
अपराजिता -130
अनिर्वान ने अथर्व और रेशम को भी थाने पर बुलवाया था, लेकिन अथर्व रेशम को साथ लेकर नहीं गया! उसने रेशम को उसकी डिस्पेंसरी में छोड़ने के बाद वापस पुलिस स्टेशन का रुख कर लिया..
अनिर्वान ने अब तक गाड़ी की जांच करवा ली थी! जिसमें साफ जाहिर हो रहा था कि गाड़ी के ब्रेक्स नहीं लगने के कारण एक्सीडेंट हुआ था! इसी सारे पंचनामे पर अथर्व के भी हस्ताक्षर चाहिए थे, और इसके लिए अनिर्वान ने अथर्व को थाने पर बुलाया था..
अथर्व अपना काम निपटाकर लौट रहा था कि पुलिस थाने में आते हुए अखंड पर उसकी नजर पड़ गई..
” अरे आप यहां कैसे?”
अखंड ने अथर्व को देखा और फिर अनिर्वान की तरफ इशारा कर दिया
” एक्सीडेंट हमारी गाड़ी का हुआ था ना, उसी से जुड़ी कोई बात बताना चाहते थे सर, इसके लिए हमें बुलाया!”
” अच्छा !” कहकर अथर्व निकलने को था कि अनिर्वान ने उसे वापस बुला लिया..
वह दोनों एक साथ अनिर्वान के पास चले आए.. उन दोनों को बैठा कर अनिर्वान ने अखंड की तरफ देखा
“अब कैसी चोट है अखंड? तबियत में कुछ आराम हुआ ?”
अखंड ने मुस्कुरा कर हाथ जोड़ दिये
” सर आपसे दोबारा ऐसे मुलाकात होगी, हमने सोचा नहीं था! आपका हम पर बहुत एहसान है!”
अनिर्वान मुस्करा उठा..
” इसमें एहसान वाली कोई बात नहीं है अखंड बाबू, आप निर्दोष थे और एक निर्दोष को निर्दोष साबित करने में मदद करना कोई एहसान वाली बात नहीं है… क्यों डॉक्टर साहब ?”
अनिर्वान ने साथ बैठे अथर्व की तरफ देख लिया!
अथर्व को अखंड और अनिर्वान की बात समझ में नहीं आ रही थी, इसलिए उसने कंधे उचका दिये
” सॉरी लेकिन मुझे आप दोनों की कोई बात समझ में नहीं आ रही है!”
” बात बहुत पुरानी है, लेकिन वह बात अब तक खत्म नहीं हुई है!”
अनिर्वान के ऐसा कहते ही अखंड ने दोबारा अपने हाथ जोड़ दिए..
” लेकिन हम नहीं चाहते कि वह बात दोबारा शुरू हो, उस घटना के बाद हमारे चरित्र पर ऐसा काला धब्बा लगा है कि, हम उससे आज तक उबर नहीं पाए हैं..
और हम जानते हैं कि जिस लड़की..”
कहते कहते अखंड रुक गया, लेकिन अथर्व को यह बात जरा खटक गई! अनिर्वान और अखंड जिस तरीके से बात कर रहे थे, जिन अबूझ पहेलियों के तार आपस में जोड़ रहे थे, उन्हें सुनते हुए अथर्व के मन में भी खलबली सी मच गई!
” मुझे एक्चुअली समझ में नहीं आ रहा है कि, क्या बात हो रही है! इसलिए अगर आप लोग इजाजत दें तो मैं चलता हूं! आप लोग अपनी पर्सनल बातें कर लीजिएगा!”
अनिर्वान ने अथर्व को देखकर जाने की इजाजत दे दी लेकिन अखंड ने उसका हाथ थाम लिया,
” अरे नहीं डॉक्टर साहब ऐसी कोई छुपाने वाली बात नहीं है.. हमारे साथ जो हुआ वह तो उस वक्त सारी दुनिया को ही पता चल गया था, आप तो फिर भी बहुत अच्छे इंसान है! अगर आपको मालूम चल भी गया तो कुछ भी गलत नहीं होगा!”
अथर्व ने थम कर अखंड के हाथ पर हल्के से थपकी दे दी
” कोई बात नहीं आप अपना ध्यान रखें!”
अखंड ने हामी भरी और कहने लगा,
” हमारे साथ जो हुआ है वह भगवान किसी दुश्मन के साथ भी ना करें.. हमें एक ऐसी गलत बात के लिए आरोपी साबित किया गया जो हमने कभी किया भी नहीं था! एक लड़की को गलत तरीके से अंधेरे कमरे में बुलाकर उसे बुरी तरीके से डरा दिया गया, वह भी हमारे नाम से!
