
जीवनसाथी -3 भाग -83
उस बहुत ख़राब से सपने को देखने के बाद कली की आँख खुल गयी..
उसकी घबराहट उसके चेहरे पर साफ़ देखी जा सकती थी, उसके माथे पर पसीना छलक आया था, अब भी उसके शरीर में कम्पन था… उसने चौंक कर अपनी बगल में देखा, शौर्य बैठा मुस्कुरा रहा था!
पल भर के लिए वो समझ नहीं पायी कि जो अब देख रही वो सपना है, या जो पहले देखा था वो सपना था!
उसने धीमे से शौर्य के चेहरे की तरफ हाथ बढ़ाया, वो उसके गाल तक पहुंची कि शौर्य ने अपना मुहं खोल कर उसकी ऊँगली काटने का अभिनय किया और वो चिहुंक कर पीछे हट गयी..
“क्या हुआ, इतनी परेशान क्यों लग रही हो ? कोई सपना देखा क्या ?
कली ने धीमे से हाँ में गर्दन हिला दी..
“बहुत भयानक सपना था शौर्य !”
“क्या देखा ? कहीं मुझे मरते हुए तो नहीं देख लिया ?”
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कली इस बात के जवाब में कुछ बोल नहीं पायी..
उसके दिल दिमाग में अभी क्या कैसा कोलाहल मचा था वो कैसे शौर्य को बताती…?
शौर्य ने पानी की बोतल उसकी तरफ बढ़ा दी..
पानी पीकर कली के चेहरे पर हल्की सी राहत उभर आयी….
“शौर्य! तुम यहाँ कैसे ?”
” वैसे ही जैसे तुम, अब बताओ क्या बात है ?”
“मैंने सपने में देखा कि..
“नहीं मैं सपने की बात नहीं पूछ रहा, वो तो तुमने देखा और अब उसे भूल जाओ.. मैं ये पूछ रहा हूँ कि अचानक तुमने महल छोड़ कर जाने का निर्णय क्यों लिया ?”
कली एकदम से चुप हो गयी..
“कली तुम ऐसे चुप रहोगी तो मैं कैसे समझ पाउँगा, बताओ ?”
“ऐसी कोई खास बात नहीं है शौर्य ! “
“तो कैसी बात है, वही बता दो !”
कली ने ध्यान से उसे देखा, कैसे बता दे की उसके आसपास के लोग शौर्य के खिलाफ क्या बोल रहे हैं..
उसने बात बदल दी..
“शौर्य मेरे डैडा मुझे छोड़ कर इतने दिन तक नहीं रह सकते.. उन्होंने दस दिन की इजाजत दी थी और दस दिन पूरे हो चुके, अब ऐसे में मुझे वापस तो लौटना ही था !”
“तो मुझसे बोल कर आ जाती? क्या मैं रोक लेता ?”
“नहीं.. ऐसी बात नहीं है, बात दरअसल ये थी कि तुम व्यस्त थे, और मुझे तुरंत निकलना था !”..
“हम्म… इसीलिए रोती हुई निकली, है ना ? तुम्हे ये भी नहीं लगा कि तुम्हे एक बार मॉम से मिल लेना चाहिए था ?”
मॉम सुन कर कली को सरु की सारी बात याद आ गयी.. कैसे चक्रव्यूह में फंस गयी थी वो.. सरु की बातें याद कर के उसे गुस्सा आ रहा था, रोना आ रहा था! लेकिन रानी बांसुरी का चेहरा याद आते ही उसका गुस्सा उसकी नाराज़गी पिघल कर बहती चली जा रही थी..
उसका दिल और दिमाग एक साथ काम नहीं कर पा रहा था… दिमाग उसे शौर्य से भी बात ना करने का इशारा दे रहा था और दिल था कि उसे वापस महल लौट जाने की समझाइश दे रहा था..
“मुझे लगा सब व्यस्त होंगे, इसलिए किसी से कुछ नहीं कहा !”
“तो बस यही कारण है तुम्हारा अकेले चले जाने का?”.
“हम्म.. !”
“ठीक है, समझता हूँ कि एक दिन तो सभी को अपने घर वापस लौटना ही होता है… मैं भी अगर तुम्हारे घर जाता तो मुझे भी लौटना ही होता..
