
बेसब्रियां -9
मोहिता के ऐसा पूछते ही निम्मी की मां मुस्कुराकर हां बोल गई…
“कौन सी पिकनिक… ?”
सिम्मी ने चौक कर अपनी मां की तरफ देखा और उसकी मां मुस्कुरा कर कुछ बोलती उसके पहले मोहिता ने हीं जवाब दे दिया…
” हम सब यहां बहुत दिनों बाद आए हैं सिम्मी.. बचपन में अक्सर हमारे डैड हमें यहां पास में देवझरना स्पॉट में पिकनिक पर ले जाया करते थे… कोई पहाड़ी झरना है आसपास..!
सुना है बेहद खूबसूरत है | बचपन में तो हम बहुत बार गए हैं, लेकिन बड़े होने के बाद वहां जाने का मौका नहीं मिला..!”
मोहिता की बात पर श्लोक ने सहमति जता दी…
” बचपन की यादें वैसे भी दिल के कोने में ऐसे महफूज़ रहती है कि हम किसी भी उम्र में पहुँच जाये, ये हमें नहीं छोड़ती… बस अपनी खूबसूरत यादों को वापस जीना चाहते हैं, हम उस जगह में जा कर…|
अगर आप लोग भी साथ चलेंगे तो हमें ख़ुशी ही होगी..
उन लोगों की इतनी भावुक बातें सुन कर वहाँ मौजूद कोई कुछ नहीं कह सका और निम्मी की माँ ने हामी भर दी….
सिम्मी ने अक्षत की तरफ देखा वो अपने मोबाइल पर ऐसे व्यस्त था जैसे उसे वहाँ बैठे किसी से कोई लेना देना ना हो….
सिम्मी उठ कर रसोई में चली गयी… उसे अपनी नज़र के सामने बैठा अक्षत किसी हाल में सहन नहीं हो रहा था..
सिम्मी का फ़ोन बाहर टेबल पर ही छूट गया था… और उस पर तेजस का फ़ोन आने लगा… फ़ोन ठीक अक्षत के सामने रखा था.. सिम्मी अपने फ़ोन की रिंग सुन बाहर आई और अक्षत ने सामने पड़ा उसका फ़ोन उठा कर उसके हाथ में पकड़ा दिया, लेकिन इसी के साथ उसने स्क्रीन पर आता तेजस का नाम भी देख लिया…
और ये बात सिम्मी ने उसके चेहरे पर आई कठोरता देख कर ही जान ली..
सिम्मी को इस वक्त आता तेजस का फ़ोन अखर गया….
पहले ही ये सनकी तेजस को उसका बॉयफ्रेंड मानें बैठा था और अब रात के वक्त तेजस का यूँ उसे फ़ोन करना उसके शक को और पुख्ता कर गया…
सिम्मी को लगा अपना सर धुन लें……
वो तेजस का फ़ोन लिए अंदर चली गयी… तेजस को भी ऐसी कोई खास बात नहीं करनी थी, उसने बस यूँ ही फ़ोन लगा लिया था लेकिन उसकी इस हरकत पर सिम्मी उससे नाराज हो बैठी…
उसका फ़ोन रख कर वो जब तक बाहर आई श्लोक और बाकी लोग वहाँ से जा चुके थे…
सिम्मी ने राहत की साँस ली और निम्मी के बगल में जाकर बैठ गयी….
क्या हो रहा था उसके साथ… ना चाहते हुए भी उस अड़ियल के सामने उसकी इमेज ख़राब होती जा रहीं थी….
तेजस का वापस उसके पास फ़ोन आने लगा….
सिम्मी ने पहली बार में फोन नहीं उठाया लेकिन फोन अपने आप कटने के बाद दोबारा फिर से रिंग करने लगा और आखिर मजबूरी में सिम्मी को फोन उठाना पड़ा | उधर से तेजस की आवाज सुनते ही सिम्मी का दिमाग चढ़ गया, लेकिन बिना सिम्मी की कोई बात सुने ही तेजस बोलने लगा….
” सिम्मी तुमसे इसी वक्त मिलना चाहता हूं, तुम्हारे घर के नीचे तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं !”
“लेकिन इस वक्त क्यों ? ऐसी क्या आफत हो गई तेजस..?”
” सिमी प्लीज नीचे आ जाओ मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं…!”
सिम्मी और तेजस सिर्फ अच्छे दोस्त थे ! आज तक उसे तेजस पर कभी किसी बात को लेकर नाराजगी नहीं हुई थी, लेकिन आज उस जिद्दी अड़ियल सनकी लड़के के तेजस को सिम्मी का बॉयफ्रेंड सोच लेने के बाद से उसकी नाराजगी तेजस पर निकालने लगी थी..!
और यही सोचकर सिम्मी कुछ देर को थम कर बैठ गयी…
. उसे लगा अगर वह बेवकूफ लड़का तेजस को सिम्मी का बॉयफ्रेंड समझ बैठा है तो इसमें तेजस की क्या गलती ?
