जीवनसाथी -3 भाग -88

जीवनसाथी -3 भाग -88

“एक अजीब बात नोटिस की है  मैंने.. शाम में सब लौट आये फिर बताता हूँ !”

“शाम तक तो मेरे पेट में ऐसी मरोड़ उठेगी कि सहन नहीं कर पाऊँगी.. साफ़ साफ़ बताओ ना !”

“हम्म.. ! बताता हूं। मैं वॉक के लिए कॉलोनी से बाहर निकल गया था, जब गेट से बाहर निकल रहा था, तब गेट के ठीक बाहर खड़ी एक लम्बी सी काली गाडी पर ध्यान गया था मेरा, और जब वापस लौटा तब भी वो गाड़ी वहीँ खड़ी थी !”

“तो इसमें उतना सोचने की क्या बात है ? किसी की भी गाड़ी हो सकती है ! “

“सोचने की बात ये हैं कि वो गाड़ी हमारे इस फ्लैट के ठीक सामने ऐसी जगह पर खड़ी थी, जहां से उसे फ्लैट  के अंदर का सब कुछ दिख सकता है.. !”

“लेकिन हमारे इस फ्लैट का आर्किटेक्चर तो ऐसा है कि बाहर से किसी को कुछ नहीं दिख सकता !”

“एक्ज़ेक्टली, इसलिए तो उस गाड़ी पर डाउट हुआ, क्यूंकि हर्ष के कमरे की खिड़की के सामने के हिस्से में बॉउंड्री वाल ज़रा नीचे हो जाती है। और हर्ष के बेडरूम की खिड़की बालकनी सब एक विशेष एंगल पर खड़े होने से नजर आती है। और वो काली गाडी उसी एंगल पर खड़ी थी..।
मैंने जाते आते दोनों वक्त देखा कि उसके अंदर बैठा आदमी हाथ में दूरबीन लिए हुए था..
पता नहीं क्यों, लेकिन मुझे कुछ अच्छी सी वाइब्स नहीं आ रही हैं..।
ऐसा लग रहा जैसे कोई जानबूझकर हर्ष पर नजर रखे हुए हैं ।
वैसे भी अभी कुछ समय पहले ही हर्ष को झूठे आरोप में पुलिस पकड़ कर ले गयी थी.. उसी समय से दिमाग में ये चल रहा है कि हर्ष को कोई नुकसान पहुँचाना चाहता है, लेकिन वो है कौन ?”

शोवन की बात जैसे ही ख़त्म हुई धनुष की आवाज़ उन लोगो को सुनाई पड़ने लगी..

“बस शोवन भाई उसी तलाश में हूँ मैं भी..। इतना तो मुझे भी समझ में आ गया है कि कोई है जो हर्ष के बुरी तरह से पीछे पड़ा है, लेकिन वो है कौन, ये जानना बाक़ी है !”

धनुष को अचानक आया देख शोवन और परी चौंक गए..

“तुम ? तुम तो ऑफिस गए थे ना ?”

“हाँ लॉकर से कुछ सामान लेना था, इसलिए मुझे ही लौटना पड़ा, और मैंने आप दोनों की बातें सुन ली। लेकिन बस यही हर्ष वाली.. बाकी कुछ नहीं सुना, तो आप दोनों कंटीन्यू कीजिये मैं चला !”

मुस्कुरा कर धनुष अपने कमरे में चला गया..
उसके जाते ही परी ने शोवन को देखा..

“आपका भाई आपसे ज्यादा स्मार्ट है डॉक्टर साहब !”

“हाँ फिर, भाई किसका है ? स्मार्ट तो होगा ही.. वैसे भी वो पापा पर गया है !”

“और आप अपनी मम्मा के बेटे हैं, है ना !”

“हंड्रेड परसेंट, मैं मम्मा की ट्रू कॉपी हूँ ! यकीन न हो तो करीब से देख लो.. !”

इतना कह कर शोवन ने परी को अपने पास खींच लिया और परी शरमा कर उसकी बाहों में सिमट गयी..

