मायानगरी -23

मायानगरी – 23

     सुबह के समय मेडिकल में काफी हलचल होती थी। सुबह ही अस्पताल में सबसे ज्यादा मरीज़ भी होते थे।
   आज रविवार था , आज स्टाफ कम होता था और कम डॉक्टर ही ओपीडी देखा करते थे।
हर रविवार हर एक डॉक्टर की ड्यूटी नही होती थी, रविवार की ड्यूटी डॉक्टरों की महीने डेढ़ महीने में एक बार पड़ती थी।
   आज पंखुड़ी की ड्यूटी थी। वो पीछे मेडिकल स्टाफ के लिए बने हॉस्टल में ही रहती थी, इसलिए पैदल ही अस्पताल चली आया करती थी।
  आज भी सुबह तेज़ कदमों से भागती सी वो चली आ रही थी कि तेज़ी से आकर एक जीप उसके पास रुकी और धड़धड़ाते हुए उसमें से तीन चार लड़के उतर कर एक बेहोश से लड़के को सहारा दिए उतारने लगे। उन लोगों की आवाजाही देखते ही वो एक किनारे होकर अंदर बढ़ गयी।
      तेज़ कदमों से चलती हुई वो अपने कमरे में चली गयी।
   वो अपने कमरे में पहुंची ही थी कि उसकी माँ का फ़ोन चला आया….

“क्या कर रही है बेटा पाखी? “

“अभी हॉस्पिटल पहुंची हूँ माँ !”

“लेकिन आज तो इतवार है ?”

“मम्मा डॉक्टर की छुट्टी थोड़े न होती है। डेढ़ महीने में एक बार तो ड्यूटी करनी है बस।”

“हम्म अच्छा ये बता, वो लड़का कैसा लगा? बैंक में अच्छी नौकरी है,खूब कमा रहा है। सबसे अच्छी बात इकलौता है। तुझे कोई टेंशन नही होगी?”

“कैसे टेंशन नही होगी मम्मा? मुझसे बात करने तक के लिए उसके घर पर कोई नही है, ये कोई अच्छी बात थोड़े न है। क्या मैं दिन भर अपनी सास से गप्पे मारूँगी?”

“आजकल की लड़कियों को तो भई ऐसे ही घर पसन्द आते हैं,न्यूक्लियर टाइप!”

“लेकीन मम्मा ये न्यूक्लियर टाइप ही तो फटते भी है बूम से।

“अच्छा वो सब छोड़ ये बता लड़का कैसा लगा?”

“मम्मा लड़का कॉफी के बारे में कुछ नही जानता। मेरा मतलब मुझसे उसने पूछा कि फिल्टर कॉफी क्या होती है? इट्स रिडिक्यूलस मम्मा!

“पागल लड़की , इसमें कौन सी बड़ी बात हो गयी? अब ज़रूरी है अगर तू कॉफी के पीछे पागल है तो जिस लड़के को तू पसन्द करे वो भी तेरी तरह कॉफी का दीवाना हो?

  अपनी माँ की बात सुन वो भी सोच में डूब गई..

“वैसे उन लोगों का कोई जवाब आया?”

“नही अब तक तो उनका भी कोई जवाब नही आया। लड़का भी सोच में पड़ा होगा वैसे उस दिन हुआ क्या था मतलब तेरी मुलाकात कैसी रही?”

पंखुड़ी कुछ बताती इसके पहले ही उसके कमरे में एक नर्स चली आयी…

“डॉक्टर एक इमरजेंसी है। तुरंत चलिए। “

पंखुड़ी अस्पताल दाखिल होते समय ही देख चुकी थी कि एक इमरजेंसी केस आया था। लेकिन उसे लगा था, इमरजेंसी में मौजूद ड्यूटी डॉक्टर उस केस को देख लेंगे। पर ओपीडी में उसे क्यों बुलाने आए यह पंखुड़ी के लिए थोड़ा आश्चर्य की बात थी। फिर भी वो टेबल से उठकर अपना स्टैथो गले में लटकाए नर्स के साथ बाहर निकल पड़ी…
इमरजेंसी वार्ड की तरफ बढ़ते हुए ही पंखुड़ी ने नर्स से पेशेंट की जानकारी लेना भी जारी रखा।

“केस क्या है? अभी कुछ लड़के एक बेहोश आदमी को लेकर आये…”

“हां मैडम बस वही केस है। अभी हमें कुछ समझ नहीं आया इसलिए आपको बुलाने चले आये?”

