मायानगरी-25

मायानगरी 25

 
इस बार मेडिकल जूनियर्स के लिए एक और नया सरप्राइस था क्योंकि इस बार मेडिकल और इंजीनियरिंग दोनों ही फैकल्टीज ने एक साथ मिलकर जूनियर्स को वेलकम पार्टी देने की सोची थी और इसलिए कुछ ज्यादा ही भीड़ भड़ाका बढ़ गया था।

  रिसोर्ट में दाखिल होते ही जूनियर्स पर गेट पर पहले से पहुंच मौजूद सीनियर्स ने फूलों की बारिश शुरू कर दी। इस बात के लिए जूनियर्स तैयार नही थे। ये देख सबके चेहरे खिल उठे।

    एक एक कर जैसे जैसे जूनियर्स अंदर बढ़ते गए उन्हें सीनियर्स के हाथों गुलाब मिलता गया। सभी को एकसाथ लेकर पहले अंदर के बड़े से हॉल में ले जाया गया। वहाँ नाश्ते का इंतजाम था।
   हॉल में हल्का संगीत बज रहा था। भीनी भीनी सी खुशबू हवाओ में फैली हुई थी। लड़के इंजीनियरिंग वाले भी थे और मेडिकल वाले भी। यह सारे लोग खाना देखते ही टूट पड़े। इन्हें जैसे ही नाश्ता दिखा ये कूद कर उस ओर पहुंच गए। लड़कियां थोड़ा झिझकती शरमाती सी प्लेट पकड़ कर आगे बढ़ गईं।

” अरे इतना सारा खा लोगे? ” झनक ने अपने एक सहपाठी की हद से ज्यादा भरी प्लेट देख उससे पूछ लिया…

“मेरी कैपिसिटी नही पता है तुम्हें झनक मैडम। और फिर यार इन सीनियर्स का भरोसा भी नही है। कुत्तों की तरह रैगिंग ली है हमारी, अब जाकर पहली बार तो ढंग से कुछ खिला रहे हैं ,तो खाओ भई। टूट के खाओ। बल्कि सुन न मैं डोनट्स नही ले पाया। प्लेट में जगह नही थी, तू अपनी में रख के अइयो।”

“यू आर इम्पॉसिबल!”कह कर झनक खाने की तरफ बढ़ गयी।

झनक और अनस नॉनवेज भी खाते थे जबकि रंगोली वेजिटेरियन थी, इसलिए रंगोली की प्लेट में फ्राइड इडली, पकौड़े और पनीर बस नज़र आ रहा था। वो भी रंगोली ने सिर्फ एक दो टुकड़े ही ले रखे थे। वो प्लेट परोसने के बाद झनक को ढूंढती उसके पास आ बैठी।
  झनक के प्लेट में नॉनवेज भी था। अनस भी वहीं आ बैठा…

“अरे ये क्या? सिर्फ घास फूस? तुम नॉनवेज नही खाती?”

  अनस चौन्क कर रंगोली की प्लेट देख उसे पूछने लगा।
रंगोली ने ना में सिर हिला दिया, और उठ कर पानी की बोतल लेने चली गयी।
  उसके जाते ही झनक अनस की तरफ झुक गयी…

” दिल टूट गया न तेरा। लड़की तो नॉनवेज खाती ही नही, अब ? शादी कैंसिल?”

“अबे क्या बोल रही है तू?”

झनक की बात सुन अनस एकदम से घबरा गया..

“किसने कहा शादी करना चाहता हूं वो भी रंग से?”

“बेटा ये जो तू बस में सात सुरों में मगन तान छेड़ रहा था न तानसेन बन कर, घर से निकलते ही कुछ दूर चलते ही… मुझे सब समझ आ गया था। और ये रंग रंग क्या लगा रखा है, सीधे से रंगोली बोला कर, समझा। “

“क्या बात कर रही यही यार! ऐसा कुछ नही है!”