***

शौर्य अपने मन को बहलाने के प्रयास कर रहा था, लेकिन उसके मन को कहीं शांति ना थी..।
रानी माँ के कहे मुताबिक वो समय पर एयरपोर्ट पहुँच गया… बाहर खड़ा वो इंतज़ार कर रहा था, उसकी नज़रे भी गेट पर थी, बावजूद उसका मन वहाँ नहीं था। इसलिए सामने से आती प्रियदर्शिनी भी उसे नजर नहीं आयी।

प्रियदर्शिनी ने उसे देख लिए था, वो हाथ हिलाती उसके पास चली आयी, लेकिन अस्तव्यस्त मन में खोये शौर्य का ध्यान ही नहीं गया..

“हेलो शौर्य… ओ हाय.. ध्यान कहाँ है तुम्हारा ?”

“ओह्ह सॉरी, बाक़ी सब कहाँ हैं ?”

“कौन बाकी सब ?”

“तुम्हारे पेरेंट्स ?”

“वो नहीं आये, मुझे ही मासी से मिलना था, इसलिए बस मैं आयी हूँ !”

“ओके.. चलो !”

वो उसे साथ लिए बाहर निकल गया… दोनों गाड़ी में बैठ गए और ड्राइवर ने एयरपोर्ट से गाड़ी बाहर निकाल ली.. शौर्य अब भी खामोश बैठा था, और प्रियदर्शिनी उससे बात करने के बहाने ढूंढ़ रही थी.. ..

“हम कहाँ जा रहे हैं शौर्य ?”

“तुम्हे तुम्हारी मौसी के घर छोड़ कर मैं वापस चला जाऊंगा !”

प्रियदर्शिनी आश्चर्य से उसे देखने लगी… उसके यहाँ आने का मुख्य उद्देश्य मासी के घर जाना तो हरगिज़ नहीं था..

“पहले हम लोग कुछ खा लेते हैं !”

उसने शौर्य से कहा और शौर्य ने हामी भर दी..
शौर्य ने ड्राइवर से कह कर रेस्टोरेंट की तरफ गाड़ी मुड़वा ली… आगे बढ़ते हुए उसे रास्ते में वो छोटा सा कैफे दिख गया जहाँ वो और कली कभी बैठे थे..

“रोको रोको.. यहाँ रोक दो गाड़ी.. !”

शौर्य खुश होकर वहाँ उतर गया.. और उस रोड साइड कैफे की तरफ बढ़ गया।
प्रियदर्शिनी की भी उतरना पड़ा, वो भी नाक भौंह सिकोड़ती शौर्य के पास चली आयी।

“यहाँ ब्रेकफास्ट करें ?” शौर्य ने प्रियदर्शिनी की तरफ देख कर पूछा और प्रियदर्शिनी ने ना में गर्दन हिला दी..

“छि इतने चीप से कैफे में क्या मिलेगा ?”

“यहाँ सब मिलता है, और बहुत टेस्टी भी.. यहाँ की कॉफी तो कमाल है !”

शौर्य को कली से जुडी होने के कारण वो जगह बहुत अपनी सी लग रही थी.. उसने ढूंढ़ कर वो ही कोना पकड़ा जहाँ वो कली के साथ बैठा था, और उसी जगह पर जाकर बैठ गया..
मन मार कर प्रियदर्शिनी भी बैठ गयी..

‘”क्या खाओगी तुम ? “

“शौर्य क्या वाकई ये जगह हमारे बैठने लायक भी है, और तुम यहाँ बैठ कर खाने की बात कर रहे हो !”

शौर्य को वह समय याद आ रहा था, जब वह कली के साथ उसका मॉडल बन कनॉट प्लेस में इधर से उधर घूम रहा था..
कली उसे अपने साथ शॉपिंग के लिए लेकर गई थी। जहां कली ने उसके लिए अपनी पसंद की तीन टी-शर्ट खरीदी थी, उस दौरान शौर्य को जो शर्ट पसंद आई थी वह बहुत महंगी होने के कारण शौर्य ने नहीं खरीदी थी। क्योंकि उस वक्त उसके अकाउंट सीज हो चुका था।
वह दुखी सा बाहर निकल आया था और कली उसे साथ लेकर इसी कैफे में आ बैठी थी।

उसे एक एक पल किसी फिल्म की रील सा अपनी आंखों के सामने से गुजरता हुआ नजर आ रहा था। जब एक वेट्रेस उनके सामने आई और उसने पूछा कि आप दोनों के लिए क्या ले आऊं, और शौर्य ने कुछ भी कह दिया था।