” इमरजेंसी में कोई डॉक्टर नहीं था? आज किसकी ड्यूटी थी वहां?

” मैम मृत्युंजय सर की ड्यूटी थी वह आए भी थे पर कोई फोन आया इसलिए उन्हें अचानक निकलना पड़ा इसी बीच में केस आ गया।”

” ओके ! अगर मैं एडमिशन बनाऊंगी तो भले ही इमरजेंसी का हो लेकिन पेशेंट तो मेरे हिस्से आ जाएगा।

नर्स ने हां में सिर हिलाया और आगे बढ़कर इमरजेंसी का दरवाजा खोल दिया।
  तेजी से पंखुड़ी अंदर दाखिल हुई और पेशेंट के बेड के चारों तरफ झुंड लगाकर खड़े लड़कों को देखकर नाराज हो गयी…

” आप सब तुरंत यहाँ से बाहर निकलिए और मुझे पेशेंट की जांच करने दीजिए।

सारे लड़के एक साथ पलटकर पंखुड़ी को घुरने लगे

” तुम जानती भी हो यह है कौन?

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” कोई फर्क नहीं पड़ता कि ये है कौन? लेकिन अगर आप लोग इसी तरह इनके आसपास झुंड में रहेंगे तो मैं इन्हें देख नहीं पाऊंगी, और इसका नुकसान आप के मरीज को होगा क्योंकि जब से आप अस्पताल में लेकर आए हैं तब से वह बेहोश है।

” बड़ी बदतमीज लड़की हो, इतनी भी तमीज नहीं है की बात कैसे करना है?  यह भूत पूर्व छात्र नेता है। विधायक जी के भतीजे हैं, आई बात समझ में। होश में आ गए ना और आपकी यह बदतमीजी पता चले तो आपको इस अस्पताल से उठाकर कहां पर फिकवाएँगे आप जान भी नहीं पाएंगी।

” आप सब बहुत तमीजदार हैं, तो मुझे कम से कम मेरा काम करने दीजिए। क्योंकि मुझे यहाँ से उठा कर फिंकवाने के लिए इनका होश में आना बहुत जरूरी है। और फिलहाल यह बेहोश क्यों है , यह जानने के लिए मुझे तुरंत इनका बीपी चेक करना बहुत जरूरी है। तो अब आप लोग यहां से हटे और मुझे मेरा काम करने दीजिए। यह मेरी लास्ट एंड फाइनल वार्निंग है इसके बाद मैं आप लोगों के खिलाफ एक पेपर तैयार करूंगी और यहां के डीन के ऑफिस में भेज दूंगी कि आप लोग मुझे मेरा काम आराम से करने नहीं दे रहे । “

पंखुड़ी उन लड़कों से उलझी हुई थी उतनी ही देर में एक भारी-भरकम डीलडौल का आदमी दो-तीन गार्ड के साथ तेजी से अस्पताल के इमरजेंसी में दाखिल हो गया…

” डॉक्टर कौन है यहां? “

उसकी तेज आवाज़ सुन अस्पताल का स्टाफ एकबारगी उसे देखने लग गया पंखुड़ी ने मुड़कर उसे देखा और बहुत शांति से जवाब दिया।

” जी मैं हूं डॉक्टर, कहिए क्या कहना है?

” हमारा भतीजा है ये बेहोश हो गया है। जरा जांच लीजिए कि हुआ क्या है?  और अगर इसे कुछ भी हुआ ना तो हम इस पूरे अस्पताल को हिला कर रख देंगे!”