ऐसा क्यों होता है कली ?.
हम जिसके साथ सबसे ज्यादा कम्फर्टेबल होते हैं, वो हमारा अपना क्यों नहीं होता ?”
“मतलब ?”..
“मतलब ये कि तुम्हारे साथ तुम्हारे फ्लैट पर जितने दिन भी रहा, वो मेरी ज़िंदगी के यादगार दिन बन गए.. बस यही सोच कर तुम्हे अपने साथ लेकर आया था कि जो अनुभव वहाँ तुम्हारे साथ रह कर मिला वैसा ही सुंदर अनुभव तुम्हे यहाँ दे सकूँ !
पता नहीं अपनी इस सोच में मैं कितना सफल हुआ, और कितना असफल..
इस वक्त तुम्हे देख कर तो यही लग रहा कि मेरा प्रयास असफल सिद्ध हुआ है..
शायद तुम्हे महल पसंद नहीं आया, या महल के लोग ?”
“नहीं शौर्य ये बात नहीं है.. मुझे महल और वहाँ के लोग सब बहुत पसंद आये.. लेकिन लौटना मेरी मज़बूरी है.. तुम्हे कैसे समझाऊं, तुम्हारे डैड और मेरे डैडा में बहुत अंतर है..!
मेरे डैडा से मैं झूठ बोल कर यहाँ तक आयी हूँ, और अगर उन्हेँ सब सच पता चल गया तो…
मैं खुद नहीं जानती वो क्या करेंगे ? कैसे समझाऊं शौर्य मेरे डैडा मुझे लेकर कितना घबराते हैं.. उन्हेँ लगता है उनके घर के बाहर की दुनिया मेरे लिए असुरक्षित है..
मैं सिर्फ उनके साथ ही सुरक्षित हूँ.. मैं अपने जीवन में पहली बार घर से निकली हूँ ! वो भी उनसे झूठ बोल कर !”
“हम्म.. वैसे पेरेंट्स से झूठ बोलने के तो मैं भी खिलाफ हूँ.. हमे ऐसा जरूर लगता है कि हमारे पेरेंट्स शायद हमारी बात नहीं मानेंगे और इस डर से हम उनसे झूठ बोलकर अपने मन की कर लेते हैं। लेकिन कहीं ना कहीं उसका दूरगामी परिणाम अच्छा नहीं होता। मैंने भी बचपन में एक बार अपने पेरेंट्स से झूठ बोला था, और वह झूठ मुझ पर कितना भारी पड़ा है, यह मैं ही जानता हूं..”
शौर्य बोलते बोलते थोड़ा भावुक हो गया और कली उसे ध्यान से देखने लगी।
” क्या हुआ था शौर्य? कब तुम्हें अपने पेरेंट्स से झूठ बोलना पड़ा ?”
” एक समय था कली, मैं उस वक्त स्कूल में पढ़ता था ऑस्ट्रेलिया में।
हर्ष भाई भी मेरे साथ वहाँ थे। वह मुझसे सीनियर थे..
महल में हर साल दशहरे पर रावण दहन का कार्यक्रम बड़े जोर शोर से मनाया जाता था। हर साल डैड राम बनकर रावण का दहन करते आए थे। हम सारे लोग कहीं भी रहे, दुनिया के किसी भी कोने से हम दशहरा उत्सव मनाने के लिए महल चले आते थे।
लेकिन उस साल मैं नहीं आया। हर्ष भाई इंडिया आ गए थे। उन्होंने आने से पहले मुझे भी बहुत बार चलने को कहा, लेकिन मैं नहीं आया। अपूर्व मामा मेरे साथ ऑस्ट्रेलिया में रुक गए थे।
अपूर्व मामा ने मुझे कभी अकेला नहीं छोड़ा। मेरी हर तकलीफ के समय वह मेरे साथ मौजूद थे।
“लेकिन शौर्य..तुम्हारे मामा जी, मुझे ज़रा अलग से लगते हैं.।”
कली अपूर्व की सच्चाई शौर्य को बता देना चाहती थी, उसकी बात अधूरे में ही काट कर वो बोल पड़ा..
