
जीवनसाथी -3 भाग -87
“चलो !”
“कहाँ ?”
“दिल्ली ? “
“पर आपके पास वक्त नहीं था ना !”
शोवन ने परी को घूर कर देखा और उसे एक तरफ कर अंदर घुस गया.. मुस्कुरा कर परी भी अंदर चली गयी.. उन दोनों के बैठते ही पायलट ने उड़ान भर ली..
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हर्ष के फ्लैट पर चारों लड़के साथ बैठे थे, सभी बातों में लगे थे लेकिन शौर्य का किसी बात में मन नहीं लग रहा था…
बाक़ी तीनो का इस बात पर ध्यान चला गया था..
“शौर्य तू बैठे बैठे बहुत बोर हो रहा है, जा ना कॉफी बना ले !”
यश के ऐसा कहते ही धनुष ने उसे टोक दिया..
“वो प्रिंस है और तुम प्रिंस को ऑर्डर दे रहे हो !”
“मैं भी तो प्रिंस हूँ.. और ऑर्डर नहीं दिया, बस उसे एक अच्छा टाइम पास बता रहा हूँ.. ! अगर न बनाना चाहे तो तुम ही बना लो.. !”
यश ने धनुष को कहा और धनुष कंधे उचका कर खड़ा हो गया..
“नहीं रुको धनुष.. मैं बनाता हूँ !”
और शौर्य उठ कर किचन में चला गया.. किचन में उनका रसोइया खाना बनाने की तैयारी में था, उसे हटा कर शौर्य कॉफी बनाने लगा, लेकिन बात बात पर उसे कली की याद आ रही थी..
कली के साथ बनायी पहली कॉफी, उसके साथ बनाया नाश्ता.. कली का उसकी बातों को ध्यान से सुनना, उसे ड्राइवर समझ कर हमेशा उसकी मदद करना, अपने डैडा की रईसी का बखान करना और सबसे ज्यादा तो राजा अजातशत्रु के नाम पर उसका ब्लश करना.. आखिरी बात सोचते हुए शौर्य को हंसी आ गयी.. उसने सोचते सोचते गलती से कॉफी अपनी ऊँगली पर गिरा ली..
उसकी इन हरकतों को रसोई में मौजूद स्टाफ बड़े ध्यान से देख रहा था..
“हुकुम आप एक तरफ हो जाइये, हम कॉफी बना कर लाते हैं !”
अब तक अपने ख़यालो में खोये शौर्य ने जैसे ही स्टाफ की आवाज़ सुनी वो जैसे होश में आ गया..
“हाँ कॉफी बन तो गयी है.. लेकर आ जाओ !”
वो बाहर चला आया..
वो बाहर आया तब हर्ष फ़ोन पर बात कर रहा था उसके आते ही हर्ष ने फ़ोन रखा और उसकी तरफ देखने लगा..
“शौर्य, परी आ रही है !”
“यहाँ..? लेकिन अचानक कैसे ?”
“पता नहीं. उसने तुम्हे पूछा और कहा कि कुछ बहुत ज़रूरी बात बतानी है.. मैं उसे लेकर आता हूँ..!”
“हम्म.. कॉफी ले लीजिये पहले !”
शौर्य ने उदासी से कहा और उसके मन की उदासी को समझ कर हर्ष भी रुक गया.. वो चारों ही लोग सोचने पर मजबूर हो गए कि अचानक ऐसा क्या हुआ कि परी यूँ अकेली चली आ रही है….
वो लोग कॉफी पी रहे थे कि उनकी डोरबेल बजी, नौकर ने जाकर दरवाज़ा खोल दिया, सामने परी खड़ी थी..
उसे सामने देख सब चौंक गए..
“मैं तो आ ही रहा था लेने !”
“हाँ लेकिन हम लैंड कर चुके थे, इसलिए फिर सब्र नहीं हुआ, वैसे भी हम अकेले नहीं आये हैं !”
परी के ऐसा बोलते ही उसके पीछे से शोवन भी अपना बैग संभालते अंदर चला आया..
उसे देख धनुष अपनी जगह से खड़ा होकर उस तक पहुँच गया..
