जीवनसाथी-3 भाग -86

जीवनसाथी -3 भाग -86

वासुकी के माथे की नस चटकने लगी थी, जितना ही इस सब के बारे में नहीं सोचना चाहता था, उतना ही इस सब में डूबता चला जा रहा था..
लेकिन उसने तय कर लिया था, जो उसे करना था !!

वो तेज़ी से चलता हुआ एयरपोर्ट के अंदर चला आया..
इसी बीच जब वासुकी बाहर था, उस वक्त कली ने अपना फ़ोन निकाला, उसके फ़ोन पर मीठी का मिस्ड कॉल था, दर्श की तरफ एक नजर डाल कर उसने मीठी को कॉल लगा लिया…
मीठी अब तक अपने फ्लैट पर पहुँच चुकी थी..
कपडे बदल कर अपने पलंग में आराम से बैठी मीठी ने हर्ष को फ़ोन लगा लिया था.. दोनों बातों में लगे थे ! उन दोनों के सामने अब सबसे बडी समस्या थी, घर वालो को मनाना, और इसी बात पर दोनों विचार विमर्श कर रहे थे..

“हर्ष, सबसे बडी प्रॉब्लम तो मैं खुद क्रिएट कर आयी हूँ !”

“क्या हुआ मीठी ?”

“उस दिन जब तुम्हे सब बताया और तुम अचानक गायब हो गए तब मुझे लगा कि तुमने मुझे नहीं समझा और मुझे छोड़ गए हो। बस इसीलिए मुझे भी गुस्सा आ गया और घर लौट कर मैंने मम्मा से कह दिया कि मैं तुम्हे भूल जाउंगी..
पापा को तो कुछ पता ही नहीं है अभी.. !”

“निरमा चाची सा ने क्या कहा तुमसे ?”

“वो क्या कहेंगी, उन्हेँ वैसे भी मेरा महल में घूमना पसंद नहीं.. मम्मा शुरू से ही महल से जरा दूर दूर रहना ही पसंद करती है… और जैसे ही मैंने ये कहा कि मैं तुम्हे भूल जाउंगी वो खुश हो गयी..
अब उनसे वापस कैसे कहूं कि मम्मा उस दिन मैं गुस्से में थी और आप प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो और मेरी बात मान जाओ !”

“यही कहना पड़ेगा, वरना वो मानेंगी कैसे.. ऐसा करो अभी उन्हेँ फ़ोन कर लो.. !”

“ना बाबा, अभी हिम्मत नहीं है मेरी ! दो एक दिन में बात कर लूंगी !”

“ओके !” उन दोनों की बातों के बीच कली ने मीठी को फोन लगाया लेकिन उसका फ़ोन व्यस्त आता देख फ़ोन काट दिया..
फ़ोन पर किसी की रिंग सुन जब तक मीठी देख पाती फ़ोन कट चुका होता, इसलिए वो वापस हर्ष से बातों में लग गयी..

कली परेशान हो गयी.. उसे लगा कम से कम किसी से तो बात हो जाये और वो अपना हालचाल बता सके.. उन सब को बता सके कि वो लंदन जा रही है। 

लेकिन उसकी बात नहीं हो पायी.. उसी बीच वासुकी वापस आकर उसके बाजु में बैठ गया..।
उसी समय मीठी ने फ़ोन रखा और कली के चार मिस्ड कॉल देख कर उसे कॉल लगा लिया।

कली ने बगल में बैठे वासुकी को देख मीठी का फ़ोन नहीं उठाया..
वासुकी ने जब दोबारा फोन रिंग होते देखा तो कली को फोन उठाने का इशारा किया, और भले ही कितनी भी नाराजगी में हो, लेकिन कली की निजता का ध्यान रखते हुए उठकर चहल कदमी करते हुए वहां से जरा दूर चला गया।।

अपने पिता को देखकर कली की आंखें भर आई। उसे खुद पर ग्लानी होने लगी।

चार दिन की मुलाकात में वह शौर्य और महल वालों के लिए इतनी भावुक हो गई कि अपने पिता का प्यार उनका स्नेह सब भूल गई।
उसने मन को कड़ा कर फोन उठा लिया।