“मामा जी सबको समझ में नहीं आते, वह बिल्कुल नारियल की तरह है। ऊपर से कठोर लेकिन अंदर से नर्म और मुलायम। उन्होंने जितना मुझे समझा है और जितना प्यार दिया है, उतना कोई नहीं कर सकता। जानती हो कली वैसे देखा जाए तो मां के सगे रिश्ते में भी नहीं आते वह।
मेरी मॉम तो सिर्फ दो बहने हैं..।
मेरी बड़ी मॉम वीणा मासी अब ऑस्ट्रेलिया में ही रहती है..
मामा जी तो रेखा काकी के कज़िन हैं, लेकिन यश से कहीं ज्यादा वो मुझे प्यार करते हैं.. !”
“हाँ तुम्हारे लिए बहुत पज़ेसिव है, ये तो देखा है मैंने ? अच्छा सुनो शौर्य, उनकी खुद की फॅमिली कहाँ है ? उनकी पत्नी बच्चे ?”
“उन्होंने शादी नहीं की! बस इसीलिए शायद उन्हेँ मुझ में अपना बेटा नजर आता है.. मेरे भले के लिए तो वो डैड से भी भिड़ सकते हैं..।
सच कहूं तो डैड पॉलिटिशियन है, इसलिए बहुत कुछ गलत उन्हेँ भी करना पड़ता है।
लेकिन मामा जी ने हमेशा मुझे यही सिखाया है कि डैड चाहे कितना कुछ गलत कर ले, मुझे उनका हमेशा सम्मान करना है।
क्यूंकि उन्होंने मुझे जन्म दिया है… बचपन में इस बात पर मेरा मामा जी से टकराव भी हो जाता था।
क्यूंकि मैं इस बात को नहीं समझता था कि डैड एक राजनेता है। उनकी अपनी मजबूरियां है, जिससे कारण उन्हेँ गलत का साथ देना पड़ता है। और तब मामा जी मुझे समझाया करते थे कि डैड क्यों गलत कर के भी गलत नहीं हैं !
मुझे बहुत वक्त लगा इस बात को मानने और समझने में।”
कली बड़े ध्यान से सारी बातें सुन रही थी, वो ज़रूर नासमझ और मासूम थी, लेकिन इतना तो उसे भी समझ में आ गया था कि कलियुग में शकुनि ने ही अपूर्व के रूप में जन्म लिया है।
कली ने अब तक यह सोचा ही नहीं था कि शौर्य के दिल दिमाग पर अपूर्व ने इस कदर कब्जा जमाया हुआ है। उसे ऊपर से देखने पर यह तो समझ में आता था कि शौर्य अपनी मां से काफी जुड़ाव महसूस करता है। उनसे अपने सुख-दुख की हर बात साझा करता है। इसके साथ ही शौर्य की बातों और उसके हाव-भाव से यह भी समझ में आने लगा था कि वह अपने पिता यानी राजा साहब से जरा दूरी बनाए रखता है। लेकिन इस सब के पीछे का कारण यह था, यह बात आज कली को समझ में आ रही थी।
बचपन से ही शौर्य के मन में उसके मामा ने उसके पिता साहब के लिए कितनी कुछ कड़वी बातें भर दी थी, और उस पर तुर्रा यह कि वह शौर्य को उसके पिता की गलतियों के बावजूद उन्हें माफ करने और स्वीकार करने की बात करता रहा था।
इसका मतलब शौर्य अपने पिता के साथ सामान्य बर्ताव करता हुआ नजर जरूर आता है, लेकिन उसके दिल दिमाग में यह बात कहीं गहरे तक बैठी हुई है कि उसके पिता गलत थे और हैं।
“तुम्हें ऐसा क्यों लगता है,शौर्य के राजा साहब गलत है।”
“पूरी तरह से गलत है, यह नहीं कह रहा हूं कली। लेकिन बचपन में मुझे ऐसा लगता था कि डैड बहुत गलत है।
तुम शायद नहीं जानती होंगी, लेकिन मेरे डैड और मॉम के बीच पहले बहुत लड़ाइयां होती थी।
मॉम एक आम परिवार की लड़की थी और डैड राजशाही से थे।
इसलिए मॉम को यहां एडजस्ट होने में दिक्क़ते आ रही थी, और डैड उनकी मदद करने की जगह उन पर अपने महल के नियम कायदे लादते जा रहे थे।
ऐसे ही एक बार के झगडे के बाद दोनों ने अलग होने का निर्णय लिया और मॉम घर छोड़ कर चली गयी..
