मायानगरी -8

मायानगरी

मायानगरी – 8

  
     लड़की को साथ लिए  निरमा वार्डन के कमरे में चली गई उसे सामने बैठा कर निरमा उसे ध्यान से देखने लगी, लड़की थोड़ी घबराई हुई सी लग रही थी।
निरमा ने उसकी ओर पानी का गिलास बढ़ा दिया।

“लो पानी पी लो,अब आराम से बताओ कि बात क्या है?”

लड़की ने एक नजर वार्डन पर डाली और उसके बाद वापस निरमा को देखने लगी निरमा ने मुड़कर वार्डन मैडम की तरफ देखा और उन्हें बाहर जाने का इशारा कर दिया…

वार्डन के बाहर निकलते ही निरमा ने उठकर कमरे का दरवाजा बंद कर दिया। साथ ही लगी खिड़की को भी उसने बंद कर दिया। और वापस आकर उस लड़की के सामने बैठ गई उसके दोनों हाथों पर अपना हाथ रख कर निरमा उसके और करीब सरक आयी।

” अब बोलो क्या कहना चाहती हो? यहां कही कोई भी बात इस कमरे से बाहर नहीं जाएगी मेरा विश्वास मानो।”

” मैडम अदिति के बारे में बाहर जो भी कहा जा रहा है उसमें से कुछ भी सही नहीं है। उसका ना तो किसी लड़के के साथ कोई अफेयर था और ना ही वह किसी और के चक्कर में मरी है। “

” फिर क्या हुआ? क्या कोई उसे परेशान कर रहा था? मेरी बात तुम समझ सकती हो, जैसा कि आजकल चलता ही है वीडियोस फोटोस वायरल करने के नाम पर…… कहीं वैसा कुछ तो नहीं?”

” नहीं मैडम अदिति बहुत ही साफ दिल की लड़की थी। मैं यह तो नहीं जानती कि अभी उसने आत्महत्या क्यों की लेकिन कुछ समय से मैंने कुछ बातें नोटिस की थी मैं वह आपको बता देना चाहती हूं।
   मैं और अदिति एक ही शहर से हैं। जब अदिति का एडमिशन इसी कॉलेज में हुआ तब लिस्ट में नाम देखने के बाद मैं खुद अपने पापा के साथ उसका घर ढूंढते हुए उससे मिलने गई थी। वही हमारी पहली मुलाकात हुई थी। उसके बाद यहां एडमिशन से लेकर हॉस्टल में रूम मिलने तक हर जगह हम साथ थे।  हॉस्टल रूम एलॉटमेंट लिस्ट में मेरा और उसका एक साथ नाम नहीं आने के कारण मुझे उसके साथ रूम नहीं मिला मैं उसके रुम से तीन रूम छोड़ कर ही रहती हूं।”

” ओके और क्या जानती हो उसके बारे में? “

” मैडम अदिति एक बहुत सामान्य घर की लड़की है। उसके पिता बैंक में काम करते हैं और मां हाउसवाइफ है। अदिति का एक छोटा भाई भी है जिसे कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या है। मैं ज्यादा तो नहीं जानती लेकिन उसे हर महीने प्लेटलेट्स चढ़ाने पड़ते हैं। शायद उसके स्प्लीन में कोई प्रॉब्लम है। बचपन से ही उसका ट्रीटमेंट चल रहा है इसीलिए अंकल के ज्यादा पैसे उसी सब में लग जाते हैं। अदिति से जितनी मेरी बातचीत हुई है उसके हिसाब से उसने जैसा बताया वह बचपन से ही पढ़ाई के लिए बहुत मेहनती थी। क्योंकि उसे मालूम था कि उसके घर वालों के पास उसे पढ़ाने के लिए पैसे नहीं है। स्कूल में भी उसने स्कॉलरशिप ली थी। और शायद माया नगरी के लिए भी काउंसलिंग के समय उसे खुद अप्रोच किया गया था। ऐसा उसने बताया था क्योंकि  मायानगरी यूनिवर्सिटी को भी अच्छे बच्चों की जरूरत है। “

