
जीवनसाथी-3 भाग -82
प्रेम ने अपनी आँखों में उमड़ते आंसुओं को अंदर ही रोक लिया और पलट कर स्टेशन से तेज़ तेज़ क़दमों से बाहर निकल गया.!
धीरे धीरे ट्रेन रफ़्तार पकड़ चुकी थी कि तभी कूपे के दरवाज़े पर दस्तक सी हुई और झटके के साथ कूपे का दरवाज़ा खुल गया..
मीठी ने पलट कर देखा, सामने हर्ष खड़ा था..
मीठी उसे देखती रह गयी, और हर्ष मुस्कुराता हुआ अंदर दाखिल हो गया..
हर्ष अंदर आकर मीठी के सामने वाली सीट पर बैठ गया, धनुष दरवाज़े पर ही खड़ा था!
“मैं बाक़ी लोगो की सीट अरेंज कर के आता हूँ प्रिंस !”
धनुष ने बोला और केबिन का दरवाज़ा लगा कर चला गया..
हर्ष अपलक मीठी को देख रहा था..
“क्या हुआ मीठी ? नाराज़ हो ?”
मीठी ने कोई जवाब नहीं दिया और खिड़की से बाहर देखने लगी..
“अच्छा इतना तो बता दो कि मुझसे बात क्यों नहीं कर रही तुम? मेरी गलती क्या है ?”
मीठी अब भी चुप ही थी….
“तुम शायद इतनी नाराज़ हो कि, अब कभी मुझसे बात नहीं करना चाहती, अब समझ में आया इसलिए तुम्हारा मोबाइल नहीं लग रहा था.. मतलब तुमने मेरा नंबर ब्लॉक कर दिया है..
ओह्ह अब समझा!
मैंने कभी नहीं सोचा था कि तुम इतनी नाराज़ हो जाओगी? लेकिन किस बात पर नाराज़ हो वो तो बताओ!”
मीठी ने अब भी कुछ नहीं कहा और हर्ष अपनी जगह पर खड़ा हो गया. .
“ठीक है मीठी, तुमने तय कर लिया है कि मेरी तरफ देखोगी भी नहीं, तो अब यही सही, मैं भी जा रहा हूँ ! कभी वापस नहीं आने के लिए.. !”
हर्ष एक झटके में खड़ा हो गया..
वो उठा और केबिन के गेट तक पहुंचा ही था कि मीठी ने उसका हाथ पकड़ लिया..
हर्ष ने मुड़ कर देखा.. -“क्या हुआ ?”
“हर्ष… !”
मीठी कुछ कह नहीं पायी.. दिल उसका पहले ही भरा बैठा था, अब गला भी भर आया !
हर्ष उसे ही देख रहा था, वो समझ रहा था कि मीठी दुखी है, लेकिन किस बात से ये उसकी समझ से बाहर था!
वो चाहता था बिना किसी दबाव के मीठी अपने मन में चल रही सारी उलझन उससे कह दे..
“मीठी ! तुम बोलोगी नहीं तो समझूंगा कैसे ? इतना तो समझ ही गया हूँ कि किसी बात से बहुत परेशान हो, लेकिन वो बात क्या है ? तुम बताओगी तभी मुझे पता चलेगा ना ?”
मीठी धीमे से हर्ष का हाथ खींच कर उसे केबिन में वापस ले आयी..
“हर्ष… कैसे कहूं ? देखो तुम सब जानते हो !”
“मैं जो नहीं जानता वो जानना चाहता हूँ, मीठी ! बताओ तो सही क्या चल रहा, तुम्हारे दिमाग में ?”
“हर्ष एक बात का जवाब देंगे ?”
“हाँ पूछो तो सही !”
“जब मैंने आपको ये बताया कि मैं मेरे पापा की नहीं बल्कि उनके छोटे भाई की बेटी हूँ, तब अचानक आप कहाँ चले गए थे ? मैंने कितना इंतज़ार किया और फिर मुझे लगा आप ये सच्चाई सुनंने के बाद मुझे छोड़ कर चले गए हैं! और तभी मुझे समझ में आ गया कि एक रियासत का राजकुमार कभी ऐसी लड़की से शादी नहीं करना चाहेगा जिसके जन्म का इतिहास इतना काला हो !”