       कली के फोन उठाते ही मीठी चहक उठी।

“कहां चली गई कली? हम सब से मिली भी नहीं। शौर्य बता रहा था कि तुम्हारा डैड आए हैं, जो तुम्हें वापस लंदन लेकर जा रहे हैं।”

कली ने खुद को संभाल कर खनकती हुई आवाज में मीठी को जवाब दिया।

“हां मीठी मैं वैसे भी सिर्फ दस दिन के लिए आई थी, वह मुझे वापस लेने आए हैं। डैडा से मिलने के बाद इतनी खुश थी कि आप लोगों से विदा भी नहीं ले सकी और निकल गई।”

” तो इसका मतलब तुम सीधे लंदन जा रही हो?”

” हां वापस जा रही हूं हमेशा के लिए।”

“क्या बोल रही हो? हम सबसे एक बार मिलोगी भी नहीं? अच्छा एक मिनट, तुम अभी हो कहां पर हो, हम लोग वहीं आ जाते हैं, तुमसे मिलने।”

” ना ना अभी आप मत आना। मैं एयरपोर्ट पर ही हूं। और अंदर तो आप लोगों को आने मिलेगा नहीं। मेरा भी सिक्योरिटी चेक हो चुका है, अब मुझे बाहर जाने नहीं मिलेगा। इसलिए हम फोन पर ही गुड बाय कह लेते हैं।”

” कली यह तो बहुत गलत बात है, हम इतने दिन साथ में रहे तुमने आज तक अपना एड्रेस तक नहीं बताया। हम लोगों के पास तुम्हारा लंदन का कोई नंबर भी नहीं है।”

” मैं सब कुछ भेज दूंगी, आप लोग कभी भी लंदन आना तो हम जरूर मिलेंगे। मीठी आप सबके साथ मेरे यह दस दिन कब बीत गए, मुझे पता भी नहीं चला। थैंक यू सो मच।”

” इतनी फॉर्मल मत हो कली, हम दोबारा जरूर मिलेंगे। तुम याद से लंदन पहुंचने के बाद मुझे मैसेज करके बता देना कि तुम ठीक से पहुंच गई हो।”

” हां जरूर बता दूंगी।”

” और सुनो, अपना लंदन का नंबर भी दे देना।”

” हां।”

” और अपना एड्रेस भी मत भूलना।”

“जरूर।”

कली ने इससे ज्यादा कोई बात नहीं की। मीठी को लगा सब कुछ सामान्य है। कली ने अपना दर्द, अपने आंसू अपने अंदर छुपा लिये,और फोन काट दिया। फोन वापस पर्स में रखने के बाद वह धीरे-धीरे चलती हुई अपने डैड के पास पहुंच गई। वासुकी उससे काफी दूर खड़ा था। एक रेलिंग पर अपने दोनों हाथ टिकाए वह दूर रखें एक बड़े से फिश एक्वेरियम को देख रहा था।

कली पीछे से गई और दोनों हाथों से उसे पकड़ कर उससे लिपट गई। कली के ऐसा करते ही वासुकी चौंक गया, उसने धीरे से गर्दन घुमाई और पीछे खड़ी कली को देखा। वह उसकी तरफ घूम गया, उसने कली का चेहरा अपने हाथों में भर लिया।

” क्या हुआ कली?”

“डैडा आई एम सॉरी, मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। मैंने जिंदगी में पहली बार आपसे झूठ बोला, लेकिन यकीन मानिए इस झूठ के पीछे यही कारण था कि मैं इंडिया घूमना चाहती थी। इंडिया के शहरों को देखना चाहती थी। अपने पैरों पर खड़ी होना चाहती थी। खुद कुछ करना चाहती थी। और इन दस दिनों में मैंने यह सब कर लिया। प्लीज़ गलत मत समझिएगा, शौर्य और बाकी सभी लोग सिर्फ मेरे दोस्त हैं। मेरे मन में उनमें से किसी के लिए कोई गलत बात नहीं है डैडा।
      आपकी कली आज भी बिल्कुल वैसे ही है, जैसी आपने उसे इंडिया भेजा था। हां बस एक गलती हुई है कि आपसे झूठ बोलकर मैं यहां आई, लेकिन आपकी कली आपसे प्रॉमिस करती है, कि आज के बाद ऐसा दोबारा कभी नहीं होगा।”