“न ही हो तो अच्छा है । खुद को और अपने दिल को  अभी से समझा ले , क्योंकि तुम दोनो के बीच सिर्फ वेज नॉनवेज की बात नही है। हिंदू मुस्लिम एंगल भी है….और अब जैसी स्थितियां हैं एक परसेंट भी चांस नज़र नही आता मुझे, समझा?”

अनस चुपचाप बैठा अपनी प्लेट देख रहा था। उससे कुछ खाया नही जा रहा था। उसी समय दूसरे हाथ में दूसरी प्लेट लिए रंगोली चली आयी..

“मैं तुम दोनो के लिए भी स्वीट्स ले आयीं हूँ। अनस तुम्हें शाही टुकड़ा पसन्द है ना। तुम्हारे लिए दो पीस हैं।”

रंगोली ने प्लेट वहीं सामने रखी और अपनी प्लेट से वापस खाने लगी। अचानक अनस उठा और वहाँ से चला गया।

“इसे क्या हुआ?अचानक चला कैसे गया?”

रंगोली के पूछने पर न में गर्दन हिला कर झनक खाने में मगन हो गयी।

कुछ पांच मिनट में ही अनस वापस चला आया। और उन दोनों के पास ही आ बैठा…

“क्या हुआ कोपभवन के चौकीदारों ने लात मार के भगा दिया क्या, जो तुरंत वापस आ गया?”

झनक के सवाल पर अनस ने मुस्कुरा कर अपनी प्लेट आगे कर दी।

“नही। मैंने नॉनवेज छोड़ दिया। तो बस अपनी प्लेट में वेज खाना लेने गया था।”

“अरे वाह ! ये तो बड़ी अच्छी बात है।” रंगोली खुशी से चहकती उसे वेज खाने के फायदे गिनाने लगी और झनक ने अनस को घूर कर देखा और ‘इस सब का कोई फायदा नही है’ वाले भाव चेहरे पर लाये उसे घूरती रही। अनस झेंपते हुए मुस्कुराता रहा और रंगोली की बकवास बातों पर भी खुशी से सिर हिलाता बैठा रहा।

एक तरफ जूनियर्स बैठे थे तो वहीं दूसरी तरफ सीनियर्स भी खा पी रहे थे।
   प्राची इन सबसे दूर बाहर स्वीमिंग पूल के पास बैठी पानी को देख रही थी कि अपने हाथ में प्लेट लिए अधिराज वहीँ आ गया..
  उसने प्राची की तरफ प्लेट बढ़ा दी।

“मैं इतनी सुबह इतना कुछ नही खाती ।”

“थोड़ा कुछ तो ले लो। “

“नही अधिराज तुम खाओ। मेरा मन नही है।”

“प्राची किसी उलझन में हो क्या? कल से परेशान लग रही हो। सुनो , मुझ पर भरोसा कर सकती हो। अगर बताने लायक समझो तो अपनी मुश्किल मुझे बता सकती हो। “

प्राची ने अधिराज को एक नज़र देखा और वापस सामने बहते पानी को सूनी नज़रों से घूरने लगी।
  उसने अपने पर्स से एक सिगरेट निकाली और जला ली..

“यार तुम यहाँ भी शुरू हो गयी। इतने सारे स्टुडेंट्स हैं सब क्या सोचेंगे ?”

“मुझे कोई फर्क नही पड़ता कि कौन मेरे बारे में क्या सोचता है। मैं ऐसी ही हूँ। और दुनिया मेरे लिए अच्छा सोचे इसके लिए मैं खुद को नही बदल सकती।
  वो है ना मेरी एक बहन जो बहुत सीधी सादी है पर दुनिया उसे भी तो पागल ही कहती है।”

“किसकी बात कर रही हो तुम?”

” गौरी ! गौरी मेरी बहन है…!”

“क्या ? गौरी मैडम तुम्हारी बहन हैं? तुम्हारी सगी बहन?”

“हाँ ! और उसे देख कर उसकी कमज़ोरी देख कर मुझे आग लग जाती है। अरे उसने जो झेला है मैंने भी तो झेला है। कुछ अलग तो नही था हमारा बचपन। फिर भी उसे पागलपन के दौरे पड़ते हैं। अगर वो खुद को नही संभालेगी तो यही तो होगा न।
  
” तो क्या तुम्हारे जैसे खुद को संभाले ड्रग्स ले कर!”