यह कहते-कहते वह लड़की जरा चुप होकर नीचे देखने लगी निरमा ने वापस उसके कंधों पर हाथ रखा और उसे ढांढस बंधाते हुए अपनी बात कहनी शुरू की…

” तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो, माया नगरी यूनिवर्सिटी बनी तब हमारी टीम हर उस जगह पर जहां गवर्मेंट सीट के बच्चों की काउंसिलिंग हो रही थी मौजूद थी। जिससे कि हम अच्छे बच्चों को भी अपनी यूनिवर्सिटी में दाखिला दिलवा सकें। और होशियार बच्चों के लिए हमारे पास कई तरह की स्कॉलरशिप भी हैं। आखिर हमें भी तो अपने यूनिवर्सिटी को एक अच्छा नाम दिलवाना ही है ना। और इसमें कोई बुराई भी नहीं।

” बिल्कुल भी नहीं। मायानगरी में एडमिशन के बाद भी वो अधिकतर समय पढ़ाई में ही गुजारती थी। क्योंकि उसे पता था फर्स्ट ईयर में टॉप करेगी तभी सेकंड ईयर के लिए उसे बुक बैंक फ्री मिलेगा। आप भी जानती है मैडम मेडिकल की बुक बहुत महंगी होती हैं एक बार में 1500- 2000 इतने मूल्य की किताबें खरीदना हम जैसे मध्यम वर्गीय परिवार के बच्चों के लिए बहुत मुश्किल होता है… उसके घर से महीने के 2000 ही आते थे। वह तो ऐसा था कि मायानगरी ने क्योंकि उसे खुद चुना था अपनी यूनिवर्सिटी के लिए, इसलिए उसे हॉस्टल और कॉलेज की फीस नहीं देनी होती थी बावजूद मेस का खर्चा तो उसे भी उठाना ही पड़ता था।

” यह तो हमने क्लॉउज़ बनाते समय सोचा ही नहीं। हमें लगा बच्चों को अगर कॉलेज की फीस और हॉस्टल फीस माफ कर दी जाएगी, तो वह भी बहुत है। चलो इसी बहाने एक पॉइंट यह भी मिल गया कि मेस का भी खर्चा कुछ बच्चों के लिए भारी पड़ सकता है खैर फिर क्या हुआ। “

” मैडम सेकंड ईयर में आने के बाद उसे पैसों की कमी बहुत ज्यादा खलने लग गई थी। क्योंकि आपकी यूनिवर्सिटी में हर तरह के बच्चे हैं। बहुत सारे बच्चे तो मैनेजमेंट कोटा वाले हैं। और आप खुद जानती हैं कि उन बच्चों के पास किसी तरह की कोई कमी नहीं होती।
   शायद अदिति को भी ऐसी चीजों की जरूरत महसूस होने लगी थी जिन्हें खरीदने के लिए रुपए खर्च करने पड़ते हैं। और इसलिए उसने सोचा कि वह फर्स्ट ईयर के जूनियर्स को ट्यूशन पढ़ा दे।
    उसने ट्यूशन के लिए जूनियर से बात भी की, कुछ एक दो बच्चे पढ़ने आई थी। लेकिन उनके पास भी बहुत ज्यादा पैसे तो होते नहीं थे जो वह ट्यूशन अफोर्ड कर सके। मैंम इसीलिए उसका यह प्लान सफल नहीं हो पाया।
   उसका मुझ से लगभग रोज शाम को मिलना होता था। क्योंकि कॉलेज से लौटने के बाद शाम को मेस में एक ही समय पर सबको चाय मिलती थी। और उस समय हम सब नीचे हॉस्टल डोरमेट्री में एक साथ बैठे होते थे । अक्सर वह उसकी रूममेट प्राची और मैं, हम तीनों एक साथ ही चाय पिया करते थे। और अदिति अक्सर कोई ना कोई ऐसा प्लान बनाती रहती थी, जिससे वह कुछ थोड़े और पैसे कमा सकें।
  मैं और प्राची अक्सर उसे कहते थे कि अगर उसे किसी भी चीज की बहुत जरूरत है तो वह हमसे ले सकती है। लेकिन वो बहुत स्वाभिमानी थी मैडम । उसे शायद हमसे कुछ भी लेना पसंद नहीं था। खास कर मुझसे, क्योंकि प्राची से वह बहुत ज्यादा क्लोज थी वह दोनों रूम मेट भी थे। सारा वक्त एक साथ रहते थे इसलिए उनका आपस में ज्यादा करीबी होना स्वाभाविक भी था।
    कुछ दिनों बाद मैंने नोटिस किया कि शाम के समय अदिति चाय पीने नहीं आती मैंने प्राची से पूछा तो उसे भी कुछ ज्यादा मालूम नहीं था। या शायद उसने मेरी बात को टाल दिया । मुझे लगा दो चार दिन बाद अदिति वापस आने लगेगी लेकिन फिर एक तरह से नियम ही बन गया। उसने शाम के समय अपने कमरे से बाहर आना ही बंद कर दिया।
  