“कैसी बात कर रही हो मीठी? चलो मान लिया तुम प्रेम काका की बेटी नहीं भी हो, तब भी तुम हो तो चंदेल खानदान की ही बेटी ना..?
क्या फर्क पड़ता है कि तुम प्रेम काका की बेटी हो या प्रताप काका की ! मैं सच कहूं तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता… और सुनो..
तुम्हारी बात सुनने के बाद मैं अपनी गाड़ी तक गया था, तुम्हारे लिए लेकर आया तोहफा लेने! लेकिन उसी बीच धनुष का फ़ोन आ गया और उससे बात करते हुए मुझे ज़रा देर हो गयी, जिसकी वजह से मैं जल्दी लौट कर तुम तक वापस आ नहीं पाया!
लेकिन मैं जब लौट कर आया तब तक तुम जा चुकी थी..
हम उस वक्त तुम्हारे घर के ठीक बाहर ही तो खड़े थे, मुझे लगा तुम्हें निरमा काकी या प्रेम काका ने वापस बुला लिया है।
धनुष मुझे जल्दी बुला रहा था, इसलिए मैं घर के अंदर नहीं गया और वापस लौट गया। लेकिन तब मुझे मालूम नहीं था कि मेरा तुमसे मिले बिना चले जाना तुम्हारे दिमाग में गलतफहमी पैदा कर गया है।
मीठी तुम तो बहुत सुलझे हुए विचारों वाली लड़की हो। तुम्हें यह गलतफहमी कैसे हो गई कि तुम्हारी बात सुनकर मैं तुम्हें छोड़कर चला गया..?
पहली बात तो तुम्हारा जन्म का इतिहास किसी तरफ से भी काला नहीं है। मुझे ही क्या मेरी मां और पिता साहेब को भी इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि तुम किसकी बेटी हो? हमारे लिए तुम प्रेम काका की ही बेटी थी, हो और हमेशा रहोगी, इसलिए इस बात को अपने दिमाग से निकाल दो..।”
“ऐसा आपको लगता है हर्ष, लेकिन ऐसा है नहीं। महल के लोगों के लिए बहुत बड़ी बात होगी।
मेरे ख्याल से अब तक रानी मां या बड़े राजा सा को मालूम ही नहीं कि मैं किसकी बेटी हूँ ! और अगर उन लोगों को यह बात पता चलती है तो उन्हें इस बात से जरूर फर्क पड़ेगा।
हर्ष आप महल के सबसे बड़े राजकुमार है, और जल्दी ही आप राजगद्दी पर बैठने वाले हैं। आप महल के, इस रियासत के राजा बनने वाले हैं। ऐसे में आपके साथ आपके सिंहासन पर आपके बगल में बैठने वाली रानी भी आपकी बराबरी की होनी चाहिए। अब मुझे समझ में आने लगा है कि मैं एक आम सी लड़की हूं। एक साधारण परिवार की लड़की, आपकी रियासत की जनता में शुमार हूं मैं।
मुझे आपके बराबरी में बैठने का हक नहीं है..।”
“अच्छा तो ये बात है, इसलिए आज मुझे तुम की जगह आप बुलाया जा रहा है ! यह तय करने वाली आप कौन होती हैं मीठी मैडम? आपके पिता ने आपको बिल्कुल राजकुमारी सा पाला है। और मुझ पर यकीन करो, मैं तुम्हें बिल्कुल रानी बनाकर ही रखूंगा। इसलिए अपने दिमाग से यह सारी खुरापाते हटा दो वरना..।”
“वरना क्या.. ?”
हर्ष धीरे से मुस्करा उठा
” वरना मैं चलती ट्रेन से कूदने की धमकी नहीं दूंगा। और ना ही यह धमकी दूंगा कि तुम्हें हमेशा के लिए छोड़ जाऊंगा। क्योंकि मैं जानता हूं, मैं अगर तुम्हें छोड़ गया तो तुम जी नहीं पाओगी मेरे बिना..।”
मीठी की आंखों से आंसू बहने लगे थे। हर्ष ने धीरे से उसके आंसुओं को पोछा, और उसे अपने सीने से लगा लिया। उसी वक्त केबिन के दरवाजे पर दस्तक हुई और दरवाजा धीरे से खोलकर धनुष भीतर चला आया। उसके आते ही हर्ष ने मीठी को खुद से दूर कर दिया..