  प्राची ने अधिराज को घूर कर देखा।

” ड्रग्स भले ही लेती हूं लेकिन खुद को आजतक खुद संभालती आयीं हूँ। मजाल मेरी मर्ज़ी के बिना कोई मेरा इतना सा भी बुरा कर जाए?”

“तो गौरी मैडम के साथ क्या हो गया अभी?”

“अभी ऐसा कुछ नही हुआ? उसके प्री फायनल एग्जाम हुए थे और उसमें उसके कुछ नम्बर कम आ गए तो मैडम ने अपनी नींद की दवाएं थोड़ा ज्यादा ही खा लीं।
  वो तो सही समय पर प्रिया ने मृत्युंजय सर को बुला लिया, और उन्होंने उसके रूम पर ही उसका स्टमक वॉश कर दिया। हालांकि प्रिया का कहना है कि उसने बहुत ज्यादा मात्रा में दवाएं नहीं लीं थी लेकिन फिर भी जो डोज़ है उससे ज्यादा लेना ही क्यों? पता नहीं क्यों इतना डिप्रेशन में चली जा रही है।”

” प्राची बुरा ना मानो तो एक बात पूछूं।

प्राची अधिराज की तरफ देखने लगी

“जब से हम मेडिकल में है तब से मैं तुम्हारा दोस्त हूं लेकिन आज तक मुझे नहीं पता था कि तुम और गौरी मैडम सिस्टर्स हो… तुम दोनों आपस में कभी बात क्यों नहीं करते?

“कुछ बातों का कोई कारण नहीं होता अधिराज। मेरी और उसकी जिंदगी इतनी कॉम्प्लिकेटेड है कि हम अगर सोचे भी कि हमें अपनी अपनी लाइफ सुलझाना है और इस दिशा में अगर हम कोशिश करना भी शुरू करें तो हम दोनों जानते हैं कि हम इसे और ज्यादा उलझा लेंगे। हम दोनों के बात करने या ना करने से कोई फर्क नहीं पड़ता।

” बहुत फर्क पड़ता है प्राची आखिर तुम दोनों एक खून हो। बहने हो,  तुम दोनों यहां एक दूसरे का सहारा बन सकते हो।

” बस वही तो नहीं बनना है। हम दोनों की परवरिश जिन माहौल में हुई है उसके बाद वह और मैं बिल्कुल अलग अलग हो गए। जमीन और आसमान का फर्क है उसके और मेरे स्वभाव में। मैं हमेशा मॉम के साथ रही और वो डैड के साथ। शायद इसी लिए वो ऐसी गुमसुम सी हो गयी? और मैं कुछ ज्यादा ही ….

कहते कहते अचानक प्राची खामोश हो गई…

” तुम नहीं समझोगे अधिराज भले ही हम दोनों के स्वभाव में फर्क हो, लेकिन एक चीज हम दोनों में कॉमन है,और वो है हमारा स्वाभिमान ।
     ना वह किसी में सहारा तलाशती है, और ना मैं । हम दोनों को ही किसी के सहारे की जरूरत नहीं है। इत्तेफाक से देखो हम दोनों ने ही यह मेडिकल की लाइन चुन ली, जिससे हम अपने पैरों पर खड़े रहे। “

” मैं जानता हूं प्राची, एक दिन तुम अपनी सारी परेशानियां मेरे सामने दिल खोलकर सुना सकोगी। और मैं भरोसा दिलाता हूं, तुम्हें कि मैं उस दिन का इंतजार करूंगा,पूरी शिद्दत से। और विश्वास करो या ना करो लेकिन तुम्हारे पीछे तुम्हारा यह दोस्त हमेशा खड़ा रहेगा। जिस किसी मोड़ पर तुम्हें मेरी जरूरत हो, तुम मुझे एक बार मुड़ कर मुझे देख लेना। मैं तुरंत तुम्हारे पास चला आऊंगा। “