उस लड़की के दिल दिमाग में हमारा खौफ इस कदर भर दिया गया कि वह अपनी जिंदगी में आज तक उलझी हुई है..
वह आज भी हमारे नाम से डरती है! पर हम चाह कर भी उसकी कोई मदद नहीं कर सकते !”
अखंड अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया, अथर्व के सामने खड़े हो अथर्व की आंखों में देखते हुए बोलने लगा
“कई साल पहले की बात है डॉक्टर साहब, हम जिस यूनिवर्सिटी में छात्र संघ के अध्यक्ष थे, वहां मेडिकल कॉलेज भी था, मेडिकल की एक लड़की को जबरदस्ती हमारे दुश्मन ने हमारे नाम से मेडिकल स्टोर रूम में बुलवाया और अंधेरे का फायदा उठाकर उस से जबरदस्ती करने की कोशिश की..
हालांकि उस लड़की के साथ किसी भी तरह की कोई शारीरिक जोर जबरदस्ती नहीं हुई..
वह लड़की पूरी तरह से पवित्र थी, और आज भी पवित्र है! लेकिन उसके दिल दिमाग पर हमारे नाम का खौफ चस्पा हो गया..
लड़की बहुत ज्यादा डर गई थी, उसे उसके घर वाले अपने साथ ले गए और हमें वहां मौजूद लोगों ने पुलिस के हवाले कर दिया..
लेकिन हमारे खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला! सबूत होता भी कैसे क्योंकि जिसने हमसे दुश्मनी निकालने के लिए यह सब किया था वह बस उस लड़की के दिमाग से खेल रहा था..
कॉलेज यूनिवर्सिटी में हमारी इमेज ख़राब करने के लिये वो उस लड़की को इस्तेमाल कर रहा था, ये सोचे बिना की उस कच्ची उम्र में अपने साथ घटी इस भयानक दुर्घटना के बाद वो कभी सामान्य हो भी पायेगी या नहीं..?
वह सिर्फ हमारी इमेज खराब करना चाहता था, जिससे अगले छात्र संघ चुनाव में हम चुनाव नहीं लड़ पाएं..
यही हुआ, हम जेल में थे और हम चुनाव का फॉर्म नहीं भर पाए! वह लड़का बड़ी आसानी से छात्र संघ चुनाव जीत कर अध्यक्ष बन गया और वहीं से वह राजनीति में दाखिल हो गया..
हम कोर्ट में बेकसूर साबित कर दिए गए,क्यूंकि हमारे इस केस की एकमात्र चश्मदीद गवाह वो लड़की ही थी, और उसने बार बार सिर्फ हमारा नाम सुना था, हमें देखा नहीं था, इसलिए उसकी गवाही का कोर्ट में कोई मान नहीं हुआ और हम बेगुनाह साबित हो गए..
लेकिन हमारे मन में आज तक इस बात का अफसोस है कि भले ही कोर्ट की नजर में हम बेगुनाह साबित हो गए, लेकिन वो लड़की अब भी हमें गुनहगार समझती है.. हमने उस लड़की को कभी अपनी सफाई क्यों नहीं दी..?
काश एक बार उस लड़की को हम यक़ीन दिला पाते कि हम उसके गुनहगार नहीं है..
पता नहीं वो कहाँ होगी? उसका जीवन सामान्य हुआ होगा या नहीं?
क्यूंकि इतना तो पता है कि, उस वक्त उस पर भी इस बात का वहुत बुरा असर पड़ा था..।”
“लड़की मेडिकल कॉलेज की थी.. ?”
अथर्व ने पूछा और अखंड ने हाँ में गर्दन हिला दी..
अथर्व की आँखों में परेशानी सी छलकने लगी…
अखंड बड़े ध्यान से अथर्व को देख रहा था..
“लेकिन वो लड़की बिलकुल गंगा की तरह पवित्र है !” अखंड ने बहुत गहरी आवाज़ में अथर्व से कहा, जैसे उसे यक़ीन दिलाना चाहता हो कि ‘अथर्व रेशम को कभी गलत मत समझना…’
अथर्व ने एक गहरी सी साँस ली और अखंड के कंधे थपथपा कर चला गया…
अनिर्वान आश्चर्य से अखंड को देख रहा था कि वो क्यों एक अनजान आदमी के सामने अपना काला इतिहास बता रहा था..
लेकिन अखंड जानता था कि वो अथर्व को ये सब क्यों बता रहा था.. ?