“भाई आप यहाँ ? अचानक कैसे ?”
“अचानक कहाँ, शोवन की यहाँ एक मेडिकल कॉन्फ्रेंस हैं उसी में भाग लेने ये आने ही वाला था यहाँ, हमें भी हर्ष भाई और शौर्य से मिलने आना ही था तो हम दोनों साथ चले आये।”
शोवन झूठ बोलने में बहुत कच्चा था, उसके मुहं से झूठ नहीं निकलता था और ये बात परी जानती थी, उसने लपक कर बात संभाल ली..
“अच्छा भाई की कॉन्फ्रेंस है, और मुझे नहीं पता.. ?”
धनुष गहरी भेदभरी आँखों से शोवन को देखने लगा, शोवन उससे नजर बचा कर अंदर दाखिल हो गया..
ये फ्लैट काफी बड़ा था और ये सभी लोग अक्सर यहाँ आया करते थे, इसलिए हर्ष ने सभी के रूम बनवा रखे थे.. अभी कुछ समय पहले हुए रिनोवेशन में और भी कमरे बन गए थे …
शोवन सीढ़ियां चढ़ कर ऊपर अपने कमरे में चला गया..
उसे जाते देखने के बाद परी वहीँ बैठ गयी..
“गाइज़ तुम सब को एक बहुत ज़रूरी बात बतानी थी, इसलिए मैं भागती हुई चली आयी !”
“क्या हुआ परी ?”
“हर्ष भाई मैं शौर्य को कॉल में भी बता सकती थी, लेकिन मुझे लगा मिल कर बताना ही सही रहेगा..
भाई रानी माँ शौर्य भाई की शादी की तैयारियों में लग गयी हैं..
“क्या ?”
शौर्य आश्चर्य से उसे देखने लगा..
“हाँ मैं सच कह रहीं हूँ ! असल में हर्ष भाई ने अपनी पसंद से शादी करने की बात कह दी है, इसलिए रानी माँ बहुत खफा सी हैं.. और अब उनका ध्यान इस बात पर है की शौर्य की शादी उनकी पसंद की लड़की से हो जाये..।
और आज महल की सारी रॉयल लेडीज़ ने मिल कर उस परिवार को शाम की चाय पर बुला भी लिया है.. बल्कि अब तक वो लोग घर आकर शौर्य से उनकी बेटी की शादी पक्की कर भी चुके होंगे !”
“कौन है वो लोग ?”
“प्रियदर्शिनी और उसके मॉम डैड !”
“व्हाट ? लेकिन बडी माँ क्यों उन लोगो से नाता जोड़ना चाहती है ?” यश चीख पड़ा..
“पता नहीं.. मुझे लगा शौर्य को इस बारे में बता दूँ ? कहीं ऐसा ना हो कि रानी माँ शौर्य की तरफ से वचन दे दे और बाद में कुछ हो ही ना पाए.. बस इसलिए मुझे लगा कि शौर्य एक बार उनसे बात कर के सब कुछ रुकवा ले.. !”
शौर्य का दिमाग काम ही नहीं कर रहा था… एक तो अभी अभी कली गयी थी, वो उसी दुःख में डूबा था कि उसके सर पर एक नया बम फ़ूट गया था..
“क्या सोच रहे हो शौर्य ?”
“कुछ समझ ही नहीं आ रहा हर्ष भाई !”
“तुम ये शादी करना चाह्ते हो या नहीं ?”
“अभी तो मैंने शादी को लेकर कुछ सोचा ही नहीं…
वो अपनी बात पूरी कर पाता उसके पहले ही उसके मोबाइल पर उसकी बडी माँ का फ़ोन आने लगा..
उनके फ़ोन को ना उठाने की गुस्ताखी वो नहीं कर सकता था.. उसने उनका वीडियो कॉल उठा लिया..
उसके कॉल उठाते ही उसकी रानी माँ ख़ुशी से चहक उठी और उन्होंने उसे वही बात बता दी, जो उसे कुछ देर पहले ही परी बता चुकी थी..