प्राची ने अधिराज को देखकर एक स्माइल दी और उसकी प्लेट से एक छोटा सा पनीर का  टुकड़ा उठा कर अपने मुंह में रख लिया।

खाना-पीना निपटते  ही सारे जूनियर्स को लेकर सीनियर खुले ग्राउंड में चले आए। जहां ढेर सारी चेयर्स को एक बड़े से गोले में गोलाकार आकृति में सजाया गया था। नाश्ते के बाद अब गेम्स का टाइम था और यहां चेयर रेस होने वाली थी।
लेकिन ये चेयर रेस कोई सामान्य सी कुर्सिदौड़ नही थी। इसके लिए सभी सीनियर्स ने पहले सभी जुनीज़ को एक एक छोटे चुटके से बांटे और फिर…

“अब आप सभी के हाथों में एक एक पर्ची है। सभी की पर्ची में कुछ न कुछ लिखा है। किसी के में मुर्गी तो किसी के में मुर्गा। किसी के में आमिर खान तो किसी के में जो जीता वही सिकन्दर ।
   किसी के में मिर्ची और किसी के में मिर्ची का अचार। तो अब आप लोगों को करना ये है कि पहले अपनी अपनी फैमिली को ढूंढना है। यानी आमिर खान ढूंढेंगे अपनी फिल्म का नाम या फिर मिर्ची ढूंढेगी अपनी अचार की बरनी।
  और ये फैमली फंक्शन करने के लिए आपको समय मिलेगा पूरे 5 मिनट। जो भी इस अवधि में अपना परिवार नही ढूंढ पाया वो हो जाएगा इस परिवार से आउट। और फिर वो नही बन पाएगा इस गेम का हिस्सा।
  तो ये मजेदार फैमिली खोजो कार्यक्रम हम शुरू करतें हैं वृंदा की आवाज़ में बोले गए एक फैमली मूवी के सदाबहार फैमिली डायलॉग के साथ।
   तो आओ वृंदा और इस पारिवारिक गेम की शुरुवात का बिगुल बजा दो।”

  वृंदा मुस्कुरातें हुए सामने चली आयी….

“मेरे करण अर्जुन आएंगे। आसमान को चीर कर आएंगे। धरती की छाती फ़ाड़ के आएंगे। मेरे करण अर्जुन आएंगे..”

“वृंदा वृंदा !!! ब्रावो! वृंदा ने एक गज़ब फैमिली मूवी का अजब डायलॉग चिपका कर इस कार्यक्रम का श्रीगणेश कर दिया है तो भागो गांववालों और अपनी फैमली को खोजने में लग जाओ।”

   नेत्रा के व्हिसल बजाते ही सब इधर उधर भागतें एक दूसरे की पर्ची से खुद की पर्ची मिलाने लगे। उधर उधर भागतें दौड़ते एक एक कर सभी की जोड़ी बन ही गयी। 5 मिनट पूरे होने को थे लेकिन रंगोली को अब तक उसकी जोड़ी नहीं मिली थी। उसके पास की पर्ची पर लिखा था मिर्च का अचार , लेकिन अब तक उसे उसकी जोड़ी की मिर्ची नहीं मिलीं थीं। कि उसी वक्त हॉल में एक किनारे डीजे वाले लड़कों के साथ बैठा अभिमन्यु उठकर हाथ हिलाता चला आया।

” यह पर्ची मुझे वहां गिटार के पास गिरी हुई मिली थी यह किसी की है?”

उसने अपने हाथ में ले रखी पर्ची वृंदा के सामने कर दी। वृंदा ने एक नजर पर्ची को देखा रंगोली उस वक्त वृंदा के पास ही खड़ी थी वृंदा ने रंगोली की पर्ची देखी उस पर मिर्च का अचार लिखा था।

रंगोली ने आश्चर्य से अपनी पर्ची के बाद अभिमन्यु की पर्ची देखी और लाचारगी से झनक की तरफ देखने लगी। झनक रंगोली के पास ही खड़ी थी।

” व्हाट्सएप में एक सड़ा सा जोक पढा था मैंने,  कि लड़का चाहे खुद को कितनी भी तीखी मिर्ची समझ ले लेकिन उसकी बीवी उसका भी अचार बना कर रख देती है। वही हो रहा है तुम दोनों के साथ।
   यार रंग कभी-कभी लगता है कि तुम दोनों की जोड़ी सच में माया नगरी यूनिवर्सिटी ने बना कर दी है । यह हर जगह टपक पड़ता है यार।”

” इससे बचूं कैसे?”