“सॉरी, मैं गलत वक्त पर तो नहीं आ गया..।”
“नहीं, बिल्कुल सही वक्त पर आए हो। किसी बात का गवाह बनाना है तुम्हें, वरना मीठी को मुझ पर यकीन ही नहीं होगा।”
हर्ष ने प्यार से उलाहना सा दिया और मीठी बनावटी नाराजगी से हर्ष को देखने लगी।
धनुष के पीछे ही यश और मीरा भी केबिन में चले आए। मीरा केबिन को ख़ुशी से देखते हुए एक तरफ बैठ गई..
“वाव एसी फर्स्ट क्लास की तो बात ही अलग है! वैसे कहने के लिए सब फ्लाइट में ट्रैवल करते हैं, मुझे भी फ्लाइट में घूमना अच्छा लगता है। लेकिन उससे कहीं ज्यादा कंफर्टेबल ट्रेन का फर्स्ट क्लास है, है ना..?”
मीरा ने अपनी चटर-पटर जारी रखते हुए धनुष की तरफ देखा और धनुष ने ना में गर्दन हिला दी..
“तुमने फ्लाइट में आज तक इकोनॉमी क्लास में ट्रेवल किया है ना, इसलिए छोटी-छोटी सीट पर बैठने के कारण तुम्हें ऐसा लग रहा है।
बिजनेस क्लास बहुत बैटर होती है..।”
“मुझे क्या पता, तुम तो जब पेरिस लेकर गए थे, हम सब मॉडल्स को इकोनॉमी क्लास में फेंक कर तुम अपने बॉस को लेकर बिजनेस क्लास में चले गए थे..।”
“ओबवियसली उन्हें तुम्हारे साथ इकोनॉमी में तो नहीं ट्रैवल करवाऊंगा, लेकिन मैं तो मौजूद था तुम्हारे साथ.. ।”
“वह तो अब भी मेरे सर पर मौजूद हो।
तुम ट्रैवलिंग मैनेजर ही बन जाओ, वैसे धनुष ट्रेन में कुछ खाने को नहीं मिलता है क्या..?”
“बस इसी बात का इंतजार था मुझे कि, तुमने अब तक खाने पीने को कुछ क्यों नहीं मांगा..?”
यश ने एक तरफ लगे बटन को दबा दिया और कुछ ही सेकंड्स में एक वेटर उस केबिन के दरवाजे पर आर्डर लेने के लिए खड़ा था।
धनुष ने हर्ष और मीठी की तरफ देखा..
“आप दोनों के लिए क्या मंगवा दूं..?”
“मेरे लिए कुछ नहीं धनुष।”
मीठी ने कुछ भी खाने से इनकार कर दिया।
मीठी की तरफ देखकर हर्ष ने भी मुस्कुराते हुए धनुष को अपने लिए कुछ भी लाने से मना कर दिया।
यश ने अपने लिए सैंडविच और जूस बोल दिया और मीरा आंखों को झपकाते हुए वेटर की तरफ देखने लगी।
” इस वक्त गरमा गरम क्या-क्या मिल जाएगा..?”
“आप जो भी ऑर्डर करेंगे, वही हम बना कर दे देंगे मैडम..।”
“ओह्ह तो ऐसा करो मेरे लिए नूडल्स, पोटैटो फ्राइज, ग्रेप जूस और अनियन फ्रीटर्स ले आना !”
यश ने मीरा की तरफ देखा.. -“आर यू श्योर ?”
“हाँ क्यों.. अभी फ़िलहाल कोई मॉडलिंग असाइनमेंट नहीं है मेरा, तब तो खा सकती हूँ ना.. वापस दिल्ली लौट कर मैं अपनी कीटो डाइट में चली जाउंगी.. डोंट वरी.. उससे मैं फटाफट अपना वजन कंट्रोल कर लेती हूँ.. !”
“नहीं मैं इसलिए नहीं देख रहा था तुम्हे.. मैं यह सोच रहा था कि पकौड़े और फ्राइस के साथ ग्रेप जूस की जगह चाय ज्यादा बैटर लगती..।”
“अरे हाँ.. अब क्या करूँ ?”
“चाय भी बोल दो !” धनुष ने अपनी हंसी दबा कर कहा और हाँ में गर्दन हिलाती मीरा ने वापस वेटर को बुलाने वाला स्विच दबा दिया..