” जी आप सब जरा इस कमरे से बाहर निकल जाइये और मुझे मेरे मरीज के साथ अकेले छोड़ दीजिये जिससे मैं और मेरी टीम इसकी जांच कर सके। और आप लोग जितना देर करेंगे इनके लिए उतना ही नुकसानदेह हो जाएगा।”

उस आदमी के इशारे पर उस बेहोश लड़के को घेर कर खड़े लड़के एक-एक कर नीचे बाहर की ओर  निकलने लगे। उन लोगों के लड़के के पास से हटते ही पंखुड़ी भागकर उसके पास पहुंची और तुरंत उसकी जांच में लग गयी।
  अस्पताल स्टाफ के साथ पंखुड़ी उसकी सारी जांच पड़ताल करने के साथ ही उसे ज़रूरी दवाएं भी देती चली गयी।
  लगभग आधे घण्टे बाद एक नर्स ने बाहर जाकर नेता जी को उनके भतीजे के सही होने और होश में आने की खबर दी और एक बार फिर पूरा का पूरा जत्था अंदर घुस आया।
   इस बार वहीं डॉक्टर की कुर्सी पर बैठी पंखुड़ी ने एक नज़र उन सब को देखने के बाद वापस अपना ध्यान मरीज़ की फाइल बनाने में लगा दिया।
  विधायक जी आकर पंखुड़ी के सामने वाली कुर्सी पर बैठ गए…

“डॉक्टर हुआ क्या है लड़के को?”

“पैरालिसिस हुआ है!”

“क्या?” आश्चर्य से नेता जी का मुहँ खुला का खुला रह गया…

“जी हाँ बीपी बहुत ज़्यादा बढ़ गया था जिसके कारण ये बेहोश हो गए थे। अभी दवाये  देने के बाद होश में आ गए है। लेकिन अब भी एक तरफ का हिस्सा काम करने में सक्षम नही है। ठीक होने में वक्त लगेगा।

“लेकिन बच्चे को पैरालिसिस कैसे हो सकता है। अभी सिर्फ 30 साल का है ये। ऐसे कैसे फालिज मार गया?”

“,बीमारियां उम्र और हैसियत, रुतबा देख कर नही आती। आजकल की लाइफस्टाइल ऐसे है कि कब किसे क्या हो जाये कहा नही जा सकता।”

  नेता जी ये सुन कर चिंता में डूब गए…
उन्हें चिंतित देख पंखुड़ी ने बात संभालने की कोशिश भी करनी चाही….

“परेशान मत होइए,ये बीमारी ठीक भी हो जाती है। उचित दवाओं और परहेज़ से ये जल्दी ठीक हो जाएंगे।
   इन्हें अभी इमरजेंसी वार्ड में शिफ्ट करने जा रहे हैं। लगभग दो से तीन घंटो के बाद नार्मल वार्ड में शिफ्ट कर देँगे। “

  नेता जी अब भी परेशान हाल बैठे थे, उन्होंने घर पर अपने फ़ोन घुमा दिया।
  नेता जी का संयुक्त परिवार था जिसमें उनका और उनके छोटे भाई का परिवार एक साथ रहते थे। इसके अलावा उनकी एक बहन और उसके बेटे भी थे।
   ये लड़का भुवन उनके छोटे भाई का लड़का था जो असल में नेता जी के काफी करीब था।
  वो अक्सर नेता जी के साथ उनकी प्रचार रैलियों का हिस्सा बना करता था। एक तरह से देखा जाए तो नेता जी उसी में अपना सियासती दावेदार देखा करते थे। उनके खुद के भी तीन लड़के थे । लेकिन बड़ा लड़का जहाँ वकालत में रमा हुआ था वहीं बीच वाला पुश्तैनी जमीन के धंधे में व्यस्त था।
  उनका तीसरा लड़का वेदांत मायानगरी में ही आर्ट्स में पढ़ाई कर रहा था। उसका भी कुछ खास लक्ष्य नही था।
   घर भर में एकमात्र भुवन को ही अपने ताऊ की विरासत को नेतागिरी में आगे बढ़ाने में रुचि थी, और वो जब तक कॉलेज में पढ़ा छात्र नेता रहा। यहाँ तक कि उसे कॉलेज छोड़े पांच छैह साल बीत चुके थे पर अब भी उसके कॉलेज में उसका वही दबदबा था। किसी बच्चे का एडमिशन करवाना हो किसी को जबरिया पास करवाना हो ये सब उसके दाएं हाथ का खेल था।
  पर उसका आजतक मायानगरी यूनिवर्सिटी का चक्कर नही लगा था।
  ये पहली बार ही था कि एक बच्चे का मायानगरी के आर्ट्स फैकल्टी में एडमिशन के लिए वो यूनिवर्सिटी आ रहा था कि सिर में  भारीपन सा लगा और वो गाड़ी चलाते हुए ही चक्कर खा कर गिर गया।
   अब वो लोग चूंकि इसी रास्ते पर थे इसलिए उसके चेले उसे यहीं उठा कर ले आये और अपनी बेवकूफ़ी में पंखुड़ी से झड़प कर बैठे।