वासुकी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई। वासुकी ने उसके सर पर हाथ फेर कर उसके माथे को चूम लिया।

” चलो हमारी फ्लाइट का वक्त हो गया है।”

अपनी बाहों के घेरे में अपनी प्यारी सी लाडली कली को थाम कर वासुकी फ्लाइट के लिए आगे बढ़ गया। उनके पीछे ही दर्श और सारिका भी बढ़ गए।

         कली की जिंदगी से इंडिया का यह अध्याय आज अपने आखिरी चरण में पहुंच गया। गेट से अंदर एंट्री करते हुए कली पल भर के लिए गेट पर थम गई, लेकिन उसने मुड़कर नहीं देखा।
अपने डैडा की हथेली पर अपने हाथ की पकड़ मजबूत करते हुए वह आगे बढ़ गई…

कुछ ही देर में वह सब अपनी लंदन जाने वाली फ्लाइट पर सवार हो गए और फ्लाइट इंडिया से टेक ऑफ कर गयी…

****

सुबह का वक्त था… महल में आज नाश्ते के टेबल पर सारी महल की महिलाएं ही मौजूद थी। राजा साहब अपने बड़े भाई युवराज के साथ किसी जरूरी काम से दिल्ली गए हुए थे। महल की सभी महिलाएं साथ बैठी नाश्ता कर रही थी कि तभी रूपा ने बांसुरी की तरफ देखा और अपने मन की बात छेड़ दी।

“बांसुरी तुमसे कुछ कहना चाहती थी।”

बांसुरी ने रूपा की तरफ देखा और उसे कहने का इशारा कर दिया।

” जी कहिए भाभी साहब।”

” तुमसे एक दिन बात चल रही थी, वह बात अधूरी रह गई थी। उसी बात के सिलसिले में मुझे कुछ कहना था।”

” आप बोलिए न, आपको मेरी इजाजत की जरूरत नहीं है।”

” हां जानते हैं, हमें तुम्हारी इजाजत की जरूरत नहीं है। लेकिन फिर भी इजाजत लेना इसलिए जरूरी है, क्योंकि तुम भी एक मां हो आखिर, और हर मां को लगता है कि उसका सबसे ज्यादा हक उसके बच्चे के ऊपर होता है। हमें भी कुछ समय पहले तक यही लगता था कि हमारे हर्ष पर हमारा एकाधिकार है, जो कोई हमसे नहीं छीन सकता। हमें लगता था हम जो भी कहेंगे हर्षवर्धन उनका मान रखेंगे। लेकिन हम गलत थे।
हर्ष की और हमारी पसंद बिल्कुल अलग निकली, और इत्तेफाक से उन्हें वह पसंद है जो उनकी काकी सा ने  उनके लिए चुना है..
हम यह नहीं कह रहे कि इसका बदला हमें चाहिए, लेकिन हम शौर्य को भी हर्ष के बराबर ही प्रेम करते हैं। बांसुरी आज फिर तुमसे पूछते हैं कि क्या तुम शौर्य पर हमें उतना हक देता हो?”

” कैसी बात पूछ रही आप भाभी साहब? शौर्य आपका ही बच्चा है, अगर आप उससे सवाल करेंगी ना, तो वह आपको भी यही जवाब देगा कि मुझसे ज्यादा उस पर आपका हक है। मेरी बात तो यहां बैठी हर एक को पता है, क्यों जया भाभी? कुछ गलत कहा मैंने।”

   जया ने ना में गर्दन हिला दी।
लेकिन वहां बैठी जया, रेखा दोनों के चेहरे का रंग बदल गया। दोनों को महसूस होने लगा था कि रूपा शायद कोई ऐसी बात बोलने वाली है जिससे शौर्य के भविष्य पर असर हो सकता है। लेकिन वहां बैठी फुफू साहब इस बात से बड़ी खुश थी, कहीं ना कहीं इस सब के पीछे रूपा के मन में क्या चल रहा है, वह जानती थी।

“बांसुरी! हम शौर्य की शादी अपनी मर्जी से करवाना चाहते हैं, बोलो मंजूर है?”