***
थकान से कली की आँख लग गयी थी…. वो गहरी नींद में डूबी थी कि किसी ने उसके कंधे पर हाथ रख दिया..
उसने चौंक कर आंखे खोल दी..
सामने शौर्य खड़ा था..
“ऐसे अचानक कहाँ चली जा रही थी कली?”
“तुम… तुम यहाँ कैसे ?”
“मुझे पता था तुम दिल्ली जाने निकल गयी हो, इसीलिए तुम्हारे पास चला आया! तुमने एक बार भी ज़रूरी नहीं समझा कि मुझे बता कर जाओ !”
“बता कर जाने वाली कौन सी बात हो गयी शौर्य ?”
“तो बिना बताये जाने वाली कौन सी बात हो गयी कली ? क्या हमारी दोस्त के लिये भी तुम्हारे मन में एक पल को भी ये विचार नहीं आया कि मुझे बता कर निकल जाओ.. क्या अचानक मैं इतना गैर हो गया ?”
“गैर वाली कोई बात ही नहीं.. वैसे भी अभी अभी तुम्हारे मामा जी ने ही तुम्हारे बारे में काफी कुछ बताया है मुझे !”
“ऐसा क्या बता दिया मामा जी ने !”..
“यही की मुझसे पहले भी तुम्हारी कई सारी दोस्त रही हैं।”
“ऑब्वियस्ली, दोस्त तो रहेंगे ही कली! उसमे गलत क्या है ?”
“मैं गर्लफ्रेंड्स की बात कर रही हूँ !”
“हाँ मेरे बॉयफ्रेंड्स भी है, और गर्लफ्रेंड्स भी.. इन ऊलजलूल बातों में उलझो मत.. वैसे मामा जी मुझसे काफी क्लोज़ हैं, उन्होंने बचपन में मेरा बहुत ध्यान रखा है.. मैं जब इण्डिया से बाहर था, तब भी वो साथ थे !”
“अच्छा मतलब वहाँ भी गर्लफ्रेंड्स थी?”
“तुम पूछना क्या चाहती हो कली? साफ़ साफ़ कहो ना ! अब तुम भी लड़की हो और मेरी फ्रेंड भी हो तो हुई ना तुम गर्लफ्रेंड!”
“नहीं वैसी नहीं.. मेरा कहने का मतलब है.. “
“हाँ बोलो ना क्या ? अच्छा सुनो, तुमसे एक बता कहनी थी ! तुम यहाँ इण्डिया में अपना फोटोग्राफी कैरियर बनाने आयी थी ना, मैंने तुम्हारी खींची हुई कुछ तस्वीरो को धनुष को भी दिखाया था, और वो तुम्हे अपने साथ काम पर रखने को तैयार है, मतलब अब तुम मॉडलिंग फोटोग्राफी करोगी.. !”
शौर्य ये कह कर मुस्कुरा उठा, मुस्कुराना तो कली भी चाहती थी, लेकिन मुस्कुरा नहीं पा रही थी।
तभी उस केबिन का दरवाज़ा खुला और सरु भीतर चली आयी..
सरु को ऐसे अचानक आया देख कली की आंखे चौड़ी हो गयी..
वो भाग कर सरु के गले से लग गयी..
“सरु आप यहाँ कैसे ? इस ट्रेन में ?”
“कली अनिर भैया इण्डिया आ गए हैं!”
“क्या?”
“तुम्हारा उनके पास पता नहीं था। उन्होंने मुझे फ़ोन किया तो मैंने कहा कि मैं तुम्हारे साथ हूँ। उन्होंने तुमसे बात करवाने कहा, तो जैसे तैसे मैंने बहाना बना दिया..मैं कैसे यहाँ तक पहुंची हूँ, मैं ही जानती हूँ… ! तू कैसी है बेटा ? मैं तो काका की सेवा में ऐसी व्यस्त हुई कि तुझ पर ध्यान ही नहीं दे पायी..।
इतने दिन तू मुझसे दूर कभी नहीं रही, इतने दिनों बाद तुझे देख कर बहुत अच्छा लग रहा है। लेकिन ज़रा दुबली हो गयी है मेरी कली..।
काका भी अपने अंतिम समय में तुझे याद कर रहे थे। उन्होंने तेरा नाम सबा रखा था ना, वो तुझे सबा ही बुलाते हैं.. पूछ रहे थे मेरी सबा कितनी बड़ी हो गयी है?”