” फिलहाल तो इसी को कपल बना के तुझे आगे का गेम खेलना पड़ेगा। रक्षाबंधन आते तक वेट कर , उसके बाद राखी बांध देना इस पापी को।”

” तो भाई अभिमन्यु जैसा कि यह रूल था कि जिनकी पर्चियां मिल जाएंगी वो  एक फैमिली के होंगे। और इत्तेफाक से यह पर्ची एक नॉन मेडिको के पास पहुंच गई है। तो एक बार मुझे मेरे गांव वालों से पूछना पड़ेगा कि हम तुम्हें शामिल कर सकते हैं या नहीं? अगर सब की रजामंदी हुई तो तुम भी हमारे इस कार्यक्रम का हिस्सा बन जाओगे ओके?”.वैसे तुम लोगों की पार्टी भी हमारे ही साथ चल तो रही है पर तुम हो सीनियर! “

अभिमन्यु से ऐसा बोलने के बाद वृंदा बाकी लोगों की तरफ पलटी और माइक में उसने बोलना शुरू किया…

” रामगढ़ वालों सुनो!! हमारी रामगढ़ में रहने वाली इस बसंती के मिर्च के अचार की मिर्ची रामगढ़ के बाहर से आ रही हैं।  तो क्या इस जय को जो हमारे रामगढ़ का नहीं है और अभी अभी फिलहाल जेल से छूट कर आया है रामगढ़ का हिस्सा बनाने को आप लोग तैयार हैं। “

सब उस वक्त मस्ती के मूड में थे, किसी को इस बात पर कोई खास एतराज नहीं हुआ कि एक बाहर का लड़का जो उनकी यूनिवर्सिटी का ही हिस्सा था उनके कार्यक्रम में शामिल होने जा रहा था।  सबने वोटिंग करके उसे भी शामिल कर लेने की इजाजत दे दी । अधिराज का वैसे भी अभिमन्यु के कमरे पर अक्सर आना-जाना होता था इसलिए वह अभिमन्यु को अच्छे से जानता भी था… उसी ने बाकी के लड़कों को मना कर सब की तरफ से रजामंदी दिलवा दी।  और इस तरह अभिमन्यु रंगोली का पार्टनर बन गया।

” हां तो अब जितने भी पार्टनर बने हैं वह सब अपने अपने पार्टनर के साथ एक एक लाइन में खड़े हो जाइए।”

रंगोली को अब भी यह सब करने में बड़ा संकोच लग रहा था। वह अभिमन्यु के पास तो खड़ी थी, लेकिन शर्म से जमीन पर गड़ी जा रही थी। इधर उधर नजर घुमा कर बस वह यही देख रही थी कि काश कोई उसकी क्लासमेट लड़की उसकी कपल बन जाती। लेकिन सभी लोग अपने अपने कपल के साथ बातें करने में और गेम जीतने की स्ट्रैटेजी बनाने में लगे हुए थे।
    एक वही थी जो शरम से छुईमुई होकर झनक का हाथ पकड़े खड़ी थी। झनक के दूसरी ओर अनस था जिसकी पर्ची पर आमिर खान निकला था और झनक थी जो जीता वही सिकन्दर।
        रंगोली के बाजू में खड़ा अभिमन्यु मुस्कुराते हुए कभी आसमान को देख रहा था तो कभी जमीन को।
     आर्केस्ट्रा बैंड वालों के पास बैठा अधीर वहाँ से अभिमन्यु को देख देख कर आड़े तिरछे मुंह बना रहा था। आखिर उससे रहा नहीं गया और उसने अपना मोबाइल निकालकर अभिमन्यु को एक मैसेज कर दिया…

मोबाइल पर आई बीप सुनकर अभिमन्यु ने जेब से मोबाइल निकाला और मैसेज पढ़ने लगा…

” कमीने इतना शरमा मत। शरमाते हुए तू और गंदा दिखता है।”
   अधीर का मैसेज पढ़ अभिमन्यु के चेहरे पर हंसी खेल गयी।

“साले सौ बार कहा है मेरे हुस्न से जलो मत बराबरी करो!”