अथर्व भारी मन से वहाँ से निकल गया… घर पहुँच कर उसने अपना लैपटॉप निकाला और यूनिवर्सिटी के बारे में और अखंड सिंह परिहार के बारे में जितनी जानकारियां यूनिवर्सिटी के ब्रोशर में,और यहाँ वहाँ उपलब्ध थी, छानने लगा..
रेशम उसके पास आकर बैठ गयी..
“चाय लेकर आऊँ ?”
“हम्म.. रुको !”
अथर्व व्यस्त था, उसने आँख उठा कर रेशम की तरफ देखा भी नहीं और अपने काम में मगन रहा.. लेकिन पता नहीं क्यों रेशम को घबराहट सी होने लगी..
“सुनिए… सुनिए ना !”
“क्या हुआ.. बोलो ?” ज़रा खीझ कर अथर्व ने कहा और रेशम घबरा गयी, उसके माथे पर पसीना छलक आया.. कहीं अथर्व सब जान तो नहीं गया?
अगर अथर्व को मालूम चल गया कि किसी ने उसकी इज्जत से खिलवाड़ करने की कोशिश की थी तो कैसे वो उसे समझा पायेगी कि वो पवित्र है..
उस आदमी ने उसे छुआ तक नहीं था..।
हे भगवान रक्षा करो, क्यों मेरे साथ ही ऐसा होता है, जिस बात को भूलना चाहूँ वो इस तरह बार बार घूम कर सामने क्यों आ जाती है..?
“बोलोगी भी, क्या हुआ ?”
अथर्व के खीझ कर पूछने पर खुद को भरसक सामान्य दिखाने की कोशिश करती रेशम ने धीरे से गला साफ़ कर उससे पूछ लिया..
“चाय के साथ कुछ लेंगे !”
“कमाल करती हो, ये कोई पूछने की बात है? तुम्हे इतने दिन में समझ नहीं आया कि मैं चाय के साथ कुछ नहीं खाता..।
नहीं चाहिए कुछ.. जाओ.. मैं कुछ ज़रूरी काम कर रहा हूँ !”
सकपका कर रेशम उलटे पैरों वापस लौट गयी..
आज तक अथर्व उस पर कभी नाराज़ नहीं हुआ था, उसकी छोटी मोटी बेवकूफियां छोड़ो, वो तो आज तक अपने प्रेम की पूर्णता को ना पा सकने को भी आसानी से ज़ब्त कर गया था फिर आज ऐसा क्या हो गया था?
सोचती हुई वो अंदर चली गयी, लेकिन उसका मन कहीं नहीं लग रहा था.. क्या करे, कैसे अथर्व के मन में झांक कर देखे। इसी उहापोह में उसकी आँख लग गयी..
कुछ देर बाद उसे अपने बालो में अथर्व की उँगलियाँ सी महसूस होने लगी।
वो मुस्कुरा कर करवट बदल कर लेटी रही, उसे लगा अथर्व आएगा और उसे बाँहों में भर लेगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ…।
इंतज़ार करते करते जब बहुत देर हो गयी, तब वो खुद धीरे से पलट गयी..
अपनी आँखों पर बाँहों को रखें अथर्व चित लेटा हुआ था..
इसका मतलब उसे बस किनारे करने के लिए उसके बालों पर हाथ फेरा था उसने ?
अब तो उसके पास जाकर ये देखने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी कि वो सो गया है या नहीं… ?
फिर भी थोड़ी हिम्मत जुटा कर वो उस तक पहुंची कि अथर्व ने करवट बदल ली। और रेशम की तरफ पीठ फेर कर सो गया।
वो गहरी सी साँस भर कर चुप चाप सोने की कोशिश करने लगी, लेकिन उसकी आँखों से नींद गायब थी… वो चुपके से उठी और बाहर निकल गयी।
बाहर वाले कमरे में अथर्व का लैपटॉप पड़ा हुआ था, जाने क्या सोच कर उसने लैपटॉप खोल लिया..
उसकी उँगलियाँ अपने आप ही कीबोर्ड पर चल रही थी, वो जानना चाहती थी कि अथर्व क्या कर रहा था?
और उसे हिस्ट्री में दिख ही गया कि अथर्व यूनिवर्सिटी और अखंड सिंह परिहार के बारे में खबर ढूंढ़ रहा था..
इससे ज्यादा वो और कुछ न देख पायी.. उसकी आँखों के आगे अँधेरा सा छाने लगा..
इसका मतलब अथर्व उसके बारे में सब कुछ जान चुका है।
इसीलिए तो अखंड परिहार के बारे में जानना चाहता है… अब क्या होगा ?
लेकिन किसने अथर्व को उस बात के बारे में बताया होगा?