कली भी शौर्य की बात का मान रखते हुए उस वेट्रेस से यही कहने लगी थी कि आपके कैफे में जिस डिश का नाम “कुछ भी” है वह ले आइए, और इत्तेफाक से आलू पनीर की स्टफिंग वाले ब्रेड पकोड़े को बहुत कुशलता से सर्व करते हुए वह वेट्रेस उन दोनों के लिए ले आई थी।

वह बात याद आते ही शौर्य के चेहरे पर मुस्कान छा गई। आज भी एक लड़की पतला सा मेनू कार्ड लिए उन दोनों के सामने हाजिर थी। जिसके सामने प्रियदर्शनी अपना रूवाब झाङ रही थी, लेकिन उसकी बात को नजरअंदाज करते हुए पुरानी यादों में खोए शौर्य ने मुस्कुरा कर उस वेट्रेस की तरफ देखा और अपना आर्डर दोहरा दिया।

” मेरे लिए ‘कुछ भी’ ले आईए। ” उस लड़की ने मुस्कुरा कर सर झुका कर शौर्य का अभिवादन किया और प्रियदर्शनी की तरफ घूम गई।

” मैडम आप क्या लेना पसंद करेंगी?”

” कुछ भी” कह कर प्रियदर्शनी चुप हो गई।

और वह वेट्रेस मुस्कुरा कर वहां से चली गई। वह जाने लगी कि शौर्य ने उसे कॉफी के लिए भी बोल दिया। कुछ ही देर में उन दोनों की टेबल पर ब्रेड पकोड़े सजे हुए थे। और साथ ही गरमा गरम कॉफी।

शौर्य ने उत्सुकता से ब्रेड पकोड़े का वह टुकड़ा उठाया हरी चटनी में भिगोकर अपने मुंह में रख लिया, और सुकून से अपनी आंखें मूंद ली। उसे वह सारे पल याद आ गए जब वह कली के साथ बैठकर यही डिश खा रहा था, और कली उसके सामने बैठी अपने डैडा की रईसी का बखान कर रही थी, और उसे ड्राइवर समझ रही थी।

लेकिन एक बात तो थी कि भले ही कली उसे प्रिंस नहीं ड्राइवर समझ रही थी, बावजूद वह उसे तब भी इंसान समझ रही थी।

आज प्रियदर्शनी के साथ बैठकर उसे वो सारे दिन याद आते जा रहे थे। वो बड़े मजे से ब्रेड पकौड़ा खा रहा था। लेकिन प्रियदर्शिनी के गले से वो स्ट्रीट फ़ूड नीचे नहीं उतर रहा था…

खाने के बाद वो वहाँ से उठा और मुस्कुरा कर बिल भर कर आगे बढ़ गया।
कली की याद भर से वो इतना खुश हो गया था कि उसका ध्यान साथ बैठी प्रियदर्शिनी पर गया ही नहीं..
वो खुद उसके पीछे चल पड़ी..
वो लोग अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ गए..

“अब कहाँ चलना है ?” उसने प्रियदर्शिनी  से पूछ लिया.

“मुझे शॉपिंग करनी है तो ‘ज़ारा’ चलते हैं.. !”

शौर्य ने ड्राइवर को आगे बढ़ने का आदेश दिया और खुद सीट में सर टिका कर बैठ गया…
प्रियदर्शिनी को ये खुद में खोया सा लड़का बड़ा अजीब लगा रहा था.. पहली बार जब उसने इसे देखा था, तब तो ये ठीक ठाक बातचीत कर रहा था। फिर अचानक अब क्या हो गया जो ऐसे गहरे सन्नाटे में डूबा बैठा था।

कुछ देर में ही वो लोग ‘ज़ारा’ पहुँच गए..
प्रियदर्शिनी उतर कर शॉप के अंदर चली गयी… उसका ध्यान बस कपड़ो की कीमत पर अटका था, उसकी पसंद पूरी तरह सिर्फ प्राइस टैग पर अटकी पड़ी थी।

एक तरह से वो अपने होने वाले दूल्हे की परीक्षा लेने ही यहाँ आयी थी…।
उसने एक एक कर के पांच छह महंगी ड्रेसेस निकाल ली और बाहर काउच पर बैठे शौर्य के पास चली आयी..