. अपने आप को संयत करके निम्मी को बताने के बाद वह नीचे उतर कर तेजस से मिलने चली गई…
कुछ देर पहले ही बारिश होकर रुकी थी, पूरा रास्ता धुला धुला साफ नजर आ रहा था..! रोड के दोनों तरफ स्ट्रीट लाइट जल रही थी | मौसम बेहद खुशगवार था !
तेजस के कहने पर सिम्मी और तेजस रास्ते पर वॉक करते हुए आगे बढ़ने लगे ! बातों बातों में सिम्मी का झुमका वही रेस्टोरेंट में तेजस के पास छूट गया था | जिसे वापस करने के लिए तेजस सिम्मी को नीचे बुला रहा था…
” ऐसा भी क्या गजब हो जाता तेजस, अगर यह झुमका आज मुझे नहीं मिलता तो.. ?”
“अगर तुम्हें आज ही झुमका नहीं देता तो, फिर मैं कभी तुम्हें यह झुमका वापस नहीं देता |”
और हंसते हुए तेजस ने अपनी जेब में से वह झुमका निकालकर सिम्मी की हथेली को अपने हाथ में थाम कर उसकी हथेली पर रख दिया | उसी वक्त सामने से आती कार की लाइट उन दोनों पर चमकी और दोनों एक किनारे हट गए……
लंबी सी बीएमडब्ल्यू उनके बगल से होते हुए जरा धीमी हुई और अंदर बैठे अक्षत ने शायद जानबूझकर सिम्मी को घूरना जारी रखा….
सिम्मी की नजर जैसे ही अक्षत पर पड़ी उसके दिमाग की बत्ती जल उठी, यह तो फिर से गड़बड़ हो गई |
इस कमबख्त को भी अभी इस रास्ते से गुजरना था | अब ये पक्का सोचेगा कि मैं अपने बॉयफ्रेंड से मिलने इतने सुनहरे मौसम में नीचे आई हुई हूं..|
हे भगवान मेरे साथ ही ऐसे सियापे क्यों होते हैं…?”
अक्षय को देखकर सिम्मी ने हल्की सी मुस्कान देने की कोशिश की लेकिन उससे मुस्कुराते नहीं बना, और अक्षत ने अपनी गाड़ी तेजी से उन लोगों के सामने से आगे निकाल ली !
.. उसके जाने के बाद तेजस चुपचाप खड़ा उसकी गाड़ी को घूरता रहा सिम्मी तेजस की तरफ मुड़ गई…
” क्या हुआ.. ? यूँ घूर क्यों रहें हो ? जानते हो क्या इसे ..?”
” काश इसे नहीं जानता होता..? काश ये आदमी कभी मुझे मिला नहीं होता | मैंने अपनी जिंदगी में इससे ज्यादा घटिया इंसान कभी नहीं देखा..|”
“ओह्ह!! तो इसका मतलब तुम दोनों एक दूसरे को जानते हो..?”
“हाँ जानता हूँ… !”
“कैसे.. ?”
“मैं शिमला रहा करता था, तुम्हें याद है ना ?”
.
“हाँ !”
” इन्हीं खनूजा के घर रहा करता था.. ! अक्षत के दादा ने मेरे पिता को दीवान के पद पर रखा था….
अक्षत के पिता मुझसे बहुत प्यार किया करते थे और शायद यहीं बात इसे हजम नहीं होती थी.. जाने क्यों मुझसे हमेशा ही एक खुन्नस पाले रहता था… !
धीरे धीरे समय के साथ इसने सारा बिज़नेस देखना शुरू किया और मुझे अपने घर से हटाने की चालें चलने लगा… !
आखिर इसका झूठ जीत गया और मेरे पिता के साथ मुझ पर भी पैसों की चोरी का आरोप लगा कर इसने मुझे घर और ऑफ़िस से बेदखल कर दिया.. ! अब बोलों आखिर मैं कैसे इसे देख कर खुश रहूँ…?
इसका दिल तो इसे गलत करने की गवाही भी दे देता है.. मेरा तो ज़मीर मुझे किसी के साथ गलत करने की गवाही भी नहीं देता.. |
क्या कहें किसी किसी की ऑंख पर उसके रुपयों और अमीरी का चश्मा यूँ चढ़ा रहता है कि बाकी सारी चीज़े धुंधली हो जाती है… !”
तेजस कि बातें सुनती बैठी सिम्मी के मन में दबा अक्षत के लिए गुस्सा और भी ज्यादा बढ़ गया…
उसने उसके बाद तेजस से और कोई पूछताछ नहीं की… तब तक में ऊपर से निम्मी का फ़ोन आने लगा और तेजस से बिदा लेकर सिमरन अपने घर आ गयी…
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अगली सुबह वो लोग पिकनिक के लिए तैयार हो रहें थे कि निम्मी के फ़ोन पर श्लोक का कॉल आने लगा…
श्लोक के घर पर ट्रेवलर भी थी जिसमे अक्सर उनका परिवार फैमिली पिकनिक पर जाया करता था….|
श्लोक ने उसी गाड़ी को लेकर आने की बात निम्मी के सामने रख दी…
“आप लोग तैयार हो चुके हैं क्या.. ?”