“शौर्य, तुम्हारे लिए एक बहुत प्यारा सा सरप्राइज है हमारे पास, और हम जानते हैं तुम हमें कभी निराश नहीं करोगे। यही तो अंतर है तुम में और तुम्हारे बड़े भाई में.. तुम कभी हमें निराश नहीं करते शौर्य और इसीलिए तुम हमारे लाड़ले हो.. !”
मुस्कुरा कर रूपा ने प्रियदर्शिनी को स्क्रीन के सामने खींच लिया..
प्रियदर्शिनी ने शौर्य को देख कर अपना हाथ हिला दिया और हल्के से मुस्कुरा दी..
शौर्य को भी ना चाहते हुए मुस्कुराना पड़ा..
“शौर्य कैसी लगी हमारी पसंद ?”
रूपा के सवाल पर शौर्य कुछ बोलता उसके पहले हर्ष ने फ़ोन ले लिए..
“माँ साहेब.. !” हर्ष के कुछ बोलने से पहले रूपा बोल पड़ी..
“अरे हर्ष तुम भी हो यहाँ, ये देखो कौन आया है हमारे घर.. हमारी प्यारी प्रियदर्शिनी वापस आ गयी है हर्ष.. !
रूपा ने प्रियदर्शिनी को एक तरफ से अपनी बाँहों के घेरे में ले लिया, उसे देख कर हर्ष एकदम से कुछ कह नहीं पाया और रूपा वापस बोलने लगी…
“हर्ष, शौर्य हमने सोच लिया है कि प्रियदर्शिनी ही हमारी बहु बनेगी.. क्यों शौर्य सही सोचा ना हमने ?”
“आप कब गलत होती है रानी माँ ?”
शौर्य की बात सुन कर रूपा मुस्कुरा उठी..
“तो सुनो बॉयज, कल प्रियदर्शिनी दिल्ली आ रही है अपनी मासी के घर ! शौर्य, प्रियदर्शिनी जब तक वहाँ रहेगी वो तुम्हारी ज़िम्मेदारी रहेगी.. उसे शॉपिंग करवाना घुमाना फिराना और उसका ध्यान रखना ये सब तुम्हारा काम रहेगा, और इस पर तुम्हारा कोई बहाना हम नहीं सुनेंगे, हमने कह दिया बस कह दिया.. सुन रहे हो ना शौर्य !”
“सुन रहा हूँ रानी मॉम… और मैंने कभी आपकी बात टाली है क्या ? आप बस आज्ञा करिये, आपका ये बेटा आपके हर हुक्म को मानेगा रानी मॉम !”
“बस हमारे दिल को ठंडक तुम ही देते हो शौर्य, कल प्रियदर्शिनी को लेने एयरपोर्ट वक्त पर पहुँच जाना !”
रूपा ने फ़ोन रख दिया…
वहाँ मौजूद हर कोई शौर्य को देखने लगा..
“ये कहने की क्या ज़रूरत थी, अब वह मुसीबत यहीं आ रही है.. उसे कौन झेलेगा.. ?”
परी ने कहा और हर्ष भी चिंतिंत सा उसे देखने लगा..
“आप लोग परेशान मत हों… मैं देख लूंगा !” शौर्य ने कहा और उठ कर अपने कमरे में चला गया
उसका मन किसी काम में नहीं लग रहा था, उसे समझ नहीं आ रहा था कि अचानक इतना सूनापन सन्नाटा क्यों छा गया था उसके जीवन में..
क्या ज़िन्दगी में किसी एक इंसान की इतनी अहमियत हो जाती है कि उसके अकेले के चले जाने से पूरा संसार सूना हो जाता है…
वो अपने कमरे में चुपचाप बैठा था… उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था..
उसे हर वो पल याद आ रहा था जब कली उसके साथ थी..
वो अकेला बैठा था, और उसकी पूरी मण्डली उसके पास चली आयी.. यही तो खासियत थी इन सब दोस्तों की, की एक का दुःख सबका दर्द बन जाता था और एक की ख़ुशी सबकी हंसी में बदल जाती थी… कहीं ना कहीं हर्ष यश और धनुष शौर्य की तकलीफ समझते थे..
