अपराजिता -127

अपराजिता – 127

यज्ञ और कुस्सम अस्पताल में थे कि यज्ञ के पिता बड़े ठाकुर भी वही चले आये..
वो भी चिंतित से यज्ञ के पास पहुँच गए, और पूछताछ करने लगे..

“यज्ञ, क्या हुआ अखंड की गाड़ी को ? कैसे हुआ ये एक्सीडेंट ?”

“पता नहीं बाबूजी, लेकिन यहीं के दो डॉक्टर उस समय उधर से गुजर रहे थे, उनके अनुसार अखंड भैया गाड़ी को रोकने की कोशिश कर रहे थे, और शायद गाड़ी उनसे रुक नहीं रही थी। जिसके कारण वो तेज़ी से एक तरफ को गाड़ी मोड़े और गाडी की रफ़्तार तेज़ होने से गाड़ी घूम कर पलट गयी..
उन डॉक्टर के अनुसार गाडी का ब्रेक नहीं लग रहा था शायद..
अभी पुलिस ने गाडी को जाँच पड़ताल के लिए भिजवा दिया है !
हमे खुद समझ नहीं आ रहा अचानक क्या हुआ, हमारी ही गाडी तो लेकर निकले थे भैया !”

उसी वक्त नर्स बाहर चली आयी..

“अखंड सिंह के साथ कौन है ? चलिए अंदर उन्हेँ होश आ गया है !”

ये बात सुन कर यज्ञ और उसके पिता तुरंत अंदर की तरफ चल पड़े..

अखंड को होश आ गया था, उसके माथे पर गहरी चोट होने से मरहम पट्टी के कारण उसका आधा चेहरा वैसे भी ढ़का हुआ था, इसी वजह से उसे रेशम पहचान नहीं पायी थी..
नाम सुनने के बाद भी उसने जानबूझ कर ध्यान नहीं दिया था.. वैसे तो इस नाम से ही उसे सिहरन सी होती थी, लेकिन अथर्व साथ था और उसे वो कुछ भी नहीं बताना चाहती थी..।
अखंड के होश में आने की खबर ड्यूटी रूम में बैठे अखंड और रेशम तक भी पहुँच गयी थी, और वो दोनों भी वहाँ पहुँच चुके थे..

अखंड होश में आ चुका है, ये बात पुलिस कर्मियों तक भी पहुंचा दी गयी थी, पुलिस केस था आखिर..

यज्ञ और उसके पिता को सबसे पहले अखंड से मिलने, बात करने का मौका दे दिया गया..

वो लोग उसका हाल चाल पूछ रहे थे कि अथर्व के साथ रेशम भी वहाँ पहुँच गयी..। अथर्व को पुलिस को देख कर ये चिंता हो गयी थी कि कहीं पुलिस उस पर ये इल्जाम ना लगा दे कि उन्ही की गाड़ी से टकरा कर ये एक्सीडेंट हुआ था, इसलिए वो भी अखंड के होश में आने के इंतज़ार में था। वरना अपना काम कर के वो निकल चुका होता..
इस हॉस्पिटल में उसका अपना कमरा भी था, जहां वो दोनों आराम कर सकते थे। वो लोग वहाँ जाने के बजाय नीचे वाले ड्यूटी रूम में ही उसके होश में आने का इंतज़ार कर रहे थे..
अखंड ने आंखे खोलने के बाद यज्ञ को सामने देखा और मुसकुराने की नाकाम सी कोशिश करने लगा..

“भैया अचानक ये एक्सीडेंट हुआ कैसे ? आपको होश नहीं आ रहा था, तो हम सब घबरा गए रहे !”

“पता नहीं यज्ञ, गाड़ी तेज़ रफ़्तार में चल रही थी। रास्ता सुनसान ही था, तभी सामने से आती गाड़ी देख कर हमने धीमा करने के लिए ब्रेक लगाना चाहा तो, ब्रेक लगे ही नहीं !”

“तो एक्सलेरेटर को छोड़ कर हैण्ड ब्रेक खींच लेते ना भैया !”..