   हॉस्टल और कॉलेज के नियम के अनुसार जब तक हमारा थर्ड प्रॉफ़ आधा नहीं हो जाता यानी 6वां सेमेस्टर क्लियर नही हो जाता,  हम कोई भी मेडिकल इंस्टिट्यूट या हॉस्पिटल या नर्सिंग होम ज्वाइन नहीं कर सकते हैं।
     मैंने यह सोचना शुरू कर दिया था कि अदिति ने जरूर आसपास के किसी नर्सिंग होम को अपने एक्स्ट्रा टाइम में ज्वाइन कर लिया है और वहीं से उसे कुछ थोड़ी बहुत कमाई भी होने लगी है।
   मुझे समझ में आ गया कि उसने जिस नर्सिंग होम को भी ज्वाइन किया है उसके लिए उसने वार्डन मैडम से कोई परमिशन नहीं ली, शायद उसने सीनियर से भी कोई भी पूछताछ नहीं की और इसीलिए वह चोरी-छिपे अपने काम पर जाती है।

    एक शाम जब प्राची डॉरमेट्री में आई तो मैंने प्राची से यह सवाल पूछा?
   मैंने प्राची से यह बात कही कि अगर कॉलेज में किसी को भी पता चल गया कि उसने बिना छठवें सेमेस्टर का एग्जाम दिए ही नर्सिंग होम ज्वाइन कर लिया है और वहां डॉक्टरी शुरू कर दी है तो उसकी डिग्री तुरंत कैंसिल हो जाएगी।
   इस बात पर प्राची ने मुझसे कहा कि अदिति ने कोई भी नर्सिंग होम ज्वाइन नहीं किया है और वह बाहर जाकर डॉक्टरी नहीं कर रही है?

” तो फिर अदिति बाहर जाकर कर क्या रही थी?”

” मैडम मुझे एक बार को यह भी लगा कि अगर वह कोई नर्सिंग होम जॉइन भी करती तो नर्सिंग होम वाले हम जूनियर डॉक्टर्स को इतना पैसा तो देते नहीं जितना आजकल उसके पास नज़र आने लगा था।
  मैडम यहां कॉलेज हॉस्टल के आसपास रहने वाले फाइनल ईयर पास कर चुके जितने भी सीनियरर्स हैं ज्यादातर लोग इंटर्नशिप के पहले पड़ने वाली वैकेशन में आसपास के नर्सिंग होम या हॉस्पिटल ज्वाइन कर लेते हैं। जिससे उन्हें प्रैक्टिकल नॉलेज गेन हो सके और इसके लिए हॉस्पिटल मैनेजमेंट की तरफ से उन्हें 5000 से 6000 तक की मंथली सैलरी दी जाती है। क्योंकि जब तक इंटर्नशिप पूरी ना हो डॉक्टर की डिग्री पूरी नहीं मानी जाती है ना। “

” बात तो सही है । फिर…? “

निरमा के सवाल पर वह लड़की वापस अपनी बात कहने लगी…

” मैडम प्राची ने मुझे गोलगोल घुमा दिया, लेकिन अदिति से जुड़ी कोई बात नहीं बताई। अदिति से रोज क्लासेस में मेरा मिलना होता था लेकिन वहां हम अपनी पढ़ाई में और प्रैक्टिकल्स में इतने ज्यादा बिजी होते थे कि ज्यादा बातें करने का वक्त ही नहीं होता था।
    क्योंकि हम सीनियर क्लासेस में आ चुके थे और इसलिए हमारा सिलेबस बहुत ज्यादा बढ़ चुका था। पढ़ाई के अलावा और कहीं ध्यान देना मुश्किल था।