उन लोगो के साथ परी भी वहाँ मौजूद थी..
“मैंने सूना है शोवन कुकिंग भी करता है,मतलब शोवन हमारे ग्रुप का गोरा मास्टरशेफ है !” यश ने शोवन को छेड़ दिया..
“हाँ फिर ? अपनी मॉम को रोज़ कॉफी पिलाने से कोई मास्टरशेफ नहीं हो जाता? तेरी एक बात तो सही है, लेकिन दूसरी सही नहीं है.. मतलब शोवन गोरा तो है लेकिन मास्टरशेफ.. उन्हुँ.. !”
परी भी यश का साथ देने लगी…
शोवन चुपचाप बैठ कर कॉफी पी रहा था, उसने आँख उठा कर एक बार परी को देखा और फिर अपनी कॉफी पीने लगा..
“अरे लगता है डॉक्टर साहब हमारी बात से नाराज़ हो गए.. परी ये तेरी ही गलती है, तू ही हमेशा छेड़ती है शोवी को !”
“मैं कहाँ छेड़ती हूँ, मैं तो बस इतना ही कहूँगी गोरे रंग पे ना इतना गुमान कर, गोरा रंग दो दिन में ढल जायेगा !”
परी का गाना सुन कर परी और यश ठहाका लगा कर हंस पड़े और हर्ष ने दोनों को घूर कर चुप करवा दिया..
“मुझे नहीं पता शोवन को खाना बनाना आता है या नहीं लेकिन मुझे थोड़ी बहुत कुकिंग आती है.. अगर तुम सब साथ दो तो चलो आज हम सब मिल कर कुकिंग करते हैं.. !”
हर्ष शौर्य का मूड सही करना चाहता था और इसलिए उसने ये बात रखी थी जिस पर सब सहर्ष राज़ी हो गए..
“हाँ हाँ क्यों नहीं.., हर्ष भाई अगर खाना बनाएंगे तो खाना बहुत मीठा बनेगा ! क्यों हर्ष भाई ?”
यश ने बोला और सब हंसने लगे, लेकिन शोवन यश को देखने लगा..
“नहीं हम सब मिल कर रिसोटो बनाएंगे और वो मीठा नहीं बनता.. हैं ना हर्ष ?”
“यस ऑफकोर्स शोवन !” हर्ष ने हल्के से मुस्कुरा कर कहा और बाकी सब धीमे धीमे हंसने लगे..
“नहीं शोवन भाई, असल में हर्ष भाई को आजकल सिर्फ मीठा पसंद है !”
.यश के ऐसा बोलते ही, धनुष ने धीमी सी फुलझड़ी छोड़ दी…
“मीठा नहीं मीठी.. !”
हर्ष ने धनुष की बात सुन ली और उसकी तरफ हलके से घूर कर देखा लेकिन इन सब की ये सारी बतकही में शौर्य के चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी…
“बना लो हर्ष भाई खाना, मैं खुद पहुँचाने चला जाऊंगा, जिसके लिए भी हर्ष भाई स्पेशली बोलेंगे !”
शौर्य के ऐसा कहते ही हर्ष ने आगे बढ़ कर शौर्य को अपनी बाँहों में भर लिया, उसके पीछे ही यश भी उन दोनों से चिपक गया..
मुस्कुरा कर धनुष भी उन से चिपक गया..
शोवन एक तरफ खड़ा उन लोगो को देख रहा था, परी ने उसका हाथ पकड़ कर खिंचा और अपने भाइयो से लिपट गयी….
वो सारे रॉयल ब्लड एक साथ किचन में पहुँच गए.. रसोई में काम करने वाले सारे हेल्पर्स एक तरफ हो गए और ये सारे लोग एक साथ मिल कर खाना बनाने लगे….
हँसते खेलते बातें करते वो लोग खाना बनाते जा रहे थे..
शोवन सब्जियां काट रहा था, बीच बीच में उसके पास आकर परी ढेर सारी सब्जियां उसे देती जा रही थी..