“वही करने की कोशिश किये बाबू, लेकिन हैण्ड ब्रेक भी नहीं लगा हमसे !” अखंड के ऐसा कहने पर उसके बाबूजी बोल पड़े..

“हमको लगता है गाडी ख़राब हो गया है.. दोनों ब्रेक खराब था, और तुम ऐसी ख़राब गाड़ी लेकर निकलते ही कैसे थे यज्ञ ?”

“नहीं बाबूजी, कल ही हम गाड़ी लेकर गए थे, गाडी का ब्रेक लग रहा था, हमको लगता है ये किसी का बदमाशी है !”

यज्ञ गुस्से में मुट्ठियां भींचता खड़ा हो गया..

अखंड ने उसका हाथ पकड़ लिया.. -“इतना गुस्सा मत करो, घर पर कौन ये बदमाशी करेगा.. बोलो ?”

“वो हम देख लेंगे भैया, आप आराम कीजिये, वैसे भी अम्मा को बताये नहीं है आपके बारे में, अब यहाँ देखते है कि कब तक छुट्टी करने बोलते हैं डॉक्टर लोग !”

इन सब की बातचीत चल ही रही थी कि अथर्व के एक दोस्त का उसके मोबाइल पर कॉल आने लगा और वो बात करने बाहर चला गया.. सबसे पीछे रेशम हाथ बांधे खड़ी थी.. वो आगे नहीं बढ़ी क्यूंकि उसे अथर्व का इंतज़ार था..
इस मरीज़ के ठीक हो जाने और होश में आने का ही उसे इंतज़ार था।
इससे ज्यादा वो उसे कुछ बताना समझना नहीं चाहती थी, उसने अथर्व से भी बोला कि पुलिस उन्हेँ परेशान नहीं करेगी लेकिन अथर्व मरीज़ से मिल कर तसल्ली करना चाहता था, इसलिए रेशम भी चली आयी थी..।

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अखंड की नजर सब पर पड़ते हुए सबके बीच से थोड़ी सी नजर आती रेशम पर पड़ गयी, लेकिन वो इतनी ज़रा सी नजर आ रही थी कि अखंड उसे पहचान नहीं पाया !

कुछ देर में अथर्व आया और रेशम से कुछ बात करते हुए अपने साथ ले गया..
अथर्व के किसी दोस्त का जन्मदिन था, उसी ने अथर्व और रेशम को कैंटीन में बुला लिया था, इसलिए अथर्व रेशम को लेकर कैंटीन चला गया..

वहां मौजूद जो डॉक्टर्स अखंड को देख रहे थे, उन लोगो ने अगली सुबह छुट्टी कर देने की बात कही, लेकिन अखंड के बाबूजी उसे अस्पताल में छोड़ना नहीं चाह्ते थे..

“देखिये आप लोगो को और जो भी सूजी पानी देना है, दे दीजिये। लेकिन लड़के को हम अपने साथ ही लेकर जायेंगे। यहाँ रात बस के लिए छोड़ने का कोई औचित्य नहीं लग रहा, आप लोग कहेंगे तो एक आध मेल नर्स बुलवा लेंगे हम !”

बड़े ठाकुर की गरजती आवाज़ के सामने फिर सबकी बोलती बंद हो गयी..
पुलिस थाने से थाना प्रभारी ने आकर अखंड का बयान दर्ज़ कर लिया.. जिसके अनुसार किसी ने भी जानबूझ कर उसकी गाडी को टक्कर नहीं मारी थी.. बस उसकी गाडी के ब्रेक्स नहीं लग रहे थे.. गाड़ी को वैसे ही अनिर्वान ने जाँच के लिए भेज दिया था..

पुलिस कर्मी भी अखंड का बयान लिपिबद्ध कर वहाँ से चला गया..
अखंड की छुट्टी करने के पहले एक बार फिर वहाँ मौजूद डॉक्टर्स ने उसकी ड्रेसिंग कर दी.. कुछ ज़रूरी इंजेक्शन देने के साथ ही उसका डिस्चार्ज पेपर तैयार किया जाने लगा !