कली से बातों में खोयी सरु का ध्यान अचानक किनारे बैठे शौर्य पर गया और वो चीख पड़ी..
“राजकुमार शौर्य ? आप यहाँ ?”
आश्चर्य में डूबी सरु ने कली की तरफ देखा..
“ये यहाँ कैसे कली ? कली ये तो राजा अजातशत्रु के बेटे हैं। और इस परिवार से हमारा दूर दूर तक कोई नाता नहीं होना चाहिए..।
कली तुम जानती नहीं, अगर तुम्हारे पिता को पता चला कि राजकुमार शौर्य तुम्हारे दोस्त हैं तो वह बहुत ज्यादा नाराज हो जाएंगे बेटा। उन्होंने आज तक तुमसे कभी कुछ भी नहीं कहा, उन्होंने बड़े नाजों से तुम्हें पाला है, और तुम उनके ही सबसे बड़े दुश्मन के बेटे को दोस्त बनाकर घूम रही हो।
यह बहुत गलत बात है। तुम नहीं जानती इस परिवार ने तुम्हारे पिता के साथ, तुम्हारी मां के साथ क्या किया है? और राजकुमार शौर्य आप अपने राज परिवार को छोड़कर यहां कर क्या रहे हैं? आपको तो इस वक्त अपने राजमहल में होना चाहिए था..!”
शौर्य अचानक खड़ा हुआ और उसने सरु के पास खड़ी कली का हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया..।
ऐसा होते ही सरु आंखे फाडे शौर्य को देखने लगी..
” ऐसे जबरदस्ती करके आप कली को अपने साथ नहीं ले जा सकते प्रिंस शौर्य! आप कली का हाथ छोड़ दीजिए, वह हमारे साथ जाएगी..।”
” देखिए आप जो भी हैं, मैं आपको नहीं जानता। लेकिन कली जिस तरीके से आपसे घुल मिलकर बातें कर रही है। आप उसकी कोई करीबी लगती है।
कली के बारे में मैं इतना जानता हूं कि वह मेरी बहुत खास दोस्त है। और फिलहाल उसके दिमाग में मेरे खिलाफ किसी ने जहर भर दिया है। और मुझे उस जहर को दूर करना है। मुझे कली की गलतफहमी दूर करने दीजिए।
उसके बाद यह कली पर डिपेंड करता है कि, वह मुझसे दोस्ती करना चाहती है या नहीं?
मेरे ख्याल से कली अब बालिग हो चुकी है, और उस पर आप किसी तरह का दबाव नहीं डाल सकती।”
“कली मेरी बच्ची है, मैंने उसे पाल पोस कर बड़ा किया है। सिर्फ दो साल की थी जब से मेरी गोद में कली पली है। इसलिए उस पर मेरा पूरा हक है। उसके दिमाग में आपको लेकर कोई गलतफहमी नहीं है। वह जो भी जानती है, वह सब कुछ सच है। और उसे आपके और आपके परिवार का सच मालूम होना चाहिए। आप इसी वक्त इस कूपे से बाहर चले जाइए..।”
इतना कहकर सरू ने कली को अपनी तरफ खींच लिया लेकिन इस खींचतान में कूपे का दरवाजा खुल गया।
सरू ने शौर्य को हल्के से धक्का देकर कूपे से बाहर कर दिया। और यह देखकर कली को बहुत दुख हुआ। उसने सरू की तरफ देखा, कली की आंखों में आंसू चले आए थे।
“सरू यह आप क्या कर रही हैं..?
शौर्य मेरा अच्छा दोस्त है, उसने कभी किसी के साथ बुरा नहीं किया। मैं इतने दिनों से उसके साथ थी, मैं उसे अच्छे से जानती हूं। आप ऐसे धक्का नहीं दे सकती।”
कली सरू का हाथ छुड़ाकर शौर्य के पास चली आई। लेकिन आज पता नहीं सरू के दिमाग में क्या फितूर सवार था।
वह भी कूपे से बाहर निकल आई ।
“तुम पागल हो गई हो कली, तुम्हें नहीं पता कि तुम्हारे पिता इन बातों से कितना नाराज हो जाएंगे। इस राजकुमार को यहां से जाने दो। इसके चक्कर में फंसी तो तुम नहीं जानती क्या हो जाएगा..?”