शोवन का रोज़ का काम तो था नहीं, उसे ये सब करने में वक्त लग रहा था.. और परी उसका काम बढाती जा रही थी…
यश और शौर्य मसाले और बाकी चीजे देख रहे थे, हर्ष और धनुष अलग व्यस्त थे, उसी समय परी शोवन के पास कुछ लेकर आयी और उसे काटने का तरीका बताने लगी कि सबकी नजर बचा कर शोवन ने उसे घूर कर देखा और धीमे से बोल पड़ा..
“बदली बदली सी लग रही हो ?”
“नहीं तो !” शोखी से उसने कहा और उसके माथे पर अटकी एक लट को शोवन ने धीमे से हटा दिया.. उसकी उँगलियाँ परी के माथे से होकर गुज़र गयी..
परी सहम कर रह गयी.. वो चौंक कर इधर उधर देखने लगी और उसके चेहरे की घबराहट देख शोवन मुस्कुरा उठा..
दूर खड़े धनुष की नजर भी उन्ही दोनों पर थी, वो भी हल्का सा मुस्कुरा कर दूसरी तरफ घूम गया..
आखिर उन सभी दोस्तों ने मिल कर शौर्य के मन में छाया अँधेरा फ़िलहाल के लिए मिटा दिया..
एक साथ गाते बजाते खाना बनाने खाने के बाद देर रात सब लोग सोने चले गए….
अगली सुबह से सब का अपना काम शुरू होना था..
सुबह उठ कर नाश्ता कर हर्ष और धनुष अपने काम से निकल गए.. यश देर से उठता था इसलिए वो बाद में ऑफिस जाने वाला था और शौर्य को प्रियदर्शिनी को लेने एयरपोर्ट जाना था.. हालाँकि उसका मन बिलकुल नहीं था लेकिन अपनी बडी माँ की बात काटना उसके लिए बहुत कठिन था…
वो भी तैयार होकर एयरपोर्ट निकल गया….
परी सुबह सोकर उठी तब तक घर से सभी लोग निकल चुके थे.. वो अपने कमरे से बाहर आयी तो वहाँ मौजूद हेल्पर्स ने उसे बता दिया की हर्ष ने उसे भी ऑफिस में बुलाया है..
परी ने शोवन के लिए पूछा पर वहाँ मौजूद किसी को शोवन के बारे में पता नहीं था..
वो उसे फ़ोन लगाने जा रही थी कि दरवाज़ा खुला और पसीने से तरबतर शोवन अंदर चला आया..
“सुबह सुबह कहाँ गायब हो गए थे.. ?”
“वाक पर चला गया था लेकिन एक बात थोड़ी अजीब लगी मुझे.. ?”
“वो क्या ?”
“बताता हूँ, लेकिन हर्ष कहाँ हैं ?”..
“भाई तो ऑफिस निकल गए, क्या हुआ ?”
“एक अजीब बात नोटिस की है मैंने.. शाम में सब लौट आये फिर बताता हूँ !”
“शाम तक तो मेरे पेट में ऐसी मरोड़ उठेगी की सहन नहीं कर पाऊँगी.. साफ़ साफ़ बताओ ना !”
“हम्म.. ! बताता हूं।”
क्रमशः

Sabhi bhai mil kar sath me Pari or Mithi bhi mil kar Mast kaertaya hya khana banaya or khaya,seeing in the next part.
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Cute shaurya apni badi ma ki baat kabhi nahi talta hi par kab tak.raj pariwar ke sare bachhon ko ek sath ek dusre ki samsya hal karte dekhker aur haste khelte dekhker dil khush ho jata hai . lovely part mam 😘😘😘😘😘🥰🥰🥰🥰🥰👌👌👌👌👌👌
बच्चों की जिंदगी कितनी अलग होती है सब एकदूसरे पर जान छिड़कते है
रूपा भाभी ने अपनी बात मनवाने के चक्कर ने शौर्य को कहाँ फँसा दिया
लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️💐💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐⭐
Bahut khoobsurat part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻
मस्त भाग👌🏻👌🏻 सारे की सारे मिलकर प्रियदर्शिनी की बच्ची को भगा के ही दम लेंगे देखना।👍🏻
Lajawab shandaar awesome superb fantastic part ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️
Superb part
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻
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