” बिल्कुल मंजूर है, भाभी साहब! ये भी कोई पूछने की बात है? और यह आप हमसे क्यों पूछ रही है,ये आप के और शौर्य के बीच का मामला है। आप और शौर्य जाने, आपको जो भी करना है।”

” नहीं ऐसी मंजूरी नहीं चाहिए, हमारे हाथ पर हाथ रखकर वचन दो कि हम जिस लड़की से कहेंगे तुम शौर्य की उससे शादी करवा दोगी।”

बांसुरी के दिल में हूक सी उठने लगी। उसे समझ में आने लगा कि रूपा उसे अपनी बातों के जाल में उलझा रही है।

“भाभी साहब मैंने कहा ना, मुझसे ज्यादा शौर्य आपका बेटा है। आप उसे फोन लगाइए और उससे बात कर लीजिए। ये आप दोनों के बीच का मामला है, अगर आपकी पसंद शौर्य को भी पसंद है, तो मैं बीच में कभी कुछ नहीं बोलूंगी।”

” बस यही सुनना था बांसुरी, हम जानते हैं तुम कभी शौर्य पर हमें पूरा हक नहीं दे सकती। और तुमने वही किया, बातों ही बातों में एक प्रशासनिक अधिकारी ने एक सामान्य सी महिला को घुमा कर रख दिया। सब कुछ बड़ी चालाकी से तुमने शौर्य के ऊपर डाल दिया। जिससे अगर शौर्य को रिश्ता मंजूर न हो तो हम अपने मन की ना कर पाए। एक बार खुले मन से कहती तो सही की हां हम जिससे कहेंगे उसी से शौर्य का विवाह करवा दूंगी, तो क्या बिगड़ जाता बांसुरी।”
बाँसुरी ने वही रखा पानी का गिलास उठाया, दो घूंट पीकर गले को तर किया, लेकिन दिल जो सूखा जा रहा था उसका वह क्या करती?

वह समझ गई थी कि आज वह रूपा की बातों में फंस गई है। उसी समय वहां बैठी फुफू साहब बोल पड़ी।

” ऐसा नहीं होता रानी रूपा, अपने कलेजे के टुकड़े को कोई भी औरत ऐसे किसी को नहीं सौंप सकती, बातें करना अलग होता है, और हक देना अलग।

अब तुम्हारे लड़के की शादी अगर तुम्हारी पसंद से नहीं हो पा रही तो क्या तुम बांसुरी के लड़के की शादी भी अपनी मर्जी से करोगी? ऐसा नहीं हो सकता, बांसुरी का बेटा बांसुरी का है, और तुम्हारा बेटा तुम्हारा है। अब इस बात को मान जाओ कि तुम्हारा ना हर्षवर्धन पर हक रहा ना शौर्य प्रताप पर..।”

फुफू साहब का जलता हुआ तीर निशाने पर लगा और रूपा कलप कर अपनी जगह से उठ गई। उसने आंखों में आये आंसू पोछे और जाने को थी कि बांसुरी उसके सामने आकर खड़ी हो गई।

   रूपा का हाथ पकड़ कर बांसुरी ने अपने हाथों में ले लिया।

” भाभी साहब मैं वचन देती हूं कि आप जिससे कहेंगी शौर्य उसी से शादी करेगा ।”

रूपा के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई।

” भूल मत जाना बांसुरी।”

” नहीं मैं नहीं भूलूंगी।”

” तो ठीक है, आज शाम की तैयारी रखें। शाम को प्रियदर्शनी की मां और उसके पिता प्रियदर्शनी को साथ लेकर आ रहे हैं।”

प्रियदर्शनी का नाम सुनते ही वहां बैठी सभी औरतों के चेहरे का रंग बदल गया। रेखा तुरंत अपनी जगह से खड़ी हो गई।

” यह बात क्या हुई जीजा सा, उस लड़की ने हर्ष को गलत समझ कर उससे शादी तोड़ी थी और आप एक बार फिर उसी लड़की को हमारे घर में लाने की बात कर रही है?”