श्लोक की बात सुन निम्मी हड़बड़ा गयी..
“हाँ लगभग तैयार ही हैं.. क्यों क्या हुआ.. ?”
“हम लोग गाड़ी लेकर आपके घर ही आ जाते हैं, वही से सब एक साथ पिकनिक पर निकलेंगे… लम्बी यात्रा है एक साथ एक ही गाड़ी में रहेंगे तो मजा आ जायेगा.. !”
निम्मी श्लोक की बात सुन कर चहक उठी…
“ठीक है, हम लोग आपका इंतज़ार करेंगे… !”
निम्मी वापस तैयार होने चली गयी, उसने अपनी माँ को श्लोक के फ़ोन के बारे में बता दिया था… लेकिन सिम्मी से कहना भूल गयी…
उसी वक्त लीला आंटी भी उनके घर चली आई, उन्हें देखते ही निम्मी ने सवालिया नज़रों से अपनी माँ को देखा.. और पम्मी जी झेंप मिटाने मुस्कुरा उठी…
रसोई में चाय चढाने जाती अपनी माँ को निम्मी ने रसोई में पकड़ लिया…
“ये लीला आंटी कैसे धमक पडी.. ?”
“मुझे क्या पता.. ?”
“झूठ मत बोलों मम्मी, तुम्ही ने इन्हे भी बुलाया होगा.. !”
“अब जब जानती है, तो फिर ये सवाल क्यों कर रहीं है.. !”
“हद हो मम्मी.. जानती हो कि लीला आंटी मुहल्ले भर कि खबरी लाल है, अब सभी को पता चल जायेगा कि हम अम्बुजाज़ के साथ पिकनिक कर रहें… !”
निम्मी भड़क ही रहीं थी कि लीला रसोई में चली आयी..
“मैं भी कुछ मदद कर दूँ पम्मी…वैसे तूने बना तो बहुत कुछ लिया है, वाह वाह, क्या खुशबु उठ रहीं है… !”
“नहीं… अब तो सब कुछ बन गया.. बस पैक ही कर रहीं, तू बैठ मैं तुझे चाय पिलाती हूँ… !”
“अरे अब पिकनिक में ही चाय पी जाएगी… चल तू भी फटाफट अपनी कुर्ती बदल लें… !”
हाँ में गदर्न हिलाती पम्मी भी कपड़े बदलने चली गयी…
ठीक वक्त पर श्लोक नीचे गाड़ी लिए पहुँच गया…
उसके फ़ोन पर निम्मी ने सब को फटाफट नीचे चलने को कहा और एक बार फिर खुद को आईने में झांक आई…
सारे लोग गाड़ी तक पहुंचे उतनी देर में निम्मी ने सिमरन को भी बता दिया था… साथ में जाने वाले हैं ये सुन कर सिम्मी को थोड़ा झटका सा लगा लेकिन उसे जाने क्यों इस बात का यक़ीन था कि इस तरह कि घरेलू पिकनिक में अक्षत नहीं जायेगा… !
सारे लोग गाड़ी में चढ़ कर बैठते गए… अंत में जब सिम्मी अपने लिए जगह ढूंढते हुए आगे बढ़ती गयी तो उसके सामने एक ही सीट खाली थी…
उस सीट में अकेले बैठ कर उसने सुकून से खिड़की से बाहर नज़रे घुमा ली…
अक्षत को गाड़ी में ना देख कर उसे राहत ही मिली थी…
गाड़ी स्टार्ट हुई और आगे बढ़ गयी ! उसी वक्त सिम्मी को लगा कि उसके ठीक बगल में कोई आकर बैठा है… उसने जैसे ही नज़र घुमाई उसकी ऑंखें बगल में बैठे अक्षत पर ठहर गयी… !
उसने आंखें फाड़े उसे देखा और अक्षत उसे देख कर चेहरे पर बिना कोई भाव लाये वैसे ही बैठा रहा…
“पूरी बस में और कोई सीट खाली नहीं थी, इसलिए यहाँ बैठना पड़ा… तुम्हारे साथ बैठने के लिए मरा नहीं जा रहा हूँ.. !”
अपनी बात कह कर उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया और उसकी बात सुन गुस्से में सिम्मी दूसरी तरफ देखने लगी…
श्लोक के कहने पर ड्राइवर ने गाने लगा दिये….
मय से मीना से
ना साकी से
ना पैमाने से
दिल बहलता है मेरा
आपके आ जाने से….
क्रमशः
aparna…

बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️♥️⭐⭐⭐⭐⭐