम उसे इशारा कर ऊपर बुलाने लगती..

जब कुसुम ने देखा यज्ञ को ऊपर आने में दिक़्क़त आ रही है, तब उसने उसे छेड़ना शुरू कर दिया..
पहले तो उटपटांग मुहं बना बना कर छेड़ा, फिर वहीँ ऊपर से उसे फ़्लाइंग किस देने लगी..

यज्ञ ने जैसे ही ऐसा होते देखा वो सतर बैठ अखंड की तरफ देखने लगा..

और बड़े ध्यान से अखंड की बात सुनने लगा…।
अब उसने ऊपर देखना ही छोड़ दिया, जैसे ही कुसुम का इस बात पर ध्यान गया कि यज्ञ ऊपर नहीं देख रहा, वो भी अंदर कमरे में चली गयी..
वो अलमारी में अपने कपड़े रखने लगी..

कपड़े तह करते हुए उसके दिमाग में कोई गीत चल रहा था, वो उसे गुनगुनाने लगी और काम पर लग गयी..

कभी कभी कुछ तो, कहो पिया हमसे
ए, कम-से-कम आज तो खुलके मिलो ज़रा हमसे
है रात अपनी, जो तुम हो अपने,
किसी का फिर हमें डर क्या श, श, श, श, श, श
बाहों में चले आओ…

और तभी पीछे से आये यज्ञ ने उसे अपनी बाँहों में जकङ लिया..

“अरे… आप ?”

“और कौन होगा, हमारे कमरे में ?”

“छोड़िये हमें, कोई देख लेगा !”

“दरवाज़ा बंद कर चुके हैं हम !”

“छि.. फिर तो और ख़राब बात है, घर वाले क्या सोचेंगे ?”

“यही कि नया शादीशुदा जोड़ा है.. और फिर इशारे तो आप ही कर रही थी.. !”

“वो तो बस बाहर क्या घटा वो जानने के लिए.. हमारा और कोई इरादा नहीं था !”

“अच्छा तो कुसुम कुमारी जी गॉसिप्स जानना चाहती है ?”

“हाँ जी, सही जाना आपने !”

“तो बाक़ी सब जो जाना गलत था ?”

“हमें क्या पता आपने और क्या सोच लिया? फ़िलहाल तो अनंत बाबू को क्या घुट्टी पिलाई आपने, जो वो सर पर पैर रख कर भागे हैं ?”..

“अरे कुछ नहीं.. हम अब भी जानते हैं वो अपने घर नहीं गया होगा, यहीं कहीं भटकता हुआ कोई नया प्लान बना रहा होगा। उस पर तो नजर रखने लड़को को भी भेज दिए हैं.. !”

“हमें तो यक़ीन नहीं आता कि ये जंतु आपके परिवार में पैदा हुआ है?” मजाक में कुसुम ने अपने मन की बात कह दी और यज्ञ ज़रा गंभीर हो गया..

“ये बात सच है कुसुम !”

“क्या ?”

“अनंत को हमारे फूफा जी ने गोद लिया था.. उनके यहाँ एक के बाद एक चार लड़कियाँ पैदा हो गयी.. पुरानी विचारधारा के कारण वो चाहते थे, उनका वंश चलाने वाला एक लड़का भी हो जाये।  लेकिन लड़का हो नहीं रहा था, तब उन्होंने अपनी जान पहचान में से किसी का बच्चा गोद ले लिया था..
अम्मा बताती है अनंत को बहुत ज्यादा लाड़प्यार से रखा गया था। चार बहनो के ऊपर ये आया था, इसलिए सब इसे राजकुमार सा रखते आये थे.. और बस उसी हद से ज्यादा लाड़ ने इसे इस कदर बिगाड़ दिया.. !”

“चलो अनंत बाबू के बिगड़ने की कैफियत तो दे दी आप जी ने.. लेकिन आपके घर के कुलदीपक को क्या हो गया है..?
वीर बाबू तो कहीं किसी तरफ से आपके और बड़े भाई साहब के भाई नहीं लगते ? उन्हेँ इतना क्यों बिगड़ने दिया गया ?”

“हाँ अब इस बारे में तो हम कुछ नहीं कह सकते ? वैसे क्या उसने तुम्हारे साथ कोई बदतमीजी की है ?”

