सरस्वती वंदना

अज्ञानता से निकालो न मां
आकर मुझे तुम संभालो न मा
मैहर की देवी कहते तुम्हें
ज्ञान की माल गले डालो न मां

श्वेत कमल वासिनी मां तू ही
वीणा पाणी है नाम तेरा
सरस्वती,शारदा नाम कई
हंस पे आसन डालो न मां

तम से उजाले पथ ले जाए
भक्तों की नैया पार लगाए
जो भी शरण में तेरी आए
पकड़ो बांह उठा लो न मां

डॉ रश्मि लता मिश्रा
बिलासपुर सी जी

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Abhishek kr singh
Abhishek kr singh
1 year ago

वाह बहुत अच्छी कविता, अतिसुंदर…💐👌🙏