“देखो ये ड्रेस कैसी लग रही?”

“अच्छी है !” एक नजर डाल कर शौर्य ने कहा और वापस अपनी मैग्ज़ीन में घुस गया..

“इनमें से कौन सी अच्छी है ?”

“सारी ही अच्छी है.. तुम्हे जो पसंद हो वो ले लो !”

शौर्य ने एक नजर देख कर कह दिया.. और प्रियदर्शिनी
भी उसे जांचने के लिए बोल पड़ी..

.”मुझे तो सारी पसंद है, सब ले लूँ ?”

शौर्य ने ऊपर देखा और हाँ में गर्दन हिला दी..

“वैसे इनकी कॉस्ट क्या है ?”

पहली बार अपने जीवन में उसने ये सवाल किया था, क्यूंकि कली से मिलने के पहले तक उसे अपने ही पैसो की कदर कहाँ थी?

वो तो कली के साथ रहते हुए उसने पैसो ही नहीं रिश्तों नातों का भी मोल सीख लिया था..

प्रियदर्शिनी ने मुस्कुरा कर जवाब दिया -“ज्यादा नहीं ये चार ड्रेस मिल कर एटी सेवन थाउसेंड हो रहा है.. !”

“हम्म ले लो !”

“ज्यादा तो नहीं है ना ?”

“नहीं तुम्हारे लिए ज्यादा नहीं है !”

“व्हाट डू यू मीन, मेरे लिए ज्यादा नहीं है।
तुम भी तो प्रिंस हो ! तुम्हारे लिए कैसे ज्यादा हुआ ?”

“मैंने अब तक कामकाज कहाँ शुरू किया है..? आज से ही हर्ष भाई का ऑफिस ज्वाइन करने का सोचा था, लेकिन जा नहीं पाया।
अब तुम्हे तुम्हारी मौसी के घर ड्राप कर के ऑफिस जाऊंगा !”

“व्हाट चिक्स.. ये सब क्या बकवास है.. तुम्हे ये सब करने की क्या ज़रूरत ?”

“ज़रूरत है, तुमने भी तो हर्ष भाई के साथ सगाई के वक्त कहा था ना, तुम अपना कैरियर बनाना चाहती हो, बिज़नेस वीमेन बनना चाहती हो.. तुम्हे तो मेरे मन के भाव समझने चाहिए !”

“ओह्ह नो.. तुमने उन बातों को सच मान लिया था क्या?  मैंने बस तुम सब पर इंप्रेशन मारने के लिए ये सब कहानी सुनाई थी। वरना मैं सिर्फ अपने पापा के पैसे बहाने में यक़ीन करती हूँ.. ।
और आगे भविष्य में अपने पति के पैसे उड़ाना मेरा प्रिय शग़ल होगा समझे !

“हम्म.. चलो मैं बिल पे कर दूँ.. !” शौर्य बिल काउंटर पर खड़ा हुआ कि उसके कार्ड को पीछे कर किसी ने अपना कार्ड बढ़ा दिया..
शौर्य आश्चर्य से उसे देखने लगा..

“देखिये ये मेरा बिल है, मैं पे कर लूँ फिर आप कर लीजियेगा !”

“सर मैं आपका ही बिल पे करना चाहता हूँ.. !”

शौर्य ने आश्चर्य से उस आदमी की तरफ देखा, शौर्य उसे पहचानने की कोशिश कर रहा था..
वो आदमी बढ़िया शानदार कपड़ो में उसके सामने खड़ा मुस्कुरा रहा था..
शौर्य को चेहरा पहचाना सा तो लगा, लेकिन नाम बिलकुल याद नहीं आ रहा था..

“सॉरी लेकिन मैं आपको जानता नहीं !”

“सर आप मुझे पहचानते हैं.. !” वो लड़का मुस्कुराने लगा.. उसने अपनी शर्ट की जेब से एक चेक निकाला और उसे खोलकर शौर्य के सामने कर दिया..

“अब याद आया कुछ?”