***

अनिर्वान थाने पहुंचा तब तक वहाँ उसके लिए एक अचम्भा इंतज़ार कर रहा था..
यज्ञ पर गोली चलाने वाला लड़का पकड़ा गया था..

अनिर्वान उसके सामने पहुँच गया..

“नाम क्या है तुम्हारा ?”

वो लड़का खुद को सुपारी किलर के तौर पर स्थापित करना चाहता था, लेकिन अब तक उसने एक भी सफल हत्या नहीं की थी..
ऊंटपटांग सस्ता भगोड़ा किस्म का चोर था वो..।
जो छोटी मोटी चोरियां कर करके थक चुका था। आज तक उसे कभी कहीं कोई बड़ा मौका नहीं मिला था। किसी ने उसके दिमाग में यह भर दिया था कि चोरी चकारी से ज्यादा अच्छा करियर हत्याएं करने में है। और इसलिए वह खुद को हत्यारा घोषित करके अपने करियर को ऊंचाइयां देने के लिए प्रयासरत था..।

वैसे तो हत्यारो की बस्ती में इसका कोई चर्चा ना था। वहां इसकी कोई पूछ परख नहीं थी, लेकिन एक दो बार कुछ कम जानकार लोगों ने इसे कुछ पैसों के बदले में हत्या करने की सुपारी दी थी। और उस समय भी यह अपने काम को सही तरीके से अंजाम नहीं दे पाया था। उन दो असफल प्रयासों के बाद पूरे एक साल खाली इधर-उधर घूमने के बाद उसे यज्ञ की सुपारी मिली थी। और इसलिए वह पूरी तैयारी के साथ उसे मारने गया था।

लेकिन इस बार भी उसकी किस्मत उसे दगा दे गई, और यज्ञ के कंधे को छूकर गोली निकल गई थी ।
वह वैसे तो अपना वेश बदल कर गया था, इसलिए उसे लगा था उसे कोई पहचान नहीं पाएगा। लेकिन जैसे ही उससे संपर्क करने वाले लड़के को पुलिस ने पकड़ लिया है इस बारे में उसे खबर लगी, वह तुरंत अपना सामान बांधकर अपने गांव के लिए निकल गया।

हालांकि उसके गांव का भी पता ठिकाना अनिर्वान ने निकलवा लिया था, और अपने लोगो को उसे पकड़ने भेज दिया था…

अब भी वो अनिर्वान के सामने ज़रा अकड़ कर बैठा था..

“नाम बताएँगे अपना श्रीमान ?”

“बादल.. बादल नाम है हमारा! वैसे हम सच बता रहे हम कुछ नहीं किये हैं !”

“तो फिर भागे क्यों बे ?”

“हम कहाँ भागे, हम तो अपने गांव गए थे ?”

“ऐसे बीच में कैसे ? ना होली ना दिवाली? तुम तो कामकाजी आदमी हो ?” अनिर्वान ने उसे पूछा, खुद के लिए कामकाजी शब्द सुन कर ही वो हर्ष से भर उठा..

“कभी कभी छुट्टी ले लेते हैं हुजूर !”

“काम क्या करते हो ? देखो सच सच बता दो वरना पुलिसिया तरीका हम तुम पर आजमाना नहीं चाह्ते वरना अभी एक थप्पड़ लगाएंगे ना जो सब अंदर उबल रहा उसे उगल दोगे !”

उस लड़के ने खुद को मजबूत बनाये रखा, लेकिन अनिर्वान को देख कर उसे हल्का सा डर लगने तो लगा था..

अनिर्वान अपनी बडी बडी आँखों से उसे लगातार घूर रहा था..

“बाबूराव… यहाँ पास ही जो समोसे वाला है उसका नाम क्या बताया था ?”

“हुज़ूर गिधौरी लाल समोसा वाले ! क्या हुआ हुज़ूर ?”

बाबूराव ने पूछा और उसी वक्त अनिर्वान उठ कर चहलकदमी करता हुआ उस लड़के से ज़रा दूर निकल गया.. उस लड़के ने बाबूराव की तरफ देखा..