यही सब सोचती बैठी रेशम के हाथ पैर कांपने लगे..
उसने अपना फ़ोन उठाया, और मानव को फ़ोन लगा दिया….
मानव भी गहरी नींद में डूबा था, रेशम का फ़ोन देख उसने आंखे मलते हुए फ़ोन उठा लिया..
“रेशु, क्या हुआ, आधी रात में फ़ोन क्यों कर रही है ? सब ठीक है ना ?”
मानव की आवाज़ सुनते ही रेशम की रुलाई फ़ूट पड़ी….
“मानव.. मानव.. तू.. आ जा !”
“हाँ हाँ लाड़ो मैं आ रहा हूँ.. पर ये बता तेरी तबियत तो ठीक है ना ?”
“हम्म मैं ठीक हूँ.. !”
अटक अटक कर जैसे तैसे रेशम ने कहा
“अथर्व कैसे हैं ? कहाँ हैं वो ?”
“ठीक है, अभी मेरे साथ ही हैं !”
“क्या परेशानी है कुछ तो बता !”
“बस तू आ जा मानव !” रेशम ने फ़ोन रख दिया
अपने कमरे में आकर उसने आलमारी खोली और कुछ ढूंढने लगी..
आखिर कपड़ो के पीछे छिपा कर रखा पैकेट उसके हाथ आ गया.. उसने उसमे से एक सिगरेट निकाली ही थी कि अथर्व ने नींद में कुछ बोला..
घबरा कर उसकी तरफ देखने में रेशम के हाथ से सिगरेट नीचे गिर गयी..
उस गिरी हुई सिगरेट को उठाने के चक्कर में वो गलती से उस पर पैर रख गयी..
हाथ के पैकेट को वापस पीछे छुपा कर उसने ज़मीन पर गिरी वाली को उठाकर खिड़की से बाहर फेंका और अथर्व को डरती हुई नजरो से देखते हुए उसके बगल में आकर चुप चाप सांस रोके लेट गयी..
रात बीतती चली गयी और जाने किस पहर में उसकी आँख लग गयी…
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यज्ञ ने सुबह सुबह ही घर के सारे नौकरो की परेड लगा दी.. वो बाहर वाले ओसारे में सारे नौकरो को जमा कर फटकारने लगा..
“सारे लोग एक सीध में खड़े हो जाओ और ध्यान से हमारी बात सुनो.. ये बताओ की हमारी गाड़ी की सफाई किसने की थी..
घर पर दो ड्राइवर थे, मंतोष और प्रकाश.. !! दोनों आंखे फाड़ यज्ञ को देखने लगा..
“भैया क्या हुआ ?”
“क्या हुआ ? “यज्ञ ज़ोर से चीख पड़ा..
“गाड़ी के ब्रेक नहीं लग रहे थे जब भैया ने गाड़ी निकाली। अखंड भाई साहब का कितना बड़ा एक्सीडेंट हुआ है, यह क्या तुम लोगों को नजर नहीं आया? और उस एक्सीडेंट का कारण सिर्फ और सिर्फ गाड़ी के ब्रेक नहीं लगना है।
अब तुम दोनों में से किसने हमारी गाड़ी के ब्रेक को हाथ लगाया है, तुम लोग शांति से खुद बता दो। वरना अगर हमने तुम लोगों का गला पकड़ कर तुम्हारी जबान खींच कर सच्चाई उगलवाई ना, तो सोच लेना।
या तो फिर तुम्हारा झूठा ही रहेगा या तुम्हारी जबान।”
” भैया जी आपकी गाड़ी की साफ सफाई हम ही करते हैं, लेकिन पिछले दो दिन से हमने आपकी गाड़ी को छुआ भी नहीं ।अम्मा कसम खाकर कह रहे हैं।”
मंतोष बिलबिला उठा।
उसे देखकर प्रकाश ने भी अपने हाथ जोड़ दिए।
” भैया जी जिस दिन बड़े भइया आपकी गाड़ी लेकर गए उस दिन गाड़ी को बाहर भीतर से हमने ही साफ किया था। लेकिन सत्ती माता की कसम खाकर कह रहे हैं, हमें गाड़ी के ब्रेक के बारे में कोई अंदाजा नहीं था..।
भैया जी अगर हम ब्रेक के बारे में जानते होते तो, तो बड़े भैया को कभी गाड़ी नहीं ले जाने देते…।”
वो दोनों घबराये से लग रहे थे, लेकिन उनके चेहरे पर सच्चाई नज़र आ रही थी.. उसी समय उन सब की नजर बचा कर वहाँ से निकलते अनंत पर यज्ञ की नजर ठहर गयी..