शौर्य ने ध्यान से देखा वो एक चेक का फोटोस्टेट था.. जिसमे शौर्य के ही हस्ताक्षर थे.. अचानक शौर्य को कुछ दिन पहले रास्ते में टकराया वह लड़का याद आ गया जिसे पैसों की बहुत जरूरत थी और वह एक तरह से गिड़गिड़ा रहा था।
उस वक्त शौर्य ने उसके हाथ में 2 करोड़ का चेक रख कर उसके सामने शर्त रखी थी कि वह अपने माता-पिता को छोड़ दे और अपना अलग आशियाना बसा ले। हालांकि उन बातों के बाद शौर्य ने उसे दो करोड़ का चेक दे दिया था, और साथ यह भी कहा कि उसे अपने माता-पिता को छोड़ने की जरूरत नहीं।

शौर्य यह सब करके आगे बढ़ा ही था कि उस लड़के का एक्सीडेंट हो गया था, हालांकि उसे वहीं मौजूद लोगों ने उठाकर अस्पताल भेज दिया था..

“तुम.. तुम तो.. !”

“हाँ सर मैं वही आदमी हूँ जिसकी मदद के लिए आपने बिना सोचे समझी दो करोड रुपए का चेक दे दिया था। उस दिन आपने मेरी ग्रह दशाओं को अलग मोड़ दे दिया था। मेरी किस्मत में शायद मुफ़लिसी और गरीबी ही लिखी थी, लेकिन आपकी मदद ने मेरी उन ग्रह दशाओं का मुंह मोड़ दिया।

आपसे चेक लेकर मैंने जेब में डाला ही था कि दूसरी तरफ से आई एक गाड़ी ने मुझे बहुत जोर का धक्का दे दिया। मैं वही रास्ते पर गिर पड़ा। वहां मौजूद लोगों ने मुझे उठाकर उसी गाड़ी वाले की ही मदद से अस्पताल पहुंचाया। मैं बेहोश तो हुआ था, लेकिन अंदरूनी तौर पर मुझे कोई बहुत ज्यादा जख्म नहीं आए थे।
  लेकिन जो आदमी गाड़ी चला रहा था, उसने बहुत ज्यादा शराब पी रखी थी।
  इसलिए उस पर पुलिस केस हो गया। यह केस कोर्ट तक ना पहुंच जाए, इसलिए उस आदमी ने मुझे आउटसाइड कोर्ट सेटलमेंट की बात कही। और मैं भी इस बात के लिए राजी हो गया।

उसने मुझे बदले में ढेर सारे रुपए देने की बात कही, उसके बदले मैंने उससे कहा कि ‘रुपए नहीं चाहिए, अगर आप वाकई मदद करना चाहते हैं तो नौकरी दे दीजिए।’ मैं पढ़ा लिखा तो था ही उसने मेरी बात मान ली और मुझे अपने ऑफिस में नौकरी दे दी।

उसके ऑफिस की पॉलिसी के हिसाब से मेरी एलिजिबिलिटी वाले एम्पलाइज को घर और बाकी सुविधाएं भी दी जाती थी। और इसलिए मैं भी उन सुविधाओं के घेरे में चला आया। मुझे उस आदमी की तरफ से एक रहने लायक फ्लैट और ऑफिस आने-जाने के लिए ऑफिस की गाड़ी मुहैय्या करवा दी गई।
मेरे पास आपका चेक वैसे का वैसा रखा था। पता नहीं क्यों मेरे दिमाग में यह बात आई कि अगर यह चेक मेरी जेब में रहेगा तो आपकी ब्लेसिंग हमेशा मेरे साथ रहेंगी। इसलिए मैंने इस चेक का फोटो स्टेट निकाल कर अपने पास रख लिया…।

मुझे उस ऑफिस में काम करते हुए लगभग चार-पांच दिन बीते थे। एक दिन जब मैं एक जरूरी मीटिंग अटेंड करके लेफ्ट में दाखिल हुआ, तभी मेरे बॉस भी वहां चले आए। मैं उनके साथ लिफ्ट में मौजूद था। उसी वक्त उन्हें दिल का दौरा पड़ा, मैं उनके साथ था। मैंने उन्हें सहारा दिया और तुरंत अस्पताल ले गया। जहां पर डॉक्टर्स ने उनका इलाज शुरू कर दिया। समय पर इलाज हो जाने से उन्हें बचा लिया गया, और वही मेरी मुलाकात उनकी बेटी से हुई…।