वो मेरे नानू के घर चली गयी.. वहीँ रहने लगी !
और तब नानू के ज़ोर देने पर उन्होंने वापस पढाई शुरू की और आईएएस बन गयी।
इस सबके बीच में डैड ने चुनाव लड़ने की सोची और उस समय उन्हें महल के लोगों ने समझाया कि अगर वह चुनाव लड़ते हैं तो उसके पहले उन्हें अपनी पत्नी को यानी मेरी मॉम को वापस लाना होगा। वरना अपनी खराब इमेज के कारण वो चुनाव हार जाएंगे।
और बस इसीलिए डैड मॉम को वापस लेकर आए।
उसके बाद चुनाव हुए और वह जीत गए। लेकिन इसके बाद उन्होंने मॉम को कभी नौकरी नहीं करने दी। इतनी पढ़ी-लिखी होने के बावजूद मेरी मॉम अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाई। उन्हें बस घरेलु औरत बना कर छोड़ दिया डैड ने।
ये तो बहुत छोटी सी बात है कली, डैड ने और भी बहुत कुछ किया है.. क्या क्या बताऊँ तुम्हे ?”
कली आश्चर्य से शौर्य को देख रही थी… उसके दिल दिमाग को किस कदर उसके मामा ने अपने वश में कर रखा था ये वो खुद नहीं जानता था।
शौर्य ने जो भी बातें बताई थी, उनमें से कली कुछ भी नहीं जानती थी। उसे राजा साहब और रानी बांसुरी का कोई इतिहास मालूम नहीं था। बावजूद वह शौर्य की बातों पर यकीन नहीं कर पा रही थी। जबकि वह खुद राजा साहब और रानी बांसुरी का बेटा था।
फिर भी उसकी इतनी कड़वी बातों पर विश्वास करना मुश्किल हो रहा था। कली राजा साहब से खुद मिली थी, और शायद इसीलिए अब भी न उसे सरू की बातों पर यकीन था, ना अपूर्व की।
और ना शौर्य की।
उसका एक मन यह सोचने को मजबूर हो रहा था कि क्या वाकई राजा साहब के सुलझे सुथरे चेहरे के पीछे एक इतना शातिर इंसान छुपा हुआ है, जो अपनी चाल चलने के बाद चेहरे पर के नकाब को हटने भी नहीं देता।
दुनिया के सामने वह हमेशा एक भला इंसान बना रहता है, और अपने भले इंसान की उस छवि के पीछे वह कुछ भी कर जाता है। लेकिन अगर ऐसा होता तो उनकी धर्म पत्नी क्यों उनसे इतनी बेइंतहा मोहब्बत करती?
शौर्य जो भी कह रहा है, अगर उसमें जरा भी सच्चाई होती तो रानी बांसुरी की आंखों में भी राजा साहब के लिए कभी तो नाराजगी नजर आती।
लेकिन उन्हें देखकर यही लगता है कि वह अपने पति से प्यार नहीं करती, पूजा करती है उनकी।
क्या ऐसा संभव है?
नहीं राजा साहब कभी गलत नहीं हो सकते। चाहे सरु कुछ भी कह ले, अपूर्व कुछ भी कर ले, वह शौर्य के दिमाग से राजा साहब की छवि को सुधार कर रहेगी।
शौर्य भावुक हो चला था, लेकिन अब कली में दृढ़ता आ चुकी थी..
वो शौर्य से कुछ कहने जा रही थी कि कूपे के दरवाज़े पर दस्तक हुई और विक्रम अंदर चला आया..
मुस्कुरा कर उसने कोल्ड कॉफी के कप उन दोनों के सामने रख दिए..
शौर्य ने विक्रम को देखा और हल्के से मुस्कुरा उठा..
“थैंक्स विक्रम, अगर तुम सही समय पर मुझे बताते नहीं तो मैं कभी ये ट्रेन पकड़ नहीं पाता !”
कली ने पलट कर विक्रम को देखा.. वो उसे ही माफ़ी मांगने के अंदाज़ में देख रहा था..