  भुवन का एडमिशन बनाने के बाद वो सारी ज़रूरी दवाएं नर्स को समझा रही थी कि मृत्युंजय चला आया….
   पंखुड़ी को अपनी कुर्सी पर देख और इमरजेंसी में भीड़भाड़ देख उसे समझ आ गया कि कोई केस आ चुका है। चुपके से अंदर आकर उसने पंखुड़ी के बाजू की कुर्सी के पीछे अपना एप्रन टाँग दिया और आंखों से ही उससे क्या हुआ ये पूछ लिया।
  पंखुड़ी ने मेडिकल की भाषा में उसे सब कुछ बता दिया जो सामने बैठे किसी को कुछ भी समझ नही आया।
   मृत्युंजय ने पंखुड़ी का लिखा पर्चा अपने सामने खींच लिया और उसे पढ़ने के बाद हाँ में गर्दन हिलाता पंखुड़ी से और भी दो चार सवाल करने लगा।
   उसी वक्त उस लड़के के साथ आये दो चार लड़के वहाँ आकर पंखुड़ी से वापस बदतमीजी से बात करने लगे।

” ये क्या कर दिया है तूने बेवकूफ लड़कीं। भैया जी होश में आये थे कि वापस बेहोश होने लगे हैं।”

पंखुड़ी कोई जवाब देती इसके पहले मृत्युंजय अपनी जगह से खड़ा हो गया..

“किसी लेडी डॉक्टर से बात करने का ये कौन सा तरीका है। तमीज है या सारी बेच खाई।”

  उनमें से आगे बढ़ कर एक लड़के ने मृत्युंजय की कॉलर पकड़ ली…

“साले अकडू, डॉक्टर क्या बन गए खुद को भगवान समझने लगे हो तुम लोग। भैया जी बेहोश हुए कैसे? हम लोगों को जवाब चाहिए वरना पूरे अस्पताल में तोड़ फोड़ मचा देंगे समझा। “

  अब तक में पंखुड़ी अपनी जगह पर खड़ी हो चुकी थी,वो कुछ जवाब देती उसके पहले मृत्युंजय का चांटा उस लड़के का गाल लाल कर गया….
   पंखुड़ी ने तुरंत मृत्युंजय को पीछे खींच कर उस लड़के से अलग करना चाहा और साथ ही बोलती भी गयी…

“अरे आपके मरीज़ को मैंने ट्रैंक्विलाइज़र दिया है। जिससे वो थोड़ा सो सकें और उनके दिमाग को आराम मिले। और प्लीज़ अगर आप लोग ऐसे ही हमें परेशान करेंगे तो हम इलाज नही कर सकेंगे।

   अब तक में उस लड़के ने अपने थप्पड़ का बदला लेने मृत्युंजय की तरफ घूंसा बढ़ाया ही था कि नेता जी ने आकर उन लड़कों को बाहर की ओर खदेड़ दिया…

“गधे हो सब के सब, बाहर निकलो, और अभी के अभी यहाँ से दफा हो जाओ वरना इतना जुतियाएँगे कि तुम लोगन की सात पुश्तें टकली पैदा होंगी। आई बात भेजे में।” नेता जी की गालियां मृत्युंजय और पंखुड़ी के सामने ही भैया जी के चेलों पर बरसने लगी और उनसे बचने के लिए वो थप्पड़ खाया चेला और बाकी लोग मृत्युंजय को घूरते वहाँ से निकल गए।

  ” थैंक यू सर! अपने हमारी बात समझी। क्योंकि अगर ये लोग ऐसे ही परेशान करेंगे तो हमारा यहाँ काम करना मुश्किल हो जाएगा।”

  “वो सब तो ठीक है लेकिन हमारा बचुआ जल्दी ठीक नही हुआ तो हम वैसे भी तुम लोगों का यहाँ काम करना मुश्किल कर देंगे। “

नेता जी भी धमकी देकर अपनी पलटन के साथ निकल गए। उनके मरीज़ को वार्ड में भर्ती कर दिया गया था जहाँ वो आराम से सो रहा था।
उन लोगों के वहाँ से जाते ही मृत्युंजय और पंखुड़ी ने चैन की सांस ली।

“गोलू !! चाय पिला भाई! कहाँ कहाँ से आ जाते हैं ये अजीबोगरीब मरीज़ और उनके परिजन!”