आप यकीन नहीं मानेंगे उनकी बेटी से मिलना एक सुखद संयोग था। क्योंकि कॉलेज के दिनों में वह मेरी क्लासमेट हुआ करती थी। मैं गुंजन से दोस्ती करना चाहता था, लेकिन उसके और मेरे स्टेटस में जमीन आसमान का फर्क था। इसलिए कभी उससे बात करने की भी हिम्मत नहीं की। एनुअल फंक्शन के दौरान हम दोनों ने प्रोजेक्ट साथ में किया था, इस दौरान हमारी थोड़ी बहुत बातचीत हुई थी। लेकिन उसके बाद हमारी बहुत कम बातें हुई। उस दौरान मैंने कभी यह महसूस नहीं किया कि गुंजन भी शायद मेरे लिए कुछ सोचती है।

लेकिन जब मैं हॉस्पिटल में उससे मिला, तब मुझसे मिलते ही उसके चेहरे की खुशी कुछ और बयां कर रही थी। वह भी मुझसे मिलकर सुखद आश्चर्य में डूबी खड़ी थी। उसने अपने पापा की जान बचाने के बदले मुझे बार-बार आभार व्यक्त किया, और उसके पापा के अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद उन लोगों ने मुझे डिनर पर घर पर आमंत्रित किया।

मैं पहली बार उनके घर गया था और उस शानदार घर में उनके साथ बैठकर खाना खाने के बाद मुझे एक बार फिर से आपकी याद चली आई। मुझे लगा आप भी ऐसे ही महलों के राजा होंगे, जिसने बिना आगे पीछे सोचे मुझे वह दो करोड़ का चेक दे दिया, जो असल में मेरे लिए मेरी बंद किस्मत के ताले की चाबी निकली।

इसके बाद आप यकीन नहीं करेंगे सर, मेरे बॉस ने कुछ दिनों बाद मुझे अपने केबिन में बुलाकर कहा कि वह मुझे अपना दामाद बनाना चाहते हैं। मैं कुछ सोच समझ पाता उसके पहले ही उनकी बेटी का मेरे फोन पर मैसेज आने लगा, मैंने उससे बात की और उसे कहा कि मैं एक बार पहले अपने घर वालों से बात करना चाहता हूं, मेरे घर वालों को इस रिश्ते से क्या आपत्ति हो सकती थी।

हां हमारे दोनों घरों के स्टैंडर्ड में बहुत अंतर था। लेकिन मेरे बॉस ने मुझे आश्वासन दिया कि वह हमारे इस अंतर को हम पर या खुद पर हावी नहीं होने देंगे। और बस अभी दो दिन पहले ही मेरी इंगेजमेंट हो चुकी है।

बॉस ने ऑफीशियली मुझे अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है।
और आपको यह बताते हुए मुझे बेहद खुशी हो रही है कि, यह ‘ज़ारा’ का शोरूम हमारा ही है। तो सर आज का आपका बिल मेरा नाम होता है।”

शौर्य के आश्चर्य और खुशी का ठिकाना नहीं था। उसने आश्चर्य से उस लड़के को देखा।

“एक बात जानना चाहता हूं, अगर मेरा दिया चेक तुम्हारे लिए लकी है तो तुम उसका फोटो स्टेट लेकर क्यों घूम रहे हो?”

” सर आपके चेक पर तीन महीने की मियाद लिखी है।अगर वह किसी और के हाथ आ गया तो मेरा लक उस दूसरे के हाथ चला जाएगा ना, अपनी किस्मत अपने ही हाथ में रखना चाहता हूं ।
इसलिए फोटो स्टेट को अपनी जेब में लेकर घूमता हूं। और आपके दिए चेक को अपने घर की तिजोरी में बंद रखता हूं। आपके यह दस्तखत आपने एक चेक पर नहीं बल्कि मेरी जिंदगी पर किए हैं।
   और इसके लिए मैं आपका जिंदगी भर शुक्रगुजार रहूंगा। अगर कभी भी मेरी जरूरत पड़े, तो मुझे याद कर लीजिएगा। वैसे मैं जानता हूं कि मेरा ऐसा कहना बेमानी है। क्योंकि आप खुद राजा है, और आपको कभी मेरी जरूरत नहीं पड़ेगी।”