“तो तुमने शौर्य को बताया ? लेकिन तुम्हे किसने भेजा यहाँ ?”
कली के इस सवाल पर शौर्य और विक्रम दोनों मुस्कुरा उठे..
“एक ही तो है जिसका दिमाग वाकई कम्प्यूटर से तेज़ भागता है.. धनुष !!”
“धनुष को कैसे पता चला ?”
कली के सवाल पर विक्रम खड़ा हो गया..
“खुद उससे पूछ लो !”
कली भौंहे सिकोड़े उसे देखने लगी..
“मतलब ?”
“मतलब धनुष भी इसी ट्रेन में है !”
“ट्रेन में है.. ? लेकिन क्यों ?”
“क्यूंकि वो भी दिल्ली जा रहा है, वो भी हर्ष सर और अपनी टीम के साथ !”
ख़ुशी मिश्रित आश्चर्य से कली विक्रम और शौर्य को देखने लगी..
“हाँ जी…सारे रॉयल किड्स ट्रेन में मौजूद हैं.. !”
विक्रम की बात पर कली को विश्वास सा नहीं हुआ..
“आप सब ट्रेन में कैसे ट्रेवल कर रहे हैं ?”..
“ये आप खुद चल कर उनसे पूछ लीजिये.. यही बगल वाले कूपे में हर्ष सर और मीठी मैडम भी है.. !”
शौर्य ने कली की तरफ देखा.. और चलने के लिए पूछ लिया.. कली भी राज़ी हो गयी और वो तीनो लोग बगल वाले कूपे में चले आये..
***
सरु दिल्ली पहुँच चुकी थी.. धड़कते दिल के साथ वो कली का इंतज़ार कर रही थी, इसके दिमाग में बस इस वक्त यही चल रहा था कि कली से पहले कहीं वासुकी ना चला आये।
क्यूंकि अगर ऐसा हो गया तो वासुकी कभी सरु को माफ़ नहीं करेगा..
दिल्ली के अपने होटल रूम में परेशान सी बैठी सरु चाय पी रही थी कि उसका फ़ोन रिंग करने लगा… उसने घबरा कर फ़ोन उठाया और नंबर देखते ही उसके होश उड़ गए..
वासुकी के नंबर से उसे फ़ोन आ रहा था..
क्रमशः
ट्रेन प्लेटफॉर्म पर रुकी, और ट्रेन के एसी फर्स्ट क्लास कम्पार्टमेंट का दरवाज़ा खुला..
हर्ष और मीठी के पीछे ही मुस्कुराती हुई कली दरवाज़े पर चली आयी..
लेकिन दरवाज़े के ठीक सामने प्लेटफॉर्म पर वासुकी खड़ा था..
अगले भाग से..

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काली के दिमाग में बिल्कुल सही संकेत दिया है काली को के इस जन्म में शकुनि ही अपूर्व का जन्म लेकर आया है उसने इतना भर दिया है शौर्य के दिमाग को गलत विचारों से उसने उसके पिता के ही खिलाफ उसके दिमाग में इतना जहर भर दिया है कि वह सही गलत को समझना भी नहीं चाहता पर कई उसको सब समझ में आ रहा है और वह इस बात का पर्दाफाश देखना इस दिन शौर्य के सामने कर कर ही रहेगी
जरा धीरे जोर का झटका है जो बहुत जोर से लगा 🫥🫥
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️♥️♥️💐💐💐💐
Beautiful part🌹👌🌹👌🌹👌🌹👌👌
Wow, very nice part, finally Vasuki is back..
Excellent superb ossum part ❣️💕❣️💕❣️💕
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Aage kya hota hai
Vasuki ki Entry ho gayi ya
…
कली को थोड़ा बहुत समझ आ गया कि अपूर्व मामा ने किस तरह शौर्य को उसके पिता के खिलाफ भरा हुआ है, जितनी मासूम है उतनी ही समझदार भी है कली।
ट्रेन से उतरते ही दर्शन हो गए डैडा के,अब वासुकी क्या करते है, सब को साथ देखकर।
कहानी ने अपनी स्पीड पकड़ ली है, बेसब्री से इंतज़ार है अगले पार्ट का👌👌👌👌👌❤️❤️❤️❤️❤️