“नहीं.. अब तक तो नहीं की, लेकिन भरोसा भी नहीं है, कब बदतमीजी पर उतर आये !”

“हम्म.. तुम्हारे साथ अगर बदतमीजी करता है, तो बताना। हम उसका नाक मुहं तोड़ देंगे.. !”

“नाक मुहं तोड़ने कि नौबत नहीं आएगी,क्यूंकि अब इतना तो हम भी जान गए हैं कि वो अनंत बाबू जितने बद्तमीज नहीं हो सकते.. !”

कुसुम हंस कर यज्ञ की बाँहों में सिमट आयी…

उसी वक्त उसके फ़ोन में उन लड़को में से एक का फ़ोन आने लगा..
यज्ञ ने अनंत की खबर होगी, सोच कर फ़ोन उठा लिया !

****

रात कितनी भी गहरी हो सुबह का उजाला उसमे रंग भर ही देता है..

सुबह रेशम की नींद खुली तब तक में वो रात की अथर्व की बेरुखी भूल चुकी थी..!
वो रसोई में चाय चढ़ा रही थी कि उसकी कॉलबेल बजने लगी
उसे लगा घर पर काम करने वाली गुड़िया होगी.. वो रसोई से निकली ही थी कि उतनी देर में बेल की आवाज़ से अथर्व भी जाग गया, और उसने जाकर दरवाज़ा खोल दिया…..

सामने मानव खड़ा था..
मानव को देखते ही अथर्व के चेहरे पर मुस्कान चली आयी।
मानव को आया देख रेशम भी ख़ुशी से किलक उठी.. वो भाग कर मानव के सीने से लग गयी..

अथर्व उन दोनों को छोड़ कर मुहं हाथ धोने चला गया.. रेशम भी नाश्ता बनाने जा रही थी कि मानव ने उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक लिया।

“रुक, पहले यह बता कि कल रात इतनी परेशान क्यों थी?”

” भाई आप… मैं आपको सब कुछ बताऊंगी, लेकिन थोड़ा रुकिए, मतलब इनके सामने कुछ मत पूछियेगा…!”

” हां इतना तो मैं भी समझता हूं, अथर्व को नहीं पता है कि कल रात तूने मुझे फोन किया था!
दरवाजा खोलने पर मुझे देखकर उसका जो रिएक्शन था, उससे मैं समझ गया कि वह कुछ नहीं जानता।

    तू निश्चिंत रह मेरी तरफ से कुछ पता नहीं चलेगा, लेकिन मेरी गुड़िया रानी मुझे तो बता कि बात क्या है, जो तू कल इतनी परेशान थी।”

” सब बताऊंगी, पहले आपके लिए कुछ नाश्ता तो बना दूं।

“वह तो मैं खा लूंगा, लेकिन पहले तू बैठ।”

उसने रेशम को अपने सामने बैठा लिया। रेशम के चेहरे पर अब भी हल्का सा डर काबिज था कि कहीं अथर्व अचानक चला ना आये।

“नहीं भैया अभी पूरी बात नहीं बता पाऊंगी। अगर अथर्व आ गये तो पता नहीं क्या सोचेंगे?”

” कुछ तो बताएगी?”

” बस यह बताना चाहती हूं, कल अथर्व पुलिस स्टेशन गए थे। वहां से आने के बाद वह अपने लैपटॉप में कुछ सर्च कर रहे थे।
   रात में मैंने देखा तो मुझे पता चला कि वह जिस यूनिवर्सिटी से मैं पढ़ी हूं, वहां के बारे में और अखंड सिंह परिहार के बारे में कुछ ढूंढ रहे थे। बस अब ये लग रहा है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि उन्हें मेरे बारे में सब कुछ पता चल गया है।”

मानव के चेहरे पर परेशानी झलकने लगी। लेकिन उसकी आंखें देखकर यह समझ में आ रहा था कि उसके पास इस परेशानी का कोई हल भी मौजूद है।

उसने पूरे आत्मविश्वास से अपनी बहन की तरफ देखा और उसके सिर पर हाथ फेरने लगा।

उसी समय अथर्व टॉवल से मुंह पोछता हुआ वहां चला आया।

” क्या हुआ अपने भैया को नाश्ता नहीं खिलाना है क्या?
बस बैठकर गप्पे मारना शुरू?”हंस कर उसने रेशम को टोक दिया..