  मृत्युंजय की शुद्ध हिंदी सुन पंखुड़ी के चेहरे पर हंसी खिल गयी…

“जय !! आज तो तुम डॉक्टर से एकदम फाइटर बन गए। क्या रख के थप्पड़ दिया उसे। तुम्हें डर नही लगा नेता जी के चेले से पंगा लेते हुए।”

“सच कहूं तो उस वक्त उसे तुमसे बदतमीजी करते देख  मेरा पारा चढ़ गया और मैंने लगा दिया कस के एक हाथ। हालांकि मारतें साथ ही मैं खुद अंदर तक कांप भी गया कि अब ये नेता के चेले मालूम नही क्या करें पर फिर सोच लिया कि, जो भी होगा  देखा जाएगा ।”

“ब्रेव हाँ!! अच्छा वैसे तुम गए कहाँ थे?”

अब तक में वार्डबॉय गोलू चाय लाकर दोनों डॉक्टर्स के सामने रख गया था।

“वो मेरी एक पेशेंट है, उसे सुबह सुबह ही अक्सर पैनिक अटैक आते हैं। उसकी रूम मेट का कॉल आया तो वहीं भाग गया था।”

“अच्छा ये वही है क्या जिसके बारे में तुमने बताया था। मेडिकल फायनल ईयर वाली लड़की?”

“हां वही। अभी मिड टर्म रिज़ल्ट में उसका परफॉर्मेंस इस बार अच्छा नही रहा , बस इसी कारण पैनिक हो गयी।

“ओह्ह!अब ये सब तो चलता ही रहता है। अप्स एंड डाउन्स। “

पंखुड़ी और मृत्युंजय चाय पी रहे थे कि अस्पताल के इमरजेंसी लैंडलाइन नम्बर पर रिंग बजने लगी। फ़ोन पंखुड़ी ने उठाया…

“हेलो मायानगरी हॉस्पिटल इमरजेंसी ? “

“हां जी बोलिये।”

“मैं शहर का एस डी एम बोल रहा हूँ। आपके यहाँ अभी कुछ देर पहले शहर विधायक का भतीजा एडमिट हुआ होगा, उसका ज़रा विशेष ध्यान रखें। आप ये समझ सकते हैं कि ये ज़रा खास केस है और कलेक्टर खुद इसमें विशेष रुचि ले रहे हैं।”

पंखुड़ी चुपचाप सुनती रही,फिर उसने पूछ ही लिया..

“मिस्टर शेखऱ मिश्रा जी बोल रहे हैं…?

  सामने वाला एक पल को चौन्क गया और फ़ोन रख दिया गया। उसी वक्त दरवाज़े पर दस्तक हुई, पंखुड़ी और मृत्युंजय दोनो दरवाज़े की ओर देखने लगे। सामने शेखऱ खड़ा था…

******

    इतवार के दिन ही फ्रेशर्स की वेल्कम पार्टी होनी थी। मेडिकल वालों की पार्टी मायानगरी से थोड़ा दूर स्थित हॉलिडे रिसोर्ट में थी। इत्तेफाक से इंजीनियरिंग वालों का भी वहीं आसपास मौजूद पार्टी हॉल में ही आयोजन था।

  मेडिकल में एक बड़ी सी वॉल्वो खड़ी थी, जो उन सभी को लेकर जाने वाली थी। मेडिकल के सिर्फ जूनियर्स और उनके करेंट सीनियर्स ही थे तो बहुत ज्यादा संख्या नही थी और लगभग सारे ही लोग वॉल्वो में आ गए थे।
  गाड़ी सभी को लेकर आगे बढ़ गयी और उनके पीछे इंजीनियरिंग वालों की गाड़ी भी निकल पड़ी….

क्रमशः

aparna…..

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Mandeep kaur
Mandeep kaur
1 year ago

Nice👌👌👌❤❤