“आप लोग समोसा भी खिलाते हो क्या ?”

बाबूराव ने ना में गर्दन हिला दी..

“उसका गरम कड़ाहा मंगवाते है फिर उसमे तुम जैसो की उँगलियाँ तल कर समोसे के साथ खा जाते हैं साहब ! ज़रा सर्वाहारी किस्म के हैं !”

उस लड़के की आँखों में हल्का खौफ तैरने लगा कि तभी पलट कर अनिर्वान आया और टेबल पर ज़ोर से अपना हाथ मार दिया..  अनिर्वान का हाथ इतना तेज़ पड़ा कि उसके कम्पन से बादल के बाल उड़ गए..

वो एकदम से घबरा गया और जो सब उसे पता था सब बोल गया..

“साहब हम छोटे मोटे चोर थे, बस पैसे कमाने के लिए ये सुपारी किलर बने हैं। लेकिन ढंग का आज तक कुछ कर नहीं पाए.. ये ठाकुर साहब के यहाँ गोली बारी के लिए हमें दीपक ने कहलवाया था, पचास हज़ार रूपये शुरू में दिए थे और बाकी काम होने के बाद देने वाला था। लेकिन बिना दिए ही डकार गया.. “

“गवाही दे सकते हो ना, कि दीपक ने तुम्हे अप्रोच किया था !”

“हुज़ूर उसके किसी आदमी ने हम से बात की थी, लेकिन पैसे वाली बात हुई तब उसने बात की थी !”

“हाँ यही बात बोलनी है तुम्हे ! दीपक को पहचानते हो? “

“हाँ हुज़ूर, एक बार मिल चुके हैं ! “

अनिर्वान ने बाबूराव को इशारा कर दो चार तस्वीरें मंगवाई और उसके सामने रख दी, उसमे से चुन कर उसने दीपक की तस्वीर पहचान ली..

अनिर्वान के इशारे पर उसे वापस अंदर डाल दिया गया..
अनिर्वान ने तुरंत दीपक को पकड़ने उसके घर की तरफ आदमी भेज दिए..
लेकिन दीपक नहीं पकड़ा गया.. वो अपने गांव घर में नहीं था..
उसके घर में एक बूढी सी औरत कामकाज कर रही थी उसी से पूछताछ कर पुलिस वाले अनिर्वान की गाडी तक चले आये..

“साहब वो घर पर नहीं है !”

“कब आएगा ?”

“उस बुढ़िया को नहीं मालूम, कह रही है पिछले पांच दिन से दीपक नहीं आया !”

अनिर्वान ने एक गहरी सांस ली और वापस गाड़ी की तरफ बढ़ने लगा तभी वहीँ पेड़ के नीचे चिलम फूंकते बैठे एक वृद्ध की आवाज़ उन लोगो के कानो में पड़ी..

“चला गया होगा अपने शहर वाले ठिकाने पे, वहाँ जाने के बाद वो कभी जल्दी लौटा है भला !”

अनिर्वान उस आदमी की बात सुन उसके पास पहुँच गया..

“दादा क्या बोल रहे हैं आप.. कहाँ हो सकता है इस वक्त दीपक !”

“बड़े कुंआ, पुराना बस्ती गजदलपुर में पता करवाइये, वहीँ बड़े कुंआ के सामने पुराना इमली का बहुत बड़ा पेङ है, उसी से लगा लाल पत्थरो वाला बंगला है दीपक का..!”

“उसका शहर में घर है? ये तो किसी को नहीं पता? अकेला रहता है क्या वहाँ ?”

“उसके इस घर के बारे में हमारे सिवाय किसी को नहीं मालूम.. और सुनिए बाबूजी, अकेला नहीं रहता है वो वहाँ… ।
वो चुड़ैल भी साथ रहती है। जिससे अलग होने के लिए उसको सौ दफा कह चुके है,लेकिन ये पागल किसी की सुनता ही नहीं !”

अनिर्वान के माथे पर बल पड़ गए..
उसने तुरंत गाड़ी शहर की तरफ घुमा ली और वहाँ से निकल गया.. !