“तू और तेरा फ़ोकट हुस्न। मैं जा रहा हूँ वापस।”

“अबे कसम से यार। गज़ब दिलजले हो तुम। मतलब तुम्हारा भाई एक सुंदर कन्या के बाजू खड़ा क्या हुआ तुम्हारे तनबदन में कतई आग लग गयी। अबे एक गेम हो जाने दो, फिर थोड़ा खा पी के खिसक लेंगे।”

” एक तो मेडिकोज उस पर इंजीनियर्स की पार्टी है। मतलब नीम पर चढ़ी करेले की बेल। दारू भी बहेगी यहाँ!”

“अबे नही यार। मायानगरी के सुथरे स्टूडेंट्स हैं। ये लोग दारू नही पीते।”

“अबे सेकंड ईयर के लड़के बिना पिए मानेंगे भी? छिपा रखी होगी कहीं किसी की गाड़ी में। पार्टी मतलब इन लोगों के लिए और क्या होता है?”

“साले तू सामने आकर गप्पे मार ले। इतना मेसेज मेसेज खेला नही जा रहा । तेरे चक्कर में गेम के रूल्स नही सुन पा रहा।

  और अभिमन्यु ने अपना फोन बंद करके जेब के हवाले कर दिया।

भूमि ने सबको लाइन में खड़ा किया, इसके बाद दो लड़कियां हाथों में एक बड़ी सी थाली लेकर चली आई। जिनमें अलग-अलग कलर के सैटिन रिबन रखे थे।
हर किसी के सामने से थाली को गुजारते हुए उन्होंने 1-1 सैटिन रिबन 1-1 जोड़े को दे दिया…

” अब यह जो रिबन दिखाई दे रहा है,ये आप के जोड़े का बंधन है। यानी आपको यह करना है कि कपल में एक का राइट लेग और दूसरे का लेफ्ट लेग एक साथ मिलाकर इस रिबन से आप बांध दीजिए और इसके बाद आप लोग तैयार हैं कुर्सी दौड़ में भाग लेने के लिए। जैसे ही  म्यूजिक बजना शुरू होगा आपको वैसे ही अपने कपल के साथ पैर बांधे बांधे  ही दौड़ना है। हर एक कपल के लिए एक ही कुर्सी निर्धारित है। एक बार में एक बैठेगा और दूसरी बार में  दूसरा बैठेगा। जब एक पार्टनर बैठा होगा तब दूसरे पार्टनर को बाजू में शांति से खड़े रहना है। दोनो एक साथ कुर्सी में आजूबाजू नही बैठ सकते वरना फाउल हो जाएगा और वो कपल गेम से बाहर।
   तो आइए हम सब गेम शुरू करते हैं। “

म्यूज़िक शुरू हुआ…..

     तू, तू है वही दिल ने जिसे अपना कहा
           तू है जहाँ, मैं हूँ वहाँ
      अब तो ये जीना, तेरे बिन है सज़ा
     मिल जाएँ इस तरह, दो लहरें जिस तरह
       फिर हो न जुदा, हाँ ये वादा रहा…..

