
बेसब्रियां….
दिल की… –8
सिम्मी को नहीं मालूम था कि घर पर उसके लिए एक सरप्राइज इंतज़ार कर रहा था…
वो घर पहुंची और उसके बेल बजाते ही विम्मी दरवाज़ा खोलने चली आई…
सिम्मी अंदर दाखिल हुई और हॉल में बैठे मेहमानों पर नजर पड़ते ही उसके चेहरे का सारा रंग उतर गया…
हॉल में श्लोक और उस की दोनों बहने बैठी थी…. उन लोगों ने सिम्मी को देखा और मुस्कुरा उठे.. श्लोक ने ही आगे बढ़ कर उसकी तबियत पूछ ली…
“अब कैसी तबियत है आपकी.. ?”
सिम्मी को लगा उसका झूठ पकड़ा गया है…. क्योंकि वो बीमार है और बाहर नहीं जा सकती यही बोलकर निम्मी ने श्लोक के घर जाने से मना किया था और अब सिम्मी खुद उन लोगों के बैठे में बाहर कहीं से घूम कर आ रही थी !
उनके सामने इस वक्त सिम्मी के बाहर से आने की क्या कैफियत दी जाए इसी उलझन में दोनों बहने एक दूसरे को देख रही थी…
की उसी वक्त एक बार फिर दरवाजे पर दस्तक हुई और विम्मी दरवाजा खोलने चली गई…
दरवाजा खुलते ही अक्षत राज अंदर दाखिल हो गया…
सिम्मी को वहां बैठे देख अक्षत के चेहरे पर एक टेढ़ी सी कुटिल मुस्कान आ गई…
” अरे राज कहां से आ रहा है तू इस वक्त..?”
” बस डॉक्टर अस्थाना वाली गली में गया था, कुछ काम था! वही मुझे सिम्मी जी भी नज़र आ गयी, शायद डॉक्टर को दिखाने गए होंगी, इनकी तबीयत खराब थी ना…?
अक्षत की बात सुनकर निम्मी के चेहरे पर हल्की सी राहत चली आई और वह अक्षत की बात का समर्थन करते हुए हाँ में सिर हिलाते हुए श्लोक और उसकी बहनों की तरफ देखने लगी | श्लोक की बड़ी बहन ने सिम्मी की तरफ देखा और पूछ लिया..
” डॉक्टर अस्थाना हमारे भी फैमिली डॉक्टर है…! बहुत अच्छे डॉक्टर है वो, हर एक मर्ज की दवा है उनके पास …वैसे राज तुम उस गली में क्या कर रहे थे…?”
मोहिता आसानी से हर किसी पर यकीन कर लेती थी लेकिन उसके ठीक बगल में बैठी मोहिना को सिम्मी की शक्ल देख कर इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा था कि सिम्मी की तबीयत खराब है, और वह डॉक्टर के पास गई थी !
वही सिम्मी आश्चर्य से अक्षत को देखकर यह सोचने में मगन थी कि आखिर अक्षत ने आकर यहां सबके सामने इस तरह से झूठ बोलकर उसका बचाव क्यों किया…?
” मैं जानता हूं राज वहां क्या कर रहा था | डॉक्टर साहब का क्लीनिक पहली मंजिल पर है और उसी कॉम्प्लेक्स की दूसरी मंजिल पर क्रॉसवर्ड यानी किताबों की सबसे बड़ी दुकान है…!”
श्लोक की इस बात को सुनकर सिम्मी अक्षत की तरफ देखने लगी…
” आप किताबें भी पढ़ते हैं..?” सिम्मी के सवाल पर अक्षत ने हाँ में गर्दन हिला दी..
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” मुझे पढ़ना बहुत पसंद है फिर चाहे वह इंसान हो या किताबें…. बस माफिक मिलना चाहिए !”
उन सब की हल्की फुल्की बातचीत देखकर निम्मी के मन से भी बोझ हट गया था | उसे यही डर सता रहा था कि पता नहीं ये लोग उसके झूठ को सुनकर क्या सोचेंगे | लेकिन यहां पर अक्षत ने आकर बात संभाल ली थी |
निम्मी ने सबकी नजर बचा कर चुपके से श्लोक की तरफ देखा, श्लोक निम्मी को ही देख रहा था….
इसी बीच निम्मी की मां ने रसोई से निम्मी को आवाज दी और निम्मी के अंदर जाते ही वह उसकी मदद से बाहर चाय और नाश्ते की ट्रे लेकर चली आई….