” रेखा उस वक्त उन्हें गलतफहमी हुई थी, वह लोग भी अचानक समझ नहीं पाए थे कि क्या हो रहा है? हर्ष का जेल जाना, उनके लिए किसी सदमे से कम नहीं था। लेकिन यहां से जाने के तुरंत बाद उन लोगों ने वापस हमसे कहा था कि वह हर्ष के लिए तैयार है। लेकिन तब तक हर्ष ने अपनी मन मर्जी हमें बता दी थी। बस इसीलिए मजबूरी में हम कुछ नहीं कह पाए। फिर बांसुरी से जब बात हुई तो हमने शौर्य के लिए उनसे कहा और वो लोग इस बात पर भी तैयार हो गए।

अब ऐसे में अगर हम मना करते हैं तो फिर हमारी क्या अहमियत रह जाएगी?”

” आप ठीक कह रही हैं जीजी सा, लेकिन आप खुद एक बार सोच कर देखिए। ऐसे लोगों का क्या हम विश्वास कर सकते हैं। राजा साहब राजनीति में है, बांसुरी स्वयं प्रशासनिक अधिकारी रह चुकी है। अगर इन लोगों पर किसी भी तरह की कभी कोई आंच आ जाए तो वह परिवार हमारा साथ कभी नहीं देगा। उल्टा वह हमें छोड़कर एक तरफ से निकल जाएंगे। राजनीति में तो राजनीतिक उठा पटक लगी रहती है। इतना तो आप भी समझती है ना?”

” हम सब समझते हैं रेखा, लेकिन हमारे मन की बात भी तो समझो। हमें वह लड़की बहुत पसंद है..।
अच्छा एक बात बताओ, अगर तुम्हारा यश तुम्हारा कहना ना माने तब क्या करोगी.. तब भी ऐसे ही तटस्थ बनी रहोगी क्या ?”

“बिलकुल जीजा सा, हम यही तो कहना चाहते हैं कि हमारी अपेक्षाएं ही नहीं किसी से। ना अपने बेटे से और ना उसके पिता से। इसलिए हम अपने में खुश रहते हैं। और हम अपने में खुश रहना सीख गए हैं। वैसे भी आजकल की जनरेशन ऐसी नहीं है, कि हम उन पर अपनी अपेक्षाओं का बोझ लादे।
  हमारे समय में और आज के समय में बहुत अंतर है जीजा सा। और इस बात को आप भी समझती, तो आप इतना दुखी नहीं होती।
हम मानते हैं हर्षवर्धन आपका एकलौता बेटा है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि आपका हर सपना, आपकी हर इच्छा का बोझ वह अपने कंधे पर लाद कर जिंदगी भर चलेगा। आप एक बार खुशी से उसकी खुशी को स्वीकार करके देखिए। वह जिंदगी भर आपके सामने नतमस्तक रहेगा।”

” यह सब बातें कहने में अच्छी लगती है रेखा, लेकिन जब खुद पर बीतती है ना, तब समझ में आता है।”

” यही तो आपको भी समझा रहे हैं, आप हर्षवर्धन शौर्य यश तीनों को अलग क्यों कर रही है? हमारे और बांसुरी के लिए हर्षवर्धन भी हमारा बेटा है, लेकिन आप बार-बार शौर्य को बांसुरी का और यश को हमारा बेटा बनाने पर तुली हुई है।”

रेखा और रूपा के बीच बात बढ़ती देखकर जहां फुफू साहब खुशी से दोहरी होती जा रही थी, वही बांसुरी को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आ रही थी। उसने रेखा के कंधे पर हाथ रखकर उसे चुप रहने का इशारा कर दिया।

” भाभी साहब मैं वचन देती हूं, शौर्य आपका बेटा है और आप उसके लिए जो भी चाहेंगे उसे स्वीकारना ही होगा। आप प्रियदर्शनी और उसके परिवार को बुला लीजिए, हमें उस लड़की में कोई कमी नजर नहीं आती।”

बांसुरी इतना कहकर रूपा के सामने हाथ जोड़कर वहां से निकल गई। लेकिन उसके मन पर जो बोझ था, यह सिर्फ वही समझ सकती थी। रेखा ने एक गहरी नजर से रूपा को देखा और हाथ जोड़कर वह भी बांसुरी के पीछे निकल गई। वह बांसुरी का दर्द समझ सकती थी।
प्रियदर्शनी उसे पसंद नहीं थी ऐसा नहीं था, लेकिन हर्षवर्धन के समय प्रियदर्शनी के परिवार ने जो किया था उसके बाद रेखा उन्हें किसी कीमत पर इस घर से जुड़े हुए देखना नहीं चाहती थी। उसकी समझ से बाहर था कि रूपा क्यों इस परिवार के पीछे लगी हुई थी। शाम को प्रियदर्शनी का परिवार आ रहा है यही बात उसे पसंद नहीं आ रही थी, और वह बांसुरी से बात करके यही समझाना चाहती थी कि भावुकता में बह कर शौर्य के लिए वह कोई ऐसा निर्णय न ले। लेकिन बांसुरी निर्णय ले चुकी थी और कही हुई बात से पलटना बांसुरी का स्वभाव नहीं था…।