***

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गीता घर पहुंची तब तक उसके दोनों बच्चे ट्यूशन पढ़ कर फारिग हो चुके थे, उनके खाने का वक्त हो चला था, लेकिन वो दोनों गीता का इंतज़ार कर रहे थे..

गीता को वो दोनों मम्मी ही बुलाते थे.. हालाँकि धीरेन्द्र से वो दोनों डरते थे, लेकिन उसे भी गीता के कहने पर पापा बुलाने लगे थे..
गीता ने जल्दी से कपड़े बदले और बच्चो को साथ लिए खाने की मेज पर चली आयी..

घर के नौकरो ने खाना टेबल पर सजा दिया.. अपने हाथो से दोनों बच्चो को निवाले खिलाती गीता उन्हेँ कहानी भी सुनाती जा रही थी, कि तभी शराब के नशे में धुत धीरेन्द्र लड़खड़ाता हुआ चला आया..

उसने गीता पर एक नजर डाली और लड़खड़ा कर डायनिंग पर आकर बैठ गया..
दोनों बच्चे उसके इस रूप से बहुत डरते थे, दोनों सहम गए..
गीता उन दोनों को खाना खिला चुकी थी, उसने उन दोनों को जाकर सोने का इशारा कर दिया..
वो दोनों चुपचाप उठ कर वहाँ से चले गए..

गीता ने धीरेन्द्र की तरफ देखा,वो उसे ही घूर रहा था..

“कहाँ घूम रही थी आज ?”

“कहीं नहीं !”

“घर से बाहर तो गयी थी, हमने खुद देखा है !”

“जब देखा ही है फिर पूछ क्यों रहे हैं ! किसी काम से गए थे !”

“क्यों गयी थी बिना पूछे ? सौ बार कहे हैं, हमसे बिना पूछे ना निकला करो, फिर ? जब हर एक चीज़ घर पर ला रखें हैं, तो फिर बाहर क्यों निकलती हो ?”

“अजीब आदमी हो तुम ! तुम्हारे लिए भी तो सब कुछ घर पर मौजूद है, तो क्या तुम बाहर निकलना छोड़ सकते हो.. हर इंसान की ज़रूरत होती है बाहर की हवा सूरज की रौशनी… ।
चाहे लाख आराम हो घर पर, लेकिन घर से निकलना भी ज़रूरी है, वरना इंसान पागल हो जायेगा !”

“ज़रूर किसी यार दोस्त से मिलने गयी होंगी ?”

“तुम्हारे दिमाग से कब ये पागलपन दूर होगा धीरेन्द्र, शादी हो चुकी है हमारी तुमसे.. अब कहाँ के यार दोस्त ?”

“शादी के बाद भी हमको पति मानी हो आजतक ? तुम्हारा हमारा कमरा तक अलग है और बोलती हो शादी हो चुकी है !”

“तुमने हमसे शादी की थी विधायक के पद के लिए, वो तुम्हे मिल गया, बस ! इससे ज्यादा हमसे कभी कोई उम्मीद मत करना !”

“तो पूरा ज़िन्दगी ऐसे ही काट देंगे क्या ?”

“नहीं.. जिस दिन इस घर में हमारा काम पूरा हो जायेगा हम तुम्हे छोड़ कर चले जायेंगे !”

गीता की बात सुन कर धीरेन्द्र ने ज़ोर से अट्टहास लगाया..

“अब भी सोचती हो कि हमे छोड़ जाओगी.. लेकिन जाओगी कहाँ, अब तो ना तुम्हारा बाप बचा ना मायका ?”

“इतनी कुव्वत अब भी हम में हैं कि खुद की देखभाल कर सकते हैं !”

“तो किस बात का इंतज़ार है, जाओ, निकलो हमारे घर से !”

धीरेन्द्र चीख पड़ा..

“ये तुम्हारा घर कब से हो गया धीरेन्द्र बाबू… ये हमारे पिता जी का घर है.. और यहाँ से आप हमें नहीं निकलवा सकते ! समझे ?”