मैडम आदिति को शाम के समय हॉस्टल से निकलते हुए लगभग 10 से 11 महीने बीत चुके थे। उसके हाव-भाव पहनावे और हर चीज में बदलाव दिखने लग गया था । मुझे समझ में आने लग गया था कि वह कोई ना कोई ऐसा काम कर रही है जिसमें उसे बहुत ज्यादा आमदनी हो रही है। उसका रहन सहन हमसे बदल गया था। महंगे कपड़े महंगे जूते, पर्स, परफ्यूम घड़ियां सब कुछ उसकी अलमारी की शोभा बढ़ाने लगी थी।

” तो आखिर अदिति ने ऐसी कौन सी  नौकरी शुरू की थी? जो उसके पास इतने पैसे आने लगे थे?”

     निरमा उस लड़की से पूछ ही रही थी कि उसका फ़ोन बजने लगा।
   निरमा ने देखा फ़ोन डॉक्टर पिया का था, पिया के पास ही उसने यहाँ से बॉडी भिजवाई थी इसलिए इस फ़ोन को अवॉयड नही किया जा सकता था। निरमा ने फ़ोन उठा लिया..

” हाँ पिया बोलो!”

“निरमा कहाँ हैं आप?”

“मैं हॉस्टल आयीं हुई थी। उसी लड़कीं के सिलसिले में पूछताछ करने। तुम बताओ कैसे फ़ोन किया?”

“आप अर्जेंटली यहाँ आ जाइये। आपसे कुछ बहुत ज़रूरी बातें बतानी है। यहाँ मोर्चरी के बाहर ही पुलिस खड़ी है। और मुझे समझ में नही आ रहा कि ये बात पुलिस तक पहुंचनी चाहिए या नही। क्योंकि इस बात के बाहर जाने में यूनिवर्सिटी का नाम खराब भी हो सकता है।”

“ओह्ह ओके! तुम रुको, मैं तुरंत पहुंच रहीं हूँ।बल्कि हो सके तो समर को भी बुला लो। मैं चाहती हूँ ये बात अभी राजा भैया तक न पहुंचे। तुम समझ रही हो न!”

“हम्म !! मंत्री जी तो यहीं अस्पताल की कैंटीन में ही हैं। आप जैसे ही आएंगी, उन्हें भी बुला लुंगी।”

” ओके!! मैं निकलती हूँ ।”

  निरमा तुरंत अपनी जगह से खड़ी हो गयी। उसने उस लड़की को देखा..

“और कोई महत्वपूर्ण बात जो तुम्हे लगता है मुझे बता देनी चाहिए? अभी मैं बहुत जल्दबाजी में हूँ। मैं कल दोपहर तक वापस हॉस्टल आऊंगी। तब तक तुम्हे  और भी कोई जानकारी मिले तो पता करके रखना। और कल मुझे बाकी की सारी बातें भी बता देना।।

लड़कीं ने हाँ में गर्दन हिलाई और निरमा तेज़ कदमो से बाहर निकल कर अपनी गाड़ी की ओर बढ़ गई।

*****

     निरमा के बाहर निकलते ही बाहर खड़ी लड़कियों का शोरगुल एकदम से शांत हो गया। सब बाहर खड़ी अदिति के बारे में ही बातों में लगी थी कि निरमा के वहाँ से गुजरते ही सन्नाटा छा गया।
   निरमा तेज़ कदमों से चलती अपनी गाड़ी तक पहुंची और वहाँ से पिया के अस्पताल की ओर निकल गयी।

   अभिमन्यु अब तक रंगोली को ढूंढ नही पाया था, उस पर आजू बाजू खड़े लड़के मरने वाली के बारे में कोई बातचीत नही कर रहे थे। या तो वो सारे लोग अपने अस्पताल के केस आपस में डिस्कस कर रहे थे या फिर बुक में पढ़ी बीमारियां।
  उनके बीच खड़ा अभिमन्यु बुरी तरह से बोर हो रहा था। आखिर थोड़ी सी और हिम्मत कर के वो थोड़ा और अंदर की तरफ बढ़ने लगा कि तभी किसी लड़की ने उसे टोक दिया….