” ऐसी बात नहीं है दोस्त, हर एक इंसान की अपनी खुद की किस्मत होती है। और मैं राजा नहीं हूं, सिर्फ राजा का बेटा हूं। और जरूरी नहीं की हर एक राजा का बेटा राजा ही बने।”

” सर सच कहूं तो, मैं नहीं जानता कि आप किसके बेटे हैं? लेकिन आपकी डेस्टिनी आपके माथे पर लिखी है। आपके चेहरे पर दिखता है कि आप बहुत प्रतापी हैं।”

” चलो बहुत अच्छा लगा तुमसे मिलकर, वैसे जाते-जाते एक आखरी सवाल और तुमसे पूछना चाहता हूं, तुम्हारा नाम क्या है?”

“सर मेरा नाम शांतनु है! और ये मेरा कार्ड है.. ! सर आप मेरे लिए भगवान से भी बढ़कर है। हो सकता है उम्र में आप मुझसे छोटे ही हो, लेकिन आपके लिए मन में जो श्रद्धा है, जो भावना है, उसका कहीं कोई मुकाबला नहीं।
दो दिन बाद अपने बिजनेस सेटअप के लिए मैं लंदन जा रहा हूं। मेरा बहुत मन था कि लंदन जाने से पहले एक बार कहीं तो मैं आपसे मिलूं, और इत्तेफाक देखिए आज ही आपसे मुलाकात हो गई, सर ईश्वर ने चाहा तो हम जल्दी ही वापस मिलेंगे..।”

ज़रूर मिलेंगे दोस्त !”

शौर्य उस लड़के के गले से लगा और उसके कंधे थपथपा कर आगे बढ़ गया….

क्रमशः 

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Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago

Very interesting and Imotional n Fantastic n Fabulous n Bahtareen part

Arun Kumar
Arun Kumar
1 year ago

🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰

Nisha
Nisha
1 year ago

Ise kahte hain sanjog.shauray ne kabhi socha nahi hoga ki wo check kisi ki jindgi badal dega bina wo paise nikale.ye shaurya ke parents ke punay pratap ka fal hai jo shaurya ki kismat me bhi aaya hai kali se milne ke baad use paison ka mol samjh aa gaya jo pahle nahi tha.sachha pyar hame hamesha sahi rah dikhata hai.priydarshini achhi ladki nahi hai uska royal bahu banne ka sapna adhura hi rah jana hai

Meera Patel
Meera Patel
1 year ago

वाह शांतनु कैसे मोड़ पर मिला है और उसकी खुली किस्मत की कहानी सुनकर तो शौरी पर और ही लाड़ आ रहा है, हाय नज़र न लगे !!
बस ye priyadarshini se पीछा छूटे बस, 😕
और ये लड़का लंदन जा रहा है मतलब आगे भी शायद इस से मुलाकात होनी बनती है ।
ये जो अपनी खुली किस्मत को शौरी के नाम कर रहा है मुझे लगता है कली से मिलने का रास्ता भी बन पाए ये !!

Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

बहुत खूबसूरत, लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️💐💐💐💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐

Archana Singh
Archana Singh
1 year ago

Very interesting part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻

Mandeep kaur
Mandeep kaur
1 year ago

Outstanding part🌹👌🌹👌🌹👌🌹👌👌👌👌🌹🌹🌹🌹🌹

Rajkumar
Rajkumar
1 year ago

Heart touching very emotional part apne to Rula Diya 👌👌👌👌🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Mukesh Duhan
Mukesh Duhan
1 year ago

Nice ji

Darshana datta
Darshana datta
1 year ago

Beautiful part 👌🏻 sach achchi hamesha apna rasta nikalte hum tak pahoch hi jati hai aur kahavat hai na achche aur sachche logo ke saath ishwar kabhi kuch galat ya bura nahi hone denge ☺️humara pyara Shaurya ❤️ beautiful soul🥰 Kali Shaurya ke dimag Mai chal Rahi hai matlab Dil Mai jagah banali hai.