टेबल पर सजा ढेर सारा नाश्ता देखकर मोहिना मुंह बनाने लगी…
” यह तो बहुत ऑयली है और आंटी हम लोग इतना ऑयली खाना नहीं खाते…!”
मोहिना की बात सुनकर सिम्मी के चेहरे पर नाराजगी छलकने लगी | वह पलट कर कुछ जवाब देने को थी कि निम्मी ने धीरे से उसकी हथेली दबा दी….
” लेकिन मुझे ऑइली फूड पसंद है..!”
मुस्कुराते हुए यह बात कहकर श्लोक ने एक समोसा उठा लिया…
” इन फैक्ट आई लव समोसा… आंटी आपको पता है स्कूल की पढ़ाई के बाद मैं कॉलेज की पढ़ाई के लिए लगभग 4 से 5 साल यूएस में रहा हूं और वहां अपने नॉर्थ इंडियन खाने को मैंने इतना मिस किया है… इतना मिस किया कि वापस आने के बाद मैं लगभग डेढ़ से दो साल तक पिज़्ज़ा और बर्गर की तरफ देखता भी नहीं था, बल्कि अभी भी मुझे अपना देसी हिंदुस्तानी खाना ही पसंद है… !
वाह आपने समोसे बहुत टेस्टी बनाए हैं आंटी… एन्ड मोहीना अगर तुम ऑइली समझकर यह समोसे नहीं खाओगी तो आई बेट तुम एक लाजवाब चीज मिस करने वाली हो…!”
मोहिना ने श्लोक की बात का कोई जवाब नहीं दिया लेकिन श्लोक की बात मानकर उसकी बड़ी बहन ने जरूर एक समोसा उठा लिया….
अक्षत अभी बिना कुछ उठाएं चुपचाप बैठा था | श्लोक ने उसे देखकर इशारा किया तो अक्षत ने अपने हाथ धो नहीं पाने की तरफ इशारा कर दिया.. !
उन दोनों को देखती बैठी सिम्मी ने अक्षत की तरफ देखा…
” आपको अगर हाथ धोना है तो आप यहां धो सकते हैं….!”
श्लोक सिम्मी की बात का समर्थन करते हुए अक्षत को देख धीमे से मुस्कुरा दिया….
” वैसे तो इसे सब कुछ कांटे छूरी से खाने की आदत है..
लेकिन अगर कोई चीज हाथ से खानी है तो उसके पहले यह हाथ जरूर धुलता है…!”
श्लोक की बात सुनकर निम्मी मुस्कुरा उठी..-” यह तो अच्छी आदत है!”
अक्षत ने सिम्मी की तरफ देखा और सिम्मी अपनी जगह से खड़ी हो गई..
अक्षत भी सिम्मी के पीछे वाशबेसिन की तरफ बढ़ गया…
अक्षत वहां हाथ धो रहा था और सिम्मी टावल लेकर चुपचाप खड़ी थी..
” क्या जरूरत थी आपको यहां आकर झूठ बोलने की..?”
” तुम्हें बचाने के लिए झूठ नहीं बोला है..!
इस मुगालते में मत रहना कि मैं तुम्हें बचाना चाहता था !
बात बस इतनी सी थी कि मैं श्लोक का दिल नहीं तोड़ना चाहता था..!”
“मतलब… ?”
” मतलब यह कि वह आसानी से लोगों पर भरोसा कर लेता है, जैसे उसने तुम्हारी बहन के फोन पर भरोसा कर लिया कि तुम बीमार हो इसलिए तुम दोनों नहीं आ सकती.!
भरोसा किया तो किया उसे तुमसे इतनी सिम्पथी हो गई कि तुम्हें देखने यहां चला भी आया…
अब उसके इतने भरोसे के बाद जब उसे यह मालूम चलता कि तुम बीमार नहीं हो और सिर्फ अपने बॉयफ्रेंड से मिलने जाने के लिए तुमने झूठा बहाना बनाया है तो उसका दिल टूट जाता और मैं यह नहीं चाहता था…
मैंने जो भी किया सिर्फ और सिर्फ अपने दोस्त के लिए किया…!