म्यूजिक शुरू होते ही सारे कपल्स गिरते पड़ते भागने लगे। पैर बांधे हुए दौड़ने में बहुत दिक्कत आ रही थी…
    रंगोली को अभिमन्यु के साथ भागने में और भी ज्यादा संकोच लग रहा था लेकिन अभिमन्यु बराबर इस बात का ध्यान रखे हुए था कि उसका शरीर किसी भी तरीके से रंगोली से छुआ ना जाए और इसलिए अपने हाथ बांधे वह बहुत आराम से बढ़ रहा था। लेकिन रंगोली बहुत अधीरता से आगे बढ़ रही थी आखिर चलते-चलते अभिमन्यु ने उससे धीरे से कहा…

” मैं जैसा बोलता हूं वैसे चलना तो हम गेम जीत सकते हैं!”

” तुम्हें जरूरत क्या थी हम लोगों के गेम में कूदने की?”

” यह तो इस बार मेडिकल और इंजीनियरिंग वालों ने मिलकर किया है प्लान!! मैं इसमें क्या कर सकता हूं?”

” इंजीनियरिंग फ्रेशर्स के भी तुम करंट सीनियर तो हो नही। फिर तुम्हें क्या जरूरत थी यहां कर कूदने की।”

” लास्ट ईयर अपनी क्लास का सी आर था मैं। और इसलिए जूनियर की हेल्प करने की बनती है मेरी। भविष्य में मैं प्रेसिडेंट भी बनने वाला हूं।”

” जब जो बनना है तुम्हें, बनते रहो।  लेकिन मेरा दिमाग खाना बंद करो फिलहाल।”

” अरे मेरा पेट भरा हुआ है। अच्छे से नाश्ता करके आया हूँ ।और दूसरी बात मैं नॉनवेजिटेरियन नहीं हूं, जो तुम्हारा दिमाग खाऊं। अब तुम मेरी बात ध्यान से सुनो, अगर ऐसे ही लपड झपड़ चलती रही ना, तो ऊबड़ खाबड़ देश की राजकुमारी जी आप मुंह के बल गिरेंगी और आपके साथ मैं भी गिर पडूँगा।”

उसी वक्त म्यूजिक रुका और अभिमन्यु ने जो कुर्सी पकड़ रखी थी उसमें खींचकर रंगोली  को बैठा दिया और खुद खड़ा रह गया।
   लगभग 4 कपल इस राउंड में बाहर हो गए और उनके बाहर होते ही 4 कुर्सियां भी बाहर कर दी गई।
एक बार फिर म्यूजिक शुरू हो गया

       मैं आवाज़ हूँ तो, तू है गीत मेरा
        जहां से निराला मनमीत मेरा
             मिल जाएँ इस तरह…

अबकी बार जैसे ही म्यूजिक शुरू हुआ, कुछ कपल हड़बड़ा कर दौड़ने को हुए और इसी चक्कर में एक दो लोग संतुलन बिगाड़ कर गिर भी पड़े उन्हें देखकर रंगोली थोड़ा सा डर गई…

” इसलिए समझाना चाह रहा हूं कि अगर हमने अब सोच समझकर कदम नहीं उठाया तो हम भी या तो इनकी तरह गिर जाएंगे, या फिर गेम से आउट हो जाएंगे तो अगर जीतना चाहती हो तो मेरी बात ध्यान से सुनो। “

” कहो क्या कहना चाहते हो!’

” अब मैं जैसे ही कहूंगा वन तुम अपना लेफ्ट लेग आगे करना और जैसे ही कहूंगा टू वैसे ही राइट लेग आगे करना। इससे यह होगा कि हम दोनों के पैर जो एक साथ बंधे हैं वह एक साथ आगे बढ़ेंगे। और हम जितनी तेजी से आगे बढ़ते जाएंगे हमारे दोनों के पैर एक साथ आगे बढ़ने से ना तो हमारा बैलेंस बिगड़ेगा और ना हम गिरेंगे।  आई बात समझ में।

“हम्म” एक छोटा सा हूं बोलकर रंगोली अभिमन्यु की गिनती का इंतजार करने लगी….

गेम अब अपने पूरे रंग में था और जूनियर्स भी गेम में मगन होने की कोशिश कर रहे थे। सीनियर कोई गेम आसानी से करवा कर जीतने का मौका दे दे तो फिर वह सीनियर ही क्यों हुए भला….?

क्रमशः

aparna….
  
   

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