“नहीं मैं आपके आने का इंतजार कर रही थी! आप दोनों बैठिए मैं कुछ बना कर लाती हूं ।”

रेशम उठकर अंदर चली गई, और अथर्व मुस्कुरा कर मानव के सामने बैठ गया।

दोनों लोग आपस में बातों में लग गए..

क्रमशः

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Kirti Saxena
Kirti Saxena
1 year ago

बेहतरीन भाग 👌👌😊

Neeta
Neeta
1 year ago

👌👌👌👌👌👌❤❤❤❤❤❤

Meera
Meera
1 year ago

वाह क्या नाम दिया है जंतु, तो ये जंतु इस खानदान का नही , और वह ये कुसुम कुमारी है ,इशारे कर रही वो भी खुलेआम 😅🤣🤣
भावना का एडमिशन भी करवा दिया वाह राजी , और अब गेंदा के साथ कुछ भी गलत किया न ये अनंत ने तो यज्ञ छोड़ने वाला नही है हाथ पैर तो गए कमसे अनंत बाबू और साथ में वीर भी पीसने वाला है अब तो ।
मानव को देख समाज तो गया ही होगा अथर्व की रेशम किस कदर डर गई है उसके व्यवहार से , पर अब इतना तो हक रखता ही है की रेशम के बारे मे सब जान ने का हक है उसे और रेशम अब तक उस पर पूरा विश्वास नहीं कर पाई तो ये थोड़ी नाराज़गी तो बनती ही है।

कांति
कांति
1 year ago

राजेन्द्र मतलब भावना को डॉक्टरनी बना कर ही रहेगा। किताबे, कोचिंग, अब रिक्शा सारी व्यवस्था कर दी उसने।
भावना और राजेन्द्र के आने की खुशी में सरना और गेंदा लगे पड़े हैं पर गेंदा के साथ कोई अनहोनी ना हो जाए।
अनंत के पापों का घड़ा भरने वाला है जल्दी ही वो सलाखों के पीछे होगा।

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

बहुत अच्छा लगा पढ़कर कि राजेंद्र.. भावना को आगे पढ़ाना चाहता है, बेमन से ही सही पर जोड़ी खूब अच्छी बनी दोनों की।
नदरू…. 😊वाह डॉक्टर साहिबा 😘कुछ जम्मू की महक आ रही, जम्मू में नदरू ही कहते है कमलककड़ी को।
ओह्ह ये क्या हो गया… गेंदा के साथ कुछ गलत ना होने देना plz 🙏🏻।
ये तो अच्छा हुआ यज्ञ ने अनंत के पीछे लडके लगाए है उस पर नज़र रखने के लिए, शायद अब ये गेंदा को कोई नुकसान नहीं पहुंचा पायंगे।
बेहद लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻।

Upasna Dubey
Upasna Dubey
1 year ago

कहाँ सेशुरू करूँ….अगला भाग पढ़ने की जल्दी भी है
पति जब पत्नी का साथ देता है तो उसे आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता … यहां तो राजेन्द्र का अनुभव भी काम आएगा भावना के
यज्ञ की तरह ही होना चाहिए , समयानुसार विवेक के अनुसार निर्णय लेना ,अखंड की तरह भावुकता में नहीं ..क्योंकि कुछ लोग वाकई माफी के काबिल नहीं होते ।
देखते हैं अथर्व और रेशम की लव स्टोरी क्या टर्न लेने वाली है

Rajkumar
Rajkumar
1 year ago

Nice part ❤️❤️❤️❤️

Yashoda Sharma
Yashoda Sharma
1 year ago

ये गेंदा कही वीर और अनंत के लपेटे में ना आ जाए,, बेचारी सीधी सादी गांव की लड़की है,,,, अच्छा किया यज्ञ ने लड़के पीछे लगा दिए वर्ना नियत अनंत की पता तो लग ही गई है।
चलो भावना का भी पढ़ाई सुरू हो गया, ये भी अच्छा हुआ।
धीरे ही सही कुसुम अब बदल रही और यज्ञ की तरफ बढ़ रही

Mandeep kaur
Mandeep kaur
1 year ago

Outstanding part🌹👌🌹👌🌹

Archana Singh
Archana Singh
1 year ago

Very nice part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