रेखा भी उसके साथ चली गयी..
रूपा ने जया को शाम की तैयारियों को देखने कहा और खुद प्रियदर्शिनी के परिवार को निमंत्रण देने चली गयी… जया का भी मन इन सारी बातों से बुझ सा गया था, लेकिन बिना कुछ ज्यादा कहे वो चली गयी..

लेकिन इन सब के बीच वहाँ बैठी परी के दिमाग की घण्टी बजने लगी थी..

वो वहाँ से उठ कर अपने कमरे में चली आयी.. आते ही उसने शोवन को कॉल लगा लिया.. !

“क्या कर रहे थे डॉक्टर साहब? “

“कुछ खास नहीं.. ।”

“आप तो अपने पेशेंट में व्यस्त रहे होंगे।”

” अरे नहीं आज ऑफ लिया था, तुम्हें बताया तो था आज ऑफ लूंगा।”

” वाह, तब तो फिर कुछ पढ़ रहे होंगे।”

“तुम ने सच कहा पढ़ाई ही कर रहा था। पीजी भी तो करना है ना, उसके लिए पढ़ना तो करना पड़ेगा।”

” आप सब कुछ कर लीजिएगा। मरीज देख लीजिएगा, पढ़ाई कर लीजिएगा, बस परी के लिए ही आपको फुर्सत नहीं है!”

“ऐसी बात नहीं है परी, लेकिन तुम्हारे साथ जिंदगी बिताने के लिए तुम्हारे लायक भी तो होना जरूरी है।”

” ऐसा आपसे किसने कह दिया कि आप मेरे लायक नहीं है। और इस तरह की फालतू बकवास मुझे नहीं सुननी है। अच्छा सुनिए, आप तो बहुत बिजी होंगे  लेकिन मुझे किसी बहुत जरूरी काम से दिल्ली जाना है दो दिनों के लिए, तो सोचा आपको बता देती हूँ..।”

“कब जा रही हो, किसके साथ?”

” बस अभी कुछ देर में निकलूंगी पायलट  के साथ।”

” अकेली तुम्हें जाने की इजाजत मिल गई ?”

“परी को इजाजत न देने की हिम्मत किसमें है, यहां से ज्यादा दूर तो है नहीं, हर्ष भाई के पास पहुंचना है मुझे। शाम तक पहुंच जाऊंगी।”

” ऐसी क्या जरूरत हो गई कि अचानक जा रही हो?”

“मेरे भाई बहन है वहां, सब चले गए। मुझे उनकी याद आने लगी, इसलिए जा रही हूं। आपको सोचा बता देती हूं ।
   वैसे नहीं भी बताती, तो आपको कोई खास फर्क नहीं पड़ता। आप अपने मरीज और किताबों में डूबे रहते। लेकिन इसलिए बता दिया कि आप और निश्चिंत होकर अपने मरीजों में डूब सकेंगे, कोई परेशान करने वाली नहीं रहेगी ना।
वैसे मैं एक घंटे में निकल जाऊंगी, ओके बाय..।”

परी फ़ोन रख कर मुस्कुराने लगी….
उसने अपना दांव खेल दिया था, उसने अपनी माँ से कहा  कि उसे इसी वक्त दिल्ली जाना है, किसी बहुत ज़रूरी काम से उसे हर्ष भाई ने बुलवाया है..
उसकी बात उसके पिता कभी नहीं टालते थे.. उन्होंने घर के प्राइवेट विमान से उसे भेजने का प्रबंध कर दिया और फटाफट अपना सामान लिए वो महल के उस हिस्से की तरफ बढ़ गयी जहां से उसे उड़ान भरनी थी..