अनंत ने आगे बढ़ कर बाहर के सदर दरवाज़े को खोलने हाथ बढ़ाया ही था कि यज्ञ ने दरवाज़े का हैंडल पकड़ लिया..
“क्या हुआ अनंत बाबू.. चोरो की तरह दबे पांव कहाँ निकले जा रहे हैं आप ?”
“अरे.. हम कहाँ जायेंगे.. बस यूँ ही सुबह की सैर का सोच रहे थे !”
“लेकिन आपके कंधे पर टांग रखा बैग तो कुछ और कहानी कह रहा है !”
अनंत ने मुड़ कर बैग की तरफ देखा..
“अरे ये कैसे ? हमने लगता है अनजाने में बैग भी उठा लिया..
“चलिए कोई बात नहीं.. आइये बैठिये साथ में नाश्ता करते हुए कुछ गुफ्तगू भी कर ली जाये..” यज्ञ ने कहा।
अनंत वहाँ से निकल भागना चाहता था, लेकिन यज्ञ ने उसकी बांह पकड़ ली और उसे साथ ले अंदर की तरफ बने अपने ऑफिस रूम की तरफ बढ़ गया..
क्रमशः

Ab Yagya Annat ko Dara damka kar pata laga lega,Masi story.
आज जो अखंड ने किया वो मुझे तो सही लगा आखिर उसे जान ने का पूरा हक है की उसकी रेशम किस दौर से गुज़र रही हैं, और अखंड ने ये बात दोहरा कर भी अच्छा किया की रेशम गंगा सी पवित्र है आज भी ।
अथर्व ये सच्चाई जान कर रेशम के साथ कैसा व्यवहार करेगा ये सोचने वाली बात है पर जितना हम आज तक अथर्व को जान पाए है , वो अब रेशम को इस डर से जरूर बाहर खींच कर निकाल ले आएगा ।
यज्ञ बाबू न तो सुबह सुबह परेड लगवा दी , और ये अनंत बाबू बच कर कहा जा पाएगा , आखिर यज्ञ सिंग परिहार का हाथ आया है ऐसे ही थोड़े ही छोड़ देगा और वो भी अखंड का एक्सीडेंट इसकी वजह से हुआ है ये जान कर तो उसका खून खौल उठा होगा ।
👌👌👌
अखंड ने सारा सच कह तो दिया अथर्व को पर ये सच रेशम और उसके रिश्ते पर कैसे डालेगा लेखिका जी ही जाने 😌
यज्ञ ने आखिर अनंत को पकड़ ही लिया अब और क्या बहाने बनायेगा अनंत।
शानदार भाग 👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻
अखंड का confession अच्छा लगा, जैसे उसने रेशम की इमेज साफ रखने की कोशिश की, ताकि अथर्व के दिमाग में किसी के भी कहने से कुछ गलत न आए,
अथर्व एक सुलझा हुआ लड़का है उसे बुरा तो जरूर लगेगा की रेशम ने उसे अपनी परेशानी खुद नही बताई, लेकिन वो उसे गलत नहीं समझेगा
यज्ञ का सच्चाई निकलवाने का तरीका भी मजेदार लगा
बेहद खूबसूरत लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻
तो क्या अथर्व ने सारी जानकारी निकाल ली अखंड की और क्या वो रेशम को गलत समझ रहा है,पर अथर्व बहुत समझदार है तो ऐसा क्यों कर रहा,, शायद वो नाराज़ है रेशम से क्यूंकि उसने एक बार रेशम से कहा भी था कि कोई भी बात हो मुझे तुमसे ना पता चलकर किसी दूसरे से पता चली तो मैं तुम्हे माफ़ नहीं करूंगा। पर रेशम कि हालत देखकर बहुत दुख हो रहा 😔,।
अखंड के शक की सुई सही जगह अटकी है अब तो अनंत की खैर नहीं…।
👏👏👏👏🙏🙏
Atharv ko Shaq ho gya h kya ….woh kya janne ki koshish kar rha tha …..
Yagya ne anant ko pakad liya ….lekin abhi poochna baaki h ….pta toh lga kar hi rahega
Achcha lgaa akhand ka confession or yagya ki trick… 👌🏻👌🏻👌🏻
Hi, trying to send message
नहीं मेरा मन नहीं मानता की अथर्व के दिमाग में रेशम के लिए कुछ बुरे ख्याल आ रहे होंगे वह बहुत समझदार और सोचा हुआ व्यक्ति है तो कभी भी अपनी पत्नी के इस तरीके की किसी खबर पर कुछ गलत तरीके से रिएक्ट नहीं करेगा।