“ओह्ह हीरो ! एक मिनट रुको, अंदर कहाँ चले जा रहे हो?”

“सॉरी मैंम मैंने देखा नही की अंदर गर्ल्स हैं।”

“हाय कितना भोला है बेचारा? तो क्या अंदर अपना बॉयज़ होस्टल समझ कर घुसे जा रहे थे। यहीं रुकने का विचार है क्या?”

“भोला नही अंधा है। तभी तो गर्ल्स नज़र नही आयीं। चल फूट ले बेटा यहाँ से। इस गेट के भीतर कदम रखने की सोचियो भी मत। मेडिकल की लड़कियां खतरनाक होती हैं।”

हाँ में सिर हिलाता वो वापस मुड़ गया कि तभी उसे लगा इन लड़कियों के पीछे कोई पहचाना सा चेहरा दिखा सा लगता है।

  वो तुरन्त मुड़ गया, और उसे उन लड़कियों के पीछे खड़ी झनक नज़र आ गयी। झनक भी हाथ बांधे उसे ही घूर रही थी।
  झनक को देखते ही उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान के साथ ही एक सवाल भी उभरने लगा। उसने झनक को आंखों से इशारा किया और उन लड़कियों के पास वापस पहुंच गया। झनक की तरफ उंगली दिखाते हुए वो उन लड़कियों को बताने लगा…

“वो मेरी कज़न है। एक बार मिल लूँ?”

दोनो लड़कियों ने उसे घूर कर देखा …

“हॉस्टलर लड़कियो के खूब सारे कज़न होतें हैं और बाद में पता चलता है उन्हीं में से एक के साथ वो भाग गई।”

“अरे नही मैंम, ये असली वाली कजिन है। “

  तब तक में झनक भी वहीं चली आयी … अभिमन्यु ने उसे देखते ही तुरन्त अपने मन की बात कह दी..

“अभी बाहर सुनने में आया यहाँ किसी लड़कीं ने सुसाइड कर लिया है, तो वही मैंने सोचा …

  झनक ने अपनी उंगली से एक तरफ को इशारा कर दिया। अभिमन्यु ने उस दिशा में देखा, उसे रंगोली किसी से बात करती नज़र आ गयी।
  रंगोली को देखते ही अभिमन्यु के चेहरे पर राहत भरे भाव आ गए, उसने मुस्कुरा कर झनक को देखा,झनक ने उसे जाने का इशारा कर दिया।
   अपने बालों पर हाथ फिराते, “हॉं” में गर्दन हिलाते अभिमन्यु बड़ी अदा से वहाँ से मुड़ कर अधीर को साथ लिए निकल गया…

“अबे कुछ पता चला?”

  अधीर के सवाल पर अभिमन्यु मुस्कुराने लगा..

“ज़िंदा है तेरी भाभी…!”

  अधीर के कंधों पर हाथ टिकाए गुनगुनाते हुए वो अपने कैम्पस की तरफ बढ़ गया…

       तू है, तो टेड़ी-मेड़ी राहें, उलटी-पुलटी बातें
                 सीधी लगती हैं
       तू है, तो झूठे-मूठे वादे, दुश्मन के इरादे
                सच्चे लगते हैं

            जो दिल में तारे-वारे दे जगा
                  वो तू ही है, तू ही है
          जो रोते-रोते दे हँसा, तू ही है वही

         जाने क्यूँ (जाने क्यूँ) दिल जानता है
              तू है, तो I’ll be alright
                   I’ll be alright…….

क्रमशः

aparna…..

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Som
Som
1 year ago

Kya madam kahani dubara repeat m pdni pdegi 250 part tk to pd hi chuke h

Chandrika Boghara
Chandrika Boghara
1 year ago

Good 👍 👍 👍 👍