उसी वक्त शोवन का फ़ोन आ गया..

“कहाँ हो ?”

“बस निकलने वाली थी.. महल के पिछले तरफ के यार्ड पर जा रही हूँ… वहीँ से हमारा निजी विमान उड़ान भरेगा !”..

शोवन ने फ़ोन रख दिया और अपने फ़ोन को घूर कर परी ने वापस अपने बैग में डाला और आगे बढ़ गयी….
वो जैसे ही अपने विमान की तरफ बढ़ने लगी, दूर से तेज़ी से दौड़ कर आता हुआ शोवन नजर आ गया.. वो उसी तरफ आ रहा था और परी को देख लगातार हाथ हिलाता जा रहा था..
परी के चेहरे पर भीनी सी मुस्कान चली आयी वो भागता हुआ उसके पास चला आया..

“चलो !”

“कहाँ ?”

“दिल्ली ? “

“पर आपके पास वक्त नहीं था ना !”

शोवन ने परी को घूर कर देखा और उसे एक तरफ कर अंदर घुस गया.. मुस्कुरा कर परी भी अंदर चली गयी.. उन दोनों के बैठते ही पायलट ने उड़ान भर ली..

क्रमशः

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Arun Kumar
Arun Kumar
1 year ago

🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰

Nisha
Nisha
1 year ago

Ye toh Rupa ne galat Kiya . ab toh yahi prarthna hai ki shaurya kisi ki nahi balki apne dil ki sune.showan kitna pyara hai.pari ki ek baat par chala aaya 🥰🥰🥰🥰

Meera Patel
Meera Patel
1 year ago

आज रूपा सा ने ये अच्छा नही किया , बासूरी को fasa ही दिया अपनी बातों में और वचन ले लिया, शौरी की शादी का 🤧 और वो भी किस से ! उस प्रिया से !!
और ये प्रिया मैं ऐसा क्या देख लिया रूपा सा ने ?? पर आज रेखा मैं मैने पहली बार एक अपराजिता को देखा , पहले वाली बासुरि को आज मैने रेखा मैं देखा , आज जो वो बासुरी और शौरी के लिए रूपा सा से बात कर रही थी अच्छा लगा ।
क्या सारे कहानियों मैं बुआ इतनी ही कुटिल क्यों होती है , मुझे डर लगता है कही मजमे ऐसा कोई रोग न आ जाए , महादेव बचाना ऐसी बुआ ओ के किरदार से 😅🙊🫣
परी लव यू यार , सही समय मैं सही जगह पर थी तुम , अब जल्दी से दिल्ली पोहचो और हर्ष को बताओ उसकी माता श्री क्या करने जा रही है ,
सब मिल कर कोई तिगड़म लगाओ और भगाओ इस प्रियदर्शिनी को😤🥺😕

Archana Singh
Archana Singh
1 year ago

Very interesting part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻

Rajkumar
Rajkumar
1 year ago

Behtareen part 💕💕💕💕💕💕💕

Richa Anand
Richa Anand
1 year ago

Mam I love you most aapki story padh k din ban jaata h

Yogi
Yogi
1 year ago

रूपा रानी सा आप गलत कर रहे हों शौर्य कली का है और कली का रहेगा,, आपको मेरी आवाज़ सुनाई दे रही है ना,,?
हां सुनाई दे रही है तो सुनो आपको एक राज की बात बताती हूं
आप है ना कितनी भी कोशिश कर लो लेकिन होगा वही जो मिश्री दी रच राखा 😉।
और मैको क्या लगता है बताऊं आपको,,, कान इधर लाओ
हां ध्यान से सुनना अब मैं क्या कह रही हूं मैं कह रही हूं कि मिश्री दी है ना वो बहोत अच्छी हैं वो हैं ना शौर्य और कली को कभी अलग नहीं होने देंगी तो आप भी चुपचाप वो करो जो वो आपको करने को कहें,, समझे,,?

Manu verma
Manu verma
1 year ago

बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️⭐⭐⭐⭐⭐

Suman Thakur
Suman Thakur
1 year ago

Very nice part 🙏🙏❤️❤️🌹🌹

Gurpreet Kaur
Gurpreet Kaur
1 year ago

😊😊😊😊😊😊😊😊😊👍👍👍👍👍👍👍👍👍