तुम्हें इस लायक नहीं समझता कि मैं तुम्हारी मदद करूं और दूसरी बात अगर तुम्हें अपने बॉयफ्रेंड से मिलने जाना ही था तो ऐसा झूठा बहाना बनाने की जरूरत क्या थी…? सच बोल कर भी तो जा सकती थी.. ? खैर ये मेरी सोच है, और मेरी तरह ईमानदार हर कोई हो ये ज़रूरी नहीं !”
अक्षत की कड़वी बातें सुनकर सिम्मी के तन बदन में आग लग गई…
” तुमसे किसने कह दिया कि वह मेरा बॉयफ्रेंड है…? सिर्फ दोस्त भी तो हो सकता है..!”
” दोस्तों के लिए इस तरह झूठ नहीं बोलती हैं लड़कियां…
इतना तो मैं भी जानता हूं!”
अक्षत हाथ धोकर बिना सिम्मी की बात सुने वापस हॉल में चला आया….
और अपनी बात ना कह पाने के कारण सिम्मी कुढ़ कर रह गई….
अक्षत उसे गलत समझ रहा था, तेजस के साथ उसका ऐसा कोई संबंध नहीं था जैसा अक्षत ने मान लिया था | लेकिन इस जिद्दी और अड़ियल लड़के को समझाना खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा था…
उसे इस वक्त खुद पर इतनी कोफ़्त हो रहीं थी कि उसने आखिर अक्षत से कुछ भी पूछा ही क्यों.. ?
वो नरमी से पेश आने लायक लड़का ही नहीं है…|
बस सारा वक्त अपनी अमीरी के घमंड में चूर झूमता रहता है… बाकी लोग तो उसे कीट पतंगे लगते हैं…| जिन्हे अपनी मर्ज़ी के हिसाब से वो मसल कर फेंक सकता है…|
वो चुप चाप वहाँ खड़ी अपनी सोच में गुम थी कि उसकी माँ ने उसे आवाज़ लगा कर बाहर बुला लिया…
वो बाहर आ गयी…
अक्षत बिल्कुल यूं बैठा था जैसे अंदर उसकी और सिम्मी की कोई बातचीत ही नहीं हुई | अपने एक हाथ में चाय का प्याला पकड़े टेबल पर रखी सिम्मी की किताब को वह पलट कर देख रहा था….
किताब का नाम था ” प्राईड एंड प्रेज्यूडिस… “
मोहिना ने अक्षत के हाथ में किताब देखी और उसे छोड़ने लगी…
” किताबों के लिए तो राज दीवाना है… बस इसे कोई किताब मिलनी चाहिए…|
पढ़ने का तो ऐसा चक्का है कि सुबह न्यूज़पेपर पूरा पढ़ने के बाद डेथ कॉलम को भी पढ़ डालता है…”
” जिंदगी में किसी चीज का नशा होना बहुत जरूरी है… और उस नशे के साथ किसी चीज का शौक होना भी बहुत जरूरी है ! मुझे काम करने का नशा है और पढ़ने का जुनूनी शौक..
फिजूल के शौक पालने से बेहतर है कोई ढंग का शौक पालो.. वैसे यह किताब कौन पढ़ रहा था यहां..?”
अक्षत ने निम्मी की तरफ देखा और पूछ लिया…
इतनी देर से सब की बातचीत के बीच श्लोक और निम्मी लोगों की नजर बचाकर एक दूसरे को देखते भी जा रहे थे…
एकाएक अक्षत की बात सुनकर निम्मी चौंक कर उसे देखने लगे…
” यह सिम्मी की किताब है ! हमारे घर में सिर्फ और सिर्फ उसे ही पढ़ने का शौक है !”
सिम्मी की किताब है सुनते ही अक्षत को जैसे करंट सा लगा और उसने यूँ किताब को टेबल पर पटका जैसे उस किताब में लगे कांटे उसे चुभने लगे थे …..
उसने चुपचाप किताब टेबल पर वापस रख दी !
सिम्मी ने ज़रूर इस बात को नोटिस कर लिया लेकिन बिना किसी प्रतिक्रिया के चुप बैठी रहीं…
” तो फिर आंटी तय रहा, कल की पिकनिक पक्की..!”
मोहिता के ऐसा पूछते ही निम्मी की मां मुस्कुराकर हां बोल गई…
और सिम्मी पिकनिक प्लान से अनजान अपनी माँ के द्वारा इस बेहूदा प्रस्ताव को मान लिए जाने पर उन्हें घूरने लगी…
क्रमशः
aparna…

लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💐💐💐