पांव पटकती गीता सीढ़ियां चढ़ कर ऊपर चली गयी.. और अपने हाथ में थाम रखी गिलास को ज़ोर से ज़मीन पर पटक कर धीरेन्द्र वहीँ सोफे पर ढेर हो गया..

क्रमशः

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Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago

Superb n Shandaar and Jaberdast part

Manu verma
Manu verma
1 year ago

लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻

Manu verma
Manu verma
1 year ago

बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💐💐💐💐♥️♥️♥️♥️⭐⭐⭐⭐⭐⭐

Rajkumar
Rajkumar
1 year ago

Behtreen part 💗💗💗💗💗

Archana kaushik
Archana kaushik
1 year ago

धीरेंद्र को देखकर मेरा भी खून खौल जाता है आज पता चला दोनों साथ-साथ नहीं रहते ,अच्छा भी है दोनों साथ-साथ नहीं रहते मुझे ऐसे लग रहा है जब अखंड को गीता की सच्चाई पता चलेगी तो कहीं वह ही गीता को अपना ना ले ,आखिर गीता ने सच्चा प्यार जो किया है उससे और अखंड के लिए कितना कुछ नहीं कहा उसे राक्षस को अपनी जिंदगी में ले आई 5 साल उसके साथ निभा भी गई यही बहुत बड़ी बात है और अब जब सारी सच्चाई पता है तो गीता के हिस्से भी खुशी आनी चाहिए🌷🌷

उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
1 year ago

नाही अखंड ने अभी तक रेशम को ठीक से देखा है और ना ही रेशम पूरी तरीके से कन्विंस्ड है कि वह अखंड को लेकर ही आई है अगर इन दोनों को ही पता चला तो फिर माहौल काफी बिगड़ सकता है रेशम वैसे ही अपनी अतीत से भाग भाग कर इतना दूर तक आप आई है अगर उसे पता चला कि वह अखंड को लेकर आई है तो पता नहीं फिर वह कितना सदमा खा जाएगी

Chandrika Boghara
Chandrika Boghara
1 year ago

Bahut badhiya ❤ ♥

Jayshree Bhargava
Jayshree Bhargava
1 year ago

अखंड और रेशम का सामना होते होते आज फिर रह गया 🤦🏻
कार के ब्रेक कैसे फेल हुए यह तो पता लगा ही लेंगे यज्ञ बाबू और करने वाले की तो खैर नहीं, मुझे तो लगता है बड़े ठाकुर भी छोड़ेंगे नहीं नालायकों को जिन्होंने उनके बेटों को हानि पहुंचाई फिर चाहे वह दीपक हो चाहे उनकी अपनी बहन का बेटा ।
😯 यह समोसे के तेल वाली कढ़ाई सच में इसे देखकर तो पेट में गुदगुदी होने लगती है, तितलियां उड़ने लगती है।
गीता ने अच्छा किया जो धीरेंद्र को मुंहतोड़ जवाब दे दिया ऐसे शराबी इंसान को कब तक झेलते और सुनते रहे बेचारी बन कर, लात मार कर बाहर का रास्ता दिखा ही देगी जल्दी ही बस अखंड का केस सॉल्व हो जाए धीरेंद्र बेटा तुम तो गए दीपक के साथ चक्की पीसिंग एंड पिसिंग 😂😂

Ritu Mittal
Ritu Mittal
1 year ago

Was waiting ✋️
Though I want js3 also bcoz I just ❤️ that ….but u can finish this one first.love u

Hetal shah
Hetal shah
1 year ago

🤗👍 kahani kabhi bhi twist and turn le sakati hai.aaj Akhand phir se Resham ko dekh nahi paya.gadi ka break fail tha ye toh pata chala.Yagya pata kar he lega kisaka karnama hai.Anirwan samose ke sath logo ki ungliya bhi kha jata hai
😂😂 sun Badal ki hawa tight ho gayi Dipak ka naam samane aaya. Gita bahar gayi thi Dhirendra ne dekh liya tha tabhi gussa ho raha hai.badiya likha sab raaj khulane lage hain……..