शौर्य को एक बार फिर सरू ने कली से दूर करने के लिए धक्का सा दिया, और शौर्य ट्रेन के गलियारे के मुख्य दरवाजे तक पहुंच गया। दरवाजा खुला हुआ था, और शौर्य उस गलियारे से बाहर निकल गया।
उसके ठीक पीछे कली भी पहुंच गई, और कली के पीछे सरू भी बाहर चली आई…
ट्रेन बहुत तेज रफ्तार से बढ़ रही थी। और इत्तेफाक से एसी फर्स्ट क्लास का ट्रेन का दरवाजा खुला हुआ था। और ठीक दरवाजे के पास खड़ी सरू कली और शौर्य को अलग करने की कोशिश कर रही थी।
कली ने शौर्य का हाथ थाम लिया..।
“सरू मैं मानती हूं कि आपने मुझे पाल-पोस कर बड़ा किया है मैं आपसे बहुत प्यार भी करती हूं। लेकिन आप शौर्य की जिस तरह से इंसल्ट कर रहे हो, यह मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा। मैं खुद डैडा से बात करूंगी, वह भी समझेंगे कि शौर्य मेरा दोस्त है..।”
कली की बात सुनकर सरू की आंखों में खून उतर आया था।
आज से पहले कली ने कभी सरू को इतना नाराज नहीं देखा था। वह समझ नहीं पा रही थी कि सरू को क्या हो गया है?
सरू ने आगे बढ़कर कली का हाथ झटक दिया, और शौर्य को कली से दूर कर दिया।
वापस मुड़कर सरू कली को कुछ बोलती, उसके पहले ही शौर्य ने एक बार फिर कली को अपनी तरफ खींचने की कोशिश की।
और इस बार सरू ने शौर्य को जोर से धक्का दे दिया। धक्का इतना तेज था कि चलती ट्रेन के खुले दरवाजे से शौर्य छिटक कर बाहर गिर गया.।
कली शौर्य के गिरते ही तेज़ी से चीख पड़ी..
“शौर्य !!”
और कली की आँख खुल गयी..
उसका चेहरा पसीने से भीगा हुआ था, उसने देखा, वो इस वक्त ट्रेन के कूपे में बैठी हुई थी..
उसका चेहरा किसी के कंधे पर था, उसने मुड़ कर देखा, उसके बाजु में शौर्य बैठा मुस्कुरा रहा था..
तो क्या अब तक जो सब चल रहा था वो उसका सपना था.. इतना भयानक सपना !
और वो इतनी देर से शौर्य के कंधे पर सर रखे सो रही थी?
क्रमशः

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Jeevansathi 3 part 81 nahi mil raha vlog par.
😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊👍👍👍👍👍👍👍
Wow matlab harsh ne aakhir apni mithi ko aakar sambhal liya.prem babu ki chinta khatam kyunki unki beti ko sambhalne ke liye uska prince aa gaya hai ❤️❤️❤️. shaurya ne sahi Kiya ki wo kali ke pichhe aa gaya.dono ke bich ki galatfahmiyan dur honi jaruri hai.siper part mam 😘😘😘🥰🥰🥰
Kitna bhayanak sapna tha Kali ka ….Meera hi in sab me aisi h jise kuch bhi ho fark nhi padta ….bas khaane ko chahiye….baaki toh aaj sab me confusion bahut tha ….kab dur hogi in ki galatfahmi…
मस्त पार्ट👌🏻👌🏻
Kali ke dimag me nafart kyo bhar rhi hai shiru ur kans mama to shaurya ko ajat shatru ke virodh me krne pe lga hur Raaja ajat shatru ko badnam
Mam koi ap h jispe ap likhte ho,apki kahani ko kaise dude
बस यहीं तो लिख रही हूँ.. गणेश चाहेंगे तो मेरी website जल्दी ही app में बदल जाएगी..
Very nice part. Mere yeh samjh nahi aa raha ki suru bhi aisi baat kyun kar rhi hai woh toh khud basuri ke sath rhi hai usne basuri ko kitna pyar diya hai aur basuri ne Kali ke liye apne chote shourya ko bhi chod diya tha phir bhi yeh misunderstanding kyun paida kar rhe hai kali ke mann mein
जीवनसाथी next part